#BolReDilliBol : कैलाश खेर ने गाया दिल्ली पर एक गीत, “बोल रे दिल्ली”

Kailash Kher sings a song on Delhi, “Bol Re Delhi”

नई दिल्ली, 03 जनवरी 2020. जाने-माने गायक कैलाश खेर के गाये “बोल रे दिल्ली बोल” (#BolReDilliBol ) गाने को हाल ही में प्रेस क्लब, दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में जारी किया गया। यह गाना मुनीश रायज़ादा द्वारा निर्मित और निर्देशित जल्द ही रिलीज़ होने वाली वेब सीरीज “ट्रांसपेरेंसी: पारदर्शिता” का ही एक हिस्सा है।

मशहूर संगीतकार प्रवेश मलिक नें इस गाने के लिए संगीत दिया है और अनु रिज़वी ने गाने के बोल लिखे हैं।

यह वेब सीरीज इंडिया अगेंस्ट करप्शन और आंदोलन से निकली पार्टी, आम आदमी पार्टी पर आधारित है। वेब सीरीज के निर्माता-निर्देशक मुनीश रायजादा ने खुद इस पार्टी का हिस्सा रहते हुए कई अहम पदों पर अपनी जिम्मेवारी निभाई है।

इस अवसर पर जल्दी ही रिलीज़ होने वाली वेब सीरीज के निर्माता-निर्देशक मुनीश रायजादा ने कहा कि “बोल रे दिल्ली बोल” गाना उन आम आदमी के निराशाजनक भावनाओं को दर्शाता है जो आम आदमी पार्टी के लगातार बदलते सिद्धान्तों से आज ठगा महसूस कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि पार्टी बनाते समय ऐसा दावा किया गया था कि पुरानी सड़ी-गली व्यवस्था को दूर कर पूर्ण व्यवस्था परिवर्तन किया जायेगा और लोगों को एक नयी राजनितिक वैकल्पिक व्यवस्था दी जायेगी। लेकिन सत्ता में आते ही पार्टी के मूल सिद्धान्त “वित्तीय पारदर्शिता, आंतरिक पार्टी- लोकतंत्र और आंतरिक लोकपाल” को तिलांजलि दे दी गई।

रायजादा ने कहा कि कि जब पार्टी के वालंटियर्स व समर्थक, पार्टी के नेताओं को उनके सिद्धान्त याद दिलाते हैं तो वे बात बदलते हुए गवर्नन्स की तरफ इशारा करते हैं। और कहते हैं कि सिद्धान्तों में क्या रखा है, आम आदमी पार्टी की सरकार के काम को देखिए। लेकिन सवाल यह है कि जैसा वो दावा कर रहे हैं क्या वैसा गवर्नेंस दिया?

क्या उन्होंने दिल्ली को लन्दन या पेरिस बना दिया जैसा की वो दावा करते-फिरते थे?

उन्होंने सिर्फ दिखावे के लिए थोड़े-बहुत ऐसे काम किये हैं जिस पर सीधे लोगों की नजर पड़ सके और उन्हें लगे कि बहुत काम हुआ है।

सवाल यह भी है कि क्या वो सिर्फ गवर्नेंस के लिए ही राजनीति में आये थे?

पार्टी के जो मूल सिद्धान्त थे वो कहाँ गए? लोगों को पार्टी के अलग सिद्धान्तों पर पूरा भरोसा था। लेकिन पार्टी लीडरशिप ने उन सिद्धान्तों को तिलांजलि देकर उनकी भावनाओं को ठेस पहुंचाई है।

ऐसा लगता है कि उन्होंने सिर्फ सत्ता तक पहुँचने के लिए ही लोक लुभावनी अच्छी-अच्छी बातें की जिसके झांसे में लोग आ गए।

रायज़ादा ने कहा कि आज जो गाना हमने जारी किया है इसका एक-एक शब्द आम आदमी की भावनाओं को दर्शाता है जिसने एक बेहतर कल के सपने देखे थे। उन्होंने कहा कि इस गीत को किसी प्रोपेगंडा या व्यक्तिगत खुन्नस की तरह न देखा जाय। आम लोगों की भावनाओं को व्यक्त करने के लिए यह सिर्फ एक कला है। अभिव्यक्ति का एक माध्यम है।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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