यूपी में जारी सरकारी आदेश से हो सकते जनजाति के दर्जे से वंचित आदिवासी

आइपीएफ ने पत्र भेज शासनादेश संशोधन की उठाई मांग

आदिवासियों पर आरएसएस-भाजपा सरकार के हमले के विरूद्ध चलेगा अभियान

Campaign will run against the attack of the RSS-BJP government on the tribals

सोनभद्र, 9 सितम्बर 2020, प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा 16 जुलाई को जाति प्रमाणपत्र बनाने के लिए जारी शासनादेश से सोनभद्र के गोंड़, खरवार, पनिका समेत 2003 में आदिवासियों का दर्जा पायी जातियां इस दर्जे से वंचित हो संकती है। इसमें संशोधन के लिए आज आल इंडिया पीपुल्स फ्रंट और आदिवासी वनवासी महासभा की तरफ से ईमेल द्वारा मुख्यमंत्री को पत्र भेजा गया।

आइपीएफ नेता दिनकर कपूर द्वारा भेजे पत्र की प्रतिलिपि आयुक्त और प्रमुख सचिव समाज कल्याण को भी आवश्यक कार्यवाही हेतु भेजी गयी है।

सीएम को भेजे गए पत्र में कहा गया कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति आदेश (संशोधन) अधिनियम 2002 द्वारा 8 जनवरी 2003 को प्रदेश की आदिवासी गोंड़ जाति को सोनभद्र, मिर्जापुर समेत 13 जनपदों में, खरवार को सोनभद्र समेत 5 जनपदों में, पनिका व चेरो को सोनभद्र समेत 2 जनपदों में, बैगा, अगरिया, पठारी, चेरो, भुइंया, परहिया को सोनभद्र जनपद में और सहरिया को ललितपुर जनपद में अनुसूचित जनजाति में सम्मलित किया गया था। लेकिन नए शासनादेश में संसद द्वारा पारित और भारत के राजपत्र में प्रकाशित इस अधिनियम का उल्लेख ही नहीं है। इसके कारण आदिवासी का दर्जा पायी जातियों को जनजाति का जाति प्रमाण पत्र प्राप्त करने में दिक्कतों का सामना करना पडेंगा बल्कि कहे तो हमें संदेह है कि इन्हें अनुसूचित जनजाति का जाति प्रमाण पत्र जारी ही नहीं होगा।

पत्र में कहा गया कि एक तरफ प्रदेश की आदिवासी जाति कोल व धांगर को अनुसूचित जनजाति का दर्जा आज तक नहीं मिला और चंदौली जनपद की गोंड़, खरवार व चेरों को अनुसूचित जनजाति की सूची में सम्मलित भी नहीं किया गया है। हालत इतने बुरे है कि आदिवासी धांगर जाति का अनुसूचित जाति का दर्जा भी छीन लिया गया है और उनके जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने पर पुनः रोक लगा दी गयी है। उत्तर प्रदेश सरकार के समाज कल्याण विभाग द्वारा लगातार विधि के विरूद्ध और मनमर्जीपूर्ण कार्यवाहियां की जा रही है।

प्रेस को जारी अपने बयान में आइपीएफ नेता ने कहा कि प्रदेश में लगातार आदिवासियों पर जारी आरएसएस-भाजपा सरकार के हमलों और विशेषकर उनके आदिवासी दर्जे की समाप्ति की कोशिश के खिलाफ बड़े पैमाने पर हस्ताक्षर अभियान चलाया जायेगा और जुलाई में जारी शासनादेश को संशोधित कर आदिवासियों के संवैधानिक अधिकार संरक्षित व सुरक्षित करने की सीएम से मांग आदिवासी समाज करेगा। उन्होंने आदिवासी हितों की रक्षा के लिए जनपद के सभी संगठनों, दलों और लोकतंत्र पंसद नागरिकों से एक साथ आने की अपील की।

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उपाध्याय अमलेन्दु:
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