ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस। आज की बड़ी खबरें | 24 अप्रैल 2022

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स्वतंत्र व निडर प्रेस के बिना एक मजबूत व जीवंत लोकतंत्र बचा नहीं रह सकता : उपराष्ट्रपति

उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने इस बात पर जोर दिया है कि एक स्वतंत्र, बंधनमुक्त व निडर प्रेस के बिना कोई मजबूत और जीवंत लोकतंत्र बचा हुआ नहीं रह सकता है। श्री नायडू ने बेंगलुरू प्रेस क्लब की 50वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक सभा को संबोधित करते हुए सुझाव दिया कि भारत के लिए अपने लोकतंत्र की जड़ों को मजबूत करने को लेकर एक मजबूत, स्वतंत्र और जीवंत मीडिया की जरूरत है। इसके अलावा श्री नायडू ने मीडिया में मूल्यों के पतन को लेकर सावधान भी किया। उन्होंने निष्पक्ष और वस्तुनिष्ठ रिपोर्टिंग का आह्वान किया। श्री नायडू ने आगे इस बात पर जोर दिया कि समाचारों को विचारों के साथ नहीं मिलाया जाना चाहिए।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जब कानून के संवैधानिक शासन को मजबूत करने की बात आती है तो एक स्वतंत्र व निष्पक्ष प्रेस, एक स्वतंत्र न्यायपालिका का पूरक होता है।

गांवों में हमारे सुशासन प्रयासों के मूल में लोगों के कल्याण के लिए प्रौद्योगिकी की शक्ति का लाभ उठाना : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत के गांवों में हमारे सुशासन प्रयासों के मूल में लोगों के कल्याण के लिए प्रौद्योगिकी की शक्ति का लाभ उठाना है। इसके लिए पीएण मोदी ने स्वामित्व योजना का उदाहरण दिया, जिसके परिणाम बहुत अच्छे रहे हैं।

MyGovIndia के एक ट्वीट के जवाब में प्रधानमंत्री ने कहा;

“भारत के गांवों में हमारे सुशासन प्रयासों के मूल में लोगों के कल्याण के लिए प्रौद्योगिकी की शक्ति का लाभ उठाना है। इसका एक उदाहरण स्वामित्व योजना है, जिसके परिणाम बहुत अच्छे रहे हैं।”

राष्ट्रव्यापी कोविड टीकाकरण : अब तक लगाए जा चुके 187.67 करोड़ से अधिक टीके

भारत का कोविड-19 टीकाकरण कवरेज आज सुबह 7 बजे तक अंतिम रिपोर्ट के अनुसार 187.67 करोड़ (1,87,67,20,318) से अधिक हो गया। इस उपलब्धि को 2,30,29,745 टीकाकरण सत्रों के जरिये प्राप्त किया गया है।

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र खोलने के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित

प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना (पीएमबीजेपी) की कार्यान्वयन एजेंसी फार्मास्युटिकल्स एंड मेडिकल डिवाइसेस ब्यूरो ऑफ इंडिया (पीएमबीआई) ने प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र (पीएमबीजेके) खोलने के लिए व्यक्तियों, बेरोजगार फार्मासिस्टों, सरकार द्वारा नामित संस्थाओं, गैर सरकारी संगठनों, ट्रस्ट, सोसायटी आदि से आवेदन मांगे गए हैं। एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार एक ऑनलाइन प्रक्रिया के माध्यम से ये आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक आवेदक पीएमबीआई की वेबसाइट janaushadhi.gov.in पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। पात्र आवेदकों को “पहले आओ पहले आओ” के आधार पर पीएमबीजेपी के नाम पर ड्रग लाइसेंस लेने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी जाएगी।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने जारी किया स्वास्थ्य डाटा प्रबंधन (एचडीएम) नीति का संशोधित मसौदा

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) ने दिसंबर 2020 में आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएम) के लिए स्वास्थ्य डाटा प्रबंधन (एचडीएम) नीति को अंतिम रूप दे दिया था और इसका प्रकाशन कर दिया था। तब से, एनएचए को विभिन्न हितधारकों से प्रतिक्रिया मिल चुकी है और एबीडीएम के पायलट और राष्ट्रीय स्तर पर लागू करने से कई सीख मिल चुकी हैं। इनके आधार पर, एचडीएम नीति में कुछ संशोधन पर विचार किया गया है। संशोधनों के बाद 23 अप्रैल 2022 को वेबसाइट https://abdm.gov.in/home/Publications पर “परामर्श पत्र” शीर्षक के साथ मसौदा जारी किया गया है।

एक सरकारी विज्ञप्ति के मुताबिक सभी हितधारकों से 21 मार्च, 2022 तक वेबसाइट पर टिप्पणियां देने का अनुरोध किया गया है। ऑनलाइन माध्यम से प्रविष्टि जमा करने के अलावा, पंजीकृत डाक/ कोरियर से भी फीडबैक स्वीकार किया जाएगा। प्रस्तुतीकरण भेजने के लिए पता इस प्रकार है :

मुख्य कार्यकारी अधिकारी,

राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण,

9वीं मंजिर, टावर-1,

जीवन भारती बिल्डिंग,

कनॉट प्लेस,

नई दिल्ली-110001

डीडी स्पोर्ट्स पर खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का सीधा प्रसारण

भारत, खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2021 का इंतजार कर रहे लोगों के लिए यह अच्छी खबर है कि डीडी स्पोर्ट्स 24 अप्रैल, 2022 से शुरू होने वाले इस कार्यक्रम को सभी टीवी और मोबाइल पर लाइव दिखाएगा।

भारत में खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करने के लिए खेलो इंडिया गेम्स के हिस्से के रूप में 2020 में शुरू किया गया, खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का दूसरा आयोजन 24 अप्रैल से 3 मई, 2022 तक किया जा रहा है, जिसका उद्घाटन समारोह 24 अप्रैल को हुआ और समापन समारोह 3 मई को होगा।

सर्वोच्च न्यायालय के आदेश पर आशीष मिश्रा ने कोर्ट में किया सरेंडर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्रा टेनी के बेटे और किसान आंदोलन के दौरान लखीमपुर खीरी हिंसा के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा ने रविवार को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट लखीमपुर खीरी की अदालत में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश के अनुपालन करते हुए आत्मसमर्पण कर दिया। यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा उसकी जमानत रद्द करने और उसे आत्मसमर्पण करने के लिए एक सप्ताह का समय दिए जाने के ठीक बाद उसने सरेंडर कर दिया है।

आशीष ने जमानत की अवधि समाप्त होने से एक दिन पहले अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया।

छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 23 गाड़ियां बंद करने पर भूपेश बघेल ने एतराज जताया

छत्तीसगढ़ से गुजरने वाली 23 लोकल रेलों का परिचालन आज 24 अप्रैल से बंद करने का रेलवे ने फैसला लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रेलवे के इस फैसले पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कड़ी आपत्ति जताई है।

अमित शाह से नहीं संभलती पुलिस- शरद पवार

एनसीपी नेता शरद पवार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर कटाक्ष किया है।

नाइजीरिया की अवैध तेल रिफाइनरी में धमाका, सौ से ज्यादा की मौत

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की खबरों के मुताबिक नाइजीरिया के दक्षिणी राज्य इमो में एक अवैध तेल रिफाइनरी में हुए धमाके में सौ से ज्यादा लोगों की मृत्यु हो गई है।

#Breaking: Top headlines of India today. Today’s big news 24 April 2022

नया सुरक्षित एंटी-कोविड-19 संक्रमण कीटाणुनाशक

covid 19

कोविड-19 संक्रमण-रोधी नया सुरक्षित डिसइन्फेक्टेंट

New safe anti-covid-19 infection disinfectant

प्लाज्मा-आधारित रोगाणुनाशक किया है भारतीय शोधकर्ताओं ने

नई दिल्ली, 20 अप्रैल (इंडिया साइंस वायर): कोविड-19 महामारी ने बेहतर रोगाणुनाशकों की तत्काल आवश्यकता पैदा कर दी है, जो संक्रामक रोगों के प्रसार को रोक सकें। एक नयेअध्ययन में भारतीय शोधकर्ताओं ने शीत वायुमंडलीय दबाव प्लाज्मा (सीएपी) की मदद से प्लाज्मा-आधारित रोगाणुनाशक विकसित किया है, जो कोविड-19 और इसके जैसे अन्य रोगों का संक्रमण रोकने में हरित विकल्प के रूप में कार्य कर सकता है।

हरित कीटाणुनाशक (Green disinfectants)

भारतीय शोधकर्ताओं की यह खोज महत्वपूर्ण है, क्योंकि अधिकांश रोगाणुनाशकों में ऐसे रसायनों का उपयोग होता है, जो पर्यावरण को हानि पहुँचाने के लिए जाने जाते हैं। इसी कारण, दुनियाभर के शोधकर्ता रोगजनक सूक्ष्मजीवों के प्रसार को नियंत्रित करने के लिए हरित विकल्पों की खोज में जुटे हुए हैं।

विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय से सम्बद्ध विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी उच्च अध्ययन संस्थान (आईएएसएसटी), गुवाहाटी के वैज्ञानिक – डॉ कामची शंकरनारायणन, डॉ मोजीबुर आर. खान, और डॉ एच. बाइलुंग की टीम ने दिखाया है कि शीत वायुमंडलीय दबाव (सीएपी) द्वारा उत्पन्न प्लाज्मा में सीओवी-2 स्पाइक प्रोटीन को निष्क्रिय करने की क्षमता है, जो वायरल संक्रमण बढ़ाने के लिए मानव एसीई-2 रिसेप्टर से बंध जाता है।

शीत वायुमंडलीय दबाव प्लाज्मा क्या है? | What is Cold Atmospheric Pressure Plasma?

प्लाज्मा; पदार्थ की चौथी अवस्था है, जो ब्रह्मांड का अधिकांश भाग बनाती है। इसे प्रयोगशाला में नियंत्रित परिस्थितियों में उत्पादित होने पर शीत वायुमंडलीय दबाव प्लाज्मा (सीएपी) कहा जाता है। वैज्ञानिकों ने एक उच्च वोल्टेज विद्युत क्षेत्र के माध्यम से हीलियम, ऑर्गन जैसी प्लाज्मा बनाने वाली गैसों को प्रवाहित किया, जिसके कारण आयनों के मिश्रण के साथ एक स्थिर प्लाज्मा, और अभिक्रिया कक्ष के भीतर सीएपी की एक गुलाबी चमक का उत्सर्जन करने वाले इलेक्ट्रॉनों का निर्माण होता है।

यह अध्ययन आरएससी (रॉयल सोसाइटी ऑफ केमिस्ट्री) एडवांसेस के अंतरराष्ट्रीय जर्नल में हाल ही में प्रकाशित किया गया है।

शोधकर्ताओं का कहना है  कि सीएपी उपचार के दो मिनट के भीतर प्लाज्मा में उत्पन्न अल्पकालिक उच्च प्रतिक्रियाशील ऑक्सीजन एवं नाइट्रोजन प्रजातियों (आरओएस/ आरएनएस) के कारण SARS-CoV-2 स्पाइक प्रोटीन पूरी तरह से निष्क्रिय हो जाता है। आरटी-पीसीआर विश्लेषण से पता चलता है कि सीएपी सार्स-सीओवी-2 वायरस के आरएनए को निष्क्रिय कर सकता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि सीएपी, एक प्लाज्मा-आधारित रोगजनक सूक्ष्मजीवों को नष्ट करने की विधि है, जो पर्यावरण की दृष्टि से खतरनाक रासायन-आधारित परिशोधन विधियों का एक बेहतर विकल्प है। शीत वायुमंडलीय प्लाज्मा (सीएपी) पर्यावरण की दृष्टि से सुरक्षित है, क्योंकि प्लाज्मा उपचार द्वारा पूरी परिशोधन प्रक्रिया के दौरान, कोई रासायनिक अपशिष्ट उत्पन्न नहीं होता।

यह अध्ययन आईएएसएसटी की कोविड-19 परीक्षण और अनुसंधान सुविधा केंद्र में किया गया है। इस संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आशीष के. मुखर्जी के अनुसार अब तक 1.54 लाख से अधिक परीक्षण इस सुविधा केंद्र में हो चुके हैं।

इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता डॉ कामची शंकरनारायणन, और डॉ एच. बाइलुंग ने कहा कि विभिन्न जीवाणु या कवक संक्रमण को दूर करने के लिए इस विसंक्रमण विधि को आगे बढ़ाया जा सकता है।

(इंडिया साइंस वायर)

Topics: Plasma, Green disinfectants, Infectious diseases, COVID-19, Cold Atmospheric Pressure, Pandemic, Decontaminants, IASST, DST, ACE2 receptor

ब्रेकिंग : दिन भर की टॉप हेडलाइंस। आज की बड़ी खबरें | 20 अप्रैल 2022

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20 अप्रैल 2022 की बड़ी खबर, टॉप 10 सुर्खियां 20 अप्रैल 2022, 20 अप्रैल 2022 की ब्रेकिंग न्यूज, 20 अप्रैल 2022 की प्रमुख सुर्खियां, 21 अप्रैल 2022 के लिए स्कूल असेंबली के लिए हिंदी में समाचार सुर्खियां

Top headlines of India today. Today’s big news 20 April 2022

भारत में कोविड मामलों में वृद्धि, 24 घंटे में 2,067 नए केस

भारत में बीते 24 घंटे में कोरोना के 2,067 नए मामले सामने आए, जबकि बीते दिन में कोरोना के 1,247 मामले दर्ज किए गए। ये जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बुधवार को दी।

दिल्ली में फिर बढ़ने लगे कोरोना के केस, फिलहाल बंद नहीं किए जाएंगे स्कूल

लंबे अरसे बाद दिल्ली में खोले गए स्कूल फिलहाल बंद नहीं किए जाएंगे। दरअसल दिल्ली में कोरोना के नए केस बढ़ने लगे हैं। बीते 24 घंटे के दौरान दिल्ली में कोरोना के 632 नए मामले सामने आए हैं। दिल्ली और एनसीआर के कई स्कूलों में भी कोरोना के मामले सामने आ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थिति का आकलन करने के उपरांत दिल्ली सरकार का कहना है कि स्थिति अभी इतनी गंभीर नहीं है और दिल्ली में फिलहाल ऑफलाइन कक्षाएं चालू रहेंगी अर्थात् स्कूल बंद नहीं किए जाएंगे।

दिल्ली में मास्क नहीं पहनने पर लगेगा 500 रुपए का जुर्माना

दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने दिल्ली में सार्वजनिक स्थानों पर फिर से मास्क को अनिवार्य कर दिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्राधिकरण के अधिकारी ने यह भी कहा कि जो मास्क पहनता नजर नहीं आएगा उस पर 500 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा।

योगी का आदेश : सार्वजनिक स्थानों पर फेस मास्क लगाए जाने की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए

 उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अदित्यनाथ ने दूसरे राज्यों में बढ़ रहे कोविड केसों को लेकर उत्तर प्रदेश में सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुख्यमंत्री ने कहा कि एनसीआर के जिलों तथा लखनऊ में सभी के लिए सार्वजनिक स्थानों पर फेस मास्क लगाए जाने की व्यवस्था को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

अल बद्र कैडर अर्जुमंद गुलजार डार को केंद्र ने आतंकवादी घोषित किया

 केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम, 1967 के तहत आतंकवादी संगठन अल बद्र के सक्रिय सहयोगी अर्जुमंद गुलजार डार को आतंकवादी घोषित किया है।

दिल्ली के जहांगीरपुरी में अतिक्रमण पर सर्वोच्च न्यायालय के आदेश का जमीयत उलमा-ए-हिंद ने किया स्वागत

दिल्ली के जहांगीरपुरी में निगम प्रशासन ने आज अवैध निर्माण, अतिक्रमण पर बुलडोजर चलाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसी दौरान सर्वोच्च न्यायालय ने सुबह सुनवाई के दौरान इलाके में डिमोलिशन ड्राइव पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया। सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद अध्यक्ष जमीयत उलमा-ए-हिंद मौलाना अरशद मदनी ने दिल्ली के जहांगीरपुरी में विध्वंस अभियान में सर्वोच्च न्यायालय के तत्काल हस्तक्षेप का स्वागत किया है।

वृंदा करात का आरोप सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद जहांगीरपुरी में अवैध निर्माण पर कार्रवाई जारी

माकपा नेता वृंदा करात ने आज जहांगीरपुरी का दौरा कर कहा कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में अवैध निर्माण पर कार्रवाई जारी है।

चीनी अतिक्रमण पर भी हो बुलडोजरकी कार्रवाई- कांग्रेस

 सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बावजूद दिल्ली के जहांगीरपुरी में एमसीडी की कार्रवाई जारी रही। इसको लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर हमला बोलते हुए इसे ‘सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवहेलना’ करार दिया है।

देश में कोयले की कमी : कांग्रेस ने कहा, छोटे उद्योगों को कुचल देगा बिजली संकट

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा बिजली की स्थिति पर संबंधित विभाग के साथ बैठक के एक दिन बाद, कांग्रेस ने आज केंद्र सरकार पर हमला बोला और आरोप लगाया कि देश में केवल आठ दिन का कोयला बचा है।

चीनी भाषा वैश्विक संवाद का हिस्सा होना चाहिए- यूएनडब्ल्यूटीओ महासचिव

20 अप्रैल को संयुक्त राष्ट्र चीनी भाषा दिवस है। इस अवसर पर संयुक्त राष्ट्र विश्व पर्यटन संगठन (यूएनडब्ल्यूटीओ) के महासचिव जुराब पोलोलिकाश्विली ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि चीनी भाषा वैश्विक संवाद का एक अभिन्न अंग होना चाहिए।

दिल्ली, एनसीआर में गरज के साथ हल्की बारिश की संभावना

दिल्ली-एनसीआर के जिलों में भीषण गर्मी की लहर के बाद राहत की खबर सामने आई है। राज्य में बुधवार की रात को आंशिक रूप से बादल छाए रहने और गरज के साथ हल्की बारिश होने की संभावना है। ये जानकारी भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने दी है।

खबरों में : मुंबई इंडियंस, राकेश झुनझुनवाला, सैमसंग, इंडियन प्रीमियर लीग, भारत, संदीप खोसला, रिलायन्स इण्डस्ट्रीज, चेन्नई सुपर किंग्स, भारतीय स्टेट बैंक, अबु जानी।

ब्रेकिंग : दिन भर की टॉप हेडलाइंस। आज की बड़ी खबरें | 19 अप्रैल 2022

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Top headlines of India today. Today’s big news 19 April 2022

19 अप्रैल 2022 की बड़ी खबर, टॉप 10 सुर्खियां 19 अप्रैल 2022, 19 अप्रैल 2022 की ब्रेकिंग न्यूज, 19 अप्रैल 2022 की प्रमुख सुर्खियां, 20 अप्रैल 2022 के लिए स्कूल असेंबली के लिए हिंदी में समाचार सुर्खियां, News headlines in Hindi for school assembly for 20 April 2022.

