एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 29 जून 2022 की खास खबर

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ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस

Top headlines of India today. Today’s big news 29 June 2022

उदयपुर हत्याकांड : गृह मंत्रालय ने जांच एनआईए को सौंपी

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उदयपुर में कन्हैया लाल हत्याकांड की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मामले में कहीं कोई आतंकी पहलू तो नहीं है।

जमीयत उलेमा हिंद ने उदयपुर हत्याकांड की निंदा की

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जमीयत उलेमा हिंद ने राजस्था के उदयपुर में एक दर्जी की दर्दनाक हत्या को ‘गैर-इस्लामी’ करार दिया है।

झारखंड : उच्च न्यायालय ने राज्य के गृह सचिव को किया तलब, सभी जिला अदालतों में सीसीटीवी लगाने का निर्देश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में गवाहों की सुरक्षा के मामले में राज्य के गृह सचिव को अदालत में तलब किया। बीते 8 जून को जमशेदपुर की एक कोर्ट में गवाही देने के कुछ घंटों बाद ही मनप्रीत सिंह नामक एक युवक की हत्या के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था। इसी मामले में गृह सचिव राजीव अरुण एक्का अदालत में हाजिर हुए। उच्च न्यायालय ने उन्हें राज्य की सभी जिला अदालतों में हाई क्वालिटी सीसीटीवी कैमरा लगाने और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने का निर्देश दिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने मुकेश अंबानी को सुरक्षा देने के मामले में त्रिपुरा उच्च न्यायालय के फैसले पर लगाई रोक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और उनके परिवार को दिए गए सुरक्षा कवर की जांच करने के त्रिपुरा उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी है।

भारत में कोविड के 14,506 नए मामले दर्ज, 30 मौतें

भारत में आज बीते 24 घंटों के दौरान 14,506 नए कोविड-19 के मामले दर्ज किए गए, जो मंगलवार को सामने आए 11,793 से काफी अधिक हैं।

डीआरडीओ और भारतीय सेना ने किया स्वदेशी लेजर-गाइडेड एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल परीक्षण

भारत में विकसित लेजर-गाइडेड एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) का रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा भारतीय सेना द्वारा 28 जून को सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। यह परीक्षण मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) अर्जुन से अहमदनगर में आर्मर्ड कोर सेंटर एंड स्कूल (एसीसी एंड एस) केके रेंज में किया गया।

कैबिनेट ने घरेलू उत्पादित कच्चे तेल की बिक्री के विनियमन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने 01 अक्टूबर 2022 से ‘घरेलू उत्पादित कच्चे तेल की बिक्री के विनियमन’ को मंजूरी दे दी है, सरकार ने कच्चे तेल और कंडेनसेट के आवंटन को रोकने का फैसला किया है। इससे सभी अन्वेषण और उत्पादन (ई एंड पी) ऑपरेटरों के लिए स्वतंत्र रूप से विपणन करना सुनिश्चित होगा। सरकार या उसकी नामित या सरकारी कंपनियों को कच्चा तेल बेचने के लिए उत्पादन साझाकरण अनुबंध (पीएससी) की शर्त में तदनुसार छूट दी जाएगी। सभी ई एंड पी कंपनियों को अब घरेलू बाजार में अपने क्षेत्रों से कच्‍चा तेल बेचने की स्‍वतंत्रता होगी।

देश के पहले स्वदेश निर्मित एमआरएनए कोविड वैक्सीन को डीसीजीआई ने दी मंजूरी

भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने देश के पहले स्वदेशी एमआरएनए कोविड टीके को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी 18 साल और उससे अधिक आयु के लोगों के आपात इस्तेमाल के लिए दी गई है।

बिहार : विधानसभा में अग्निपथ को लेकर हंगामा जारी, अध्यक्ष के चैंबर के बाहर धरने पर बैठे विपक्षी विधायक

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन आज विपक्ष ने अग्निपथ योजना को वापस लेने की मांग को लेकर हंगामा किया और सदन का वहिष्कार करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर के सामने धरने पर बैठ गए।

हाई स्पीड एक्सपैंडेबल एरियल टार्गेट – अभ्यास – का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण संपन्न

हाई स्पीड एक्सपैंडेबल एरियल टार्गेट (एचईएटी) का 29 जून, 2022 को ओडिशा के तट पर स्थित चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) से सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया। उड़ान परीक्षण के दौरान निरंतर स्तर तथा उच्च गतिशीलता सहित कम ऊंचाई पर विमान का निष्पादन प्रदर्शित किया गया।

बिहार में एआईएमआईएम के 5 में से 4 विधायक राजद में शामिल

बिहार में ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहाद उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के चार विधायक राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में शामिल हो गए। इसके साथ ही बिहार में राजद सबसे बडी पार्टी हो गई। राजद के विधायकों की संख्या अब 80 हो गई।

शतरंज ओलंपियाड मशाल रिले ने उत्तर भारत के 20 शहरों से गुजरने के बाद पश्चिमी भारत में प्रवेश किया

पहली शतरंज ओलंपियाड मशाल रिले ने आज सुबह जयपुर पहुंचने के साथ ही पश्चिमी भारत में प्रवेश किया। अजमेर से गुजरने के बाद यह मशाल रिले अहमदाबाद में प्रवेश करेगी और फिर केवड़िया, वडोदरा, सूरत, दांडी, दमन, नागपुर, पुणे, मुंबई और पंजिम की यात्रा करेगी। इसके बाद यह मशाल रिले भारत के पूर्वी भाग, उत्तर-पूर्वी भारत में प्रवेश करेगी और दक्षिण भारत में समाप्त होगी।

उत्तर भारत के पहले चरण में, यह मशाल पिछले 10 दिनों में दिल्ली, जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 20 शहरों से होकर गुजरी।

नेपाल के तराई क्षेत्र में बारिश और बाढ़ से एक की मौत, सैकड़ों विस्थापित

नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण आई बाढ़ में एक व्यक्ति की मौत हो गई और सैकड़ों परिवार विस्थापित हो गए।

मंकीपॉक्स वायरस को रोकने के लिए अमेरिका में जल्द शुरू होगा टीकाकरण अभियान

व्हाइट हाउस ने कहा है कि वह मंकीपॉक्स के वायरस को रोकने के लिए जल्द ही देश भर में टीकाकरण अभियान शुरू करेगा।

फेसबुक और इंस्टाग्राम हटा रहे गर्भपात की गोलियों की पेशकश करने वाले पोस्ट

फेसबुक और इंस्टाग्राम ने अमेरिका में उन पोस्ट को तुरंत हटाना शुरू कर दिया है जो महिलाओं को गर्भपात की गोलियों की पेशकश करते हैं। साथ ही इन यूजर्स पर अस्थायी रूप से बैन भी लगा दिया है।

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 28 जून 2022 की खास खबर

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ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस

Top headlines of India today. Today’s big news 28 June 2022

असम के सिलचर में 10 दिनों से बाढ़ में घिरे लोगों को जल जनित बीमारियां फैलने का खतरा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक असम में बराक नदी के पानी से 10 दिनों से घिरे सिलचर शहर के कई हिस्से आज भी पानी में डूबे रहे। यहां के निवासियों को अब जल जनित बीमारियों के फैलने की आशंका है।

पवन हंस हेलिकॉप्टर की अरब सागर में करनी पड़ी आपात लैंडिंग, पाँच को बचाया गया

प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से करीब 175 किलोमीटर दूर मुंबई हाई फील्ड्स के पास सागर किरण तेल रिग के पास एक पवन हंस हेलीकॉप्टर की अरब सागर के पानी में आपात स्थिति में लैंडिंग की गई।

महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट के बीच दिल्ली पहुंचे देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक संकट के बीच भाजपा नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ स्थिति पर चर्चा करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे।

तमिलनाडु आदिवासी छात्रों को देगा विशेष खेल प्रशिक्षण

प्राप्त जानकारी के अनुसार तमिलनाडु आदिवासी विभाग, जिला प्रशासन के सहयोग से आदिवासी छात्रों के लिए विशेष खेल प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करेगा।

माकपा नेता टी. शिवदास मेनन का 90 वर्ष की उम्र में निधन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वरिष्ठ माकपा नेता और केरल के पूर्व वित्त मंत्री टी. शिवदास मेनन का मंगलवार को कोझीकोड के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।

ब्राजील का केंद्रीय बैंक बोला : महंगाई का सबसे बुरा दौर खत्म

सेंट्रल बैंक ऑफ ब्राजील के अध्यक्ष रॉबटरे कैंपोस नेटो ने कहा कि महंगाई का सबसे बुरा दौर खत्म हो गया है।

51 साल के हुए दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क

 टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क, जिन्हें दुनिया का सबसे सफल तकनीकी उद्यमी और निवेशक कहा जाता है, आज 51 वर्ष के हो गए।

उत्तर प्रदेश : लखीमपुर खीरी में पकड़ी गई आदमखोर बाघिन

Tigress captured in Dudhwa

वन विभाग की एक टीम ने मंगलवार तड़के उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के खेराटिया गांव से एक बाघिन को पकड़ने में कामयाबी हासिल की। बाघिन और उसके शावक के बारे में माना जाता है कि वह आदमखोर बन गया था, कथित तौर पर क्षेत्र में पिछले दो वर्षो में लगभग 21 लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार थे।

1 जुलाई 2022 से चिन्हित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध

भारत 1 जुलाई, 2022 से पूरे देश में चिन्हित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं, जिनकी उपयोगिता कम और प्रदूषण क्षमता अधिक है, के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाएगा।

समुद्री पर्यावरण सहित स्थलीय और जलीय इकोसिस्टम पर एकल उपयोग वाली प्लास्टिक  वस्तुओं के प्रतिकूल प्रभावों को वैश्विक स्तर पर पहचाना गया है। एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के कारण होने वाले प्रदूषण को दूर करना सभी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती बन गया है।

29 जून, 2022 को मनाया जाएगा “सांख्यिकी दिवस”

सांख्यिकी दिवस 2022 की थीम है: सतत विकास के लिए डेटा

सांख्यिकी और आर्थिक नियोजन के क्षेत्र में प्रोफेसर (दिवंगत) प्रशांत चंद्र महलनोबिस के किए गए उल्लेखनीय योगदान के सम्मान में भारत सरकार ने उनकी जयंती के अवसर पर प्रत्येक वर्ष 29 जून को “सांख्यिकी दिवस” ​​के रूप में नामित किया है जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाने वाले विशेष दिवसों की श्रेणी में रखा गया है। इस दिवस का उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक योजना और नीति निर्धारण में सांख्यिकी की भूमिका और इसके महत्व के बारे में प्रोफेसर (दिवंगत) महलनोबिस से प्रेरणा लेने के लिए विशेष रूप से युवा पीढ़ी में जन जागरूकता पैदा करना है।

इस वर्ष सांख्यिकी दिवस, 2022 का मुख्य कार्यक्रम सशरीर मौजूदगी-सह-आभासी मोड के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन (एमओएसपीआई) और योजना राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह हैं।

पटना के बेउर जेल में 37 कैदी कोरोना संक्रमित

बिहार में एक बार फिर कोरोना ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि आज पटना की बेउर जेल के 37 कैदी कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए हैं।

नवंबर में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 और वनडे सीरीज खेलेगा भारत

ऑस्ट्रेलिया में आईसीसी टी20 विश्व कप के तुरंत बाद न्यूजीलैंड भारत के खिलाफ घर पर सीमित ओवरों की श्रृंखला खेलेगा।

खबरों में : रणजी ट्रॉफी, नासा, एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र, शिवसेना, रणजीतसिंहजी, मध्य प्रदेश क्रिकेट टीम, अपोलो ११.

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 27 जून 2022 की खास खबर

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ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस

उद्धव ठाकरे ने छीने बागी मंत्रियों के विभाग. बागी शिवसेना विधायकों को सुप्रीम कोर्ट से राहत, 12 जुलाई तक की समय सीमा

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक उठापटक के बीच महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने सोमवार को सभी नौ बागी मंत्रियों से उनके विभाग छीन लिए और उन्हें अन्य मौजूदा मंत्रियों को आवंटित कर दिया।

महाराष्ट्र : बागी शिंदे गुट ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा-विधायकों का जीवन खतरे में, मुम्बई में नहीं लड़ सकते हैं केस

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को शिवसेना के बागी विधायक एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाले धड़े से पूछा कि वे अपने मामले को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट क्यों नहीं गए? इस पर शिंदे गुट ने कहा कि उनका जीवन खतरे में हैं और माहौल इसके लायक नहीं है कि वे मुम्बई में अपने मामले की पैरवी कर सकें।

30 जून से केदारनाथ के लिए सभी हवाई सेवाएं बंद होंगी

आगामी 30 जून से केदारनाथ के लिए सभी हवाई सेवाएं बंद हो जाएंगी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक लगातार हो रही बारिश के चलते हेली कंपनियों ने यह निर्णय लिया है। पूर्व में हिमालयन हेली ने 10 जुलाई तक सेवाएं देने का निर्णय लिया था, लेकिन वह भी अपनी सेवाएं बंद कर देगी।

अग्निपथ: बिहार विधानसभा में जमकर हंगामा, कार्यवाही स्थगित

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन सेना में भर्ती योजना ‘अग्निपथ’ को वापस लेने की मांग को लेकर आज विपक्षी सदस्यों ने जमकर हंगामा किया। हंगामे के कारण विधानसभा की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

अग्निपथ योजना के विरोध में कांग्रेस का सत्याग्रह

केंद्र सरकार की अग्निपथ योजना के विरोध में कांग्रेस कार्यकर्ता विधानसभा क्षेत्रों में विरोध दर्ज कराने के लिए सत्याग्रह पर बैठे। दिल्ली में भी पार्टी की दिल्ली इकाई ने भी सत्याग्रह किया, सत्याग्रह पर बैठे नेताओं ने योजना को वापस लेने की मांग की।

राष्ट्रपति चुनाव के लिए यशवंत सिन्हा ने नामांकन दाखिल किया

अगले महीने होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिए संयुक्त विपक्ष के उम्मीदवार यशवंत सिन्हा ने आज नामांकन दाखिल किया।

भारत में कोविड-19 के मामलों में 45% इजाफा, 21 मौतें

भारत में सोमवार को कोविड-19 के 17,073 मामले (corona virus in India) दर्ज किए गए, जबकि रविवार को 11,739 मामले आए थे। इसे मामलों में 45 प्रतिशत की वृद्धि मानी जा रही है।

संगरूर लोकसभा उपचुनाव की हार के बाद आप का लोकसभा में अब कोई सदस्य नहीं

आम आदमी पार्टी के पंजाब के संगरूर संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव में हारने के बाद अब लोकसभा में उसका कोई सदस्य नहीं है।

लंबे इंतजार के बाद यूजीसी नेट का शेड्यूल जारी, परीक्षाएं 8 जुलाई से 14 अगस्त तक होंगी

लंबे समय से प्रतीक्षा कर रहे देशभर के लाखों छात्रों के लिए यूजीसी नेट का शेड्यूल जारी कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स में यूजीसी चेयरमैन एम जगदीश कुमार के हवाले से यूजीसी नेट परीक्षा के विषय में जानकारी देते हुए बताया गया है कि जून 2022 और दिसंबर 2021 के संयुक्त सत्र के लिए शेड्यूल तैयार किया गया है। यह परीक्षा 8 जुलाई से 14 अगस्त तक होगी। देशभर में अलग-अलग जगहों पर परीक्षा केंद्रों की कुल संख्या में 100 फीसदी से भी अधिक की वृद्धि की गई है।

प्रायोगिक तौर पर वन हेल्थ’ को कल बेंगलुरु में शुरू किया जायेगा

मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्रालय के अधीन पशुपालन और डेयरी विभाग (डीएएचडी) ने ‘वन-हेल्थ’ स्वरूप के जरिये पशुओं, मनुष्यों और पर्यावरण सम्बंधी स्वास्थ्य की चुनौतियों का मुकाबला करने के लिये हितधारकों को एक मंच पर लाने की पहल की है।

एक सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक बिल एवं मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन (बीएमजीएफ) के सहयोग से डीएएचडी और भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) क्रियान्वयन साझीदार के तौर पर कर्नाटक तथा उत्तराखंड राज्यों में ‘वन-हेल्थ’ प्रारूप को लागू करने की जिम्मेदारी वहन कर रहे हैं।

डीएएचडी कल कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में ‘वन हेल्थ’ को प्रायोगिक तौर पर शुरू करेगा। पशुपालन एवं डेयरी विभाग के सचिव अतुल चतुर्वेदी कर्नाटक में इस प्रायोगिक परियोजना का शुभारंभ करेंगे। इस अवसर पर केंद्र और राज्य के सभी प्रमुख गणमान्य और पशुधन, मानव संसाधन, वन्यजीव और पर्यावरण सेक्टर के हितधारक उपस्थित रहेंगे।

जर्मनी में जी7 शिखर सम्मेलन में बाइडेन, मैक्रों और ट्रूडो से मिले पीएम मोदी

जर्मनी में जी-7 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों और कनाडा के समकक्ष जस्टिन ट्रूडो से मुलाकात की।

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जानिए महिलाओं में कैल्शियम की कमी आम समस्या क्यों बनती जा रही है

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भारत की महिलाओं में कैल्शियम की कमी

नई दिल्ली, 25 जून 2022. विगत दिनों एक अध्ययन में बताया गया था कि भारत की महिलाओं में कैल्शियम की कमी (Calcium deficiency in Indian women) एक आम समस्या बनती जा रही है। यह खानपान की बदलती आदतों के कारण हो रहा है। पिछले कुछ दशकों में विशेष रूप से शहरी महिलाओं में भोजन संबंधी आदतों में बड़ा बदलाव आया है।

कैल्शियम की कमी कैसे पूरी करें?

