एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 17 अगस्त 2022 की खास खबर

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ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस | Top headlines of India today. Today’s big news 17 August 2022

दिन भर की खबर | आज की खबर | भारत समाचार |शीर्ष समाचार| हस्तक्षेप समाचार

भाजपा में बड़ा बदलाव : नितिन गडकरी और शिवराज सिंह चौहान के आए अच्छे दिन! संसदीय बोर्ड से हटाए गए

केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड में बड़ा बदलाव किया गया है। भाजपा के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं वर्तमान में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को पार्टी के फैसले लेने वाली सर्वोच्च इकाई भाजपा संसदीय बोर्ड से बाहर कर दिया गया है। दोनों नेताओं को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति में भी शामिल नहीं किया है। केंद्र और बिहार सरकार में मंत्री रहे शाहनवाज हुसैन को पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति से बाहर कर दिया गया है।

राजस्थान में दलित छात्र की मौत : प्रशासन ने अनुसूचित जाति आयोग को सौंपी रिपोर्ट

राजस्थान के जालोर जिले के सुराणा में कथित तौर पर मटकी से पानी पीने के विवाद को लेकर हुई एक दलित छात्र की पिटाई के बाद मौत के मामले में जालोर प्रशासन ने अपनी रिपोर्ट राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग को सौंप दी है। मीडिया रिपोर्स के अनुसार रिपोर्ट में बताया गया है कि आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है, वहीं पीड़ित परिवार की काउंसलिंग करवाई जा रही है।

भारत में कोविड-19 की संक्रमण की दर में गिरावट, 9,062 नए मामले दर्ज

देश में पिछले 24 घंटों में कोविड-19 के 9,062 नए मामले दर्ज किए गए हैं, जो पिछले दिन दर्ज 15,040 मामलों की तुलना में महत्वपूर्ण गिरावट है।

पीएम का महिलाओं का सम्मान करने का आह्वान मात्र शब्द‘ : चिदंबरम

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम ने गुजरात में बिलकिस बानो के दोषियों का ‘स्वागत’ किए जाने वाले एक वीडियो पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लोगों से महिलाओं का सम्मान करने का आह्वान ‘मात्र शब्द’ है, जबकि गुजरात सरकार का फैसला ‘कार्रवाई’ है, सामूहिक दुष्कर्म के दोषियों को शेष सजा में छूट देती है।

गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस से फिर चाही आजादी!

जी-23 के सदस्य गुलाम नबी आजाद ने कांग्रेस के जम्मू-कश्मीर अभियान समिति का प्रमुख पद छोड़ दिया और पार्टी नेतृत्व को इस फैसले से अवगत कराया है।

भोपाल में राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव 22 अगस्त से

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में आगामी 22 अगस्त से पांच दिवसीय 12वें राष्ट्रीय विज्ञान फिल्म महोत्सव होने जा रहा है। इसकी तैयारियां जोरों पर हैं।

महाराष्ट्र में रेल हादसा : पैसेंजर ट्रेन और मालगाड़ी के बीच हुई टक्कर में 50 से अधिक यात्री घायल

प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र के गोंदिया में मंगलवार देर रात 2:30 बजे पैसेंजर ट्रेन और मालगाड़ी के बीच आपस में टक्कर हो गई, जिसमें करीब 50 यात्री घायल हो गए हैं।

ट्विन टावर के रिहर्सल और ब्लास्ट के दिन 6 घंटे तक बंद रहेगा नोएडा एक्सप्रेस-वे

नोएडा में ट्विन टावर को गिराने की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा रहा है। 25 अगस्त को फुल रिहर्सल होगी और 28 को अंतिम ब्लास्ट किया जाएगा। इन दोनों दिन 6 घंटे तक नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे बंद रहेगा। ब्लास्ट के तय समय से 3 घंटे पहले और 3 घंटे बाद तक एक्सप्रेस-वे के करीब 15 किलोमीटर लंबे दायरे में वाहनों के आवागमन पर पूरी तरह रोक लगा दी जाएगी।

अब खबरें खेल की

रवि दहिया की विश्व चैंपियनशिप की तैयारी के लिए खर्च वित्त मंत्रालय उठाएगा

प्राप्त जानकारी के अनुसार खेल मंत्रालय अगले महीने सर्बिया के बेलग्रेड में होने वाली विश्व कुश्ती चैंपियनशिप से पहले रूस के व्लादिकाव्काज में ओलंपिक 57 किग्रा वर्ग के रजत पदक विजेता रवि दहिया की यात्रा और प्रशिक्षण का खर्च उठाएगा।

सर्वोच्च न्यायालय में केंद्र ने कहा- एआईएफएफ का निलंबन हटाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही सरकार

केंद्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय को बताया है कि वह फीफा के अधिकारियों के साथ बातचीत कर रही है और जल्द ही समाधान हो सकता है, क्योंकि सरकार फीफा द्वारा लगाए गए अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) के निलंबन को हटाने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

खबरें दुनिया भर की

वैश्विक स्तर पर मंकीपॉक्स की देखभाल में दिशानिर्देशों की कमी डाल रही बाधा : शोध

शोधकर्ताओं की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम के नेतृत्व में एक समीक्षा के अनुसार, मंकीपॉक्स पर उच्च गुणवत्ता, अप टू डेट क्लिनिकल मार्गदर्शन की कमी दुनिया भर में मंकीपॉक्स के संक्रमण के प्रभावी और सुरक्षित उपचार में बाधा उत्पन्न कर रही है।

एप्पल ने अनुबंधित नियोक्ताओं की बड़ी छंटनी की

मीडिया रिपोर्ट्स में जानकारी दी गई है कि टेक दिग्गज एप्पल ने पिछले हफ्ते लगभग 100 कॉन्ट्रैक्ट-आधारित रिक्रूटर्स को हायरिंग और खर्च को धीमा करने के प्रयास में निकाल दिया है।

दुनिया के सबसे बड़े शहरों की वायु गुणवत्ता सबसे खराब : रिपोर्ट

अमेरिका स्थित शोध संगठन हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट (एचईआई) ने एक नई रिपोर्ट में कहा है कि दुनिया के कई शहर सबसे खराब वायु गुणवत्ता का सामना कर रहे हैं।

अमेरिका में लगभग 14 मिलियन बच्चे कोविड-19 से संक्रमित

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स और चिल्ड्रन हॉस्पिटल एसोसिएशन की नवीनतम रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में लगभग 14 मिलियन बच्चे कोविड-19 से संक्रमित हैं।

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भारत के लिए पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए हरित वित्त चौगुना होना चाहिए: अध्ययन

Renewable energy

पेरिस समझौते के लक्ष्यों को पूरा करने के लिए फिलहाल हरित वित्त प्रवाह जरूरत का सिर्फ एक चौथाई

Green finance must quadruple for India to meet its Paris Agreement goals: CPI Study

नई दिल्ली, 12 अगस्त 2022. भारत में हरित निवेश प्रवाह (Green Investment Flow in India) को ट्रैक करने के अपने तरह के एक पहले प्रयास को प्रस्तुत करती एक ताज़ा रिपोर्ट की मानें तो फिलहाल देश में इस निवेश के प्रवाह की दशा और दिशा चिंताजनक है।

दरअसल क्लाइमेट पॉलिसी इनिशिएटिव (सीपीआई इंडिया/ Climate Policy Initiative, India) की इस नई रिपोर्ट में इस दिशा में एक अपडेट जारी किया है जो बताता है कि देश के महत्वाकांक्षी जलवायु लक्ष्यों की के सापेक्ष मौजूदा वित्त प्रवाह वर्तमान आवश्यकता के हिसाब से बहुत कम हो रहा है।

‘लैंडस्केप ऑफ ग्रीन फाइनेंस इन इंडिया’ शीर्षक की इस रिपोर्ट में 2019-2020 में हरित वित्त को ट्रैक किया गया। इसमें पाया गया कि हरित वित्त INR 309 हजार करोड़ (~ USD 44 बिलियन) प्रति वर्ष था, जो भारत की जरूरतों के एक चौथाई से भी कम है।

रिपोर्ट का अनुमान है कि भारत को पेरिस समझौते के तहत अपने राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) हासिल करने के लिए, देश को 2015 से 2030 तक लगभग 162.5 लाख करोड़ रुपये (यूएसडी 2.5 ट्रिलियन) या लगभग 11 लाख करोड़ रुपये (170 बिलियन अमरीकी डालर) की हर साल आवश्यकता है।

इस वित्त प्रवाह के मूल्यांकन के लिए स्वच्छ ऊर्जा, स्वच्छ परिवहन और ऊर्जा दक्षता जैसे प्रमुख वास्तविक अर्थव्यवस्था क्षेत्रों को देखा गया।

यह अध्ययन पूंजी के सार्वजनिक और निजी, दोनों स्रोतों, को ट्रैक करता है साथ ही घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय स्रोतों  को भी देखता है। इसमें अध्ययन में वास्तविक प्रवाह पर गौर किया गया है और वित्त प्रवाह के वादों को तरजीह नहीं दी गयी है। इसमें बॉटम अप दृष्टिकोण या नीचे से ऊपर बढ्ने के दृष्टिकोण पर के लिए एक रूपरेखा का निर्माण किया गया है। इतना ही नहीं, इसमें प्रतिबद्धताओं के बजाय, भारत का जलवायु वित्त कहां खड़ा है, वित्त कि कमी किन क्षेत्रों में दिख रही है, जैसे मुद्दों पर गौर किया गया है और आगे आने वाले अवसरों का सबसे सटीक विश्लेषण किया गया है। इस वर्ष, रिपोर्ट चुनिंदा क्षेत्रों के लिए अनुकूलन वित्तपोषण का अपनी तरह का पहला मूल्यांकन भी प्रदान करती है।

रिपोर्ट की प्रमुख लेखक और क्लाइमेट पॉलिसी इनिशिएटिव में प्रोजेक्ट मैनेजर, नेहा खन्ना (Neha Khanna, Project Manager and Lead Author, Climate Policy Initiative) कहती हैं, “रिपोर्ट से पता चलता है कि रिन्यूबल एनेर्जी क्षेत्रों में वित्त प्रवाह में वृद्धि हुई है। यह दर्शाता है कि रिन्यूबल क्षेत्र पर नीतिगत समर्थन की सकारात्मक भूमिका रही है। हम भविष्य में अन्य उप-क्षेत्रों जैसे वितरित अक्षय ऊर्जा – रूफटॉप सोलर और क्लीन मोबिलिटी में भी इसी तरह की भूमिका निभाने की उम्मीद करेंगे”

साल 2021 में, भारत ने जलवायु कार्रवाई पर बढ़ी हुई महत्वाकांक्षाओं को सामने रखा और पंचामृत लक्ष्यों की घोषणा की, जिसमें गैर-जीवाश्म ईंधन-आधारित ऊर्जा क्षमता के 500 GW को जोड़ना और गैर-नवीकरणीय स्रोतों के माध्यम से अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का 50% पूरा करना शामिल है। इस तरह की बढ़ी हुई महत्वाकांक्षा के लिए बहुत तेज गति से हरित वित्त जुटाने की आवश्यकता है।

फिलहाल हालांकि हरित निवेश का परिदृश्य आशाजनक नहीं दिखता है, लेकिन सीपीआई की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद से दो वर्षों, 2017-2018 से 2019-2020, में वित्त प्रवाह में 150 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। समग्र वृद्धि में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रवाह में 179% की वृद्धि हुई और निजी क्षेत्र के प्रवाह में 130% की वृद्धि हुई। यह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय और सार्वजनिक स्रोतों से बढ़ी हुई प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

हालांकि, वित्त वर्ष 2019 और वित्त वर्ष 2020 में क्रमशः 87% और 83% के साथ, घरेलू स्रोतों का हरित वित्त के बहुमत के लिए खाता जारी है। इन घरेलू स्रोतों में से, निजी क्षेत्र  ने लगभग 59% योगदान दिया – INR 156.9 हजार करोड़ (यूएसडी 22 बिलियन), जबकि सार्वजनिक क्षेत्र प्रवाह सरकारी बजटीय व्यय (केंद्र और राज्य) के बीच समान रूप से वितरित किए गए थे और पीएसयू क्रमशः लगभग 54% और 46% पर। वित्त वर्ष 2019 में अंतर्राष्ट्रीय स्रोतों की हिस्सेदारी 13% से बढ़कर वित्त वर्ष 2020 में 17% हो गई, लेकिन यह अभी भी भारत के 2030 और नेट- को पूरा करने में मदद करने के लिए पिछले साल ग्लासगो में एक ट्रिलियन डॉलर के जलवायु वित्त की प्रधान मंत्री की मांग से बहुत दूर है।

हरित वित्त अंतराल महत्वपूर्ण निवेश अवसरों को प्रकट करता है

आगे, क्लाइमेट पॉलिसी इनिशिएटिव के भारत में निदेशक, ध्रुबा पुरकायस्थ (Dhruba Purkayastha), कहते हैं, “वास्तविक वित्त प्रवाह की व्यापक जानकारी प्रदान करने के हमारे उद्देश्य को जारी रखते हुए, रिपोर्ट क्षेत्रीय कवरेज को बढ़ाकर और बारीक डेटा एकत्र करके शमन को और अधिक विस्तार से ट्रैक करती है। हमने अनुकूलन वित्त की आंशिक ट्रैकिंग भी की है और हमें उम्मीद है कि यह रिपोर्ट सूचना के अंतर को पाटने में मदद करेगी। भारत की उच्च जलवायु भेद्यता के कारण यह बहुत महत्वपूर्ण है।”

भारत को एनडीसी के लिए 2030 तक लगभग 162.5 लाख करोड़ रुपये (2.5 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर) की जरूरत है और 2070 तक शुद्ध-शून्य उत्सर्जन हासिल करने के लिए 716 लाख करोड़ रुपये (यूएसडी 10.1 ट्रिलियन)।

सिर्फ एनडीसी को पूरा करने के लिए अगर देखें तो भारत में वर्तमान ट्रैक किए गए हरित वित्त को देखें तो पता चलता है कि यह सभी क्षेत्रों में कुल आवश्यकता का 25% से कम का प्रतिनिधित्व करता है।

भारत जलवायु परिवर्तन के लिए सबसे संवेदनशील देशों में से एक है, और एक दबाव है अनुकूलन क्षेत्र में प्रवाहित होने के लिए धन की आवश्यकता है। इस क्षेत्र के लिए ट्रैक किया गया वित्त वित्त वर्ष 2020 में INR 37 हजार करोड़ (5 बिलियन अमरीकी डालर) है, जो कि बहुत कम था जरूरतों के हिसाब से।

अनुकूलन के लिए वित्त पोषण का प्रमुख स्रोत घरेलू (94%) था, और इसे पूरी तरह से केंद्र और राज्य सरकार के बजट द्वारा वित्त पोषित किया गया था। इस क्षेत्र में वित्त प्रवाह बढ़ाने के लिए सहयोग और योजना महत्वपूर्ण है, जैसा कि राज्य स्तर पर अनुकूलन निवेश योजनाओं का विकास है।

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 8 अगस्त2022 की खास खबर

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ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस | Top headlines of India today. Today’s big news 8 August 2022

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नूपुर शर्मा कांड : नाविका कुमार को सर्वोच्च न्यायालय से राहत, गिरफ्तारी से मिली अंतरिम सुरक्षा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को टाइम्स नाउ की पत्रकार नाविका कुमार को उनके खिलाफ दर्ज मामलों के संबंध में गिरफ्तारी से अंतरिम राहत प्रदान की।

झारखंड के अधिवक्ता की गिरफ्तारी : कोलकाता पुलिस ने ईडी के उपनिदेशक को नोटिस भेजा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक रांची के अधिवक्ता राजीव कुमार की गिरफ्तारी से जुड़े मामले में कोलकाता की पुलिस ने ईडी के उपनिदेशक सुबोध कुमार को पूछताछ के लिए नोटिस भेजा है। हाल तक ईडी के रांची स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में पदस्थापित रहे सुबोध कुमार इन दिनों ओडिशा में पोस्टेड हैं।

राजस्थान सरकार ने खाटूश्याम भगदड़ में मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की घोषणा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक राजस्थान सरकार ने आज सीकर जिले स्थित खाटूश्याम मंदिर में मची भगदड़ में मारे गए श्रद्धालुओं के परिजनों को पांच-पांच लाख रुपये मुआवजे के तौर पर देने की घोषणा की है।

यूनेस्को का विश्व धरोहर स्थल हम्पी हुआ जलमग्न

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्नाटक के विजयनगर जिले के तुंगभद्रा बांध से 1.10 लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद यूनेस्को की विश्व धरोहर स्थल हम्पी के विभिन्न स्मारक पानी में डूब गए हैं।

प्रियंका गांधी ने पूछा, नोएडा के भाजपा नेता का निर्माण अवैध है, क्या इतने सालों से पता नहीं था?

नोएडा ग्रैंड ओमैक्स सोसायटी में मचे बवाल के बीच श्रीकांत त्यागी के अवैध निर्माण पर योगी सरकार का बुलडोजर अब चल गया है। इस मसले पर प्रियंका गांधी ने कहा, “क्या इतने सालों से भाजपा सरकार को नहीं पता था कि नोएडा के भाजपा नेता का निर्माण अवैध है?”