आश्रम में लड़कियों को जानवरों जैसी हालत में रखने पर दिल्ली उच्च न्यायालय का नोटिस

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिल्ली उच्च न्यायालय ने उत्तरी दिल्ली के रोहिणी में एक आश्रम की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। ये आश्रम एक बाबा चलाता है, जो कथित तौर पर कई लड़कियों को जानवरों जैसी बदतर स्थिति में वहां रखे हुए है। कार्यवाहक चीफ जस्टिस विपिन सांघी और न्यायमूर्ति नवीन चावला की खंडपीठ ने संस्था को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

एनआईए ने लुधियाना कोर्ट विस्फोट मामले में पाँच लाख रुपये के इनाम का किया ऐलान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने लुधियाना कोर्ट में हुए विस्फोट मामले में 5 लाख रुपये के इनाम की घोषणा की है। विस्फोट बीते साल 23 दिसंबर को हुआ था।

यूरोपीय आयोग की प्रमुख 24-25 अप्रैल को भारत दौरे पर

यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उसुर्ला वॉन डेर लेयन 24-25 अप्रैल को भारत आ रही हैं।

तमिलनाडु में नीट को लेकर विरोध तेज, राज्यपाल को काले झंडे दिखाए गए

 तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार दलित संगठन विदुथलाई चिरुथिगल काची (वीसीके) और द्रविड़ कड़गम (डीके) कार्यकर्ताओं ने सीपीआई और सीपीआई-एम कार्यकर्ताओं के साथ मायलादुथुराई में रवि के खिलाफ काला झंडा प्रदर्शन किया।

3 में से 1 ‘सार्स-सीओवी 2′ मरीज लॉन्ग कोविड की चपेट में : अध्ययन

एक अध्ययन में बताया गया है कि सीवियर एक्यूट रेस्पिरेटरी सिंड्रोम-कोविड (सार्स-सीओवी 2) के मरीजों में तीन में से एक व्यक्ति में एक्यूट सीक्वल विकसित होने की संभावना है। जिसे आमतौर पर लॉन्ग कोविड के रूप में जाना जाता है।

कर्नाटक में दूसरी पीयूसी परीक्षा के दौरान हिजाब की अनुमति नहीं

हिजाब पहनने वाली छात्राओं को कर्नाटक में महत्वपूर्ण वार्षिक द्वितीय पीयूसी परीक्षा में बैठने की अनुमति नहीं होगी। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि राज्य के शिक्षा मंत्री बी.सी. नागेश ने यह जानकारी दी है।

कोविड से लड़ने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए बीमा योजना 180 दिनों के लिए बढ़ाई गई

प्राप्त जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने कोविड-19 से लड़ने वाले स्वास्थ्य कर्मियों के लिए शुरू की गई बीमा योजना को 19 अप्रैल से 180 दिनों की और अवधि के लिए बढ़ा दिया है।

1971 के युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों को असम सरकार करेगी सम्मानित

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि 1971 के बांग्लादेश मुक्ति संग्राम में भाग लेने वाले सैनिकों को सम्मानित करने के लिए 23 अप्रैल को एक पुरस्कार समारोह आयोजित किया जाएगा।

डॉक्टरों का कहना है कि अधिकांश नए कोविड मामले पुन: संक्रमण के हैं

द इकॉनॉमिक टाइम्स की एक खबर के मुताबिक डॉक्टरों ने बताया है कि इन दिनों कोविड -19 के शिकार होने वाले लोगों में एक बड़ी संख्या पुन: संक्रमण की है – जो या तो डेल्टा लहर या ओमिक्रॉन लहर के दौरान कोविड पॉजिटिव पाए गए थे। डॉक्टरों ने कहा कि स्कूल जाने वाले बच्चों में भी मामलों में स्पष्ट वृद्धि हुई है।

बीमारी के बाद बांग्लादेश के पूर्व तेज गेंदबाज समिउर रहमान का निधन

बांग्लादेश के पूर्व तेज गेंदबाज समिउर रहमान का मंगलवार को ढाका में निधन हो गया। 68 वर्षीय समिउर रहमान ब्रेन ट्यूमर से पीड़ित थे, जिसके बारे में इस साल की शुरुआत में पता चला था।

बार्सिलोना ओपन : क्वालीफायर टेबर्नर ने कोर्डा को पहले दौर में हराया

स्पेन के क्वालीफायर कार्लोस टेबर्नर ने  बार्सिलोना ओपन में घरेलू परिस्थितियों का अच्छा इस्तेमाल करते हुए विश्व के 37वें नंबर के सेबस्टियन कोर्डा को 6-3, 6-0 से हराकर अपनी दूसरी एटीपी 500 जीत हासिल की।

खबरों में : सैमसंग गैलेक्सीभारती एयरटेल, दिनेश कार्तिक, बिटकॉइन, वस्तु एवं सेवा कर, आभासी मुद्राएं, डीज़ल, इंडियन प्रीमियर लीग, रॉयल चैलेंजर्स बैंगलौर, उत्तरी कोरिया.

Fast and Health | जानिए व्रत में सेहत का ध्यान कैसे रखें

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Fast and Health | Know how to take care of health in fasting

व्रत और स्वास्थ्य | जानिए व्रत में सेहत का ख्याल कैसे रखें

नई दिल्ली 16 अप्रैल 2022. व्रत रखने के दौरान बहुत से लोग अपने स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं। वे पूरी सख्ती से दिन में केवल एक बार भोजन करने और व्रत खोलने तक बिना पानी के रहने, दिन में नमक केवल एक बार खाने और केवल आलू से बना भोजन खाने की परंपरा का पालन करते हैं। जिन लोगों को हृदय रोग, मधुमेह और उच्च रक्तचाप (Heart disease, diabetes and hypertension) जैसी लंबी बीमारियां हैं और गर्भवती महिलाओं के लिए यह सख्ती उचित नहीं होती। ऐसे मरीजों में जानलेवा समस्याएं हो सकती हैं और व्रत बेहद सावधानी के साथ डॉक्टर की सलाह से रखा जाना चाहिए।

Diet plan for fasting | उपवास के लिए आहार योजना

देशबन्धु में प्रकाशित एक पुरानी खबर में आईएमए के तत्कालीन अध्यक्ष डॉ. के.के. अग्रवाल ने बताया था,

“अगर पोषण की उचित गुणवत्ता शरीर को मिलती रहे तो व्रत रखने से शरीर पर बेहद सकारात्मक प्रभाव पड़ते हैं। जिन मरीजों को दिल की समस्याएं हैं, उन्हें आलू के पकौड़े और आलू के प्रोसेस्ड चिप्स, जैसी तली हुई चीजें न खाने की सलाह दी जाती है।

डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को व्रत कब खोलना चाहिए | डायबिटीज के मरीज व्रत व्रत में क्या सावधानियां बरतें?

डॉ. के.के. अग्रवाल ने कहा कि डायबिटीज से पीड़ित मरीजों को उसी वक्त अपना व्रत खोल देना चाहिए, जब उनके ब्लड शुगर का स्तर (Blood sugar level) 60 एमजी से नीचे चला जाए। उन्हें दिन में काफी मात्रा में तरल आहार भी लेते रहना चाहिए, क्योंकि शरीर में डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण Dehydration) होने से लकवा या दिल का दौरा पड़ सकता है। टाइप 2 डायबिटीज से पीड़ित मरीजों में व्रत रखने से खतरा कम होता है, लेकिन टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों को व्रत बिल्कुल नहीं रखना चाहिए

लंबी बीमारियों से पीड़ित लोग व्रत रखने से पहले डॉक्टर से सलाह अवश्य लें

डॉ. अग्रवाल ने कहा कि लंबी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को व्रत रखते समय डॉक्टर से सलाह लेना बेहद आवश्यक होता है, क्योंकि नियमित तौर पर चल रही दवाओं की खुराक व्रत की वजह से 40 से 50 प्रतिशत तक कम करने की जरूरत हो सकती है।”

व्रत में सेहत का ध्यान रखने के लिए कुछ सेहतमंद सुझाव :

    * सादा दही की बजाए लौकी का रायता खाएं

    * बीच में बादाम खाए जा सकते हैं

   * कुटृटू के आटे की रोटी कद्दू के साथ खाएं

   * थोड़ी थोड़ी देर बाद उचित मात्रा में फल खाते रहें ताकि शरीर में पोषक तत्व बने रहें

   * सिंघाड़े और कट्टू का आटा मिला कर पकाएं

   * सिंघाड़ा अनाज नहीं, बल्कि फल है इस लिए इसे अनाज की जगह प्रयोग किया जा सकता है

   * सिंघाड़े के आटे में ग्लूटन नहीं होता, इसलिए सीलियक बीमारी से पीड़ित (Suffering from sealing disease) या ग्लूटेन से एलर्जी वाले मरीज (Allergic patients from gluten) इसका प्रयोग कर सकते हैं।

कोविड -19 से जुड़ा खतरा, दुनिया में बेतहाशा बढ़ जाएगी मधुमेह रोगियों की संख्या : शोध

research on health

कोविड -19 के हल्के संक्रमण से भी मधुमेह का खतरा 40% तक बढ़ जाता है

हाल ही में एक शोध में पाया गया है कि मोटे लोगों में कोविड-19 संक्रमण के बाद मधुमेह होने का खतरा अधिक होता है। (A research has recently found that obese people have a higher risk of developing diabetes after a Covid-19 infection.)

Even Mild COVID-19 Infection Increases Diabetes Risk by 40%

कोविड-19 संक्रमण से मधुमेह ( Diabetes) का खतरा बढ़ जाता है और एक साल बाद भी यह बीमारी को ट्रिगर कर सकता है। SARS-CoV-2, जो वायरस कोविड-19 का कारण बनता है, के हल्के संक्रमण के बाद भी, उन लोगों की तुलना में मधुमेह विकसित होने की आशंका अधिक होती है जो कभी संक्रमित नहीं थे। इस संबंध में हाल ही में लैंसेट में हाल ही में खोज की गई थी।

अध्ययन, जिसमें लगभग 200,000 लोगों का एक विशाल समूह शामिल था, एक कोविड-19 संक्रमण के बाद मधुमेह होने की संभावना (Chances of getting diabetes after COVID-19 infection) में वृद्धि दिखाते हुए अनुसंधान की बढ़ती संख्या के अतिरिक्त था।

अध्ययन के सह-लेखक और वीए सेंट लुइस हेल्थ केयर सिस्टम, यूएसए के मुख्य शोधकर्ता ज़ियाद अल-एली ने कहा, “जब महामारी कम हो जाती है, तो हम इस महामारी की विरासत के साथ रह जाएंगे – एक विरासत पुरानी बीमारी जिसके लिए स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियाँ तैयार नहीं हैं।”

लगभग दो लाख लोगों पर किया गया शोध

अल-एली और उनकी टीम ने संक्रमित होने के एक महीने से अधिक समय तक 180,000 से अधिक लोगों के मेडिकल रिकॉर्ड का विश्लेषण किया और उनकी तुलना गैर-संक्रमित लोगों के दो समूहों के रिकॉर्ड से की, जिनमें लगभग चार मिलियन लोग शामिल थे और जिन्होंने महामारी से पहले या उसके दौरान वीए सिस्टम का प्रयोग किया था।

विश्लेषणों से पता चला कि COVID-19 वाले लोगों में एक वर्ष तक मधुमेह विकसित होने की आशंका, उन लोगों की तुलना में जो कभी संक्रमित नहीं थे, 40% अधिक थी । विशेष रूप से, पाए गए लगभग सभी मामले टाइप 2 मधुमेह के थे।

मधुमेह क्या है?

मधुमेह एक ऐसी स्थिति की ओर ले जाता है जहां शरीर इंसुलिन के लिए प्रतिरोधी हो जाता है या पर्याप्त मात्रा में इसका उत्पादन बंद कर देता है।

इंसुलिन एक हार्मोन है जो रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने पर गहरा प्रभाव डालता है। इस हार्मोन (एक प्रोटीन अणु) के विघटन से रक्त में शर्करा का स्तर अनिवार्य रूप से बढ़ जाता है, जो मधुमेह की पहचान है।

नवीनतम अध्ययन में यह भी पाया गया कि COVID-19 की गंभीरता के साथ मधुमेह के विकास में वृद्धि हुई।

अध्ययन के लेखकों के अनुसार, जिन रोगियों को अस्पताल में या आईसीयू में भर्ती किया गया था, उनमें मधुमेह विकसित होने का जोखिम उन लोगों की तुलना में तीन गुना अधिक था, जो कभी संक्रमित नहीं हुए थे।

उच्च बॉडी मास इंडेक्स वाले लोग, जो टाइप 2 मधुमेह के लिए भी एक जोखिम कारक है, संक्रमण के बाद इसके विकसित होने की संभावना दोगुनी होती है।

इससे पहले की रिपोर्टों ने भी SARS-CoV-2 की वास्तविक रिपोर्टों के आधार पर मधुमेह के बारे में चिंतित किया था, जो अग्नाशयी कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते थे, जो टाइप 1 मधुमेह को प्रेरित कर सकते थे। दोनों प्रकार अलग-अलग हैं, टाइप 1 की जड़ें आनुवंशिकी में होती हैं और जीवन में जल्दी विकसित होती हैं जबकि टाइप 2 जीवनशैली के कारण होती है और धीरे-धीरे विकसित होती है। हालाँकि, टाइप 1 मधुमेह का विकास COVID-19 रोगियों में विवादास्पद बना हुआ है।

यदि देखे गए रुझान सही हैं, तो दुनिया भर में मधुमेह के निदान वाले लोगों की संख्या में भारी वृद्धि होगी, यहां तक ​​​​कि मधुमेह के जोखिम में मामूली वृद्धि के परिदृश्य में भी क्योंकि दुनिया में COVID-19 के 480 मिलियन पुष्ट मामले हैं।

हालांकि, अध्ययन में देखा गया रुझान अलग-अलग जातीयता के लोगों के लिए सही नहीं हो सकता है।

अध्ययन में वृद्ध श्वेत पुरुषों पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिनमें से अधिकांश में उच्च रक्तचाप और अधिक वजन था। इसलिए, एक अन्य लेखक मेयरोविट्ज-काट्ज़ जी के अनुसार, उन्हें मधुमेह विकसित होने का अधिक खतरा है।

उन्होंने कहा कि बच्चों में मधुमेह के विकास का जोखिम कम है, लेकिन कुछ अन्य जातीय समूहों में अधिक है।

संदीपन तालुकदार (न्यूजक्लिक)

जानिए क्या है इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम/ चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षण, निदान व उपचार

Health News

अप्रैल को इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम जागरूकता माह, आईबीएस जागरूकता माह (Irritable bowel syndrome awareness month) के रूप में मनाया जाता है। इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम/ चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (Irritable Bowel Syndrome in Hindi) एक पुरानी बीमारी है जो बड़ी आंत को प्रभावित करती है और पेट दर्द, ऐंठन, कब्ज और दस्त जैसे लक्षणों का कारण बनती है। अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग के राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (NIH) के अंग, नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) की सेवा के रूप में प्रदान की गई सामग्री, जो पब्लिक डोमेन में है, में इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) की परिभाषा, इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षण, इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के उपचार, इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) का निदान और इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के कारण के बारे में जानकारी दी गई है। हम इस सरल हिंदी में इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) के बारे में जानकारी को जनहित में साभार यहां दे रहे हैं। इस समाचार की जानकारी का उपयोग पेशेवर चिकित्सा देखभाल या सलाह के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता है। यदि आप अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता/ योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) की परिभाषा और तथ्य Definition & Facts of Irritable Bowel Syndrome (IBS)

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम या चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस) लक्षणों का एक समूह है जो एक साथ होता है, इसमें आपके पेट में बार-बार दर्द होना और आपके मल त्याग की प्रक्रिया में बदलाव, जो दस्त, कब्ज या दोनों हो सकते हैं, शामिल हैं। यदि आपको आईबीएस है तो आपके पाचन तंत्र में क्षति या बीमारी के किसी भी दिखाई देने वाले लक्षण के बिना (visible signs of damage or disease in your digestive tract) भी आपको इसके लक्षण हो सकते हैं।

इर्रिटेबल बोवेल सिंड्रोम (आईबीएस) के लक्षण और कारण Symptoms & Causes of Irritable bowel syndrome (IBS)

चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (आईबीएस) के सबसे आम लक्षण में आपके मलत्याग के समय पेट में दर्द और आपके मल त्याग में परिवर्तन होते हैं। ये परिवर्तन दस्त, कब्ज या दोनों हो सकते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपको किस प्रकार का आईबीएस है। आईबीएस किस वजह से होता है, इसको लेकर चिकित्सक अभी निश्चित नहीं हैं।

आईबीएस के अन्य लक्षणों में शामिल हो सकते हैं

  • सूजन;
  • यह महसूस करना कि आपने मल त्याग नहीं किया है;
  • आपके मल में सफेद बलगम (whitish mucus)।

आईबीएस पीड़ित महिलाओं में अक्सर उनके पीरियड्स के दौरान अधिक लक्षण होते हैं।

आईबीएस दर्दनाक हो सकता है लेकिन अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का कारण नहीं बनता है या आपके पाचन तंत्र को नुकसान नहीं पहुंचाता है।

आईबीएस एक पुराना विकार है, जिसका अर्थ है कि यह लंबे समय तक रहता है, अक्सर वर्षों तक। हालाँकि, लक्षण आ सकते हैं और जा सकते हैं।

आईबीएस का क्या कारण है? What causes IBS?

