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त्रिपुरा की भाजपा सरकार करवा रही है मुसलमानों पर हमले, राष्ट्रपति करें हस्तक्षेप- शाहनवाज़ आलम

सिर्फ़ राहुल गांधी बोले, अखिलेश, माया और ममता की चुप्पी याद रखी जाएगी

त्रिपुरा हिंसा के खिलाफ़ अल्पसंख्यक कांग्रेस ने भेजा हर ज़िले से राष्ट्रपति को ज्ञापन

लखनऊ, 28 अक्टूबर 2021। अल्पसंख्यक कांग्रेस ने आज हर ज़िला मुख्यालय से महामहिम राष्ट्रपति को 5 सूत्रीय ज्ञापन भेज कर त्रिपुरा में मुस्लिम समुदाय पर संघी आतंकी संगठनों द्वारा किए जा रहे हमलों को तत्काल रोकने के लिए हस्तक्षेप करने की मांग की है।

अल्पसंख्यक कांग्रेस के प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने प्रदेश कांग्रेस कार्यालय से जारी बयान में कहा कि पिछले एक हफ़्ते से त्रिपुरा में मुस्लिम समुदाय के ऊपर राज्य की भाजपा सरकार के संरक्षण में संघ से जुड़े आतंकी संगठन हमले कर रहे हैं, जिसमें दर्जनों मस्जिद और मजार जला दिये गए हैं और सैकड़ों दुकानें पूरी तरह नष्ट हो गयी हैं।

बिप्लव कुमार देब की भाजपा सरकार न सिर्फ़ हमलावरों के साथ खड़ी है, बल्कि पुलिस को भी अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी को निभाने से रोकते हुए उन्हें दंगाइयों का सहयोगी बना दिया है। इसलिए इस मामले में राष्ट्रपति महोदय को ख़ुद हस्तक्षेप कर हमलों को रुकवाने और दोषियों के खिलाफ़ कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को निर्देश देना चाहिए।

शाहनवाज़ आलम ने कहा कि त्रिपुरा में मुसलमानों पर हो रहे हमलों के खिलाफ़ (Attacks on Muslims in Tripura) सिर्फ़ राहुल गांधी जी का खुल कर बोलना और बाकी कथित सेकुलर पार्टियों का चुप रहना साबित करता है कि ममता बनर्जी हों या अखिलेश यादव या मायावती उन्हें सिर्फ़ मुसलमानों का वोट चाहिए। उनके साथ खड़े होने का साहस उनमें नहीं है।

अल्पसंख्यक कांग्रेस ने 5 सूत्रीय ज्ञापन के ज़रिये महामहिम राष्ट्रपति से निम्न मांगें की हैं

1- त्रिपुरा सरकार को निर्देशित करें कि वह अपनी संवैधानिक ज़िम्मेदारी का निर्वहन करते हुए हिंसा करने वाले संगठनों और लोगों के खिलाफ़ क़ानूनी कार्यवाई करे।

2- हिंसा के दौरान अपनी ज़िम्मेदारियों को न निभाने, हिंसा को उकसाने व मूक दर्शक बने रहने वाले प्रशासनिक अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर उनकी आपराधिक संलिप्तता की विभागीय जाँच कराई जाए।

3- सरकार पीड़ित मुसलमानों को हुए आर्थिक नुकसानों की क्षतिपूर्ति करे।

4- आगजनी की शिकार मस्जिदों और मजारों का सरकार तत्काल पुनर्निर्माण कराए।

5- सोशल मीडिया पर मुसलमानों के खिलाफ़ नफ़रत भरे संदेश प्रसारित करने वाले संगठनों और व्यक्तियों के खिलाफ़ क़ानूनी कार्यवाई सुनिश्चित की जाए।

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