भारत में कोरोना के 16,167 नए मामले, 41 मौतें

सोमवार को पिछले 24 घंटों के दौरान भारत में कोविड-19 के 16,167 नए मामले दर्ज किए गए। यह आंकड़े रविवार को सामने आए 18,738 से कम है।

स्पेन में जंगल की आग में 4,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि हुई नष्ट

स्थानीय अग्निशमन सेवाओं के अनुसार, उत्तर-पश्चिमी स्पेन के गैलिसिया के स्वायत्त समुदाय में अभी भी जल रही सात जंगल की आग में 4,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि नष्ट हो गई है।

सीडब्ल्यूजी : बैडमिंटन एकल फाइनल में लक्ष्य सेन ने जीता गोल्ड

भारतीय शटलर लक्ष्य सेन ने आज पुरुष एकल फाइनल में मलेशिया के त्जे योंग एनजी को 19-21, 21-9, 21-16 से हराकर राष्ट्रमंडल गेम्स 2022 में भारत का 20वां स्वर्ण पदक अपने नाम किया।

सीडब्ल्यूजी : पीवी सिंधु ने पहली बार एकल में जीता गोल्ड

भारत की पीवी सिंधु ने सीधे खेल में फाइनल में कनाडा की मिशेल ली को हराकर राष्ट्रमंडल गेम्स की बैंडमिटन प्रतियोगिता में अपना पहला महिला एकल स्वर्ण पदक जीता।

टेबल टेनिस एकल फाइनल : अचंता शरथ कमल ने जीता स्वर्ण, साथियान ने कांस्य पदक पर लगाई मुहर

टेबल टेनिस खिलाड़ी अचंता शरथ कमल ने सोमवार को बर्मिघम में एकल फाइनल में स्वर्ण पदक जीतकर राष्ट्रमंडल गेम्स 2022 का अपना चौथा पदक हासिल किया।

8 August 2022 Big news this Evening | #आजकीताजाखबर | देश और दुनिया की खबरें | hastakshep | हस्तक्षेप

लक्षद्वीप में स्थापित किया जा रहा है सागरीय तापीय ऊर्जा रूपांतरण संयंत्र

marine ecosystem

Ocean thermal energy conversion plant being set up in Lakshadweep

नई दिल्ली, 03 अगस्त 2022: महासागर आधारित ऊर्जा (ocean based energy) को बढ़ावा देने की दिशा में भारत सरकार द्वारा निरंतर प्रयास किये जा रहे हैं। एक नई पहल के अंतर्गत पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन कार्यरत चेन्नई स्थित राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) द्वारा केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप की राजधानी कावारत्ती में समुद्री तापीय ऊर्जा रूपांतरण संयंत्र (Ocean Thermal Energy Conversion Plant) स्थापित किया जा रहा है।

यह संयंत्र समुद्र के पानी को पीने योग्य बनाने के लिए निम्न तापमान ऊष्मीय विलवणीकरण (LTTD) आधारित विलवणीकरण (Desalination) संयंत्र को संचालित करने के लिए ऊर्जा प्रदान करेगा। इस महासागर तापीय ऊर्जा रूपांतरण संयंत्र की क्षमता 65 किलोवाट है, जिसकी सहायता से प्रतिदिन एक लाख लीटर समुद्री जल को पीने योग्य बनाया सकेगा।

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह द्वारा यह जानकारी बुधवार को लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में प्रदान की गई है।

इसी क्रम में पूछे गए एक अन्य प्रश्न का उत्तर देते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा संचालित डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission) के अंतर्गत आगामी वर्षों में गहरे समुद्र की जैव विविधता के अन्वेषण एवं संरक्षण (Exploration and Conservation of Ocean Biodiversity) हेतु प्रौद्योगिकी आधारित नवन्मेष तथा जलवायु परिवर्तन से जुड़ी परामर्श सेवाओं का विकास, अंडरवॉटर रोबोटिक्स, गहरे समुद्र में खनन पर जोर दिया जा रहा है। इसमें 6000 मीटर की समुद्री गहराई हेतु रेटिंग किए गए प्रोटोटाइप मानव युक्त सबमर्सिबल को डिजाइन एवं विकसित करना, जिसमें अंडरवॉटर वाहन एवं अंडरवॉटर रोबोटिक्स के लिए प्रौद्योगिकियाँ शामिल हैं।

क्या है डीप ओशन मिशन?

डॉ सिंह ने सदन को बताया कि डीप ओशन मिशन (Deep Ocean Mission in Hindi) के अंतर्गत 5500 मीटर की गहराई में मध्य हिंद महासागर से पॉलीमेटैलिक नॉड्यूल्स जैसे गहरे समुद्री संसाधनों के खनन हेतु प्रौद्योगिकियों की रूपरेखा का विकास, रिमोट चालित वाहनों के उपयोग से व्यवस्थित सैंपलिंग के माध्यम से उत्तरी हिंद महासागर के गहरे समुद्र वाले जीवों के डीएनए बैंक का विकास, सूची-निर्माण तथा नमूनों का एकत्रीकरण एवं विकास किया जाएगा।

डीप ओशन मिशन भारत के विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों और महाद्वीपीय शेल्फ पर केंद्रित गहरे समुद्री क्षेत्रों के अन्वेषण के लिए शुरू की गई एक पहल है। इस कार्यक्रम में समुद्र तल की की पड़ताल करने वाले विभिन्न क्रू और बिना क्रू वाली पनडुब्बियां शामिल होंगी। समुद्री जलस्तर में वृद्धि, चक्रवात की तीव्रता एवं आवृत्ति, तूफानी लहरों तथा पवन लहरों, जैव-रासायनिकी, तथा भारत के तटीय समुद्र में हानिकारक एल्गल ब्लूम्स में बदलाव-जन्य जलवायु जोखिम मूल्यांकन हेतु समुद्री जलवायु परिवर्तन परामर्श सेवाओं का विकास डीप ओशन मिशन से जुड़ी गतिविधियों का अहम हिस्सा हैं।

(इंडिया साइंस वायर)

सागर स्वच्छ, तो सब सुरक्षित

ocean

महासागरों से प्राप्त होती है हमें ऑक्सीजन

नई दिल्ली, 03 अगस्त 2022: लगभग सवा दो लाख जीव-प्रजातियों को अपने में समेटे विशाल सागर-महासागर पृथ्वी के तीन चौथाई भाग की पारिस्थितिकी को सँभालते हैं। शेष एक चौथाई जमीन पर विचरण करने वाले तमाम प्रजातियों को भी प्रत्येक्ष या परोक्ष रूप से प्रभावित करते हैं। वातावरण से हमें  जितनी ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है, उसका आधा हिस्सा महासागरों से ही प्राप्त होता है। हालाँकि, हम जब भी ऑक्सीजन के बारे में सोचते हैं, तो हमारे मस्तिष्क में सबसे पहले पेड़-पौधे और जंगल ही आते हैं। यह बात समुद्र के महत्व (importance of the sea) को लेकर हमारी अनभिज्ञता का प्रमाण है।

  • दुनिया की आधी आबादी सीधे तौर पर समुद्र पर निर्भर है

दुनिया की आधी आबादी; लगभग तीन अरब लोग सीधे तौर पर समुद्र पर निर्भर हैं। मनुष्यों द्वारा उत्सर्जित कार्बन डाइऑक्साइड (carbon dioxide emitted by humans) का 25 प्रतिशत हिस्सा सागर ही सोखते हैं। निरंतर बढ़ती आबादी की आवश्यकताओं के कारण आज महासागरों पर कार्बन डाईऑक्साइड को ज्यादा से ज्यादा सोखने का दबाव बढ़ता जा रहा है।

सागर अम्लीय क्यों हो जाता है?

सागर जितना अधिक कार्बन डाईऑक्साइड सोखता है, उतना ही अधिक अम्लीय होता जाता है। इसके परिणामस्वरूप समुद्र का इको-सिस्टम (ocean ecosystem) प्रभावित होता है, और अंततः यह पूरे पर्यावरण को ही प्रभावित करने लगता है।

प्रदूषण का कारण

सामान्य तौर पर ऐसा कोई भी पदार्थ, जो प्राकृतिक संतुलन में दोष को उत्पन्न करता है; प्रदूषण का कारण होता है। बढ़ते प्रदूषण का एक प्रमुख कारक (a major factor in increasing pollution) है – बड़ी मात्रा में पैदा होने वाला खतरनाक शहरी कचरा। यूँ तो किसी भी छोटे-बड़े शहर में इसकी भयावहता को सीधे तौर पर देखा जा सकता हैl परंतु इस कचरे के असर को हमारे पारिस्थितिकी पर देखने का सबसे बेहतर और व्यापक बैरोमीटर सागर और तटीय क्षेत्र हैं।

समुद्र से हजारों किलोमीटर दूर एक छोटे से नाले का खतरनाक कचरा सहायक नदी से मुख्य नदी में, और मुख्य नदी से बहता हुआ सागर में मिल जाता है। फिर एक सागर से दूसरे सागर होता हुआ सब तरफ पसर जाता है।

ऐसा माना जाता है कि कुल समुद्री कचरे का 90 प्रतिशत नदियों से बहकर समुद्र में पहुँचता है। इसके अलावा, समुद्री तटों पर प्रतिदिन बड़ी मात्रा में पैदा होने वाला कचरा भी अंततः समुद्र में पहुँचता है। चूँकि समुद्र हर बहते जलीय स्रोत का अंतिम पड़ाव है, इसीलिए मानव जनित कचरे से सबसे अधिक प्रभावित सागर ही हैं।

वैसे तो समुद्र को लोहा, सीसा, सिंथेटिक फाइबर या कपड़ा सहित हर तरह का कचरा प्रदूषित करता है। परंतु, सैकड़ों साल तक विघटित न होने वाला प्लास्टिक इनमें सबसे तेज गति से दूरदराज तक फैल जाने वाला खतरनाक कचरा है।

वर्ल्ड इकोनॉमी फोरम(world economy forum) के अनुसार, आठ लाख टन प्लास्टिक प्रतिवर्ष कचरे के रूप में समुद्र में प्रवाहित हो रहा है। वर्तमान में, सागर तट पर इतना प्लास्टिक है कि दुनिया भर के सागर तट पर हर एक फुट जगह में पाँच प्लास्टिक बैग बिछाये जा सकते हैं।

समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सिंगल यूज़ प्लास्टिक खतरा बन चुका है

एक बार प्रयोग किया जाने वाला (सिंगल यूज़) प्लास्टिक आज समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है (Single-use plastics pose a threat to marine ecosystems)। यह सिगरेट के फिल्टर, फूड रैपर, बोतल, प्लास्टिक बैग, स्ट्रॉ आदि के रूप में हर कहीं मौजूद है। जमीन, हवा और समुद्र में भी। सालों तक विघटित नहीं होने और बाद में माइक्रो-प्लास्टिक के रूप में टूटने के कारण यह पर्यावरण के लिए एक बड़ी और कठिन चुनौती है।

आमतौर पर महानगर में  रहने वाला व्यक्ति अपने शहर के किनारे कचरे का पहाड़ देख कर आश्चर्य करते हैं। पर, ऐसे कचरे के ढेर सागर में भी हैं।

प्लास्टिक-जन्य कचरे का एक प्रमुख स्रोत तटों पर पर्यटन भी है। भारत की 7500 किलोमीटर की तटरेखा पर्यटन से उपजे प्रदूषण से प्रभावित है।

गोवा भारत का एक ऐसा तटीय क्षेत्र है, जिसके द्वारा पर्यटन और अन्य दूसरे कारण से होने वाले समुद्री प्रदूषण की निगरानी की जाती है। अपनी प्राकृतिक सुंदरता और विस्तृत तटों के लिये मशहूर गोवा, अरब सागर के किनारे बसा भारत का एक छोटा राज्य है। घूमने और छुट्टी बिताने के लिहाज से गोवा, विश्व के सबसे लोकप्रिय स्थानों में से एक है। आर्थिक सामाजिक दृष्टि से पर्यटन गतिविधि इस क्षेत्र के लिये जितनी अनुकूल है, पर्यावरण प्रदूषण की दृष्टि से उतनी ही नुकसानदेह भी।

देश और दुनिया के हर कोने सेआने वाले सैलानी गोवा के 104 किलोमीटर लम्बे समुद्री तट पर छुट्टियाँ बिताते हैं। इसके समुद्री तट हजारों होटलों, रिसोर्ट्स , स्पा आदि से भरे पड़े हैं। पर्यटकों के लिए सुख-सुविधा प्रदान करने के साथ-साथ यह सब भारी मात्रा में प्लास्टिक और अन्य कचरा भी उत्पादित करते हैं।

गोवा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार, गोवा में हर दिन 527 टन कचरा पैदा होता है। जिसमें से ज्यादातर समुद्री कचरे के रूप में तटों पर मौजूद होता है। इनमें एक बार उपयोग (सिंगल यूज) होने वाला प्लास्टिक, जिसमें खाद्य पदार्थों के पैकेट, पानी की बोतलें आदि प्रमुख कचरे के रूप में होते हैं। इसका निपटारा आमतौर पर स्थानीय स्तर पर ही कर दिया जाता है। हालाँकि, बड़ी मात्रा में कचरा, जो विभिन्न कारणों से तटों पर रह जाता है, समुद्री पर्यावास से मिलकर पूरे पारिस्थितिकी को प्रभावित करता है।

यह प्रभाव इतना है कि संस्थाओं द्वारा समुद्री प्रदूषण को मापने के लिये गोवा को राष्ट्रीय योजना में शामिल किया गया है। तटों की सफाई के लिये गोवा का बजट (Goa budget for beach cleaning) 2014 में जहाँ दो करोड़ हुआ करता था। वर्तमान में, यह बजट लगभग 15 करोड़ है। इसके बावजूद गोवा तट उच्च स्तर पर प्रदूषित है।

कई शोधकर्ताओं का कहना है कि यह प्रदूषण अब हमारे फ़ूड चैन में प्रवेश कर रहा है। ध्यान देने वाली बात है कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा ‘सी फूड उत्पादक’  देश है। साल 2019 में अकेले गोवा के समुद्री तटों से कुल 125.6 हजार टन मछलियों को हार्वेस्ट किया गया।

केंद्रिय समुद्री मात्स्यिकी अनुसंधान संस्थान (सी॰आर॰एफ॰आर॰आई॰) के 2017 में किये गये अध्ययन में पाया गया है कि देश के 254 तटों में से गोवा के तट सबसे अधिक प्रदूषित हैं। जिन चीजों से गोवा के तट सबसे अधिक प्रदूषित हैं, वह पर्यटकों द्वारा इस्तेमाल की गई सीसे की बोतल, मछुआरों द्वारा इस्तेमाल की जानेवाले नायलॉन के जाल आदि हैं।  समुद्री-तंत्र पर ऐसे कचरे से मंडरा रहे संकट के प्रति व्यापक जन-जागृति की आवश्यकता है।

‘स्वच्छ सागर – सुरक्षित सागर’ (Swachh Sagar Surakshit Sagar) भारत सरकार का स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव के अंतर्गत देश की तटीय रेखा को जन-भागीदारी से स्वच्छ बनाने का अभियान है। इस अभियान के बारे में जागरूकता प्रसार, और 17 सितंबर 2022 को ‘अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस’ के दिन भारत की तटीय रेखा के 75 स्थानों पर आयोजित समुद्र तट की सफाई गतिविधि से स्वैच्छिक रूप से जुड़ने के लिए आम लोगों के लिए एक मोबाइल ऐप “इको मित्रम्” भी लॉन्च किया गया हैl

(इंडिया साइंस वायर)

खतरे आधुनिक खेती के : जिस डाल पर बैठे हैं, हम उसी को काट रहे हैं

farming

प्रकृति की अपनी एक व्यवस्था है जिसमें भरपूर उत्पादन होता है, वह भी बिना रासायनिक खाद और कीटनाशक का इस्तेमाल किए हुए, परंतु इस उत्पादन को वही व्यक्ति प्राप्त कर सकता है, जिसके पास प्रकृति के नियम-कायदों, कानूनों को समझने का नजरिया हो। लालच और अंहकार में डूबे व्यक्तियों को यह उत्पादन दिखेगा ही नहीं क्योंकि ये लोग प्रकृति के सहायक हैं ही नहीं। इन लालची व्यक्तियों को प्रकृति के अमूल्य तत्वों का सिर्फ दोहन (Only harnessing the priceless elements of nature) करना आता है, बेहिसाब खर्च करना आता है। इसके चलते जब ये तत्व रीत जाते हैं और प्रकृति का संतुलन (balance of nature) बिगड़ने लगता तो ये लालची लोग इसका ठीकरा किसी और पर फोड़ने लगते हैं।

आधुनिक सुविधाभोगी इंसान के लिए जलवायु परिवर्तन एक बहुत बड़ी चुनौती

वर्तमान में जलवायु परिवर्तन सुविधाभोगी आधुनिक इंसान के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती (Climate change a big challenge for modern convenience man) बनकर सामने आ रहा है। दिन-ब-दिन यह समस्या बढ़ती ही जा रही है, पर मजाल है कि किसी व्यक्ति के कान पर जूं भी रेंग जाए। व्यक्ति तो छोड़िए, सरकारों के कानों पर भी जूं नहीं रेंग रही है, सिर्फ बड़ी-बड़ी घोषणाएं हो रही हैं, पर जमीनी स्तर पर सब निल बटे सन्नाटा ही पसरा हुआ है।

तो किसान होने के नाते हमें क्या करना चाहिए?