चिकित्सक अभी तक इस निश्चित नहीं हैं कि आईबीएस का क्या कारण है या यह क्यों होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मत है कि कई समस्याओं के समुच्चय से आईबीएस हो सकता है। अलग-अलग लोगों में अलग-अलग कारक IBS का कारण बन सकते हैं।

फंक्शनल गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (Functional gastrointestinal GI-जीआई) विकार जैसे कि आईबीएस मस्तिष्क और आंत संपर्क की समस्याएं हैं कि आपका मस्तिष्क और आंत एक साथ कैसे काम करते हैं। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि ब्रेन-गट इंटरेक्शन की समस्याएं आपके शरीर के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकती हैं और IBS के लक्षण पैदा कर सकती हैं। उदाहरण के लिए, आईबीएस वाले कुछ लोगों में, पाचन तंत्र के माध्यम से भोजन बहुत धीरे या बहुत तेज़ी से आगे बढ़ सकता है, जिससे मल त्याग में परिवर्तन हो सकता है। जब सामान्य मात्रा में गैस या मल आंत में होता है तो IBS वाले कुछ लोगों को दर्द महसूस हो सकता है।

आईबीएस वाले लोगों में कुछ समस्याएं अधिक आम हैं। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि ये समस्याएं आईबीएस पैदा करने में भूमिका निभा सकती हैं। इन समस्याओं में शामिल हैं –

  • तनावपूर्ण या कठिन प्रारंभिक जीवन की घटनाएं, जैसे शारीरिक या यौन शोषण (physical or sexual abuse);
  • कुछ मानसिक विकार (mental disorders), जैसे अवसाद;
  • चिंता, और दैहिक लक्षण विकार;
  • आपके पाचन तंत्र में जीवाणु संक्रमण;
  • छोटी आंत के जीवाणु अतिवृद्धि, संख्या में वृद्धि या आपकी छोटी आंत में बैक्टीरिया के प्रकार में परिवर्तन;
  • खाद्य असहिष्णुता या संवेदनशीलता (food intolerances or sensitivities), जिसमें कुछ खाद्य पदार्थ पाचन संबंधी लक्षण पैदा करते हैं;

शोध से पता चलता है कि जीन कुछ लोगों में IBS विकसित करने की अधिक संभावना पैदा कर सकते हैं।

चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम (IBS)/इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम  का निदान (Diagnosis of irritable bowel syndrome (IBS)

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) का निदान करने के लिए, चिकित्सक आपके लक्षणों और आपके चिकित्सा और पारिवारिक इतिहास की समीक्षा करते हैं और एक शारीरिक परीक्षण करते हैं। आपका चिकित्सक आपके लक्षणों में एक निश्चित पैटर्न की तलाश करेगा। कुछ मामलों में, चिकित्सक अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने के लिए कुछ अन्य टेस्ट्स का आदेश दे सकते हैं।

आपके सिम्टम्स की समीक्षा Review of your symptoms

आपका चिकित्सक आपके लक्षणों के संबंध में पूछेगा और आईबीएस का निदान करने के लिए आपके लक्षणों में एक निश्चित पैटर्न की तलाश करेगा। यदि आपके पेट में दर्द के साथ-साथ निम्नलिखित में से दो या अधिक लक्षण हैं, तो आपका चिकित्सक आईबीएस का निदान कर सकता है :

  • आपके दर्द का संबंध आपके मल त्याग से है। उदाहरण के लिए, मल त्याग के बाद आपका दर्द ठीक सकता है या खराब हो सकता है;
  • आप कितनी बार मल त्याग करते हैं, इसमें आपको क्या बदलाव दिखाई देता है;
  • आप अपने मल दिखने के तरीके में बदलाव देखते हैं।

आपका चिकित्सक पूछेगा कि आपको कितने समय से लक्षण हैं। आपका चिकित्सक आईबीएस का निदान कर सकता है यदि –

  • आपको पिछले 3 महीनों में सप्ताह में कम से कम एक बार लक्षण दिखे हैं और
  • आपके लक्षण सबसे पहले कम से कम 6 महीने पहले शुरू हुए थे

आपका चिकित्सक आईबीएस का निदान कर सकता है, भले ही आपको कम समय से लक्षण हों। यदि आपके लक्षण आईबीएस के लक्षणों की तरह हैं तो आपको अपने चिकित्सक से बात करनी चाहिए।

आपका चिकित्सक आपसे अन्य लक्षणों के बारे में भी पूछेगा। कुछ लक्षण हो सकते हैं जो आईबीएस के बजाय किसी और स्वास्थ्य समस्या की ओर इंगित करते हों। इन लक्षणों में शामिल हैं

  • रक्ताल्पता (anemia)
  • आपके मलाशय से खून बह रहा है (bleeding from your rectum)
  • खूनी मल या मल जो काला और रुका हुआ है (bloody stools or stools that are black and tarry)
  • वजन घटना (weight loss)

चिकित्सा इतिहास और पारिवारिक इतिहास (Medical and family  history)

आपका चिकित्सक इस बारे में पूछेगा

पाचन रोगों का पारिवारिक इतिहास (family history of digestive diseases), जैसे सीलिएक रोग, पेट का कैंसर, या सूजन आंत्र रोग

आप जो दवाएं लेते हैं

हाल के संक्रमण

आपके लक्षणों की शुरुआत से संबंधित तनावपूर्ण घटनाएं

क्या आप खाते हो

अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का आपका इतिहास जो आईबीएस पीड़ित लोगों में अधिक आम हैं।

शारीरिक परीक्षा

एक शारीरिक परीक्षा के दौरान, आपका चिकित्सक आमतौर पर

  • पेट की सूजन के लिए जाँच (checks for abdominal bloating)
  • स्टेथोस्कोप का उपयोग (using a stethoscope) करके आपके पेट के भीतर की आवाज़ें सुनता है
  • कोमलता या दर्द की जाँच के लिए (abdomen checking for tenderness or pain) आपके पेट पर टैप कर सकता है।

आईबीएस का निदान करने के लिए चिकित्सक किन टेस्ट्स का उपयोग करते हैं? What tests do doctors use to diagnose IBS?

ज्यादातर मामलों में, चिकित्सक आईबीएस के निदान के लिए परीक्षणों का उपयोग नहीं करते हैं। आपका चिकित्सक अन्य स्वास्थ्य समस्याओं की जांच के लिए रक्त परीक्षण, मल परीक्षण और अन्य परीक्षणों का आदेश दे सकता है।

रक्त परीक्षण Blood test

एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर आपसे खून का सैंपल लेगा और सैंपल को एक प्रयोगशाला में भेजेगा। एनीमिया, संक्रमण और पाचन रोगों सहित आईबीएस के अलावा अन्य स्थितियों की जांच के लिए चिकित्सक ब्लड टेस्ट का उपयोग करते हैं।

मल परीक्षण (Stool test)

आपका चिकित्सक आपको मल के सैंपल को एकत्र करने और रखने के लिए एक कंटेनर देगा। आपको निर्देश देगा कि टेस्ट के लिए किट कहां भेजें या ले जाएं। चिकित्सक आपके मल में रक्त या संक्रमण या बीमारियों के अन्य लक्षणों की जांच के लिए स्टूल टेस्ट का उपयोग करते हैं। आपका चिकित्सक आपकी शारीरिक परीक्षा के दौरान आपके मलाशय की जांच करके भी आपके मल में रक्त की जांच कर सकता है।

अन्य परीक्षण

आईबीएस के लक्षणों के समान लक्षण पैदा करने वाली स्वास्थ्य समस्याओं का पता लगाने के लिए चिकित्सक अन्य परीक्षण कर सकते हैं। आपका चिकित्सक तय करेगा कि आपको अन्य परीक्षणों की आवश्यकता है या नहीं।

आपका चिकित्सक जो अन्य टेस्ट करा सकता है उनमें शामिल हैं

  • छोटी आंत के जीवाणु अतिवृद्धि (small intestinal bacterial overgrowth) या लैक्टोज असहिष्णुता जैसे कुछ कार्बोहाइड्रेट को पचाने में समस्याओं की जांच के लिए हाइड्रोजन सांस परीक्षण (hydrogen breath test);
  • सीलिएक रोग की जांच के लिए बायोप्सी (biopsy to check for celiac disease) के साथ अपर जीआई एंडोस्कोपी (upper GI endoscopy with a biopsy);
  • कोलन कैंसर या सूजन आंत्र रोग जैसी स्थितियों की जांच के लिए कोलोनोस्कोपी (colonoscopy)।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम का उपचार | Treatment of irritable bowel syndrome (IBS)

चिकित्सक IBS का इलाज कैसे करते हैं? | How do doctors treat IBS?

चिकित्सक आपके भोजन और अन्य जीवनशैली में बदलाव, दवाओं, प्रोबायोटिक्स और मानसिक स्वास्थ्य उपचारों में बदलाव की सिफारिश करके इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम का इलाज कर सकते हैं। आपके लिए सबसे अच्छा काम करने के लिए आपको कुछ उपचारों को आजमाना पड़ सकता है। आपका चिकित्सक आपको सही उपचार योजना खोजने में मदद कर सकता है।

आप भोजन में परिवर्तन और अन्य जीवनशैली में परिवर्तन (Changes to what you eat and other lifestyle changes)

आप जो भोजन करते हैं उसमें बदलाव आपके लक्षणों का इलाज करने में मदद कर सकता है। आपका डॉक्टर निम्नलिखित परिवर्तनों में से किसी एक को आजमाने की सलाह दे सकता है:

  • अधिक फाइबर खाएं;
  • ग्लूटेन से बचें;
  • एक विशेष भोजन की योजना का पालन करना जिसे LOW FODMAP आहार कहा जाता है।

शोध से पता चलता है कि अन्य जीवनशैली में बदलाव से आईबीएस के लक्षणों में मदद मिल सकती है, जिनमें शामिल हैं:

अपनी फिजिकल एक्टिविटी बढ़ाना;

जितना हो सके तनावपूर्ण जीवन स्थितियों को कम करना;

पर्याप्त नींद लेना।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के इलाज के लिए दवाएं (Medicines to treat irritable bowel syndrome)

खुद डॉक्टर न बनें जब आप आईबीएस के इलाज के लिए दवा का उपयोग करते हैं तो अपने डॉक्टर के निर्देशों का पालन करें। दवा के संभावित दुष्प्रभावों के बारे में अपने डॉक्टर से बात करें और यदि आपको कोई दुष्प्रभाव दिखता है तो अपने डॉक्टर से पूछें कि आप क्या करें।

प्रोबायोटिक्स

आपका डॉक्टर प्रोबायोटिक्स लेने की भी सलाह दे सकता है। सवाल है कि प्रोबायोटिक्स क्या होते हैं? la प्रोबायोटिक्स जीवित सूक्ष्मजीव होते हैं, अक्सर बैक्टीरिया, जो सूक्ष्मजीवों के समान होते हैं जो आमतौर पर आपके पाचन तंत्र में होते हैं। शोधकर्ता अभी भी आईबीएस के इलाज के लिए प्रोबायोटिक्स के उपयोग का अध्ययन कर रहे हैं।

सुरक्षित रहने के लिए, प्रोबायोटिक्स या किसी अन्य पूरक या वैकल्पिक दवाओं या प्रथाओं का उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर से बात करें। यदि आपका डॉक्टर प्रोबायोटिक्स की अनुशंसा करता है, तो उससे बात करें कि आपको कितना प्रोबायोटिक्स लेना चाहिए और कितने समय तक लेना चाहिए।

इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम के उपचार के लिए मानसिक स्वास्थ्य उपचार (Mental health therapies to treat irritable bowel syndrome)

आपका डॉक्टर आपके आईबीएस लक्षणों को सुधारने में मदद करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य उपचारों की अनुशंसा कर सकता है। आईबीएस के उपचार के लिए इस्तेमाल की जाने वाली चिकित्सा में शामिल हैं :

  • संज्ञानात्मक व्यवहार थेरेपी (cognitive behavioral therapy) जो आईबीएस के लक्षणों में सुधार के लिए विचार और व्यवहार पैटर्न बदलने में आपकी सहायता करने पर केंद्रित है;
  • आंत-निर्देशित सम्मोहन चिकित्सा (gut-directed hypnotherapy),एक ट्रान्स जैसी अवस्था जिसमें आप आराम से या ध्यान केंद्रित करते हैं। इसमें एक चिकित्सक आपके आईबीएस लक्षणों को बेहतर बनाने में सहायता करने के लिए सम्मोहन का उपयोग करता है;
  • विश्राम प्रशिक्षण (relaxation training), जो आपकी मांसपेशियों को आराम देने या तनाव को कम करने में आपकी सहायता कर सकता है।

भोजन, आहार और पोषण

आपका आहार आईबीएस के लक्षणों का इलाज करने में कैसे मदद कर सकता है? (How can your diet help treat the symptoms of IBS?)

आपका चिकित्सक चिड़चिड़ा आंत्र सिंड्रोम के लक्षणों के उपचार में सहायता करने के लिए आपके आहार में बदलाव की सलाह दे सकता है। आपका डॉक्टर सुझाव दे सकता है कि आप –

  • अधिक फाइबर खाएं;
  • ग्लूटेन से बचें;
  • एक विशेष आहार का पालन करें जिसे LOW FODMAP आहार कहा जाता है।

भोजन में अलग-अलग बदलाव आईबीएस वाले अलग-अलग लोगों की सहायता कर सकते हैं। यह देखने के लिए कि क्या आपके लक्षणों में सुधार होता है, आपको कई हफ्तों तक अपने भोजन में बदलाव करने की आवश्यकता हो सकती है। आपका डॉक्टर भी आपको आहार विशेषज्ञ से बात करने की सलाह (talking with a dietitian) दे सकता है।

अधिक फाइबर खाएं (Eat more fiber)

फाइबर आईबीएस में कब्ज में सुधार कर सकता है क्योंकि यह मल को नरम बनाता है और मल त्याग को आसान बनाता है। अमेरिकियों के लिए आहार संबंधी दिशानिर्देश, 2020-2025 (Dietary Guidelines for Americans, 2020–2025) की सिफारिश है कि वयस्कों को एक दिन में 22 से 34 ग्राम फाइबर मिलना चाहिए।

फाइबर कितने प्रकार के होते हैं?

फाइबर दो प्रकार के होते हैं –

  • घुलनशील फाइबर (soluble fiber), जो सेम, फल और जई उत्पादों (oat products) में पाया जाता है,
  • अघुलनशील फाइबर (insoluble fiber), जो साबुत अनाज उत्पादों और सब्जियों में पाया जाता है।

शोध बताते हैं कि घुलनशील फाइबर आईबीएस के लक्षणों से राहत दिलाने में ज्यादा सहायक होता है।

अपने शरीर को अधिक फाइबर की आदत डालने में मदद करने के लिए, एक बार में अपने आहार में थोड़ा-थोड़ा फाइबर युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें। एक बार में बहुत अधिक फाइबर का सेवन गैस का कारण बन सकता है, जो आईबीएस के लक्षणों को ट्रिगर कर सकता है। अपने आहार में दिन में 2 से 3 ग्राम फाइबर को धीरे-धीरे शामिल करना, गैस और सूजन को रोकने में मदद कर सकता है।

ग्लूटेन से बचें (Avoid gluten)

आपका डॉक्टर यह देखने के लिए कि क्या आपके आईबीएस के लक्षणों में सुधार होता है कि नहीं, उन खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह दे सकता है जिनमें ग्लूटेन होता है। ग्लूटेन गेहूं, जौ और राई में पाया जाने वाला प्रोटीन होता है। जिन खाद्य पदार्थों में ग्लूटेन होता है उनमें अधिकांश अनाज, अनाज और पास्ता और कई प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं। आईबीएस पीड़ित कुछ लोगों में ग्लूटेन खाने के बाद अधिक लक्षण होते हैं, भले ही उन्हें सीलिएक रोग न हो।

Low FODMAP diet

आपका डॉक्टर कुछ ऐसे खाद्य पदार्थों जिनमें कार्बोहाइड्रेट होते हैं जिन्हें पचाना मुश्किल होता है, को कम करने या उनसे बचने के लिए सिफारिश कर सकता है कि आप एक विशेष आहार – जिसे LOW FODMAP आहार कहा जाता है, की कोशिश करें। इन कार्बोहाइड्रेट को FODMAPs कहा जाता है।

FODMAPs वाले खाद्य पदार्थों के उदाहरणों (foods that contain FODMAPs) में शामिल हैं –

फल जैसे सेब, खुबानी, ब्लैकबेरी, चेरी, आम, अमृत, नाशपाती, आलूबुखारा, और तरबूज, या इनमें से कोई भी फल युक्त रस;

प्राकृतिक फलों के रस में डिब्बाबंद फल, या बड़ी मात्रा में फलों का रस या सूखे फल;

सब्जियां जैसे आटिचोक, शतावरी, बीन्स, गोभी, फूलगोभी, लहसुन और गार्लिक साल्ट, दाल, मशरूम, प्याज, और चीनी स्नैप या स्नो पीस (sugar snap or snow peas);

डेयरी उत्पाद जैसे दूध, दुग्ध उत्पाद, सॉफ्ट चीज, दही, कस्टर्ड और आइसक्रीम;

गेहूं और राई उत्पाद;

शहद और उच्च फ्रुक्टोज कॉर्न सिरप वाले खाद्य पदार्थ;

कैंडी और गोंद सहित उत्पाद, “-ol” में समाप्त होने वाले मिठास के साथ, जैसे कि सोर्बिटोल, मैनिटोल, जाइलिटोल और माल्टिटोल।

