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पलाश विश्वास

पलाश विश्वास। लेखक वरिष्ठ पत्रकार, सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलनकर्मी हैं । आजीवन संघर्षरत रहना और दुर्बलतम की आवाज बनना ही पलाश विश्वास का परिचय है। एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग पलाश जी हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

पुलिन बाबू : एक जनप्रतिबद्ध यायावर की आधी अधूरी कथा

Biography of Pulin Babu

पुलिन बाबू की जीवनी (Biography of Pulin Babu in Hindi) Pulin Babu: Half-Unfinished Story of a People’s Committed Yayavar पुलिन बाबू मेरे पिता का नाम है। उनके जीते जी मैं उन्हें कभी नहीं समझ सका। उनके देहांत के बाद जिनके लिए वे तजिंदगी जीते रहे, खुद उनके हक-हकूक के लिए देशभर के शरणार्थी आंदोलनों से उलझ जाने की वजह से …

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सबकी खबर ले, सबकी खबर दे वाला जनसत्ता अपने ही पत्रकार की मृत्यु की खबर न दे पाया

press freedom

प्रताप सिंह जी ने व्हाट्सएप पर सतीश पेडणेकर के निधन की खबर (news of the death of Satish Pednekar) दी। हम 1980 से 2016 तक लगातार अखबार का संस्करण निकलते रहे हैं। यह बहुत चुनौतीपूर्ण काम है और इसकी जवाबदेही बड़ी होती है। अखबार कितना ही अच्छा निकले, उसकी तारीफ हो या न हो, कहीं कोई चूक हो जाती है …

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वन बीवी, सुंदरवन और वन भोजन

Worship of wan Biwi (वन बीवी की पूजा)

प्रकृति, पर्यावरण और जैव विविधता का आंचल है सुंदरवन (Sundarbans is the zenith of nature, environment and biodiversity) बांग्लादेश और भारत में बंगाल की खाड़ी के समुद्र तट (Beaches of the Bay of Bengal in Bangladesh and India) मैंग्रोव फॉरेस्ट सुंदरवन का इलाका (Mangrove Forest area of Sundarbans) है। असंख्य नदियों और असंख्य द्वीपों से बने सुंदरवन प्रकृति और पर्यावरण, …

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हमारा बचपन ढिबरी और लालटेन की रोशनी में बीता है और आपका?

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

विश्व साहित्य, बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी की पत्र पत्रिकाओं, रवींद्र, शारत, बंकिम, माइकल के साहित्य, गोर्की की मां, पर्ल बक की गुड अर्थ, हेमिंग्वे की द ओल्डमैन एंड द सी, विक्टर ह्यूगो की हंचबैक ऑफ नॉस्टरडम से लेकर प्रेमचंद, अमृतलाल नागर, तारा शंकर बंदोपाध्याय, समरेश बसु, निराला, मुक्तिबोध, शैलेश मटीयानी, अमृता प्रीतम सभी इसी मद्धिम सी रोशनी में समाहित है। …

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अशोक भौमिक : प्रसिद्ध चित्रकार और चित्रकला के इतिहासकार

book review

Ashok Bhowmik: Famous painter and historian of painting अशोक भौमिक देश के प्रसिद्ध चित्रकार हैं और चित्रकला के इतिहासकार भी। यह उनकी सदाशयता है कि हम जैसे मामूली इंसान भी उनके दोस्तों में शामिल हैं। अशोक भौमिक का स्तंभ ‘चित्रकला और मनुष्य’ अपनी पत्रिका में उनका स्तंभ चित्रकला और मनुष्य हम नियमित छाप नहीं सकते, फिर भी दशकों की मित्रता …

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जानिए मैं पितृसत्ता के खिलाफ क्यों हूं?

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

Why am I against patriarchy? मैं पितृसत्ता के खिलाफ हूं – एक हजारों सालों की स्मृतियां, लोक छवियां – दासता, वंचना, अस्पृश्यता, विद्रोह, पराजय, दमन, उत्पीड़न और आपदाओं, महामारियों, प्रतिरोध और स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियां और लोक छवियां मेरे भीतर गहरे समुंदर की गहराइयों में दफन अनंत ज्वालामुखियों, असंख्य सूर्यों के भीतर दहकती सौर्य आंधियों की तरह दहकती हैं। संक्षेप …

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देश का भूगोल बहुत छोटा हो गया है क्योंकि आपको विकास चाहिये

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

The geography of the country has become very small because you want development. वरिष्ठ पत्रकार और हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार पलाश विश्वास की यह टिप्पणी (This comment of Palash Vishwas) आज से पाँच वर्ष पूर्व 17 मार्च 2017 को लिखी गई थी। आज पाँच वर्ष बाद जब पाँच राज्यों के विधानसभा चुनाव के परिणाम (Results of assembly elections of five …

