बागबान की याद दिलाती है ‘औलाद रो रंग’

बागबान की याद दिलाती है ‘औलाद रो रंग’

ऐसो ही संसार है औलाद रो रंगजिसो

क्या आपने अमिताभ बच्चन की फिल्म बागबान देखी है?

बागबानफिल्म तो आप सभी फिल्में देखने वालों को याद ही होगी। जिसने उस फिल्म को थियेटर्स में नहीं देखा उन्होंने टीवी पर देखा होगा। वहां भी नहीं तो यूट्यूब पर ही सही। शायद ही फिल्में देखने वाले लोग अमिताभ बच्चन की इस फिल्म के बारे में न जानते हों।

स्टेज एप्प पर रिलीज हुई औलाद रो रंग

बस स्टेज एप्प पर आई फिल्म औलाद रो रंगउसी बागबान की याद दिला जाती है। कथ्य के आधार पर थोड़ी भिन्न, पृष्ठभूमि के आधार पर थोड़ी भिन्न होने के बावजूद इसका टाइटल सॉन्ग तो बरबस याद दिलाता ही है।

दिल को छूती हैऔलाद रो रंग की कहानी

गांव से पढ़ लिखकर आगे शहर में पढ़ कर नौकरी कर रहे लड़के के घर में पहले से सौ तकलीफें हैं। ऐसे में उसके मां बाप की इच्छा हुई की बेटे, बहू और पोते को देख आए कुछ दिन के लिए। अब क्या होगा उन बेटे-बहू का हाल। इधर मां बाप गए तो थे बड़े से सपने लेकर लेकिन लौटे तो खाली हाथ, निराश। साथ ही ढेर सारे दुःख।

फिल्म की कहानी दिल को छूती है, भाती है, आपको रुलाती है, आंखें नम करती रहती इस फिल्म के लगभग हर सीन आखिर में कुछ अलग भी दिखाते हैं। इसके लिए तो आपको फिल्म देखनी होगी।

क्षेत्रीय सिनेमा के नाम पर भला करने के इरादे से चले स्टेज एप्प ओटीटी प्लेटफार्म के राजस्थानी भाषा कॉलम में दर्ज इस फिल्म को देखते हुए यह महसूस होता है कि काश इसे कुछ पहले बड़े फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाया जाता। काश इन लोगों को और मजबूत टीम मिली होती तो ये इसे और सुंदर बना सकते थे।

निर्देशन के मामले में कुछ जगह चूकती हुई इस फिल्म में दो सीन अखरते हैं बस। पहला तो तब जब मां बाप शहर आकर लड़के के घर में दाखिल होने के लिए किसी से घर का पता पूछते हैं तो वो उन्हें लिफ्ट के सहारे चौथे माले का बटन दबाकर भेज देता है ऊपर।

फिर अगले एक सीन में बाप कहता नजर आता है सातवीं मंजिल के बारे में फ्लैट नंबर 705 के बारे में। जब फ्लैट उनका चौथे माले पर था तो वे सातवें पर क्यों बैठे हैं? या सातवें पर था तो चौथे माले पर लिफ्ट से बाहर क्यों निकलते दिखे?

खैर ऐसी ही कुछ कैमरे की कुछ एक गलतियां भी इस फिल्म को नजर अंदाज तो नहीं करवा सकती।

तुलसी के महत्व की बात करती हुई, रामायण के बहाने से शहरों के कारोबार और गांवों की संस्कृति की बातें जो यह फिल्म दिखाती है वह महत्वपूर्ण हो जाती है।

स्टेज के लिए काम कर रहे राजस्थानी भाषा की फिल्मों को लेकर लोग सार्थक और कुछ समाज को देने वाली ऐसी कहानी कहेंगे या कुछ लीक से हटकर कहानियां कहें तो बेहतर होगा।

राजस्थानी सिनेमा के इतिहास में स्टेज एप्प एक क्रांति

वैसे स्टेज एप्प के माध्यम से राजस्थानी सिनेमा के इतिहास में एक क्रांति अवश्य होने जा रही है। वेब सीरीज के माध्यम से, पहली बार राजस्थानी भाषा में कुछ देखने मिलेगा।

खैर औलाद रो रंगमें एक्टर्स तमाम अपना काम फिल्म के मुताबिक करते नजर आते हैं। निर्देशन कुलमिलाकर ठीक है। वहीं एडिटिंग काबिले गौर है तो इसका एकमात्र गाना आंखें नम करता है। बी जी एम, साउंड, म्यूजिक के मामले में ठीक रही इस फिल्म को देख लेना सार्थक होगा।

अपनी रेटिंग – 3.5 स्टार

Aulaad Ro Rang | Rajasthani Film

निर्देशक : अनिल सैनी

कलाकार : Prince Gangli, दीपक गुप्ता, राजन पुरी, संध्या पटेल, राजवीर गुर्जर बस्सी, अंजली शर्मा

तेजस पूनियां

‘Aulaad Ro Rang’ reminds me of Baghban

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