देशबन्धु की एक पुरानी खबर के मुताबिक इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (Indian Medical Association आईएमए) के अनुसार लोग प्रसंस्कृत और डिब्बाबंद खाद्य पदार्थो पर तेजी से निर्भर होते जा रहे हैं, जिस कारण शरीर को संपूर्ण आहार नहीं मिल पा रहा है। विशेषज्ञों की सलाह है कि कैल्शियम की मात्रा आहार से लेनी चाहिए न कि सप्लीमेंट से।

आंकड़ों के मुताबिक, 14 से 17 साल आयु वर्ग की लगभग 20 प्रतिशत किशोरियों में कैल्शियम की कमी (Calcium deficiency in adolescent girls) पाई गई है।

हमारी हड्डियों की अच्छी सेहत के लिए कैल्शियम सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व क्यों होता है?

समाचार के मुताबिक हमारी हड्डियों का 70 प्रतिशत हिस्सा कैल्शियम फॉस्फेट (calcium phosphate) से बना होता है। यही कारण है कि कैल्शियम हमारी हड्डियों की अच्छी सेहत के लिए सबसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व होता है।

महिलाओं को पुरुषों की तुलना में अधिक कैल्शियम की आवश्यकता होती है क्योंकि वे उम्र के साथ हड्डियों की समस्याओं से अधिक जूझती हैं।

विटामिन डी की कमी वाले लोगों में अधिक होती है कैल्शियम की कमी की आशंका

आईएमए के तत्कालीन अध्यक्ष पद्मश्री डॉ. के.के. अग्रवाल के मुताबिक, “कैल्शियम के अच्छे से अवशोषण के लिए हमारे शरीर को विटामिन डी की आवश्यकता होती है। विटामिन डी की कमी वाले लोगों में, कैल्शियम की कमी की आशंका अधिक होती है, भले ही वे कैल्शियम का भरपूर सेवन कर रहे हों। इसका कारण यह है कि शरीर आपके भोजन से कैल्शियम को अवशोषित करने में असमर्थ है।”

कैल्शियम की कमी से क्या समस्याएं हो सकती हैं?

उन्होंने कहा कि विटामिन-डी रक्त में कैल्शियम की मात्रा को नियंत्रित करने के लिए जिम्मेदार है। विटामिन-डी का पर्याप्त सेवन कैल्शियम अवशोषण को बेहतर बनाने के साथ-साथ, हड्डियों की क्षति कम करता है। फ्रैक्चर का खतरा कम करता है और ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) रोग होने से रोकता है। कैल्शियम की कमी से कई समस्याएं हो सकती हैं, जैसे रक्त के थक्के बनना, रक्तचाप और हृदय की धड़कन बढ़ना, बच्चों में धीमा विकास, और कमजोरी व थकान।

वृद्ध महिलाओं की तुलना में युवतियों को कैल्शियम की ज्यादा जरूरत होती है।

कैल्शियम की बात करें तो, 9 से 18 साल आयु वर्ग की लड़कियों को 1300 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है, जबकि 19 से 50 साल की महिलाओं को 1000 मिलीग्राम कैल्शियम की जरूरत होती है। पचास वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं को 1200 मिलीग्राम की जरूरत होती है।

समाचार के मुताबिक डॉ. अग्रवाल ने बताया, “कई लोग डॉक्टर से सलाह के बिना कभी भी कैल्शियम की खुराक लेने लगते हैं। अगर बताई गई मात्रा में ली जाए तो यह अतिरिक्त कैल्शियम हृदय की सेहत के लिए ठीक है। हालांकि, आहार से मिलने वाले कैल्शियम पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए।”

कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने के टिप्स (Tips to increase calcium intake)

  • हर दिन कैल्शियम से समृद्ध आहार लेना चाहिए;
  • अपने शरीर का भार बढ़ाये बिना कैल्शियम की मात्रा सही रखने के लिए वसा-रहित दूध पीना चाहिए;
  • अन्य डेयरी उत्पादों में भी कैल्शियम होता है, जैसे कि दही और पनीर, लेकिन कम वसा वाली चीजों का ही चयन करें;
  • पत्तेदार साग-सब्जियों का अधिक सेवन करें।

Know why calcium deficiency is becoming a common problem in women

जानिए बढ़ती उम्र के साथ हड्डियों की सुरक्षा कैसे करें?

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स्वास्थ्य : हड्डियों की सुरक्षा

नई दिल्ली, 24 जून 2022. हमारे शरीर में कंकाल तंत्र की भूमिका (role of skeletal system in our body) अहम है। हड्डियां हमारे शरीर को एक ढांचा और संरचना प्रदान करती हैं और इसके साथ ही ये शरीर में कुछ महत्वपूर्ण अंगों की सुरक्षा भी करती हैं। हड्डियां कैल्शियम और फॉस्फोरस जैसे खनिजों के भंडारण व मांसपेशियों को गति प्रदान करने के लिए भी सहायक है। बचपन से लेकर बूढ़े होने तक की अवस्था में हड्डियों में कई तरह के बदलाव आते हैं।

उम्र बढ़ने के साथ बढ़ता जाता है ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा

30 साल की उम्र तक अस्थि द्रव्यमान घनत्व (bone mass density) अपने चरम पर पहुंच जाता है, जिसके बाद एकत्रित होने की तुलना में इस द्रव्यमान की मात्रा हड्डियों में धीरे-धीरे कम होने लगती है, जिससे ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) की स्थिति उत्पन्न होने लगती है, जिसका विकास उम्र बढ़ने के साथ होता जाता है। इसमें अस्थियां कमजोर व भंगुर हो जाती हैं। ऐसे में यदि किसी कारणवश हड्डी टूट जाए तो इन्हें वापस जोड़ना काफी मुश्किल हो जाता है।

50 की उम्र के बाद हड्डियों की सुरक्षा और देखभाल जरूरी

आंकड़ों के हिसाब से 50 साल से अधिक उम्र के व्यक्तियों में हड्डियों के आसानी से टूट जाने की प्रवृत्ति होती है। दो में से एक महिला और चार में से एक पुरुष में हड्डी महज इस वजह से टूट जाती है, क्योंकि वे ऑस्टियोपोरोसिस के शिकार हैं। ऐसे में इनकी सही देखभाल बहुत जरूरी है।

ऑस्टियोपोरोसिस के कारण

ऐसे कई जोखिम कारक हैं, जिससे समय से पहले ही लोग इस रोग का शिकार हो जाते हैं। दैनिक आहार में कैल्शियम या विटामिन डी में कमी, कम शारीरिक गतिविधि, वजन का बेहद कम होना, नशे का सेवन, हार्मोन का अनियमित स्तर और कुछ निश्चित दवाइयों का सेवन ऑस्टियोपोरोसिस को वक्त से पहले दावत दे सकता है।

जानिए ऑस्टियोपोरोसिस क्या है?

बीते दिनों फादर्स डे के अवसर पर यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशांबी गाजियाबाद वरिष्ठ ऑर्थोपेडिक्स एवं ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन डॉ अमित शर्मा ने बताया कि ऑस्टियोपोरोसिस एक ऐसी स्थिति है जिसके कारण हड्डियां कमजोर हो जाती हैं और उनकी ताकत कम हो जाती है, वे सामान्य हड्डियों की तुलना में अधिक आसानी से टूट जाती हैं।

साइलेंट किलर है ऑस्टियोपोरोसिस

Yashoda Super Specialty Hospital Kaushambi Ghaziabad Senior Orthopedics & Joint Replacement Surgeon Dr Amit Sharma
Yashoda Super Specialty Hospital Kaushambi Ghaziabad Senior Orthopedics & Joint Replacement Surgeon Dr Amit Sharma

डॉ अमित शर्मा ने कहा कि ऑस्टियोपोरोसिस को “साइलेंट किलर” कहा जाता है क्योकि  इस बीमारी में बिना लक्षणों के फ्रैक्चर होने खतरा बना रहता है। अधिकांश लोग ऑस्टियोपोरोसिस को केवल एक  “महिला रोग” के रूप में देखते हैं हालांकि, पिछले कुछ वर्षों में, पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या को एक महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दे के रूप में पहचाना गया है, विशेष रूप से 70 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों में।

डॉ अमित शर्मा ने बताया कि 60 वर्ष से अधिक आयु के लगभग 4-6% पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस होता है। पुरुषों में ऑस्टियोपोरोसिस के कारण आजीवन फ्रैक्चर का जोखिम 13 से 25% तक होता है।

हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जीवन शैली

देशबन्धु में प्रकाशित एक पुरानी खबर में फरीदाबाद के फॉर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में हड्डी विभाग के अतिरिक्त निदेशक डॉ. हरीश घूटा (Dr. Harish Ghuta, Additional Director, Orthopedics Department at Fortis Escorts Hospital, Faridabad) ने जीवन शैली से संबंधित कुछ बातें साझा की हैं, जो हड्डियों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में हमारी मदद करेंगी।

– कैल्शियम और विटामिन डी से भरपूर खाद्य और पेय पदार्थो को शामिल करना एक अच्छा कदम है। जैसे कि कम वसायुक्त दुग्ध उत्पाद यानी टोफू या सोया मिल्क, हरी पत्तेदार सब्जियां, फलियां, सैमन (एक प्रकार की मछली), बादाम इत्यादि को अपने दैनिक आहार में जरूर लें।

– शरीर को हफ्ते में दो से तीन बार दस से पंद्रह मिनट के लिए धूप जरूर दिखाए, क्योंकि सूरज की रोशनी विटामिन डी का एक अच्छा स्रोत है।

– इसके अलावा फोर्टीफाइड दूध, अनाज, सैमन, टूना मछली, झींगा या ओऐस्टर में भी विटामिन डी की अच्छी मात्रा पाई जाती है।

– नियमित तौर पर कम से कम आधा घंटा शारीरिक कसरत अवश्य करें। इससे हड्डियां और मांसपेशियां मजबूत होती हैं।

– तम्बाकू या शराब का सेवन त्याग दें।

– उम्र बढ़ने पर अस्थियों में द्रव्यमान के घनत्व की जांच नियमित तौर पर कराएं।

Web title : How to protect bones with increasing age?

जानिए ऑटोइम्यून रोग के बारे में : जब आपका शरीर आपके ही खिलाफ हो जाता है

autoimmune diseases in hindi

ऑटोइम्यून रोग को समझना

Understanding Autoimmune Diseases in Hindi : When Your Body Turns Against You

आपके शरीर की रोग रक्षा प्रणाली, जिसे प्रतिरक्षा प्रणाली कहा जाता है, प्रतिदिन युद्ध के लिए जाती है। यह आपके शरीर में घुसने वाले वायरस और बैक्टीरिया से लड़कर (fighting off viruses and bacteria ) आपको स्वस्थ रखने में मदद करता है। लेकिन कई बार आपका इम्यून सिस्टम गलतियां कर देता है। यदि यह आपके शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को खतरे के रूप में देखता है, तो यह उन पर हमला कर सकता है। इससे ऑटोइम्यून डिसऑर्डर (autoimmune disorder) हो सकता है।

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मासिक न्यूज़लैटर एनआईएच न्यूज़ इन हैल्थ के ताजा अंक में ऑटोइम्यून डिसऑर्डर्स और ऑटोइम्यून बीमारियों के विषय में विस्तार से चर्चा की गई है। जिसके मुताबिक

कई अलग-अलग ऑटोइम्यून बीमारियां हैं। कुछ में केवल एक प्रकार का ऊतक शामिल होता है। उदाहरण के लिए, वास्कुलिटिस नामक बीमारी (vasculitis) में, आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली आपकी रक्त वाहिकाओं पर हमला करती है। अन्य ऑटोइम्यून बीमारियों में शरीर के कई अलग-अलग हिस्से शामिल होते हैं। उदाहरणार्थ के लिए, ल्यूपस (Lupus) त्वचा, हृदय, फेफड़े और बहुत कुछ को नुकसान पहुंचा सकता है।

अधिकांश ऑटोइम्यून रोग सूजन का कारण बनते हैं। लेकिन वे जो लक्षण पैदा करते हैं, वे प्रभावित शरीर के अंगों पर निर्भर करते हैं। आपके जोड़ों या मांसपेशियों में दर्द हो सकता है। या आपको त्वचा पर चकत्ते, बुखार या थकान का अनुभव हो सकता है।

अधिकांश ऑटोइम्यून बीमारियों का क्या कारण है?

शोधकर्ता अभी भी यह नहीं जानते हैं कि अधिकांश ऑटोइम्यून बीमारियों का कारण क्या है। लेकिन उन्होंने यह समझने में जानकारी हासिल की है कि आपको क्या जोखिम में डालता है और उनका निदान और उपचार करने के तरीकों का पता लगाया है।

ट्रिगर क्या हैं? What Are the Triggers?

कुछ ऑटोइम्यून रोग दुर्लभ हैं, लेकिन अन्य काफी सामान्य हैं। ऑटोइम्यून बीमारियों के एनआईएच में विशेषज्ञ डॉ मारियाना कपलान (Dr Mariana Kaplan, an NIH specialist in autoimmune diseases) बताते हैं कि अमेरिका में लगभग एक फीसदी लोगों को रुमेटीइड गठिया है। रुमेटीइड गठिया (Rheumatoid arthritis) जोड़ों को नुकसान पहुंचाता है।

कुछ जीन आपको ऑटोइम्यून डिसऑर्डर विकसित करने के लिए उच्च जोखिम (higher risk for developing an autoimmune disorder) वाले होते हैं। वास्कुलाइटिस पर एनआईएच में विशेषज्ञ डॉ पीटर ग्रेसन (Dr Peter Grayson, an NIH expert on vasculitis) कहते हैं, लेकिन अकेले जीन आमतौर पर पर्याप्त नहीं होते हैं। उनकी टीम ने हाल ही में एक एकल जीन परिवर्तन पाया जो वृद्ध पुरुषों में वास्कुलिटिस का कारण (vasculitis in older men) बन सकता है।

ज्यादातर लोग जो ऑटोइम्यून बीमारियों से जुड़े जीन (genes linked with autoimmune diseases) को ढो रहे होते हैं उनमें अभी भी यह बीमारी विकसित नहीं होगी। आमतौर पर, प्रतिरक्षा प्रणाली को प्रेरित करने के लिए एक या अधिक ट्रिगर्स की आवश्यकता होती है।

मांसपेशियों की बीमारियों के एनआईएच में विशेषज्ञ डॉ एंड्रयू मैमेन (Dr Andrew Mammen, an NIH expert on muscle diseases) बताते हैं कि आपके वातावरण में अलग-अलग चीजें ट्रिगर का काम कर सकती हैं। उनकी टीम मायोसिटिस (myositis), एक ऐसी बीमारी जिसमें प्रतिरक्षा कोशिकाएं मांसपेशियों पर हमला करती हैं, का अध्ययन कर रही है।

मैमेन बताते हैं कि बहुत अधिक सूर्य का संपर्क उन लोगों में, जिनको कुछ अनुवांशिक जोखिम कारक हैं, एक प्रकार का मायोजिटिस ट्रिगर कर सकता है। वे कहते हैं, लेकिन ज्यादातर लोगों को इस स्थिति को विकसित करने के लिए अन्य ट्रिगर्स की भी आवश्यकता होती है, जो हमेशा स्पष्ट नहीं होते हैं।

कुछ वायरस ऑटोइम्यून अटैक को भी शुरू कर सकते हैं। हाल ही में एनआईएच-वित्त पोषित अध्ययन में पाया गया कि एपस्टीन-बार नामक एक वायरस (virus called Epstein-Barr) मल्टीपल स्केलेरोसिस, या एमएस (multiple sclerosis, or MS) के कुछ मामलों को ट्रिगर कर सकता है। एमएस एक ऑटोइम्यून बीमारी है जो नसों को नुकसान पहुंचाती है।

ऑटोइम्यून बीमारी के अन्य जोखिम कारकों में आपकी उम्र, लिंग, धूम्रपान इतिहास और वजन शामिल हो सकते हैं। कई ऑटोइम्यून रोग भी पुरुषों की तुलना में महिलाओं में अधिक आम हैं।

ऑटोइम्यून बीमारी का निदान कैसे करें? Getting a Diagnosis of an autoimmune disease

ग्रेसन कहते हैं, एक ऑटोइम्यून बीमारी के निदान में समय लग सकता है। खासकर अगर यह एक ऐसी बीमारी है जो आपके शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करती है।

लोग अक्सर अलग-अलग लक्षणों के लिए अलग-अलग डॉक्टरों के पास जाते हैं। ग्रेसन कहते हैं कि “उदाहरण के लिए यदि आप एक नेत्र चिकित्सक, एक त्वचा चिकित्सक, और एक फेफड़े के डॉक्टर अलग से दिखा रहे हैं, तो वे यह नहीं देख सकते हैं कि आपके लक्षण आपस में जुड़े हुए हैं।”

ऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षण (Symptoms of autoimmune diseases)
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ऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षण भी कई अन्य स्थितियों की नकल कर सकते हैं। कपलान कहते हैं “उदाहरण के लिए, हम ल्यूपस को ‘महान नकलची’ कहते हैं, क्योंकि यह कई अन्य बीमारियों की तरह दिख सकता है।”

यदि आपको मांसपेशियों, हड्डी या जोड़ों में दर्द हो रहा है जो किसी चोट से संबंधित नहीं है, या यदि आपको कई क्षेत्रों में या लंबे समय से दर्द हो रहा है, तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से बात करें। वे आपको रुमेटोलॉजिस्ट (rheumatologist) के पास भेज सकते हैं। रुमेटोलॉजिस्ट एक डॉक्टर होता है जो सूजन पैदा करने वाली बीमारियों में माहिर होता है।

आपका डॉक्टर एंटीबॉडी, इन्हें स्वप्रतिपिंड कहते हैं, की तलाश के लिए, जो आपके अपने ऊतकों पर हमला कर रहे हैं, (blood tests to look for antibodies) रक्त परीक्षण का उपयोग कर सकता है। लेकिन आपके रक्त में उनका होना एक ऑटोइम्यून बीमारी का निदान करने के लिए पर्याप्त नहीं है। कपलान बताते हैं कि बहुत से लोगों के खून में यह स्वप्रतिपिंड होते हैं, लेकिन वे बीमार नहीं पड़ते।

ऑटोइम्यून डिसऑर्डर के लक्षणों को देखने के लिए भी इमेजिंग तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है। एक्स-रे जोड़ों से जुड़े मुद्दों को दिखा सकते हैं। एमआरआई शरीर में गहरे नुकसान को प्रकट कर सकते हैं।

शोधकर्ता ऑटोइम्यून बीमारियों के निदान या निगरानी में मदद के लिए इमेजिंग का उपयोग करने के नए तरीके खोजने की कोशिश कर रहे हैं। ग्रेसन की प्रयोगशाला परीक्षण कर रही है कि क्या पीईटी स्कैन वास्कुलिटिस पीड़ित लोगों की रक्त वाहिकाओं में छिपी सूजन (hidden inflammation in the blood vessels of people with vasculitis) का पता लगा सकता है?