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बोलियों का साहित्य कहाँ गायब हो गया?

literature and culture

Where did the literature of dialects disappear? बांग्ला में दो तरह की भाषा प्रचलित रही है। बंकिम चंद्र की तत्सम संस्कृतमुखी बांग्ला (Bankim Chandra’s Tatsam Sanskritmukhi Bangla) और जनभाषा, जो लोग बोलते हैं। बांग्लादेश का समूचा साहित्य लोक संस्कृति में रचे बसे जनपदों की बोलियां हैं। जैसे हम हिंदी के संत साहित्य में पाते हैं। बृज भाषा, अवधी, मैथिली, बुंदेलखंडी …

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क्या यूक्रेन में वियतनाम युद्ध जैसे हालात बनते जा रहे हैं?

what is the real reason behind russia ukraine dispute

Russia reiterates mistake of sending Soviet troops to Afghanistan जैसी आशंका थी, युद्ध जल्दी खत्म नहीं हो रहा। रूस ने अफगानिस्तान में सोवियत सेना भेजने की गलती दोहराई है। यूक्रेन हमेशा आजादी की लड़ाई लड़ता रहा है। सोवियत संघ में वह था, लेकिन रूसी वर्चस्व को उसने जार के साम्राज्य में भी बर्दाश्त नहीं किया। बहरहाल रूस एक patrotic महायुद्ध …

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द्वितीय विश्व युद्ध : भारत में एक भी बम नहीं गिरा, लेकिन लाखों लोग मारे गए

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

World War II: Not a single bomb dropped in India, but millions of people died द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान भारत में एक भी बम विस्फोट नहीं हुआ था। हालांकि जापानी लड़ाकू विमान कोलकाता के आसमान में नजर आए। लेकिन बंगाल के भीषण अकाल में लाखों लोग मारे गए, अनाज की कमी के कारण नहीं बल्कि लोगों को भूखा रहना …

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हर पल चलती फिरती लाशों से टकरा रहे हैं, यह संवादहीनता का दौर है

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

डॉ सुनील हालदार दो बार विधानसभा चुनाव लड़ चुके। उत्तर प्रदेश काल में हल्द्वानी से 50 हजार वोट मिले बीएसपी से। फिर माकपा से भी लड़े। साइकिल से भारत की परिक्रमा कर चुके हैं। हमारे घनिष्ठ मित्र हैं। इन दिनों कोलकाता गए हुए हैं, वहां एनआरएस अस्पताल में उनकी बेटी कार्यरत है। असीमदा की मृत्यु के बाद उनके परिजनों से …

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लता मंगेशकर के व्यक्तित्व को फिल्मी दायरे में सीमाबद्ध करना अपराध है

lata mangeshkar

It is a crime to limit the personality of Lata Mangeshkar in the film industry. लता मंगेशकर के सुर संसार में हम सभी लोग कमोबेश शामिल रहे हैं। 92 वर्ष की आयु में भी उनके स्वर के अवसान से हम सभी दुःखी हैं। वे भारत रत्न हैं। और किसी भी राजनेता या कलाकार, साहित्यकार से ज्यादा उनकी प्रतिष्ठा और विश्वव्यापी …

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प्रेम और विवाह भारत में स्त्री के लिए चक्रव्यूह है, जिसमें निशस्त्र वह घुस तो जाती है, लेकिन उसमें से निकलने का कोई रास्ता उसे मालूम नहीं होता।

opinion, debate

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी लड़कियों की शादी की उम्र 21 साल (21 years of marriage age of girls) करने को कृतसंकल्प हैं और लोकसभा में भी विधेयक पारित हो चुका है। आधी आबादी पर प्रेम और विवाह की उम्र कानूनी जामा पहनाकर थोपने की इस पहल पर स्त्रियों से कोई राय नहीं पूछी गयी। निर्णय की किसी प्रक्रिया में स्त्री की …

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नेताजी की प्रतिमा को हिटलर की छवि में बदल रहा है कॉरपोरेट फासीवाद

netaji's statue

क्या एक सैन्य राष्ट्र के निर्माण के लिए नेताजी की छवि का इस्तेमाल हो रहा है? कॉरपोरेट फासीवाद (corporate fascism) नेताजी की प्रतिमा (Netaji’s statue) को हिटलर की छवि (picture of Hitler) में बदल रहा है जो नेताजी और आज़ाद हिन्द फौज का अपमान (Netaji and Azad Hind Fauj insulted) तो है ही, इतिहास के भगवाकरण के साथ-साथ अक्षम्य देशद्रोह …

