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घरबंदी में किताबें कर रहीं मदद

नई दिल्ली, 11 अप्रैल 2020. लॉकडाउन के अठारह दिन हो चुके हैं। एकतरफ चिंताएं अगर गहराती जा रही हैं तो वहीं हमारी सरकारें –केन्द्र और राज्य, मजबूती से इस जैविक दुश्मन कोराना से डटकर मुक़ाबला कर रही हैं। इस लड़ाई में हर नागरिक की महत्वपूर्ण भूमिका है। घर पर रहकर हम इस लड़ाई में न सिर्फ़ अपनी सुरक्षा कर रहे हैं, बल्कि देश की सुरक्षा में भी अपनी भूमिका अदा कर रहे हैं।

Books in lockdown.

इस समय राजकमल प्रकाशन (Rajkamal Publications) ने #RajkamalFacebookLive के जरिए  लॉकडाउन में किताबों, लेखकों और कलाकारों को घर बैठे लोगों के बीच लाने के अपने सकारात्मक पहल में आज फिल्म जगत के अभिनेता, कलाकार, शायर, कथाकारों ने लाइव आकर लोगों के साथ बातें कीं और उनकी बातें सुनीं।

घरबंदी में किताबें कर रहीं मदद

अभिनेता गजराव ने कहा अपने पहले फ़ेसबुक लाइव में कहा कि, “मेरे लिए यह पहला अनुभव है जहाँ मैं फेसबुक पर लाइव हूँ लेकिन सामने कोई है नहीं, लोगों के कमेंट्स मिलते रहते हैं और खुशी होती है कि आपको लोग सुन रहे हैं।“ लाइव के दौरान उन्होंने दिल्ली में रहने के अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा, “मैं साहित्य अकादमी की लाइब्रेरी में जाकर किताबें पढ़ता था। श्रीराम सेंटर में किताब की दुकान हुआ करती थी जहाँ राजकमल पेपरबैक्स की किताबें कम कीमत पर मिल जाती थीं। इसने मेरा बहुत साथ दिया। और आज भी ये किताबें घरबंदी में मेरा साथ दे रही हैं।“

गजराज राव ने लाइव के दौरान बातचीत में बताया कि, हरिशंकर परसाई, मंटो और आलोक तोमर की किताब ‘पाप के दस्तावेज’ , मेरी हमसफ़र रहीं हैं। ये हमेशा मेरे साथ रहती हैं। गजराज राव के साथ, उनसे हरिशंकर परसाई के व्यंग्य और गुलज़ार की कहानी लाइव सुनना एक शानदार अनुभव रहा।

कथाकार एवं पत्रकार अकांक्षा पारे काशिव ने शनिवार की दोपहर कहानी- पाठ के जरिए हमारे समय के कई महत्वपूर्ण प्रश्नों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने राजकमल प्रकाशन से प्रकाशित अपने कहानी संग्रह ‘तीन सहेलियां तीन प्रेमी’ से कहानी पाठ किया।

लाइव के दौरान बातचीत में उन्होंने कहा, “अभी के माहौल में स्त्रियाँ दोहर-तिहरे काम से गुज़र रहीं हैं। बच्चे को संभालना, घर का काम देखना और वर्किंग होने की वजह से लैपटॉप पर काम, ये एक चेन की तरह दिन भर चलता रहता है। इसलिए लाइव कहानी पाठ के जरिए मैं इन्हीं विषयों पर बात करना चाहती थी।“

आधा गाँव से चलकर गुलज़ार तक

रेडियों से जुड़े रहे और फिलहाल कला के क्षेत्र में काम करने वाले हैदर रिज़वी ने राही मासूम रज़ा के ऐतिहासिक उपन्यास ‘आधा गाँव’  से एक छोटा सा अंश पढ़ कर सुनाया। सुनने वालों ने भी अपने कमेंट से पाठ को जीवंत बनाए रखा। राही मासूम रज़ा ने जब यह किताब लिखी तब उनके घर वाले भी उनसे नाराज़ हो गए थे। लेकिन उन्होंने किसी की परवाह न करते हुए कहा कि नफ़रत और खौफ़ की बुनियाद पर बनने वाली कोई भी चीज़ कभी मुबारक नहीं होती।