ऑटोइम्यून रोग के लक्षण (Autoimmune Disease Symptoms)

ऑटोइम्यून बीमारियों के लक्षण अन्य समस्याओं की नकल कर सकते हैं। आम लक्षणों में शामिल हैं :

  • लाली, गर्मी, दर्द, और शरीर के एक या अधिक भागों में सूजन
  • हर समय थकान महसूस होना (थकान)
  • जोड़ों का दर्द और जकड़न
  • मांसपेशियों में दर्द या कमजोरी
  • त्वचा की समस्याएं जैसे कि चकत्ते, घाव और सूखी या पपड़ीदार त्वचा
  • सांस की तकलीफ या सांस लेने में तकलीफ
  • बुखार जो आता है और चला जाता है
  • भूख में कमी।

ऑटोइम्यून बीमारी के हमले को कम करना (Tamping Down the Attack of autoimmune disease)

woman demonstrating breast with scars after cancer surgery. Autoimmune disease.
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ऑटोइम्यून डिस्आर्डर्स का अभी तक कोई इलाज नहीं है, लेकिन शोधकर्ताओं ने लक्षणों के प्रबंधन में प्रगति की है।

कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स (corticosteroids) नामक दवाएं अक्सर ऑटोइम्यून बीमारी के लिए प्राथमिक उपचार (first treatment for an autoimmune disease) होती हैं। मैमेन कहते हैं “वे जल्दी से काम करते हैं, और वे प्रभावी हैं,” मैमेन कहते हैं।

लेकिन स्टेरॉयड आपके पूरे इम्यून सिस्टम को दबा देते हैं, तो स्टेरॉयड के गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। स्टेरॉयड के गंभीर दुष्प्रभावों में उच्च रक्तचाप, हड्डियों का नुकसान और वजन बढ़ना शामिल हैं।

अन्य दवाएं केवल प्रतिरक्षा प्रणाली के कुछ हिस्सों को दबा देती हैं। इनका दुष्प्रभाव कम होता है और इन्हें लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। इनमें से कुछ दवाएं उन कोशिकाओं से छुटकारा दिलाती हैं जो कुछ एंटीबॉडी बनाती हैं। अन्य विशिष्ट प्रतिरक्षा-प्रणाली प्रोटीन को लक्षित करते हैं। ऐसी ही एक दवा हाल ही में एक दशक में ल्यूपस के लिए स्वीकृत पहली नई दवा थी।

ग्रेसन कहते हैं, आपको अपने लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए सबसे अच्छा काम करने वाली दवाओं को खोजने के लिए कई अलग-अलग दवाओं की कोशिश करनी पड़ सकती है। उन्होंने आगे कहा कि बीमारी के इलाज के साथ जीवन की गुणवत्ता को संतुलित करने के लिए अपने डॉक्टर के साथ काम करना महत्वपूर्ण है।

मैमेन कहते हैं कि जीवनशैली में बदलाव भी लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं। ऑटोइम्यून बीमारियों, विशेष रूप से मायोसिटिस और एमएस जो मांसपेशियों को प्रभावित करते हैं, के लिए गतिशील रहना महत्वपूर्ण है। वे कहते हैं, “हम वास्तव में व्यायाम की सिफारिश लिखते हैं, यह वैकल्पिक नहीं है; यह इलाज का हिस्सा है।”

अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता से उन विभिन्न शारीरिक गतिविधियों के बारे में बात करें जिन्हें आप आजमा सकते हैं। योग, वाटर एरोबिक्स या पैदल चलने जैसे कम प्रभाव वाले वर्कआउट कुछ लोगों के लिए मददगार हो सकते हैं।

शोधकर्ता बेहतर उपचार विकसित करने के लिए काम कर रहे हैं। एनआईएच परियोजनाएं ऑटोइम्यून बीमारियों के लिए नए उपचार और अनुसंधान उपकरण खोजने के लिए वैज्ञानिकों, गैर-लाभकारी समूहों और दवा कंपनियों को एक साथ ला रही हैं।

मैमेन बताते हैं कि शोधकर्ता लक्षणों का कारण बनने से पहले ऑटोम्यून्यून बीमारियों का पता लगाने के तरीकों को ढूंढना चाहते हैं। वे कहते हैं, “शायद एक समय अवधि है जहां प्रारंभिक उपचार एक विकासशील पर ब्रेक लगा सकता है।”

कोको : अनुभूति के लिए एक टॉनिक

कोको के औषधीय गुण (Medicinal properties of cocoa)

संज्ञान के लिए टॉनिक है कोको (Cocoa is a tonic for cognition)

कोको के औषधीय गुण (Medicinal properties of cocoa)

कसरत में चाय और काफी को लोकप्रिय बनाने का काम मूलत: औपनिवेशिक इतिहास ने किया। हमारे देश में ये दोनों बाहर से आए हैं किंतु अब हम इन्हें बड़ी मात्रा में पैदा करते हैं। आज दार्जिलिंग चाय (Darjeeling tea) और कुर्ग कॉफी (coorg coffee) विश्व प्रसिद्ध और प्रतिष्ठित हैं, लेकिन कोको इनके जैसा इतना लोकप्रिय नहीं बन पाया है। हम सब कोको को ठोस रूप में यानी चॉकलेट के रूप में खाना पसंद करते हैं लेकिन प्यालियों में भरकर पीते नहीं हैं।

औपनिवेशिक इतिहास ने कोको को भी लोकप्रिय बनाया लेकिन कहीं और।

कोको की खोज

पहली बार कोको मध्य अमेरिका के माया सभ्यता के दौरान खोजा गया था और प्रतिष्ठित हुआ। माया सभ्यता के लोगों ने इस पौधे (और इसके बीज) को नाम दिया कोको (या ककाओ) जिसका मतलब होता है देवताओं का भोजन।

कोको के बीज का प्रयोग

कोको के बीज का इस्तेमाल (use of cocoa seeds) पारिवारिक और सामुदायिक उत्सवों में किया जाता था। इसका इस्तेमाल मुद्रा के रूप में भी किया जाता था। एजटेक इंडियन्स (Aztec Indians) कोको चूर्ण, मिर्ची, कस्तूरी और शहद को मिलाकर एक पेय बनाते थे जिसे चोकोलेटल या फेंटा हुआ पेय कहते थे। शायद इसी से चॉकलेट नाम आया होगा।

स्पैनिश लोगों ने जब अमेरिका में उपनिवेश स्थापित किया तब कोको को लोकप्रिय बनाया और इस पर अपना एकाधिकार रखा। जब वे इसे यूरोप लाए तो इसके उत्पादन के तरीके को सतर्कता पूर्वक गोपनीय रखा। कोको अमीरों का पेय बन गया। यह रोमांस और स्टेटस से कई तरह से जुड़ गया।

यूरोप और अमेरिका में कोको पर प्रणय गीत, प्रणय निवेदन लिखे गए और आज भी लिखे जाते हैं। (उदाहरण के लिए, आप यूट्यूब पर डोरिस डे को यह गीत गाते देख सकते हैं -ए चॉकलेट संडे ऑन ए सेटरडे नाइट Doris Day – A Chocolate Sundae On A Saturday Night।) लेकिन औद्योगिक क्रांति के साथ जब मशीनें लोकप्रिय हुईं, तो कोको बीज को पीसकर बड़ी मात्रा में सभी के लिए उपलब्ध बना दिया। इसके साथ ही कोको या गर्मागरम चाकलेट पेय हर ऐरे-गैरे के लिए उपलब्ध हो गया और उच्च वर्ग में कोको का मोह खत्म हो गया।

आज जहां दुनिया भर में कॉफी का उत्पादन (coffee production) एक करोड़ टन और चाय का उत्पादन 50 लाख टन है वहीं कोको का उत्पादन मात्र 30 लाख टन ही है। लेकिन तीसरे नंबर का यह पेय स्वास्थ्य लाभों में शेष दोनों से ऊपर है।

दरअसल कई दक्षिण भारतीय लोगों को यह जानकर अज्छा नहीं लगेगा, किंतु यह बताना जरूरी है कि कॉफी दुर्बल ही सही किंतु एक दवा है क्योंकि उसमें कैफीन उपस्थित होता है। इस वजह से बहुत-से लोग कैफीन रहित डीकैफ कॉफी/ decaffeinated coffee (जो न कॉफी है, न दवा) पीने लगे हैं।

दूसरी तरफ चाय को अब एक स्वास्थ्य पेय माना जाता है क्योंकि इसमें फ्लेवोनाइड समूह के अणु उपस्थित होते हैं जो ऑक्सीकरण-रोधी और कोशिका-रक्षक अणुओं के रूप में काम करते हैं। (यह सही है चाय में भी कैफीन और थियोब्रोमीन होते हैं लेकिन काफी से कम मात्रा में)।

कॉफी और चाय के मुकाबले स्वास्थ्यवर्धक पेय है कोको

अलबत्ता, स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में कोको सूची में इन दोनों से ऊपर है। फिर भी यह चाय और कॉफी के समान लोकप्रिय नहीं हो पाया। यह इतिहास की एक विचित्रता है जिसका सम्बंध इस बात से है कि हमारा औपनिवेशिकरण किसने किया था।

पिछले कुछ सालों से यह बात साफ तौर पर सामने आई है कि कोको और चॉकलेट केवल स्वाद में ही अच्छे नहीं है बल्कि संज्ञान के लिए भी फायदेमंद हैं।

वेलेन्टिना सोक्की और उनके साथियों का एक शोध पत्र फ्रन्टियर्स इन न्यूट्रिशियन पत्रिका के 16 मई 2017 के अंक में प्रकाशित हुआ है। इसमें लेखकों ने बताया है कि कोको में मौजूद फ्लेवोनाइड परिवार के यौगिक न केवल ऑक्सीकरण-रोधी और कोशिका रक्षक के रूप में कार्य करते हैं, जैसा कि चाय करती है, बल्कि ये मनुष्यों के संज्ञान की रक्षा भी करते हैं, और संज्ञानात्मक ह्रास और स्मृतिलोप को भी रोकते हैं। दूसरे शब्दों में वे शरीर के तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क पर सीधे तौर पर काम करते हैं।

सोक्की के उपरोक्त पर्चे में स्वास्थ्य और संज्ञान में सुधार में फ्लेवोनाइड के बुनियादी जीव विज्ञान सम्बंधी पूर्व शोध के बारे में तो बताया ही गया है, साथ में वालंटियर्स पर किए गए दर्जनों ट्रायलों के परिणामों का भी किया गया है जिनमें स्मृति में सुधार के अलावा रक्तचाप और इंसुलिन प्रतिरोध भी देखा गया था।

डा. जी. डेसिडेरी के नेतृत्व में एक इतालवी समूह द्वारा किए गए एक तुलनात्मक परीक्षण में संज्ञान, रक्तचाप और उम्र के साथ चयापचय और स्मृति हानि में कोको को फायदेमंद पाया गया।

सीखने और याददाश्त की क्रियाविधि का आणविक आधार क्या है?

hot choco in black mug beside white bowl
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इससे पहले भी इस विषय पर प्रोसीडिंग्स ऑफ न्यट्रिशन सोसायटी में डा. जे.पी.ई. स्पेन्सर द्वारा एक पर्चा प्रकाशित किया गया था। उन्होंने लंबे समय तक तंत्रिका क्षमता और याददाश्त में प्रोटीन और एंजाइम श्रृंखला की सूची बनाई थी कि कैसे पौधे के फ्लेवोनाइड्स सारी बाधाएं पार करते हुए मनुष्य मस्तिष्क तक पहुंचते हैं और उसकी क्रियाविधि को प्रभावित करते हैं। हालांकि इस क्रियाविधि को स्पष्ट नहीं किया गया है किंतु लगता है कि ये तंत्रिकाओं को क्षति से बचाते हैं, सूजन को कम करते हैं, और तंत्रिका कोशिकाओं के बीच कड़ियों को बढ़ावा देते हैं और यहां तक कि नई कड़ियां भी बना सकते हैं।

2015 के अमेरिकन जर्नल ऑफ क्लीनिकल न्यूट्रिशन के संपादकीय में स्मृति शक्ति और वृद्धि पर कोको के सकारात्मक प्रभावों (Positive Effects of Cocoa on Memory Power and Enhancement) का निष्कर्ष प्रकाशित हुआ था। और यह भी बताया गया था कि बिना मिठास और असंसाधित डार्क कोको पाउडर सबसे उपयुक्त होगा, जबकि क्षार के साथ संसाधित करने पर (कैंडी-बार में इस्तेमाल होने वाला) यह कम प्रभावी हो जाता है।

अनुमान के तौर पर 100 ग्राम सामान्य डार्क चॉकलेट में 100 मिग्रा फ्लेवोनाइडस पाया जाता है जबकि 100 ग्राम बिना मिठास और असंसाधित कोको पाउडर में यह 250 मिग्रा तक हो सकता है।

जानिए क्या सुबह की कॉफी छोड़कर डार्क कोको पाउडर लेना चाहिए?

मेरे एक दोस्त ने बताया था कि वे सुबह की कॉफी और दोपहर की चाय के साथ-साथ एक कप कोको पावडर जरूर पीते हैं, और शायद शाम को एक गिलास रेड वाइन भी ताकि अधिक फायदा मिले। शायद सलाह ठीक है।

डॉ डी. बालसुब्रमण्यन

मूलतः देशबन्धु में प्रकाशित लेख का संपादित रूप साभार

एवैस्कुलर नेक्रोसिस : जानिए खतरनाक बीमारी के बारे में जिसमें हड्डियों की मौत होने लगती है

avascular necrosis in hindi

एवैस्कुलर नेक्रोसिस का उपचार नहीं कराने पर समय बीतने के साथ बदतर होती जाती है मरीज की स्थिति

शुरुआती दौर में कई लोगों में एवैस्कुलर नेक्रोसिस के लक्षण दिखाई नहीं देते हैं। लेकिन जब स्थिति बहुत ज्यादा खराब हो जाती है, तब वजन उठाने पर जोड़ों में दर्द होने लगता है और अंतत: स्थिति इतनी ज्यादा बिगड़ जाती है कि लेटे रहने पर भी जोड़ों में दर्द होता रहता है। इस बीमारी में दर्द मध्यम दर्ज का या बहुत तेज होता है और यह धीरे-धीरे बढ़ता जाता है।

एवस्कुलर नेक्रोसिस क्या है? What is avascular necrosis?

एवैस्कुलर नेकरोसिस (Avascular necrosis in Hindi) हड्डियों की एक ऐसी स्थिति है जिसमें बोन टिश्यू (bone tissue) यानी हड्डियों के ऊतक मरने लगते हैं। इस तरह की स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब इन ऊतकों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता है। इसे ऑस्टियोनेक्रोसिस (Osteonecrosis) भी कहा जाता है।

एवैस्कुलर नेक्रोसिस के लक्षण (Symptoms of avascular necrosis)

मुबंई स्थित पी.डी.हिंदुजा नेशनल अस्पताल के हेड, आर्थोपेडिक्स डॉ. संजय अग्रवाला (Dr. Sanjay Agarwala, Head of Orthopedics, PD Hinduja National Hospital, Mumbai) का कहना है कि कूल्हे के एवैस्कुलर नेकरोसिस (avascular necrosis of the hip) होने पर पेड़ू, जांघ और नितंब में दर्द होता है। कूल्हे के अलावा इस बीमारी से कंधे, घुटने, हाथ और पैर के भी प्रभावित होने की संभावना बनी रहती है। इनमें से किसी तरह के लक्षण दिखाई देने और जोड़ों में लगातार दर्द बने रहने पर तुरंत डॉक्टर से दिखाने की जरूरत होती है।

एवैस्कुलर नेकरोसिस क्यों होता है?