आपका डॉक्टर कि यह देखने के लिए कि क्या यह आपके लक्षणों में मदद करता है, सलाह दे सकता है कि आप कुछ हफ्तों के लिए LOW FODMAP आहार का प्रयास करें। यदि आपके लक्षणों में सुधार होता है, तो आपका डॉक्टर धीरे-धीरे उन खाद्य पदार्थों को शामिल करने की सलाह दे सकता है जिनमें FODMAPs शामिल हैं। आप IBS के लक्षणों के बिना FODMAPs वाले कुछ खाद्य पदार्थ खाने में सक्षम हो सकते हैं।

(नोट : यह खबर किसी भी परिस्थिति में चिकित्सकीय सलाह नहीं है। यह समाचारों में उपस्थित सूचनाओं के आधार पर जनहित में एक अव्यावसायिक जानकारी मात्र है। किसी भी चिकित्सा सलाह के लिए योग्य व क्वालीफाइड चिकित्सक से संपर्क करें। स्वयं डॉक्टर कतई न बनें।)

ब्रेकिंग : दिन भर की टॉप हेडलाइंस। आज की बड़ी खबरें | 12 अप्रैल 2022

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छात्र एक साथ हासिल कर सकते हैं दो डिग्री, यूजीसी की सिफारिश पर विश्वविद्यालय के नियमों में बदलाव

नई शिक्षा नीति के अंतर्गत देश भर के छात्र एक ही विश्वविद्यालय या विभिन्न विश्वविद्यालयों से एक साथ दो डिग्री कार्यक्रम पूरा कर सकते हैं। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग यानी यूजीसी ने इसके लिए नए प्रावधान तैयार किए हैं। यूजीसी द्वारा बनाए गए नियमों के अंतर्गत ही देशभर के विश्वविद्यालय अब छात्रों को एक साथ 2 डिग्री लेने की इजाजत देने देंगे।

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पूर्व उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ विधायक/एमएलसी अदालत में आपराधिक मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है।

महबूबा मुफ्ती का दावा, उन्हें नजरबंद किया गया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जम्मू और कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने आज कहा कि उन्हें नजरबंद कर दिया गया है और दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में हमले के शिकार एक कश्मीरी पंडित के परिवार से मिलने से रोका गया है।

बंगाल उपचुनाव: आसनसोल में पुलिस ने मीडियाकर्मियों को रिपोर्टिग करने से रोका, चुनाव आयोग ने किया हस्तक्षेप

भारतीय चुनाव आयोग (ईसीआई) ने आसनसोल लोकसभा क्षेत्र के भीतर राज्य पुलिस द्वारा फ्री मीडिया मूवमेंट (पत्रकारों की ओर से स्वतंत्र रिपोर्टिग) को रोकने की घटना पर आपत्ति जताई, जहां मंगलवार को उपचुनाव हो रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री ने नए एक्सई कोरोनावेरिएंट पर विशेषज्ञों के साथ बैठक की अध्यक्षता की

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने आज कोरोना के नए वेरिएंट ‘एक्सई कोरोना’ पर देश के प्रमुख विशेषज्ञों और अधिकारियों के साथ बैठक की। देश में कोरोना मामलों की समीक्षा करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को नए रूपों और मामलों की चल रही निगरानी को बढ़ावा देने का निर्देश दिया।

श्रीलंका ने अस्थायी रूप से विदेशी ऋण भुगतान निलंबित किया

श्रीलंका के वित्त मंत्रालय ने कहा है कि सरकार ने अंतरिम अवधि के लिए सभी प्रभावित कर्जो की सामान्य कर्ज अदायगी को तब तक के लिए स्थगित करने का फैसला किया है, जब तक कि वह अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) द्वारा समर्थित एक व्यवस्थित और सहमति वाले पुनर्गठन कार्यक्रम को एक साथ नहीं कर देता।

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Coronavirus Test: आइए कोविड-19 पीसीआर टेस्ट को समझते हैं

covid 19

Understanding COVID-19 PCR Testing

कोविड-19 महामारी के दौरान कोरोनावायरस टेस्ट (Coronavirus Test in Hindi) खूब हो रहे हैं। आज इस खबर में सरल हिंदी में समझते हैं कि पीसीआर टेस्ट क्या होता है व इसका आविष्कार कब हुआ और पीसीआर टेस्ट किस तरह होता है और पीसीआर टेस्ट के पॉजिटिव आने या पीसीआर टेस्ट के निगेटिव आने का क्या मतलब है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ से संबद्ध राष्ट्रीय मानव जीनोम अनुसंधान संस्थान (National Human Genome research Institute- NHGRI) पर पब्लिक डोमेन में उपलब्ध एक फैक्ट शीट में इस संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई है। इस समाचार की जानकारी का उपयोग पेशेवर चिकित्सा देखभाल या सलाह के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता है। यदि आप अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता/ योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।

एनएचजीआरआई की फैक्ट शीट में दी गई जानकारी के मुताबिक –

पीसीआर क्या है? (COVID-19 PCR Test in Hindi)

पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (पीसीआर) {Polymerase chain reaction (PCR)} एक सामान्य लैबोरेटरी टेक्नीक है। इसका उपयोग आनुवंशिक सामग्री के छोटे खंडों (small segments of genetic material) को कॉपी करने या व्याख्यायित करने के लिए शोध एवम् नैदानिक अभ्यास में किया जाता है। पीसीआर को कभी-कभी “मोल्क्यूलर फोटोकॉपी” (“molecular photocopying”) कहा जाता है, और यह सटीक और संवेदनशील होती है। लघु अनुक्रमों जिन्हें प्राइमर नाम से जाना जाता है, का उपयोग एक विशिष्ट डीएनए अनुक्रम को चुनिंदा रूप से बढ़ाने के लिए किया जाता है।

पीसीआर का आविष्कार कब हुआ?

पीसीआर का आविष्कार 1980 के दशक में किया गया था और अब इसका उपयोग कई तरह से किया जाता है। अब डीएनए फिंगरप्रिंटिंग (DNA fingerprinting या genetic fingerprinting), आनुवंशिक विकारों के निदान (diagnosing genetic disorders) और बैक्टीरिया या वायरस का पता लगाना (detecting bacteria or viruses) के लिए पीसीआर का उपयोग किया जाता है। चूंकि आणविक और आनुवंशिक विश्लेषण के लिए महत्वपूर्ण मात्रा में डीएनए नमूने (DNA sample) की आवश्यकता होती है, इसलिए शोधकर्ताओं के लिए पीसीआर प्रवर्धन (PCR amplification) के बिना आनुवंशिक सामग्री के पृथक टुकड़ों का अध्ययन करना लगभग असंभव है।

कोविड-19 पीसीआर टेस्ट कैसे काम करता है? | How does COVID-19 PCR testing work?

कोविड-19 पीसीआर टेस्ट पीसीआर के एक संशोधित संस्करण, जिसे क्वांटिटेटिव पोलीमरेज़ चेन रिएक्शन (qPCR) कहा जाता है, का उपयोग करता है। इस विधि में एक सैम्पल में आनुवंशिक सामग्री की मात्रा को मापने के लिए पीसीआर प्रक्रिया में फ्लोरोसेंट रंजक (fluorescent dyes) जोड़ा जाता है। इस प्रक्रिया में जांच कर रहे हेल्थ वर्कर SARS-CoV-2 से आनुवंशिक सामग्री की मात्रा को मापते हैं।

पीसीआर टेस्टिंग प्रक्रिया तब शुरू होती है जब हेल्थ वर्कर वयक्ति के नाक के स्वीब या लार ट्यूब का उपयोग करके सैम्पल एकत्र करते हैं। SARS-CoV-2 वायरस, जो कि कोविड-19 का कारण बनने वाला रोगज़नक़ है, आरएनए (RNA) को अपनी आनुवंशिक सामग्री के रूप में उपयोग करता है। सबसे पहले, पीसीआर को रिवर्स ट्रांसक्रिप्शन नामक प्रक्रिया (reverse transcription) में सिंगल-स्ट्रैंडेड आरएनए से डबल-स्ट्रैंडेड डीएनए (single-stranded RNA to double-stranded DNA) में परिवर्तित किया जाता है। फिर दो डीएनए टेम्प्लेट स्ट्रैंड (DNA template strands) को अलग कर दिया जाता है। प्राइमर इन स्ट्रैंड्स के सिरे से जुड़ते हैं।

  • प्राइमर क्या होते हैं

प्राइमर डीएनए के छोटे टुकड़े होते हैं जिन्हें केवल एक आनुवंशिक अनुक्रम (जो वायरल डीएनए के लिए विशिष्ट होता है) से जोड़ने के लिए डिज़ाइन किया जाता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि केवल केवल वायरल डीएनए को दोहराया जा सकता है।

प्राइमर संलग्न होने के बाद, डीएनए के नए पूरक स्ट्रैंड टेम्पलेट स्ट्रैंड के साथ विस्तारित होते हैं। जैसे ही यह होता है, फ्लोरोसेंट रंग डीएनए से जुड़ते हैं, सफल दोहराव का एक मार्कर प्रदान करते हैं। इस प्रक्रिया के अंत में, वायरल डीएनए की दो समान कॉपी बनाई जाती हैं। फिर SARS-CoV-2 वायरल RNA के अनुरूप सैकड़ों डीएनए कॉपी बनाने के लिए चक्र को 20-30 बार दोहराया जाता है।

कोविड-19 पीसीआर टेस्ट के परिणामों को समझें (What do results mean for a COVID-19 PCR test?)

कोविड-19 पीसीआर टेस्ट पॉजिटिव तब होता है जब SARS-CoV-2 प्राइमर नमूने में डीएनए से मेल खाते हैं और अनुक्रम को बढ़ाया जाता है, जिससे लाखों प्रतियां बनती हैं। यानी सैंपल किसी संक्रमित व्यक्ति का है। प्राइमर केवल वायरस से आनुवंशिक सामग्री को बढ़ाते हैं, इसलिए यह संभावना नहीं है कि वायरल आरएनए मौजूद नहीं होने पर एक सैम्पल पॉजिटिव होगा। यदि ऐसा होता है, तो इसे फॉल्स पॉजिटिव कहा जाता है।

कोविड-19 पीसीआर टेस्ट निगेटिव तब होता है जब SARS-CoV-2 प्राइमर नमूने में आनुवंशिक सामग्री से मेल नहीं खाते और कोई प्रवर्धन नहीं होता है। इसका मतलब है कि नमूने में कोई वायरस नहीं था।

कोविड-19 पीसीआर टेस्ट का फॉल्स निगेटिव रिजल्ट तब होता है जब कोई व्यक्ति संक्रमित होता है, लेकिन इसका पता लगाने के लिए पीसीआर परीक्षण के लिए नमूने में पर्याप्त वायरल आनुवंशिक सामग्री नहीं होती है।

कुल मिलाकर, फॉल्स निगेटिव रिजल्ट फॉल्स पॉजिटिव रिजल्ट की तुलना में बहुत अधिक होने की संभावना होती है।

(नोट : यह खबर किसी भी परिस्थिति में चिकित्सकीय सलाह नहीं है। यह समाचारों में उपस्थित सूचनाओं के आधार पर जनहित में एक अव्यावसायिक जानकारी मात्र है। किसी भी चिकित्सा सलाह के लिए योग्य व क्वालीफाइड चिकित्सक से संपर्क करें। स्वयं डॉक्टर कतई न बनें।)

जानकारी का स्रोत – NHGRI

आप भी लगाते हैं सनस्क्रीन तो जरा संभलकर हो सकती है मुसीबत

healthy lifestyle

सनस्क्रीन से हो सकती है विटामिन डी की कमी : अध्ययन | Sunscreens may cause vitamin D deficiency: study

Applying sunscreen may make you deficient in vitamin D, increasing your risk of muscle weakness and bone fractures, a research warns. | एक शोध में चेतावनी दी गई है कि सनस्क्रीन लगाने से आपको विटामिन डी की कमी हो सकती है, जिससे मांसपेशियों में कमजोरी और हड्डियों के टूटने का खतरा बढ़ जाता है।

क्‍या धूप के दुष्परिणामों से बचने के लिए आप भी सनस्‍क्रीन का प्रयोग करते हैं? लेकिन क्या आपको पता है कि सनस्‍क्रीन का अधिक प्रयोग आपके स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी हो सकता है? एक शोध के मुताबिक सनस्क्रीन का अधिक प्रयोग से आपके शरीर में विटामिन डी की कमी हो सकती है जिसके चलते कारण आपकी मांसपेशियां कमजोर होती हैं और हड्डियां टूटने का भी खतरा रहता है।

आपके लिए सनस्क्रीन कितना सुरक्षित है? क्या सनस्क्रीन लोशन का कोई साइड-इफेक्ट हो सकता है?

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Photo by Tara Winstead on Pexels.com

अमेरिकन ऑस्टियोपैथिक एसोसिएशन के आधिकारिक वैज्ञानिक प्रकाशन (JAOA) जर्नल ऑफ अमेरिकन ऑस्टियोपैथिक एसोसिएशन (journal of the american osteopathic association) में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक विश्व में लगभग एक अरब लोग सनस्क्रीन के इस्तेमाल के कारण विटामिन डी की कमी से जूझ रहे हैं। सनस्क्रीन के अधिक इस्तेमाल के कारण उनका शरीर धूप के संपर्क में नहीं आता और वे विटामिन डी से वंचित रह जाते हैं।

Widespread Vitamin D Deficiency Likely Due to Sunscreen Use, Increase of Chronic Diseases

ऑस्टियोपैथिक पारिवारिक चिकित्सक और कैलिफोर्निया के वैलेजो में टौरो यूनिवर्सिटी कैलिफ़ोर्निया कॉलेज ऑफ़ ऑस्टियोपैथिक मेडिसिन में सहायक प्रोफेसर किम फोटेनहॉएर (Kim Pfotenhauer) के मुताबिक “लोग घरों से बाहर खुले में बहुत कम समय बिता रहे हैं और जब भी वे बाहर निकलते हैं, सनस्क्रीन लगा कर निकलते हैं लिहाजा उनके शरीर की विटामिन डी निर्माण की क्षमता खत्म हो जाती है। अगर हम चाहते हैं कि लोग त्वचा के कैंसर से अपना बचाव करें तो हमें हल्की धूप में बिना सनस्क्रीन लगाये निकलने की आदत भी डालनी चाहिए ताकि शरीर में विटामिन डी का स्तर बढ़ाने में मदद मिले। अध्ययन के मुताबिक टाइप टू डायबिटीज, गुर्दे की बीमारियों, क्रोन और सेलियक जैसी बीमारियां खाद्य स्रोतों से विटामिन डी के चयापचय की क्षमता में बड़ी बाधा डालता है।

विटामिन डी का महत्व

विटामिन डी का निर्माण (manufacture of vitamin D) तभी होता है जब शरीर सूरज की किरणों के संपर्क में आता है। मानव शरीर में लगभग हर कोशिका में विटामिन डी रिसेप्टर्स (Vitamin D receptors) पाए जाते हैं। फलस्वरूप, यह शरीर के कार्यों में एक व्यापक भूमिका निभाता है, जिसमें कोशिका वृद्धि मॉडुलन, न्यूरोमस्कुलर और प्रतिरक्षा कार्य और सूजन में कमी शामिल है। विटामिन डी शरीर के क्रियाकलापों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, प्रदाह को नियंत्रित करने और तंत्रिका एवं मांसपेशियों की कार्यक्षमता में वृद्धि करता है। अपर्याप्त या विटामिन डी की कमी वाले के लक्षणों में मांसपेशियों में कमजोरी और हड्डी का फ्रैक्चर शामिल हैं।

अध्ययन के मुताबिक सप्ताह में दो बार दोपहर में पांच से 30 मिनट तक धूप के संपर्क में रहने से विटामिन डी की कमी दूर करने और स्वस्थ जीवन जीने में मदद मिलेगी।

सनस्क्रीन का प्रयोग क्यों न करें? | सनस्‍क्रीन के साइड इफेक्ट्स | Sunscreen side effects in Hindi

शोधकर्ता इस दौरान सनस्क्रीन का प्रयोग नहीं करने की सलाह देते हैं क्योंकि एसपीएफ -15 अथवा इससे अधिक एसपीएफ वाली सनस्क्रीन (Sunscreen with SPF -15 or higher) विटामिन डी3 के उत्पादन को 99 प्रतिशत तक कम कर देती है। प्रोफेसर किम कहती हैं, “आपको ये फायदे लेने के लिए समुद्र तट पर कड़ी धूप में लेटने की जरूरत नहीं है। ज्यादातर लोगों के लिए हाथ-पैर खुले रखकर धूप में थोड़ी देर टहल लेना ही पर्याप्त है।

Topic – त्वचा की देखभाल के प्रति जागरूकता,Skincare awareness.

क्या आप भी देते हैं अपने शिशु को स्मार्टफोन तो सावधान उसके बोलने में हो सकती है देरी

Children's health

18 महीने से छोटे बच्चों को न दें किसी तरह के मीडिया स्क्रीन

स्क्रीन वाले उपकरण हाथ में रखने और बोलने में देरी के बीच क्या संबंध है? What is the relationship between holding a screened device in hand and a delay in speaking?

