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Bhagat Singh of Etawah Comrade Mahesh remembered with reverence

श्रद्धा से याद किया गया इटावा के भगतसिंह कामरेड महेश को

इटावा, 4 अप्रैल। स्वातंत्र्य संघर्ष समिति, जागरूक नागरिक और चंबल संग्राहलय के तत्वावधान में आज कामरेड महेश के शहादत दिवस पर इटावा की क्रांतिकारी परंपरा विषय पर एक कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम में कामरेड कमल सिंह ने कामरेड महेश को इटावा का भगत सिंह बताया। रामसिंह राठौर, किशन पोरवाल, राजा खानजादा आदि ने संबोधित किया।

कामरेड महेश चकरनगर के अंतर्गत तेजीपुर पट्टी के रहने वाले थे। उनके पिता जसवंत सिंह भी स्वतंत्रता सेनानी थे। कामरेड महेश 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान कॉलेज छोड़कर आजादी की जंग में कूदे। जेल में कामरेड सुदर्शन के जरिए वे कम्युनिस्ट आंदोलन से जुड़ गए। बलराम दुबे के साथ वे इटावा में कम्युनिस्ट पार्टी और किसान सभा के संस्थापकों में से एक थे। अंडमान में काले पानी की सजा काटकर आए कामरेड शंभूनाथ आजाद के नेतृत्व में उन्होंने इटावा में भूमिहीन गरीब किसानों की लाल सेना का गठन किया था। 30 मार्च को उनके नेतृत्व में जिला किसान सम्मेलन के बाद 1 अप्रेल, 1947को रोशनपुर के सामंतों ने कपट पूर्ण तरीके से उनकी हत्या कर दी थी। वे इटावा औरैया के सामंतवाद विरोधी- साम्राज्यवाद विरोधी संघर्ष के शहीद थे।

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