क्या आप जानते हैं कभी खरगोश के आकार का होता था ऊंट!

क्या आप जानते हैं कभी खरगोश के आकार का होता था ऊंट!

ऊंट का महत्व क्या है? बड़े काम का पशु है ऊँट

आपने ऊंट तो जरूर देखा होगा। क्या आप ऊँटों का महत्त्व जानते हैं? सीधा-सादा सा लगने वाला यह प्राणी बड़े काम की चीज है।  रेगिस्तानी इलाकों में, जहां रेत ही रेत होता है, ऊंट के बिना जीवन ही अस्त-व्यस्त हो सकता है। प्रकृति ने ऊंट के शरीर की बनावट भी ऐसी बनाई है जो कि रेतीली जगह और भयंकर गर्मी के अनुकूल है।

भारत में ऊंट कहां पाए जाते हैं?

भारत में में ज्यादातर ऊंट राजस्थान में पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त पंजाब, हरियाणा, गुजरात, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश आदि राज्यों में भी ऊंट पाये जाते हैं।

ऊंट के बारे में दिलचस्प जानकारी

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि आज जिस विशालकाय जीव को हम ऊंट के रूप में देखते हैं, कभी वह खरगोश के आकार का हुआ करता था। करीब पचास हजार वर्ष पूर्व कैमलेस वर्ग के इन जीवों की उत्पत्ति हुई थी। नवपाषाण काल में भी जंगली ऊंट उत्तरी अमेरिका में पाए जाते थे।

ऊंट की खासियत क्या है?

प्राय: ऊंट की विशेषता यह होती है कि घोड़े, कुत्ते, हाथी आदि अन्य जानवरों की तरह यह अपने मन से काम करने वाला जीव नहीं है और शीघ्र अपने मालिक की आज्ञा नहीं मानता। लेकिन, जब इस पर बोझा लाद दिया जाता है, तो यह शांत रूप से अपना बोझा लेकर चलता रहता है।

ऊंट पालतू कैसे बनाया गया? ऊंट को रेगिस्तान का जहाज क्यों कहते हैं?

लगभग एक हजार वर्ष पहले ही ऊंट को पालन-पोषण कर उसे पालतू बनाया गया। अफ्रीका और एशिया के रेगिस्तानी इलाकों में ऊंटों द्वारा बहुत सारे कार्य कराए जाते हैं क्योंकि ये आसानी से रेत पर चल सकते हैं और दूसरे प्राणियों की अपेक्षा बिना भोजन पानी के काफी दिनों तक जीवित भी रह सकते हैं।

रेतीले क्षेत्रों में, जहां सड़कों का अभाव है, वहां सामान को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ये ऊंट आसानी से पहुंचाते हैं। इसके अलावा इन क्षेत्रों में डाक पहुंचाने का काम भी इन्हीं से लिया जाता है।

ऊंट के बालों से ऊन बनाई जाती है जो सर्दियों में कपड़े बनाने के काम में आती है। ऊंट के दूध को भी पीने के काम में लाते हैं।

ऊंट के शरीर की बनावट कैसी होती है?

ऊंट की लंबाई सामान्यत: 6-7 फुट तक होती है और इसका वजन लगभग 450-725 किलो ग्राम होता है। ऊंट इसलिए भी बड़ा लगता है, क्योंकि उसके शरीर पर बालों की मोटी परत होती है। ये बाल बसंत ऋतु में कम हो जाते हैं और शीत ऋतु में पुन: आ जाते हैं। ये बाल मुख्यत: सिर गरदन और कूबड़ के पास ज्यादा होते हैं।

तीन परतों से ढंकी रहती हैं ऊंट की आंखें

ऊँट की आँखों की बाहर की दोनों परतों पर बाल होते हैं, जो बालू या रेत जो से रोकते हैं और अन्दर की पतली परत आंखों का भ्रम बनाए रखती हैं। मोटी पलकों और भौंहे सूर्य की सीधी और तेज किरणों से आंख की रक्षा करती हैं।

ऊंट का कूबड़

ऊंट की पीठ पर एक कूबड़ सा हाता है, जिसमें वसा का भंडार होता है। जब ऊंट को काफी समय तक भोजन नहीं मिलता है, तो वह ऊर्जा के लिए इसी कूबड़ की चर्बी का इस्तेमाल करता है। यदि काफी दिनों का ऊंट को खाना-पानी नहीं मिले तो उसका कूबड़ अपनी जगह से पर पहली जैसी दशा में आ जाता है।

कैसे होते हैं ऊंट के पैर?