नई दिल्ली, 10 अप्रैल 2022. आपका नन्हा बच्चा अगर ज्यादा समय स्मार्टफोन, टैबलेट और स्क्रीन वाले दूसरे उपकरणों से खेलने में बिताता है, तो उसके बोलने में देरी हो सकती है। एक शोध से पता चलता है कि स्क्रीन वाले उपकरणों के हर 30 मिनट ज्यादा इस्तेमाल से बोलने में देरी की आशंका 49 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

कैथरीन बिरकेन: बाल चिकित्सा विभाग में एक सामान्य बाल रोग विशेषज्ञ, टोरंटो विश्वविद्यालय (यू ऑफ टी) में प्रोफेसर, और सिककिड्स रिसर्च इंस्टीट्यूट में बाल स्वास्थ्य मूल्यांकन विज्ञान में एक वरिष्ठ वैज्ञानिक (Catherine Birken : a general paediatrician in the Division of Paediatric Medicine, Professor at the University of Toronto (U of T), and a Senior Scientist in Child Health Evaluative Sciences at SickKids Research Institute) का कहना है, “इन दिनों हाथ में पकड़ने वाले उपकरण (स्मार्टफोन, टैबलेट व दूसरे स्क्रीन वाले उपकरण) हर जगह मौजूद हैं। बच्चे जिद करके ले लेते हैं और उससे देर तक खेलते रहते हैं।”

बिरकेन ने कहा, “बच्चों को एक निश्चित समय तक ही स्क्रीन वाले उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए। स्मार्टफोन और टैबलेट का इस्तेमाल छोटे बच्चे भी करने लगे हैं। हमारा अध्ययन बताता है कि स्क्रीन वाले उपकरण हाथ में रखने और बोलने में देरी के बीच गहरा संबंध है।”

देशबन्धु की एक पुरानी खबर के मुताबिक शोध की रिपोर्ट सैन फ्रांसिस्को में हुई पिडिएट्रिक एकेडमिक सोसाइटीज की बैठक (Pediatric Academic Societies Annual Meeting 2017 (PAS 2017)) में पेश की गई।

शोध करने वाली टीम ने छह महीने से लेकर दो साल की उम्र तक के 894 बच्चों का अध्ययन किया।

इस शोध के परिणाम अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स के दिशा-निर्देश (American Academy of Pediatrics guidelines) के भी अनुकूल हैं, जिसमें 18 महीने से छोटे बच्चों को किसी तरह के स्क्रीन मीडिया के प्रति हतोत्साहित करने को कहा गया है।

कोविड का ‘एक्सई’ वैरिएंट : जानिए क्या हैं प्रमुख लक्षण

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नाक बहना, छींकना और गले में खराश हैं कोविड का ‘एक्सई’ वैरिएंट के प्रमुख लक्षण

COVID-19 Variant XE in India : Here’s all you need to know about new XE Covid variant in Hindi

नई दिल्ली, 6 अप्रैल 2022. देश में आज कोविड-19 के ‘एक्सई’ वैरिएंट (‘XE’ variant of COVID-19) का पहला मामला सामने आया। मुंबई के बॉलीवुड में कोविड-19 के नए वैरिएंट का पहला मामला सामने आने की अपुष्ट खबरों के बाद चिंताएं बढ़ गई हैं और लोग इस वैरिएंट के बारे में जानना चाहते हैं।

पिछले हफ्ते ही डब्ल्यूएचओ ने नए म्यूटेंट के खिलाफ जारी की थी चेतावनी

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने पिछले हफ्ते एक नए म्यूटेंट के खिलाफ चेतावनी जारी की थी, जो पहले देखे गए कोविड-19 के किसी भी स्ट्रेन से अधिक संक्रमणीय हो सकता है।

एक्सई वैरिएंट ओमिक्रॉन वैरिएंट के उपभेदों का एक उत्परिवर्तन (म्यूटेशन ऑफ स्ट्रेन– mutation of strain) है, जो दुनिया भर में फैला हुआ है। इसके बारे में पहली बार 19 जनवरी को यूके में पता चला था और तब से सैकड़ों रिपोर्ट और पुष्टि की जा चुकी है।

XE variant can spread about 10 percent faster than other Omicron mutations

शुरुआती संकेत बताते हैं कि यह अन्य ओमिक्रॉन म्यूटेशन की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक तेजी से फैल सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, नया एक्सई वैरिएंट दो अन्य ओमिक्रॉन वैरिएंट्स, बीए.1 और बीए.2 का एक म्यूटेंट हाईब्रिड है और वैश्विक स्तर पर फैल रहे मामलों के लिए जिम्मेदार है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि नया म्यूटेंट ओमिक्रॉन के बीए.2 सब-वैरिएंट की तुलना में लगभग 10 प्रतिशत अधिक ट्रांसमिसिबल (तेजी से फैलने वाला) है।

हालांकि दुनिया भर में एक्सई के फिलहाल कम ही मामले देखने को मिले हैं, मगर इसकी अत्यधिक उच्च संचरण क्षमता का मतलब यह हो सकता है कि यह निकट भविष्य में सबसे प्रभावशाली स्ट्रेन बन जाता है।

हाल ही में डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट में कहा गया है, “एक्सई (बीए.1-बीए.2), पहली बार 19 जनवरी को यूके में पाया गया था और 600 से कम सीक्वेंस की रिपोर्ट और पुष्टि की गई है।”

इसमें कहा गया है, “शुरूआती दिन के अनुमान बीए.2 की तुलना में सामुदायिक विकास दर में 10 प्रतिशत का संकेत देते हैं, हालांकि, इसके लिए और पुष्टि की आवश्यकता है।”

कोविड-19 के एक्सईवैरिएंट के प्रमुख लक्षण

यूके की स्वास्थ्य सुरक्षा एजेंसी के अनुसार, एक्सई में नाक बहने, छींकने और गले में खराश जैसे लक्षण होते हैं, जो वायरस के मूल स्ट्रेन के विपरीत होते हैं, क्योंकि मूल स्ट्रेन में आमतौर पर रोगी को बुखार और खांसी की शिकायत रहती है और साथ ही उसे किसी चीज का स्वाद नहीं आता और कोई गंध भी नहीं आती है।

एजेंसी ने कहा कि 22 मार्च तक इंग्लैंड में एक्सई के 637 मामलों का पता चला था।

थाईलैंड और न्यूजीलैंड में भी एक्सई वैरिएंट का पता चला है।

डब्ल्यूएचओ ने कहा है कि म्यूटेशन के बारे में और कुछ कहने से पहले और डेटा पर गौर करने की आवश्यकता है।

ओटोस्क्लेरोसिस : जानिए लक्षण, निदान और उपचार हिंदी में

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Otosclerosis in Hindi : Symptoms & Diagnosis

इस समाचार में सरल हिंदी में कान की बीमारी ओटोस्क्लेरोसिस / कर्णकाठिन्य (Otosclerosis in Hindi) के बारे में जानते हैं? यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ से संबद्ध “बधिरता और अन्य संचार विकारों पर राष्ट्रीय संस्थान” पर उपलब्ध एक सार्वजनिक जानकारी में ओटोस्क्लेरोसिस से संबंधित जानकारी देते हुए समझाया गया है कि हम कैसे सुनते हैं, ओटोस्क्लेरोसिस का क्या कारण बनता है, ओस्टोस्क्लेरोसिस के लक्षण क्या हैं, ओटोस्क्लेरोसिस का निदान कैसे किया जाता है और ओटोस्क्लेरोसिस का इलाज कैसे किया जाता है? तो सरल हिंदी में कान की बीमारी ओटोस्क्लेरोसिस के बारे में जानते हैं। इस समाचार की जानकारी का उपयोग पेशेवर चिकित्सा देखभाल या सलाह के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता है। यदि आप अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता/ योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।

ओटोस्क्लेरोसिस क्या है? What is otosclerosis in Hindi?

ओटोस्क्लेरोसिस ओटो से लिया गया एक शब्द है, जिसका अर्थ है “कान का,” और काठिन्य, जिसका अर्थ है “शरीर के ऊतकों का असामान्य सख्त होना।” यह स्थिति मध्य कान में असामान्य हड्डी रीमॉडेलिंग (abnormal bone remodeling in the middle ear) के कारण होती है। बोन रीमॉडेलिंग एक आजीवन प्रक्रिया है जिसमें हड्डी के ऊतक पुराने ऊतक को नए के साथ बदलकर खुद को नवीनीकृत करते हैं। ओटोस्क्लेरोसिस में, असामान्य रीमॉडेलिंग मध्य कान से भीतरी कान तक जाने के लिए ध्वनि की क्षमता को बाधित करता है। ओटोस्क्लेरोसिस/ कर्णकाठिन्य तीन मिलियन से अधिक अमेरिकियों को प्रभावित करता है। माना जाता है कि ओटोस्क्लेरोसिस के कई मामले विरासत में मिले हैं। सफेद, मध्यम आयु वर्ग की महिलाओं को ओटोस्क्लेरोसिस का सबसे अधिक खतरा होता है।

हम कैसे सुनते हैं? How do we hear?

अच्छी तरह सुनना उन घटनाओं की एक श्रृंखला पर निर्भर करती है जो हवा में ध्वनि तरंगों को कान के भीतर विद्युत रासायनिक संकेतों में बदल देती हैं। श्रवण तंत्रिका (auditory nerve) तब इन संकेतों को मस्तिष्क तक ले जाती है।

सबसे पहले, ध्वनि तरंगें बाहरी कान में प्रवेश करती हैं और एक संकीर्ण मार्ग जिसे ईयर कैनाल (ear canal) कहा जाता है, जो ईयरड्रम की ओर जाता है, से यात्रा करती हैं।

आने वाली ध्वनि तरंगें ईयरड्रम को कंपन करती हैं, और कंपन मध्य कान में तीन छोटी हड्डियों तक जाती हैं जिन्हें मैलियस, इनकस और स्टेप्स (malleus, incus, and stapes) कहा जाता है- जिनके लैटिन नाम हैमर, एविल और रकाब हैं।

मध्य-कान की हड्डियाँ (middle-ear bones) ध्वनि कंपन को बढ़ाती हैं और उन्हें आंतरिक कान में घोंघे के आकार की तरल पदार्थ से भरी संरचना कोक्लीअ (cochlea) में भेजती हैं। कोक्लीअ के ऊपरी और निचले हिस्से एक लोचदार, “बेसिलर” झिल्ली से अलग होते हैं जो आधार, या भूतल के रूप में कार्य करता है, जिस पर प्रमुख श्रवण संरचनाएं बैठती हैं।

आने वाले ध्वनि कंपन कोक्लीअ के अंदर तरल पदार्थ को तरंगित करते हैं, और बेसिलर झिल्ली के साथ एक यात्रा तरंग बनती है। झिल्ली के ऊपर बैठने वाली बाल कोशिकाएं इस तरंग की “सवारी” करती हैं और इसके साथ ऊपर और नीचे जाती हैं।

बालों की कोशिकाओं की ब्रिस्टली संरचनाएं फिर एक ऊपर की झिल्ली से टकराती हैं, जिससे ब्रिसल्स एक तरफ झुक जाते हैं और रोमकूप जैसे चैनल खुल जाते हैं। कुछ रसायन तब भागते हैं, एक विद्युत संकेत बनाते हैं जो श्रवण तंत्रिका द्वारा मस्तिष्क तक ले जाया जाता है। इसका अंतिम परिणाम एक पहचानने योग्य ध्वनि में होता है।

कर्णावर्त के आधार के पास की बाल कोशिकाएं उच्च-ध्वनियों का पता लगाती हैं, जैसे कि सेल फोन बजना। और वे बाल कोशिकाएं जो बीच के करीब हैं, वे कम आवाज़ वाली आवाज़ों का पता लगाते हैं, जैसे कि एक बड़े कुत्ते का भौंकना।

ओटोस्क्लेरोसिस क्यों होता है? What causes otosclerosis?

ओटोस्क्लेरोसिस अक्सर तब होता है जब मध्य कान में हड्डियों में से एक, स्टेप्स, जगह में फंस जाता है। जब यह हड्डी कंपन करने में असमर्थ होती है, तो ध्वनि कान के माध्यम से यात्रा करने में असमर्थ होती है और श्रवण बाधित हो जाता है।

ऐसा क्यों होता है यह अभी भी स्पष्ट नहीं है, लेकिन वैज्ञानिकों को लगता है कि यह पहले हो चुके खसरे के संक्रमण, आंतरिक कान के आसपास के हड्डी के ऊतकों में तनाव फ्रैक्चर या प्रतिरक्षा विकारों से संबंधित हो सकता है। ओटोस्क्लेरोसिस वंशानुगत भी होता है।

यह साइटोकिन्स नामक तीन अलग-अलग प्रतिरक्षा-प्रणाली कोशिकाओं के कारण भी हो सकता है। शोधकर्ताओं का मानना ​​है कि स्वस्थ हड्डी रीमॉडेलिंग के लिए इन तीन पदार्थों का उचित संतुलन आवश्यक है और उनके स्तर में असंतुलन से ओटोस्क्लेरोसिस में होने वाली असामान्य रीमॉडेलिंग हो सकती है।

ओटोस्क्लेरोसिस के लक्षण क्या हैं? What are the symptoms of otosclerosis In Hindi?

श्रवण हानि, ओटोस्क्लेरोसिस का सबसे अधिक सूचित लक्षण, आमतौर पर एक कान में शुरू होता है और फिर दूसरे में चला जाता है। यह नुकसान बहुत धीरे-धीरे प्रकट हो सकता है। ओटोस्क्लेरोसिस वाले बहुत से लोग पहली बार नोटिस करते हैं कि वे कम आवाज नहीं सुन सकते हैं या फुसफुसाहट नहीं सुन सकते हैं। कुछ लोगों को चक्कर आना, संतुलन की समस्या या टिनिटस का भी अनुभव हो सकता है। टिनिटस (Tinnitus -कर्णक्ष्वेड) कान या सिर में बजना, गर्जना, भनभनाहट या फुफकारना है जो कभी-कभी श्रवण हानि के साथ होता है।

ओटोस्क्लेरोसिस का निदान कैसे किया जाता है? How is otosclerosis diagnosed?

ओटोस्क्लेरोसिस का निदान स्वास्थ्य देखभाल प्रदाताओं द्वारा किया जाता है जो सुनने में विशेषज्ञ होते हैं। इनमें शामिल होते हैं एक ओटोलरींगोलॉजिस्ट-otolaryngologist (आमतौर पर एक ईएनटी कहा जाता है, क्योंकि वे डॉक्टर हैं जो कान, नाक, गले और गर्दन के रोगों के विशेषज्ञ हैं), एक ओटोलॉजिस्ट-otologist (एक डॉक्टर जो कान के रोगों में माहिर हैं), या एक ऑडियोलॉजिस्ट-audiologist (एक स्वास्थ्य श्रवण विकारों की पहचान, माप और उपचार के लिए प्रशिक्षित पेशेवर देखभाल)।

ओटोस्क्लेरोसिस के निदान में पहला कदम अन्य बीमारियों या स्वास्थ्य समस्याओं का पता करना है जो ओटोस्क्लेरोसिस के समान लक्षण पैदा कर सकते हैं।  अगले चरणों में श्रवण परीक्षण शामिल हैं जो श्रवण संवेदनशीलता/श्रवणलेख (ऑडियोग्राम-audiogram) और मध्य-कान ध्वनि चालन (टाइम्पेनोग्राम-tympanogram) को मापते हैं। कभी-कभी, ओटोस्क्लेरोसिस का निदान करने के लिए इमेजिंग परीक्षण- जैसे सीटी स्कैन- का भी उपयोग किया जाता है।

ओटोस्क्लेरोसिस का उपचार कैसे किया जाता है? How is otosclerosis treated?

वर्तमान में, ओटोस्क्लेरोसिस के लिए कोई प्रभावी दवा उपचार (effective drug treatment for otosclerosis) नहीं है, हालांकि आशा है कि निरंतर हड्डी-रीमॉडेलिंग अनुसंधान (continued bone-remodeling research) संभावित नए उपचारों की पहचान कर सकता है। हल्के ओटोस्क्लेरोसिस का इलाज श्रवण यंत्र से किया जा सकता है जो ध्वनि को बढ़ाता है, लेकिन अक्सर सर्जरी की आवश्यकता होती है। स्टेपेडेक्टोमी (stapedectomy) के रूप में जानी जाने वाली एक प्रक्रिया में, एक सर्जन असामान्य हड्डी को बायपास करने के लिए मध्य कान में एक कृत्रिम उपकरण डालता है और ध्वनि तरंगों को आंतरिक कान तक जाने और सुनवाई बहाल करने की अनुमति देता है।

ऑपरेशन के संभावित जोखिमों और सीमाओं को स्पष्ट करने के लिए कान विशेषज्ञ (ear specialist ) के साथ किसी भी शल्य प्रक्रिया पर चर्चा करना महत्वपूर्ण है। उदाहरण के लिए, स्टेपेडेक्टोमी के बाद कुछ सुनवाई हानि जारी रह सकती है, और दुर्लभ मामलों में, सर्जरी वास्तव में सुनवाई हानि को खराब कर सकती है।

(नोट : यह खबर किसी भी परिस्थिति में चिकित्सकीय सलाह नहीं है। यह समाचारों में उपस्थित सूचनाओं के आधार पर जनहित में एक अव्यावसायिक जानकारी मात्र है। किसी भी चिकित्सा सलाह के लिए योग्य व क्वालीफाइड चिकित्सक से संपर्क करें। स्वयं डॉक्टर कतई न बनें।)

जानकारी का स्रोत : National Institute on Deafness and Other Communication Disorders

विशेष ओलंपिक भारत के मेगा हेल्थ फेस्ट का आयोजन संपन्न

special olympics india

Special Olympics India’s mega health fest concludes

600 विशेष ओलिंपिक एथलीटों का स्वास्थ्य जांच एवं प्रशिक्षण किया गया

नई दिल्ली, 05 अप्रैल 2022. आजादी का अमृत महोत्सव के तहत विशेष ओलंपिक भारत द्वारा आज कड़कड़डूमा दिल्ली में एक राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिविर लगाया गया जिसे मेगा हेल्थ फेस्ट का नाम दिया गया। 5 अप्रैल को सुबह 8 बजे से सायं 5:00 बजे तक अमर ज्योति स्कूल, कड़कड़डूमा, दिल्ली में चले इस विशेष कैंप में कुल 600 एथलीटों की स्वास्थ्य जांच की गयी।

इस मौके पर आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ महेंद्र नाथ पांडे एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह रहे। यह जानकारी देते हुए यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के कॉरपोरेट कम्युनिकेश हेड गौरव पांडेय ने बताया कि, यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, कौशाम्बी के डायरेक्टर डॉ उपासना अरोड़ा एवं प्रबंध निदेशक डॉ पी एन अरोड़ा के कुशल निर्देशन में यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल,कौशांबी, गाजियाबाद के डॉक्टरों एवं टीम द्वारा स्वास्थय जांच कार्यक्रम आयोजित किया गया।

