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‘bhumi pujan’ for the foundation stone laying ceremony of the new Parliament premises

लाल किले पर निशान साहब पर भक्तों की आपत्ति पर जस्टिस काटजू ने दिया ऐसा उत्तर….

नई दिल्ली, 28 जनवरी 2021. सर्वोच्च न्यायालय के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू ने कहा है कि अगर लोगों को लाल किले पर किसानों द्वारा धार्मिक झंडा फहराए जाने पर आपत्ति है तो उन्हें प्रधानमंत्री द्वारा नए संसद् भवन के भूमि पूजन पर आपत्ति होनी चाहिए।

जस्टिस काटजू ने अपने सत्यापित फेसबुक पेज पर हाल ही में अंग्रेजी में एक पोस्ट लिखकर कहा कि

“कई लोगों ने मेरी पिछली एफबी पोस्ट पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि लाल किले पर किसानों द्वारा धार्मिक झंडा नहीं फहराया जाना चाहिए था।

लेकिन फिर उसी तर्क से नए संसद परिसर के शिलान्यास समारोह के लिए, विशेषकर पीएम को हिंदू संस्कारों से ‘भूमि पूजन’ नहीं करना चाहिए था। संसद का संबंध केवल हिंदुओं से नहीं है।

क्या इन लोगों में से किसी को उस पर आपत्ति थी? नहीं, वे चुप थे। फिर लाल किले पर निशान साहब को फहराने पर आपत्ति जताना उनके मुंह में कैसे समा गया? यदि लाल किला धर्मनिरपेक्ष होना चाहिए, तो संसद को भी होना चाहिए। वे गर्म और ठंडे को एक साथ फेंट नहीं सकते।“

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Many people have commented on my last fb post saying that a religious flag should not have been hoisted by the farmers on the Red Fort.
But then by the same logic, the ‘bhumi pujan’ for the foundation stone laying ceremony of the new Parliament premises should not have been done by the PM exclusively by Hindu rites. Parliament does not belong to Hindus alone.
Did any of these people object to that ? No, they were silent. Then how does it lie in their mouth to raise an objection to hoisting of Nishan Saheb on Red Fort ? If the Red Fort must be secular, so must Parliament. They cant blow hot and cold together.

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Many people have commented on my last fb post saying that a religious flag should not have been hoisted by the farmers…

Posted by Markandey Katju on Thursday, January 28, 2021

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