शानदार ऑफ़र्स के साथ रिलायंस डिजिटल पर इलेक्ट्रॉनिक्स सेल

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रिलायंस डिजिटल पर डिजिटल इंडिया सेल

मुंबई, 12 अगस्त: रिलायंस डिजिटल पर सभी कैटेगरी में बड़े ऑफ़र्स के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स सेल की शुरुआत हो चुकी है। अपनी पसंदीदा टेक्नोलॉजी की खरीद पर 16 अगस्त तक अग्रणी बैंकों के कार्ड पर 10% तक के इंस्टेंट डिस्काउंट भी मिल रहा है। इसके अलावा, फाइनेंस के ढेर सारे विकल्पों के साथ अब आप अपनी अगली खरीदारी पर 10% इंस्टेंट डिस्काउंट के वाउचर प्राप्त कर सकते हैं। ऑफ़र्स का लाभ उठाने के लिए सिर्फ रिलायंस डिजिटल, माई जियो स्टोर्स पर खरीदारी करें।

अत्याधुनिक अल्ट्रा हाई डेफिनिशन टीवी कम क़ीमतों पर

दो साल की वारंटी के साथ 65-इंच का UHD एंड्रॉइड टीवी सिर्फ 49,990/-रुपये* की क़ीमत पर घर ले जाएँ, जबकि 2 साल की वारंटी के साथ 43-इंच UHD का एंड्रॉइड टीवी 19,990/- रुपये* की क़ीमत पर उपलब्ध है। 2nd gen एप्पल एयरपॉड्स 8490/- रुपये* की बेमिसाल क़ीमत पर उपलब्ध है।

लैपटॉप खरीदने वालों के लिए भी रिलायंस डिजिटल में बहुत कुछ है।

इंटेल Core i3, 8GB RAM और 512 SSD स्टोरेज वाले एक्सक्लूसिव HP स्मार्ट सिम लैपटॉप के साथ हमेशा कनेक्टेड रहें, जो 1295/-रुपये* की EMI के विकल्प के साथ 43,999/- की क़ीमत पर उपलब्ध है और इसके साथ 100GB Jio डेटा मुफ़्त दिया जा रहा है।

16GB RAM और 512GB SSD स्टोरेज वाला एसस गेमिंग लैपटॉप रिलायंस में सिर्फ 4666/-रुपये* की EMI के विकल्प के साथ 55,990/- रुपये की विशेष क़ीमत पर उपलब्ध होगा। इतना ही नहीं, इस दौरान खरीदारी करने वाले सभी ग्राहकों को निश्चित उपहार दिए जाएंगे, साथ ही कुछ भाग्यशाली विजेताओं को कार, बाइक, टीवी, फोन जीतने का मौका भी मिलेगा!

128GB स्टोरेज वाला नया iPhone 13 सिर्फ 65,500/-रुपये* में उपलब्ध है, साथ ही 64GB स्टोरेज वाला iPhone 12 अब सिर्फ 53,300/-रुपये* और 128GB स्टोरेज वाला iPhone 11 सिर्फ 47,900/-रुपये* की क़ीमत पर अतिरिक्त कैशबैक के साथ उपलब्ध है। साथ ही, डायनामिक एमोलेड 2X डिस्प्ले के साथ सैमसंग गैलेक्सी S22 अल्ट्रा पहले से कहीं ज्यादा किफायती दरों पर उपलब्ध है।  

घरेलू उपकरणों पर अच्छे डील्स के साथ घर के कामों से आज़ादी

सैमसंग डिशवॉशर को 29,990/-रुपये* में खरीदें और 9,990/-रुपये की क़ीमत वाला फिलिप्स गारमेंट स्टीमर मुफ़्त प्राप्त करें। साइड-बाय-साइड रेफ्रिजरेटर की खरीद पर आपको स्मार्टफोन, स्मार्टवॉच, टैबलेट और मिनी बार सहित कई रोमांचक उपहार मिलेंगे।

दो साल की वारंटी वाले फ्रंट-लोड वाशिंग मशीन के साथ कपड़े धोने की समस्या को भूल जाएँ, जो सिर्फ 18,990/-रुपये* की शुरुआती क़ीमत पर उपलब्ध है। छोटे अप्लायंसेज के ब्रेकफास्ट कॉम्बो की रेंज 1,799/-रुपये* से शुरू होती है। साथ ही आप एयर कंडीशनर और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सामानों पर 60% तक का ऑफ-सीजन डिस्काउंट भी प्राप्त कर सकते हैं। इतना ही नहीं, बिल्कुल नए माइक्रोवेव ओवन अब सिर्फ 6,490/-रुपये* की शुरुआती क़ीमत पर उपलब्ध हैं।

* नियम व शर्तें सभी ऑफ़र और कीमतों पर लागू हैं।

यह समस्त जानकारी रिलायंस डिजिटल की एक प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है। खरीदारी करते वक्त अपने विवेक का प्रयोग करें।

एचपी ने क्रिएटर्स को हाइब्रिड लाइफ़स्टाइल की सुविधा देने के लिए पेश किए नए ऑन-इन-वन पीसी

hp envy aio

क्रिएटर्स को काम और मनोरंजन के बीच आसानी से तालमेल बैठाने की सुविधा प्रदान करने के मकसद से खासतौर से डिज़ाइन किया गया

डिटैचेबल और रोटेटेबल तथा पांच अलग-अलग पोजिशन में घुमाए जा सकने वाले कैमरे के साथ पेश

लो ब्‍लू लाइट कम्‍फर्ट तथा आंखों की सुरक्षा के लिए आईसेफ (Eyesafe®डिस्प्ले

नई दिल्ली, 9 अगस्त- एचपी ने हाइब्रिड मॉडल पर काम करने वाले लोगों को काम और मनोरंजन का बेहतरीन अनुभव देने के लिए पीसी और टीवी की खूबियों[2] वाले ऑन-इन-वन पीसी की नई रेंज पेश की है। कंपनी की एक प्रेस विज्ञप्ति में जानकारी देते हुए बतकाया गया है कि नए ऑल-इन-वन पीसी में एचपी एन्वी 34 इंच और पैवेलियन 31.5 इंच शामिल हैं जो पावर और परफॉर्मेंस के लिए 11वें जेनरेशन और 12वें जेनरेशन इंटेल प्रोसेसर के साथ आते हैं। ये प्रोसेसर काम करने, कुछ तैयार करने और मनोरंजन के लिहाज से मल्टी-टास्किंग के लिए किया जा सकता है। टीवी की खूबियों की वजह से आधुनिक क्रिएटर्स कॉन्टेंट स्ट्रीमिंग से गेमिंग पर स्विच कर सकते हैं या हाइब्रिड परिवेश में बेहतर उत्पादकता के लिए एआईओ को दूसरी स्क्रीन के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं।

