सरकार द्वारा लोकसभा में पारित तीनों कृषि विधेयक घोर किसान व गरीब विरोधी – डॉ. राकेश सिंह राना

Dr. Rakesh Singh Rana, former MLC of Samajwadi Party and former President of Lucknow University Students Union

All the three agricultural bills passed in the Lok Sabha by the government are anti extremely farmers and anti poor – Dr. Rakesh Singh Rana हाथरस, 19 सितंबर 2020. समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी व लखनऊ विश्वविद्यालय छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष डॉ. राकेश सिंह राना (Dr. Rakesh Singh Rana, former MLC of Samajwadi Party

किसान विरोधी हैं तीनों नए कानून, जानिए किसान कृषि विधेयकों से नाखुश क्यों हैं

All three new laws are anti-farmer हाल ही में, हरियाणा में किसानों के एक आंदोलन पर पुलिस द्वारा बर्बर लाठी चार्ज (Barbaric lathi charge by police on a farmers agitation in Haryana) किया गया है। किसान, सरकार द्वारा पारित तीन नए अध्यादेशों या कानून का विरोध कर रहे थे। किसानों से जुड़े तीनो नए कानून

बिजली संशोधन विधेयक 2020 से आपकी जिंदगी में क्या होंगे बदलाव? समझा रहे हैं इं. दुर्गा प्रसाद कैसे ₹1700 का बिल हो जाएगा 23,963 रुपये का

इं. दुर्गा प्रसाद En. Durga Prasad उपाध्यक्ष, उ0प्र0वर्कर्स फ्रंट, अधिशासी अभियंता (सेवानिवृत्त), उ.प्र. पावर कारपोरेशन लिमिटेड, आगरा।

बिजली संशोधन विधेयक 2020 से आपकी जिंदगी में क्या होंगे बदलाव? समझा रहे हैं इंजीनियर दुर्गा प्रसाद कैसे ₹1700 का बिल हो जाएगा 23,963 रुपये का What will be the changes in your life with the Electricity Amendment Bill 2020? How will get a bill of ₹ 1700 for ₹ 23,963, Explaining engineer Durga Prasad 

लॉकडाउन क्यों गलत नीति है – स्वीडिश महामारीविद् व चिंतक जोहान गिसेके की टिप्पणी

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स्वीडिश महामारीविद् व  चिंतक जोहान गिसेके की टिप्पणी “एक अदृश्य वैश्विक महामारी” The invisible pandemic by Johan Giesecke in Hindi Why lockdowns are the wrong policy – Swedish expert Prof. Johan Giesecke [स्वीडन के महान महामारीविद् व  चिंतक जोहान गिसेके (Johan Giesecke Coronavirus) और उनके सहयोगी एंडर्स टेगनेल कोरोना-विजय के अप्रतिम नायक के रूप में

कोविड ने दिया ऊर्जा रूपांतरण के जरिये हरित अर्थव्‍यवस्‍था बनाने का सुनहरा मौका : विशेषज्ञ

Environment and climate change

COVID gave a golden opportunity to build a green economy through energy conversion Green economy means sustainable employment with growth दुनिया भर में पिछले कई महीनों से कोविड-19 महामारी (COVID-19) ने पूरे विश्व को अस्थिर सा कर दिया है इससे दुनिया एक वैश्विक महामंदी के दौर की तरफ बढ़ रही है इसे रोकने के लिए

अपने बुने जाल में फंस गई मोदी सरकार, कृषि विरोधी अध्यादेशों के खिलाफ किसानों का देशव्यापी प्रतिरोध आंदोलन 25 को

Kisan Sabha

Farmers nationwide resistance movement against 25 anti-agricultural ordinances on 25 रायपुर, 18 सितंबर 2020. कृषि संबंधी तीन अध्यादेशों को इस संसद सत्र में कानून का रूप दिया जा रहा है। अखिल भारतीय किसान संघर्ष समिति ने इन अध्यादेशों को कृषि विरोधी बताते हुए 25 सितम्बर को देशव्यापी प्रतिरोध आंदोलन का आह्वान किया है। यह जानकारी

सवाल आपके जवाब संतोष आनन्द के

Santosh Anand Live

सवाल आपके जवाब संतोष आनन्द के “एक प्यार का नग्मा है, मौजों की रवानी है, ज़िंदगी और कुछ भी नहीं, तेरी मेरी कहानी है”, ये सदाबहार रोमांटिक गीत आप भी गुनगुनाते ही होंगे, लेकिन क्या आपको इस गीत के लेखक से रू-ब-रू होने का अवसर मिले तो क्या आप इसे छोड़ना चाहेंगे ? नहीं न

डॉ. राम पुनियानी का लेख : काशी मथुरा-मंदिर की राजनीति की वापसी

Dr. Ram Puniyani - राम पुनियानी

Kashi- Mathura: Will Temple Politics be Revived? Ram Puniyani | राम पुनियानी दिनदहाड़े बाबरी मस्जिद ध्वस्त किए जाते समय एक नारा बार-बार लगाया जा रहा था “यह तो केवल झांकी है, काशी मथुरा बाकी है”. सर्वोच्च न्यायालय ने बाबरी मस्जिद की भूमि उन्हीं लोगों को सौंपते हुए जिन्होंने उसे ध्वस्त किया था, यह कहा था

कहीं भाजपा को उल्टा तो नहीं पड़ेगा सुशांत सिंह का दांव? 

Sushant Singh Rajput

Sushant Singh Rajput’s suicide आज की राजनीति (Today’s politics) इतनी अमानवीय है कि अपनी राजनीतिक महात्वाकांक्षाओं के लिए किसी को भी बलिवेदी पर चढा सकती है। इस दौर का गिरोह झूठ को सच और सच को झूठ बनाने व उसे प्रचारित करने के लिए पूरा तंत्र सुसज्जित कर के पहले भक्तों को और फिर देश

काजल की कोठरी : छतीसगढ़ में कोयला खदानों की लिस्ट बदली, लेकिन स्थिति जस की तस

Coal

Kajal cell: List of coal mines changed in Chhattisgarh, but the situation remains the same नई दिल्ली, 18 सितंबर 2020.  कोयले का खनन (Coal mining) काजल की कोठरी में जाने से कम नहीं। कुछ ऐसी ही स्थिति छतीसगढ़ में हो रही है। दरअसल जैव विविधता और पर्यावरण संरक्षण के नाम पर सरकार ने वहां खनन