Home » Latest » किसान सभा ने, पूछा : सरगुजा प्रशासन को सरकार चला रही है या कॉर्पोरेट दलाल?
Chhattisgarh Kisan Sabha members fasted

किसान सभा ने, पूछा : सरगुजा प्रशासन को सरकार चला रही है या कॉर्पोरेट दलाल?

एलुमिना प्लांट परियोजना को वापस लेने की मांग की

Alumina plant project to be withdrawn

सरगुजा की जन सुनवाई पर किसान सभा की प्रतिक्रिया,

रायपुर, 13 अप्रैल 2021. छत्तीसगढ़ किसान सभा (छत्तीसगढ़ किसान सभा) ने सरगुजा जिले के बतौली विकासखंड के गांव चिरंगा में एलुमिना प्लांट के निर्माण के लिए आयोजित जन सुनवाई में ग्रामीणों के आक्रोश के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया है तथा कहा है कि सरगुजा जिला प्रशासन कॉरपोरेटों के दलाल की तरह काम कर रहा है।

आज जारी एक के बयान में छग किसान सभा के राज्य अध्यक्ष संजय पराते तथा महासचिव ऋषि गुप्ता ने कहा है कि जब पूरे प्रदेश में कोरोना महामारी को नियंत्रित करने के लिए धारा-144 व कर्फ्यू का उपयोग किया जा रहा है, प्रदेश के 20 से ज्यादा जिलों में लॉक डाऊन है, ऐसी स्थिति में सरगुजा जिले में लॉक डाऊन होने के एक दिन पहले जन सुनवाई की इजाज़त कैसे दी गई थी? इस मामले में स्वास्थ्य मंत्री टी एस सिंहदेव और खाद्य मंत्री अमरजीत भगत की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कांग्रेस सरकार से सीधा सवाल पूछा है कि क्या सरगुजा जिला प्रशासन कांग्रेस सरकार के नियंत्रण में है या फिर उसे कॉरपोरेट संचालित कर रहे हैं?

जन सुनवाई के नाम पर दिखावा किये जाने के सरकार के मंसूबों को विफल करने और अपनी जमीन छीने जाने के खिलाफ ग्रामीणों द्वारा तीखा प्रतिरोध दर्ज किए जाने का स्वागत करते हुए किसान सभा नेताओं ने इस परियोजना को रद्द किए जाने की मांग की है।

उन्होंने प्लांट से 1276 लोगों को रोजगार मिलने के दावे पर भी प्रश्न चिन्ह लगाते हुए कहा है कि बॉक्साइट खनन और प्लांट से इस क्षेत्र के बीसियों गांव प्रभावित होंगे तथा पर्यावरण संकट और गहरा होगा।

किसान सभा नेताओं ने आरोप लगाया है कि सरकार कोरोना महामारी की आपदा को कॉर्पोरेट हितों को आगे बढ़ाने के अवसर के रूप में देख रही है। इसीलिए कोरोना संकट के प्रति यह सरकार न तो गंभीर है और न ईमानदार। एक ओर तो वह हर जायज आंदोलन को कुचलने के लिये कोविड-19 के प्रोटोकॉल का सहारा ले रही है, लेकिन कॉरपोरेटों को 211 एकड़ जमीन सौंपने के लिए जन सुनवाई करने और भीड़ इकट्ठी करने से उसे कोई परहेज नहीं है।

पाठकों से अपील

“हस्तक्षेप” जन सुनवाई का मंच है जहां मेहनतकश अवाम की हर चीख दर्ज करनी है। जहां मानवाधिकार और नागरिक अधिकार के मुद्दे हैं तो प्रकृति, पर्यावरण, मौसम और जलवायु के मुद्दे भी हैं। ये यात्रा जारी रहे इसके लिए मदद करें। 9312873760 नंबर पर पेटीएम करें या नीचे दिए लिंक पर क्लिक करके ऑनलाइन भुगतान करें

 

हमारे बारे में उपाध्याय अमलेन्दु

Check Also

political prisoner

“जय भीम” : जनसंघर्षों से ध्यान भटकाने का एक प्रयास

“जय भीम” फ़िल्म देख कर कम्युनिस्ट लोट-पोट क्यों हो रहे हैं? “जय भीम” फ़िल्म आजकल …

Leave a Reply