विज्ञप्ति के अनुसार रचनात्मकता को अभिव्यक्त करने के लिए एचपी एन्वी 34-इंच ऑन-इन-वन सबसे उपयुक्त प्लेटफॉर्म है। इस डिवाइस में एंटी-ग्लेयर डिस्प्ले है जिससे इस्तेमाल करने वाले की रचनात्मकता को सामने लाने का उपयुक्त माध्यम मिलता है। पीसी की स्लीक स्टाइल में तेज़ और घुमाया जा सकने वाला कैमरा भी आता है जिससे बेहतर व्यू के लिए कई पोजिशन से इसे इस्तेमाल करना आसान हो जाता है।

एचपी पैवेलियन 31.5 इंच ऑल-इन-वन पीसी को काम के आसान परिवेश से मनोरंजन के मज़ेदार अनुभव के बीच स्विच करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह काम, रचनात्मकता और मनोरंजन जैसी कई चीज़ों में काम आता है और इसलिए हाइब्रिड जीवनशैली के लिए यह इकलौता जगह बचाने वाला डिवाइस उपयुक्त पसंद है। स्थायित्व को लेकर एचपी की प्रतिबद्धता को ध्यान में रखते हुए एचपी पैवेलियन 31.5 इंच ऑल-इन-वन के कलपुर्जों को समुद्र में मिले प्लास्टिक और इस्तेमाल किए जाने के बाद रिसाइकल किए गए प्लास्टिक जैसी चीज़ों से बनाया गया है।  

विक्रम बेदीसीनियर डायरेक्टरपर्सनल सिस्टम्सएचपी इंडिया ने कहा, एचपी ने हमेशा ही ग्राहकों से मिली जानकारी के आधार पर इनोवेटिव प्रोडक्ट्स बनाने की कोशिश की है। जैसे-जैसे जीवनशैली हाइब्रिड होती जा रही हैहमारी कोशिश ऐसे अनुभव उपलब्ध कराने की है जो ग्राहकों के घर के परिवेश के हिसाब से मेल खा सकें। हमारे नए ऑन-इन-वन डेस्कटॉप आज के ज़माने के आधुनिक क्रिएटर्स की ज़रूरतों को पूरा करते हैं और कई डिवाइसों को इस्तेमाल किए बिना काममनोरंजन और रचनात्मकता में उनकी मदद करता है।” 

एचपी एन्वी 34-इंच ऑल-इन-वन
32 inch aio
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डिस्प्ले

•    TÜV सर्टिफाइड डिस्प्ले, जिसमें लो ब्लू लाइट कंफर्ट के लिए एडजस्ट किया जा सकने वाला ब्लू लाइट रिडक्शन फिल्टर है

•    5K[3] डिस्प्ले 21:9 आसपेक्ट रेशियो के साथ जो रचनात्मक प्रक्रिया में और काम को फिट कर सकता है

डिज़ाइन

•    बेहतर एंगल के लिए अलग-अलग पोज़िशन पर जाना डिटैच किए जा सकने वाले मैग्नेटिक कैमरा के साथ आसान

•    वीडियो चैट के लिए एडवांस कैमरा सेंसर और एचपी एन्हैंस्ड लाइटिंग

•    देखने के बेहतर अनुभव और अलग-अलग तरह की लाइटिंग में आराम के लिए एंटी-रिफ्लेक्शन ग्लास

•    अल्ट्रा-थिन, मुश्किल से दिखाई देने वाले 3 साइड वाले माइक्रो एज बेज़ेल डिस्प्ले, खूबसूरत दिखने वाले डिज़ाइन

परफॉर्मेंस

•    11वें जेनरेशन 8-कोर इंटेल® कोर आई9 प्रोसेसर[4] और NVIDIA® GeForce RTX के साथ इस्तेमाल करने वालों को रचनात्कता से जुड़ी ज़रूरतों को पूरा करने की ताकत मिलती है

•    बिनिंग टैक्नोलॉजी और बड़े सेंसर वाले 16 मेगापिक्सेल कैमरा के साथ बेहतर कॉन्ट्रास्ट और रेज़ोल्यूशन

•    एचपी क्विक ड्रॉप, एमेज़ॉन एलेक्स वॉयस असिस्टेंट, बेहतर क्रिएटिव आउटपुट के लिए एचपी इन्हैंस्ड लाइटिंग

•    बेस में बनी वायरलेस चार्जिंग के साथ नए स्तर की सुविधा का अनुभव करें

एचपी पैवेलियन 31.5-इंच ऑल-इन-वन

डिस्प्ले

•    HDR 400, DCI-P3 98% और QHD/sRGB 99% के साथ 31.5-इंच UHD[5] डिस्प्ले

•    एचपी आईसेफ® सर्टिफाइड, फ्लिकर-फ्री टीयूवी सर्टिफाइड, एंटी-ग्लेयर पैनल

डिज़ाइन

•    ENERGY STAR® सर्टिफाइड और EPEAT® सिल्वर रजिस्टर्ड

•    स्लीक और जगह बचाने वाली डिज़ाइन में वायरलेस माउस, कीबोर्ड और चार्जिंग के साथ हर तरह की तारों से छुटकारा

परफॉर्मेंस

•    12वें जेनरेशन इंटेल आई5 और आई7 प्रोसेसर के साथ

•    कई एचडीएमआई पोर्ट के साथ मनोरंजन की सभी ज़रूरतें पूरी होती हैं और ऑडियो बाई बीएंडओ के साथ बेहतर महसूस करें

•    यूनिवर्सल रिमोट स्विच के साथ रिमोट को सिर्फ एक बार क्लिक करके काम शुरू

कीमतें तथा उपलब्‍धता:

  • एचपी एन्‍वी 34-इंच ऑल-इन-वन वन डेस्‍कटॉप पीसी ₹1,75,999 की शुरुआती कीमत पर आकर्षक टर्बो सिल्‍वर कलर वेरिएंट में उपलब्‍ध
  • एचपी पैवेलियन 31.5-इंच ऑल-इन-वन वन डेस्‍कटॉप पीसी ₹99,999 की शुरुआती कीमत पर स्‍पार्कलिंग ब्‍लैक कलर वेरिएंट में उपलब्‍ध

HP introduces new All-In-One PCs to enable a hybrid lifestyle for creators

वायरलाइन ब्राडबैंड सेगमेंट में जियो फाइबर का धमाल

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जियो फाइबर से जुड़ रहे हैं हर 10 में से 8 नए वायरलाइन ब्राडबैंड ग्राहक

जियो नेटवर्क पर प्रति महीने 20.8 जीबी डेटा इस्तेमाल कर रहा है हर ग्राहक..

एयरटेल और वीआई की डेटा खपत मिला कर भी जियो की डेटा खपत से कम ..

