कोविड-19 से बचाव के मामले में बेहतर है कनाडा

Justin Trudeau

Canada is better in terms of defense against COVID-19

कनाडा और अमेरिका एक दूसरे के पड़ोसी देश हैं, पर कोविड-19 से निपटने के मामले में दोनों देशों में जमीन-आसमान, या दिर दिन-रात जैसा अंतर है. 12 जुलाई तक कनाडा में कोविड-19 के कुल 1,07,000 मामले दर्ज किये गए थे और इससे कुल 8,765 व्यक्तियों की मौत हुई थी, जबकि पड़ोसी देश अमेरिका इससे दुनिया का सबसे प्रभावित देश है और इस तारीख तक यह आंकड़ा क्रमशः 33,21,900 और 1,37,073 था.

आंकड़ों से स्पष्ट है कि अमेरिका में कोविड-19 से जितनी मौतें (Covid-19 deaths in America) हो गईं, उतने लोग कनाडा में इससे संक्रमित भी नहीं हुए. आंकड़ों में अंतर की तरह ही अमेरिकी राष्ट्रपति और कनाडा के प्रधानमंत्री की कार्यशैली में भी अंतर है.

अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस (US Independence Day), चार जुलाई को राष्ट्रपति ट्रम्प माउंट रशमोरे में बिना मास्क लगाए, बिना सोशल डिस्टेसिंग वाली बड़ी भीड़ को कोविड-19 की रोकथाम (Covid-19 prevention) में स्वयं को दुनिया का विजेता घोषित कर रहे थे. दूसरी तरफ, एक जुलाई को जब कनाडा में राष्ट्रिय अवकाश था, तब प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो (Justin Trudeau) भीड़ से दूर अपने परिवार के सदस्यों के साथ ओटावा के फ़ूड बैंक फार्म्स में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए और मास्क लगाकर ताजी सब्जियां तोड़ रहे थे. अनेक समाचारपत्रों में प्रकाशित इन दोनों घटनाओं के छायाचित्रों में जितना अंतर था, वही अंतर दोनों सरकारों का कोविड-19 के सन्दर्भ में भी रहा है.

कनाडा में जहां नए मामले लगातार कम होते जा रहे हैं, वहीं अमेरिका में हरेक दिन एक नया विश्व-रिकॉर्ड स्थापित होता है. हाल में ही ट्रूडो ने कहा भी था, हम अपने अनेक मित्र राष्ट्रों, विशेषकर अपने पड़ोसी की तुलना में वायरस को बेहतर तरीके से नियंत्रित कर पाए.

यह अंतर वायरस के पहले मामले से ही स्पष्ट हो गया था. एक तरफ जहां अमेरिका में राष्ट्रपति ट्रम्प इसे लम्बे समय तक नकारते रहे, चीन का मजाक उड़ाते रहे और बेतुके बयान देते रहे, वहीं कनाडा में ट्रूडो सरकार ने शुरू से ही सारा ध्यान स्वास्थ्य व्यवस्था को इसके लिए तैयार करने में लगाया.

यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोरंटो में संचारी रोगों के विशेषज्ञ डॉ इसाक बोगोच के अनुसार दोनों देशों में कोविड-19 के सन्दर्भ में दिन-रात का अंतर था. कनाडा की लगभग 4 करोड़ की कुल आबादी में अब प्रतिदिन 300 से भी कम मामले आ रहे हैं, और कुल सक्रिय मामले लगभग 28000 हैं, जबकि अमेरिका में जनसँख्या 9 गुना अधिक है और सक्रिय मामले 60 गुना, यानि 16 लाख हैं. डॉ इसाक के अनुसार अपने पड़ोसी देश की हालत देखना दुखद है क्योंकि ऐसी स्थिति से बचा जा सकता था. अब हालात ऐसे हो गए हैं कि 80 प्रतिशत कनाडाई नागरिक कनाडा-अमेरिका सीमा तब तक बंद रखना चाहते हैं, जब तक अमेरिका की स्थिति में सुधार नहीं होता.

Difference in context of Covid-19 in US and Canada

अमेरिका और कनाडा में कोविड-19 के सन्दर्भ में अंतर दोनों देशों की भौगोलिक परिस्थितियों या फिर भाग्य के कारण नहीं है. कनाडा की स्वास्थ्य सेवायें बेहतर हैं और सबके लिए उपलब्ध हैं, वहां के नागरिक सरकार पर और जन-स्वास्थ्य अधिकारियों पर पूरा भरोसा करते हैं. शुरुआती दिनों में कनाडा में जन-स्वास्थ्य अधिकारियों ने सोशल मीडिया, मेनस्ट्रीम मीडिया और फ़ोन के माध्यम से लगातार जनता को वायरस के प्रति आगाह किया और निर्देश जारी किये, सरकार हर संभव मदद करती रही. जनता में कर्तव्य की भावना पैदा की गई. इन सबसे लॉकडाउन को जनता ने एक कर्तव्य की तरह स्वीकार किया, सजा की तरह नहीं.

डॉक्टर इसाक के अनुसार हम लगातार लॉकडाउन का सख्ती के साथ पालन इसलिए करते रहे क्योंकि सरकार और जन-स्वास्थ्य अधिकारियों ने ऐसा करने को कहा, और नागरिक अपने कर्तव्य की तरह इसका पालन करते रहे. अमेरिका में राष्ट्रपति ने स्वयं फेस मास्क का मजाक उड़ाया, इसे नहीं पहना तो जाहिर है वहां की जनता के लिए यही आदर्श था. इसके विपरीत कनाडा में सबने मास्क पहना और शारीरिक दूरी के नियमों का सख्ती से पालन किया.

