किसान विरोधी कृषि कानूनों के विरुद्ध किसानों के भारत बंद का लोकमोर्चा ने किया समर्थन

मोदी सरकार के तीनों कृषि कानून किसानों की गुलामी के दस्तावेज हैं। इन कानूनों के जरिये मोदी सरकार ने एक बार फिर देश के फेडरल ढांचे पर बड़ा हमला बोला है।

बदायूँ में जिलाधिकारी कार्यालय पर 25 सितंबर को प्रदर्शन करेगा लोकमोर्चा

बदायूँ, 24 सितंबर 2020. मोदी सरकार के किसान विरोधी कृषि कानूनों के विरुद्ध किसानों द्वारा दिये गए 25सितंबर को भारत बंद के आह्वान (Bharat Bandh call given on 25 September by farmers against anti-farmer farming laws of Modi government) का लोकमोर्चा ने समर्थन किया है।

बदायूँ में 25 सितंबर को लोकमोर्चा जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन कर किसानों के हक में आवाज उठाएगा।

उक्त जानकारी देते हुए आज जारी बयान में लोकमोर्चा संयोजक अजीत सिंह यादव ने कहा कि मोदी सरकार ने कृषि, कृषि व खाद्यान्न बाजार को देशी विदेशी बड़ी पूंजी कंपनियों के हवाले करने को तीन कृषि कानूनों को संसद में येन केन प्रकारेण पारित करवा कर किसानों पर हमला बोल दिया है। अल्पमत में होते हुए भी मोदी सरकार ने राज्यसभा में विपक्ष की मत विभाजन की मांग को खारिज कर ध्वनिमत से  जिस तरह काले कृषि कानूनों को पारित कराया है, उससे देश में संवैधानिक लोकतंत्र के खात्मे के संकेत दे दिए हैं।

The three agricultural laws of Modi government are documents of slavery of farmers

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के तीनों कृषि कानून किसानों की गुलामी के दस्तावेज हैं। इन कानूनों के जरिये मोदी सरकार ने एक बार फिर देश के फेडरल ढांचे पर बड़ा हमला बोला है। इन कानूनों के लागू होने से देशी विदेशी पूंजी कंपनियों को मनमाने तरीके से आलू, प्याज, दालों समेत खाद्यान्न के भंडारण और कालाबाजारी करने और कृत्रिम कमी पैदा कर मनमाने दाम वसूलने की खुली छूट मिल जाएगी।

उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के इन किसान विरोधी, देश विरोधी कृषि कानूनों को किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं किया जा सकता।

उन्होंने लोकमोर्चा के कार्यकर्ताओं से अपील की है कि वे हर स्तर पर किसानों के आंदोलन का समर्थन करें और बदायूँ में 25 सितंबर को दोपहर 12 बजे जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन में शामिल हों।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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