यहां हम इस पर बात नहीं करेंगे कि दुनिया भर की सरकारों को क्या करना चाहिए क्योंकि वह हमारे हाथ में नहीं है। हम तो इस पर बात करेंगे कि किसान होने के नाते (being a farmer), भू-स्वामी होने के नाते और एक धरतीवासी होने के नाते हम क्या कर सकते हैं। अव्वल तो हमको अपनी भूलने की आदत सुधारनी होगी, बारम्बार आ रहीं आपदाओं को खतरे की घंटी मानना होगा और भविष्य में इन आपदाओं की तीव्रता और न बढ़े, इसके लिए अपने लालच पर लगाम लगाना सीखना होगा। प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन बंद करते हुए हमें आवश्यक और अनावश्यक में अंतर (difference between necessary and unnecessary) करना सीखना होगा। हमें अपने उपभोग की गति का प्रकृति के पुनर्चक्रण की गति से सामंजस्य बैठाना होगा।

प्रकृति के पुनर्चक्रण में हमें सहयोग करना होगा।

Farmer
Farmer File photo

दूसरे हम प्रकृति से जितना ले रहे हैं, उतना ही वापस लौटाने का संकल्प करना पड़ेगा। पहले जमाने में यदि कोई रिश्तेदार या पड़ोसी कोई वस्तु आपको देने घर आता था तो लोग उसको खाली हाथ नहीं जाने देते थे, बल्कि उसी के बर्तन में कुछ-न-कुछ भरकर वापस देते थे। प्रकृति के साथ हमें भी यही करना है। यदि हम प्रकृति से 100 प्रतिशत तत्व ले रहे हैं, तो कम-से-कम 70 प्रतिशत तो उसे लौटाएं, तब जाकर संतुलन बनेगा और तब हम भी खुश रहेंगे और प्रकृति भी खुश रहेगी।

प्रकृति से जो ले रहे हैं हम उसको वापस लौटाना होगा

कृषि उत्पादन के लिए हम प्रकृति से जो दो चीज़ें -पानी और पेड़- सबसे अधिक ले रहे हैं उन्हें प्रकृति को वापस लौटाना होगा। पानी की सबसे ज्यादा खपत खेती में होती है और खेती के लिए साल-दर-साल अधिकाधिक जंगल साफ किए जा रहे हैं। इन दो चीजों की भरपाई कैसे करेंगे? इसके लिए हमें अपने-अपने खेतों में छोटे-छोटे तालाब एवं कुएं बनवाने होंगे और खूब सारे पेड़ लगाने होंगे। किसानों को कुल जमीन के 10 प्रतिशत हिस्से में बागवानी और 10 प्रतिशत हिस्से में तालाब या कुएं की व्यवस्था करनी चाहिए।

तालाब और कुएं बनाने से जहां एक ओर सिंचाई के लिए भरपूर पानी उपलब्ध होगा, वहीं खेत की मिट्टी और हवा में नमी बढ़ने से उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही भू-जल स्तर भी बढ़ेगा। बागवानी से पेड़ों की संख्या में इजाफा होगा, जिससे तापमान कम होगा, वातावरण में कार्बन का स्तर घटेगा और बारिश बढ़ेगी। मिट्टी का क्षरण रुकेगा, जमीन अधिक उपजाऊ बनेगी। किसानों के मित्र पक्षियों एवं कीटों की संख्या बढ़ने से फसलों का परागण एवं कीट-नियंत्रण अधिक प्रभावी तरीके से होगा।

तीसरे, हमें अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के वैकल्पिक स्रोत तलाशने होंगे, ताकि प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले काम बंद हो सकें। उदाहरण के लिए, आज बिजली हमारे लिए उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है जितनी कि हवा। अभी अधिकांश बिजली कोयला जलाकर पैदा की जाती है, और कोयले का दहन (combustion of coal) जलवायु परिवर्तन की समस्या का सबसे बड़ा कारण है। इसका दूसरा बड़ा कारण है – जीवाश्म ईंधनों (पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस) का दहन। यदि हम अपनी बिजली और अपना ईंधन किन्हीं और स्रोतों से प्राप्त कर सकें तो हम प्रकृति को प्रदूषित होने से बचा सकते हैं।

हम किसानों को घरों और खेतों में अधिक-से-अधिक सोलर-ऊर्जा का उपयोग करना चाहिए। यदि हर खेत में सोलर पंप लगा दिए जाएं तो कितनी बिजली की बचत होगी। ईंधन के लिए गोबर-गैस या बॉयो-गैस का उपयोग बहुत अच्छा विकल्प है।

तीसरी चीज है- प्राकृतिक खाद का उपयोग।

रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों के उत्पादन एवं परिवहन में बड़ी मात्रा में ऊर्जा खर्च होती है तथा जीवाश्म ईंधनों का उपयोग (use of fossil fuels) होता है। ये रासायनिक उर्वरक व कीटनाशक मिट्टी, पानी और हवा को भी बुरी तरह प्रदूषित करते हैं। इनके स्थान पर प्राकृतिक उर्वरकों का उपयोग करें। एकल फसल खेती से मिट्टी में पोषक तत्वों की कमी हो जाती है और जैव-विविधता खतरे में पड़ जाती है, इसलिए हमें चाहिए कि हम बहुफसलीय खेती करें, इससे खेती में हमारा जोखिम भी कम होगा और प्रकृति का संतुलन भी बना रहेगा।

उपरोक्त सुझावों पर ईमानदारी, दृढ़ निश्चय और संकल्पता के साथ कार्य करना अत्यावश्यक है। इसमें सरकार, जनता और किसान सभी की भागीदारी जरूरी है। इस काम में सबसे बड़ा रोड़ा हमारा लालच है, जिसने हमें अंधा कर दिया है। हम देख नहीं पा रहे हैं कि हम उसी डाल को काट रहे हैं जिस पर बैठे हैं। हमें इस लालच को तुरंत छोड़ना होगा और प्रकृति से नाता जोड़ना होगा। तभी जाकर हम पर्यावरण से संबंधित सभी समस्याओं से निजात पा सकेंगे। इससे किसानों की समस्याओं का भी निराकरण हो जाएगा।

पवन नागर

लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं। मूलतः देशबन्धु में प्रकाशित लेख

amazing view of nature in India | भारत में प्रकृति का अद्भुत दृश्य | hastakshep | हस्तक्षेप

Dangers of modern farming: We are cutting the branch on which we are sitting

प्लास्टिक कचरे से कलात्मक चीजें बना रहे हैं छात्र

ocean

Students are making artistic things from plastic waste

नई दिल्ली, 02 अगस्त 2022: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय सहित अन्य केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और गैर-सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान (Swachh Sagar Surakshit Sagar) के अंतर्गत आयोजित की जाने वाली गतिविधियों में शामिल ‘प्लास्टिक टू प्रीशियस’ प्रतियोगिता (‘Plastic to Precious’ Competition) के माध्यम से बड़ी संख्या में छात्रों की भागीदारी समुद्री स्वच्छता अभियान में देखने को मिल रही है। इस प्रतियोगिता के अंतर्गत छात्रों को प्लास्टिक कचरे से कलात्मक चीजें बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

स्कूली छात्रों के लिए शुरू की गई यह प्रतियोगिता देश की करीब 7500 किलोमीटर लंबी तटरेखा को साफ करने के लिए चलाए जा रहे 75 दिवसीय ‘स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर’ अभियान का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य नई पीढ़ी में महासागरों के महत्व और उसकी स्वच्छता के प्रति जिम्मेदारी का भाव विकसित करना है।

इस प्रतियोगिता में शामिल होने वाले छात्रों से अपेक्षा की जा रही है कि वे कचरे के गैर-जिम्मेदार रखरखाव का अध्ययन करें, और साथ ही अपनी दैनिक जीवनशैली से प्लास्टिक कचरे के प्रमुख स्रोतों का मूल्यांकन करें, जिसमें प्लास्टिक बैग, बोतलें, कटलरी, स्ट्रॉ, चॉकलेट रैपर, चिप्स बैग, और कंटेनर सहित अन्य पैकेजिंग शामिल हैं।

प्रतियोगिता के लिए पंजीकरण करने वाले सभी छात्रों को कई सरकारी मंत्रालयों और विभागों और राष्ट्रीय नागरिक समाज संगठनों द्वारा समर्थित पंजीकरण का एक आधिकारिक प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा। ईकोमित्रम् (Ecomitram) ऐप और MyGov के माध्यम से प्राप्त शीर्ष प्रविष्टियों को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय से की ओर से प्रोत्साहन दिया जाएगा।

जिन स्कूलों द्वारा यह प्रतियोगिता आधिकारिक रूप से संचालित नहीं की जा रही है, उनके छात्र भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। इस प्रतियोगिता के अंतर्गत छठी से बारहवीं कक्षा के छात्र शामिल हो रहे हैं।

छात्र टीमें अपने घर, स्कूलों और समुदायों से प्लास्टिक की व्यर्थ वस्तुओं को इकट्ठा कर रही हैं, ताकि प्लास्टिक अपशिष्ट से ऐसी वस्तु बनायी जा सकें, जो प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए उपयोगी या सजावटी हों। कचरे से कलात्मक उत्पाद बनाने के बाद छात्रों को इस प्रतियोगिता से मिले अनुभवों के साथ-साथ अपनी टीम द्वारा बनायी गई कलाकृति की व्याख्या करने वाला एक वीडियो (60 सेकंड से कम) जमा करना होगा। इस प्रकार, छात्र उन गतिविधियों के बारे में भी बात कर सकते हैं, जिन पर वे भविष्य में प्लास्टिक के उपयोग को कम करने, पुन: उपयोग करने, और रीसाइकिल करने के लिए नियमित तौर पर करेंगे।

स्वतंत्रता के 75वें वर्ष में भारत की समुद्री तटरेखा की सफाई के लिए 75 तटों पर चल रहे अभियान के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। इन गतिविधियों में शून्य अपशिष्ट संकल्प (Zero Waste Pleadge), प्लास्टिक टू प्रीशियस (Plastic to Precious), वेस्ट ऑडिट (Waste Audit), मॉनसून बीच फेस्टिवल (Monsoon Beach Festival), इको-सेल्फी (Eco-Selfie), बाइक टू बीच (Bike to Beach), प्लास्टिक से आज़ादी, माई कोस्ट (My Coast), ऑर चॉइसेस (R Choices), ‘रजिस्टर किया क्या’ (Register Kiya Kya), टीचर्स-डे (Teachers Day), मार्क योर बीच (Mark Your Beach), और टीम-अप-टू-क्लीन-अप (Team up to Clean up) शामिल हैं।

75 दिवसीय यह अभियान मुख्य रूप से जन-भागीदारी पर आधारित है, जिसका प्रमुख उद्देश्य समुद्री स्वच्छता के प्रति लोगों को जागरूक करना, और उन्हें दैनिक जीवन में प्लास्टिक, जो समुद्री कचरे का एक प्रमुख घटक है, के सुविचारित उपयोग एवं प्रबंधन के लिए प्रेरित करना है। अभियान के बारे में जागरूकता प्रसार, और 17 सितंबर 2022 को समुद्र तट की सफाई गतिविधि से स्वैच्छिक रूप से जुड़ने और इसके लिए पंजीकरण करने के लिए आम लोगों के लिए एक मोबाइल ऐप – “इको मित्रम्” लॉन्च किया गया है। इन गतिविधियों से ईकोमित्रम् (Ecomitram) ऐप के जरिये जुड़ा जा सकता है।

(इंडिया साइंस वायर)

2 August 2022 Big news this Evening | #आजकीताजाखबर | देश और दुनिया की खबरें | hastakshep | हस्तक्षेप

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 1 अगस्त2022 की खास खबर

headlines breaking news

ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस | Top headlines of India today. Today’s big news 1 August 2022

दिन भर की खबर | आज की खबर | भारत समाचार |शीर्ष समाचार| हस्तक्षेप समाचार

मनी लांड्रिग केस : संजय राउत ईडी की तीन दिन की कस्टडी में

शिवसेना सांसद संजय राउत को चार अगस्त तक तीन दिन के लिए प्रवर्तन निदेशालय की हिरासत में भेज दिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मुंबई की एक विशेष अदालत ने सोमवार को ये फैसला सुनाया।

राउत की गिरफ्तारी पर हंगामा, राज्यसभा की कार्यवाही दो बार स्थगित

राज्यसभा की कार्यवाही सोमवार को दो बार स्थगित की गई, दूसरी बार दोपहर दो बजे तक। शिवसेना सांसद संजय राउत की प्रवर्तन निदेशालय द्वारा गिरफ्तारी के अलावा अन्य मुद्दों पर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया।

संजय राउत के परिवार से मिले उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे ने आज गर्मजोशी के साथ पार्टी सांसद संजय राउत के परिवार से मुलाकात की और उन्हें सांत्वना दी।

लोकसभा अध्यक्ष ने कांग्रेस के चार सांसदों का निलंबन वापस लिया

लोकसभा अध्यक्ष ने आज कांग्रेस के चार सांसदों का निलंबन वापस ले लिया।

जबलपुर के निजी अस्पताल में लगी आग, आठ की मौत

मध्य प्रदेश के जबलपुर के एक निजी अस्पताल में सोमवार की दोपहर को आग लग गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हादसे में आठ लोगों की मौत हुई है। वहीं पांच से ज्यादा गंभीर तौर पर घायल हुए हैं।

भारत में मंकीपॉक्स से हुई पहली मौत, केरल का 22 वर्षीय युवक चपेट में आया

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक संयुक्त अरब अमीरात से 22 जुलाई को त्रिशूर आए युवक की मौत की पुष्टि हो गई है। युवक की मौत मंकीपॉक्स से हुई है।

मंकीपॉक्स के मामलों की निगरानी के लिए भारत सरकार ने टास्क फोर्स का किया गठन

भारत सरकार ने देश में मंकीपॉक्स के मामलों की निगरानी के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया है।

सोरेन के विरुद्ध पीआईएल फाइल करने वाले अधिवक्ता राजीव कुमार कोलकाता में 50 लाख कैश के साथ गिरफ्तार

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक झारखंड में ‘पीआईएल मैन’ के रूप में चर्चित रांची उच्च न्यायालय के अधिवक्ता राजीव कुमार को कोलकाता पुलिस ने 50 लाख रुपये नकद के साथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि उन्होंने कथित तौर पर कोलकाता निवासी एक व्यवसायी के खिलाफ दायर पीआईएल को मैनेज करने के एवज में 10 करोड़ मांगे और फिर एक करोड़ में डील फाइनल की। उनके पास से जो 50 लाख की रकम बरामद हुई है, उसका भुगतान इसी डील के तहत किया गया था।

5जी स्पेक्ट्रम नीलामी समाप्त, 1.5 लाख करोड़ रुपये की लगी बोली, रिलायंस जियो अव्वल

5जी स्पेक्ट्रम की मेगा नीलामी आज समाप्त हो गई, जिसमें सात दिनों में 40 राउंड के दौरान 1.5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की रिकॉर्ड बोलियां मिलीं। इस दौरान रिलायंस जियो सबसे आगे रही।

जुलाई में जीएसटी संग्रह में 28 प्रतिशत की वृद्धि

जुलाई में जीएसटी संग्रह 1,48,995 करोड़ रुपये रहा, जो जीएसटी लागू होने के बाद से दूसरा सबसे अधिक संग्रह है। जुलाई का संग्रह पिछले साल के इसी महीने में दर्ज किए गए 1,16,393 करोड़ रुपये के जीएसटी राजस्व से 28 प्रतिशत अधिक है।

भारत में विश्व बैंक का नया देश निदेशक नियुक्त

ऑगस्टे-तानोआ-कौमे भारत के लिए विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर बनाए गए हैं। उन्होंने आज कार्यभाल संभाला। वह जुनैद कमाल अहमद की जगह लेंगे, जिन्होंने हाल ही में पांच साल का कार्यकाल पूरा किया है।

उपराष्ट्रपति ने युवाओं से समाज सेवा के लिए समर्पित होने का आह्वान किया

उपराष्ट्रपति, श्री एम. वेंकैया नायडू ने आज युवाओं से समाज में जरूरतमंद और उपेक्षित वर्गों की मदद के लिए नियमित रूप से कुछ समय समर्पित करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ‘संकट में मदद के लिए हाथ बढ़ाने से बड़ी संतुष्टि और खुशी कुछ भी नहीं है। ‘बांटें और देखरेख करें’  हमारी सभ्यता का मूल मंत्र है’।

श्री नायडू ने नई दिल्ली में एक गैर-लाभकारी सामाजिक सेवा संगठन के क्षेत्रीय केन्‍द्र राष्ट्रीय सेवा समिति (आरएएसएस) के लिए ‘सेवा संस्थान’ भवन का उद्घाटन किया। सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि हर किसी को उस समुदाय की जरूरतों के लिए सजग रहना चाहिए जिसमें वह रह रहा है और मदद के लिए हाथ बढ़ाने की कोशिश करनी चाहिए।

राष्ट्रमंडल खेल 2022 : भारोत्तोलन में अचिंत शिउली ने भारत को तीसरा स्वर्ण पदक दिलाया

भारोत्तोलक अचिंत शिउली ने रविवार रात्रि को राष्ट्रमंडल खेल 2022 में पुरुषों के 73 किग्रा फाइनल में स्वर्ण पदक जीता। अचिंत ने खेलों में कुल 313 किलोग्राम (स्नैच 143 किग्रा + क्लीन एंड जर्क 170 किग्रा) उठाया। यह प्रतियोगिता में भारत का छठा पदक और तीसरा स्वर्ण है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी, केंद्रीय खेल मंत्री श्री अनुराग ठाकुर और देश भर के लोगों ने अचिंत को उनके प्रदर्शन के लिए बधाई दी है।

