इन साइड एज़ – आत्मा की आवाज

Inside Edge

इन साइड एज़ – आत्मा की आवाज

Article on cast based discrimination and education

देखो, ये जो सब नाटक चल रहा है ना जात-पात का, धरम का, ये हम नहीं शुरू किए हैं, हम पले-बढ़े हैं इसमें, जो सीखे हैं वही कर रहे हैं। किससे मांगे माफी, भगवान से मांगें। ब्राह्मण हैं हम, ब्राह्मण ही भगवान का रूप होता है, ऐसा ही तो कहते हैं सब।

उपरोक्त डायलॉग एक वेब सीरीज का है। जिसके बारे में मैं आगे बता रहा हूँ पर जब कभी हम अपनी समझ बनाते हुए किसी भी ऐसे परिस्थिति से जूझते हैं, जो हमारी स्थापित मान्यताओं को खास कर जाति या धर्म की हो तो हमारे मन में भी उपरोक्त पंक्तियाँ एक बार जरूर गूँजती हैं।

इन पंक्तियों ने बहुत कुछ सोचने पर मजबूर किया है और स्वीकार करने के लिए भी कि हाँ हमारे जीवन में भी कुछ ना कुछ ऐसा होता ही है जब हम महसूस करते हैं, हम भी उसी समाज का हिस्सा हैं जो आज भी जात-पात, ऊँच-नीच मे फंसा हुआ है ।

वेब सीरीज इनसाइड एजकी कहानी | Story of web series ‘Inside Edge’

पिछले दिनों अमेज़न प्राइम वीडियो पर एक वेब सिरीज़ इन साइड एजदेखी। वैसे तो यह इस वेब सीरीज का दूसरा संस्करण है एवं मैंने पहला संस्करण भी देखा था। इस  सीरीज़ की कहानी मूलतः क्लब क्रिकेट पर आधारित है।

कहानी मुख्यतः 2 टीमों की इर्द-गिर्द बुनी गयी है। कहानी की शुरुआत में खेल की चकाचौंध, पैसा, लोगों का खेल एवं खिलाड़ियों के लिए प्रेम दिखाया गया है। कहानी आगे बढ़ती है और खेल के पीछे के स्याह पक्ष खुलने शुरू होते हैं। खिलाड़ियों की नशे एवं अय्याशी की आदतें, मैच फिक्सिंग के मामले, चीयर लीडर एवं खिलाड़ियों के बीच संबंध जैसी कई बातों के बीच से कहानी गुजरती है।

मैं मुख्यतः इस दूसरे संस्करण के 9 वें एपिसोड के विषय में बात करना चाह रहा हूँ, इसमें हुए एक दृश्य ने मुझे खासा प्रभावित किया। इस फ़िल्म में दो किरदार हैं जिनके बीच का यह दृश्य काफी गहरी चर्चा को जन्म देता है। यह दोनों किरदार अलग-अलग टीमों के बॉलर हैं। एक हैं पांडे जी जो कि स्पिनर हैं एवम दूसरे हैं लखेरिया जो कि एक फ़ास्ट बॉलर हैं।

ये दोनों ही खिलाड़ी एक ही कस्बे से आते हैं। पांडे एक फेमस खिलाड़ी हैं और अपने गांव के जमींदार परिवार की पृष्ठभूमि से हैं। जब कि लखेरिया उन्हीं के गांव के एक धोबी के बेटे हैं, किंतु प्रतिभावान क्रिकेटर हैं।

ये दोनों ही खिलाड़ी पहले संस्करण में एक ही टीम का हिस्सा थे। जब पहली बार लखेरिया टीम में आता है तो बहुत उत्साह के साथ पांडे जी से मिलता है और बताता है कि मैं आपको ही आदर्श मान कर खेलता रहा और आज आपके साथ खेलने का अवसर मिलने वाला है।

इस बात पर पांडे अकेले में ले जाकर लखेरिया को बहुत डराते हैं और बहुत ही भला-बुरा कहते हैं कि तुम्हारी औकात कैसे हो गयी हमे छूने की, गांव में तुम लोग हमारे घर की सीढ़ी भी नहीं चढ़ सकते आज तुम्हारी इतनी हिम्मत हो गयी। इसी तरह दोनों खिलाड़ियों के बीच दुर्भावना इतनी बढ़ जाती है कि पहले संस्करण के अंत में लखेरिया पांडे जी को गोली मार देता है।