वॉयस कॉलिंग प्रति माह प्रति ग्राहक 1000 मिनट के पार..

नयी दिल्ली, 24 जुलाई 2022: वायरलाइन ब्राडबैंड सेगमेंट में जियो फाइबर (Jio Fiber in the Wireline Broadband Segment) ने धमाल मचा रखा है। कंपनी के मुताबिक नए वायरलाइन ग्राहकों में से करीब 80 फीसदी ग्राहक जियो फाइबर से जुड़ रहे हैं। जियो फाइबर, वायरलाइन ब्राडबैंड सेगमेंट में नंबर वन की पोजीशन पर कायम है। कंपनी के मुताबिक ट्राई के आंकड़े भी इस बात की पुष्टि करते हैं।

वायरलैस ब्राडबैंड सर्विस में जियो टॉप पर

वायरलैस ब्राडबैंड सर्विस में भी 53 फीसदी मार्किट शेयर के साथ जियो टॉप (Jio tops in wireless broadband service) पर बनी हुई है। डेटा खपत के मामले में भी जियो कोसो आगे है। जियो के पास 60 फीसदी ‘डेटा ट्रैफिक मार्केट शेयर’ है, जो एयरटेल और वीआई की कुल जमा खपत से भी अधिक है। जियो नेटवर्क पर ग्राहक प्रति महीने औसतन 20.8 जीबी डेटा खर्च कर देते हैं। वहीं प्रति ग्राहक प्रति महीने वॉयस कॉलिंग ने भी 1000 मिनट से अधिक का आंकड़ा छू लिया है। 

तिमाही रिजल्ट बताते हैं कि रिलायंस जियो का प्रति यूजर प्रति माह रेवेन्यू भी 175.7 रु के स्तर पर जा पहुंचा है। रिलायंस जियो इंफोकॉम का वित्तीय वर्ष 2022-23 की पहली तिमाही का स्टैंडअलोन शुद्ध लाभ सालाना आधार पर करीब 24 प्रतिशत बढ़कर 4,335 करोड़ रुपये हो गया है।

आईआईटी हैदराबाद परिसर में मानव रहित वाहनों के लिए अत्याधुनिक केंद्र स्थापित

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नई दिल्ली, 05 जुलाई, 2022: केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) पृथ्वी विज्ञान, पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ जितेंद्र सिंह ने सोमवार को हैदराबाद में मानव रहित वाहनों के विकास के लिए अत्याधुनिक सुविधा केंद्र का उद्घाटन किया है।

आईआईटी हैदराबाद परिसर में स्वचालित नेविगेशन सुविधा केंद्र

यह एक स्वचालित नेविगेशन सुविधा केंद्र है, जिसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), हैदराबाद परिसर में स्थापित किया गया है।

मानव रहित वाहन विकसित किये जाएंगे

टेक्नॉलॉजी इनोवेशन हब ऑन ऑटोनोमस नेविगेशन (Technology Innovation Hub on Autonomous Navigation – TiHAN) नामक यह केंद्र विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के 130 करोड़ रुपये के अनुदान पर आधारित है। यह एक बहु-विषयक पहल है, जो भारत को भविष्य और अगली पीढ़ी की ‘स्मार्ट मोबिलिटी’ तकनीक में एक वैश्विक खिलाड़ी बनाने की क्षमता रखती है। अपनी तरह के इस पहले अत्याधुनिक सुविधा केंद्र में मानव रहित हवाई एवं स्थलीय वाहन विकसित किये जाएंगे।

डॉ जितेंद्र सिंह ने बताया कि दुनिया भर में नियंत्रित वातावरण में मानव रहित और इनसे जुड़े वाहनों के संचालन की जांच के लिए सीमित टेस्टबेड या प्रोविंग ग्राउंड (जहाँ परीक्षण होता है) मौजूद हैं। इसमें वास्तविक जीवन के यातायात संचालन में होने वाले विभिन्न परिदृश्यों का अनुकरण किया जाता है। ब्रिटेन में मिलब्रुक प्रोविंग ग्राउंड, अमेरिका में एम-सिटी, सिंगापुर में सेट्रान, दक्षिण कोरिया में के-सिटी, जापान में जरी आदि उदाहरण के तौर पर शामिल हैं। उन्होंने कहा कि भारत में स्वचालित वाहनों का आकलन करने के लिए वर्तमान में ऐसी कोई टेस्टबेड सुविधा नहीं है। इसीलिए, इस टेक्नॉलॉजी इनोवेशन हब ऑन ऑटोनोमस नेविगेशन (TiHAN) टेस्टबेड की आवश्यकता है।

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रौद्योगिकी दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए इस केंद्र ने मोबिलिटी क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई पहल की हैं। उन्होंने कहा कि टीआईएचएएन टेस्टबेड राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय दोनों स्तरों पर शिक्षा, उद्योग और अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं के बीच उच्च गुणवत्ता वाले अनुसंधान के लिए एक अनूठा मंच प्रदान करेगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का मोबिलिटी क्षेत्र दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में से एक है और टीआईएचएएन – आईआईटीएच स्वायत्त वाहनों के लिए भविष्य की प्रौद्योगिकी सृजन का स्रोत होगा। उन्होंने यह भी बताया कि स्वायत्त नेविगेशन (हवाई और जमीनी) पर टीआईएचएएन-आईआईटीएच टेस्टबेड हमें अगली पीढ़ी की स्वायत्त नेविगेशन प्रौद्योगिकियों का सटीक परीक्षण करने और तेजी से प्रौद्योगिकी विकास और वैश्विक बाजार में प्रवेश के लिए समर्थ बनाएगा।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि टीआईएचएएन विशेष रूप से इस दशक के राष्ट्रीय महत्व के कई अनुप्रयोग क्षेत्रों के लिए स्वायत्त यूएवी और जमीनी/सतह वाहनों का उपयोग करके एक वास्तविक समय सीपीएस प्रणाली विकसित और तैनात कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस टेस्टबेड में सिमुलेशन प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जिससे एल्गोरिदम और प्रोटोटाइप के नॉन-डिस्ट्रक्टिव परीक्षण संभव होंगे। स्थलीय प्रणालियों में, इन परिदृश्यों के कुछ उदाहरण स्मार्ट सिटी, सिग्नल वाले चौराहे, साइकिल चालकों और पैदल चलने वालों के साथ स्वचालित वाहनों का परस्पर संपर्क, वाहनों और सड़क किनारे इकाइयों के बीच वायरलेस नेटवर्किंग आदि हैं। स्वायत्त वाहन टेस्टबेड में डमी साइनबोर्ड, पैदल यात्री, ओवरपास और बाइक चालक भी होंगे, ताकि सभी तरह की वास्तविक स्थितियों में परीक्षण हो सके।