क्लीनटेक स्टार्टअप्स, भारत के नेट ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने में निभा सकते हैं अहम भूमिका

Climate change Environment Nature

दुनिया के स्टार्टअप इकोसिस्टम में अमेरिका और चीन के बाद भारत तीसरे स्थान पर

नई दिल्ली, 31 जुलाई 2022. बात दुनिया के स्टार्टअप इकोसिस्टम या समुदाय के आकार की हो तो भारत अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान (India ranks third in the world’s startup ecosystem after US and China) पर है। फिलहाल जनवरी 2022 तक भारत में 61,000 से अधिक स्टार्टअप कंपनियों को मान्यता दी गई है और उन्हें पंजीकृत किया गया है। लेकिन अगर भारत को नेट ज़ीरो के संदर्भ में अपने 2030 के लक्ष्य को हासिल करना है तो सरकार को क्लाइमेट टेक स्टार्टअप्स को तरजीह देनी होगी। 

ये कहना है क्लाइमेट ट्रेंड्स और क्लाइमेट डॉट द्वारा संयुक्त रूप से जारी एक रिपोर्ट (A report jointly released by Climate Trends and Climate dot) का।

भारत ने ग्लासगो में COP26 में 2070 में नेट ज़ीरो लक्ष्य हासिल करने की दिशा में अपनी अर्थव्यवस्था को डीकार्बोनाइज़ करने के लिए कई उपाय करने का वचन दिया। लेकिन चरम मौसम की बढ़ती घटनाओं के लिए अनुकूलन करना और साथ ही उत्सर्जन को कम करना, कुल मिला कर एक कठिन काम है। ऐसे में देश के लिए रिन्युब्ल एनेर्जी को बढ़ावा देना बेहद ज़रूरी है। साथ ही देश के स्टार्टअप समुदाय को भारत के लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में अपनी भूमिका निभाने में आगे आना चाहिए। वर्तमान में भारत में अधिकांश स्टार्टअप आईटी क्षेत्र में केंद्रित हैं। ग्रीन टेक में जो हैं भी वो अधिकांश रिन्यूबल एनेर्जी या इलैक्ट्रिक वेहिकल के क्षेत्र में हैं।

क्लाइमेट डॉट के निदेशक अखिलेश मगल कहते हैं, “हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के खिलाफ इस लड़ाई में क्लीन टेक स्टार्टप्स विशेष रूप से भूमिका निभा सकते हैं।”

भारत सरकार की स्टार्टअप इंडिया स्कीम, आत्मनिर्भर भारत जैसी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से स्टार्टअप्स को सरकार द्वारा आवश्यक सहयोग मिलता रहा है। लेकिन यह सहयोग बैंगलोर, दिल्ली, मुंबई और कुछ प्रमुख विश्वविद्यालयों के आसपास ही केंद्रित है। आगे, नीति निर्माताओं को वित्तीय सहायता सुनिश्चित करने और जलवायु तकनीकी नवाचार में तेजी लाने के लिए सही पारिस्थितिकी तंत्र प्रदान करने की आवश्यकता है।

वैश्विक स्तर पर यूरोप क्लाइमेट टेक में सबसे तेजी से बढ़ते देशों में है। भारत वहाँ से सीख सकता है। साथ ही, यूरोपीय संघ के यूरोपीय प्रौद्योगिकी संस्थान (EIT InnoEnergy) जैसे मॉडल का पता लगाया जा सकता है। इसे शुरू में यूरोपीय आयोग द्वारा विशेष रूप से क्लाइमेट टेक स्टार्टअप में तेजी लाने के लिए सहयोग दिया गया था, लेकिन अब यह स्वतंत्र रूप से संचालित और वित्तपोषित है।

अंत में क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला कहती हैं, “फिलहाल हमार लिए त्वरित और गहन डीकार्बोनाइजेशन की आवश्यकता है। भारत मुख्य रूप से अपनी रिन्यूबल एनर्जी परियोजनाओं के लिए घरेलू स्रोतों पर निर्भर है लेकिन एनर्जी ट्रांज़िशन के लिए देश में एक महत्वपूर्ण निधि के प्रवाह की आवश्यकता है। COP26 में, भारत ने जलवायु वित्त के लिए एक ट्रिलियन डॉलर की आवश्यकता की घोषणा की। ऐसी ज़रूरत के मद्देनज़र क्लाइमेट-टेक स्टार्टअप घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर धन के प्रवाह को सुविधाजनक बना सकते हैं।” 

aarti khosla
Aarti Khosla

यह रिपोर्ट कोपेनहेगन समझौते के संदर्भ में विशेष रूप से प्रासंगिक हो जाती है जहां विकसित देश सालाना 100 अरब डॉलर जुटाने के लिए सहमत हुए और अभी भी पूरा होने का वादा बना हुआ है।

Cleantech startups can play a key role in achieving India’s Net Zero target

भारत में 2030 के ई-मोबिलिटी लक्ष्‍य के लिए नीतिगत प्रयासों में तेज़ी ज़रूरी

energy power

ई-मोबिलिटी में तेजी लाने के लिये बेहद महत्‍वपूर्ण है

  • चार्जिंग ढांचे को तेजी से विस्‍तार देना;
  • वित्‍तीय समाधान पेश करना, अधिदेश (मैन्‍डेट) पेश करना; और
  • सम्‍बन्धित राष्‍ट्रीय महत्‍वाकांक्षा के अनुरूप सरकारी नीतियां बनाना

नई दिल्ली, 27 जुलाई 2022. भारत में वर्ष 2030 तक इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसके तहत तय अवधि तक बेचे जाने वाले वाहनों में 70% वाणिज्यिक कारें, 30% निजी कारें, 40% बसें और 80% दो पहिया तथा तीन पहिया वाहन इलेक्ट्रिक होंगे।

8 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहन वर्ष 2030 तक सड़कों पर दौड़ेंगे : विश्लेषण

क्लाइमेट ट्रेंड्स और जेएमके रिसर्च द्वारा जारी एक ताजा विश्लेषण (A recent analysis released by Climate Trends and JMK Research) के मुताबिक इलेक्ट्रिक वाहन संबंधी नीतियों (फेम 2, राज्य सरकार की नीतियां) की मौजूदा लहर और यहां तक कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान बैटरी के दामों में गिरावट और स्थानीय स्तर पर निर्माण संबंधी सुविधाओं में बढ़ोत्तरी के परिणामस्वरूप इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में तेजी आने के बावजूद भारत में वर्ष 2030 तक सिर्फ 5 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहन ही इस्तेमाल हो सकेंगे जोकि राष्ट्रीय लक्ष्य से 40% कम है।

रिपोर्ट में यह भी अनुमान लगाया गया है कि भारत को 8 करोड़ इलेक्ट्रिक वाहनों के सुचारू संचालन के लिए 2022 से 2030 के बीच कम से कम 39 लाख (प्रति चार्जिंग स्टेशन 8 इलेक्ट्रिक वाहनों के अनुपात के आधार पर) सार्वजनिक अथवा अर्द्ध-सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की जरूरत होगी। यह संख्या इस अवधि के लिए बनाई जा रही योजना के मुकाबले कहीं ज्यादा है।

परिवहन विद्युतीकरण के लिए भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य की पूर्ति

इस अध्ययन का शीर्षक मीटिंग इंडियास नेशनल टारगेट फॉर ट्रांसपोर्ट इलेक्ट्रिफिकेशन‘ (Meeting India’s National Target for Transport Electrification) है और इसे जेएमके रिसर्च द्वारा नई दिल्ली में आयोजित ‘ईवी मार्केट कॉन्क्लेव’ में जारी किया गया।

इस अध्ययन में सभी अनुमोदित राज्य ईवी नीतियों का विश्लेषण किया गया है और इलेक्ट्रिक वाहनों को लेकर भारत के राष्ट्रीय लक्ष्य (India’s national goals for electric vehicles) की पूर्ति के लिए राज्य के स्तर पर और बेहतर तथा अधिक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित करने की बात मजबूती से रखी गई है। जहां कुछ राज्यों ने इलेक्ट्रिक वाहनों से संबंधित लक्ष्य को संख्यात्मक स्वरूप में रखा है, वहीं कुछ राज्यों ने इसे कुल वाहनों के प्रतिशत के तौर पर निर्धारित किया है जबकि कुछ राज्य ऐसे हैं जिन्होंने इस बारे में कोई भी लक्ष्य तय नहीं किया है। ऐसी गिनी-चुनी नीतियां ही हैं जिनमें चार्जिंग ढांचे से संबंधित लक्ष्य या सरकारी वाहनों के बेड़े को इलेक्ट्रिक वाहनों में तब्दील करने के बारे में चीजों को परिभाषित किया गया है।

इसके अलावा ज्यादातर नीतियों में वर्ष 2030 तक की समयसीमा का निर्धारण नहीं किया गया है। उनमें सिर्फ वर्ष 2022 से 2026 तक के लिए ही सहयोग प्रदान करने की बात की गई है।

वित्तीय रूप से इलेक्ट्रिक वाहन मौजूदा समय में व्यावहारिक हो गए हैं : आरती खोसला
aarti khosla
आरती खोसला

क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला ने कहा, इलेक्ट्रिक वाहन मौजूदा समय में वित्तीय रूप से व्यावहारिक हो गए हैं। भारत के नेटजीरो उत्सर्जन के महत्वाकांक्षी लक्ष्य की प्राप्ति में इलेक्ट्रिक वाहनों की बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होगी। स्वच्छ ऊर्जा– जैसे कि अक्षय ऊर्जा संबंधी लक्ष्यों की प्रगति राज्य की नीतियों की वजह से होती है। इलेक्ट्रिक मोबिलिटी के मामले में भी देश को राज्यों के बीच और अधिक तालमेल की जरूरत है। भारत ने ई-मोबिलिटी के क्षेत्र में सही दिशा में कदम आगे बढ़ाना शुरू किया है। कुछ सक्षमकारी नीतियों के कारण वाहनों के कुछ वर्गों में इलेक्ट्रिक वाहनों की बिक्री तेजी से बढ़ रही है। हालांकि हमें केंद्र और राज्य सरकारों के बीच और भी ज्यादा समन्वित प्रयासों की जरूरत है। खासतौर पर ऐसे लक्ष्यों और प्रोत्साहनों को परिभाषित करने के मामले में, जो राष्ट्रीय लक्ष्यों और नीतियों के अनुरूप हैं। इसके अलावा चार्जिंग ढांचे तथा इलेक्ट्रिक वाहनों के वित्तपोषण के लिए वित्तीय समाधान उपलब्ध कराने पर और अधिक ध्यान दिए जाने की जरूरत है।”

जेएमके रिसर्च एंड एनालिसिस की संस्थापक और सीईओ ज्योति गुलिया ने कहा, “अगर मौजूदा ढर्रा बना रहा तो भारत वर्ष 2030 तक के लिए निर्धारित अपने लक्ष्य से 40% पीछे रह जाएगा। इस अंतर को पाटने के लिए भारत सामान्य मगर प्रभावी पद्धतियां लागू कर सकता है। सिर्फ प्रोत्साहन से काम नहीं चलेगा। सभी राज्यों को अपने अपने यहां चार्जिंग ढांचे को उन्नत बनाने से संबंधित स्पष्ट लक्ष्य बताने होंगे। यह पहली जरूरत है, जिससे भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने का रुख तय होगा। वैश्विक स्तर पर उभर रहे उदाहरण को अपनाते हुए भारत को सरकारी वाहनों के बेड़े के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण का आदेश जारी करने पर विचार करना चाहिए और वाहन एग्रीगेटर बेड़े के कुछ प्रतिशत हिस्से का भी इलेक्ट्रिक होना अनिवार्य किया जाना चाहिए।”

इस अध्ययन में छह सुझाव दिए गए हैं जिनसे भारत वर्ष 2020 तक के लिए निर्धारित अपने लक्ष्यों की प्राप्ति की संभावनाओं को बेहतर बना सकता है।

ये सुझाव विभिन्न राज्य नीतियों तथा संबंधित सरकारी विभागों के बीच समन्वित प्रयासों और राष्ट्रीय लक्ष्यों के प्रति बेहतर संरेखण पर केंद्रित हैं।

ये सुझाव सरकारी वाहनों तथा एग्रीगेटर बेड़ों के शत-प्रतिशत विद्युतीकरण, खास तौर पर कुछ चुनिंदा शहरों में सरकारी वाहनों तथा तिपहिया वाहनों के लिए अधिदेश जारी करने, ओईएम, बैटरी निर्माताओं तथा उपभोक्ताओं को वित्तीय समाधान पेश करने और चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित करने पर केंद्रित हैं।

इन बातों को लागू करने से भारत अपने आईसीई वाहनों को इलेक्ट्रिक गाड़ियों में तब्दील करने की बेहतर स्थिति में पहुंच जाएगा। देश में छोटे वाहनों जैसे 2 व्हीलर, 3 व्हीलर, इकॉनमी 4 व्हीलर और छोटे माल वाहनों की बड़ी संख्या को देखते हुए भारत के पास छोटे वाहनों के विद्युतीकरण में नेतृत्वकर्ता की भूमिका निभाने का मौका है। इसके अलावा भारत के 3.99 करोड़ दो पहिया वाहनों के इलेक्ट्रिक गाड़ियों में तब्दील होने से विदेश से हर साल भारी मात्रा में तेल के आयात पर होने वाला बहुत बड़ा खर्च भी बचेगा।

एक आत्मनिर्भर ईवी पारिस्थितिकी तंत्र बनाने के लिए उद्योग और केंद्र तथा राज्य सरकारों को प्रमुख संसाधनों, प्रौद्योगिकी वित्त पोषण और प्रोत्साहनों को एक साथ लाने की जरूरत है।

India’s 2030 e-mobility target calls for intensification of policy efforts

पश्चिम बंगाल में वायु प्रदूषण बन रहा है दिल और सांस की बीमारियों का कारक : अध्‍ययन

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पश्चिम बंगाल में वायु प्रदूषण पर क्लाइमेट ट्रेंड्स और आईआईटी दिल्ली का अध्ययन

नई दिल्ली, 24 जुलाई 2022. कोलकाता और उसके आसपास के इलाकों में अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों ही तरह से वायु प्रदूषण के संपर्क में आने के कारण दिल और सांस संबंधी बीमारियां पैदा हो रही हैं। क्लाइमेट ट्रेंड्स और आईआईटी दिल्ली द्वारा पश्चिम बंगाल में वायु प्रदूषण पर जारी एक ताजा रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ है।

अध्ययन से यह भी जाहिर हुआ है कि उत्तरदाताओं में लोअर रेस्पिरेटरी सिम्टम्स (lower respiratory symptoms एलआरएस) के मुकाबले अपर रेस्पिरेटरी सिम्टम्स (upper respiratory symptoms यूआरएस) का ज्यादा असर है।

क्लाइमेट ट्रेंड्स ने यह रिपोर्ट सेंटर फॉर एटमॉस्फेरिक साइंस (सीएएस) और आईआईटी दिल्ली के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर रिसर्च इन क्लाइमेट चेंज एंड एयर पलूशन (सीईआरसीए) के तकनीकी सहयोग से तैयार की है।

अध्ययन का उद्देश्य पश्चिम बंगाल में वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभावों के प्रमाण जुटाना

अपनी तरह के इस पहले अध्ययन का उद्देश्य पश्चिम बंगाल की आबादी के अलग-अलग वर्गों में वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रभावों के प्रमाण जुटाना था (Objective of the study To collect evidence on health effects due to air pollution in West Bengal)। इसके तहत पश्चिम बंगाल के 7 क्षेत्रों कोलकाता, हावड़ा, आसनसोल, हल्दिया, बैरकपुर, बर्धमान और बरासात में फील्ड सर्वे किया गया ताकि जन स्वास्थ्य पर वायु प्रदूषण के जमीनी स्तर पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन किया जा सके।

सर्वे के दौरान 1155 लोगों से की गई विस्तृत बातचीत के माध्यम से वायु प्रदूषण के संपर्क में आने के विभिन्न स्तरों से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों को जोड़ा गया है।

इस अध्ययन की रिपोर्ट को पश्चिम बंगाल के परिवहन नगर विकास आवासन एवं स्थानीय निकाय मामलों के कैबिनेट मंत्री तथा कोलकाता के मेयर श्री फिरहाद हाकिम की मौजूदगी में जारी किया गया।

इस दौरान कोलकाता नगर निगम की जलवायु एवं सौर कमेटी के अध्यक्ष श्री देबाशीष कुमार और पश्चिम बंगाल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष डॉक्टर कल्याण रुद्र भी मौजूद थे।

वायु प्रदूषण को पर्यावरण से जुड़े दुनिया के सबसे बड़े जोखिम के तौर पर पहचाना गया है। ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिजीज (जीबीडी 2019) ने भारत में वायु प्रदूषण को मौतों और विकलांगता के एक प्रमुख कारण के तौर पर घोषित किया है। पश्चिम बंगाल में 7 नान-अटेनमेंट शहर हैं, लिहाजा वायु प्रदूषण इस राज्य के लोगों के लिए खतरा बना हुआ है। हालांकि भारत में इसे साबित करने के लिए जमीनी स्तर पर सीमित संख्या में ही प्रमाण उपलब्ध हैं।

