Home » तेजस पूनियां

तेजस पूनियां

तेजस पूनियां लेखक फ़िल्म समीक्षक, आलोचक एवं कहानीकार हैं। तथा श्री गंगानगर राजस्थान में जन्में हैं। इनके अब तक 200 से अधिक लेख विभिन्न राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। तथा एक कहानी संग्रह 'रोशनाई' भी छपा है। प्रकाशन- मधुमती पत्रिका, कथाक्रम पत्रिका ,विश्वगाथा पत्रिका, परिकथा पत्रिका, पतहर पत्रिका, जनकृति अंतरराष्ट्रीय बहुभाषी ई पत्रिका, अक्षरवार्ता अंतरराष्ट्रीय मासिक रिफर्ड प्रिंट पत्रिका, हस्ताक्षर मासिक ई पत्रिका (नियमित लेखक), सबलोग पत्रिका (क्रिएटिव राइटर), परिवर्तन: साहित्य एवं समाज की त्रैमासिक ई-पत्रिका, सहचर त्रैमासिक पीयर रिव्यूड ई-पत्रिका, कनाडा में प्रकाशित होने वाली "प्रयास" ई-पत्रिका, पुरवाई पत्रिका इंग्लैंड से प्रकाशित होने वाली पत्रिका, हस्तक्षेप- सामाजिक, राजनीतिक, सूचना, चेतना व संवाद की मासिक पत्रिका, आखर हिंदी डॉट कॉम, लोक मंच, बॉलीवुड लोचा सिने-वेबसाइट, साहित्य सिनेमा सेतु, पिक्चर प्लस, सर्वहारा ब्लॉग, ट्रू मीडिया न्यूज डॉट कॉम, प्रतिलिपि डॉट कॉम, स्टोरी मिरर डॉट कॉम, सृजन समय- दृश्यकला एवं प्रदर्शनकारी कलाओं पर केन्द्रित बहुभाषी अंतरराष्ट्रीय द्वैमासिक ई- पत्रिका तथा कई अन्य प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं, ब्लॉग्स, वेबसाइट्स, पुस्तकों आदि में 300 से अधिक लेख-शोधालेख, समीक्षाएँ, फ़िल्म एवं पुस्तक समीक्षाएं, कविताएँ, कहानियाँ तथा लेख-आलेख प्रकाशित एवं कुछ अन्य प्रकाशनाधीन। कई राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों में पत्र वाचन एवं उनका ISBN नम्बर सहित प्रकाशन। कहानी संग्रह - "रोशनाई" अकेडमिक बुक्स ऑफ़ इंडिया दिल्ली से प्रकाशित। सिनेमा आधारित संपादित पुस्तक शीघ्र प्रकाश्य -अमन प्रकाशन (कानपुर) अतिथि संपादक - सहचर त्रैमासिक पीयर रिव्यूड पत्रिका

कमजोर फ़िल्म ’36 फ़ार्म हाउस’ : हैरान नहीं परेशान करती है

film review

36 Farmhouse Movie Review, मूवी रिव्यू : 36 फार्महाउस किसी भी फ़िल्म को देखने से पहले आप क्या देखते हैं? उसकी कहानी? उसके एक्टर्स? उसमें उनकी की गई एक्टिंग? कोई जॉनर? डायरेक्टर? या कुछ और? सिनेमैटोग्राफी, बैकग्राउंड स्कोर, गीत-संगीत, कैमरा आदि के बारे तो सामान्य दर्शक कहाँ देखते-सोचते हैं? 36 फ़ार्म हाउस की कहानी : कॉमेडी मिक्स मर्डर मिस्ट्री ’36 …

Read More »