जोड़ों या हड्डियों में चोट लगना (joint or bone injury)

जोड़ें में किसी भी तरह का चोट या परेशानी जैसे जोड़ों का खुल जाना, की वजह से उसके नजदीक की रक्त नलिकाएं क्षतिग्रस्त हो सकती हैं।

रक्त नलिकाओं में वसा का जमाव (fat deposition in blood vessels)

कई बार रक्त नलिकाओं में वसा का जमाव हो जाता है, जिससे ये नलिकाएं संकरी हो जाती हैं। इस वजह से हड्डियों तक रक्त नहीं पहुंच पाता है, जिससे उन्हें पर्याप्त पोषण नहीं मिल पाता है।

बीमारी

सिकल सेल एनीमिया (sickle cell anaemia) और गौचर्स डिजीज जैसी चिकित्सकीय स्थिति उत्पन्न होने पर भी हड्डियों तक पर्याप्त मात्रा में रक्त नहीं पहुंच पाता है। इन सबके अलावा कुछ ऐसे अनजाने कारण भी होते हैं, जिनकी वजह से यह बीमारी लोगों को अपनी गिरफ्त में ले लेती है।

एवैस्कुलर नेकरोसिस की जटिलता

डा. संजय अग्रवाला का कहना है कि एवैस्कुलर नेकरोसिस का उपचार (Treatment of avascular necrosis) नहीं कराने पर समय बीतने के साथ मरीज की स्थिति बदतर होती जाती है और एक समय ऐसा आता है जब हड्डी कमजोर होकर घिसने लग जाती है। इतना ही नहीं, इस बीमारी के कारण हड्डियों का चिकनापन भी खत्म होने लगता है, जिससे भविष्य में मरीज गंभीर रूप से गठिया से पीडि़त हो सकता है।

एवैस्कुलर नेक्रोसिस का उपचार
Dr. Sanjay Agrawala Orthopedic Surgeon PD Hinduja Hospital, Mumbai
Dr. Sanjay Agrawala Orthopedic Surgeon PD Hinduja Hospital, Mumbai

डॉ. संजय अग्रवाला का कहना है कि मरीज के लिए कौन सा उपचार सही रहेगा यह इस बात पर निर्भर करता है, कि हड्डियों को कितना नुकसान पहुंचा है। एवैस्कुलर नेक्रोसिस के इलाज के लिए पहले मेडिकेशन व थेरेपी का ही सहारा लिया जाता है और जरूरत पड़ने पर सर्जरी की जाती है।

एवैस्कुलर नेकरोसिस के लिए मेडिकेशन व थेरेपी

एवैस्कुलर नेकरोसिस के शुरुआती दौर में इसके लक्षणों को समाप्त करने के लिए दवाइयां और थेरेपी का सहारा लिया जाता है। इसके तहत एक मरीज को दर्द कम करने, रक्त नलिका के अवरोध को दूर करने की दवाइयां दी जाती हैं। इसे साथ ही मरीज की क्षतिग्रस्त हड्डियों पर पड़ने वाले भार व दबाव को कम करने की कोशिश की जाती है। साथ ही फिजियोथेरेपिस्ट की सहायता से कुछ व्यायाम करने की भी सलाह दी जाती है, ताकि जोड़ों की अकड़न दूर हो। इसके अलावा, हड्डियों को मजबूती प्रदान करने के लिए एली डीटोनेट थेरेपी का सहारा लिया जाता है, ताकि उसे खत्म होने से बचाया जा सके।

एवैस्कुलर नेक्रोसिस के लिए सर्जरी

crop orthopedist examining back of anonymous patient in clinic
Photo by Karolina Grabowska on Pexels.com

इस बीमारी के बहुत ज्यादा गंभीर हो जाने पर डॉक्टर जोड़ों की सर्जरी करते हैं। सर्जरी के तहत हड्डियों के क्षतिग्रस्त भाग को हटाकर उसकी जगह मरीज के शरीर के किसी दूसरे भाग हड्डी को लेकर क्षतिग्रस्त हड्डियों की जगह प्रत्यारोपित किया जाता है। हड्डियों के ज्यादा क्षतिग्रस्त होने की स्थिति में ज्वाइंट रिप्लेसमेंट का सहारा भी लिया जाता है।

एवैस्कुलर नेक्रोसिस से बचाव (prevention of avascular necrosis)

     सीमित मात्रा में अल्कोहन का सेवन करें।

     कोलेस्ट्रॉल लेवल को कम रखें।

     अगर आप नियमित रूप से स्टेरॉयड का सेवन करते हैं, तो उसके प्रभाव का निरीक्षण करते रहें।

उमेश कुमार सिंह

मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए जलवायु परिवर्तन एक गंभीर खतरा

climate change nature

जानिए जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई के लिए मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता क्यों दी जाती है?

नई डब्ल्यूएचओ नीति देशों के लिए कार्यों पर संक्षिप्त प्रकाश डालती है

नई दिल्ली/जिनेवा 3 जून 2022: स्टॉकहोम+50 सम्मेलन में आज लॉन्च की गई एक नई डब्ल्यूएचओ नीति में कहा गया है कि जलवायु परिवर्तन मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है।

इसलिए संगठन कुछ अग्रणी देशों, जहां इसे प्रभावी ढंग से लागू किया गया है, के उदाहरणों का हवाला देते हुए देशों से जलवायु संकट के जवाब में मानसिक स्वास्थ्य सहायता को शामिल करने का आग्रह कर रहा है।

आईपीसीसी की रिपोर्ट से क्या पता चला?

निष्कर्ष इस साल फरवरी में प्रकाशित इंटरगवर्नमेंटल पैनल ऑन क्लाइमेट चेंज (आईपीसीसी) की हालिया रिपोर्ट से सहमत हैं।

आईपीपीसी ने खुलासा किया था कि तेजी से बढ़ता जलवायु परिवर्तन भावनात्मक संकट से लेकर चिंता, अवसाद, शोक और आत्मघाती व्यवहार तक; मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक कल्याण के लिए एक बढ़ता खतरा बन गया है।

डब्ल्यूएचओ के पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन और स्वास्थ्य विभाग की निदेशिका डॉ मारिया नीरा ने कहा कि

“जलवायु परिवर्तन के प्रभाव तेजी से हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा बन रहे हैं, और जलवायु से संबंधित खतरों और दीर्घकालिक जोखिम से निपटने वाले लोगों और समुदायों के लिए बहुत कम समर्पित मानसिक स्वास्थ्य सहायता उपलब्ध है।”

डब्ल्यूएचओ मानसिक स्वास्थ्य को कैसे परिभाषित करता है? What does WHO define mental health?

डब्ल्यूएचओ मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक समर्थन (एमएचपीएसएस) को “किसी भी प्रकार के स्थानीय या बाहरी समर्थन के रूप में परिभाषित करता है जिसका उद्देश्य मनोसामाजिक कल्याण की रक्षा या बढ़ावा देना और / या मानसिक विकार को रोकना या उसका इलाज करना है”।

डब्ल्यूएचओ मानसिक स्वास्थ्य को “कल्याण की एक ऐसी स्थिति के रूप में परिभाषित करता है जिसमें प्रत्येक व्यक्ति अपनी क्षमता का एहसास करता है, जीवन के तनावों का सामना कर सकता है, उत्पादक और फलदायी रूप से काम कर सकता है और अपने या अपने समुदाय में योगदान करने में सक्षम है”।

जलवायु परिवर्तन के मानसिक स्वास्थ्य प्रभाव क्या हैं?

जलवायु परिवर्तन के मानसिक स्वास्थ्य प्रभाव असमान रूप से कुछ समूहों को प्रभावित करते हैं जो सामाजिक आर्थिक स्थिति, लिंग और उम्र जैसे कारकों के आधार पर असमान रूप से प्रभावित होते हैं। हालांकि, यह स्पष्ट है कि जलवायु परिवर्तन कई सामाजिक निर्धारकों को प्रभावित करता है जो पहले से ही विश्व स्तर पर बड़े पैमाने पर मानसिक स्वास्थ्य बोझ का कारण बन रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक वर्ष 2021 में 95 देशों के डब्ल्यूएचओ के सर्वेक्षण में पाया गया कि केवल 9 देशों ने अब तक अपने राष्ट्रीय स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन योजनाओं में मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक समर्थन को शामिल किया है।

मानसिक स्वास्थ्य और मादक द्रव्यों के सेवन विभाग के डब्ल्यूएचओ निदेशक देवोरा केस्टेल (Dévora Kestel, WHO Director, Department of Mental Health and Substance Abuse) ने कहा, “जलवायु परिवर्तन का प्रभाव वैश्विक स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य और मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए पहले से ही बेहद चुनौतीपूर्ण स्थिति को बढ़ा रहा है। लगभग एक बिलियन लोग मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति के साथ जी रहे हैं, फिर भी निम्न और मध्यम आय वाले देशों में, 4 में से 3 लोगों के पास आवश्यक सेवाओं तक पहुंच नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा कि आपदा जोखिम में कमी और जलवायु कार्रवाई के भीतर मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक समर्थन को बढ़ाकर, देश सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों की रक्षा करने में मदद करने के लिए और अधिक कार्य कर सकते हैं।”

जलवायु परिवर्तन के मानसिक स्वास्थ्य प्रभावों को दूर करने के लिए सरकारों के लिए महत्वपूर्ण दृष्टिकोण क्या हैं?

नई डब्ल्यूएचओ नीति संक्षेप में जलवायु परिवर्तन के मानसिक स्वास्थ्य प्रभावों को दूर करने के लिए सरकारों के लिए पांच महत्वपूर्ण दृष्टिकोणों की सिफारिश करती है, जिसमें शामिल है :

• मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के साथ जलवायु संबंधी विचारों को एकीकृत करें

• मानसिक स्वास्थ्य सहायता को जलवायु कार्रवाई के साथ एकीकृत करें

• वैश्विक प्रतिबद्धताओं पर निर्माण करें

• कमजोरियों को कम करने के लिए समुदाय आधारित दृष्टिकोण विकसित करना और

• मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक समर्थन के लिए मौजूद बड़े फंडिंग अंतर को बंद करें

डब्ल्यूएचओ जलवायु प्रमुख और आईपीसीसी रिपोर्ट के एक प्रमुख लेखक डॉ डायर्मिड कैंपबेल-लेंड्रम (Dr Diarmid Campbell-Lendrum, WHO climate lead, and an IPCC lead author) ने कहा कि, “डब्ल्यूएचओ के सदस्य राज्यों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मानसिक स्वास्थ्य उनके लिए प्राथमिकता है। हम लोगों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को जलवायु परिवर्तन के खतरों से बचाने के लिए देशों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।”

सम्मेलन कहता है कि कुछ अच्छे उदाहरण मौजूद हैं कि यह कैसे किया जा सकता है जैसे कि फिलीपींस में, जिसने 2013 में टाइफून हैयान के प्रभाव (impact of Typhoon Haiyan in 2013 ) के बाद अपनी मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं का पुनर्निर्माण और सुधार किया है या फिर भारत में, जहां एक राष्ट्रीय परियोजना ने देश में आपदा जोखिम को कम किया है, जबकि शहरों को जलवायु जोखिमों का जवाब देने और मानसिक स्वास्थ्य और मनोसामाजिक जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार किया है।

स्टॉकहोम सम्मेलन मानव पर्यावरण पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की 50वीं वर्षगांठ मना रहा है और शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य दोनों के लिए पर्यावरणीय निर्धारकों के महत्व की पहचान कर रहा है।

जानिए क्या सामाजिक संबंध हमारे स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं?

do social ties affect our health

रिश्तों के जीव विज्ञान की खोज | सामाजिक संबंधों का हमारे स्वास्थ्य पर प्रभाव

Do Social Ties Affect Our Health? Exploring the Biology of Relationships

आलिंगन, चुम्बन, और देखभाल करने वाली बातचीत। ये हमारे घनिष्ठ संबंधों के प्रमुख तत्व हैं। वैज्ञानिक यह खोज रहे हैं कि क्या दूसरों के साथ हमारे संबंध हमारे स्वास्थ्य पर शक्तिशाली प्रभाव डाल सकते हैं। फिर चाहे वह रोमांटिक पार्टनर, परिवार, दोस्तों, पड़ोसियों या अन्य लोगों के साथ, सामाजिक संबंध हों, क्या हमारी जैविकी और कल्याण को प्रभावित कर सकते हैं।

व्यापक शोध से पता चलता है कि मजबूत सामाजिक संबंधों का संबंध लंबे जीवन से होता है। इसके विपरीत, अकेलापन (loneliness) और सामाजिक अलगाव (social isolation) खराब स्वास्थ्य, अवसाद और जल्दी मृत्यु के बढ़ते जोखिम से जुड़ा हुआ है।

यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के मासिक न्यूज़लैटर एनआईएच न्यूज़ इन हैल्थ के फरवरी 2017 के अंक में प्रकाशित खबर के मुताबिक अध्ययनों से पता चला है कि विभिन्न प्रकार के सामाजिक संबंध (variety of social relationships) रखने से तनाव और हृदय संबंधी जोखिमों (heart-related risks) को कम करने में मदद मिल सकती है।

इस तरह के संबंध कीटाणुओं से लड़ने की आपकी क्षमता में सुधार कर सकते हैं या आपको जीवन के प्रति अधिक सकारात्मक दृष्टिकोण (positive outlook on life) दे सकते हैं। शारीरिक संपर्क – हाथ पकड़ने से लेकर सेक्स तक – हार्मोन और मस्तिष्क के रसायनों के स्राव होना को ट्रिगर कर सकता है जो न केवल हमें बहुत अच्छा महसूस कराते हैं बल्कि इसके अन्य जैविक लाभ भी हैं।

हमारे स्वास्थ्य पर विवाह का प्रभाव (Marriage effect on our health)

विवाह सबसे अधिक अध्ययन किए जाने वाले सामाजिक बंधनों (social bonds) में से एक है। ओहियो स्टेट यूनिवर्सिटी में स्वास्थ्य और रिश्तों के विशेषज्ञ डॉ जेनिस किकोल्ट-ग्लेसर (Dr. Janice Kiecolt-Glaser, an expert on health and relationships at Ohio State University) कहते हैं, “कई लोगों के लिए, शादी उनका सबसे महत्वपूर्ण रिश्ता है। और प्रमाण बहुत मजबूत है कि शादी आम तौर पर स्वास्थ्य के लिए अच्छी है।” वह आगे कहते हैं कि “लेकिन अगर कोई रिश्ता ठीक नहीं चल रहा है, तो इसके स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण परिणाम हो सकते हैं।”

अविवाहित युगल की तुलना में विवाहित युगल अधिक समय तक जीवित रहते हैं और उनके हृदय का स्वास्थ्य बेहतर होता है। अध्ययनों से पता चला है कि जब एक पति या पत्नी अपने स्वास्थ्य व्यवहार में सुधार करते हैं – जैसे व्यायाम करना, शराब पीना या धूम्रपान कम करना, या फ्लू का शॉट लेना – तो दूसरे पार्नर पति या पत्नी के भी ऐसा करने की संभावना अधिक होती है।

हालांकि, जब वैवाहिक जीवन में तनाव और संघर्ष होता है, तो ऐसे स्वास्थ्य लाभ कम हो सकते हैं। एनआईएच-वित्त पोषित अध्ययनों में, किकोल्ट-ग्लेसर और उनके सहयोगियों ने पाया कि वैवाहिक जीवन में संघर्ष के दौरान जोड़े कैसे व्यवहार करते हैं, यह घाव भरने और तनाव हार्मोन के रक्त स्तर को प्रभावित कर सकता है।

40 से अधिक विवाहित जोड़ों पर किए गए एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने एक संघर्ष पर चर्चा करने से 24 घंटे पहले और बाद में 24 घंटे की अवधि में शरीर के रसायन विज्ञान में परिवर्तन को मापा। परेशानी वाले विषयों में पैसा, ससुराल और संचार (communication) शामिल थे।

किकोल्ट-ग्लेसर कहते हैं “हमने पाया कि चर्चा की गुणवत्ता वास्तव में मायने रखती है”। ऐसे जोड़े, जो एक-दूसरे के प्रति अधिक शत्रुतापूर्ण थे, उनमें बहुत बड़े नकारात्मक परिवर्तन हुए, जिनमें तनाव हार्मोन (spikes in stress hormones) और सूजन से संबंधित अणुओं में बड़े स्पाइक्स (inflammation-related molecules) शामिल थे।

किकोल्ट-ग्लेसर कहते हैं, “सुचारू रूप से जीवन व्यतीत करने वाले विवाहों में (well-functioning marriages), जोड़े स्वीकार कर सकते हैं कि वे असहमत हैं, या स्थिति में हास्य पाते हैं, लेकिन जब वे बात कर रहे होते हैं तो वे व्यंग्यात्मक नहीं होते हैं या अपनी आँखें रोल नहीं करते हैं”।

एक संबंधित अध्ययन में, उन युगलों में छाले के घाव काफी हद तक धीरे-धीरे ठीक हुए, जो मुश्किल बहस-मुबाहिसा के दौरान दयालु और सज्जन लोगों की तुलना में एक-दूसरे के प्रति अधिक घृणास्पद थे।

शत्रुतापूर्ण विवाह और अवसाद की “दोहरी मार” वाले युगलों (“double-whammy” of hostile marriages) को वजन की समस्याओं के जोखिम भी हो सकते हैं। अधिक वसा वाला भोजन करने ( high-fat meal) और एक मुश्किल विषय पर चर्चा करने के बाद, ये परेशान युगल कम शत्रुतापूर्ण समकक्षों की तुलना में कम कैलोरी जलाने की प्रवृत्ति रखते हैं।

किकोल्ट-ग्लेसर कहते हैं कि “इन जोड़ों में मेटाबॉलिज्म उन तरीकों से धीमा था जो समय के साथ वजन बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हो सकते हैं”। संवेदनापूर्ण युगल की तुलना में, व्यथित पति-पत्नी में अधिक वसा भंडारण और हृदय रोग के अन्य जोखिमों के संकेत थे।

विवाह की गुणवत्ता (quality of a marriage) – चाहे वह सहायक हो या शत्रुतापूर्ण – वृद्ध युगल के स्वास्थ्य के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है। मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी में डॉ. हुई लियू (Dr. Hui Liu at Michigan State University) ने 57 से 85 वर्ष की आयु के 2,200 से अधिक वृद्ध लोगों के स्वास्थ्य और कामुकता पर डेटा का अध्ययन किया। उन्होंने पाया कि विवाह की अच्छी गुणवत्ता का संबंध हृदय रोग के विकास के कम जोखिम से है, जबकि खराब विवाह गुणवत्ता विशेष रूप से महिलाओं में बढ़े हुए जोखिम से जुड़ी है।

लियू कहती हैं, “शादी की गुणवत्ता और हृदय स्वास्थ्य के बीच संबंध वृद्धावस्था में तेजी से मजबूत हो जाता है।”

लियू और उनके सहकर्मी अधिक उम्र के युगल की कामुकता और स्वास्थ्य के बीच संबंधों (links between late-life sexuality and health) का भी अध्ययन कर रहे हैं जिसमें यह भी शामिल है कि क्या बहुत पुराने युगल के बीच सेक्स फायदेमंद है या यह हृदय स्वास्थ्य के लिए जोखिम भरा है।

वृद्धावस्था में सेक्स की महत्ता

लियू कहती हैं “कुछ लोग मानते हैं कि वृद्धावस्था में सेक्स महत्वपूर्ण नहीं है, इसलिए उन उम्र को अक्सर सेक्स से संबंधित शोध अध्ययनों में अनदेखा कर दिया जाता है”। वह आगे कहती हैं कि “लेकिन हमारे अध्ययन से पता चलता है कि कई वृद्ध लोगों के लिए, यौन गुणवत्ता और यौन जीवन, जीवन की समग्र गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण हैं।”