डॉ जितेंद्र सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत को भविष्य की प्रौद्योगिकियों का गंतव्य बनाने के लिए कई कार्यक्रम शुरू किए गए हैं। ऐसी ही एक पहल विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) की ओर से देश भर में बहु-विषयक साइबर भौतिक प्रणालियों (एनएम-आईसीपीएस) पर राष्ट्रीय मिशन के तहत 25 प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्रों की स्थापना है। इस मिशन के तहत, आईआईटी हैदराबाद को स्वायत्त नेविगेशन और डेटा अधिग्रहण प्रणाली (यूएवी, आरओवी, आदि) की तकनीकी शाखा में प्रौद्योगिकी नवाचार केंद्र प्रदान किया गया है।

एनएम-आईसीपीएस टेक्नोलॉजी इनोवेशन हब ऑन ऑटोनॉमस नेविगेशन (टीआईएचएएन) एक बहु-विषयक पहल है, जिसमें आईआईटी हैदराबाद में इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, कंप्यूटर विज्ञान एवं इंजीनियरिंग, मैकेनिकल और एयरोस्पेस इंजीनियरिंग, सिविल इंजीनियरिंग, गणित, डिजाइन, लिबरल आर्ट्स और उद्यमिता के शोधकर्ता शामिल हैं। वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान विभाग से टीआईएचएएन को वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान संगठन (एसआईआरओ- सीरो) के रूप में मान्यता प्राप्त है।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव डॉ श्रीवरी चंद्रशेखर ने बताया कि इस परीक्षण सुविधा में एक हवाई पट्टी, सॉफ्ट लैंडिंग क्षेत्र, ड्रोन रखने के लिए जगह (हैंगर), एक ग्राउंड कंट्रोल स्टेशन (जीसीएस), प्रदर्शन मूल्यांकन के लिए टेलीमेट्री स्टेशन शामिल है। एलआईडीएआर, रडार, कैमरा आदि जैसे पेलोड के प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जा रहा है। मैनुअल और स्वायत्त संचालन के बीच नियंत्रण संक्रमण और चालक रहित वाहनों की सार्वजनिक स्वीकृति पर अध्ययन किया जा रहा है। भारतीय परिदृश्य में विभिन्न अनुप्रयोगों के लिए नियमों और संचालन नीतियों को तैयार करने में मानव रहित वाहनों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण सहायता करेंगी।

(इंडिया साइंस वायर)

TiHAN: India’s first technology innovation hub on autonomous navigation facility launched at IIT Hyderabad.

नए रंग रूप और आकर्षक फीचर में आया आभा एप

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आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (Ayushman Bharat Digital Mission) अंतर्गत स्वास्थ्य रिकॉर्ड रखरखाव के लिये राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण ने घोषित किया संशोधित ‘आभा’ मोबाइल एप्लीकेशन

संशोधित आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) मोबाइल एप्लीकेशन को और व्यावहारिक बनाया गया है तथा उपयोगिता में सुधार के लिए नया यूज़र इंटरफेस (यूआई) जोड़ा गया

नई दिल्ली, 25 मई 2022. अपनी प्रमुख योजना आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (एबीडीएएम) के अंतर्गत राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (national health authority एनएचए) ने आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (ayushman bharat health account-आभा) मोबाइल एप्लीकेशन के संशोधित संस्करण को लॉन्च करने की घोषणा की है।

आभा एप्प को पहले एनडीएचएम हेल्थ रिकॉर्ड्स एप्प के नाम से जाना जाता था, जो गूगल प्ले स्टोर पर उपलब्ध है। इसे चार लाख से अधिक बार डाउनलोड किया जा चुका है।

आभा के उन्नत संस्करण में नया यूज़र इंटरफेस (यूआई) है और उसमें अन्य व्यावहारिक चीजों को जोड़ा गया है, ताकि लोग किसी भी समय और कहीं भी अपना स्वास्थ्य रिकॉर्ड देख सकें।

मौजूदा आभा एप्प को इस्तेमाल करने वाले पुराने संस्करण की जगह नये संस्करण को अपडेट कर सकते हैं।

एप पर अपना आभा एड्रेस बना सकता है कोई भी

आभा मोबाइल एप्लीकेशन पर कोई भी व्यक्ति आभा एड्रेस (username@abdm) बना सकता है, आसानी से याद रखने वाले यूज़र-नेम को 14 अंक के आभा नंबर से जोड़ सकता है। यह नंबर एप्प अपने आप तैयार कर देगा।

मोबाइल एप्लीकेशन के जरिये उपयोगकर्ता एबीडीएम आधारित स्वास्थ्य सुविधा में तैयार स्वास्थ्य रिकॉर्डो को जोड़ सकता है तथा अपने स्मार्टफोन पर देख सकता है। इस एप्लीकेशन में यह भी सुविधा है कि स्वास्थ्य सम्बंधी जो रिकॉर्ड एबीडीएम आधारित हेल्थ लॉकरों में रखे हैं, उन्हें भी डिजिटल रूप में इससे जोड़ा जा सकता है, जैसे नैदानिक रिपोर्टें, डॉक्टर के दवाई के पर्चे, कोविन टीकाकरण प्रमाणपत्र, आदि। इन सबको एबीडीएम नेटवर्क के जरिये सम्बंधित उपयोगकर्ता की मंजूरी के बाद जोड़ा जा सकता है।

इसके अलावा, आभा मोबाइल एप्लीकेशन में नई व्यावहारिक चीजें हैं, जैसे एडिट प्रोफाइल, आभा नंबर (14 अंक वाला) को आभा एड्रेस के साथ लिंक और अन-लिंक करना। इसके अलावा फेस ऑथेंटिकेशन/ फिंगरप्रिंट/ बायोमेट्रिक द्वारा लॉग-इन और पंजीकरण सम्बंधी एबीडीएम आधारित सुविधा काउंटर पर क्यूआर कोड की स्कैनिंग सुविधाओं को भी जल्द शुरू किया जायेगा।

आभा मोबाइल एप्प के बारे में जानकारी देते हुये राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सीईओ डॉ. आरएस शर्मा ने कहा, “आभा एप्प नागरिकों को अपना समग्र स्वास्थ्य रिकॉर्ड रखने की सुविधा देगा। मरीज अपने आभा एड्रेस की मदद से सेकंडों में अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड तक पहुंच सकते हैं। इसके कारण उन्हें बहुत सुविधा हो जायेगी। यह उन्हें एक ही स्थान पर उनके स्वास्थ्य का पूरा विवरण उपलब्ध करा देगा तथा कहीं भी, कभी भी अपने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को साझा करने में उनकी मदद करेगा। इससे उनके रिकॉर्ड के खो जाने का अंदेशा नहीं रहेगा। आंकड़ों के आदान-प्रदान के डिजिटलीकरण से उपचार का बेहतर तरीके से निर्णय करना और देखभाल जारी रखना सुनिश्चित हो जायेगा।”

आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) मोबाइल एप्प (जिसे पहले एनएचडीएम हेल्थ रिकॉर्ड्स या पीएचआर एप्प के नाम से जाना जाता था) को गूगल प्ले स्टोर या https://play.google.com/store/apps/details?id=in.ndhm.phr पर क्लिक करके डाउनलोड किया जा सकता है। आभा मोबाइल का आई-ओएस संस्करण जल्द शुरू किया जायेगा।

अगली पीढ़ी के कम्प्यूटर उपकरण डिजाइन करने की नई स्वदेशी तकनीक

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New indigenous technology to design next generation computer equipment

नई दिल्ली, 14 मई 2022: भविष्य की कम्प्यूटिंग आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वर्तमान में प्रचलित मल्टीकोर प्रोसेसर की कंप्यूटिंग क्षमता (Computing capability of multicore processor) में सुधार की आवश्यकता है। विभिन्न क्षेत्रों में बढ़ती अत्याधुनिक कम्प्यूटेशनल माँग को देखते हुए एप्लिकेशन-विशिष्ट प्रोसेसर के साथ-साथ अधिक कुशल एवं त्वरित रिस्पॉन्स क्षमता से लैस उपकरणों का विकास कम्प्यूटिंग उद्योग की एक प्रमुख जरूरत है।

अगली पीढ़ी की कंप्यूटिंग में उपयोगी हो सकती है नई प्रौद्योगिकी (New technology may be useful in next generation computing)

भारतीय शोधकर्ताओं ने तेज और सुरक्षित एकीकृत सर्किट (ICs) के डिजाइन के लिए नई प्रौद्योगिकी विकसित की है, जो अगली पीढ़ी के उन्नत कम्प्यूटिंग उपकरणों के निर्माण (next-generation computing) में उपयोगी हो सकती हैं। 

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी), गुवाहाटी के शोधकर्ताओं द्वारा किया गया यह अध्ययन स्वचालित इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन प्रक्रिया में शामिल – संश्लेषण, सत्यापन और सुरक्षा के आयामों पर केंद्रित है।

प्रमुख शोधकर्ता डॉ चंदन कारफा ने बताया है कि “हाई-लेवल सिंथेसिस (HLS) प्रक्रिया को मान्य करने के लिए इस अध्ययन में दो उपकरण विकसित किए गए हैं। इनमें से एक FastSim नामक ‘रजिस्टर ट्रांसफर लेवल (आरटीएल) सिम्युलेटर है, जो मौजूदा वाणिज्यिक सिमुलेटर से 300 गुना तेज चलने में सक्षम है। दूसरा उपकरण डीईईक्यू (DEEQ) है, जो एचएलएस के सत्यापन के लिए उपयोग होने वाला एक विशिष्ट जाँच उपकरण है।”

डॉ कारफा बताते हैं कि बाजार में समान विशेषताओं वाला ऐसा कोई अन्य उपकरण फिलहाल उपलब्ध नहीं है।

नई प्रौद्योगिकी HOST

आईआईटी, गुवाहाटी द्वारा विकसित इन सिमुलेटर्स (Simulators developed by IIT, Guwahati) के अलावा, जिन उपकरणों के प्रोटोटाइप परीक्षण के लिए उपलब्ध हैं, उसमें HOST नामक एक नई प्रौद्योगिकी भी शामिल है, जो डिजाइन चक्र के दौरान एकीकृत सर्किट (Integrated Circuits) से बौद्धिक सम्पदा (Intellectual property) चोरी के खतरे से बचा सकता है।

हार्डवेयर एक्सीलरेटर्स विशिष्टताओं पर आधारित अध्ययन (Study Based on Hardware Accelerators Specifications)

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन हार्डवेयर एक्सीलरेटर्स विशिष्टताओं पर आधारित है, जो अक्सर C/C++ जैसी उच्च-स्तरीय कम्प्यूटिंग लैंग्वेज में होती हैं, और हाई-लेवल सिंथेसिस (HLS) प्रक्रिया में हार्डवेयर कोड या रजिस्टर ट्रांसफर लेवल (आरटीएल) कोड में परिवर्तित हो जाती हैं। इस प्रक्रिया के दौरान HLS रूपांतरण डिजाइन में बग आने की आशंका होती है, जिसका पता लगाने के लिए सख्त प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है। यह काम आरटीएल सिमुलेटर करते हैं, और HLS की प्रमाणिकता को परखते हैं। यह प्रक्रिया बेहद धीमी और जटिल होती है। इसलिए, शोधकर्ताओं ने HLS की प्रमाणिकता की जाँच के लिए नये उपकरण विकसित किए हैं, जो न केवल सरल हैं, बल्कि बेहद तेज कार्य करने में सक्षम हैं।

डॉ चंदन करफा ने कहा, “कम्प्यूटेशनल दक्षता में सुधार के लिए एक आशाजनक तकनीक हार्डवेयर एक्सीलेटर्स हैं। हार्डवेयर एक्सीलेरेशन प्रक्रिया में, विशिष्ट कार्यों को सिस्टम के सीपीयू कोर द्वारा निष्पादित किए जाने के बजाय समर्पित हार्डवेयर में लोड किया जा सकता है। उदाहरण के लिए, विज़ुअलाइज़ेशन प्रक्रियाओं को ग्राफिक्स कार्ड पर लोड किया जा सकता है, जिससे सीपीयू अन्य कार्यों को करने के भार से मुक्त हो जाता है।”

इंटरनेट-ऑफ-थिंग्स (IoT), एम्बेडेड और साइबर-फिजिकल सिस्टम, मशीन लर्निंग और इमेज प्रोसेसिंग एप्लिकेशन (Machine learning and image processing applications) जैसे क्षेत्रों में हार्डवेयर एक्सीलरेटर्स की बढ़ती माँग के कारण इस अध्ययन को महत्वपूर्ण बताया जा रहा है।

हार्डवेयर एक्सीलरेशन क्या होता है? | What is Hardware Acceleration?