बली रिव्यू : विशाल फुरिया की एक और खतरनाक कहानी

film review

इस ‘बली’ से दूरी भली ‘बली‘ फिल्म समीक्षा : ‘Bali’ movie review Bali Review: Vishal Furia’s Another Alarming Tale अमेज़न प्राइम पर हाल ही में रिलीज हुई ‘छोरी’ फ़िल्म के निर्देशक ‘विशाल फुरिया’ की ही एक और फ़िल्म ‘बली’ आज रिलीज हुई है। वही निर्देशक, वही ओटीटी, वही फ़िल्म का जॉनर। अब ‘छोरी’ को देख चुके दर्शक ‘बली’ नाम की …

Read More »

एंटरटेनमेंट बोले तो ‘सूर्यवंशी’ बाकी खोखली

film review

सूर्यवंशी रिव्यू : Sooryavanshi Movie Review in Hindi कोरोना के बाद थियेटर रिलीज में 100 करोड़ क्लब पार करने वाली पहली फ़िल्म बनी सूर्यवंशी Sooryavanshi (सूर्यवंशी) फ़िल्म दिवाली के एक दिन बाद सिनेमाघरों में रिलीज हुई और अब कोरोना के बाद जब लगभग सभी जगह 100 फीसदी क्षमता के साथ थिएटर्स खुल चुके हैं। तो सूर्यवंशी कोरोना के बाद थियेटर …

Read More »

भाई ये कैसी पिच्छर बनाई ‘भवाई’ : ‘इस युग में सभी रावण हैं।’

film review

Bhavai (रावण लीला) Bhavai Movie Review in Hindi | भवाई मूवी रिव्यू हिंदी में राम-रावण की कहानी : नए जमाने की लव स्टोरी एक बाप जिसने अपने बेटे का नाम रखा राजा राम। गुजरात का एक गांव खाखर जहां कभी रामलीला नहीं हुई। अब जब पहली बार हुई तो उसमें राम, सीता का कैरेक्टर निभाने वाले कलाकारों को ही गांव …

Read More »

‘सरदार उधम सिंह’ : जानदार भी शानदार भी

udham singh film

‘सरदार उधम सिंह’ रिव्यू ‘आदमी को मारा जा सकता है। उसके विचारों को नहीं और जिस विचार का वक़्त आया हो उसे वक़्त भी नहीं टाल सकता।’ आइडियोलॉजी अच्छी और सच्ची होनी चाहिए।’ हमें किसी इंसान के खून के प्यासे नहीं हैं हमें किसी आदमी या देश से नफ़रत नहीं है।’ सचमुच जब इतने अच्छे विचारों और आइडियोलॉजी वाले डायलॉग्स …

Read More »

यात्रा : आज भी पुकार रहा है ‘घटोत्कच’ को लोरियां सुनाता ‘भीम’

History of Shiv Parvati temple on girihinda mountain in sheikhpura Bihar. महाभारत काल में महाबली भीम द्वारा स्थापित एक बेहद ही प्राचीन शिवलिंग प्रशासन की बेरुखी झेल रहा है। बिहार का सबसे कम आबादी वाला जिला | कितनी है शेखपुरा जिला की आबादी ? शेखपुरा जिला, बिहार राज्य का एक छोटा सा गांव। लेकिन विविधताओं, संस्कृति के साथ प्रकृति से भरपूर …

Read More »

दरारें : प्यार करना और जीना उन्हें कभी नहीं आएगा जिन्हें ज़िंदगी ने बनिया बना दिया

film review

धूल, धुआं, धूसरित करती ‘दरारें‘ हरियाणवी फिल्म ‘दरारें‘ की समीक्षा | विजेता दहिया की फिल्म ‘दरारें’ को लेकर आपकी क्या समीक्षा है? ‘प्यार करना और जीना उन्हें कभी नहीं आएगा जिन्हें ज़िंदगी ने बनिया बना दिया।‘ पंजाबी भाषा के सुप्रसिद्ध कवि की लिखी इन पंक्तियों के साथ शुरू होने वाली ताजा तरीन एम एक्स प्लेयर पर रिलीज़ हुई हरियाणवी फिल्म …