हाल के एक विश्लेषण में, लियू और सहकर्मियों ने पाया कि जिन वृद्ध महिलाओं ने संतोषजनक यौन जीवन (satisfying sex life) की सूचना दी थी, उनमें 5 साल बाद उच्च रक्तचाप का जोखिम कम था। लेकिन शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि 57 से 85 वर्ष की आयु के कुछ वृद्ध पुरुषों को 5 साल के बाद दिल से संबंधित कुछ समस्याओं का खतरा बढ़ गया था, अगर उन्होंने बार-बार (सप्ताह में कम से कम एक बार) या बेहद सुखद सेक्स करने की सूचना दी। इन बढ़े हुए जोखिमों के कारण स्पष्ट नहीं हैं और इन पर अभी भी अध्ययन जारी हैं। विशेषज्ञों का सुझाव है कि वृद्ध पुरुष और महिलाएं अपने डॉक्टरों से यौन मुद्दों या संभावित स्वास्थ्य जोखिमों से संबंधित चिंताओं के बारे में बात करें।

अन्य प्रकार के संबंध भी महत्वपूर्ण हैं। इनमें मित्र, परिवार, पड़ोसी, सहकर्मी, क्लब और धार्मिक समूह शामिल हो सकते हैं। अध्ययनों से पता चला है कि बड़े और अधिक विविध प्रकार के सामाजिक संबंध रखने वाले लोग लंबे समय तक जीवित रहते हैं। ऐसे कम रिश्ते वाले लोगों की तुलना में उनका शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य भी बेहतर होता है। विशेष रूप से कठिन समय के दौरान सामाजिक समर्थन (Social support ) सुरक्षात्मक हो सकता है।

पिट्सबर्ग में कार्नेगी मेलॉन विश्वविद्यालय के एक मनोवैज्ञानिक, डॉ. शेल्डन कोहेन (Dr. Sheldon Cohen, a psychologist at Carnegie Mellon University in Pittsburgh), विगत तीन दशकों से अधिक समय से रिश्तों और स्वास्थ्य के बीच संबंधों का अध्ययन कर रहे हैं। एक अध्ययन में, उनकी टीम ने 200 से अधिक स्वस्थ स्वयंसेवकों को सामान्य सर्दी के वायरस से अवगत कराया और उन्हें एक सप्ताह तक नियंत्रित वातावरण में देखा।

कोहेन कहते हैं, “हमने पाया कि जितने अधिक विविध लोगों के सोशल नेटवर्क- जितने अधिक प्रकार के कनेक्शन थे- वायरस के संपर्क में आने के बाद उन्हें सर्दी होने की आशंका उतनी ही कम थी।” उन्होंने और उनकी टीम ने तब से इस बात के प्रमाण पाए हैं कि अधिक प्रकार के कनेक्शन वाले लोगों में भी बेहतर स्वास्थ्य व्यवहार (better health behaviors जैसे धूम्रपान या शराब नहीं पीना) और अधिक सकारात्मक भावनाएं होती हैं।

वैज्ञानिक यह भी पता लगा रहे हैं कि क्या केवल यह मानने से कि आपके पास मजबूत सामाजिक समर्थन है, तनाव के नुकसान से बचाने में मदद कर सकता है। कोहेन कहते हैं कि, “दूसरों के साथ दीर्घकालिक संघर्ष एक शक्तिशाली तनाव है जो स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। लेकिन हमने पाया है कि इसके प्रभाव कथित सामाजिक समर्थन से प्रभावित होते हैं”।

कोहेन आगे कहते हैं, “जिन लोगों के संघर्ष के उच्च स्तर और सामाजिक समर्थन के निम्न स्तर हैं, वे वायरस के संपर्क में आने पर बीमार होने की अधिक आशंका रखते हैं। लेकिन उच्च संघर्ष और उच्च स्तर के सामाजिक समर्थन वाले लोग सुरक्षित लगते हैं।”

इसके अलावा, आलिंगन करने से तनाव से बचाव होता था। जिन लोगों ने बार-बार गले लगने की सूचना दी, उनमें वायरल के संपर्क में आने के बाद संक्रमण होने की संभावना कम थी।

सामाजिक संबंधों का आपके स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है? (What are Social ties effects on your health?)

सामाजिक संबंधों का हमारे स्वास्थ्य पर मिश्रित प्रभाव हो सकता है। लेकिन कुल मिलाकर, शोध से पता चलता है कि दूसरों के साथ बातचीत के लाभ किसी भी जोखिम से अधिक हो सकते हैं।

कोहेन कहते हैं, “लोगों के लिए अलग-अलग समूहों से संबंधित होने की कोशिश करना, अलग-अलग तरीकों से स्वयंसेवा करना और एक चर्च या उनके पड़ोस में शामिल होना स्वस्थ है।”

वह आगे कहते हैं कि “विभिन्न परिस्थितियों में अन्य लोगों के साथ भागीदारी स्पष्ट रूप से स्वास्थ्य पर एक बहुत ही शक्तिशाली, बहुत सकारात्मक प्रभाव डाल सकती है।”

संबंध बनाने के लिए बुद्धिमान विकल्प (Wise Choices for Making Connections)

सामाजिक संपर्क (Social connections) स्वास्थ्य की रक्षा और दीर्घायु होने में सहायता कर सकते हैं।

दूसरों के साथ जुड़ने के तरीकों को आजमाएं :

पढ़ने, लंबी पैदल यात्रा, पेंटिंग या लकड़ी की नक्काशी जैसे पसंदीदा शौक पर ध्यान केंद्रित करने वाले समूह में शामिल हों।

शौक पर ध्यान केंद्रित करने वाले समूह में शामिल हों।

योग, ताई ची, या किसी अन्य नई शारीरिक गतिविधि में कक्षा लें।

सामुदायिक उद्यान या पार्क में बागवानी में मदद करें।

एक स्कूल, पुस्तकालय, अस्पताल, या पूजा स्थल पर स्वयंसेवी।

एक स्थानीय समुदाय समूह में शामिल हों या उन चीजों में शामिल होने के अन्य तरीके खोजें जो आपके लिए महत्वपूर्ण हैं।

क्या सरकारें तम्बाकू उद्योग की कोविड वैक्सीन को अस्वीकार करेंगी?

world no-tobacco day 31 May

Will governments reject the tobacco industry’s Covid vaccine?

कोविड वैक्सीन बनाने वाली मेडीकागो कम्पनी में तम्बाकू कम्पनी पीएमआई का है आंशिक निवेश

दुनिया की सबसे बड़े तम्बाकू उद्योग ने कोविड वैक्सीन बनायी है। क्या सरकारों को जनता के पैसे से, तम्बाकू उद्योग की वैक्सीन ख़रीदनी चाहिए या इस उद्योग को हर साल तम्बाकू से होने वाली 90 लाख लोगों की मौत और करोड़ों लोग जो हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, पक्षाघात से झेलते हैं, उसके लिए ज़िम्मेदार और जवाबदेह ठहराना चाहिए?

विश्व की सबसे बड़ी तंबाकू कंपनी कौन सी है?

कनाडा-स्थित मेडीकागो कम्पनी (Canada-based Medicago Company), जिसमें विश्व की सबसे बड़ी तम्बाकू कम्पनी फिलिप मॉरिस इंटरनेशनल (World’s largest tobacco company Philip Morris International -पीएमआई) का आंशिक रूप से स्वामित्व है, ने कोविड वैक्सीन बनायी है।

तम्बाकू उद्योग, तम्बाकू महामारी का जनक है जिसके कारण लगभग 90 लाख लोग हर साल मृत होते हैं। एक ओर जनता झेलती है तम्बाकू जनित जानलेवा रोगों की मार और असामयिक मृत्यु का मंडराता ख़तरा, तो दूसरी ओर यही तम्बाकू उद्योग इस व्यापार पर दिन दूनी रात चौगुनी मुनाफ़ा कमा रहा है।

Special on world no-tobacco day 31 May | 31 मई विश्व तम्बाकू निषेध दिवस पर विशेष

गौर करें कि कनाडा समेत दुनिया के 180 से अधिक देशों ने 2008 में वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण संधि (global tobacco control treaty) के अनुच्छेद 5.3 की मार्गनिर्देशिका पारित की जिससे कि जन स्वास्थ्य नीति में तम्बाकू उद्योग के हस्तक्षेप पर क़ानूनी रोक लगे।

इसी संधि के अनुपालन करते हुए सरकारें तम्बाकू उद्योग से चंदा, प्रयोजन, आदि नहीं ले सकतीं और साझेदारी आदि भी नहीं कर सकतीं।

विश्व तम्बाकू नियंत्रण संधि के अंतर्गत, तम्बाकू उद्योग के साथ साझेदारी करने पर सख़्त रोक लगी है।

तम्बाकू उद्योग की यह चाल सफल हो गयी तो न केवल उसको सरकार से जनता का पैसा मिलेगा, बल्कि मेडीकागो के साथ सरकारी अनुबंध से दुनिया की सबसे बड़ी तम्बाकू कम्पनी को राजनीतिक लाभ भी मिलेगा।

डब्ल्यूएचओ ने जताई थी चिंता

world no tobacco day विश्व तम्बाकू निषेध दिवस

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने हाल ही में कहा था कि तम्बाकू उद्योग के उत्पाद वैश्विक तम्बाकू महामारी के मूल कारण हैं, इसीलिए इस उद्योग को दूसरी महामारी कोविड-19 से लाभान्वित नहीं होने देना चाहिए।

इसीलिए संयुक्त राष्ट्र की सर्वोच्च स्वास्थ्य एजेंसी, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डबल्यूएचओ) ने तम्बाकू उद्योग के पैसे से बनी वैक्सीन को ख़ारिज कर दिया, उसको स्वीकृति नहीं दी है क्योंकि इसमें तम्बाकू उद्योग शामिल है – जिसके कारण लगभग 90 लाख लोग हर साल जान गवाँ बैठते हैं।

आख़िर विश्व स्वास्थ्य संगठन ऐसी कम्पनी की वैक्सीन को अनुमति कैसे देता जो अधिकांश ग़ैर-संक्रामक रोगों का जनक है? जैसे कि हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह, दीर्घकालिक श्वास सम्बन्धी रोग, आदि?

तम्बाकू सिर्फ़ ग़ैर संक्रामक रोगों का ही जनक नहीं है बल्कि अनेक संक्रामक रोगों को भी अधिक प्राणघातक बनाता है – जैसे कि टीबी या टुबर्क्युलोसिस (तपेदिक), एचआईवी, और कोविड-19।

कनाडा सरकार के ऊपर दबाव बढ़ रहा है कि वह तम्बाकू उद्योग के साथ अपने सम्बंध का अंत करे क्योंकि यह विश्व तम्बाकू नियंत्रण संधि अनुच्छेद 5.3 का घोर उल्लंघन है।

यदि जन स्वास्थ्य आपदा पैदा करने वाले तम्बाकू उद्योग को, जन स्वास्थ्य के लिए कार्य करना है तो सबसे पहले वह अपना प्राणघातक व्यापार बंद करे, बच्चों और युवाओं को तम्बाकू नशे के मकड़जाल में फ़साना बंद करे, और जो मानवीय आबादी और पृथ्वी को उसने दशकों से क्षति पहुँचायी है उसके लिए सरकारें उसको जवाबदेह ठहरायें।

तम्बाकू महामारी की जनक तम्बाकू उद्योग द्वारा निर्मित कोविड वैक्सीन (covid vaccine manufactured by tobacco industry) को, सरकारों को अस्वीकार करना होगा क्योंकि एक महामारी को पनपाने वाले उद्योग को अन्य महामारी में कैसे सफ़ेदपोश होने का मौक़ा मिल सकता है?

तम्बाकू उद्योग को जनता के जीवन का मूल्य होता तो सबसे पहले वह प्राणघातक उत्पाद बनाना बंद करती। एक तरफ़ उसके कोविड महामारी में भी अपने तम्बाकू व्यापार को बढ़ाया और दूसरी ओर वह कोविड महामारी की आड़ में वैक्सीन बेच कर, सरकारों से जनता के पैसे को भी लूट लेना चाहती है।

कोविड और तम्बाकू (covid and tobacco)
melancholic woman smoking cigarette near window during rain
Photo by Amir SeilSepour on Pexels.com

जब से कोविड महामारी का प्रकोप चालू हुआ है तब से भारत समेत अनेक देशों से जो वैज्ञानिक शोध आँकड़े आए हैं वह यही स्थापित करते हैं कि जिन सह-रोग और सह-संक्रमण से, कोविड होने पर घातक और गम्भीर रोग और परिणाम होने का ख़तरा बढ़ता है, वह हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, कैंसर, दीर्घकालिक श्वास सम्बन्धी रोग, आदि हैं – ध्यान दें इन सब रोगों का सामान्य ख़तरा बढ़ाने वाला कारण तम्बाकू सेवन ही है।

सीधी बात है, कल्पना करें कि पिछले दशकों में यदि सरकारों ने तम्बाकू सेवन पर बंदी लगायी होती तो इतने पहाड़नुमा अनुपात में हृदय रोग न होते, कैंसर न होते, मधुमेह न होते, बिगड़ते टीबी रोगी न होते, और कोविड-19 से भी भारी मात्रा में लोग गम्भीर रूप से बीमार और मृत न होते (क्योंकि तम्बाकू-जनित रोगों से गम्भीर कोविड-19 रोग और उसके कारण मृत्यु होने का ख़तरा अत्यधिक हो जाता है)।

तम्बाकू उद्योग के राजनीतिक प्रभाव और जन स्वास्थ्य नीतियों में हस्तक्षेप के कारण सरकारों ने तम्बाकू नियंत्रण और तम्बाकू मुक्त दुनिया की ओर ले जाने वाली नीतियाँ प्रभावकारी ढंग से लागू ही नहीं की हैं – नतीजतन तम्बाकू से हर साल दर साल 90 लाख लोग असामयिक मृत्यु का शिकार होते रहे, करोड़ों लोग उन जानलेवा रोगों से जूझते रहे जिनसे मूलतः बचाव मुमकिन था।

कोविड महामारी के आने से पहले भी, मानवीय आबादी अनेक महामारी के अनुपात में रोगों से जूझ रही थी – तम्बाकू महामारी इनमें से एक है। कोविड महामारी के दौरान भी तम्बाकू उद्योग ने अपना व्यापार बढ़ाया, आर्थिक मंदी और तालाबंदी के दौरान भी घातक उत्पाद बेचें, और अब वह कोविड वैक्सीन के ज़रिए सरकारों से कमाना चाह रही है।

जब सरकारों ने कोविड के कारण तालाबंदी लगायी तो सबसे पहले खुलने वाली दुकानों में शराब और तम्बाकू दुकानें थीं – दोनों उत्पादनों से कोविड के गम्भीर परिणाम होने का ख़तरा अत्यधिक बढ़ता है।

इसीलिए 150 से अधिक संगठनों ने अपील की है कि दुनिया की सभी सरकारें, वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण संधि (जिसे औपचारिक रूप से विश्व स्वास्थ्य संगठन फ़्रेमवर्क कन्वेन्शन ऑनटुबैको कंट्रोल कहते हैं) के अनुच्छेदों का अनुपालन और सम्मान करते हुए, कनाडा-स्थित मेडीकागो कम्पनी, जिसमें विश्व की सबसे बड़ी तम्बाकू कम्पनी फ़िलिप मोरिस इंटरनैशनल (पीएमआई) का आंशिक रूप से स्वामित्व है, उसको अस्वीकार करें और उसके ख़िलाफ़ भूमिका लें।

Bogor Mayor Bima Arya - cannot-display-tobacco-products-even-in-the-sale-shop-bogors-public-wins-court-case
Bogor Mayor Bima Arya – cannot-display-tobacco-products-even-in-the-sale-shop-bogors-public-wins-court-case (File Photo)

नवम्बर 2021 में सम्पन्न हुई वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण संधि की नौवीं वार्ता बैठक में, 180 से अधिक देशों ने अपनी यह चिंता व्यक्त की थी कि तम्बाकू उद्योग यदि दवा-निर्माता उद्योग पर क़ब्ज़ा करेगा तो तम्बाकू नियंत्रण नीतियों को लागू करने में व्यवधान आएगा। यदि मेडीकागो-जैसा यह ग़लत उदाहरण स्थापित हो गया तो तम्बाकू उद्योग के दवा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए सरकारें नयी योजनाएँ भी ला सकती हैं।

इसीलिए 150 से अधिक संगठनों ने सभी सरकारों से अपील की है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की तरह वह भी मेडीकागो/ फ़िलिप मोरिस इंटरनैशनल की वैक्सीन को अस्वीकार करें, और इस तरह की किसी भी प्रकार की साझेदारी को अस्वीकार करें और उद्योग की हर चाल, जो वैश्विक तम्बाकू नियंत्रण संधि को कमजोर कर सकती है, उसके ख़िलाफ़ भूमिका लें।

तम्बाकू उद्योग के साथ साझेदारी के बजाय सरकारों को चाहिए कि तम्बाकू उद्योग को हर साल होने वाली 90 लाख मृत्यु और आबादी में जानलेवा रोगों के पहाड़नुमा बोझे के लिए जवाबदेह और ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए।

बॉबी रमाकांत

(विश्व स्वास्थ्य संगठन महानिदेशक द्वारा 2008 में तम्बाकू नियंत्रण के लिए पुरस्कृत बॉबी रमाकांत, सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस) के सम्पादकीय मंडल से जुड़े हैं।)

जानिए फ्लोरोस्कोपी टेस्ट क्या है?

health news

फ्लोरोस्कोपी क्या है? What is fluoroscopy? Fluoroscopy test in Hindi

इस समाचार में सरल हिंदी में जानिए कि फ्लोरोस्कोपी टेस्ट क्या है? (fluoroscopy test in hindi – fluoroscopy Test Kya Hota Hai) फ्लोरोस्कोपी टेस्ट का उपयोग किस लिए किया जाता है? आपको फ्लोरोस्कोपी टेस्ट की आवश्यकता क्यों होती है? जब आप फ्लोरोस्कोपी परीक्षण कराते हैं तब क्या होता है? क्या आपको फ्लोरोस्कोपी टेस्ट की तैयारी के लिए कुछ करने की आवश्यकता होती है? क्या फ्लोरोस्कोपी टेस्ट के कोई जोखिम हैं? इस समाचार की जानकारी का उपयोग पेशेवर चिकित्सा देखभाल या सलाह के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता है। यदि आप अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता/ योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।

Fluoroscopy: What It Is, Purpose, Procedure & Results,

अमेरिकी सरकार के नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मेडलाइनप्लस पर सीआरपी टेस्ट के बारे में जानकारी दी गई है। उस जानकारी के मुताबिक –

फ्लोरोस्कोपी (Fluoroscopy Procedure) एक प्रकार का एक्स-रे है जो वास्तविक समय में अंगों, ऊतकों या अन्य आंतरिक संरचनाओं को गतिमान दिखाता (internal structures moving in real time) है। मानक एक्स-रे ( Standard x-rays) अभी भी तस्वीरों की तरह होते हैं, जबकि फ्लोरोस्कोपी एक फिल्म की तरह होता है। यह शरीर प्रणालियोलियों को क्रिया में दिखाता है। इनमें कार्डियोवैस्कुलर (हृदय और रक्त वाहिकाओं), पाचन, और प्रजनन प्रणाली शामिल हैं। प्रक्रिया आपके स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता (चिकित्सक) को विभिन्न स्थितियों का मूल्यांकन और निदान करने में मदद कर सकती है।

फ्लोरोस्कोपी किसके लिए प्रयोग की जाती है? What is Fluoroscopy used for?