क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला ने कहा “चूं‍कि वायु की गुणवत्ता की निगरानी का तंत्र मजबूत किया गया है और प्रदूषण शमन के उपाय किए जा रहे हैं, मगर साथ ही साथ एक राष्ट्रीय जन स्वास्थ्य डाटा भी बनाए जाने की जरूरत है जिससे विज्ञान आधारित निर्णय निर्माण में आसानी हो। यह अध्ययन भारत के शहरी के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी वायु प्रदूषण के नियंत्रण के लिए नीति स्तरीय कार्य की जरूरत को मजबूती से सामने रखता है।”

aarti khosla
क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला

डेटा से जाहिर होता है कि अध्ययन के दायरे में शामिल किए गए विभिन्न स्थानों पर पिछले 1, 2, 5, 10 और 20 वर्षों के दौरान पीएम2.5 का औसत संकेंद्रण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक बना रहा। इससे पता चलता है कि लोग बहुत लंबे समय से खराब गुणवत्ता वाली हवा की चपेट में हैं।

अध्ययन के मुताबिक जहां नगरीय इलाकों में लोवर रेस्पिरेटरी सिम्टम्स की समस्या आम है, वहीं ग्रामीण इलाकों में अपर रेस्पिरेट्री सिम्टम्स के ज्यादा मामले प्रकाश में आए हैं।

शहरी इलाकों पर नजर डालें तो 20 साल तक के लोगों में यूआरएस का सबसे ज्यादा प्रभाव नजर आया। वहीं, शहरी (8%)तथा ग्रामीण (8.36%) दोनों ही इलाकों में 50 साल या उससे अधिक के लोगों में एलआरएस का सबसे ज्यादा प्रभाव पाया गया।

मानस का बयान

इस अध्ययन से यह भी जाहिर हुआ है कि ग्रामीण तथा शहरी दोनों ही इलाकों में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में अपर रेस्पिरेट्री सिम्टम्स के मामले उल्लेखनीय रूप से ज्यादा हैं जो इस बात का इशारा है कि घर के अंदर उत्पन्न होने वाला प्रदूषण उन्हें बहुत ज्यादा नुकसान पहुंचा रहा है। इससे यह भी जाहिर होता है कि लोअर रेस्पिरेट्री सिम्टम्स के लिए समय के साथ दीर्घकालिक सहसंबंध बढ़ता गया और पुरुषों की आबादी में पीएम स्तर के साथ एक उच्च सहसंबंध पाया गया।

-साग्निक डे

नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम (एनसीएपी) के तहत नॉन अटेनमेंट शहरों के लिए महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किए गए हैं। प्रमाणों से यह जाहिर होता है कि हमें राज्य में एक बड़ी आबादी के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए अपने क्षेत्र का विस्तार करने की जरूरत क्यों है।

-फिरहाद हाकिम

अध्ययन की मुख्य बातें

ग्रामीण इलाकों के मुकाबले नगरीय क्षेत्रों में पीएम 2.5 का स्तर ज्यादा था। अध्ययन के दायरे में शामिल किए गए विभिन्न स्थानों पर पिछले 1, 2, 5, 10 और 20 वर्षों के दौरान पीएम2.5 का औसत संकेंद्रण केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमा 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक रिकॉर्ड किया गया।

ग्रामीण क्षेत्रों (19.13%) के मुकाबले नगरीय इलाकों (27.27%) में अपर रेस्पिरेट्री सिम्टम्स के ज्यादा मामले पाए गए।

20 साल तक के नौजवान लोगों में यूआरएस का प्रभाव सबसे ज्यादा (31%) दिखाई दिया।

शहरी (8%)तथा ग्रामीण (8.36%) दोनों ही इलाकों में 50 साल या उससे अधिक के लोगों में एलआरएस का सबसे ज्यादा प्रभाव पाया गया।

ग्रामीण 1.32% और शहरी 2.16% दोनों ही क्षेत्रों में महिलाओं में यूआरएस का स्तर उल्लेखनीय रूप से अधिक पाया गया।

जहां तक यूआरएस का सवाल है तो खासकर ग्रामीण इलाकों में पेशेवर लोगों (48.6%) में अन्य व्यावसायिक श्रेणियों के लोगों के मुकाबले स्वास्थ्य संबंधी अधिक प्रभाव विकसित हुए हैं।

ग्रामीण तथा शहरी दोनों ही क्षेत्रों में उद्यमियों तथा कामगारों के मुकाबले पेशेवर लोगों (29.17-40%) में एलआरएस का प्रभाव उल्लेखनीय रूप से ज्यादा पाया गया है।

मल्टीवेरिएट लॉजिस्टिक रिग्रेशन मॉडल की स्वास्थ्य परिणामों ने लघु एवं दीर्घकालिक परिवेशीय वायु प्रदूषण संपर्क के साथ एक उल्लेखनीय (p<0.01) और मजबूत सहसंबंध दिखाया है।

शहरी तथा ग्रामीण दोनों ही क्षेत्रों में अस्थमा ने उच्चतम सहसंबंध गुणांक (R2:0.95) दिखाया और हाइपरटेंशन ने दीर्घकाल के लिए सबसे कम (R2:0.78) सहसंबंध प्रदर्शित किया। इसके अलावा सीने में तकलीफ के साथ उच्चतम (R2:0.95) और गले में खराश ने अल्पकालिक संपर्क के साथ के साथ सबसे कम (R2:0.77) जुड़ाव जाहिर किया।

नगरीय क्षेत्रों में उच्च तथा मध्यम सामाजिक-आर्थिक स्तर वाले लोगों में यूआरएस का अधिक प्रसार देखा गया जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में मध्यम तथा निम्न आय वर्गो के लोगों में इसका ज्यादा फैलाव नजर आया।

एलआरएस के विकसित होने के मामले में पीएम2.5 के दीर्घकालिक संपर्क (20, 10 और 5 साल) के प्रभावों को देखा गया और दोनों के बीच उल्लेखनीय सकारात्मक जुड़ाव नजर आया। सभी लक्षणों की व्यापकता ने ग्रामीण आबादी के बीच दीर्घ अवधि एक्सपोजर में वृद्धि के साथ विषम अनुपात में बढ़ोत्तरी को प्रदर्शित किया है।

Air pollution is becoming a factor in heart and respiratory diseases in West Bengal: Study

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 19 जुलाई 2022 की खास खबर

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ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस | Top headlines of India today. Today’s big news 19 July 2022

दिन भर की खबर | आज की खबर | भारत समाचार |शीर्ष समाचार| हस्तक्षेप समाचार

विपक्ष के विरोध के चलते राज्यसभा दिनभर के लिए स्थगित

जीएसटी, महंगाई, अग्निपथ और अन्य मुद्दों पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी सदस्यों के विरोध प्रदर्शन के बाद मंगलवार को राज्यसभा की कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई।

हरियाणा : खनन माफिया ने नूंह में डीएसपी को डंपर से कुचलकर मार डाला

हरियाणा के नूंह जिले में खनन माफिया ने डीएसपी रैंक के एक पुलिस अधिकारी की डंपर से कुचलकर हत्या कर दी।

नूपुर शर्मा को सर्वोच्च न्यायालय से बड़ी राहत, 10 अगस्त तक नहीं होगी गिरफ्तारी

भाजपा की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा को पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ विवादास्पद टिप्पणी मामले में सर्वोच्च न्यायालय से राहत मिली है।

भीमा कोरेगांव मामला : वरवर राव की रेगुलर बेल याचिका पर 10 अगस्त को सर्वोच्च न्यायालय में सुनवाई

सर्वोच्च न्यायालय ने भीमा कोरेगांव मामले में आरोपी सुप्रसिद्ध साहित्यकार पी. वरवर राव की गिरफ्तारी पर रोक बढ़ा दी और अगली सुनवाई 10 अगस्त को निर्धारित की है।

अमित शाह पर ट्वीट मामले में फिल्म निर्माता अविनाश दास को गुजरात पुलिस ने हिरासत में लिया

गृह मंत्री अमित शाह की फोटो गिरफ्तार अधिकारी पूजा सिंघल के साथ शेयर करने मामले में गुजरात पुलिस ने फिल्म निर्माता अविनाश दास को हिरासत में लिया है। गुजरात पुलिस ने मुंबई से अविनाश दास को हिरासत में लिया है। उन्होंने अमित शाह की एक तस्वीर पूजा सिंघल के साथ ट्विटर पर पोस्ट की थी।

शिवसेना में संघर्ष का नया अध्याय लोकसभा पहुंची पार्टी की जंग

एकनाथ शिंदे ने शिवसेना पर दावा ठोकते हुए लोकसभा अध्यक्ष के सामने 12 सांसदों की परेड करा दी। शिंदे का दावा है कि शिवसेना के 19 में से 18 सांसदों का समर्थन उनके पास है। इधर, मुंबई में उद्धव ठाकरे ने पार्टी के वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक बुलाई है।

जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (जेएनपीसीटी) का संचालन पीपीपी मोड में होगा

जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह (जेएनपीसीटी) देश का पहला ऐसा बंदरगाह बन गया है, जिसके बुनियादी ढांचे पर बंदरगाह प्राधिकरण का शत प्रतिशत मालिकाना हक है तथा प्राधिकरण के नियमों का ही पालन किया जायेगा; परिचालन पीपीपी आधार पर होगा।

जेएनपीसीटी की क्षमता 1.5 मिलियन टीईयू से बढ़कर 1.8 मिलियन टीईयू हो जायेगी।

गुजरात पुलिस ने चाइल्ड पोर्नोग्राफी रैकेट का भंडाफोड़ कर एक गिरफ्तार किया

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जामनगर पुलिस ने एक व्यक्ति को गिरफ्तार कर राज्य की राजधानी गांधीनगर से चलाए जा रहे एक अंतर्राष्ट्रीय चाइल्ड पोर्नोग्राफी रैकेट का भंडाफोड़ करने का दावा किया है।

स्पेन में लू लगने से 510 लोगों की मौत

 स्पेन के स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा है कि देश के कुछ हिस्सों में हीट वेब चलने और पारा 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने पर भीषण गर्मी और लू लगने से 510 लोगों की मौत हो गई।

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने वैश्विक खाद्य संकट को लेकर किया मदद का आह्वान

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने चल रहे वैश्विक खाद्य संकट का समाधान करने के लिए साहसिक और समन्वित प्रतिक्रिया का आह्वान किया है।

अमेरिका में 2022 में 6 लाख से अधिक बच्चे कोविड-19 से हुए संक्रमित : रिपोर्ट

अमेरिकन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (एएपी) और चिल्ड्रन हॉस्पिटल एसोसिएशन की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि अमेरिका में 2022 में अब तक 60 लाख से ज्यादा बच्चे कोविड-19 से संक्रमित हुए हैं। पिछले चार हफ्तों में लगभग 287,000 मामले सामने आए हैं।

इजराइल में बेकाबू हुआ मंकीपॉक्स, 100 के पार पहुंचे मामले

इजराइल में मंकीपॉक्स के कुल मामले 100 के पार पहुंचे गए हैं। पिछले एक सप्ताह में 35 नए मामले सामने आए हैं, जिससे यह आंकड़ा बढ़कर 101 हो गया है। इसकी जानकारी काउंटी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने अपने एक बयान में दी।

हांग्जो में 23 सितंबर, 2023 से शुरू होंगे एशियन गेम्स

एशियाई गेम्स 2022 को चीन में मौजूदा कोविड-19 स्थिति के कारण स्थगित कर दिया गया था, लेकिन अब 23 सितंबर से 8 अक्टूबर, 2023 तक हांग्जो में आयोजित किया जाएगा।

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 08 जुलाई 2022 की खास खबर

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ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस

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दिन भर की खबर | आज की खबर | भारत समाचार |शीर्ष समाचार| हस्तक्षेप समाचार

जापान के पूर्व प्रधान मंत्री शिंजो आबे की गोली लगने से मौत

अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की रिपोर्ट्स के अनुसार, शुक्रवार को पश्चिमी जापान के नारा शहर में सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के लिए एक अभियान कार्यक्रम में एक भाषण के दौरान गोली लगने के बाद जापान के पूर्व पीएम शिंजो आबे का 67 वर्ष की आयु में निधन हो गया। मीडिया के अनुसार, घटना के बाद एक संदिग्ध को गिरफ्तार कर लिया गया है और वह हिरासत में है।

पीएम मोदी ने शिंजो आबे के निधन पर शोक व्यक्त किया, एक दिन के शोक की घोषणा की

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे के निधन पर शोक व्यक्त किया और शनिवार को एक दिन के राष्ट्रीय शोक की घोषणा की।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री जगन मोहन की मां ने वाईएसआर कांग्रेस छोड़ी

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाई.एस. जगन मोहन रेड्डी की मां और वाईएसआर कांग्रेस पार्टी की मानद अध्यक्ष वाई.एस. विजयम्मा ने पार्टी से इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि उन्हें अपनी बेटी वाईएस शर्मिला के साथ खड़े होने की जरूरत है, जिन्होंने पड़ोसी राज्य तेलंगाना में एक राजनीतिक पार्टी बनाई है।

कथित फेमा उल्लंघन में ईडी ने बड़े मीडिया समूह के शीर्ष प्रबंधन से पूछताछ की

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने टाइम्स ऑफ इंडिया जैसे कई प्रकाशनों वाली मीडिया दिग्गज बेनेट कोलमैन एंड कंपनी लिमिटेड (बीसीसीएल) के शीर्ष प्रबंधकों से पूछताछ की है।

सुप्रीम कोर्ट ने जुबैर को 5 दिन की सशर्त अंतरिम जमानत दी

ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को उनके खिलाफ उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा एक ट्वीट के लिए दर्ज एक मामले के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने पांच दिनों के लिए अंतरिम जमानत दे दी है।

भूस्खलन के कारण अस्थायी रूप से बंद किया गया जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे

प्राप्त जानकारी के मुताबिक तेज बारिश के कारण जम्मू-कश्मीर में कई जगहों से भूस्खलन की घटना सामने आई। जिसके चलते जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे आज अवरुद्ध रहा।

भाजपा आईटी सेल के हरियाणा प्रमुख अरूण यादव बर्खास्त

प्राप्त जानकारी के मुताबिक हरियाणा बीजेपी यूनिट ने आईटी सेल के प्रमुख अरुण यादव को पैगंबर और इस्लाम के खिलाफ विवादास्पद ट्वीट के चलते हटा दिया है।

देश में 18,815 नए कोविड-19 मामले मिले, 38 मौतें

स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक भारत में पिछले 24 घंटों में 18,815 संक्रमणों के साथ कोविड-19 के मामलों में मामूली गिरावट देखी गई, जबकि पिछले दिन 18,930 मामले दर्ज किए गए थे।

वायु व जल प्रदूषण लील रहा भारतीयों की आयु!

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प्रदूषण के बारे में आम धारणा

भारतीय समाज में एक आम धारणा व्याप्त है कि वायु, जल, ध्वनि आदि के प्रदूषण से और मोबाइल टावरों से निकलने वाली इलेक्ट्रो मैग्नेटिक किरणों (Electro magnetic rays emanating from mobile towers) से जिसे हम आम बोलचाल की भाषा में रेडिएशन कह देते हैं, से केवल तमाम तरह के परिंदों और वन्यजीवों पर ही दुष्प्रभाव पड़ता है, हम मनुष्य इससे बिल्कुल निरापद हैं। लेकिन यह सोच बिल्कुल भ्रामक और सच से बहुत दूर है।

वायु प्रदूषण से हर वर्ष असमय मर जाते हैं 70 लाख लोग

सच्चाई यह है कि दुनिया के सभी लोगों का हितचिंतक विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भी इस दुनिया में वायु प्रदूषण से प्रतिवर्ष लगभग 70 लाख लोगों की असमय ही मौत हो जाती है, जिसमें 6 लाख बच्चे भी शामिल हैं।

हर पांचवें हृदयरोगी की मौत प्रदूषित वायु के कारण

कितने दुख की बात है कि हृदय संबन्धित बीमारियों से पीड़ित रोगियों की कुल मौतों में हर पांचवें व्यक्ति की मौत प्रदूषित वायु के कारण होती है।

रिपोर्ट में स्पष्ट है कि दिल की बीमारियों से पीड़ित मरीजों की जिंदगी दवाइयों और इस क्षेत्र में हो रहे शोध के अनुसार इस बात पर भी निर्भर करती है कि उनमें सांस के द्वारा उनके फेफड़ों में कैसी हवा अंदर जा रही है ?