कार्यक्रम के प्रथम चरण के मुख्य अतिथि केंद्रीय राज्य मंत्री जनरल वी के सिंह ने कहा क़ि यह शिविर आजादी का अमृत महोत्सव के तहत विशेष ओलंपिक भारत द्वारा, खेल मंत्रालय भारत सरकार की गई एक सकारात्मक पहल है, जिसके तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिविर का आयोजन देशव्यापी पैमाने पर किया जा रहा है।

जनरल वीके सिंह ने कहा क़ि फौज में भी हम इस तरह का अभियान चलाते हैं जिसमें युद्ध में या अभ्यास के दौरान घायल हुए सैनिकों को उनकी किसी भी प्रकार की विकलांगता को ध्यान में रखते हुए उन्हें विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है और उन्हें खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है जिससे कि उनकी शारीरिक क्षमता को पुनः उसी तरह का बनाया जा सके जैसे कि पहले थी।

उन्होंने कहा क़ि पैरालम्पिक गेम्स एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मल्टी-स्पोर्ट इवेंट है, जिसमें शारीरिक अक्षमता के साथ एथलीटों को शामिल किया गया है, जिसमें विकलांगताएं वाली मांसपेशियों की शक्ति, गतिहीन निष्क्रिय सीमाएं, अंग की कमी, पैर की लंबाई में भिन्नता, लघु कद, हाइपरटोनिया, एनेटिक्स, अस्थिटोसिस, दृष्टि हानि और बौद्धिक हानि आदि प्रमुख हैं।

कार्यक्रम के द्वितीय चरण के मुख्य अतिथि केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ महेंद्र नाथ पांडे ने कहा क़ि यह एक बहुत ही सराहनीय पहल है कि यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल इस राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिविर का आयोजन देशव्यापी पैमाने पर कर रहा है। ऐसी पहलों से मैंने बहुत से ऐसे बच्चों की थोड़े से ही प्रोत्साहन से अपने जीवन में और अपने आस पास के लोगों के लिए एक बहुत बड़ा उदाहरण बनते हुए देखा है। इन एथलीटों को विकसित करने और बनाने में मदद करने के लिए विशेष ओलंपिक भारत द्वारा किये गए इस पहल अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह देश को अत्यंत गौरव एवं ख्याति की प्राप्ति होगी, ऐसी मेरा अनुमान, मंशा एवं शुभकामनाएं हैं।

डॉ पाण्डे ने कहा क़ि प्रधानमंत्री जी ने बहुत सराहनीय कदम उठाया इन्हें दिव्यांग नाम देकर। पहले विकलांग बोलने से हीन भावना आती थी लेकिन अब इनको समाज में एक नयी पहचान मिली है। इन सब के हुनर को पहचान मिली है और अब ये देश का नाम रौशन करेंगे।

हॉस्पिटल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ सुनील डागर ने बताया कि इन विशेष एथलीट बच्चों को प्रोत्साहित एवं प्रशिक्षित करने के लिए यशोदा सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल कौशाम्बी के वरिष्ठ डॉक्टरों ने विशेष ओलंपिक स्क्रीनिंग और छह स्वास्थ्य विषयों जैसे आंखों की देखभाल, मौखिक स्वास्थ्य, हड्डी एवं जोड़ रोग स्वास्थ्य, बाल रोग, भौतिक चिकित्सा, पोषण से सम्बंधित जाचें की एवं परामर्श दिया गया।

कार्यक्रम में स्थानीय विधायक ओम प्रकाश शर्मा, महापौर, पूर्वी दिल्ली एवं अन्य अमर ज्योति चैरिटेबल स्कूल की श्रीमती उमा तुली जी विशेष रूप से मौजूद थीं।

कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली बहु खेल प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों को तैयार और प्रेरित करना था। पैरा ओलंपिक खेल शारीरिक रूप अथवा मानसिक रूप से विकलांग खिलाड़ियों द्वारा खेले जाते हैं और इसका प्रचलन द्वितीय विश्वयुद्ध के घायल सैनिकों को फिर से मुख्यधारा में लाने के मकसद से इसकी शुरुआत हुई।

डॉ उपासना अरोड़ा ने बताया क़ि कार्यक्रम का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आयोजित होने वाली बहु खेल प्रतियोगिता के लिए खिलाड़ियों को तैयार और प्रेरित करना था। बता दें क़ि पैरा ओलंपिक खेल शारीरिक रूप अथवा मानसिक रूप से विकलांग खिलाड़ियों द्वारा खेले जाते हैं और इसका प्रचलन द्वितीय विश्वयुद्ध के घायल सैनिकों को फिर से मुख्यधारा में लाने के मकसद से इसकी शुरुआत हुई।

उन्होंने कहा क़ि भारत में 75000 विशेष ओलिंपिक एथलीटों की जांच एवं प्रशिक्षण का लक्ष्य पूरा कर लिया गया है और 78000 से ज्यादा रजिस्ट्रेशन 5 अप्रैल तक हो चुके हैं।

विशेष ओलंपिक भारत, एक मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय खेल संघ, युवा मामले और खेल मंत्रालय के तहत खेल के माध्यम से बौद्धिक विकलांग बच्चों और वयस्कों के खेल और अन्य जीवन कौशल के विकास के लिए काम करता है जिसके संस्थापक अध्यक्ष एयर मार्शल डेन्ज़िल कीलोर (सेवानिवृत्त) हैं।

विशेष ओलंपिक भारत की अध्यक्ष डॉ. मल्लिका नड्डा हैं, उन्होंने बताया क़ि विशेष ओलंपिक भारत राष्ट्रीय खेल संघ, युवा मामले और खेल मंत्रालय के तहत खेल के माध्यम से बौद्धिक विकलांग बच्चों और वयस्कों के खेल और अन्य जीवन कौशल के विकास के लिए काम करता है।

ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस। आज की बड़ी खबरें | 4 अप्रैल 2022

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भाजपा को सबसे ज्यादा कॉर्पोरेट चंदा मिला

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि पांच राष्ट्रीय पार्टियों को वित्तवर्ष 2019-20 के दौरान सभी कॉर्पोरेट/व्यावसायिक घरानों से कुल 921.95 करोड़ रुपये का दान मिला, जो ज्ञात स्रोतों से राजनीतिक दलों को दिए जाने वाले कुल योगदान का 91 प्रतिशत है। सबसे ज्यादा चंदा भाजपा को मिला।

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर राज्यसभा में विपक्ष का हंगामा, कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित

ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर विपक्ष के लगातार विरोध के बीच राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार को दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

कांग्रेस की मांग – सीआरपीसी संशोधन विधेयक स्थायी समिति को भेजा जाए

लोकसभा में सीआरपीसी संशोधन विधेयक का यह कहते हुए विरोध करने के बाद कि यह अनुच्छेद 21 का उल्लंघन करता है और ‘सरकार की विधायी क्षमता से परे है’, कांग्रेस ने इसे आगे के विचार-विमर्श के लिए स्थायी समिति के पास भेजने की मांग की।

अब कर्नाटक में मस्जिदों में लाउडस्पीकर पर प्रतिबंध लगाने की उठी मांग

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि महाराष्ट्र में मस्जिदों से लाउडस्पीकर हटाने की मांग के बाद कर्नाटक में भी हिंदू संगठनों ने भी लाउडस्पीकर हटाने की मांग शुरू कर दी है।

तमिलनाडु के राज्यपाल को वापस बुलाने की मांग को लेकर डीएमके सांसदों ने लोक सभा से किया वॉकआउट

तमिलनाडु के राज्यपाल आर. एन. रवि को वापस बुलाने की मांग को लेकर डीएमके सांसदों ने आज संसद में जमकर हंगामा किया। डीएमके सांसद ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जरिए राज्यपाल के रवैये को लेकर लोक सभा में गृह मंत्री के जवाब की मांग कर रहे थे, लेकिन मांग नहीं माने जाने पर उन्होंने दो बार लोक सभा से वॉकआउट कर दिया।

हिंदू महापंचायत : विवादित कंटेंट पोस्ट करने पर ट्विटर यूजर्स के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज

 दिल्ली पुलिस ने हिंदू महापंचायत सभा की पृष्ठभूमि में उन ट्विटर यूजर्स के खिलाफ मामला दर्ज किया है, जिन्होंने विवादित सामग्री पोस्ट की थी, जिसके बारे में पुलिस ने कहा था कि इससे दो सांप्रदायिक समूहों के बीच दुश्मनी, नफरत और द्वेष पैदा हो सकता है। एक अधिकारी के हवाले से सोमवार को मीडिया रिपोर्ट्स में यह जानकारी दी गई है।

रेल यात्रा पर अब अतिरिक्त शुल्क 15 अप्रैल से

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि डीजल इंजनों से चलने वाली ट्रेनों से लम्बी दूरी की यात्रा करने वाले यात्रियों से अब अधिक किराया वसूला जा सकता है। ये अतिरिक्त शुक्ल 15 अप्रैल से टिकट बुकिंग के समय रेल यात्रा में स्वत: जुड़ जाएगा।

भारत में 715 दिनों के बाद कोरोना के मामले 1,000 से कम

भारत में 715 दिनों के बाद पहली बार कोरोना के मामले 1,000 से कम आए हैं, जबकि सक्रिय कोरोना मामलों की संख्या भी 13,000 से कम हो गई है। ये आंकड़े केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को साझा किए हैं।

छत्तीसगढ़ में देश में बेरोजगारी दर सबसे कम

छत्तीसगढ़ ने रोजगार मुहैया कराने के मामले में भी बाजी मारी है, यहां वर्तमान में देश में सबसे कम बेरोजगारी दर हैं। यह खुलासा किया गया है सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनॉमी संगठन द्वारा जारी किये गये बेरोजगारी के नवीनतम आंकड़ों में।

पाकिस्तानी सुप्रीम कोर्ट के जज ने कहा- स्पीकर के पास प्रस्ताव खारिज करने का अधिकार

 पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश मुनीब अख्तर ने नेशनल असेंबली के डिप्टी स्पीकर के फैसले के बाद पैदा हुए संवैधानिक संकट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए सुनवाई के दौरान कहा कि एक अध्यक्ष (स्पीकर) सदन के नियमों के अनुसार एक प्रस्ताव को खारिज कर सकता है।

जून में यातायात के लिए खुलेगा बांग्लादेश का सबसे बड़ा पुल

बांग्लादेश के सड़क परिवहन और पुल मंत्री ओबैदुल कादर ने कहा कि देश का सबसे बड़ा पद्मा पुल इस साल जून में यातायात के लिए खोल दिया जाएगा।

श्रीलंका में 36 घंटे का कर्फ्यू हटा

 श्रीलंका में राजनीतिक अशांति के मद्देनजर लगाया गया 36 घंटे का कर्फ्यू सोमवार को हटा लिया गया है और सार्वजनिक परिवहन सामान्य सेवाएं बहाल कर दी गई हैं।

विश्व की नंबर 1 टेनिस खिलाड़ी स्वियातेक ने डब्ल्यूटीए रैंकिंग में शीर्ष स्थान प्राप्त किया

पोलैंड की टेनिस स्टार इगा स्वियातेक आधिकारिक तौर पर विश्व की नंबर 1 महिला टेनिस खिलाड़ी बन गई हैं।

श्रीलंका में आपातकाल और कर्फ्यू देखकर दुखी हूं : महेला जयवर्धने

मुंबई इंडियंस के कोच और श्रीलंका के पूर्व कप्तान महेला जयवर्धने ने कहा है कि वह अपने देश में आपातकालीन कानून और कर्फ्यू को देखकर दुखी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार उन लोगों की जरूरतों को नजरअंदाज नहीं कर सकती, जिन्हें विरोध करने का पूरा अधिकार है।

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एड्स उन्मूलन कैसे सम्भव है? एसीकॉन में विशेषज्ञों ने दिए सुझाव

hiv aids

How is it possible to eradicate AIDS?

जब हर एचआईवी पॉज़िटिव व्यक्ति को जीवनरक्षक दवाएँ मिलेंगी तभी एड्स उन्मूलन सम्भव है

हर एचआईवी पॉज़िटिव इंसान को सही जाँच से यह पता होना चाहिए कि वह एचआईवी पॉज़िटिव है, सबको जीवन रक्षक एंटीरेट्रोवाइरल दवाएँ (life saving antiretroviral drugs) मिलें, और सभी का वाइरल लोड नगण्य रहे, तब ही एड्स उन्मूलन सम्भव है। न सिर्फ़ सभी एचआईवी के साथ जीवित लोग पूर्ण ज़िंदगी जी सकेंगे बल्कि एचआईवी के फैलाव पर भी रोकधाम लगेगा। एक ओर जहां नए एचआईवी सम्बंधित शोध को तेज करने की ज़रूरत है जिससे कि अधिक प्रभावकारी जाँच, इलाज और बचाव साधन हम सब को मिलें, वहीं यह भी सच है कि हर एक को जाँच, एंटीरेट्रोवाइरल दवा और वाइरल लोड नियंत्रित करने की सेवा देना आज मुमकिन है – जिससे कि एड्स उन्मूलन की दिशा में तेज़ी से कदम बढ़ें।

यह कहना है डॉ ईश्वर गिलाडा का जो एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (AIDS Society of India,) के १३वें राष्ट्रीय अधिवेशन के अध्यक्ष हैं, और इंटरनेशनल एड्स सोसाइटी (International AIDS Society) के अध्यक्षीय मंडल के निर्वाचित सदस्य भी हैं।

एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया का 13वाँ राष्ट्रीय अधिवेशन (एसीकॉन) { 13th national conference of AIDS Society of India (13th ASICON), } हैदराबाद में 3-5 अप्रैल 2022 के दौरान हो रहा है। इस अधिवेशन में देश भर से अनेक सरकारी और निजी एचआईवी सम्बन्धी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़े चिकित्सकीय और जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।

चेन्नई के वॉलुंटेरी हेल्थ सर्विसेज़ के संक्रामक रोग अस्पताल के निदेशक और एसीकॉन के वैज्ञानिक सत्र के सह-अध्यक्ष डॉ एन कुमारासामी ने कहा कि एसीकॉन हर साल अनेक एचआईवी-सम्बंधित संस्थाओं की साझेदारी में एड्स सोसाइटी ऑफ इंडिया द्वारा आयोजित किया जाता रहा है, जिनमें प्रमुख हैं, भारत सरकार की राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संस्था, भारत सरकार का राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम, भारतीय चिकित्सकीय अनुसंधान परिषद, राष्ट्रीय चिकित्सकीय आयोग, विश्व स्वास्थ्य संगठन, संयुक्त राष्ट्र का एड्स नियंत्रण संयुक्त कार्यक्रम, आदि।

डॉ ईश्वर गिलाडा ने कहा कि वर्तमान में भारत में 23 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवित हैं जिनमें से 76% को परीक्षण से यह मालूम है कि वह एचआईवी संक्रमित हैं, इनमें से 84% लोगों को जीवनरक्षक एंटी-रेट्रो-वाइरल दवाएँ मिल रही हैं, और जिन लोगों को वाइरल-लोड जाँच नसीब हुई उनमें से 84% में वाइरल-लोड नगण्य है। दुनिया में पिछले दशक 2010-2019 के दौरान एचआईवी संक्रमण में सालाना गिरावट 23% की आयी पर भारत में यह 37% गिरावट आयी है। पिछले दशक में एड्स सम्बंधित मृत्यु दर में भी भारत में 66% गिरावट आयी है जबकि इसी समय अवधि में दुनिया में 39% गिरावट आयी है। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल प्रदेशों में एचआईवी-सम्बंधित मृत्यु दर में और अधिक गिरावट आयी है, ख़ासकर कि बच्चों और महिलाओं में (73.7% और 65.3%)।

अनेक सफलताओं के बावजूद यदि २०३० तक एड्स उन्मूलन के सपने को साकार करना है तो यह ज़रूरी है कि विकराल चुनौतियों को भी हम चिन्हित करें और सुनियोजित ढंग से वैज्ञानिक प्रमाण के आधार पर प्रभावकारी तरीक़े से एचआईवी कार्यक्रम की कार्यकुशलता बढ़ाएँ।

तीन प्रदेशों में २०१९ के आँकड़ों के मुताबिक़, आबादी में १% से अधिक एचआईवी संक्रमण है (मिज़ोरम 2.32%, नागालैंड 1.45%, मणिपुर 1.18%)। जो लोग नशीली दवाओं का सेवन करते हैं उनमें एचआईवी संक्रमण दर लगभग 28 गुना अधिक है। हिजरा, समलैंगिक समुदाय और महिला यौन-कर्मियों में भी एचआईवी दर 6 से 13 गुना अधिक है। केंद्रीय कारागार में भी एचआईवी संक्रमण दर लगभग 9 गुना अधिक है।

2019 में भारत में 69,000 नए लोग एचआईवी से संक्रमित हुए। ग़ौरतलब है कि २०२० तक भारत समेत सभी देशों को एचआईवी से संक्रमित हो रहे नए लोगों के दर में 75% गिरावट लानी थी पर २०१९ में नए संक्रमित हुए लोग (69,000) इस हिसाब से दुगने से अधिक रहे।

कोविड के कारणवश एचआईवी और टीबी कार्यक्रम पर भी कुप्रभाव पड़ा। जब २०२० में सरकार ने देश-व्यापी तालाबंदी की, तो एड्स सोसाइटी ऑफ इंडिया ने सरकार के साथ समन्वयन में पूरा प्रयास किया कि एचआईवी के साथ जीवित लोग, बिना नागे के जीवनरक्षक दवाएँ नियमानुसार लेते रहें और स्वस्थ रहें। सरकारी और निजी वर्ग में एचआईवी सम्बंधित स्वास्थ्य सेवाओं में समन्वयन ज़रूरी रहा है।