Read More »

एक ‘छत्रसाल’ हम सबके भीतर है

entertainment

Chhatrasal Web Series MX Player review छत्रसाल वेब सीरीज एमएक्स प्लेयर समीक्षा मादरे वतन हिंदुस्तान की धरती पर पांच बार घुटनों के बल होने वाले आक्रमणकारी मुगलिया सल्तनत के विनाश की कहानी है छत्रसाल। बुंदेलखंड के वीर, नामवर यौद्धा की कहानी है छत्रसाल। अपनी मातृभूमि के लिए अपनी आन, बान, शान की कुर्बानी देने वालों की कहानी है छत्रसाल। रूखा, …

Read More »

ओटीटी पर्दे पर प्रेम, दंगे और हत्याओं का ‘ग्रहण’

entertainment

ग्रहण वेब सीरीज की समीक्षा हिंदी में. Grahan hotstar web series Review in Hindi by Tejas Poonia. एक भारत के दो अलग-अलग स्थान और समय की कहानी है ग्रहण।  ग्रहण वेब सीरीज की समीक्षा हिंदी में | Grahan hotstar web series Review by Tejas Poonia एक भारत के दो अलग-अलग स्थान और समय की कहानी है ग्रहण। एक पाठक ने …

Read More »

इंसानी मन की दमित इच्छाओं का ‘आखेट’

aakhet

‘आखेट’ फ़िल्म समीक्षा | ‘Aakhet’ film review फ़िल्म के पटकथा लेखक, निर्देशक रवि बुले यूँ तो पेशे से फ़िल्म समीक्षक है लेकिन पहली बार ‘आखेट’ फ़िल्म से उन्होंने फिल्म निर्देशक के रूप में डेब्यू किया है। ‘आखेट’ फ़िल्म की कहानी कुणाल सिंह की लिखी कहानी ‘आखेटक’ पर आधारित है। फ़िल्म जंगलों से खत्म हो रहे बाघों पर बात करती है। …

Read More »

चुड़ैल से प्यार? हंसाने और डराने में नाकाम है ये रूही

roohi

फिल्म समीक्षा – रूही | Movie Review – Roohi कोरोना काल की भयावहता से गुजरने के बाद आखिरकार सिनेमा हॉल खुल चुके हैं और फ़िल्म रिलीज़ हुई है रूही। इस फ़िल्म को स्त्री फ़िल्म के समक्ष बताकर प्रचारित किया गया था। लेकिन यह फ़िल्म  जब अपनी परतें खोलती है तो निकलकर कुछ और ही आता है। कई भाषाओं के सम्मिश्रण …

Read More »

आम से खास बनी महिलाओं की कहानी बॉम्बे बेगम्स

bombay begums

WEB SERIES Bombay Begums review: Pooja Bhatt is brilliant in Alankrita Shrivastava’s inelegant but empowering Netflix show रिव्यू : बॉम्बे बेगम्स | Bombay Begums, Reviews TV program 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई पूजा भट्ट की बहु प्रतीक्षित वेब सीरीज बॉम्बे बेगम्स (Pooja Bhatt’s much-awaited web series Bombay Begums released on Netflix on …

Read More »

न झुकने और न रुकने की बात ‘नूर’ में

noor

फ़िल्म रिव्यू – न झुकने और न रुकने की बात ‘नूर‘ में फ़िल्म – नूर निर्देशक – विकास विक स्टार कास्ट – वेदांत, जसपाल शर्मा, सुनील चितकारा, शिव कुमार आदि रिलीजिंग प्लेटफॉर्म – डिज़्नी हॉट स्टार प्लस अपनी रेटिंग – 3.5 स्टार पिता जी भूख लगी है। ले बेटा गोली खा। हा… हा…हा… ये फ़िल्म के किसी के डायलॉग नहीं …

Read More »

