फेफड़े से नहीं ये जीव चमड़ी से सांस लेते हैं

श्वसन के लिए फेफड़ों के न होने का मतलब होगा कि उन जंतुओं की साइज सीमित रह जाएगी और जीवन शैली में गतिशीलता कम हो जाएगी। मगर सेलेमेंडर के इस समूह (घलेथोडोन्टिडी) की 448 प्रजातियों में ऐसा नहीं हुआ।

उभयचर जीव फेफड़े की बजाए चमड़ी से सांस लेते हैं

Amphibian organisms breathe through the skin instead of the lungs

बिना फेफड़े वाले जन्तु | जंतुओं में श्वसन अंग | कौन सा जीव सांस लेने के लिए अपनी त्वचा का प्रयोग करता है

भूमि पर रहने वाले लगभग सारे चौपाए प्राणियों को जिन्दा रहने के लिए फेफड़ों की जरूरत होती है। मगर सेलेमेंडरों का एक बड़ा समूह (A large group of Salamanders) इसका अपवाद है।

The skin of these animals is capable of exchanging gases.

अब शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि कैसे ये उभयचर जीव फेफड़े की बजाय चमड़ी से सांस लेने लगे।

फेफड़ों से संबंधित एक जीन की एक प्रतिलिपि किसी समय सरककर उस जगह पहुंच गई जहां आज वह सक्रिय है। इस स्थानांतरण की वजह से इन जंतुओं में चमड़ी वह कार्य करने लगी जो फेफड़े करते हैं यानी सांस लेने लगी। कहने का मतलब है कि इन जंतुओं की चमड़ी गैसों का आदान-प्रदान करने में सक्षम है।

The disappearance of lungs is considered a major event in terms of bio-development.

हार्वर्ड विश्वविद्यालय के  जेड. आर. लुइस और उनके साथियों ने इस अनुसंधान का विवरण वर्ष 2016 में सोसायटी फॉर इंटीग्रेटिव एंड कम्पेरेटिव बायोलॉजी (society for integrative and comparative biology 2016) की वार्षिक बैठक में प्रस्तुत किया। फेफड़ों का गायब हो जाना जैव विकास की दृष्टि से प्रमुख घटना मानी जाती है।

श्वसन के लिए फेफड़ों के न होने का मतलब होगा कि उन जंतुओं की साइज सीमित रह जाएगी और जीवन शैली में गतिशीलता कम हो जाएगी। मगर सेलेमेंडर के इस समूह (घलेथोडोन्टिडी) की 448 प्रजातियों में ऐसा नहीं हुआ।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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