ऊंट के पैर (camel’s feet) काफी शक्तिशाली होते हैं जो इसे बोझा ढोने में मदद करते हैं। ऊंट के घुटनों पर मोटी खाल की परत होती है, जो कि गद्दे का काम करती है। और ऊंट को उठने बैठने में काफी सहायता मिलती है। 

जीवन पर्यन्त तो यह मनुष्य की सेवा करता ही है, मरने के बाद भी ऊंट हमारे लिए बहुत उपयोगी है।

ऊंट की खाल से पर्स, जूते, कपड़े, गर्म कोट आदि बनाये जाते हैं और हड्डियां भी बर्तन और जेवर बनाने के काम आती हैं।

ऊंट की खाल पर अच्छी चित्रकारी भी की जाती है। ऊंट रेत पर चल ही नहीं पाता, क्योंकि उसके पैर रेत में धंस जाते। दरअसल ऊंट के शरीर का वजन उसके पैरों पर पड़ता है तभी जितना अधिक चौड़ा पंजा होगा पंजे पर उतना ही कम दाब पड़ेगा। क्योंकि इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले बल को दाब कहते हैं। इसका मतलब यह ऊंट का वजन जितना है उतना ही रहे यानि ऊंट का जितना चौड़ा पंजा होगा पंजे पर उतना ही कम दाब पड़ेगा। इस प्रकार ऊंट रेत में बिना पंजे और आसानी से रेत पर चल सकता है।

खाता क्या है ऊंट?

अपनी ऊंची गरदन की मदद से ऊंट अधिकतर कांटेदार झाड़ियों तथा बबूल आदि खाता है। इसके अलावा ऊंट को फाग, पीपल, शीशम, गूलर और आम आदि की पत्तियां भी अच्छी लगती हैं।

ताकत के लिए ऊंट के मालिक उन्हें खजूर गेहूं भी खिलाते हैं। यदि खाने पीने की बहुत ही कमी हो तो वह मछली, हड्डियां, मांस, खाल आदि कुछ भी खा सकता है।

जब ऊंट के मालिक उन्हें लंबी यात्रा पर ले जाते हैं, तो उसके कुछ दिन पूर्व से उसकी खिलाई-पिलाई पर ध्यान दिया जाता है जिससे ऊंट की कूबड़ की चर्बी बढ़ जाती है। 

ऊंट का महत्व क्या है?

भले ही आज ऊंटों का स्थान गाड़ी, ट्रक,कार और हवाई जहाज ने ले लिया है, परंतु इसके बावजूद भी ऊंट का महत्व (importance of camel) नकारा नहीं जा सकता है। आज भी ऊंट के उत्थान और विकास के लिए अनेक प्रयत्न किए जा रहे हैं।

1984 में ऊंट से सम्बधित अनुसंधानों के लिए बीकानेर में ऊंट अनुसंधान केन्द्र की स्थापना भी की गई थी, जिसके फलस्वरूप ऊंट -अनुसंधान के क्षेत्र में नए आयाम जुड़े हैं।

camel in hindi
ऊँट पर सरल निबंध

(मूलतः देशबन्धु में प्रकाशित लेख का किंचित् संपादित रूप साभार)

Cute monkey playing | Love Nature | Wildlife | hastakshep | हस्तक्षेप

हमें गूगल न्यूज पर फॉलो करें. ट्विटर पर फॉलो करें. वाट्सएप पर संदेश पाएं. हस्तक्षेप की आर्थिक मदद करें

Enter your email address:

Delivered by FeedBurner