दूसरे संस्करण के 9वें एपिसोड की कुछ बाते मेरे या हमारे देश के प्रमुख सरोकार की हैं अर्थात शिक्षा के प्रमुख उद्देश्यों में से एक।

इस एपिसोड की शुरुआत में लखेरिया और पांडे का झगड़ा एक पब में होता है और पांडे गुस्से में लखेरिया के सर पर बॉटल मार देते हैं, इस प्रकरण में दोनों को पुलिस पकड़ कर लॉकअप में बंद कर देती है। उसी लॉकअप में कुछ अंग्रेजों को भी बंद कर दिया जाता है एवं किसी बात पर उन अंग्रेजों का पांडे से विवाद हो जाता है एवं उनकी भी मार-पीट होने लगती है। इसी बीच लखेरिया, पांडे जी को बचाने के लिए अंग्रेजों से लड़ जाता है। बाद में पुलिस आ कर बीच-बचाव करती है।

इसके बाद लखेरिया एवं पांडे  के बीच का लगभग 10 मिनट का संवाद बहुत ही प्रभावित करने वाला है।

पांडे, लखेरिया से कहते हैं कि “मैं हमेशा से ही तुम्हारा अपमान जाति के आधार पर करता रहा परंतु मुझे कभी गलत महसूस नहीं होता था क्यों कि मेरी परवरिश ही इसी तरह से हुई, घर वालों ने हमेशा ही यह बताया कि तुम ब्राह्मण हो एवं अन्य सभी जाति के लोग तुमसे कमतर हैं। क्या किया जाए जब कोई इसी तरह से बड़ा हुआ हो कि उसे लगे कि भगवान जो कहते हैं वही सही है और ब्राह्मण ही तो है भगवान।”

साथ ही पांडे अपने बचपन को याद करते हुए बताता है कि मेरा एक खास दोस्त था जो मेरे लिए मेरे भाई से भी बढ़कर हुआ करता था। एक बार जब मैंने अपने उस दोस्त का परिचय अपने पिताजी से करवाया तो पिताजी ने बिना कारण बताए ही मेरे घर पहुँचते ही मेरी पिटाई कर दी थी। बाद में समझ आया कि मेरी पिटाई दोस्त की जाति की वजह से हुई थी ना कि किसी गलती की वजह से ।

इस घटनाक्रम से पांडे के मन में तथाकथित नीची जातियों के लिए एक नफरत की भावना उत्पन्न हो गयी थी एवं पांडे यह मानने लगता है कि नीची जातियों के लोगों के साथ किसी भी तरह से दोस्ती नहीं रखी जाना चाहिए ।

इसी संवाद के अंत मे रूपक के रूप में पांडे जी अपनी जनेऊ तोड़ते हुए खेरावत के हाथ से पानी की बोतल लेकर पानी पी लेता है।

उपरोक्त संवाद से हम यह समझ सकते हैं कि जाति, धर्म की समझ व्यक्ति की मान्यताओं पर निर्भर है एवं यह मान्यताएं परिवार, समाज व शिक्षा पर निर्भर रहती हैं। यदि किसी भी व्यक्ति के जीवन के शुरुआती समय में ही जाति-धर्म को लेकर कटुता घोल दी जाए तो आजीवन उस व्यक्ति के व्यवहार में भी यही कड़वाहट नजर आती है। यहाँ शिक्षा का अहम रोल नजर आता है। शिक्षा एक ऐसा टूल हो सकता है जो इस तरह के विभेदों को दूर करने का काम कर सकता है किन्तु इस हथियार का सही उपयोग ना हो तो यह इस खाई को बड़ा भी सकता है।

अनूप दुबे

लेखक वर्तमान में शिक्षा के क्षेत्र में अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन, उत्तरकाशी, उत्तराखंड मे कार्यरत हैं।

 Note – Inside Edge is an Indian sports-drama web television series created by Karan Anshuman and released on Prime Video. It premiered on 10 July 2017, and is the first Hindi-language series distributed by Amazon Originals.

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