सपनों की तलाश में ‘पीली मछली’

peeli machli

फ़िल्म रिव्यू – ‘पीली मछली’ Film Review -PEELI MACHLI कलाकार, अपनी कहानी का हीरो, धुआँ और राख ये तीन सेगमेंट है पिछले हफ़्ते जी5 एप्प पर रिलीज़ हुई फ़िल्म पीली मछली के। फ़िल्म की कहानी में एक अकेला पिता है उसका छोटा सा बेटा है। बेटा स्कूल में पढ़ रहा है और पिता लिखता है, साथ ही अपनी फिल्म को …

Read More »

उदयपुर में एक रात : यात्रा वृतांत

lake city udaipur1

List of Tourist Attractions | Tourist Places To Visit in Udaipur किसी खास वजह से एक दिन के लिए उदयपुर जाना था। लेकिन इसे गलती कहूँ या मेरा सौभाग्य की वहां दो दिन बिता आया। जाना था जापान पहुंच गए चीन समझ गए ना गाने जैसा हाल हो गया। हालांकि पहुंचे हम वहीं जाना था लेकिन बस तारीख गलत पड़ …

Read More »

गंदगी मचाती एनसीआर चैप्टर वन

Ncr Chapter One

NCR Chapter One: Film review कोई भी खेल को जीतने के लिए दो चीजें का होना जरूरी है। पहली तैयारी और दूसरी किस्मत। जब तैयारी और किस्मत  दोनों ही साथ ना दे तो एक ही रास्ता रह जाता है बेईमानी। निर्देशक सैफ़ बैद्य की हालिया रिलीज़ फ़िल्म एनसीआर चैप्टर वन की शुरुआत इसी संवाद से होती है। लेकिन निर्देशक खुद …

Read More »

पुस्तक समीक्षा : महफ़िल लूटना चाहते हैं तो मुक्तक रट लीजिए

Main Aisa Vaisa nahin hoon

मुक्तक क्या है हिंदी साहित्य में व्यवस्थित रूप से मुक्तकों को लिखने की परंपरा का विकास रीतिकाल में हुआ। इस दौर में कबीरदास, रहीम तथा मीरा बाई ने कई मुक्तक अथवा छंद लिखे। कविता का वह संक्षिप्त रूप जो दोहा अथवा मुक्तक शैली या विधा में लिखा जाए उसे मुक्तक कहा जाता है। कबीर आदि के बाद वर्तमान में यह …

Read More »

लापता पैर : विमर्शों, कल्पनाओं और यथार्थ के मिश्रण से उपजी कहानियाँ

Lapta-Pair-Cover-07

पुस्तक समीक्षा | Book review हिंदी कथा साहित्य में हिंदी कहानी का आरंभ माधवराव स्प्रे की कहानी ‘एक टोकरी भर मिट्टी’ से आरम्भ हुआ माना जाता है। यह कहानी सन् 1901 में प्रकाशित हुई थी। हिंदी की पहली कहानी को लेकर हालांकि अलग-अलग विद्वानों का अलग-अलग मन्तव्य है। हिंदी कहानियों के क्रम में लघु कथा की अगर बात करें तो …

Read More »

प्रश्न पानी से नहीं धुलते : नए विमर्श पैदा करती कहानियां

लेखक - दिलीप कुमार शर्मा अज्ञात किताब - प्रश्न पानी से नहीं धुलते किताब प्रकार- कहानी संग्रह प्रकाशन - अधिकरण प्रकाशन 2019

Stories creating new discourses सन 1803 में इंशा अल्लाह खान कृत कहानी “रानी केतकी की कहानी” को हिंदी की पहली कहानी (First story of hindi) कहा जाता है। इसके बाद धीरे-धीरे इस कला में परिवर्तन होने लगा और कहानियां एक नया आयाम स्थापित करने लगीं। अकहानी, सचेतन कहानी, नई कहानी, साठोत्तरी कहानी आदि जैसे कई बदलाव इस विधा में हमें …

Read More »