फ्लोरोस्कोपी का उपयोग कई प्रकार की इमेजिंग प्रक्रियाओं में किया जाता है। फ्लोरोस्कोपी के सबसे आम उपयोगों में शामिल हैं –

(1) बेरियम निगल या बेरियम एनीमा ( Barium swallow or barium enema)

इन प्रक्रियाओं में, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (पाचन) पथ की गति को दिखाने के लिए फ्लोरोस्कोपी का उपयोग किया जाता है।

(2) कार्डियक कैथीटेराइजेशन (Cardiac catheterization)

इस प्रक्रिया में, फ्लोरोस्कोपी धमनियों में बहने वाले रक्त को दिखाता है। इसका उपयोग कुछ हृदय स्थितियों के निदान और उपचार के लिए किया जाता है।

(3) शरीर के अंदर कैथेटर या स्टेंट लगाना (Placement of catheter or stent inside the body)

कैथेटर पतले, खोखले ट्यूब होते हैं। कैथेटर का उपयोग शरीर में तरल पदार्थ प्राप्त करने या शरीर से अतिरिक्त तरल पदार्थ निकालने के लिए किया जाता है।

जबकि स्टेंट ऐसे उपकरण होते हैं जो संकीर्ण या अवरुद्ध रक्त वाहिकाओं को खोलने में मदद करते हैं। फ्लोरोस्कोपी इन उपकरणों के उचित स्थान को सुनिश्चित करने में मदद करती है।

(4) आर्थोपेडिक सर्जरी में मार्गदर्शन (Guidance in orthopedic surgery)

जोड़ों के बदलने (joint replacement) और फ्रैक्चर (टूटी हुई हड्डी) की मरम्मत जैसी प्रक्रियाओं को निर्देशित करने में मदद करने के लिए एक सर्जन द्वारा फ्लोरोस्कोपी का उपयोग किया जा सकता है।

(5) हिस्टेरोसाल्पिंगोग्राम। (Hysterosalpingogram)

इस प्रक्रिया में, एक महिला के प्रजनन अंगों की छवियों को प्रदान करने के लिए फ्लोरोस्कोपी का उपयोग किया जाता है।

आपको फ्लोरोस्कोपी कराने की आवश्यकता क्यों है? Why do you need fluoroscopy?

यदि आपका स्वास्थ्य सेवा प्रदाता (चिकित्सक) किसी विशेष अंग, प्रणाली या आपके शरीर के अन्य आंतरिक भाग के कार्य की जांच करना चाहता है, तो आपको फ्लोरोस्कोपी जांच कराने की आवश्यकता हो सकती है। आपको कुछ चिकित्सीय प्रक्रियाओं के लिए फ्लोरोस्कोपी की भी आवश्यकता हो सकती है जिनके लिए इमेजिंग की आवश्यकता होती है।

फ्लोरोस्कोपी के दौरान क्या होता है?

प्रोसीजर के प्रकार के आधार पर, फ्लोरोस्कोपी एक बाह्य रोगी रेडियोलॉजी केंद्र (outpatient radiology center) में या अस्पताल में आपके ठहरने के हिस्से के रूप में की जा सकती है।

फ्लोरोस्कोपी प्रोसीजर में निम्नलिखित में से कुछ या अधिकांश चरण शामिल हो सकते हैं –

आपको अपने कपड़े निकालने पड़ सकते हैं। यदि हां, तो आपको अस्पताल का गाउन दिया जाएगा।

फ्लोरोस्कोपी के प्रकार के आधार पर आपको अपने श्रोणि क्षेत्र (pelvic area) या आपके शरीर के किसी अन्य भाग पर पहनने के लिए एक लीड शील्ड या एप्रन दिया जाएगा। ढाल या एप्रन (shield or apron) अनावश्यक विकिरण से सुरक्षा प्रदान करता है।

कुछ प्रक्रियाओं के लिए, आपको कंट्रास्ट डाई युक्त तरल पीने के लिए कहा जा सकता है। कंट्रास्ट डाई (contrast dye) एक ऐसा पदार्थ है जो आपके शरीर के कुछ हिस्सों को एक्स-रे पर अधिक स्पष्ट रूप से दिखाता है।

यदि आपको डाई के साथ तरल पीने के लिए नहीं कहा जाता है, तो आपको डाई को अंतःशिरा (IV) लाइन या एनीमा के माध्यम से दिया जा सकता है। एक IV लाइन {intravenous (IV) line} डाई को सीधे आपकी नस में भेजेगी। एनीमा एक ऐसी प्रक्रिया है जो डाई को मलाशय में प्रवाहित करती है।

आपको एक्स-रे टेबल पर रखा जाएगा। प्रोसीजर के प्रकार के आधार पर, आपको अपने शरीर को अलग-अलग स्थिति में ले जाने या शरीर के एक निश्चित हिस्से को हिलाने के लिए कहा जा सकता है। आपको थोड़े समय के लिए अपनी सांस रोककर रखने के लिए भी कहा जा सकता है।

यदि आपकी प्रक्रिया में कैथेटर लगाना शामिल है, तो आपका प्रदाता शरीर के उपयुक्त भाग में एक सुई डालेगा। यह आपकी कमर, कोहनी या अन्य साइट हो सकती है।

आपका प्रदाता फ्लोरोस्कोपिक चित्र (fluoroscopic images) बनाने के लिए एक विशेष एक्स-रे स्कैनर का उपयोग करेगा। यदि आपको एक कैथेटर लगाया गया था, तो आपका प्रदाता इसे हटा देगा।

कुछ प्रक्रियाओं के लिए, जैसे कि वे जिनमें जोड़ या धमनी में इंजेक्शन शामिल हैं, आपको पहले दर्द की दवा और/या आपको आराम देने के लिए दवा दी जा सकती है।

टेस्ट की तैयारी के लिए आपको क्या करने की आवश्यकता है?

आपकी तैयारी फ्लोरोस्कोपी प्रक्रिया के प्रकार पर निर्भर करेगी। कुछ प्रक्रियाओं के लिए, आपको किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं होती है। दूसरों के लिए, आपको परीक्षण से पहले कई घंटों के लिए कुछ दवाओं से बचने और/या उपवास (खाना या पीना नहीं, खाली पेट रहना) के लिए कहा जा सकता है। यदि आपको कोई विशेष तैयारी करने की आवश्यकता है तो आपका प्रदाता आपको बताएगा।

क्या फ्लोरोस्कोपी परीक्षण के कोई जोखिम हैं?

(1) यदि आप गर्भवती हैं या आपको लगता है कि आप गर्भवती हो सकती हैं तो आपको फ्लोरोस्कोपी प्रक्रिया नहीं करवानी चाहिए। विकिरण एक अजन्मे बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है।

(2) अन्य के लिए इस परीक्षण के होने का जोखिम बहुत कम है। विकिरण की खुराक (dose of radiation) प्रोसीजर पर निर्भर करती है, लेकिन अधिकांश लोगों के लिए फ्लोरोस्कोपी को हानिकारक नहीं माना जाता है। लेकिन अपने प्रदाता से उन सभी एक्स-रे के बारे में बात करें जो आपने अतीत में किए हैं। विकिरण जोखिम से होने वाले जोखिम आपके द्वारा समय के साथ किए गए एक्स-रे उपचारों की संख्या से जुड़े हो सकते हैं।

(3) यदि आपको पास कंट्रास्ट डाई दी गई है, तो एलर्जी रिएक्शन का एक छोटा सा जोखिम होता है। अपने प्रदाता को बताएं कि क्या आपको कोई एलर्जी है, विशेष रूप से शंख या आयोडीन से, या यदि आपको कभी भी कंट्रास्ट मैटीरियल से एलर्जी हुई है।

फ्लोरोस्कोपी जांच के परिणामों का क्या मतलब है?

आपकी फ्लोरोस्कोपी टेस्ट के रिजल्ट इस बात पर निर्भर करेंगे कि आपने किस प्रकार की प्रक्रिया अपनाई थी। फ्लोरोस्कोपी द्वारा कई स्थितियों और विकारों का निदान किया जा सकता है। निदान करने में सहायता के लिए आपके प्रदाता को आपके परिणाम किसी विशेषज्ञ को भेजने या अधिक परीक्षण करने की आवश्यकता हो सकती है।

यदि आपके फ्लोरोस्कोपी जांच के परिणामों के बारे में आपके कोई प्रश्न हैं, तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता (योग्य चिकित्सक) से बात करें।

Other names: fluorography, cinefluorography, photofluorography, फ्लुरोस्कोपी

( नोट – यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। यह समाचारों में उपलब्ध सामग्री के अध्ययन के आधार पर जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई अव्यावसायिक रिपोर्ट मात्र है। आप इस समाचार के आधार पर कोई निर्णय कतई नहीं ले सकते। स्वयं डॉक्टर न बनें किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें।)

जानकारी का स्रोत – Source: MedlinePlus, National Library of Medicine

गर्भावस्था में क्या खाएं, न्यूट्रिशनिस्ट से जानिए

Women's Health

Know from nutritionist what to eat during pregnancy

गर्भवती महिलाओं को खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए (Pregnant women should take special care of diet)

Pregnant woman. (File Photo: IANS)

नई दिल्ली, 28 मई 2022. मां बनने का अहसास ही अनोखा होता है। गर्भवती महिलाओं को गर्भावस्था के दौरान अपने खानपान का विशेष ध्यान रखना चाहिए। गर्भवती महिला को यह नहीं भूलना चाहिए कि वह जो भी खाती हैं उससे बच्चे को पोषण मिलता है, इसलिए गर्भावस्था के दौरान स्वस्थ आहार का सेवन (healthy diet during pregnancy) करना चाहिए। लेकिन गर्भावस्था में क्या खाएं इसकी जानकारी होना भी जरूरी है।

गर्भावस्था के दौरान इस खास डाइट प्लान के साथ स्वस्थ रहें (Stay Healthy With This Special Diet Plan During Pregnancy)

देशबन्धु की एक पुरानी खबर में टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म अल्टरनाकेयर में पोषण विशेषज्ञ तमन्ना नारंग (Tamanna Narang, nutritionist at Alternacare, which is a telemedicine platform) ने गर्भवती महिलाओं के आहार के संबंध में सुझाव दिए हैं, जो निम्न हैं :

प्रोटीन :

गर्भावस्था के दौरान बच्चे और प्लेसेंटा के विकास के लिए प्रोटीन युक्त आहार जरूर लेना चाहिए। यह जी मिचलाने और थकान से भी लड़ने में मददगार है।  महिला को कितना प्रोटीन लेना चाहिए, यह महिला के वजन पर निर्भर करता है। सी फूड, लीन मीट, दाल, अंडा, दूध, बीन्स, अनसाल्टेड नट और सीड्स प्रोटीन का अच्छा स्रोत है।

उपयोगी सुझाव : 90 प्रतिशत भारतीय गर्भवती महिलाओं में प्रोटीन की कमी है। प्रोटीन की मात्रा या कमी से संबंधित जानकारी के लिए पोषण विशेषज्ञ से संपर्क करें। चिकित्सक भी प्रोटान से संबंधित खुराक के बारे में बता सकते हैं।

आयरन

आयरन खून की कमी और संक्रमण से बचाता है। यह बच्चे और उसके दिमाग के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

गर्भावस्था के दौरान कितना आयरन लें?

पूरे गर्भावस्था के दौरान और अतिरिक्त रूप से 760 मिलीग्राम आयरन की जरूरत होती है। लीन मीट, स्किनलेश चिकन, मछली अच्छी तरह से पके अंडे, दाल, हरे पत्तीदार सब्जियां, फलियां, मेवा और अनाज आदि आयरन के अच्छे स्रोत हैं।

उपयोगी सुझाव : शरीर में अच्छी तरह से आयरन की आपूर्ति के लिए विटामिन सी युक्त फलों का भोजन के साथ या भोजन करने के फौरन बाद सेवन करें। चाय पीने के एक घंटे बाद या एक घंटे पहले आयरन से समृद्ध आहार लेने से बचें।

कैल्शियम

मां के खून में कैल्शियम की आपूर्ति होने से बच्चे के शरीर की हड्डियां अच्छी तरह से विकसित होती है। बच्चे के दिल, नसों और मांसपेशियों का विकास कैल्शियम पर निर्भर करता है, अगर मां कैल्शियम को पर्याप्त मात्रा में नहीं ले रही है तो फिर उसकी हड्डियों के भी कमजोर होने की संभावना बढ़ जाती है।

गर्भावस्था के दौरान कितना कैल्शियम लें?

गर्भावस्था के दौरान रोजाना 200 मिलीग्राम कैल्शियम युक्त आहार लेना चाहिए।

कम वसा वाले डेयरी उत्पाद (स्किम्ड मिल्क, पनीर, दही), खाने लायक हड्डियां युक्त मछलियां जैसे सार्डिन, टोफू, नाश्ते में अंकुरित अनाज, ब्रेड, रोटी, साबूत बादाम, संतरे, सूखे मेवे जैसे अखरोट और हरी पत्तेदार सब्जियां कैल्शियम के अच्छे स्रोत हैं।

उपयोगी सुझाव : कैल्शियम सबसे जरूरी खुराक है। गर्भावस्था के दौरान कैल्शियम मां की पोषण की जरूरतों को पूरा करता है। पर्याप्त मात्रा में विटामिन डी लेने से भी शरीर में कैल्शियम की आपूर्ति होती है।

‘मंकीपॉक्स’ का खतरा! क्या है मंकीपॉक्स वायरस? जानिए लक्षण और बचाव

monkeypox symptoms in hindi

मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण News about Monkeypox Virus Infections

इसे मंकीपॉक्स क्यों कहा जाता है

मंकीपॉक्स एक दुर्लभ वायरल बीमारी है। यह ज्यादातर मध्य और पश्चिमी अफ्रीका में होता है। जंगली कृंतक ( Wild rodents) और गिलहरी (squirrels ) इसके संचारक होते हैं, लेकिन इसे मंकीपॉक्स कहा जाता है क्योंकि वैज्ञानिकों ने इसे सबसे पहले लैब बंदरों में देखा था। यू.एस. मंकीपॉक्स के मामले (U.S. Monkeypox cases) बहुत दुर्लभ हैं।

मंकीपॉक्स की खोज कब हुई

मंकीपॉक्स की खोज पहली बार 1958 में हुई थी जब शोध के लिए रखे गए बंदरों की कॉलोनियों में चेचक जैसी बीमारी के दो प्रकोप हुए, इसलिए इसका नाम ‘मंकीपॉक्स’ पड़ा।

मंकीपॉक्स का पहला मानव मामला चेचक को खत्म करने के लिए गहन प्रयास की अवधि के दौरान 1970 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में दर्ज किया गया था। ) तब से, कई अन्य मध्य और पश्चिमी अफ्रीकी देशों में लोगों में मंकीपॉक्स की सूचना मिली है : कैमरून, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कोटे डी आइवर, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य, गैबॉन, लाइबेरिया, नाइजीरिया, कांगो गणराज्य और सिएरा लियोन। अधिकांश संक्रमण कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में हैं।

मंकीपॉक्स के लक्षण और संकेत हिंदी में (Signs and Symptoms of monkeypox in Hindi)

यू.एस. स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग U.S. Department of Health & Human Services से संबद्ध रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र Centers for Disease Control and Prevention के एक दस्तावेज के मुताबिक मनुष्यों में, मंकीपॉक्स के लक्षण चेचक के लक्षणों के समान लेकिन हल्के होते हैं। मंकीपॉक्स की शुरुआत बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और थकावट से होती है। चेचक और मंकीपॉक्स के लक्षणों के बीच मुख्य अंतर(main difference between the symptoms of smallpox and monkeypox) यह है कि मंकीपॉक्स के कारण लिम्फ नोड्स सूज जाते हैं (लिम्फैडेनोपैथी) जबकि चेचक में ऐसा नहीं होता है। मंकीपॉक्स के लिए ऊष्मायन अवधि (संक्रमण से लक्षणों तक का समय) { incubation period (time from infection to symptoms) } आमतौर पर 7-14 दिनों का होता है, लेकिन यह 5−21 दिनों तक हो सकता है।

बीमारी शुरू होती है :

  • बुखार
    • सिर दर्द
    • मांसपेशियों में दर्द (Muscle aches)
    • पीठ दर्द
    • सूजी हुई लसीका ग्रंथियां (Swollen lymph nodes)
    • ठंड लगना
    • थकावट (Exhaustion) से।