हार्डवेयर एक्सीलरेशन से तात्पर्य किसी सामान्य केंद्रीय प्रसंस्करण इकाई (सीपीयू) पर चलने वाले सॉफ्टवेयर की तुलना में विशिष्ट कार्यों को अधिक कुशलता से करने के लिए डिजाइन किए गए कंप्यूटर हार्डवेयर के उपयोग से है। इस प्रकार के कंप्यूटर हार्डवेयर्स को हार्डवेयर एक्सीलरेटर्सके रूप में जाना जाता है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है। आईआईटी गुवाहाटी के वक्तव्य में दावा किया गया है कि भारत सरकार द्वारा हाल ही में देश में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 76,000 करोड़ रुपये की योजना की मंजूरी के साथ, कुशल इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (ईडीए) के क्षेत्र में इस प्रकार के हस्तक्षेप से चिप डिजाइन के क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त हो सकता है।

विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के सहयोग से यह अध्ययन किया गया है। डॉ चंदन कारफा के अलावा इस अध्ययन में मोहम्मद अब्देरहमान, देबदरा सेनापति, सुरजीत दास, प्रियंका पाणिग्रही और निलोत्पोला सरमा शामिल हैं। इन प्रयासों में योगदान देने वाले कुछ पूर्व छात्रों में रामानुज चौकसे, जय ओझा, योम निगम, अब्दुल खादर और जयप्रकाश पाटीदार शामिल हैं। यह अध्ययन विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के अंतःविषयक साइबर-भौतिक प्रणालियों (आईसीपीएस) के अनुदान और इंटेल (भारत) की शोध फेलोशिप पर आधारित है। इस अध्ययन के निष्कर्ष शोध पत्रिका आईईईई में प्रकाशित किये गए हैं।

(इंडिया साइंस वायर)

Topics: IIT Guwahati, Technology, integrated circuits, ICs, next-generation, computing.

Notes : Hardware acceleration

Hardware acceleration is the use of computer hardware designed to perform specific functions more efficiently when compared to software running on a general-purpose central processing unit. Wikipedia

JioGames को इस महीने मिलेगा नया छोटा भीम गेम : जानिए सभी विवरण यहां

Children will be able to play Chhota Bheem on JIOgames during summer vacations

JioGames Will Get New Chhota Bheem Games This Month: All Details Here

गर्मियों की छुट्टियों में बच्चे जियो गेम्स पर खेल सकेंगे “छोटा भीम”

Children will be able to play Chhota Bheem on JIOgames during summer vacations

नई दिल्ली, 4 मई, 2022: बच्चों के बीच बेहद लोकप्रिय करेक्टर छोटा-भीम अब गेमिंग प्लेटफॉर्म- जियोगेम्स पर उपलब्ध होगा। छोटा-भीम गेम्स को बच्चों और गेमिंग के शौकिनों तक पहुंचाने के लिए जियोगेम्स और ग्रीन गोल्ड एनिमेशन प्रा. लिमिटेड ने हाथ मिलाया है।

जियोगेम्स ऐप पर छोटा भीम गेम खेल सकेंगे

इन गर्मियों से छोटा भीम गेम को एंड्रॉइड स्मार्टफोन और जियो सेट-टॉप बॉक्स जैसे प्लेटफॉर्म पर मौजूद जियोगेम्स ऐप (JioGames app on platforms like Android smartphones and Jio set-top boxes) के जरिए खेला जा सकेगा।

बच्चों की छुट्टियां छोटा भीम के साथ

भारत में लंबे समय तक चलने वाला एनिमेटेड शो, छोटा भीम (Animated Show, Chhota Bheem) एक दशक से अधिक समय से भारतीय बच्चों के जीवन को गुदगुदाता रहा है। स्क्रीन पर, सोने के दिल वाला धोती पहने बच्चा भीम, अपने दोस्तों के साथ मस्ती करता और लोगों की मदद करता नजर आता है। बच्चों की जिंदगी का हिस्सा बने, इस करेक्टर के मनोरंजक गेम्स को अब जियोगेम्स पर खेला जा सकेगा। छोटा भीम गेम्स निश्चित तौर पर बच्चों की छुट्टियों को और भी मजेदार बना देंगे।

इस मौके पर ग्रीन गोल्ड एनिमेशन के मुख्य रणनीति अधिकारी श्रीनिवास चिलाकलापुडी (Srinivas Chilakalapudi, Chief Strategy Officer at Green Gold Animation) ने कहा कि “हम जियोगेम्स के साथ जुड़ने पर बेहद उत्साहित हैं। जियोगेम्स सभी तरह के मोबाइल और उपकरणों पर उपलब्ध है साथ ही उनका ईको सिस्टम भी बेहतरीन है। जो हमें एक सर्वश्रेष्ठ मंच देता है। यह हमारे प्रशंसकों को कई तरह के उपकरणों पर उनके पसंदीदा पात्रों जैसे “छोटा भीम” से जुड़ने में मदद करेगा। हम 5 हाइपर कैजुअल गेम्स के साथ इसे लॉन्च करेंगे और बहुत जल्द और भी बहुत कुछ जोड़ा जाएगा।“

उन्होंने कहा कि भारतीयता के रंग में रगें एनीमेशन फिल्म बनाने में अग्रणी, ग्रीन गोल्ड एनिमेशन 15 वर्षों से युवा पीढ़ी का मनोरंजन करता आ रहा है। आज प्रमुख किड्स चैनल्स पर ग्रीन गोल्ड द्वारा निर्मित कार्यक्रमों को 10 करोड़ से अधिक बच्चे देखते हैं। ग्रीन गोल्ड एनिमेशन की फिल्मों और कार्यक्रमों को आज 190 से अधिक देशों में देखा जाता है।

ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस। आज की बड़ी खबरें | 22 अप्रैल 2022

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मृत्युदंड के मामले : दिशानिर्देश तैयार करेगा सर्वोच्च न्यायालय

सर्वोच्च न्यायालय ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा है कि जल्द ही मृत्युदंड को लेकर गाइडलाइन यानी दिशानिर्देश किया जायेगा, जो पूरे देश की अदालतों के लिये मान्य होगा। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि जस्टिस यू यू ललित, जस्टिस एस रविंद्र भट्ट और जस्टिस पी एस नरसिम्हा की खंडपीठ ने गाइडलाइन तैयार करने में एटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल की मदद भी मांगी है। खंडपीठ ने साथ ही राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण को भी नोटिस भेजा है।

कांग्रेस ने वीडियो जारी कर बताया राहुल कहां हैं?’

देश में चल रहे घटनाक्रमों से राहुल गांधी की गैरमौजूदगी पर सवाल उठा रहे आलोचकों को चुप कराने के लिए कांग्रेस ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें राहुल गांधी को एक ‘क्रूसेडर’ के रूप में पेश किया गया है।

मनीष सिसोदिया ने अपने विधायकों को पत्र लिखकर भाजपा पर लगाए गंभीर आरोप

दिल्ली में बुल्डोजर पर हो रही सियासत के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भाजपा पर एक गंभीर आरोप लगाया है। सिसोदिया के मुताबिक, भाजपा के गुंडे लोगों को घरों में जाकर धमका रही है कि यदि इतने पैसा नहीं दोगे तो घर पर बुल्डोजर चलवा देंगे।

दिल्ली में आयोजित किया होगा विश्व डेयरी शिखर सम्मेलन 2022

अंतर्राष्ट्रीय डेयरी महासंघ द्वारा आयोजित होने वाला विश्व डेयरी शिखर सम्मेलन 2022 सितंबर महीने में दिल्ली में आयोजित किया जाएगा।