स्पेन के मैड्रिड में यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी की साइंस कांग्रेस या Science Congress of the European Society of Cardiology में पेश एक शोध के अनुसार पीएम 2.5 कणों का प्रदूषण पूरे सप्ताह औसत से एक ग्राम /घनमीटर अधिक रहने पर भी वेंट्रिकुलर एरिथीमिया या Ventricular arrhythmia मतलब असामान्य दिल की धड़कन की समस्या 2.4 प्रतिशत, वहीं पूरे सप्ताह पीएम 10 कणों का प्रदूषण एक ग्राम /घन मीटर अधिक होने पर वेंट्रिकुलर एरिथीमिय का खतरा 2.1 प्रतिशत तक बढ़ जाता है।

हकीकत यह है कि पर्यावरण प्रदूषण सिर्फ जलवायु परिवर्तन के लिए ही खतरा का विषय नहीं है, बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के लिए भी यह बेहद खतरनाक है।

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट या Energy Policy Institute at the University of Chicago ने अपनी रिपोर्ट में भारत खतरनाक ढंग से बढ़ रहे प्रदूषण के संबंध में स्पष्ट तौर पर कहा है कि अगर इसे 25 फीसदी नीचे लाने में कामयाबी मिल गई तो भारतीय लोगों के जीवन प्रत्याशा या Life Expectancyमें राष्ट्रीय स्तर पर 1.4 साल और दिल्ली में 2.6 साल तक की बढ़ोत्तरी हो सकती है। भारत में अत्यधिक वायु प्रदूषण यहां के देशवासियों को स्वस्थ और लंबा जीवन देने की तमाम कोशिशों पर एक तरह से पानी फेर देने का काम करती है।

यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो के एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट ने हाल ही में जो एयर क्वालिटी लाइफ इंडेक्स रिपोर्ट (air quality life index report) जारी की है, वह बताती है कि सिर्फ खराब हवा भारत जैसे देशों के लोगों की आयु औसतन 5 साल तक कम कर देती है।

सबसे बुरा हाल भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और एनसीआर का है। यहां तो वायु प्रदूषण लोगों की जिंदगी के 10 साल तक छीन ले रहा है।

दुनिया में प्रदूषण के मामले में भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली अव्वल

अत्यधिक वायु प्रदूषण से भारत में हो रही बीमारियों और उससे मरने वाली घटना कोई नई या चौंकाने वाली बात नहीं है। वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों की चर्चा इस देश और अंतरराष्ट्रीय मंचों से भी लंबे समय से सुनाई देती आ रही है। प्रदूषण संबंधी हर राष्ट्रीय या अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट इस तथ्य को रेखांकित करती है कि दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर (Delhi’s air pollution level) हद दर्जे तक बढ़ा हुआ है और यह भी कि भारत के तमाम छोटे-बड़े शहरों में हवा अत्यधिक विषैली होती जा रही है।

इस रिपोर्ट में भी भारत को दुनिया का दूसरा सबसे प्रदूषित देश बताया गया है तो भारत की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का तो दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिनती होती रही है।

पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार सिगरेट और बीड़ी पीने से मानव स्वास्थ्य को उतना नुकसान नहीं होता है, जितनी हवा की खराब क्वॉलिटी की वजह से हो रहा है।

भारत के 51 करोड़ लोग प्रदूषण से प्रभावित

भारत में विशेषकर उत्तर भारत में वायु प्रदूषण की हालत (Condition of air pollution in North India) इतनी गंभीर है कि इस देश की कुल जनसंख्या की 40 प्रतिशत आबादी मतलब लगभग 51 करोड़ लोग अपने जीवन के 7.6 साल इसकी भेंट चढ़ाने को मजबूर हैं। भारत सरकार के नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम या National Clean Air Program एनसीएपी का उद्देश्य है कि वर्ष 2024 तक हवा में पर्टिक्युलेट मैटर के स्तर को 2017 के स्तर के मुकाबले 20 से 30 फीसदी नीचे लाना है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर इसे 25 फीसदी तक नीचे लाने में भी कामयाबी मिल गई तो जीवन प्रत्याशा में राष्ट्रीय स्तर पर 1.4 साल और दिल्ली में 2.6 साल तक इजाफा हो जाएगा। लेकिन यह तो भविष्य में 2024 के लिए की गई वादे की बात है। हकीकत इससे ठीक विपरीत है।

वायु प्रदूषण संबंधित जनवरी 2022 में आई एक रिपोर्ट के अनुसार नेशनल क्लीन एयर प्रोग्राम के लागू होने के तीन वर्ष बाद भी दिल्ली की हवा में प्रदूषण का स्तर कम करने में कोई खास सफलता  नहीं मिली है। पिछले दो दशकों में आर्थिक विकास, औद्योगीकरण और ईंधन की खपत में बेहिसाब बढ़ोत्तरी होने से हवा में प्रदूषण का स्तर और बढ़ गया है। मतलब केवल वायदे करने से बात नहीं बनने वाली है, इसके लिए ईमानदारी, प्रतिबद्धता और वास्तविक जमीनी धरातल पर काम करना ही होगा। कोई ऐसा रास्ता निकालना ही होगा, जिससे न्यूनतम आर्थिक नुकसान उठाकर हवा के प्रदूषण को भी कम किया जा सके।

प्रदूषण के क्या दुष्प्रभाव हैं ?

अत्यधिक वायु प्रदूषण से सांस की कई बीमारियों के साथ आंखों में जलन, हाईपरटेंशन, डिप्रेशन, डायबीटीज और हार्ट अटैक जैसी कई गंभीर बीमारियां भी हो सकतीं हैं।

हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, यातायात संबंधी प्रदूषण की वजह से बच्चों के दिमाग पर बहुत बुरा प्रभाव पड़ता है और यह उनमें कई तरह के मानसिक विकारों को जन्म देता है।

एक अन्य शोध के अनुसार अत्यधिक प्रदूषण से औरतों में गर्भपात तक का भी खतरा हो जाता है।

पर्यावरण प्रदूषण हमारे स्वास्थ्य के लिए कितना ख़तरनाक होता जा रहा है, इसका अनुमान हम इस प्रकार लगा सकते हैं कि वैज्ञानिकों के अनुसार आज सांस लेने वाली हवा से लेकर पानी, फल, सब्जियां, दूध, मिठाईयां, दवा आदि से लेकर बाजार में बिकने वाली रोजमर्रा की समस्त चीजें ही प्रदूषित हो गई हैं। और कई तरह की बीमारियों का कारण बन गई हैं।

प्रदूषण के कारक तत्व (factors of pollution)

वायु के प्रदूषित होने के कई कारण हैं, जिनमें मुख्य हैं फैक्टरी और कारखानों से निकलने वाला धुआं, एसपीएम यानी सस्पेंडेड पार्टिक्युलेट मैटर, सीसा और नाइट्रोजन ऑक्साइड, प्रदूषण फैलाने में कूड़ा-कचरा भी अहम भूमिका निभा रहा है।

भारत के गांवों, कस्बों और शहरों में अक्सर जगह-जगह कूड़ा जलाए जाने और फेंकने से कई हानिकारक गैसें उत्पन्न होती हैं और स्वच्छ हवा के साथ मिलकर उसे जहरीला बना देती हैं। इसके अतिरिक्त फैक्टरियों और कारखानों से निकलने वाला अति विषाक्त, रासायनिक कचरा भारत की कथित मां कही जाने वाली नदियों में यूं ही बहा दिया जाता है। गंदे नालों से निकलने वाला पानी नदियों में मिलकर उसे प्रदूषित बना देता है। यही प्रदूषित पानी लोगों में डायरिया, टाइफॉइड, पेचिश और हैजा जैसी अनेक जानलेवा बीमारियां फैलाने में अपनी अहम भूमिका निभाता है।

खुद को प्रदूषण से कैसे बचाएं ?      

पर्यावरण को बचाने के लिए सरकार को तो कुछ नीतियां बनानी ही चाहिए, लेकिन इसके अलावा अपने स्तर पर भी हमें कुछ कदम उठाने चाहिएं। जैसे ऐसे सामानों का हमें इस्तेमाल करना चाहिए जो रीयूजेबल हों यानी जिन्हें दोबारा हम  इस्तेमाल कर सकें।

जब भी कमरे या घर से बाहर निकलें तो सभी लाइटें और पंखे बंद कर दें। अगर आसपास ही किसी दुकान या पड़ोस में जाना हो, तो कार या पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बजाय साइकिल का इस्तेमाल करें या फिर धीरे-धीरे ही सही पैदल चलकर जाएं।

जब प्रदूषण एक सीमा से भी अधिक हो तो जितना संभव हो हृदय के रोगियों को अपने घर के अंदर ही रहना चाहिए, अगर बाहर जाना बहुत जरूरी हो तो बढ़िया क्वालिटी के मास्क पहनकर ही बाहर निकलना चाहिए।

गाड़ी, घर या अन्य चीजों की साफ-सफाई के लिए खतरनाक केमिकल आधारित उत्पादों की जगह इको-फ्रेंडली उत्पाद इस्तेमाल करें।

निर्मल कुमार शर्मा

Air and water pollution is taking the age of Indians!

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 07 जुलाई 2022 की खास खबर

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ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस

Top headlines of India today. Today’s big news 07 July 2022

दिल्ली एयरपोर्ट पर हेमंत सोरेन ने लालू प्रसाद यादव से मुलाकात की

राष्ट्रीय जनता दल (राजग) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती है। उन्हें बीती रात एयर एंबुलेंस से पटना से दिल्ली लाया गया। इस दौरान उनसे मिलने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दिल्ली एयरपोर्ट पर पहुंचे।

सत्येंद्र जैन को निलंबित करने की मांग वाली याचिका खारिज

दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन को कथित धनशोधन मामले में 31 मई से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की हिरासत में होने के कारण निलंबित करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया।

पहले अरुण जेटली मेमोरियल लेक्चरमें कल शामिल होंगे पीएम मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कल 8 जुलाई को दिल्ली के विज्ञान भवन में अरुण जेटली मेमोरियल लेक्चर (एजेएमएल) में हिस्सा लेंगे। इस दौरान वह जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

भारत में कोविड-19 के 18,930 नए मामले दर्ज, 35 मौतें

गुरुवार को बीते 24 घंटों में भारत में कोविड-19 के 18,930 नए मामले दर्ज किए गए हैं। यह आंकड़ा बुधवार को सामने आए 16,159 की तुलना में काफी अधिक हैं।

नए बीए.2.75 सब-वेरिएंट को अधिक गंभीर कहना जल्दबाजी होगी : सौम्या स्वामीनाथन

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की मुख्य वैज्ञानिक सौम्या स्वामीनाथन का कहना है कि पिछले महीने भारत से पहली बार रिपोर्ट किए गए नए ओमिक्रॉन सब-वेरिएंट बीए.2.75 को अधिक गंभीर कहना जल्दबाजी होगी।

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने “मिशन वात्सल्य योजना” के संबंध में दिशा-निर्देश जारी किए

महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने “मिशन वात्सल्य” योजना के विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं और राज्यों तथा केन्द्रशासित प्रदेशों के प्रशासनों से वर्ष 2022-23 के लिए इस संबंध में वित्तीय नियम दिशा-निर्देश के आधार पर अपने वित्तीय प्रस्ताव और योजनाएं तैयार करने को कहा है। “मिशन वात्सल्य” योजना के नियम एक अप्रैल 2022 से लागू होंगे।

यूपी : केशव प्रसाद मौर्य को हराने वाली विधायक पल्लवी पटेल अस्पताल में भर्ती

प्राप्त जानकारी के अनुसार अपना दल (कमेरावादी) की विधायक पल्लवी पटेल को कथित तौर पर ब्रेन स्ट्रोक के चलते लखनऊ के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

धोनी ने मनाया 41वां जन्मदिन, मिलीं बधाइयां

भारत के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी आज 7 जुलाई को 41 साल के हो गए हैं, जहां उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं देने वालों का तांता लगा हुआ है।

श्रीलंका के तीन और खिलाड़ी कोरोना संक्रमित

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच से पहले श्रीलंका के तीन खिलाड़ी कोविड से संक्रमित पाए गए हैं।

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 06 जुलाई 2022 की खास खबर

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ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस

Top headlines of India today. Today’s big news 06 July 2022

साजी चेरियन ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा, संविधान को लेकर दिया था विवादित बयान

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केरल के मंत्री साजी चेरियन ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने संविधान को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।

न्यूज एंकर रोहित रंजन की याचिका पर 7 जुलाई को सुनवाई करेगा सर्वोच्च न्यायालय

कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के वीडियो को ‘गलत तरीके से दिखाने’ के मामले में घिरे न्यूज एंकर रोहित रंजन की याचिका पर सर्वोच्च न्यायालय बुधवार को सुनवाई के लिए सहमत हो गया है।

मुख्तार अब्बास नकवी ने मंत्री पद से दिया इस्तीफा

केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया है।

कोलकाता पुलिस ने नूपुर शर्मा को फिर किया तलब, 30 दिन में तीसरा नोटिस भेजा

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कोलकाता पुलिस ने आज निलंबित भाजपा प्रवक्ता नूपुर शर्मा को एक और नोटिस जारी कर 11 जुलाई को शहर पुलिस के पूर्वी उपनगरीय डिवीजन के तहत नारकेलडांगा पुलिस स्टेशन में पूछताछ के लिए मौजूद रहने को कहा है।

नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग वाली याचिका पर आपात सुनवाई से सर्वोच्च न्यायालय का इनकार

सर्वोच्च न्यायालय ने भारतीय जनता पार्टी की पूर्व प्रवक्ता नूपुर शर्मा की गिरफ्तारी की मांग करती याचिका को तत्काल या आपात सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने से आज इनकार कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका ने पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी के मामले में नूपुर शर्मा को गिरफ्तार करने के निर्देश देने की मांग की थी। अधिवक्ता ने तत्काल लिस्टिंग की मांग करते हुए कहा कि पुलिस शिकायत के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

सर्वोच्च न्यायालय ने अधिवक्ता से रजिस्ट्रार के सामने उल्लेख करने को कहा।

पीएम मोदी कल एनईपी के कार्यान्वयन पर शिक्षा समागम का उद्घाटन करेंगे

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कल 7 जुलाई को वाराणसी में तीन दिवसीय अखिल भारतीय शिक्षा समागम का उद्घाटन करेंगे। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के सहयोग से शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन में सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के विश्वविद्यालयों के 300 से अधिक कुलपति विचार-विमर्श करेंगे।

बिहार में फिर से बढ़ने लगे कोरोना के मामले

बिहार में कोरोना संक्रमितों की संख्या एक बार फिर से रफ्तार पकड़ने लगी है। बिहार की राजधानी पटना में इसकी रफ्तार और तेज है। राज्य में मंगलवार को 338 नए मामले सामने आए, जिसमे पटना में 182 संक्रमित शामिल हैं। इधर, नए कोरोना संक्रमितों की बढ़ती संख्या के बाद राज्य में कोरोना के सक्रिय मरीजों की संख्या भी बढ़ने लगी है।

महाराष्ट्र में अफगानी सूफी संत की हत्या

अफगानिस्तान के एक सूफी संत की महाराष्ट्र के नासिक जिले में गोली मारकर हत्या कर दी गई। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने संदेह जताया है कि यह हत्या संपत्ति विवाद में की गई है।

आईआईटी मद्रास ने व्यक्तिगत कैंसर निदान के लिए एआई टूल विकसित किया

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास के शोधकर्ताओं ने एक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस-आधारित उपकरण तैयार किया है। शोधकर्ताओं के मुताबिक यह उपकरण किसी व्यक्ति में कैंसर पैदा करने वाले जीन की भविष्यवाणी कर सकता है, और व्यक्तिगत कैंसर उपचार रणनीतियों को तैयार करने का मार्ग प्रशस्त करता है।

हिमाचल के कुल्लू में बादल फटने से 4 लोग बहे

प्राप्त जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले की पार्वती घाटी में बुधवार को बादल फटा, जिसमें कम से कम चार लोग बह गए।

भारत में कोरोना के मामलों में बढ़ोत्तरी, 16,159 नए मामले दर्ज, 28 मौतें

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय मुताबिक भारत में बुधवार को बीते 24 घंटों में कोविड-19 के 16,159 नए मामले दर्ज किए। यह संख्या मंगलवार को सामने आई 13,086 से अधिक है।

घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में 50 रुपये की बढ़ोतरी

रसोई गैस सिलेंडर के दाम बढ़े – घरेलू रसोई गैस सिलेंडर की कीमतों में इजाफा हुआ है। इनकी कीमत में 50 रुपये की बढ़ोतरी की गई है। बढ़ी हुई कीमत आज से लागू हो गई है।

तमिलनाडु में 20 सितंबर से होगी अग्निवीर भर्ती

अग्निवीर भर्ती रैली तमिलनाडु के 11 जिलों के लिए तिरुपुर में 20 सितंबर से एक अक्टूबर तक आयोजित की जाएगी।

चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेताया, अमेरिका में बढ़ सकता है मंकीपॉक्स का प्रकोप

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका के चिकित्सा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि सरकार के सुस्त रवैये के कारण संयुक्त राज्य अमेरिका में मंकीपॉक्स के प्रकोप और बढ़ सकता है।

तृणमूल सांसद महुआ मोइत्रा पर भोपाल में मामला दर्ज

फिल्म काली के पोस्टर को लेकर विवाद के बीच पश्चिम बंगाल से तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा एक बयान के चलते मुसीबत में फंस गई हैं, उनके खिलाफ मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की अपराध शाखा में धार्मिक भावनाएं भड़काने का प्रकरण दर्ज किया गया है।

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वायु प्रदूषण सर्दियों में ही नहीं, गर्मियों में भी है एक बड़ी समस्या

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नई दिल्ली, 06 जुलाई 2022. जहां आमतौर पर यह माना जाता है कि वायु प्रदूषण सर्दियों के दौरान होने वाली समस्या है, वहीं 10 शहरों के गर्मियों के दौरान जुटाये गए सरकारी डाटा पर नज़र डालें तो पता चलता है कि गर्मियों के महीनों में पीएम2.5 और पीएम10 के प्रति माह स्तर इन ज्यादातर महीनों में क्रमशः 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सुरक्षित सीमाओं से अधिक रहे हैं।