टीबी उन्मूलन के वादे को पूरा करने के लिए सिर्फ़ ४५ माह रह गए हैं, और एड्स उन्मूलन के वादे को पूरा करने के लिए १०५ माह रह गए हैं। एसीकॉन अधिवेशन में शोध पत्र और अन्य सत्र के ज़रिए न सिर्फ़ यह स्पष्ट होगा कि २०२५ तक टीबी उन्मूलन और २०३० तक एड्स उन्मूलन की दिशा में हम वर्तमान में कहाँ पर हैं, बल्कि यह अवसर भी रहेगा कि एचआईवी और टीबी कार्यक्रमों को कैसे अधिक कार्यकुशलता के साथ क्रियान्वित करें कि हम इन लक्ष्यों पर खरे उतरें।

एसीकॉन अधिवेशन में अमरीका, एंगलैंड, इटली, आदि जैसे अनेक देशों के एचआईवी वैज्ञानिक और चिकित्सकीय विशेषज्ञ सक्रिय भाग ले रहे हैं। एसीकॉन अधिवेशन में एचआईवी सम्बंधित अनेक मुद्दों पर विशेष ज्ञानवर्धक सत्र हैं जैसे कि, एचआईवी-टीबी सह-संक्रमण, एचआईवी और हेपटाइटिस सह-संक्रमण, एचआईवी और यौन रोग, एचआईवी वैक्सीन शोध, एचआईवी और कोविड, एचआईवी संक्रमण से बचने के लिए नए विकल्प जैसे कि प्री-इक्स्पोज़र प्रॉफ़लैक्सस (प्रेप), पोस्ट-इक्स्पोज़र प्रॉफ़लैक्सस, और एचआईवी के साथ जीवित लोगों के लिए जीवनरक्षक दवाएँ जिन्हें एंटी-रेट्रो-वाइरल दवाएँ कहते हैं उनसे सम्बंधित नवीनतम शोध, एचआईवी और बच्चे एवं महिलाएँ, आदि।

एसीकॉन अधिवेशन में २०२० तक एचआईवी सम्बंधित वादे जैसे कि ९०:९०:९० पर हम कितने खरे उतरे, २०२५ वाले लक्ष्य और २०३० तक एड्स उन्मूलन के वादे पर प्रगति एवं उसके मूल्यांकन पर भी विचार-विमर्श हुआ।

शोभा शुक्ला

(शोभा शुक्ला, स्वास्थ्य और मानवाधिकार पर लिखती रही हैं, सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस) की संस्थापिका-संपादिका हैं और पूर्व में लारेटो कॉन्वेंट कॉलेज की वरिष्ठ शिक्षिका रही हैं।

विशेष ओलंपिक भारत के मेगा हेल्थ फेस्ट का आयोजन 5 अप्रैल को

Sports News in hindi

Special Olympics Bharat’s mega health fest to be held on 5th April

आजादी का अमृत महोत्सव के तहत विशेष ओलंपिक भारत द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिविर के लिए की गई है एक सकारात्मक पहल

गाजियाबाद, 03 अप्रैल 2022 । विशेष ओलंपिक भारत के मेगा हेल्थ फेस्ट का आयोजन आगामी 5 अप्रैल को सुबह 8 बजे से सायं 5:00 बजे तक अमर ज्योति स्कूल, कड़कड़डूमा, दिल्ली में किया जाएगा, जहां कुल 800 एथलीटों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी। इस मौके पर आयोजित समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ महेंद्र नाथ पांडे एवं केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग तथा नागरिक उड्डयन राज्यमंत्री जनरल वीके सिंह होंगे। वहीं, यशोदा सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, कौशाम्बी के डायरेक्टर डॉ उपासना अरोड़ा के कुशल निर्देशन में स्वास्थ्य जांच कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

हॉस्पिटल के एमडी डॉ पी एन अरोड़ा और डायरेक्टर उपासना अरोड़ा के हवाले से यह जानकारी देते हुए हॉस्पिटल के कॉरपोरेट कम्युनिकेशन हेड गौरव पांडेय ने बताया कि यह शिविर आजादी का अमृत महोत्सव के तहत विशेष ओलंपिक भारत द्वारा की गई एक सकारात्मक पहल है, जिसके तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य शिविर का आयोजन देशव्यापी पैमाने पर किया जा रहा है।

विशेष ओलंपिक भारत, जो एक मान्यता प्राप्त संगठन है, की अध्यक्ष डॉ. मल्लिका नड्डा ने बताया कि यह राष्ट्रीय खेल संघ, युवा मामले और खेल मंत्रालय के तहत खेल के माध्यम से बौद्धिक विकलांग बच्चों और वयस्कों के खेल और अन्य जीवन कौशल के विकास के लिए काम करता है। इन एथलीटों को विकसित करने और बनाने में मदद करने के लिए विशेष ओलंपिक भारत द्वारा किये गए इस पहल के लिए आपके समर्थन की ओर देखते हुए हर्षित हो रहा है, क्योंकि इसकी सफलता से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह देश गौरवान्वित होगा।

हॉस्पिटल के संचार प्रमुख श्री पांडेय ने बताया कि सर्वश्रेष्ठ खेल अनुभव प्रदान करने के लिए, विशेष ओलंपिक स्क्रीन और छह स्वास्थ्य विषयों जैसे आंखों की देखभाल, मौखिक स्वास्थ्य, श्रवण, पैर, स्वास्थ्य और पोषण में अनुवर्ती देखभाल प्रदान करता है। आपको पता है कि मुख्य रूप से स्कूलों के बंद होने के कारण कोविड-19 के कारण स्वास्थ्य और खेल कार्यक्रम को भारी झटका लगा था। इसलिए हमारे एथलीटों को खेल के मैदान में वापस लाने के लिए यानी खेलने के लिए वापसी एक अभियान है, जिसके तहत हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि वे लंबी अनुपस्थिति के बाद भी खेलों में भाग लेने के लिए एकदम फिट हैं।

उन्होंने बताया कि विशेष ओलंपिक भारत, आजादी का अमृत महोत्सव” की पहल के तहत बौद्धिक रूप से विकलांगों की मदद के लिए एक अखिल भारतीय उच्च गुणवत्ता वाली एथलीट स्वास्थ्य जांच परियोजना “रिटर्न टू प्ले- समावेश क्रांति” का आयोजन करने जा रहा है। जिसके तहत देश भर में एक ही दिन में इस कार्यक्रम में भारत के 75 केंद्रों के आसपास 75,000 एथलीटों की स्वास्थ्य जांच 7,500 स्वास्थ्य पेशेवरों द्वारा की जाएगी।

उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में देशभर में 750 खेल केंद्र स्थापित करना भी शामिल है, जहां इन एथलीटों को भारत भर में प्रशिक्षण दिया जाएगा। उन 75 केंद्रों में, दिल्ली में हमारे पांच केंद्र हैं, अर्थात् कुलाची स्कूल- अशोक विहार, आशा किरण- रोहिणी, आंचल स्कूल- चाणक्य पुरी, अमर ज्योति- कड़कड़डूमा और अनंत केंद्र- कुतुब अंतर्ज्ञान क्षेत्र; जहां पर कुल 4500 एथलीटों की स्वास्थ्य जांच की जाएगी।

इस कार्यक्रम में गिनीज बुक के 3 विश्व रिकॉर्ड देखने को मिलेंगे। इस स्वास्थ्य कार्यक्रम के लिए रिकॉर्ड, लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स बनाए जा रहे हैं।

प्रारंभिक गर्भावस्था में पुराने उच्च रक्तचाप का इलाज करने से माता-पिता, शिशुओं को होता है लाभ : अध्ययन

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प्रारंभिक गर्भावस्था में पुराने उच्च रक्तचाप का इलाज : अध्ययन से पता चलता है कि गर्भवती वयस्कों को समय से पहले जन्म या उपचार के साथ अन्य गंभीर समस्याओं का अनुभव होने की संभावना कम होती है।

Treating chronic hypertension in early pregnancy benefits parents, babies

Study shows pregnant adults are less likely to experience preterm births or other serious problems with treatment.

नई दिल्ली, 03 अप्रैल 2022. ऐसे वयस्क जिन्हें गर्भावस्था के पहले 20 हफ्तों से पहले या उसके दौरान मौजूद उच्च रक्तचाप, (जिन्हें गर्भावस्था में पुरानी उच्च रक्तचाप- chronic hypertension in pregnancy के रूप में परिभाषित किया गया है,जिन्हें गर्भावस्था में पुरानी उच्च रक्तचाप के रूप में परिभाषित किया गया है) का दवा इलाज किया गया, में उन वयस्कों की तुलना में कम प्रतिकूल गर्भावस्था के परिणाम थे, जिन्हें राष्ट्रीय संस्थानों द्वारा समर्थित एक अध्ययन के अनुसार, एंटीहाइपरटेंसिव उपचार (antihypertensive treatment) नहीं मिला था।

एक अध्ययन, जिसमें 2400 से अधिक गर्भवती वयस्क महिलाओं ने भाग लिया, में पाया गया कि जिन लोगों को अपने रक्तचाप को 140/90 मिमी एचजी से कम करने के लिए दवा दी गई थी, उनके उनके प्रीटरम जन्म होने या प्रीक्लेम्पसिया होने की संभावना कम थी। प्रीक्लेम्पसिया अचानक उच्च रक्तचाप और अंग की शिथिलता के शुरुआती लक्षणों द्वारा चिह्नित गर्भावस्था की कई गंभीर जटिलताओं में से एक स्थिति होती है। उच्च रक्तचाप के उपचार ने भ्रूण के विकास को प्रभावित नहीं किया।

बर्मिंघम मार्निक्स ई. हीर्सिंक स्कूल ऑफ मेडिसिन में अलबामा विश्वविद्यालय में प्रसूति और स्त्री रोग के संपन्न प्रोफेसर (Endowed Professor of Obstetrics and Gynecology) और अध्ययन की एक प्रमुख अन्वेषक एलन टीएन टीटा, एमडी, पीएचडी ने कहा कि “गर्भावस्था के दौरान पुराने उच्च रक्तचाप के इलाज का प्रभाव प्रतिकूल गर्भावस्था परिणामों के लिए उच्च जोखिम वाले लोगों की सहायता करने के लिए एक प्रमुख कदम का प्रतिनिधित्व करता है।”

अध्ययन “Treatment for Mild Chronic Hypertension during Pregnancyक्रोनिक हाइपरटेंशन एंड प्रेग्नेंसी (Chronic Hypertension and Pregnancy – CHAP) ट्रायल (NCT 02299414) के निष्कर्ष, जो वर्तमान में गर्भावस्था में क्रोनिक हाइपरटेंशन का अध्ययन करने के लिए सबसे बड़ा परीक्षण है, को 2 अप्रैल को अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी 71वां वार्षिक वैज्ञानिक सत्र और एक्सपो में प्रस्तुत किया गया और न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (New England Journal of Medicine) में एक साथ प्रकाशित किया गया था।

अध्ययन को राष्ट्रीय हृदय, फेफड़े और रक्त संस्थान (National Heart, Lung, and Blood Institute-NHLBI) द्वारा वित्त पोषित किया जाता है, जो NIH का हिस्सा है।

उच्च रक्तचाप, जिसे हाइपरटेंशन के रूप में भी जाना जाता है, एक सामान्य बीमारी है जो तब विकसित होती है जब रक्त आपकी धमनियों से सामान्य से अधिक दबाव में बहता है। आपका रक्तचाप दो संख्याओं से बना होता है: सिस्टोलिक और डायस्टोलिक। सिस्टोलिक दबाव वह दबाव है जब निलय हृदय से रक्त पंप करते हैं। डायस्टोलिक दबाव दिल की धड़कन के बीच का दबाव है जब हृदय रक्त से भर रहा होता है।

एनएचएलबीआई में कार्डियोवास्कुलर साइंसेज के डिवीजन में एक कार्यक्रम अधिकारी डायने रीड, एमडी (Diane Reid, M.D.) ने कहा कि प्रारंभिक एंटीहाइपरटेन्सिव उपचार उन हजारों अमेरिकी वयस्कों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जो प्रीक्लेम्पसिया या प्रीटरम जन्म के जोखिम में हैं। गर्भावस्था में क्रोनिक हाइपरटेंशन 2% से अधिक लोगों में होता है और गंभीर जटिलताओं के जोखिम को तीन गुना से अधिक कर सकता है।

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम : जानिए ईकेजी टेस्ट या ईसीजी टेस्ट क्या है, कब, क्यों, कैसे होता है

heart disease

Electrocardiogram Information in Hindi

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईकेजी) परीक्षण क्या है? What is an electrocardiogram (EKG) test?

इस समाचार में सरल हिंदी में जानिए कि एक इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम टेस्ट क्या है? (What is an electrocardiogram test in Hindi?) ईकेजी टेस्ट या ईसीजी टेस्ट का उपयोग किस लिए किया जाता है? आपको ईकेजी टेस्ट या ईसीजी टेस्ट की आवश्यकता क्यों और कब होती है? जब आप ईकेजी टेस्ट या ईसीजी टेस्ट कराते हैं तब क्या होता है? क्या आपको ईकेजी टेस्ट या ईसीजी टेस्ट की तैयारी के लिए कुछ तैयारी करने की आवश्यकता होती है? क्या ईकेजी टेस्ट या ईसीजी टेस्ट के कोई जोखिम हैं? इस समाचार की जानकारी का उपयोग पेशेवर चिकित्सा देखभाल या सलाह के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता है। यदि आप अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता/ योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मेडलाइनप्लस पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एक इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईकेजी) परीक्षण एक सरल, दर्द रहित प्रक्रिया (a simple, painless procedure ) है जो आपके दिल में विद्युत संकेतों (electrical signals in your heart) को मापती है। हर बार जब आपका दिल धड़कता है, तो एक विद्युत संकेत हृदय से होकर गुजरता है। एक ईकेजी दिखा सकता है कि आपका दिल सामान्य दर और ताकत से धड़क रहा है या नहीं। यह आपके दिल के चैम्बर्स के आकार और स्थिति को दिखाने में भी मदद करता है। एक असामान्य ईकेजी हृदय रोग या क्षति का संकेत हो सकता है।

दूसरे नाम : ईसीजी टेस्ट

एक इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईकेजी) टेस्ट किस लिए प्रयोग किया जाता है? What is An electrocardiogram (EKG) test used for?

विभिन्न हृदय विकारों का पता लगाने और/या उन पर नज़र रखने (monitor various heart disorders) के लिए ईकेजी परीक्षण का उपयोग किया जाता है। इसमें शामिल है :

दिल का दौरा होने का संदेह होने पर अक्सर ईकेजी का उपयोग एम्बुलेंस, आपातकालीन कक्ष या अन्य अस्पताल के कमरे में किया जाता है।

एक ईकेजी परीक्षण को कभी-कभी मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध वयस्कों के लिए नियमित परीक्षा में शामिल किया जाता है, क्योंकि उन्हें युवा लोगों की तुलना में हृदय रोग का अधिक जोखिम होता है।

आपको ईकेजी परीक्षण कराने की आवश्यकता क्यों होती है? Why do you need an EKG test?

यदि आपको हृदय विकार के लक्षण (symptoms of a heart disorder) हैं तो आपको ईकेजी परीक्षण की आवश्यकता हो सकती है। इसमें शामिल है :

  • छाती में दर्द -Chest pain
    • तेज धड़कन -Rapid heartbeat
    • अतालता (ऐसा महसूस हो सकता है कि आपके दिल की धड़कन रुक गई है या फड़फड़ा रहा है) {Arrhythmia (it may feel like your heart has skipped a beat or is fluttering)}
    • सांस लेने में कठिनाई (Shortness of breath)
    • चक्कर आना (Dizziness)
    • थकान (Fatigue)

आपको ईसीजी टेस्ट की आवश्यकता उस समय भी हो सकती है यदि आपको :

  • अतीत में दिल का दौरा या दिल की अन्य समस्याएं हो चुकी हैं;
  • हृदय रोग का पारिवारिक इतिहास रहा हो;
  • सर्जरी के लिए निर्धारित हैं। आपका स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता प्रक्रिया से पहले आपके हृदय स्वास्थ्य की जांच कर सकता है।
  • पेसमेकर (pacemaker) लगा है। ईकेजी दिखा सकता है कि पेसमेकर डिवाइस कितनी अच्छी तरह काम कर रहा है।
  • हृदय रोग की दवा ले रहे हैं। ईकेजी दिखा सकता है कि क्या आपकी दवा प्रभावी है, या यदि आपको अपने उपचार में बदलाव करने की आवश्यकता है।
ईकेजी टेस्ट के दौरान क्या होता है? What happens during an EKG test?

एक ईकेजी परीक्षण प्रदाता के कार्यालय (डक्टर का चैम्बर), आउट पेशेंट क्लिनिक या अस्पताल में किया जा सकता है। प्रक्रिया के दौरान :

  • आपको एक परीक्षण टेबल पर लिटाया जाएगा
  • एक स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता (health care provider) आपकी बाहों, पैरों और छाती पर कई इलेक्ट्रोड (त्वचा से चिपके छोटे सेंसर) {electrodes (small sensors that stick to the skin)} रखेगा। प्रदाता को इलेक्ट्रोड लगाने से पहले अतिरिक्त बालों को शेव या ट्रिम करना पड़ सकता है।
  • इलेक्ट्रोड तारों द्वारा एक कंप्यूटर से जुड़े होते हैं जो आपके दिल की विद्युत गतिविधि को रिकॉर्ड करता है।
  • पूरी गतिविधि को कंप्यूटर के मॉनीटर पर प्रदर्शित किया जाएगा और/या कागज पर प्रिंट किया जाएगा।
  • ईसीजी प्रक्रिया में केवल तीन मिनट लगते हैं।

क्या आपको ईकेजी टेस्ट की तैयारी के लिए कुछ करने की आवश्यकता होगी?

ईकेजी परीक्षण के लिए आपको किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं है।

क्या ईकेजी परीक्षण के कोई जोखिम होते हैं? Are there any risks to the EKG test?

ईकेजी होने का बहुत कम जोखिम होता है। इलेक्ट्रोड हटा दिए जाने के बाद आपको थोड़ी असुविधा या त्वचा में जलन महसूस हो सकती है। बिजली के झटके का कोई खतरा नहीं है। ईकेजी आपके शरीर को बिजली नहीं भेजता है। यह केवल बिजली रिकॉर्ड करता है।

ईकेजी परिणामों का क्या अर्थ है? What do the EKG results mean? ईसीजी रिपोर्ट को कैसे समझें?