बुखार आने के 1 से 3 दिनों के अंदर (कभी-कभी अधिक) रोगी में एक दाना उभरता है, जो अक्सर चेहरे पर शुरू होता है और फिर शरीर के अन्य भागों में फैल जाता है।

घाव बढ़ने से पहले निम्नलिखित चरणों से गुजरते हैं :

  • उपरंजकयुक्त (Macules)
  • पपुल्स (Papules)
  • पुटिकाएं (Vesicles)
  • छाले (Pustules)
  • पपड़ी (Scabs)

बीमारी आमतौर पर 2-4 सप्ताह तक रहती है। अफ्रीका में, मंकीपॉक्स 10 में से 1 व्यक्ति में मृत्यु का कारण बनता है।

मंकीपॉक्स का संचरण कैसे होता है? (Transmission of monkeypox)

मंकीपॉक्स वायरस का संचरण तब होता है जब कोई व्यक्ति वायरस से दूषित किसी जानवर, मानव या वायरस से दूषित सामग्री के वायरस के संपर्क में आता है। वायरस टूटी हुई त्वचा (जो भले ही दिखाई न दे), श्वसन पथ, या श्लेष्मा झिल्ली (आंख, नाक या मुंह) के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है।

मंकीपॉक्स वायरस का पशु-से-मानव संचरण काटने या खरोंच, झाड़ी के मांस की तैयारी, शरीर के तरल पदार्थ या घाव सामग्री के सीधे संपर्क, या घाव सामग्री के साथ अप्रत्यक्ष संपर्क, जैसे दूषित बिस्तर के माध्यम से हो सकता है।

मंकीपॉक्स वायरस का मानव-से-मानव संचरण कैसे होता है

माना जाता है कि मंकीपॉक्स का मानव-से-मानव संचरण (Human-to-human transmission of monkeypox) मुख्य रूप से बड़ी श्वसन बूंदों के माध्यम से होता है। श्वसन की बूंदें आम तौर पर कुछ फीट से अधिक नहीं जा सकती हैं, इसलिए लंबे समय तक आमने-सामने संपर्क होने से इसका संचरण होता है।

मानव-से-मानव संचरण के अन्य तरीकों में शरीर के तरल पदार्थ या घाव सामग्री के साथ सीधा संपर्क, और घाव सामग्री के साथ अप्रत्यक्ष संपर्क, जैसे दूषित कपड़ों या लिनेन के माध्यम से शामिल हैं।

मंकीपॉक्स का इलाज (Treatment of Monkeypox)

सीडीसी के मुताबिक वर्तमान में मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण के लिए कोई विशिष्ट उपचार स्वीकृत नहीं है। हालांकि, चेचक के रोगियों में उपयोग के लिए विकसित एंटीवायरल फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 24 मई 2022 की खास खबर

top 10 headlines this night

ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस

Top headlines of India today. Today’s big news 24 May 2022

भ्रष्टाचार के आरोप में पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री बर्खास्त

पंजाब के स्वास्थ्य मंत्री विजय सिंगला को दो महीने पुरानी भगवंत मान सरकार के मंत्रिमंडल से आज बर्खास्त कर दिया गया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंगला को भ्रष्टाचार के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया है।

पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने ट्वीट किया,

“आम आदमी पार्टी का जन्म ईमानदार सिस्टम कायम करने के लिए हुआ है… अरविंद केजरीवाल जी ने हमेशा कहा है कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं करेंगे चाहे कोई अपना हो या बेगाना.

स्वास्थ्य मंत्री के खिलाफ भ्रष्टाचार के सबूत मिलते ही तुरंत बर्खास्त किया…साथ ही FIR के आदेश दिए”

वाम दलों की मांग, सरकार पेट्रोलियम उत्पादों पर सभी अधिभार, उपकर वापस ले

देश में बढ़ती बेरोजगारी और पेट्रोलियम पदार्थों की आसमान छूती कीमतों के खिलाफ वाम दलों के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बिहार में 25 से 31 मई तक सघन आंदोलन अभियान चलेगा और 31 मई को जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन, धरना कार्यक्रम होंगे।

केजरीवाल ने 150 इलेक्ट्रिक बसों को दिखाई हरी झंडी, तीन दिन की मुफ्त सवारी की घोषणा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आज इंद्रप्रस्थ डिपो से 150 इलेक्ट्रिक बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया और अगले तीन दिनों के लिए इन बसों में मुफ्त यात्रा की भी घोषणा की।

प्रधानमंत्री के दौरे से पहले आईएसबी के छात्र जांच के घेरे में : भाकपा

भाकपा के राष्ट्रीय सचिव के. नारायण ने आरोप लगाया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 26 मई को इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) हैदराबाद के दौरे से पहले अधिकारी आईएसबी के छात्रों पर निगाह रख रहे हैं।

दिल्ली-एनसीआर में बारिश के बाद मौसम हुआ सुहाना

रविवार से दिल्ली-एनसीआर में शुरू हुई बारिश का सिलसिला मंगलवार शाम तक जारी रहा जिससे राजधानीवासियों को भीषण गर्मी से राहत मिली।

जलवायु परिवर्तन से भारत, पाकिस्तान में समय से पहले विनाशकारी गर्मी की ’30 गुना अधिक आशंका

उत्तर-पश्चिम भारत और दक्षिण-पूर्वी पाकिस्तान में हाल की गर्मी की लहर पर विशेष रूप से नजर रखने वाले और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को मापने वाले एक एट्रिब्यूशन अध्ययन में कहा गया है कि लंबे समय तक लू चलने की संभावना 30 गुना अधिक है।

भारत में कोविड के 1,675 नए मामले मिले, 31 की मौत

भारत में मंगलवार को 1,675 ताजा कोविड मामले दर्ज किए गए, जो पिछले दिन दर्ज किए गए 2,022 संक्रमणों के मुकाबले कम थे। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी किए गए आंकड़ों से इसकी जानकारी मिली है।

न्यायमूर्ति सबीना बनीं हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की मुख्य न्यायाधीश

भारत के संविधान के अनुच्छेद 223 द्वारा प्रदत्त अधिकारों का उपयोग करते हुये राष्ट्रपति ने हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय की वरिष्ठतम न्यायाधीश श्रीमती न्यायमूर्ति सबीना को उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया है। विधि एवं न्‍याय मंत्रालय की एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि उनका कार्यकाल हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश श्री न्यायमूर्ति मोहम्मद रफीक के 25 मई, 2022 को अवकाश ग्रहण करने के फलस्वरूप प्रभावी हो जायेगा।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन : स्वास्थ्य रिकॉर्डों के रखरखाव के लिये संशोधित ‘आभा’ मोबाइल एप्लीकेशन लाँच

अपनी प्रमुख योजना आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएएम) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) मोबाइल एप्लीकेशन के संशोधित संस्करण को लॉन्च करने की घोषणा की है।

आभा एप्प को पहले एनडीएचएम हेल्थ रिकॉर्ड्स एप्प के नाम से जाना जाता था, जो गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसे चार लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

नवीन पटनायक ने स्कूलों में शुरू किया ओलंपिक वैल्यू शिक्षाकार्यक्रम

ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने आज 90 स्कूलों में ओलंपिक वैल्यू शिक्षा कार्यक्रम की वर्चुअल शुरुआत की। यह कार्यक्रम राउरकेला और भुवनेश्वर के स्कूलों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है।

ऑस्ट्रेलिया : न्यू साउथ वेल्स सिंगल यूज प्लास्टिक बैग पर बैन लगाएगा

ऑस्ट्रेलिया का न्यू साउथ वेल्स (एनएसडब्ल्यू) सिंगल-यूज प्लास्टिक बैग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की तैयारी कर रहा है।

न्यूयॉर्क शहर में आपातकाल की घोषणा

अमेरिका में शिशु फामूर्ला आपूर्ति की कमी के कारण न्यूयॉर्क शहर ने आपातकाल की स्थिति घोषित कर दी है।

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री सुगा ने पीएम मोदी से की मुलाकात

जापान के पूर्व प्रधानमंत्री योशीहिदा सुगा ने मंगलवार को टोक्यो में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

फ्रेंच ओपन : चोट से वापसी कर मेदवेदेव ने बैगनिस को हराया

दुनिया के दूसरे नंबर के खिलाड़ी डेनियल मेदवेदेव ने मंगलवार को पेरिस में फ्रेंच ओपन के शुरुआती दौर में अर्जेंटीना के फेसुंडो बैगनिस को 6-2, 6-2, 6-2 से शिकस्त दी।

भारत में मौत की जाति 

national news

Death caste in India!

क्या मौत की जाति भी होती है?

यह कहना अजीब लग सकता है कि भारत में पैदा हुआ आदमी कितना लंबा जीवन जिएगा, यह इससे तय हो जाता है कि उसने किस जाति में जन्म लिया है। लेकिन यही सच है।

Adivasis, Dalits, Muslims have lowest mean age of death among Indians, reveals report

चर्चित अर्थशास्त्री वाणीकांत बोरा (economist Vani Kant Borooah) का इससे संबंधित एक विस्तृत शोध “Caste, Religion, and Health Outcomes in India, 2004-14” से किया था, जो वर्ष 2018 में इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली में प्रकाशित हुआ था।

नेशनल सेंपल सर्वे (2004-2014) पर आधारित अपने इस शोध में उन्होंने वर्ष 2004 से 2014 के बीच भारतीयों की मृत्यु के समय औसत आयु का अध्ययन (Study of the mean age at death of Indians between 2004 and 2014) किया।

यह अध्ययन बताता है कि भारत में ऊंची कही जाने वाले जातियों और अन्य पिछड़ी, दलित, आदिवासी जातियों की औसत उम्र में बहुत अंतर है।

सामान्यत: आदिवासी समुदाय से आने वाले लोग सबसे कम उम्र में मरते हैं, उसके बाद दलितों का नंबर आता है, फिर अन्य पिछड़ा वर्गों का। एक औसत सवर्ण हिंदू इन बहुजन समुदायों से बहुत अधिक वर्षों तक जीता है।

2014 में आदिवासियों की मृत्यु के समय औसत उम्र 43 वर्ष, अनुसूचित जाति की 48 वर्ष, मुसलमान ओबीसी  की 50 वर्ष और हिंदू ओबीसी की 52 वर्ष थी, जबकि इसी वर्ष उच्च जाति के लोगों (हिंदू व अन्य गैर-मुसलमान) की औसत उम्र 60 वर्ष थी।

आश्चर्यजनक रूप से ऊंची जाति के मुसलमानों की औसत उम्र ओबीसी मुसलमानों से एक वर्ष कम थी (चार्ट देखें)।

भारत में विभिन्न सामाजिक समूहों की औसत आयु, 2004 और 2014

सामाजिक समूह 2004 में औसत आयु 2014 में औसत आयु
उच्च जाति (गैर-मुसलमान) 55 60
ओबीसी (गैर-मुसलमान) 49 52
ओबीसी मुसलमान 43 50
उच्च जाति मुसलमान 44 49
अनुसूचित जाति 42 48
अनुसूचित जनजाति 45 43

2004 से 2014 के बीच के 10 सालों में सवर्ण हिंदू की औसत उम्र 5 साल, हिंदू ओबीसी की 5 साल,  मुसलमान ओबीसी की 7 साल, ऊँची जाति के मुसलमान की 5 साल और अनुसूचित जाति की 6 साल बढ़ी। लेकिन, इस अवधि में अनुसूचित जनजाति की औसत उम्र 2 वर्ष कम हो गई।

बताने की आवश्यकता नहीं कि आदिवासियों की औसत उम्र का कम होना देश के विकास की किस दिशा की ओर संकेत कर रहा है।
स्त्रियों को केंद्र में रखकर इसी प्रकार का एक और शोध इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ दलित स्टडीज (Indian Institute of Dalit Studies) द्वारा 2013 में भी किया गया था, जिसे बाद में संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी अपने स्त्रियों संबंधी एक विशेष अंतराष्ट्रीय अध्ययन में उद्धृत किया था।

इस शोध में पाया गया था कि पुरुषों और स्त्रियों की औसत उम्र में बहुत फर्क है। स्त्रियों में जाति के स्तर पर जो फर्क है, वह और भी चिंताजनक है।

शोध बताता है कि औसतन दलित स्त्री उच्च जाति की महिलाओं से 14.5 साल पहले मर जाती  है। 2013 में दलित महिलाओं की औसत आयु  में 39.5 वर्ष थी जबकि ऊँची जाति की महिलाओं की 54.1 वर्ष।

इसी तरह, एक ‘पिछड़े’ या कम विकसित राज्य में रहने वाले और विकसित राज्य में रहने वाले लोगों की औसत उम्र में बड़ा फर्क है। “पिछड़े राज्यों” के लोगों की औसत उम्र सात साल कम है। विकसित राज्य में रहने वाले लोगों की औसत उम्र 51.7 वर्ष है, जबकि पिछड़े राज्यों की 44.4 वर्ष।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि उच्च जातियों के सभी लोग 60 वर्ष जीते हैं और बहुजन तबकों के 43 से 50 साल। लेकिन अध्ययन बताता है कि भारत में विभिन्न सामाजिक समुदायों की “औसत उम्र” में बहुत ज्यादा फर्क है। 

इस शोध से सामने आए तथ्यों से भारत में मौजूद भयावह सामाजिक असमानता उजागर होती है तथा हमें सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हमारे विकास की दिशा ठीक है? क्या सामाजिक रूप से कमजोर तबकों के कथित कल्याण के लिए राज्य द्वारा उठाए गए कदम पर्याप्त हैं?

-प्रमोद रंजन

[प्रमोद रंजन असम विश्वविद्यालय के रवीन्द्रनाथ टैगोर स्कूल ऑफ़ लैंग्वेज एंड कल्चरल स्टडीज़ में सहायक प्रोफ़ेसर हैं। ]

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 23 मई 2022 की खास खबर

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ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस

Top headlines of India today. Today’s big news 23 May 2022

अब आप व्हाट्सएप की माईगव हेल्पडेस्क पर डिजिलॉकर सेवाओं का उपयोग कर सकते हैं

माईगव ने सरकारी सेवाओं को सुलभ, समावेशी, पारदर्शी और सरल बनाने की एक बड़ी पहल के रूप में आज यह घोषणा की कि नागरिक अब डिजिलॉकर सेवाओं का उपयोग करने के लिए व्हाट्सएप पर माईगव हेल्पडेस्क का उपयोग करने में समर्थ होंगे। इन सेवाओं में व्‍हाट्सएप पर डिजिलॉकर खाते बनाना और उन्‍हें प्रमाणित करना, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वाहन पंजीकरण प्रमाण-पत्र जैसे दस्तावेज डाउनलोड करना शामिल हैं।

ज्ञानवापी मस्जिद मामला : वाराणसी कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखा, कल सुनाया जाएगा फैसला

ज्ञानवापी मामला : अगली सुनवाई की तारीख कल तय करेगी वाराणसी कोर्ट; हिंदू पक्ष ने 1991 के अधिनियम को समाप्त करने की मांग की।

अपनी स्थापना के 50वें साल का उत्सव पर सेल ने जारी किया कंपनी का विशेष लोगो

देश की सार्वजनिक क्षेत्र की स्टील उत्पादक कंपनी, स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल), इस साल यानि 2022 में अपनी स्थापना के पचासवें साल का उत्सव मना रही है। सेल की स्थापना 24 जनवरी, 1973 हुई थी।

23 मई को मानसून अपडेट : स्काईमेट का कहना है कि मानसून की शुरुआत लू के थपेड़ों के कमजोर होने के रूप में हुई है

हीटवेव की स्थिति 29-30 मई तक दबी रहेगी; जलभराव और उड़ान में देरी से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। मंगलवार को भी आंधी चलने की संभावना है।

भारत में 2,022 नए कोविड मामले दर्ज, 46 मौतें

 भारत ने पिछले दिन की 2,226 की गिनती के मुकाबले 24 घंटे की अवधि में 2,022 ताजा कोविड मामलों में मामूली गिरावट दर्ज की। यह जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सोमवार सुबह दी है।

डब्ल्यूएचओ द्वारा देश की आशा बहनों को सम्मान मिलना पूरे देश के लिए गर्व का विषय : प्रियंका गांधी

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ता (आशा) को सम्मान दिए जाने को पूरे देश के लिए गर्व का विषय बताते हुए कहा है कि यूपीए सरकार ने अंतिम व्यक्ति तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए आशा बहनों की नियुक्तियां की थीं।

भाकपा सांसद बिनॉय विश्वम ने रेल मंत्री को लिखा पत्र, वरिष्ठ नागरिकों के लिए की रियायत की मांग

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) सांसद बिनॉय विश्वम ने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर रेलवे में वरिष्ठ नागरिकों के लिए रियायत बहाल करने का अनुरोध किया है।

पाकिस्तानी सरकार जल्दी चुनाव कराने के बजाय कार्यकाल पूरा करेगी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पाकिस्तान में गठबंधन सहयोगियों ने काफी विचार-विमर्श के बाद फैसला किया है कि मौजूदा सरकार जल्द चुनाव कराने के बजाय अपना कार्यकाल पूरा करेगी।

अफगानिस्तान ने शुरू किया पोलियो टीकाकरण अभियान

अफगानिस्तान में तालिबान के नेतृत्व वाली सरकार ने एक राष्ट्रव्यापी पोलियो टीकाकरण अभियान शुरू किया है। इस अभियान के तहत 9.9 मिलियन बच्चों को पोलियो वैक्सीन लगाई जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

कोविड और मंकीपॉक्स दुनिया के लिए विकट चुनौती : डब्ल्यूएचओ

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा कि दुनिया अब तक लगभग 15 देशों में 100 से अधिक लोगों को संक्रमित करने वाले मंकीपॉक्स के प्रकोप की एक महत्वपूर्ण और विकट चुनौती का सामना कर रही है।

ऑस्ट्रेलियाई एरियन टिटमस ने बनाया 400 मीटर फ्रीस्टाइल विश्व रिकॉर्ड

ऑस्ट्रेलियाई तैराकी चैंपियनशिप में एरियन टिटमस ने महिलाओं के 400 मीटर फ्रीस्टाइल में नया विश्व रिकॉर्ड बनाया है।

खबरों में : आहार, ओला कैब्स, पंजाब नैशनल बैंक, इंडियन प्रीमियर लीग, करोड़, स्कूटर, राजस्थान रॉयल्स, वित्त वर्ष, कोलकाता नाईट राइडर्स, भारत.