वायु प्रदूषण का मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है

फिलहाल प्रदूषण को लेकर जो भी नीतिगत निर्णय और कार्य किये जा रहे हैं, वे सभी सर्दियों के कुछ महीनों को ध्यान में रखकर ही हो रहे हैं। हालांकि सच्चाई यह है कि हम साल के ज्यादातर महीनों में वायु प्रदूषण के उच्च स्तरों की जद (high levels of air pollution) में होते हैं जिनका मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए यह ज़रूरी है कि वायु प्रदूषण से निपटने के लिए नीतियां (policies to combat air pollution), सिर्फ सर्दियों को नहीं बल्कि गर्मियों के महीनों को भी ध्यान में रख कर बनाई जाएँ।

वायु प्रदूषण शुष्क मौसम के दौरान क्यों बढ़ जाता है? | Why does air pollution increase during the dry season?

air pollution

इस परिस्थिति का विज्ञान समझाते हुए स्काईमेट वेदर में मौसम विज्ञान और जलवायु परिवर्तन विभाग में वाइस प्रेसिडेंट, महेश पलावत, का मानना है कि, “इस साल, मार्च और अप्रैल के दौरान प्री-मानसून बारिश लगभग शून्य थी और मार्च के दूसरे सप्ताह में ही हीटवेव की स्थिति भी शुरू हो गई थी। ऐसे लगातार शुष्क मौसम के दौरान, वायु प्रदूषण बढ़ जाता है क्योंकि बारिश प्रदूषकों को नहीं धोती है और धूल के कण जो पीएम 10 का गठन करते हैं, निचले वातावरण में बने रहते हैं। बलूचिस्तान, मध्य पाकिस्तान और थार रेगिस्तान से पश्चिमी हवाएं भी लंबे समय तक भारत-गंगा के मैदानों और मध्य भारत के कुछ हिस्सों और दक्षिण प्रायद्वीप यानी तेलंगाना, विदर्भ, मराठवाड़ा आदि में बहती रहीं। इसका मतलब है कि गर्मियों के महीनों में प्रदूषण खराब श्रेणी में रहा। आमतौर पर, जून के दूसरे पखवाड़े तक, देश के कई हिस्सों में प्री-मानसून बारिश होती है, जो हवा को साफ करती है, लेकिन इस साल ऐसा नहीं हुआ। इस साल, मध्य पूर्व में धूल भरी आंधी चली और हवाओं ने धूल को मुंबई, मध्य महाराष्ट्र और देश के मध्य भागों जैसे शहरों तक पहुँचाया। जलवायु परिवर्तन के कारण ऐसी घटनाएं बढ़ती रहेंगी और इसलिए वायु प्रदूषण के स्तर को भी प्रभावित करती हैं।”

मौजूदा अध्ययन के लिए देश के 10 नॉन अटेनमेंट शहरों आगरा, बेंगलुरु, चंडीगढ़, चेन्नई, दिल्ली, कोलकाता, जोधपुर, मुंबई, लखनऊ, और पटना को चुना गया और इनमें मार्च, अप्रैल, मई तथा जून के महीनों के दौरान पीएम2.5, पीएम10 और एनओ2 के औसत स्तरों की निगरानी की गई।

हालांकि भारतीय मौसम विभाग जून को मानसून का महीना मानता है, मगर देश के विभिन्न हिस्सों में यह महीना ज्यादातर सूखा ही रहा। इसी वजह से इस महीने को भी इस विश्लेषण का हिस्सा बनाया गया है।

पीएम 2.5, पीएम10 और एनओ2 के लिए सालाना औसत अनुमन्य सीमा

सीपीसीबी ने पीएम 2.5, पीएम10 और एनओ2 के लिए जो सालाना औसत अनुमन्य सीमा तय की हैं, वे क्रमशः 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 40 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।

वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमाओं की बात करें तो यह क्रमशः 5 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर, 15 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर और 10 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर है।

गर्मियों में कैसा रहा इस वर्ष शहरों का हाल?

डाटा के मुताबिक चेन्नई को छोड़कर बाकी सभी शहरों का पीएम2.5 स्तर मार्च 2022 में अनुमन्य सीमा से अधिक रहा जबकि पीएम10 स्तर की बात करें तो यह सभी शहरों में सुरक्षित सीमा से ज्यादा ही रहा। अप्रैल में सिर्फ कोलकाता में इन स्तरों में सुधार हुआ और कोलकाता तथा चेन्नई ने ही पीएम2.5 की सुरक्षित सीमा को पार नहीं किया।

सिर्फ चेन्नई ही ऐसा एकमात्र शहर रहा जहां अप्रैल माह के दौरान पीएम10 के स्तर सुरक्षित सीमाओं के अंदर ही रहे। मई के महीने में भी यही रुख बना रहा और सिर्फ चेन्नई, बेंगलुरु तथा कोलकाता में ही पीएम2.5 के स्तर सुरक्षित सीमाओं के अंदर रहे। वहीं, कोई भी शहर पीएम10 स्तरों के मामले में सुरक्षित मानकों को पूरा नहीं कर सकता। इस साल जून में देश के कुछ हिस्सों में बारिश हुई जिससे आगरा, बेंगलुरु, चेन्नई, कोलकाता और मुंबई शहरों में पीएम2.5 के स्तरों में सुधार हुआ और वह सीपीसीबी द्वारा निर्धारित सुरक्षित सीमाओं के अंदर रहे।

जून के महीने में बेंगलुरु चेन्नई और मुंबई में पीएम10 के स्तर 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर की सीमा के अंदर ही रहे।

2021 बनाम 2022

इस साल पूरा देश मार्च के महीने से ही जबरदस्त तपिश की जद में रहा और इस दौरान हर जगह तापमान ने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए।

मार्च का महीना पिछले 121 वर्षों के दौरान दर्ज किया गया सबसे गर्म मार्च रहा और इस दौरान पूरे देश का औसत अधिकतम तापमान 33.1 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया जो अब तक का सर्वाधिक है जो सामान्य से 1.86 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा। बाद के महीनों में भी कमोबेश यही हाल बना रहा।

अत्यधिक गर्मी की वजह से बिजली का संकट (power crisis) भी पैदा हुआ, नतीजतन और ज्यादा मात्रा में कोयला जलाया गया जो कि प्रदूषण का एक प्राथमिक स्रोत है। हीटवेव के दौरान अत्यधिक तपिश और ठहरी हुई हवा के कारण न सिर्फ ओजोन प्रदूषण (ozone pollution) बढ़ा बल्कि पार्टिकुलेट प्रदूषण (particulate pollution) में भी वृद्धि हुई। स्थानीय स्तर पर लंबे समय तक सूखी गर्मी पड़ने के कारण हवा में तैरने वाले धूल के कणों की मात्रा में भी वृद्धि हुई।

मानसूनपूर्व बारिश लगभग न के बराबर होने के कारण गर्मी की दुश्वारियां और भी ज्यादा बढ़ गईं। खास तौर पर उत्तर पश्चिमी मैदानी इलाकों में, जिन्हें वायु प्रदूषण के लिहाज से हॉटस्पॉट माना जाता है।

वर्ष 2021 से तुलना करें तो इस अध्ययन में लिए गए महीनों के दौरान ज्यादातर शहर जाहिर तौर पर पीएम2.5 और पीएम 10 के ऊंचे स्तरों से जूझते रहे। मिसाल के तौर पर सिर्फ मार्च के महीने में पीएम10 के स्तरों को छोड़ दें तो दिल्ली में पीएम2.5 और पीएम10 के स्तर 2021 के मुकाबले 2022 के इन 4 महीनों में अधिक रहे। यही हाल पटना का भी रहा।

इन दोनों शहरों में पीएम 2.5 और पीएम10 के स्तर सीपीसीबी के मानकों से 5 गुने से ज्यादा ऊंचे रहे।

गर्मियों के दौरान प्रदूषणकारी तत्वों में हिस्सेदारी (Share of polluting elements during summer)

इस विश्लेषण के दायरे में लिए गए 10 शहरों में जहां पीएम2.5 के स्तर सुरक्षित सीमाओं से ज्यादा रहे, वहीं पीएम10 के स्तर भी उल्लेखनीय रूप से ऊंचे रहे और यह एक प्रमुख प्रदूषणकारी तत्व है।

आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि 10 में से 8 शहरों में पीएम10 के स्तर इन 4 महीनों के दौरान कभी भी सुरक्षित सीमा के अंदर नहीं रहे।

जून 2022 में बेंगलुरु का पीएम10 संकेंद्रण 58.49 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर रिकॉर्ड किया गया और पहले से ही 200 मिलीमीटर वर्षा होने के बावजूद यह सुरक्षित स्तरों को विरले ही हासिल कर पाया।

चेन्नई में भी पीएम10 का संकेंद्रण इस साल अप्रैल और जून के माह में ही सुरक्षित सीमाओं के अंदर रहा।

सर्वे के दायरे में लिए गए इन 10 शहरों में से पटना और दिल्ली में मार्च तथा अप्रैल के महीनों में नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (एनओ2) के स्तर वार्षिक सुरक्षित सीमाओं को पार कर गए। वहीं, चंडीगढ़ में अप्रैल से जून तक यही हाल रहा, जबकि आगरा, चेन्नई, जोधपुर और कोलकाता जैसे अनेक शहरों में पिछले वर्ष के मुकाबले इस साल एनओ2 के स्तरों में वृद्धि देखी गई। एनओ2 एक गैस है जिसका अधिक संघनन होने से वायु मार्गों में इन्फ्लेमेशन हो सकता है।

दिन-ब-दिन लंबे वक्त तक संपर्क में रहना

पीएम 2.5 के प्रतिदिन औसत स्तर उपलब्ध कराने वाले एनसीएपी ट्रैकर के हीट मैप कैलेंडर से जाहिर होता है कि अनेक शहर लगातार अत्यधिक प्रदूषित दिनों के लगातार चलते सिलसिले की चपेट में हैं।

अप्रैल 2022 में दिल्ली में कोई भी दिन ऐसा नहीं गुजरा जब पीएम 2.5 के स्तर सीपीसीबी द्वारा निर्धारित 24 घंटे की सुरक्षित सीमा यानी 60 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर के अंदर रहे हों।

इसी तरह मुंबई जैसे तटीय शहरों में सिर्फ नौ दिन ही ऐसे गुजरे जब पीएम 2.5 का संकेंद्रण स्तर सुरक्षित सीमाओं के अंदर रहा। इतने लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से मानव स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

Web title : Air pollution is a big problem not only in winter but also in summer

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 29 जून 2022 की खास खबर

top 10 headlines this night

ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस

Top headlines of India today. Today’s big news 29 June 2022

उदयपुर हत्याकांड : गृह मंत्रालय ने जांच एनआईए को सौंपी

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने उदयपुर में कन्हैया लाल हत्याकांड की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंप दी है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस मामले में कहीं कोई आतंकी पहलू तो नहीं है।

जमीयत उलेमा हिंद ने उदयपुर हत्याकांड की निंदा की

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जमीयत उलेमा हिंद ने राजस्था के उदयपुर में एक दर्जी की दर्दनाक हत्या को ‘गैर-इस्लामी’ करार दिया है।

झारखंड : उच्च न्यायालय ने राज्य के गृह सचिव को किया तलब, सभी जिला अदालतों में सीसीटीवी लगाने का निर्देश

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक झारखंड उच्च न्यायालय ने राज्य में गवाहों की सुरक्षा के मामले में राज्य के गृह सचिव को अदालत में तलब किया। बीते 8 जून को जमशेदपुर की एक कोर्ट में गवाही देने के कुछ घंटों बाद ही मनप्रीत सिंह नामक एक युवक की हत्या के मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए अदालत ने राज्य सरकार से जवाब मांगा था। इसी मामले में गृह सचिव राजीव अरुण एक्का अदालत में हाजिर हुए। उच्च न्यायालय ने उन्हें राज्य की सभी जिला अदालतों में हाई क्वालिटी सीसीटीवी कैमरा लगाने और सुरक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने का निर्देश दिया।

सर्वोच्च न्यायालय ने मुकेश अंबानी को सुरक्षा देने के मामले में त्रिपुरा उच्च न्यायालय के फैसले पर लगाई रोक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सर्वोच्च न्यायालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी और उनके परिवार को दिए गए सुरक्षा कवर की जांच करने के त्रिपुरा उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगा दी है।

भारत में कोविड के 14,506 नए मामले दर्ज, 30 मौतें

भारत में आज बीते 24 घंटों के दौरान 14,506 नए कोविड-19 के मामले दर्ज किए गए, जो मंगलवार को सामने आए 11,793 से काफी अधिक हैं।

डीआरडीओ और भारतीय सेना ने किया स्वदेशी लेजर-गाइडेड एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल का सफल परीक्षण

भारत में विकसित लेजर-गाइडेड एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) का रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा भारतीय सेना द्वारा 28 जून को सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया। यह परीक्षण मुख्य युद्धक टैंक (एमबीटी) अर्जुन से अहमदनगर में आर्मर्ड कोर सेंटर एंड स्कूल (एसीसी एंड एस) केके रेंज में किया गया।

कैबिनेट ने घरेलू उत्पादित कच्चे तेल की बिक्री के विनियमन को मंजूरी दी

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने 01 अक्टूबर 2022 से ‘घरेलू उत्पादित कच्चे तेल की बिक्री के विनियमन’ को मंजूरी दे दी है, सरकार ने कच्चे तेल और कंडेनसेट के आवंटन को रोकने का फैसला किया है। इससे सभी अन्वेषण और उत्पादन (ई एंड पी) ऑपरेटरों के लिए स्वतंत्र रूप से विपणन करना सुनिश्चित होगा। सरकार या उसकी नामित या सरकारी कंपनियों को कच्चा तेल बेचने के लिए उत्पादन साझाकरण अनुबंध (पीएससी) की शर्त में तदनुसार छूट दी जाएगी। सभी ई एंड पी कंपनियों को अब घरेलू बाजार में अपने क्षेत्रों से कच्‍चा तेल बेचने की स्‍वतंत्रता होगी।

देश के पहले स्वदेश निर्मित एमआरएनए कोविड वैक्सीन को डीसीजीआई ने दी मंजूरी

भारत के औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई) ने देश के पहले स्वदेशी एमआरएनए कोविड टीके को मंजूरी दे दी है। यह मंजूरी 18 साल और उससे अधिक आयु के लोगों के आपात इस्तेमाल के लिए दी गई है।

बिहार : विधानसभा में अग्निपथ को लेकर हंगामा जारी, अध्यक्ष के चैंबर के बाहर धरने पर बैठे विपक्षी विधायक

बिहार विधानसभा के मानसून सत्र के चौथे दिन आज विपक्ष ने अग्निपथ योजना को वापस लेने की मांग को लेकर हंगामा किया और सदन का वहिष्कार करते हुए विधानसभा अध्यक्ष के चैंबर के सामने धरने पर बैठ गए।

हाई स्पीड एक्सपैंडेबल एरियल टार्गेट – अभ्यास – का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण संपन्न

हाई स्पीड एक्सपैंडेबल एरियल टार्गेट (एचईएटी) का 29 जून, 2022 को ओडिशा के तट पर स्थित चांदीपुर के इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (आईटीआर) से सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण किया गया। उड़ान परीक्षण के दौरान निरंतर स्तर तथा उच्च गतिशीलता सहित कम ऊंचाई पर विमान का निष्पादन प्रदर्शित किया गया।

बिहार में एआईएमआईएम के 5 में से 4 विधायक राजद में शामिल

बिहार में ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहाद उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के चार विधायक राज्य की मुख्य विपक्षी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) में शामिल हो गए। इसके साथ ही बिहार में राजद सबसे बडी पार्टी हो गई। राजद के विधायकों की संख्या अब 80 हो गई।

शतरंज ओलंपियाड मशाल रिले ने उत्तर भारत के 20 शहरों से गुजरने के बाद पश्चिमी भारत में प्रवेश किया

पहली शतरंज ओलंपियाड मशाल रिले ने आज सुबह जयपुर पहुंचने के साथ ही पश्चिमी भारत में प्रवेश किया। अजमेर से गुजरने के बाद यह मशाल रिले अहमदाबाद में प्रवेश करेगी और फिर केवड़िया, वडोदरा, सूरत, दांडी, दमन, नागपुर, पुणे, मुंबई और पंजिम की यात्रा करेगी। इसके बाद यह मशाल रिले भारत के पूर्वी भाग, उत्तर-पूर्वी भारत में प्रवेश करेगी और दक्षिण भारत में समाप्त होगी।

उत्तर भारत के पहले चरण में, यह मशाल पिछले 10 दिनों में दिल्ली, जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल, पंजाब, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के 20 शहरों से होकर गुजरी।

नेपाल के तराई क्षेत्र में बारिश और बाढ़ से एक की मौत, सैकड़ों विस्थापित

नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार बारिश के कारण आई बाढ़ में एक व्यक्ति की मौत हो गई और सैकड़ों परिवार विस्थापित हो गए।

मंकीपॉक्स वायरस को रोकने के लिए अमेरिका में जल्द शुरू होगा टीकाकरण अभियान

व्हाइट हाउस ने कहा है कि वह मंकीपॉक्स के वायरस को रोकने के लिए जल्द ही देश भर में टीकाकरण अभियान शुरू करेगा।

