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Amit Shah Narendtra Modi

सीएए, एनपीआर और एनआरसी की क्रोनोलाजी का पर्दाफाश, भाजपा सरकार के झूठ हुए बेनकाब – त्रिवेदी

नोटबंदी की ही तरह पूरे देश को नागरिकता के लिये कतार में खड़ा करना चाहती है मोदी सरकार

रायपुर/24 फरवरी 2020। सीएए, एनपीआर और एनआरसी की क्रोनोलाजी का पर्दाफाश करते हुए प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने मोदी सरकार की नीति और मंशा पर सवाल खड़ा किये  हैं। यह सही है कि अभी तक देश के केवल एक राज्य असम में एनआरसी हुआ है, लेकिन जहां एनआरसी हुआ उस असम में लाखों हिन्दू और मुसलमान सब भारत की नागरिकता से वंचित हुए।

प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि छत्तीसगढ़ में इन प्रावधानों को लागू करने की मोदी सरकार की मंशा से सबसे ज्यादा आदिवासियों को और खासकर बस्तर अबूझमाड़ के रहने वालों को परेशानी उठानी पड़ेगी। भूमिहीन मजूदर किसानों और समाज के गरीब वर्गों के लोगों के साथ-साथ देवार जैसी घुमंतु जातियों के लोग सबसे ज्यादा परेशान होंगे। यही मोदी सरकार की वास्तविक मंशा भी है।

गृह मंत्रालय की वार्षिक रिपोर्ट 2018-19 में कहा गया है कि, ’एनपीआर, एनआरसी को लागू करने का पहला कदम है। एनपीआर के बिना एनसीआर नहीं हो सकता।

अप्रैल 2019 में अमित शाह ने कहा था कि पहले सीएए आएगा, उसके बाद एनआरसी आएगा। 9 दिसंबर 2019 को लोकसभा में अमित शाह ने सीएए के पास होने के बाद राष्ट्रव्यापी एनआरसी की बात की। ऐसे में सीएए-एनआरसी के ताल्लुक को नकारना दूसरा झूठ है।

20 जून 2019 को संसद के संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति के संबोधन में कहा गया है कि सरकार ने एनआरसी को प्राथमिक के आधार पर लागू करने का फैसला किया है। मोदी जी कैसे कह सकते हैं कि सरकार में आने के बाद एनआरसी पर कोई चर्चा नहीं हुई?

प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि भाजपा कहती है कि एनआरसी की प्रक्रिया को न तो अधिसूचित किया गया और न ये कानूनी है। यह पूरी तरह झूठ है, क्योंकि यह भी झूठ है कि 2003 में जब एनआरसी एडॉप्ट किया गया, तो उसके अनुच्छेद 14A में इसके कानूनी होने का उल्लेख है और उसमें देश के प्रत्येक नागरिक को पहचान पत्र की बात है। “NRC process is not legalized, NRC has not been notified.” में जब एनआरसी 2003 अडोप्ट किया गया, 1955 सिटीजन एक्ट के अंतर्गत,  Clause 14 (a) says – “that talks of maintaining a National Register of Indian Citizen. It is already in the law. In 2003 when Vajpayee Ji was in power they established a National Register Authority under the RGI Act and that authority will draft frame rules and a National Identify Card for each citizen of India will be given.

अगर कानून में ये प्रावधान पहले ही है और वो नोटिफाइड है तो भाजपा कैसे कह सकती है कि 2003 एनआरसी की प्रक्रिया अधिसूचित नहीं की गयी और यह कानून में नहीं है।

प्रदेश कांग्रेस के महामंत्री एवं संचार विभाग के अध्यक्ष शैलेश नितिन त्रिवेदी ने कहा है कि यह भी झूठ है कि एनआरसी अभी शुरू होना है, जबकि पहली अप्रैल से एनआरसी शुरू होने का नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। Clause 4 of the Rules of 2003 says – “Population Register to be prepared by collecting information relating to all persons who are usually residing within the jurisdiction of the local Registrar.” This is part of Clause 4 of Rules of 2003 and Minister of State Rijiju said on July 23 in Parliament – NRC based on collection of data under the scheme of the National Population Register. House to house enumeration to start from 1 April, 2020 and to end on 30 September, 2020, notified through a gazette notification on July 31, 2019. Another lie, it is notified, gazette- this process will start form April, 1.

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