जम्मू-कश्मीर में दो आतंकवादी मारे गए, एक सुरक्षा अधिकारी शहीद

जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार को दो अलग-अलग घटनाओं में दो आतंकवादी मारे गए और एक सुरक्षाकर्मी शहीद हो गया और पांच अन्य घायल हो गए।

चारा घोटाले में लालू प्रसाद यादव को झारखंड उच्च न्यायालय से मिली जमानत

चारा घोटाले में सजायाफ्ता बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को झारखंड उच्च न्यायालय ने जमानत दे दी है। मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि झारखंड उच्च न्यायालय के जस्टिस अपरेश कुमार सिंह की अदालत ने शुक्रवार को 10 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत मंजूर की है। उन्हें सजा की आधी अवधि जेल में पूरी कर लेने के आधार पर जमानत दी गई है। लालू प्रसाद यादव को अब तक कुल 4 मामलों में सजा हुई है और अब सभी मामलों में उन्हें जमानत मिल गई है। इसके बाद उनके जेल से निकलने की राह प्रशस्त हो गई है।

अपने खराब वाहनों को तत्काल वापस लें इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता : गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने हाल में इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की कई घटनाओं को देखते हुए इलेक्ट्रिक वाहन निर्माताओं को कहा है कि वे तत्काल अपने खराब वाहनों को वापस लें।

तमिलनाडु में अब अनिवार्य हुआ मास्क लगाना, उल्लंघन करने वालों पर लगेगा 500 रुपये का जुर्माना

तमिलनाडु के स्वास्थ्य विभाग ने एक आदेश में राज्य में मास्क पहनना अनिवार्य कर दिया है और उल्लंघन करने वालों को 500 रुपये जुर्माना देना होगा।

अगले वर्ष से साल में केवल एक बार होंगी सीबीएसई की 10वीं 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं

 सीबीएसई की 10वीं और 12वीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा अगले वर्ष से पहले की तरह साल में केवल एक बार आयोजित की जाएगी। इस निर्णय के बाद बोर्ड परीक्षाएं दो अलग-अलग सत्रों में आयोजित नहीं होंगी। हालांकि यह व्यवस्था शैक्षणिक वर्ष 2022-23 से शुरू की जाएगी। इसके साथ ही सीबीएसई ने कक्षा 9 से 12 तक के लिए नया सिलेबस भी घोषित कर दिया है।

इराक में हवाई हमले में आईएस के चार आतंकवादी ढेर

इराक की राजधानी बगदाद के उत्तर में सलाहुद्दीन प्रांत के बीहड़ इलाके में गुरुवार को हवाई हमले में इस्लामिक स्टेट (आईएस) समूह के चार आतंकवादी मारे गए।

रूस ने कमला हैरिस, मार्क जुकरबर्ग पर लगाया प्रतिबंध

रूस ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और मेटा के सीईओ मार्क जकरबर्ग समेत 29 अमेरिकी नागरिकों और कनाडा के 61 नागरिकों पर व्यक्तिगत प्रतिबंध लगाए हैं। ये जानकारी रूस के विदेश मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में दी है।

खबरों में : सैमसंग गैलेक्सी, कर्मचारी चयन आयोग, टीवीएस मोटर कंपनी, माइक टायसन, चेन्नई सुपर किंग्स, मारुति ऑल्टो, सुकन्या समृद्धि, मुंबई इंडियंस, इंडियन प्रीमियर लीग, करोड़.

बैटरी वाहन आ सकते हैं पांच लाख की रेंज में बशर्ते…

aarti khosla

अगर अर्ली बर्ड इंसेंटिव नीति हुई लागू तो बैटरी वाहन 5-15 लाख की रेंज में आ जाएंगे (If the early bird incentive policy is implemented, then battery vehicles will come in the range of 5-15 lakhs.)

नई दिल्ली, 21 अप्रैल 2022. इस साल लाँच होने वाली पाँच चार पहिया बैटरी गाड़ियों की दिल्ली में कीमत (four wheeler battery car price in delhi) में भारी कमी आ सकती है अगर “अर्ली बर्ड इंसेंटिव” नाम की यह स्कीम फिर से चालू कर दी जाए। दिल्ली इलेक्ट्रिक व्हीकल पॉलिसी 2021 (Delhi Electric Vehicle Policy 2021) के तहत दी जाने वाली अर्ली बर्ड सब्सिडी को फिर से शुरू करने से 2022 में लॉन्च होने वाले पांच नए ईवी मॉडलों की अग्रिम क़ीमत 5 से 15 लाख की रेंज में आ जाएगी। यह प्राइस रेंज एक बेहद महत्वपूर्ण सेगमेंट है और कुल वाहन बिक्री के लगभग 75% का प्रतिनिधित्व करता है।

क्लाइमेट ट्रेंड्स के विश्लेषण में सामने आया यह तथ्य

इस बात का पता चलता है क्लाइमेट ट्रेंड्स के विश्लेषण (Climate trends analysis) से, जिसमें पाया गया कि कई चार पहिया इलेक्ट्रिक वाहन (EV) सब्सिडी समर्थन के साथ अपने आईसीई (ICE) या इंटरनल कंबसशन इंजन समकक्षों की तुलना में 35 – 65% सस्ते हो सकते हैं।

इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों पहले मिलती थी डेढ़ लाख की अतिरिक्त छूट

दिल्ली की ईवी नीति ने पहले 1,000 इलेक्ट्रिक चार पहिया वाहनों को अन्य छूटों के अलावा अधिकतम 1,50,000/- रुपये का अर्ली बर्ड प्रोत्साहन की पेशकश की। यह प्रोत्साहन FAME II के तहत योग्य होने के रूप में सूचीबद्ध एडवांस बैटरी वाले स्वदेशी वाहनों पर लागू था। पहली 1,000 बिक्री के बाद नवंबर 2021 में इस सब्सिडी को बंद कर दिया गया था, और दिल्ली में ईवी चार पहिया वाहनों को अब केवल रोड टैक्स और पंजीकरण से छूट मिलती है।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी एंड क्लीन एनर्जी एक्सेस, एनआरडीसी (NRDC) की लीड कंसल्टेंट चारु लता कहती हैं, “सभी भारतीय राज्यों में, दिल्ली ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण प्रगति की है। लेकिन, राज्य अभी भी उच्च वायु प्रदूषण के स्तर से जूझ रहा है। चार पहिया वाहनों के विद्युतीकरण के लिए समर्थन, जो दिल्ली की सड़कों पर 28% वाहनों का हिस्सा है, हम जिन समस्याओं का सामना कर रहे हैं उन से निपटने में मदद कर सकता है और समग्र जलवायु लक्ष्यों को पूरा करने में भी योगदान दे सकता है।”