फेसबुक और इंस्टाग्राम हटा रहे गर्भपात की गोलियों की पेशकश करने वाले पोस्ट

फेसबुक और इंस्टाग्राम ने अमेरिका में उन पोस्ट को तुरंत हटाना शुरू कर दिया है जो महिलाओं को गर्भपात की गोलियों की पेशकश करते हैं। साथ ही इन यूजर्स पर अस्थायी रूप से बैन भी लगा दिया है।

एक क्लिक में आज की बड़ी खबरें । 28 जून 2022 की खास खबर

top 10 headlines this night

ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस

Top headlines of India today. Today’s big news 28 June 2022

असम के सिलचर में 10 दिनों से बाढ़ में घिरे लोगों को जल जनित बीमारियां फैलने का खतरा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक असम में बराक नदी के पानी से 10 दिनों से घिरे सिलचर शहर के कई हिस्से आज भी पानी में डूबे रहे। यहां के निवासियों को अब जल जनित बीमारियों के फैलने की आशंका है।

पवन हंस हेलिकॉप्टर की अरब सागर में करनी पड़ी आपात लैंडिंग, पाँच को बचाया गया

प्राप्त जानकारी के अनुसार महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई से करीब 175 किलोमीटर दूर मुंबई हाई फील्ड्स के पास सागर किरण तेल रिग के पास एक पवन हंस हेलीकॉप्टर की अरब सागर के पानी में आपात स्थिति में लैंडिंग की गई।

महाराष्ट्र में राजनीतिक संकट के बीच दिल्ली पहुंचे देवेंद्र फडणवीस

महाराष्ट्र में जारी राजनीतिक संकट के बीच भाजपा नेता और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व के साथ स्थिति पर चर्चा करने के लिए राष्ट्रीय राजधानी पहुंचे।

तमिलनाडु आदिवासी छात्रों को देगा विशेष खेल प्रशिक्षण

प्राप्त जानकारी के अनुसार तमिलनाडु आदिवासी विभाग, जिला प्रशासन के सहयोग से आदिवासी छात्रों के लिए विशेष खेल प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रदान करेगा।

माकपा नेता टी. शिवदास मेनन का 90 वर्ष की उम्र में निधन

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वरिष्ठ माकपा नेता और केरल के पूर्व वित्त मंत्री टी. शिवदास मेनन का मंगलवार को कोझीकोड के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।

ब्राजील का केंद्रीय बैंक बोला : महंगाई का सबसे बुरा दौर खत्म

सेंट्रल बैंक ऑफ ब्राजील के अध्यक्ष रॉबटरे कैंपोस नेटो ने कहा कि महंगाई का सबसे बुरा दौर खत्म हो गया है।

51 साल के हुए दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलन मस्क

 टेस्ला और स्पेसएक्स के सीईओ एलन मस्क, जिन्हें दुनिया का सबसे सफल तकनीकी उद्यमी और निवेशक कहा जाता है, आज 51 वर्ष के हो गए।

उत्तर प्रदेश : लखीमपुर खीरी में पकड़ी गई आदमखोर बाघिन

Tigress captured in Dudhwa

वन विभाग की एक टीम ने मंगलवार तड़के उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के खेराटिया गांव से एक बाघिन को पकड़ने में कामयाबी हासिल की। बाघिन और उसके शावक के बारे में माना जाता है कि वह आदमखोर बन गया था, कथित तौर पर क्षेत्र में पिछले दो वर्षो में लगभग 21 लोगों की हत्या के लिए जिम्मेदार थे।

1 जुलाई 2022 से चिन्हित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं पर प्रतिबंध

भारत 1 जुलाई, 2022 से पूरे देश में चिन्हित एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं, जिनकी उपयोगिता कम और प्रदूषण क्षमता अधिक है, के निर्माण, आयात, भंडारण, वितरण, बिक्री और उपयोग पर प्रतिबंध लगाएगा।

समुद्री पर्यावरण सहित स्थलीय और जलीय इकोसिस्टम पर एकल उपयोग वाली प्लास्टिक  वस्तुओं के प्रतिकूल प्रभावों को वैश्विक स्तर पर पहचाना गया है। एकल उपयोग वाली प्लास्टिक वस्तुओं के कारण होने वाले प्रदूषण को दूर करना सभी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय चुनौती बन गया है।

29 जून, 2022 को मनाया जाएगा “सांख्यिकी दिवस”

सांख्यिकी दिवस 2022 की थीम है: सतत विकास के लिए डेटा

सांख्यिकी और आर्थिक नियोजन के क्षेत्र में प्रोफेसर (दिवंगत) प्रशांत चंद्र महलनोबिस के किए गए उल्लेखनीय योगदान के सम्मान में भारत सरकार ने उनकी जयंती के अवसर पर प्रत्येक वर्ष 29 जून को “सांख्यिकी दिवस” ​​के रूप में नामित किया है जिसे राष्ट्रीय स्तर पर मनाए जाने वाले विशेष दिवसों की श्रेणी में रखा गया है। इस दिवस का उद्देश्य सामाजिक-आर्थिक योजना और नीति निर्धारण में सांख्यिकी की भूमिका और इसके महत्व के बारे में प्रोफेसर (दिवंगत) महलनोबिस से प्रेरणा लेने के लिए विशेष रूप से युवा पीढ़ी में जन जागरूकता पैदा करना है।

इस वर्ष सांख्यिकी दिवस, 2022 का मुख्य कार्यक्रम सशरीर मौजूदगी-सह-आभासी मोड के माध्यम से आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन (एमओएसपीआई) और योजना राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय में राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह हैं।

पटना के बेउर जेल में 37 कैदी कोरोना संक्रमित

बिहार में एक बार फिर कोरोना ने तेज रफ्तार पकड़ ली है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि आज पटना की बेउर जेल के 37 कैदी कोविड-19 पॉजिटिव पाए गए हैं।

नवंबर में न्यूजीलैंड के खिलाफ टी20 और वनडे सीरीज खेलेगा भारत

ऑस्ट्रेलिया में आईसीसी टी20 विश्व कप के तुरंत बाद न्यूजीलैंड भारत के खिलाफ घर पर सीमित ओवरों की श्रृंखला खेलेगा।

खबरों में : रणजी ट्रॉफी, नासा, एकनाथ शिंदे, महाराष्ट्र, शिवसेना, रणजीतसिंहजी, मध्य प्रदेश क्रिकेट टीम, अपोलो ११.

आश्चर्य किंतु सत्य : अजन्मे बच्चे ने किया अपनी सरकार के खिलाफ मुकदमा

international news in hindi hastakshep

जलवायु निष्क्रियता के लिए भ्रूण ने अपनी सरकार पर मुकदमा दायर किया (Embryo sues his government for climate inaction)

नई दिल्ली, 25 जून 2022. जहां भारत में बड़े अपने तजुर्बों से नसीहत देते हैं कि कोर्ट-कचहरी और मुकदमेबाज़ी से बचना चाहिए, वहीं कोरिया से, इस नसीहत के ठीक उलट, एक हैरान करने वाली ख़बर आ रही है।

बीस हफ्ते के भ्रूण ने किया अपनी सरकार के खिलाफ मुकदमा

दरअसल कोरिया में एक बीस हफ्ते के भ्रूण (20 week old fetus) ने अपनी सरकार की नीतियों के खिलाफ़ मुकदमा किया है। वादी का कहना है कि कोरिया सरकार की ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन पर लगाम लगाने की नीतियां (policies to control greenhouse gas emissions) नाकाफ़ी हैं और एक लिहाज़ से उससे उसका जीने का संवैधानिक अधिकार छीनती हैं।

वूडपेकर नाम के इस अजन्मे बच्चे के साथ 62 और बच्चे भी इस मुकदमें में शामिल हैं, जिन्होंने कोरिया की एक अदालत में मामला दर्ज किया है।

बेबी क्लाइमेट लिटिगेशन (baby climate litigation)‘ नाम से चर्चित हो रहे इस मुकदमे में इन बच्चों के वकील ने इस आधार पर एक संवैधानिक दावा दायर किया है कि देश के 2030 तक के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (Nationally Determined Contribution), या NDC, या जलवायु लक्ष्य, वायु प्रदूषण पर लगाम लगाने के लिए नकाफ़ी हैं और बच्चों के जीने के संवैधानिक हक़ का हनन करते हैं।

इन 62 बच्चों में 39 पांच से कम उम्र के हैं, 22 की उम्र 6 से 10 साल के बीच है, और वुडपेकर अभी अपनी मां की कोख में पल रहा है।

ध्यान रहे कि कोरियाई संवैधानिक न्यायालय ने पहले भी एक संवैधानिक याचिका दायर करने के लिए भ्रूण की क्षमता को, यह देखते हुए, स्वीकार किया है कि “सभी मनुष्य जीवन के संवैधानिक अधिकार का विषय हैं, और जीवन के अधिकार को बढ़ते हुए भ्रूण के के लिए भी मान्यता दी जानी चाहिए।”

ली डोंग-ह्यून, जो वुडपेकर नाम के इस भ्रूण से गर्भवती हैं और एक छह साल के, मुक़दमे के  दूसरे दावेदार की मां भी है, कहती हैं,  “जब जब यह भ्रूण मेरी कोख में हिलता डुलता है, मुझे गर्व की अनुभूति होती है। मगर जब मुझे एहसास होता है कि इस अजन्मे बच्चे ने तो एक ग्राम भी कार्बन उत्सर्जित नहीं की लेकिन फिर भी इसे इस जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के दंश को झेलना पड़ता है और पड़ेगा, तो मैं दुखी हो जाती हूँ।

नीदरलैंड के 2019 के एक ऐतिहासिक मुकदमे से प्रेरित है कोरिया का बेबी क्लाइमेट लिटिगेशन 

यह मामला दरअसल नीदरलैंड में 2019 के एक ऐतिहासिक मुकदमे से प्रेरित है जहां मुकदमा करने वाले पक्ष की दलील के आगे कोर्ट ने सरकार को उत्सर्जन कम करने का आदेश दिया और फिर यह मामला एक नज़ीर बना जिसके चलते आयरलैंड से लेकर भारत तक, दुनिया भर में जलवायु संबंधी मुकदमेबाजी की लहर फैला दी।

वैसे कोरियाई नागरिक सरकार के खिलाफ जलवायु मुकदमे लाने में सक्रिय रहे हैं। वहाँ फिलहाल तीन मामलों में देश की जलवायु प्रतिबद्धताओं की संवैधानिकता को चुनौती दी गई है। 

इस ताजा मामले में, दावेदारों का कहना है कि ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को 40% तक कम करने का देश का 2030 का लक्ष्य असंवैधानिक है और भविष्य की पीढ़ियों के लिए बुनियादी अधिकारों की गारंटी नहीं दे सकता है। इनमें जीवन, समानता, संपत्ति और स्वस्थ और सुखद वातावरण में रहने के अधिकार शामिल हैं।

कोरिया में जलवायु प्रभाव तेजी से बढ़ रहा है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 1985 के बाद से प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान में वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप 2007 और 2016 के बीच 162 लोग हताहत हुए और 7.3 बिलियन पाउंड (£ 4.6 बिलियन) का नुकसान हुआ। रिपोर्टों के अनुसार, देश भविष्य में अधिक बार और भारी बाढ़ और वन आपदाओं का सामना करेगा। , आवासों और लुप्तप्राय प्रजातियों का नुकसान होगा, और चावल जैसे मुख्य खाद्य पदार्थों की कम पैदावार और गुणवत्ता घटने की संभावना है।

इन 62 बच्चों में से एक, 10 वर्षीय हान जे-आह का कहना है, “बड़े कहते तो हैं कि वे हमारे लिए पृथ्वी की रक्षा करेंगे, लेकिन ऐसा लगता नहीं कि उन्हें हमारे भविष्य कि इस दिशा में कोई चिंता है। बच्चों से अपेक्षाएँ करने से अच्छा है कि बड़े फौरन अपना कार्बन उत्सर्जन कम करना शुरू करें।”

03 जुलाई से शुरू होगा सबसे लंबा समुद्र तटीय स्वच्छता अभियान

garbage on the beach

समुद्री तटों से कचरा हटाने का महा-अभियान आगामी 03 जुलाई से शुरू होगा

नई दिल्ली, 22 जून 2022: पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा अब तक का सबसे लंबा समुद्र तटीय स्वच्छता अभियान आगामी 03 जुलाई को शुरू होने जा रहा है। 75 दिन तक चलने वाला यह अब तक का सबसे लंबा तटीय स्वच्छता अभियान (Longest Coastal Cleanliness Drive Ever) है, जिसका औपचारिक समापन 17 सितंबर, 2022 को आगामी ‘अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस’ (International Coastal Cleanup Day 2022) के अवसर पर होगा।

यह जानकारी पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय द्वारा हाल में जारी एक वक्तव्य में प्रदान की गई है।

तटीय स्वच्छता अभियान का लक्ष्य क्या है?

तटीय स्वच्छता अभियान का लक्ष्य (Goal of Coastal cleanup drive) समुद्री तटों से 1,500 टन कचरे को हटाना है। यह समुद्री जीवों और तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ी राहत होगी।

यह अभियान 03 जुलाई, 2022 को विवरणिका (ब्रोशर) के विमोचन और पत्रकारों के साथ बातचीत से शुरू होगा। पूरे देश, विशेष रूप से तटीय राज्यों में इस अभियान की औपचारिक शुरुआत होगी।

समुद्र तटीय स्वच्छता अभियान से जुड़ेंगी अनेक हस्तियां

अनेक चर्चित हस्तियां इस समुद्र तटीय स्वच्छता अभियान के अंतर्गत आयोजित होने वाले स्थानीय कार्यक्रमों में शामिल होंगी। विश्वविद्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों, एवं शोध संस्थानों के छात्रों/शोधार्थियों समेत अन्य विभिन्न सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थानों के प्रतिभागी और आम लोग भी इस अभियान में शामिल होंगे।

केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह द्वारा हाल में “अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस-2022” की तैयारियों की समीक्षा की गई है। भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक के अलावा पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और अन्य संगठनों के वरिष्ठ अधिकारी इस समीक्षा बैठक में उपस्थित थे।

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि इस साल यह आयोजन देश की आजादी के 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर मनाये जा रहे स्वतंत्रता के अमृत महोत्सव से मेल खाता है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक { Review meeting held in Ministry of Earth Sciences  (MoES) } के दौरान केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया है कि तटीय क्षेत्रों के अलावा गैर-तटीय क्षेत्रों में स्थित विभिन्न विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों में पर्यावरणजलवायु परिवर्तन विभागों/प्रभागों के माध्यम से ‘अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस’ पर स्थानीय लोगों तक संदेश पहुँचाने की योजना बनानी चाहिए।

समुद्री जीवन और समुद्री पारिस्थिकी तंत्र की रक्षा के लिए समुद्र तटों को साफ रखना आवश्यक है। अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) के अनुसार, विभिन्न प्रकार के उपयोग के लिए हर साल 30 करोड़ टन से अधिक प्लास्टिक का उत्पादन किया जाता है। हर साल कम से कम 1.40 करोड़ टन प्लास्टिक समुद्र में बहा दिया जाता है।

समुद्री मलबे का 80 प्रतिशत है प्लास्टिक कचरा

प्लास्टिक कचरा समुद्री सतह लेकर गहरे समुद्र की तलछट तक पाये जाने वाले सभी प्रकार के समुद्री मलबे के करीब 80 प्रतिशत हिस्से के बराबर होता है। समुद्री प्रजातियां प्लास्टिक कचरे  के कारण बड़े पैमाने पर प्रभावित हो रही हैं। इससे समुद्री जीव गंभीर चोटों का शिकार बनते हैं, और उनकी मौत हो जाती है। प्लास्टिक प्रदूषण खाद्य सुरक्षा और उसकी गुणवत्ता, मानव स्वास्थ्य, तटीय पर्यटन के लिए खतरा है, और जलवायु परिवर्तन में भी योगदान देता है।

स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर
marine ecosystem

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह अपनी तरह का पहला और सबसे लंबे समय तक चलने वाला तटीय स्वच्छता अभियान होगा, जिसमें सबसे अधिक संख्या में लोग हिस्सा लेंगे। उन्होंने कहा कि न केवल तटीय क्षेत्रों बल्कि देश के अन्य हिस्सों की समृद्धि को लेकर “स्वच्छ सागर, सुरक्षित सागर(Swachh Sagar, Surakshit Sagar) का संदेश देने के लिए इसमें आम आदमी की भागीदारी जरूरी है।

केंद्रीय मंत्री ने ‘अंतरराष्ट्रीय तटीय स्वच्छता दिवस’ के लिए लोगो, विज्ञापन, टैग लाइन और इससे संबंधित अन्य विषयगत पहलुओं का पूर्वावलोकन किया। इसके अलावा उन्होंने मुख्य समारोह की सफलता सुनिश्चित करने के लिए इसके पहले की गतिविधियों में शामिल अधिकारियों को भी निर्देश दिए हैं।

भारत की तटरेखा कितनी है?

भारत की तटरेखा (coastline of india) 7516.6 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 5,422.6 किलोमीटर मुख्यभूमि की तटरेखा है, और 2,094 किलोमीटर तटरेखा द्वीपीय क्षेत्रों की है। भारत में नौ तटीय राज्य हैं, जिनमें गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।

(इंडिया साइंस वायर)

A great campaign to remove garbage from beaches will start from July 03