अंजना ओम कश्यप की शाहीन बाग की रिपोर्ट : अच्छी बात, पर आगे क्या करेंगीं ?

अंजना ओम कश्यप की शाहीन बाग की रिपोर्ट पर

Anjana Om kashyap’s Shaheen Bagh report

रचना में व्यक्त यथार्थ कैसे लेखक के विचारों का अतिक्रमण करके अपने स्वतंत्र  सत्य को प्रेषित करने लगता है, अंजना ओम कश्यप की शाहीन बाग की रिपोर्टिंग (Anjana Om Kashyap’s reporting of Shaheen Bagh) से फिर एक बार यह सच सामने आया।

वैसे रचना और लेखक के बीच के द्वंद्वात्मक रिश्तों की समझ के अनुसार मामला यथार्थ की स्वतंत्र शक्ति की अभिव्यक्ति तक ही सीमित नहीं रहता है, इस उपक्रम में यथार्थ पाठकों के साथ ही रचनाकार को स्वयं को भी प्रभावित और परिवर्तित करता जाता है, उसे जगह-जगह से काटता, छीलता, अर्थात् तराशता जाता है।

Arun Maheshwari – अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

अंजना ओम कश्यप के मामले में देखने की बात यही रहेगी कि आगे वे अपनी रिपोर्टिंग में सत्य को इसी प्रकार स्वतंत्र रूप में बोलने देती रहेगी और उसी क्रम में खुद भी कुछ सीखेंगी, अथवा अपनी पत्रकारिता पर राजनीतिक प्रतिबद्धता को तरजीह देकर अपने को तराशने और विकसित करने के इस कठिन रास्ते को छोड़ कर संघ के प्रचार के सत्ता द्वारा संरक्षित आरामदेह काम में लौट जायेंगी।

अरुण माहेश्वरी

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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