कनाडा के कोविड-19 पर जल्दी नियंत्रण करने के राजनैतिक कारण भी हैं.

कोविड-19 के पहले जस्टिन ट्रूडो एक अल्पसंख्यक सरकार के कमजोर नेता थे. पिछले चुनाव में बड़ी कठिनाई से वे जीत पाए थे, पर कोविड-19 के खतरों को जल्दी भांपकर सख्त कदम उठाने के कारण उनकी राजनैतिक साख बढ़ गई. उन्होंने विपक्ष को भी भरोसे में लिए, उनके साथ इस मसाले पर बैठकें कीं और उनके सुझावों को नीतियों में शामिल किया. इस कारण कोविड-19 से निपटने में उन्हें विपक्ष का भरपूर सहयोग मिला. जनता और व्यापार के जिस वर्ग को सहायता की जरूरत थी, वह शुरूआती दौर में ही दे दी गई, इससे लॉकडाउन का पालन जनता ने बड़ी तन्मयता से किया. कनाडा उन चन्द देशों में शुमार है, जहां के स्वास्थ्य कर्मियों को भी अग्रिम आर्थिक सहायता दी गई.

शुरुआती दौर में ही जस्टिन ट्रूडो की पत्नी, सोफी ग्रेगोरी ट्रूडो, को शुरुआती दौर में ही कोविड-19 के संक्रमण हो गया था, इसके बाद प्रधानमंत्री भी सेल्फ-आइसोलेशन में थे.

बहुत सारे विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड-19 से होने वाली परेशानियों को नजदीक से देखने के कारण जस्टिन ट्रूडो समय रहते प्रभावी फैसले लेने में सक्षम रहे और स्वास्थ्य कर्मियों की परेशानियों को समझा.

प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की कोविड-19 से निपटने में तो तारीफ़ हो रही है, पर वे समय-समय पर अनेक मामलों में आलोचना के शिकार होते हैं. हाल में ही उनके परिवार के एक अंतर्राष्ट्रीय चैरिटी संस्था से संबंधों को लेकर विपक्ष हमलावर है.

जून में वी चैरिटी नामक संस्था को कनाडा सरकार ने छात्रों के बीच काम करने के लिए 90 करोड़ कनाडियन डॉलर का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया था. विपक्ष का कहना है कि इस चैरिटी संस्था के साथ ट्रूडो के परिवार वालों, माँ, पत्नी और भाई के सम्बन्ध हैं और इसके आयोजनों में इनके सम्मिलित होने पर चैरिटी की तरफ से इन्हें आर्थिक मानदेय दिया जाता है, इसलिए यह कंफ्लिक्ट ऑफ़ इंटरेस्ट का मामला है.

यह मामला अब आचार-विचार की जांच समिति के पास है. शुरू में चैरिटी संस्था और प्रधानमंत्री, दोनों ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया था, पर बाद में पहले चैरिटी संस्था और बाद में प्रधानमंत्री ने इन आरोपों को स्वीकार किया. पर, प्रधानमंत्री ने बताया कि इस चैरिटी की सेवायें लेने में उनकी कोई भूमिका नहीं है.
महेंद्र पाण्डेय Mahendra pandey लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।
महेंद्र पाण्डेय Mahendra pandey
लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं।

अब चैरिटी संस्था ने बताया है कि वर्ष 2016 से अबतक मार्गरेट ट्रूडो को चैरिटी से जुड़े आयोजनों में भागीदारी के लिए लगभग 2.5 लाख कैनेडियन डॉलर का भुगतान किया गया है. मार्गरेट ट्रूडो, जस्टिन ट्रूडो की माँ हैं और पूर्व प्रधानमंत्री पिएरे ट्रूडो की पत्नी हैं. वे एक मनोवैज्ञानिक हैं और छात्रों में तनाव कम करने के सन्दर्भ में बच्चों के साथ लगातार वर्कशॉप आयोजित करती हैं. जस्टिन ट्रूडो जिस गठबंधन की अगुवाई कर रहे हैं, उसमें भी अनेक दल अब कहने लगे हैं कि आचार-विचार समिति की रिपोर्ट आने तक ट्रूडो को अपने पद से हट जाना चाहिए.

ट्रूडो ने अपने दौर में सामाजिक सरोकार वाले हरेक इंडेक्स में कनाडा को अमेरिका से आगे रखा है. कनाडा का स्थान हैप्पीनेस इंडेक्स 2019 में 9वां, डेमोक्रेसी इंडेक्स 2019 में 6ठा, जेंडर इक्वलिटी इंडेक्स 2019 में 11वां और एनवायर्नमेंटल परफॉरमेंस इंडेक्स 2018 में 25वां है. इन सारे इंडेक्स में अमेरिका का स्थान क्रमशः 19, 25, 19 और 27 है.

जस्टिन ट्रूडो ने अपने दौर में विकासवाद, सामाजिक समानता और लैंगिक समानता को बहुत बढ़ावा दिया है. वे रंगभेद विरोधी आन्दोलनों के समर्थक हैं और देश की मूल जनजातियों से हमेशा संवाद कर उनकी परेशानियों को दूर करते हैं. दुनिया के बड़े देशों में कनाडा अकेला देश है जो जीडीपी आधारित अर्थव्यवस्था के बदले सामाजिक संतुष्टि आधारित अर्थव्यवस्था की योजना बना रहा है.

 महेंद्र पाण्डेय

 

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