हैदर रिज़वी की आवाज़ में उपन्यास के लाइव पाठ ने ‘आधा गाँव’ के पुनर्पाठ के लिए लोगों को प्रेरित किया। रिज़वी का कहना है कि, “कहानियाँ हमारे बीच से निकलती हैं। हालात उन कहानियों के लिए खाद और पानी का काम करते है।“

फ़ेसबुक पर लाइव में अभिनेता गजराज राव से गुलज़ार की कहानी सुनना भी बहुत शानदार अनुभव था।

कहीं खीर तो कहीं शायरी – यहाँ सब मीठा है

शनिवार के दिन की शुरूआत भी सुबह ग्यारह बजे पुष्पेश पंत के ‘स्वाद-सुख’ कार्यक्रम से हुई जहाँ तमाम जायकों पर शानदार बातचीत होती है। आज के कार्यक्रम में ख़ास था ‘ख़ीर’। फिहलाह जहाँ, मिठाईयों की दुकानें बंद है वहाँ घर पर रहकर मीठे के तलब को कैसे दूर किया जाए और कैसे ख़ीर का रंग और स्वाद कोस-कोस पर बदलता है। ‘स्वाद-सुख’ के अपने कार्यक्रम में पुष्पेश पंत ने इसपर विस्तार से चर्चा की। इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी ख़ासियत है आम व्यंजनों के पीछे के इतिहास को जानना साथ ही उसके बनाने की आसान प्रक्रिया पर बातचीत।

शाम का पैग़ाम लेकर शायर आलोक श्रीवास्तव ने आज के हालात पर लिखे अपने गीत सुनाएं। उन्होंने, कोरोना की लड़ाई में फ्रंट पर काम कर रहे डॉक्टर, नर्स, पुलिस, सफाई कर्मचारी और तमाम वो लोग जो हमारे लिए बाहर इस मुश्किल से लड़ रहे हैं उनको समर्पित गीत प्रस्तुत किया।

“हर मुश्किल से टकराता हूँ / जो ठान लो वो कर जाता हूँ/ मैं अपनी पर जब आता हूँ / तो वक़्त से भी लड़ जाता हूँ/ बेहद जिद्दी इंसान हूँ / मैं असली हिन्दुस्तान हूँ…”

#StayAtHomeWithRajkamal

हैशटैग के साथ साहित्यकार और कलाकरा रोज़ राजकमल प्रकाशन समूह के फेसबुक पेज पर लाइव आकर, गीतों और बातों से आभासी दुनिया में जान डाल रहे हैं।

राजकमल प्रकाशन के फेसबुक पेज से अबतक लाइव आ चुके लेखक और कलाकार हैं – विनोद कुमार शुक्ल, ममता कालिया, मैत्रयी पुष्पा, मृदुला गर्ग, मृणाल पांडे, अनामिका, शिवमूर्ति, गीतांजलि श्री, ज्ञान चतुर्वेदी, मंगलेश डबराल, प्रियदर्शन, अल्पना मिश्र, सविता सिंह, हृषीकेश सुलभ, पुष्पेश पंत।

जावेद अख्तर, उषा उथुप, सौरभ शुक्ला, स्वानंद किरकिरे, हरप्रीत, अविनाश दास, चिन्मई त्रिपाठी

रविकांत, वंदना राग, कैलाश वानखेडे, यतीन्द्र मिश्र, कृष्ण कल्पित, आनंद प्रधान, गौरव सोलंकी, हिमांशु बाजपेयी, विनीत कुमार, प्रभात रंजन, अभिषेक शुक्ल, सोपान जोशी, प्रत्यक्षा, गिरीन्द्रनाथ झा, नवीन चौधरी, रामकुमार सिंह, अनघ शर्मा, अमरेन्द्र नाथ त्रिपाठी, उमेश पंत, त्रिलोकनाथ पांडेय, अशोक कुमार पांडेय, अश्विनी कुमार पंकज, राकेश तिवारी, अरूण देव, सुजाता, सुधांशु फिरदौस, व्योमेश शुक्ल, अदनान काफिल दरवेश, अंकिता आनंद, राजेश जोशी (पत्रकार), शिराज हुसैन, हिमांशु पंड्या, दारेन साहिदी।

सुमन परमार

पाठकों से अपील

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