आपका स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता लगातार दिल की धड़कन और लय के लिए आपके ईकेजी परिणामों की जांच करेगा। यदि आपके परिणाम सामान्य नहीं थे, तो इसका मतलब यह हो सकता है कि आपको निम्न में से कोई एक विकार है :

  • अतालता
    • दिल की धड़कन (heartbeat) जो बहुत तेज या बहुत धीमी हो
    • दिल को अपर्याप्त रक्त की आपूर्ति (Inadequate blood supply to the heart)
    • दिल की दीवारों में एक उभार (A bulge in the heart’s walls)। इस उभार को एन्यूरिज्म (aneurysm) के रूप में जाना जाता है।
    • दिल की दीवारों का मोटा होना (Thickening of the heart’s walls)
    • दिल का दौरा (A heart attack परिणाम दिखा सकते हैं कि क्या आपको अतीत में दिल का दौरा पड़ा है या यदि आपको ईकेजी के दौरान दौरा पड़ रहा है।)

यदि आपके ईकेजी परिणामों के बारे में आपके कोई प्रश्न हैं, तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता/ योग्य चिकित्सक से बात करें।

ईकेजी बनाम ईसीजी? EKG vs ECG? ईकेजी और ईसीजी में क्या अंतर है?

एक इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम को ईकेजी या ईसीजी कहा जा सकता है। दोनों सही हैं और आमतौर पर इस्तेमाल किए जाते हैं। ईकेजी जर्मन वर्तनी, इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम पर आधारित है। ईईजी (EEG एक परीक्षण जो मस्तिष्क तरंगों को मापता है) के साथ भ्रम से बचने के लिए ईसीजी पर ईकेजी को प्राथमिकता दी जा सकती है।

( नोट – यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। यह समाचारों में उपलब्ध सामग्री के अध्ययन के आधार पर जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई अव्यावसायिक रिपोर्ट मात्र है। आप इस समाचार के आधार पर कोई निर्णय कतई नहीं ले सकते। स्वयं डॉक्टर न बनें किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें।) 

जानकारी का स्रोत – medlineplus

जानिए एएनए (एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी) परीक्षण क्या है?

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What is an ANA (antinuclear antibody) test? ANA Test – Diagnosing Systemic Rheumatic Disease (in Hindi)

इस समाचार में सरल हिंदी में जानिए कि एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट क्या है? या ANA टेस्ट क्या होता है ?  ANA टेस्ट क्यों करवाते हैं? एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी टेस्ट पॉजिटिव का मतलब हिंदी में क्या है (antinuclear antibody test positive means in Hindi) ? एनए टेस्ट पॉजिटिव लक्षण क्या हैं (ana test positive symptoms in Hindi)? एंटीबॉडी क्या होते हैं? एएनए परीक्षण क्यों कराया जाता है? एएनए टेस्ट की जरूरत कब होती है? एएनए टेस्ट के दौरान क्या होता है और क्या तैयारी करनी होती है? एएनए टेस्ट के पॉजिटिव आने का मतलब क्या होता है? इस समाचार की जानकारी का उपयोग पेशेवर चिकित्सा देखभाल या सलाह के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता है। यदि आप अपने स्वास्थ्य के बारे में कोई प्रश्न पूछना चाहते हैं तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता/ योग्य चिकित्सक से संपर्क करें।

नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के मेडलाइनप्लस पर उपलब्ध जानकारी के मुताबिक एएनए (एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी) परीक्षण आपके रक्त में एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी की तलाश करता है। यदि एएनए टेस्ट में आपके रक्त में एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी का पता लगता है, तो इसका अर्थ यह हो सकता है कि आपको कोई ऑटोइम्यून विकार (autoimmune disorder ) है। ऑटोइम्यून डिसऑर्डर के कारण आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से आपकी अपनी कोशिकाओं, ऊतकों और/या अंगों पर हमला कर देती है। ये विकार गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकते हैं।

एंटीबॉडी क्या हैं? What are Antibodies in Hindi?

एंटीबॉडी एक प्रोटीन होते हैं जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली (immune system) को वायरस और बैक्टीरिया जैसे बाह्य पदार्थों से लड़ने के लिए बनाती है। लेकिन एक एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी इसके बजाय आपकी अपनी स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करती है। इसे “एंटीन्यूक्लियर” कहा जाता है क्योंकि यह कोशिकाओं के केंद्रक (केंद्र) को लक्षित करता है।

दूसरे नाम: एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी पैनल, फ्लोरोसेंट एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी, FANA, ANA

एएनए परीक्षण किसलिए प्रयोग किया जाता है? What is ANA test used for?

ऑटोइम्यून विकारों के निदान में मदद के लिए एक एएनए परीक्षण का उपयोग किया जाता है, जिसमें शामिल हैं:

  • सिस्टमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस (एसएलई) {Systemic lupus erythematosus (SLE)} : यह ल्यूपस का सबसे आम प्रकार है, जो जोड़ों, रक्त वाहिकाओं, गुर्दे और मस्तिष्क सहित शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करने वाली एक पुरानी बीमारी है।
  • रुमेटीइड गठिया (Rheumatoid arthritis) : रुमेटीइड अर्थराइटिस एक ऐसी स्थिति जो जोड़ों में दर्द और सूजन का कारण बनती है, ज्यादातर हाथों और पैरों में।
  • स्क्लेरोडर्मा (Scleroderma) : स्क्लेरोडर्मा त्वचा, जोड़ों और रक्त वाहिकाओं को प्रभावित करने वाली एक दुर्लभ बीमारी है।
  • स्जोग्रेन सिंड्रोम (Sjogren’s syndrome) : स्जोग्रेन सिंड्रोम शरीर की नमी बनाने वाली ग्रंथियों को प्रभावित करने वाली एक दुर्लभ बीमारी।

आपको एएनए टेस्ट की आवश्यकता क्यों है? Why do you need an ANA test?

यदि आपके पास ल्यूपस या किसी अन्य ऑटोइम्यून विकार के लक्षण हैं, तो आपका स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता एएनए परीक्षण का आदेश दे सकता है। इन लक्षणों में शामिल हैं :

  • बुखार (Fever)
  • लाल, तितली के आकार के दाने (ल्यूपस का एक लक्षण) {Red, butterfly-shaped rash (a symptom of lupus)}
  • थकान (Fatigue)
  • जोड़ों का दर्द और सूजन (Joint pain and swelling)
  • मांसपेशियों में दर्द (Muscle pain)

ANA परीक्षण के दौरान क्या होता है? What happens during an ANA test?

एक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर एक छोटी सुई का उपयोग करके आपकी बांह की नस से रक्त का नमूना लेगा। सुई डालने के बाद, टेस्ट ट्यूब या शीशी में थोड़ी मात्रा में रक्त एकत्र किया जाएगा। सुई अंदर या बाहर जाने पर आपको थोड़ी सी चुभन हो सकती है। इसमें आमतौर पर पांच मिनट से भी कम समय लगता है।

क्या आपको ANA परीक्षण की तैयारी के लिए कुछ करने की आवश्यकता होती है?

एएनए परीक्षण के लिए आपको किसी विशेष तैयारी की आवश्यकता नहीं है।

क्या एएनए परीक्षण के कोई जोखिम हैं? Are there any risks to the ANA test?

रक्त परीक्षण होने का जोखिम बहुत कम होता है। जहां सुई लगाई गई थी, वहां आपको हल्का दर्द या चोट लग सकती है, लेकिन ज्यादातर लक्षण जल्दी दूर हो जाते हैं।

एएनए टेस्ट के परिणामों का क्या अर्थ है? What do the ANA test results mean?

एएनए टेस्ट के पॉजिटिव आने के अर्थ है कि आपके खून में एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी पाए गए थे। एएनए टेस्ट के पॉजिटिव आने का संकेत हो सकता है कि –

  • आपको एसएलई (ल्यूपस) है।
  • आपको एक अलग प्रकार की ऑटोइम्यून बीमारी है।
  • आपको वायरल संक्रमण है।

एएनए टेस्ट के पॉजिटिव आने का मतलब यह नहीं है कि आपको कोई बीमारी है। कुछ स्वस्थ लोगों के रक्त में एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी होते हैं। इसके अलावा, कुछ दवाएं आपके परिणामों को प्रभावित कर सकती हैं। उम्र के साथ एंटीन्यूक्लियर एंटीबॉडी का स्तर बढ़ता जाता है। 65 वर्ष से अधिक आयु के एक तिहाई स्वस्थ वयस्कों का ANA परीक्षण परिणाम पॉजिटिव हो सकता है।

यदि आपके एएनए परीक्षण के परिणाम सकारात्मक हैं, तो आपका स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता अधिक टेस्ट्स का आदेश देगा, खासकर यदि आपको बीमारी के लक्षण हैं। यदि टेस्ट रिजल्ट के बारे में आपके कोई प्रश्न हैं, तो अपने स्वास्थ्य देखभाल प्रदाता या योग्य चिकित्सक से बात करें।

( नोट – यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। यह समाचारों में उपलब्ध सामग्री के अध्ययन के आधार पर जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई अव्यावसायिक रिपोर्ट मात्र है। आप इस समाचार के आधार पर कोई निर्णय कतई नहीं ले सकते। स्वयं डॉक्टर न बनें किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें।) 

हार्ट फेल्योर से बचना चाहते हैं तो खूब पिएं तरल पदार्थ : शोध

illustration blood cells bacteria

अच्छा जलयोजन (हाइड्रेशन-hydration) हृदय की गति रुकने के दीर्घकालिक जोखिम को कम कर सकता है (Good hydration may reduce long-term risks for heart failure)

सीरम सोडियम का स्तर हृदय रोग का अनुभव करने वाले वयस्कों की पहचान करने में मदद कर सकता है (Serum sodium levels may help identify adults with a greater chance of experiencing heart disease.)

नई दिल्ली, 30 मार्च 2022. नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के शोधकर्ताओं के मुताबिक, अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहने से हृदय की गति रुकने के विकास के जोखिम में कमी आ सकती है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के शोधकर्ताओं के मुताबिक, अच्छी तरह से हाइड्रेटेड रहने से दिल की विफलता के विकास के जोखिम में कमी आ सकती है। यूरोपियन हार्ट जर्नल (European Heart Journal) में प्रकाशित उनके शोध – “Middle age serum sodium levels in the upper part of normal range and risk of heart failure” निष्कर्ष बताते हैं कि जीवन भर पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन न केवल शरीर के आवश्यक कामकाज का समर्थन करता है, बल्कि भविष्य में हृदय की गंभीर समस्याओं के जोखिम को भी कम कर सकता है।

हार्ट फेल्योर क्या है? What is Heart failure? दिल की विफलता क्या है?

दिल की विफलता, एक पुरानी स्थिति जो तब विकसित होती है जब हृदय शरीर की जरूरतों के लिए पर्याप्त रक्त पंप नहीं करता है। यह 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के वयस्कों में भी अधिक आम है।

प्रमुख अध्ययन लेखक और एनआईएच से संबद्ध राष्ट्रीय हृदय, फेफड़े और रक्त संस्थान (National Heart, Lung, and Blood Institute -NHLBI), में कार्डियोवास्कुलर रीजनरेटिव मेडिसिन की प्रयोगशाला में एक शोधकर्ता नतालिया दिमित्रीवा, पीएचडी ने कहा, “नमक का सेवन कम करने के समान, पर्याप्त पानी पीना और हाइड्रेटेड रहना हमारे दिल को सहारा देने के तरीके हैं और हृदय रोग के लिए दीर्घकालिक जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।”

प्रीक्लिनिकल शोध, जो निर्जलीकरण और कार्डियक फाइब्रोसिस के बीच संबंध (connections between dehydration and cardiac fibrosis) का सुझाव देता है, करने के बाद, दिमित्रीवा और शोधकर्ताओं ने बड़े पैमाने पर जनसंख्या अध्ययनों में समान एसोसिएशंस की तलाश की।

शोध शुरू करने के लिए, उन्होंने 45-66 आयु वर्ग के 15,000 से अधिक वयस्कों के डेटा का विश्लेषण किया, जिन्होंने 1987-89 के बीच एथेरोस्क्लेरोसिस रिस्क इन कम्युनिटीज (Atherosclerosis Risk in Communities -एआरआईसी) अध्ययन में खुद को नामांकित किया था और 25 साल की अवधि में चिकित्सा यात्राओं की जानकारी साझा की।

पूर्वव्यापी समीक्षा के लिए प्रतिभागियों का चयन करने में, वैज्ञानिकों ने उन लोगों पर ध्यान केंद्रित किया जिनके जलयोजन स्तर (hydration levels ) सामान्य सीमा के भीतर थे और जिन्हें अध्ययन की शुरुआत में मधुमेह (diabetes), मोटापा (obesity) या दिल की विफलता (heart failure) नहीं थी। लगभग 11,814 वयस्कों को अंतिम विश्लेषण में शामिल किया गया था, और शोधकर्ताओं ने पाया कि उनमें से 1,366 (11.56%) में बाद में हार्ट फेल्योर विकसित हुआ।

हाइड्रेशन के साथ संभावित संबंधों का आकलन करने के लिए, टीम ने कई नैदानिक ​​उपायों का उपयोग करके प्रतिभागियों की जलयोजन स्थिति का आकलन किया।

सीरम सोडियम के स्तर (levels of serum sodium) को देखते हुए, जो शरीर के द्रव के स्तर में कमी के रूप में बढ़ता है, विशेष रूप से हृदय की विफलता के विकास के जोखिम (increased risk for developing heart failure) वाले प्रतिभागियों की पहचान करने में मदद करने में उपयोगी था।

इसने वृद्ध वयस्कों को दिल की विफलता और बाएं वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी ( left ventricular hypertrophy), दोनों के डेवलप होने के जोखिम में वृद्धि करने में मदद की। बाएं वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी या बाएं निलय अतिवृद्धि हृदय के मुख्य पंपिंग कक्ष की दीवार का मोटा होने की स्थिति होती है। इस गाढ़ेपन के परिणामस्वरूप हृदय के भीतर दबाव बढ़ सकता है और कभी-कभी खराब पंपिंग क्रिया हो सकती है। इसका सबसे आम कारण उच्च रक्तचाप है।

उदाहरण के लिए, सीरम सोडियम के स्तर वाले वयस्क जिनका स्तर 143 मिलीइक्विवेलेंट प्रति लीटर (mEq/L) से शुरू होता है – (एक सामान्य सीमा 135-146 mEq/L है), में मध्य जीवन में निम्न स्तर वाले वयस्कों की तुलना में हार्ट फेल्योर के विकसित होने का जोखिम 39% था। और 135-146 mEq/L की सामान्य सीमा के भीतर सीरम सोडियम में प्रत्येक 1 mEq/L वृद्धि के लिए, एक प्रतिभागी के दिल की विफलता विकसित होने की आशंका 5% बढ़ जाती है।

70-90 आयु वर्ग के लगभग 5,000 वयस्कों के एक समूह में, मध्यम आयु में 142.5-143 mEq/L के सीरम सोडियम स्तर वाले लोगों में बाएं निलय अतिवृद्धि विकसित होने की आशंका 62% अधिक थी।

143 mEq/L से शुरू होने वाले सीरम सोडियम का स्तर बाएं वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी के लिए 102% बढ़े हुए जोखिम और हार्टफेल्योर के लिए 54% बढ़े हुए जोखिम के साथ सहसंबद्ध है।

इन आंकड़ों के आधार पर, लेखकों ने निष्कर्ष निकाला है कि मध्यम आयु में 142 एमईक्यू / एल से ऊपर सीरम सोडियम स्तर बाएं वेंट्रिकुलर हाइपरट्रॉफी और बाद में जीवन में हार्ट फेल्योर विकसित होने के जोखिम में वृद्धि से जुड़ा हुआ है।

शोधकर्ताओं ने कहा कि इन प्रारंभिक निष्कर्षों की पुष्टि के लिए एक यादृच्छिक, नियंत्रित परीक्षण (A randomized, controlled trial) आवश्यक होगा। हालांकि, इन शुरुआती परिणामों का सुझाव है कि अच्छा जलयोजन हृदय के भीतर परिवर्तनों की प्रगति को रोकने या धीमा करने में मदद कर सकता है जिससे हार्ट फेल्योर हो सकता है।

मैनफ्रेड बोहेम, एमडी, जो कार्डियोवैस्कुलर रीजनरेटिव मेडिसिन की प्रयोगशाला का नेतृत्व करते हैं (Manfred Boehm, M.D., who leads the Laboratory of Cardiovascular Regenerative Medicine), ने कहा, “सीरम सोडियम और तरल पदार्थ के सेवन का आसानी से नैदानिक ​​परीक्षाओं में मूल्यांकन किया जा सकता है और डॉक्टरों को उन रोगियों की पहचान करने में मदद करता है जो हाइड्रेटेड रहने के तरीकों के बारे में सीखने से लाभान्वित हो सकते हैं।”

तरल पदार्थ क्यों जरूरी हैं? Why are Fluids essential?

कई शारीरिक कार्यों के लिए तरल पदार्थ आवश्यक हैं, जिसमें हृदय को रक्त को कुशलतापूर्वक पंप करने में मदद करना, रक्त वाहिका के कार्य का समर्थन करना और परिसंचरण को व्यवस्थित करना शामिल है। शोधकर्ताओं ने कहा फिर भी बहुत से लोग जरूरत से बहुत कम तरल पदार्थ लेते हैं, जबकि तरल दिशानिर्देश शरीर की जरूरतों के आधार पर भिन्न होते हैं, शोधकर्ताओं ने महिलाओं के लिए 6-8 कप (1.5-2.1 लीटर) और पुरुषों के लिए 8-12 कप (2-3 लीटर) के दैनिक तरल पदार्थ का सेवन करने की सिफारिश की। रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र (The Centers for Disease Control and Prevention) भी स्वस्थ जलयोजन का समर्थन करने के लिए सुझाव प्रदान करता है।

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