कोरोना के बाद अब भयंकर हुआ मंकीपॉक्स ? डब्ल्यूएचओ की चेतावनी-12 देशों में फैला

Opening of the 75th World Health Assembly - 22 May 2022 On 22 May 2022, WHO Director-General Dr Tedros Adhanmon Ghebreyesus during his opening address at the 75th World Health Assembly in Geneva, Switzerland. (PHOTO-WHO)

Monkeypox is now terrible after Corona? WHO’s warning spread to 12 countries

नई दिल्ली/ जिनेवा, 23 मई 2022: विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने कहा है कि दुनिया अब तक लगभग 15 देशों में 100 से अधिक लोगों को संक्रमित करने वाले मंकीपॉक्स के प्रकोप की एक महत्वपूर्ण और विकट चुनौती का सामना कर रही है।

रविवार को जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र की 75वीं विश्व स्वास्थ्य सभा को संबोधित करते हुए, डब्ल्यूएचओ के महानिदेशक ट्रेडोस एडनॉम गेब्रेयिसस ने कहा कि दुनिया में कोरोना महामारी अभी खत्म नहीं हुई है। इसने लगभग 15 मिलियन अतिरिक्त लोगों की जान ली है।

गेब्रेयसस ने कहा, “कोविड महामारी निश्चित रूप से खत्म नहीं हुई है। हम जलवायु परिवर्तन, असमानता और भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से प्रेरित बीमारी, सूखा, अकाल और युद्ध का सामना कर रहे हैं।”

वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसी ने पुष्टि की है कि दुनिया भर में मंकीपॉक्स के 92 पुष्ट मामले हैं और 12 देशों में 28 अन्य संदिग्ध संक्रमण हैं। इजराइल, स्विट्जरलैंड, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम सूची में नए जुड़े हैं।

इसके अलावा, कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (Democratic Republic of the Congo) में घातक इबोला का प्रकोप देखा गया है, जबकि लगभग 21 देशों ने बच्चों में रहस्यमय तीव्र हेपेटाइटिस की स्थिति के कम से कम 450 मामलों की सूचना दी है।

लगभग 12 बच्चों की जान चली गई है, और कई को लिवर प्रत्यारोपण की आवश्यकता (need for liver transplant) है।

डॉ गेब्रेयिसस ने कहा, “सभी क्षेत्रों में लगभग 70 देशों में रिपोर्ट किए गए मामले बढ़ रहे हैं और यह एक ऐसी दुनिया में है जिसमें परीक्षण दरों में गिरावट आई है। परीक्षण और अनुक्रमण में गिरावट का मतलब है कि हम वायरस के विकास के लिए खुद को अंधा कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा कि केवल 57 देशों ने अपनी 70 प्रतिशत आबादी का टीकाकरण किया है, जिनमें से लगभग सभी उच्च आय वाले देश हैं। उन्होंने महामारी से लड़ने के लिए टीकाकरण बढ़ाने, वायरस की जीनोमिक निगरानी करने का आह्वान किया।

गेब्रेयिसस ने ‘शांति’ का आह्वान करते हुए कहा कि यह ‘स्वास्थ्य के लिए एक शर्त’ है।

जानिए मंकीपॉक्स का चेचक से क्या संबंध है

monkeypox symptoms in hindi

How monkeypox relates to smallpox

नई दिल्ली, 21 मई 2022. दुनिया में एक नई बीमारी मंकीपॉक्स ने विशेषज्ञों की परेशानी बढ़ा दी है। हस्तक्षेप विश्व स्वास्थ्य संगठन की मंकीपॉक्स पर फैक्ट शीट (World Health Organization fact sheet on monkeypox in Hindi) के हवाले से बताते हैं कि मंकीपॉक्स का चेचक से क्या संबंध है

मंकीपॉक्स की नैदानिक ​​​​प्रस्तुति चेचक, जो एक संबंधित ऑर्थोपॉक्सवायरस संक्रमण है जिसे दुनिया भर में मिटा दिया गया है, से मिलती-जुलती है। चेचक का संचरण अधिक आसानी से होता था और अधिक बार घातक होता था क्योंकि चेचक के लगभग 30% रोगियों की मृत्यु हो जाती थी।

स्वाभाविक रूप से प्राप्त चेचक का अंतिम मामला 1977 में पता चला था, और 1980 में, वैश्विक टीकाकरण अभियान के बाद दुनिया भर में चेचक को समाप्त करने की घोषणा कर दी गई थी।

लगभग 40 साल या उससे अधिक समय हो गया है जब सभी देशों ने वैक्सीनिया-आधारित टीके के साथ चेचक के नियमित टीकाकरण को बंद कर दिया है।

चूंकि वैक्सीनिया वैक्सीन पश्चिम और मध्य अफ्रीका में मंकीपॉक्स से भी सुरक्षा प्रदान करती है, इसलिए बिना टीके वाली आबादी अब मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमण के प्रति अधिक संवेदनशील है।

हालाँकि अब चेचक अब स्वाभाविक रूप से नहीं होता है, फिर भी वैश्विक स्वास्थ्य क्षेत्र इस घटना में सतर्क रहता है कि यह प्राकृतिक तंत्र, प्रयोगशाला दुर्घटना या जानबूझकर रिलीज के माध्यम से फिर से प्रकट हो सकता है। चेचक के फिर से उभरने की स्थिति में वैश्विक तैयारी सुनिश्चित करने के लिए, नए टीके, निदान और एंटीवायरल एजेंट विकसित किए जा रहे हैं।

चेचक और मंकीपॉक्स की रोकथाम के लिए अब एक नई तीसरी पीढ़ी के वैक्सीनिया वैक्सीन (third-generation vaccinia vaccine) को मंजूरी दी गई है।

एंटीवायरल एजेंट भी विकसित किए जा रहे हैं। ये अब मंकीपॉक्स की रोकथाम और नियंत्रण के लिए भी उपयोगी साबित हो सकते हैं।

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 20 मई 2022 की खास खबर

updates on the news of the country and abroad breaking news

ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस

Top headlines of India today. Today’s big news 20 May 2022

ज्ञानवापी मस्जिद मामला : सर्वोच्च न्यायालय ने जिला जज को मुकदमा ट्रांसफर किया, जारी रहेगी कथित शिवलिंगकी सुरक्षा

सर्वोच्च न्यायालय ने वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद मामले में सुनवाई करते हुए शुक्रवार को कहा कि उसका 17 मई का अंतरिम आदेश आगे भी जारी रहेगा, जिसमें मुसलमानों के नमाज अदा करने के अधिकार को बाधित किए बिना ‘कथित शिवलिंग’ की सुरक्षा का निर्देश दिया गया था।

लालू प्रसाद यादव के आवास पर सीबीआई रेड को राजद ने बताया राजनीतिक प्रतिशोध

सीबीआई द्वारा पूर्व रेलमंत्री और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के दिल्ली और पटना ठिकानों व अन्य स्थानों पर छापेमारी किए जाने को राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया है।

चीन मसले पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार से कहा, देश को अंधेरे में न रखें

पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के पास चीन के दूसरा पुल बनाने को लेकर कांग्रेस फिर से केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर हो गई है। कांग्रेस ने केन्द्र पर देश को अंधेरे में रखने का आरोप लगाते हुए विदेश मंत्रालय के बयान पर स्पष्टीकरण देने की मांग की है।

लोकतंत्र को बचाने के लिए वंशवादी राजनीति से लड़ना जरूरी : पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस का नाम लिये बगैर उस पर कटाक्ष करते हुए कहा है कि वह वंशवादी राजनीति को महत्व देती है, जो लोकतंत्र के लिए खतरनाक है। साथ ही मोदी ने भाजपा पदाधिकारियों को भी सलाह दी है कि 130 करोड़ भारतीयों की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिये कड़ी मेहनत करें।

राज ठाकरे ने अपनी अयोध्या यात्रा को किया स्थागित

पिछले कुछ समय से खबर आ रही थी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे अयोध्या की यात्रा करेंगे। अब इस यात्रा को लेकर राज ठाकरे ने एक बड़ी घोषणा की है कि उन्होंने 5 जून को अपनी अयोध्या यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया है।

बेंगलुरू अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर बम विस्फोट की अफवाह से अफरा-तफरी

बम की धमकी के बाद बेंगलुरू के केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर तनाव की स्थिति हो गई, और लोगों के बीच दहशत पैदा हो गया। बाद में पता चला है कि यह सिर्फ एक अपवाह है।

सर्वोच्च न्यायालय से जमानत के बाद जेल से रिहा हुए आजम खान

सर्वोच्च न्यायालय से अंतरिम जमानत मिलने के बाद सपा नेता आजम खान आज सीतापुर जेल से रिहा हो गए। उनकी रिहाई से पहले ही दोनों बेटे अब्दुल्ला, अदीब आजम और शिवपाल सिंह यादव सीतापुर जेल के बाहर पहुंच थे। फिर वह उन्हें लेकर रवाना हो गए।

कुछ राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कोविड 19 टीकाकरण में उल्लेखनीय गिरावट पर स्वास्थ्य मंत्रालय चिंतित

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कोविड-19 टीकाकरण की काफी धीमी गति को लेकर चिंता व्यक्त की है, और सभी पात्र लोगों को टीका लगाकर पूर्ण टीकाकरण कवरेज की गति में तेजी लाने का आग्रह किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव राजेश भूषण ने इस बारे में आज एक वीडियो कॉन्फ्रेंस (वीसी) के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के स्वास्थ्य सचिवों और एनएचएम एमडी के साथ कोविड टीकाकरण की स्थिति की समीक्षा करने के बाद सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को सूचित किया है।

चीन ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से वैश्विक अनाज बाजार को स्थिर बनाने की अपील की

संयुक्त राष्ट्र में स्थित चीनी स्थाई प्रतिनिधि च्यांग ज्वून ने 19 मई को अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से समन्वय कार्रवाई को मजबूत कर वैश्विक अनाज बाजार को स्थिर बनाने की अपील की।

इंडोनेशिया पाम तेल निर्यात प्रतिबंध हटाएगा

इंडोनेशिया 23 मई से कच्चे पाम तेल, खाना पकाने के तेल, परिष्कृत, ब्लीच्ड और (आरबीडी) ताड़ के तेल, और आरबीडी पाम ओलीन पर निर्यात प्रतिबंध हटा देगा, क्योंकि देश ने घरेलू खाना पकाने के तेल की कीमतों और आपूर्ति को नियंत्रण में ला दिया है।

इंग्लैंड टेस्ट सीरीज से पहले न्यूजीलैंड के 3 खिलाड़ी कोरोना पॉजिटिव

इंग्लैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले न्यूजीलैंड टीम के तीन सदस्य कोरोना संक्रमित पाए गए हैं।

ना करें बीमार होने का इंतज़ार, पहले ही करें रोकथाम

what should we do to stay healthy

Do not wait to get sick, do prevention in advance

आजकल की भागदौड़ की जिंदगी व अनियमित दिनचर्या की वजह से हमें बीमारियों को आने से रोक पाना एक बहुत बड़ी चुनौती है. अपने स्वास्थ्य को शारीरिक, मानसिक, और सामाजिक तौर पर संतुलित रखना एक संपूर्ण  स्वस्थ व्यक्ति का द्योतक (sign of healthy person) है, जिसे संतुलित आहार (balanced diet), नियमित दिनचर्या, नित्य प्रति व्यायाम, और पर्याप्त नींद के माध्यम से प्राप्त किए जाने पर हमेशा से जोर दिया जाता रहा है. किंतु बदलती परिस्थितियों में अब इन माध्यमों से भी स्वस्थ शरीर को पाना कठिन होता जा रहा है.

और भी ज्यादा बढ़ गया है बीमारियों के होने का खतरा

मशीनों के बढ़ते प्रयोग, प्रदूषण, मिलावट, कीटनाशकों के प्रयोग एवं शारीरिक श्रम के कम होने से बीमारियों के होने का खतरा (risk of diseases) और भी ज्यादा बढ़ गया है.

नियमित स्वास्थ्य जांच का महत्व (Importance of regular health check-up)

ऐसे में प्रश्न उठता है कि स्वस्थ रहने के लिए हमें क्या करना चाहिए? वरिष्ठ डॉक्टर आजकल जल्द से जल्द बीमारियों को पकड़ने के लिए या उनका निदान करने के लिए नियमित रूप से जांच एवं परामर्श की सलाह देते हैं.

कुछ एक सामान्य जांचों से बड़ी बीमारियों के आने का अंदेशा लग जाता है ऐसे में नियमित स्वास्थ्य जांच (regular health check-up) स्वास्थ्य रक्षा के लिए एक बड़ा माध्यम सिद्ध हो सकता है. नियमित स्वास्थ्य जांच कराने से हम आने वाली बीमारियों को सही समय पर रोक भी सकते हैं और उनकी जटिलताओं को और जोखिम को कम कर सकते हैं.

40 वर्ष से ऊपर के लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच क्यों जरूरी है?

सामान्यतः 40 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को नियमित स्वास्थ्य जांच की ज्यादा आवश्यकता होती है क्योंकि उन्हें खतरनाक बीमारियों से प्रभावित होने की संभावना बढ़ती हुई उम्र के साथ बढ़ती जाती है. वैसे तो आज की बदली हुई परिस्थितियों में यह भी देखा जा रहा है कि 25 वर्ष के बाद भी हृदय रोग एवं हृदय आघात (heart disease and stroke) जैसे गंभीर रोग प्रारंभ होने लगे हैं.

हम सस्ती और सुगम जांचों से गंभीर बीमारियां जैसे मधुमेह (diabetes), उच्च रक्तचाप (high blood pressure), हृदय रोग (heart disease), किडनी रोग (kidney disease), मुख के कैंसर (oral cancer), शरीर में किसी गांठ के कैंसर में परिवर्तित होने का सही समय पर निदान कर बढ़ने से या फैलने से रोक सकते हैं.

आपके लिए कौन सा हेल्थ चैकअप पैकेज उचित है?

विभिन्न आयु वर्ग के लोगों के लिए, महिलाओं एवं पुरुषों के लिए और रोग के अनुसार भी हेल्थ चैकअप पैकेज उपलब्ध हैं, जिनका लाभ आसानी से उठाया जा सकता है.

यदि हम कुछ सामान्य जांचों की बात करें तो उच्च रक्तचाप जैसी बीमारी को निरंतर रूप से ब्लड प्रेशर चेक कराने से रोका जा सकता है. वहीं मधुमेह जैसी बीमारी को समय-समय पर ब्लड शुगर फास्टिंग (fasting blood sugar) एवं ब्लड शुगर पीपी (blood sugar pp) एवं 3 महीने का एवरेज ब्लड शुगर बताने वाला टेस्ट hba1c को करा कर इसका निदान किया जा सकता है.

यदि हम हृदय से संबंधित बीमारियों की बात करें तो लिपिड प्रोफाइल (lipid profile) जिसमें कोलेस्ट्रोल और ट्राइग्लिसराइड की मात्रा की जांच की जाती है और साथ ही साथ एचडीएल यानी कि अच्छा कोलेस्ट्रोल और एलडीएल जिसे बुरा कोलेस्ट्रॉल कहा जाता है उसकी मात्रा को भी जांच कर हृदय के अंदर होने वाली वसा की जमा होने की वजह से ब्लॉकेज को रोका जा सकता है, साथ ही किसी भी प्रकार का हृदय में दर्द होने पर या चुभन होने पर एक सामान्य टेस्ट ईसीजी के माध्यम से हृदय की स्थिति को जाँचा जा सकता है और हृदय आघात एवं हृदय की अन्य अनियमितताओं जैसी बड़ी बीमारियों को पकड़ा जा सकता है.

heart disease
45 वर्ष से अधिक लोगों के लिए जरूरी स्वास्थ्य जांचें (Required health checks for people over the age of 45)

45 वर्ष से अधिक लोगों को प्रतिवर्ष हृदय रोग के निदान के लिए ट्रेडमिल टेस्ट, एवं इकोकार्डियोग्राफी (echocardiography) एवं चेस्ट x-ray भी कराते रहना चाहिए.

किडनी की बीमारियों का सीरम क्रिएटिनिन (Serum creatinine test), ब्लड यूरिया एवं ब्लड नाइट्रोजन जैसी सामान्य रक्त जांच से सही समय पर निदान किया जा सकता है.

पेट की विभिन्न बीमारियों और गाल ब्लैडर की पथरी को अल्ट्रासाउंड के माध्यम से निदान किया जा सकता है.

पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर के लिए जांच (Screening for prostate cancer in men)

पुरुषों में प्रोस्टेट कैंसर (prostate cancer in men) बहुत ही सामान्य है जिसे एक खून की जांच पी.एस.ए. के माध्यम से पकड़ा जा सकता है और वही महिलाओं में दूसरी ओर स्त्री कैंसर को पैप स्मीयर इजाज द्वारा पकड़ा जा सकता है.

रक्त कैंसर को हम सीबीसी या कंपलीट हीमोग्राम टेस्ट (CBC or complete hemogram test) के माध्यम से निदान कर सकते हैं.

अन्य बीमारियों के लिए हम अपने फैमिली फिजिशियन या जनरल फिजिशियन से परामर्श कर संबंधित जाकर करवा सकते हैं और बीमारियों को बढ़ने से सही समय पर रोक सकते हैं.

गौरव पाण्डेय,

वरिष्ठ स्वास्थ्यविद यशोदा अस्पताल गाजियाबाद

(नोट : यह खबर किसी भी परिस्थिति में चिकित्सकीय सलाह नहीं है। यह समाचारों में उपस्थित सूचनाओं के आधार पर जनहित में एक अव्यावसायिक जानकारी मात्र है। किसी भी चिकित्सा सलाह के लिए योग्य व क्वालीफाइड चिकित्सक से संपर्क करें। स्वयं डॉक्टर कतई न बनें।)