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मुहब्बत का किसी सूरत कोई पहलू नहीं निकले, सियासत चाहती है फूल से खुशबू नहीं निकले

बज़्म-ए-अदब बदायूं ,Bazm-e-adab Budaun | Budaun news

बदायूँ, 24 दिसंबर 2020. उर्दू अदबी संस्था बज़्म-ए-अदब बदायूं के तत्वाधान में एडवोकेट मुहम्मद उमर के दौलतक़दे पर एक शेरी नशिस्त का एहतमाम हुआ। बज़्म-ए-अदब बदायूं के बानी अरशद बदायूंनी ने सभी शोअरा का इस्तेक़बाल किया। शेरी नशिस्त की सदारत तनवीर क़ादरी ने की, जिसका आग़ाज़ नात-ए-पाक से हुआ। मेहमान-ए-ख़ुसूसी जनाब सय्यद तनवीर अहमद रहे।

इसके बाद बज़्म-ए-अदब बदायूं के प्रेसिडेंट जनाब वसीम नादिर ने अपना कलाम पढ़ा,

“मुहब्बत का किसी सूरत कोई पहलू नहीं निकले, सियासत चाहती है फूल से खुशबू नहीं निकले”

जनाब वासिक़ पुसगंवी ने पढ़ा,

“उसके दरबार मे क्या शाहों-गदा की तफरीक़, उसके जलवों में हर इक अदना-ओ-आला गुम है”।

नशिस्त के सदर जनाब तनवीर क़ादरी ने पढ़ा,

“खुद्दार कभी दौलत के पीछे नहीं जाते, जान से अज़ीज़ अपनी वो इज़्ज़त को रखते हैं”।

ककराला से तशरीफ़ लाये सरमद ख़ान सरमद ने पढ़ा,

“तबीब ने मिरे नुस्ख़े में ये लिखा सरमद, मरीज़-ए-इश्क़ है ग़ज़लों का दम किया जाए”।

शराफ़त समीर ने पढ़ा,

“जाल लेकर मैं उड़ तो जाऊं मगर, उसके एहसान पर कतरते हैं”,

शहज़ान खान ने पढ़ा,

“ये बच्चे अब मुहब्बत चाहते हैं, इन्हें भी दिल लगाना आ गया है”।

बिलाल बदायूंनी ने पढ़ा,

“फिर दुआ काम आ गयी मां की, गिरते गिरते सँभल गया कोई”,

शीराज़ ख़ान ने पढ़ा,

“तुझे जितनी ख़ुशी है जीत पर उससे बढ़कर, मनाया जा रहा बस्ती में मिरी मात का ग़म”।

उसावां से तशरीफ़ लाये जनाब अनीस ‘क़ल्ब’ ने पढ़ा,

“अपने बदन की आग में जलना पढा मुझे, फिर ये हुआ कि राख में ढलना पड़ा मुझे”।

जनाब इक़्तिदार इमाम ने पढ़ा,

“वो जब भी आता है मिरे ख़ाब बिखर जाते हैं, नींद में खाब का नुक़सान बहुत करता है”।

इसके अलावा शेरी नशिस्त की महफ़िल में जनाब अज़हर उमर क़ुरैशी, जनाब फ़ाज़िल ख़ान, जनाब मुस्तफ़ा उमर क़ुरैशी, जनाब फ़ैसल मंसूरी आदि मौजूद रहे।

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