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अपने कलंकित इतिहास को छिपाने के लिए संघियों की सरकार जलियांवाला बाग नर-संहार के काले धब्बे मिटा रही

किसके इशारे पर जलियांवाला बाग नरसंहार के सबूत मिटाए जा रहे हैं?

 At whose behest is the evidence of the Jallianwala Bagh massacre being destroyed?

स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को मिटाने की भाजपा की साजिश ?

अंग्रेजों की गुलामी के आगे सदैव नतमस्त रही संघी बिरादरी आज तक गांधी-नेहरू को पानी पी-पीकर गालियां देती रही है लेकिन उसने अपने गौरांग महाप्रभुओं के विरुद्ध कभी भी एक शब्द तक नहीं कहा। अपनी करनी के लिए पशचाताप करते हुए 11 बार अंग्रेजों से माफी मांगकर जेल से बाहर आया विनायक दामोदर सावरकर इनका वीर नायक है।

अपने कलंकित इतिहास को छिपाने के लिए तरह-तरह के उपाय करने वाले संघियों की यह सरकार अब जलियांवाला बाग जैसे भीषण नर-संहार के काले धब्बे मिटा रही है। जिसके तहत इस पवित्र स्मारक में दर्ज अंग्रेज हत्यारे जनरल डायर की क्रूरता के प्रत्यक्ष प्रमाण इसकी दीवारों पर मौजूद गोलियों के निशान भरे जा रहे हैं।

देश की आजादी के लिए मर मिटने वाले अमर सेनानियों की इस पवित्र धरोहर और देश की आजादी के उस जीवंत साक्ष्य के यथावत बने रहने से इन्हें क्यों आपत्ति है? उन सबूतों से किसे भय लगता है या शर्म महसूस होती है? आखिरकार मोदी सरकार किसके इशारे पर इन ऐतिहासिक सबूतों को मिटा रही है

दीवारों पर गोलियों के निशान क्यों भरे जा रहे हैं? क्या कारण है कि अग्रेजों और डायर के वहां दर्ज काले कारनामों को छिपाया जा रहा है?

देश के स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास को मिटाने की इस साजिश के पीछे आखिर क्या मकसद है?

मोदी सरकार की इस घटिया और धूर्ततापूर्ण हरक़त पर कांग्रेस व समूचा विपक्ष क्यों चुप बैठकर तमाशा देख रहा है?

जलियांवाला बाग जैसे राष्ट्रीय तीर्थस्थल के इस बदले जा रहे चित्र को देखने से क्या आपको तकलीफ नहीं होती कि जिनके बलिदान से आज आप आजादी का आनंद मना रहे हैं, उनकी उस कुर्बानी को मिटाने की साजिश रची जा रही है?

क्या देश का यह पवित्र स्मारक कोई पिकनिक स्पॉट है जिसे इस तरह रंगारंग कार्यक्रम के लिए बदल दिया जा रहा है?

श्याम सिंह रावत

लेखक वरिष्ठ पत्रकार व स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

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