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प्रवास वृत्तांत : मजदूर बस्ती के एक बेरोजगार कलाकार की ट्रेन से कटकर मौत, एक प्रेमकथा का दुःखद अंत

mazdoor basti

Migration story: An unemployed artist from Mazdoor Basti dies after being hit by a train, sad end of a love story बंगाल में 35 साल के वाम शासन में आज़ाद भारत की उद्योग विरोधी शहरीकरण के कारपोरेटपरस्त मुक्तबाजारी अर्थव्यवस्था में 56 हजार कल कारखाने बन्द हो गए। ममता बनर्जी के परिवर्तन आंदोलन और वाम तख्ता पलट का यह सबसे बड़ा …

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जनादेश का अभूतपूर्व प्रहसन : विशाल रैलियां भी होंगी और लॉकडाउन की तैयारी के मध्य कर्फ्यू जारी रहेगा

debate

चाहे कुछ हो जाये, चुनाव जरूर होंगे। मीडिया और तकनीक के जरिये लड़ेंगे चुनाव। विशाल रैलियां भी होंगी और लॉकडाउन की तैयारी के मध्य कर्फ्यू जारी रहेगा। जनादेश का अभूतपूर्व प्रहसन लेकिन स्कूल कालेज कारोबार उद्योग धंधे सब बन्द हो जाएंगे। चंद दिनों के लिए गरीबों और भिखारियों को खैरात बांटे जाएंगे और कारपोरेट कम्पनियों को राहत पैकेज दिए जाते …

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जनसंख्या की राजनीति के जरिए बहुसंख्य जनता को राजनीतिक प्रतिनिधित्व से वंचित रखा जा रहा है

population explosion

Majority of people are being denied political representation through population politics. हमारे दिवंगत मित्र प्रबीर गंगोपाध्याय ने बांग्ला में जनसंख्या की राजनीति (population politics) पर एक अद्भुत तथ्य आधारित, अखिल भारतीय ग्रास रूट लेवल सर्वेक्षण और जनसंख्या के आंकड़ों के साथ अद्भुत किताब लिखी थी। Politics of Demography इसी राजनीति के तहत भारत विभाजन करके सत्ता हस्तांतरण के बाद से …

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हिंदुत्व के नाम पर ध्रुवीकरण की राजनीति करने वाली भाजपा आदिवासियों को भी संदिग्ध नागरिक बता रही

famous human rights activist of Assam Pranab Doley

सिंधु सभ्यता के वारिस आदिवासी और दलित इस देश के नागरिक नहीं हैं तो नागरिक कौन हैं? असम में अभयारण्यों की किलेबंदी के खिलाफ आदिवासियों और वनवासियों के वनाधिकार की लड़ाई लड़ रहे असम के प्रसिद्ध मानवाधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले की नागरिकता (Citizenship of famous human rights activist of Assam Pranab Doley) संदिग्ध बताते हुए उनके पासपोर्ट के नवीकरण से …

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खास लोगों के लिए आपदा ही अवसर है खतरे से खाली नहीं इस निजाम में आम लोगों की आवाज उठाना

opinion debate

For special people, disaster is an opportunity. Raising voice of common people in this system not free from danger कोहरा क्यों जरूरी है? कुहासा का मौसम शुरू हो गया। यह चुनाव का मौसम भी है। गेंहू और लाही की फसल के लिए कोहरा जरूरी है। ज्यादा सर्दी भी। धान की फसल चौपट होने के बाद किसान इसी फसल के भरोसे …

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जब पं. नेहरू के मंच से कांग्रेस के खिलाफ भाषण देकर एनडी तिवारी बन गए थे विधायक

jawahar lal nehru

कैसे चुनाव प्रचार के दौरान मतदाताओं से मिले बिना, उनसे संवाद किये बिना लोग चुनाव जीत जाते हैं? कैसे बड़ी-बड़ी रैली, रोड शो, विज्ञापन और आईटी सेल के जरिये चुनाव प्रचार में मतदाताओं से सम्पर्क किये बिना चुनाव नतीजे तय होते हैं? कैसे होती है कारपोरेट फंडिंग और विदेशी फंडिंग, पार्टियों और उम्मीदवार के करोड़ों के खर्च का क्या हिसाब …

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पत्रकारिता की दयनीय हालत के लिए पत्रकार भी कम दोषी नहीं

press freedom

गोदी मीडिया और पप्पू मीडिया की हरकतों को देखते हुए पत्रकारिता की गिरती हालत पर रोज चर्चा (Discussion on the deteriorating condition of journalism) होती है। लेकिन यह गिरावट एक दिन में नहीं आ गई है न एक दिन में पत्रकारिता की मौत हुई है। पत्रकारिता की गिरावट के कारणों की समीक्षा (A review of the reasons for the decline …

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