क्या है इस रिपोर्ट का उद्देश्य

इस रिपोर्ट का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहन के स्वामित्व की लागत पर दिल्ली की अर्ली बर्ड सब्सिडी को हटाने के प्रभाव को उजागर करना और परिणामस्वरूप उपभोक्ता की पसंद पर इसके प्रभाव को हाईलाइट करना है।

यह अध्ययन दर्शाता है कि दिल्ली की अर्ली बर्ड सब्सिडी के समर्थन से पांच ईवी वेरिएंट के स्वामित्व की कुल लागत, उनके ICE समकक्षों की तुलना में, लंबे समय में 35-65% सस्ती होगी। उदाहरण के लिए, दिल्ली अर्ली बर्ड सब्सिडी के साथ प्रसिद्ध टाटा नेक्सॉन xz+ अपने पेट्रोल समकक्ष की तुलना में 6 वर्षों में स्वामित्व और संचालन के लिए 36.9% ज़्यादा सस्ती है। कम अग्रिम लागत, स्वामित्व की कम कुल लागत और चुनने के लिए विभिन्न ईवी मॉडल का संयोजन, शहर में चार पहिया ईवी बिक्री को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, जो 2021 में मात्र 1,952 वाहनों के साथ  पिछड़ी रही।

रिपोर्ट चीन, जापान, नॉर्वे और जर्मनी जैसे देशों से अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रस्तुत करती है, जहां ईवी उपभोक्ताओं के बीच मुख्यधारा की पसंद बन गए हैं। जब तक कि पारिस्थितिकी तंत्र बिक्री को चलाने के लिए पर्याप्त मजबूत नहीं तब तक इन सभी देशों ने ईवी की मांग को बढ़ाने के लिए खरीद प्रोत्साहन और सब्सिडी पर दृढ़ता से भरोसा किया है। यह निष्कर्ष निकलता है कि मूल्य समानता तक पहुंचने तक ईवी चार पहिया वाहनों को निजी तौर पर अपनाने के लिए सब्सिडी समर्थन एक महत्वपूर्ण कारक है।

निजी कारों का एक मजबूत बाजार है दिल्ली : आरती खोसला

क्लाइमेट ट्रेंड्स की निदेशक आरती खोसला कहती हैं, “दिल्ली निजी कारों के लिए एक मजबूत बाजार है, और यहाँ देश की सबसे ज्यादा चौपहिया वाहनों की बिक्री होती है। हमारी रिपोर्ट से पता चलता है कि दिल्ली की ईवी नीति के तहत उपभोक्ताओं को प्रोत्साहन देने से कार खरीदने के इच्छुक एक आम दिल्लीवासी के लिए कई नए ईवी चार पहिया वाहनों की अग्रिम लागत कम होके एक आरामदायक मूल्य सीमा के भीतर आएगी, और वाहन स्वामित्व की कुल क़ीमत में काफी कमी आएगी। यह निश्चित रूप से ईवी को आईसीई समकक्षों की तुलना में अंतिम उपयोगकर्ताओं के लिए अधिक आकर्षक बना देगा। हमारे पास यह दिखाने के लिए वैश्विक उदाहरण हैं कि मांग पक्ष सब्सिडी पर भरोसा करने से ई-मोबिलिटी को उपभोक्ताओं के लिए मुख्य धारा का विकल्प बनाने में मदद मिली है, विशेष रूप से निजी स्वामित्व में। दिल्ली की सड़कों पर लगभग 28% वाहन आज चार पहिया वाहन हैं, और इन्हें विद्युत में परिवर्तित करना वायु प्रदूषण को कम करने के साथ-साथ इसके ई-मोबिलिटी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए महत्वपूर्ण है।

यह देखते हुए कि दिल्ली और एनसीआर (NCR) क्षेत्रों ने भारत में सबसे अधिक चार पहिया वाहनों की बिक्री दर्ज की गई है, अर्ली बर्ड प्रोत्साहन को फिर से पेश करने से उपभोक्ताओं को आईसीई समकक्षों के बजाय ईवी का चयन करने के लिए आकर्षित किया जाएगा।

आंकड़ों के रुझान के हिसाब से – पिछले एक दशक में प्रति 1,000 लोगों पर वाहनों की संख्या 643 यूनिट तक पहुंच गई है, यानी हर दो लोगों में से एक से ज़्यादा के पास वाहन है, जो एक वाहन मालिक होने की दिल्लीवासियों की सामान्य महत्वाकांक्षा की ओर इशारा करता है।

Whatsapp ला रहा नया यूजर फ्रेंडली फीचर, एक साथ ज्यादा लोगों को जोड़ सकेंगे वॉयस कॉल में

whatsapp

व्हाट्सएप चैट में इमोजी लाएगा, 32 लोगों को ग्रुप वॉयस कॉल की मिलेगी अनुमति

व्हाट्सएप पर मिलेंगे इमोजी रिएक्शन – थम्स अप, हार्ट (WhatsApp is getting emoji reactions – Thumbs up, heart)

नई दिल्ली, 15 अप्रैल 2022. मेटा-स्वामित्व वाले व्हाट्सएप (Whatsapp in Hindi) ने अपने चैट ऐप में निर्देशित इमोजी रिएक्शन्स (Emoji Reaction in WhatsApp) को जोड़ने की घोषणा की है। वहीं एक ग्रुप वॉयस कॉल में 32 लोगों तक की अनुमति दी है और 2 जीबी तक की फाइलों का समर्थन करने के लिए फाइल शेयरिंग को बढ़ाया है, जो इस समय शेयरिंग साइज 100 एमबी से ऊपर है। व्हाट्सएप पहले यूजर्स को छह प्रमुख इमोजी के साथ रिएक्ट करने की अनुमति देगा, लेकिन आगे जाकर और जोड़ देगा, ताकि लोग नए संदेशों के साथ चैट में अपनी राय जल्दी से साझा कर सकें।

व्हाट्सएप के प्रमुख विल कैथकार्ट (Will Cathcart Head of Whats App at Meta) ने कल देर रात एक ट्वीट में कहा,

“हम यह घोषणा करते हुए उत्साहित हैं कि आने वाले सभी इमोजी और स्किन-टोन के साथ व्हाट्सएप पर रिएक्शन्स आ रही हैं।”

मेटा ने व्हाट्सएप में 2 गीगाबाइट तक की फाइलों का समर्थन करने के लिए फाइल शेयरिंग को भी बढ़ाया ताकि लोग आसानी से परियोजनाओं पर सहयोग कर सकें।

व्हाट्सएप ने एक ब्लॉगपोस्ट में कहा है, “हम 32 लोगों तक के लिए एक-टैप वॉयस कॉलिंग की शुरुआत करेंगे, जो उस समय के लिए सभी नए डिजाइन के साथ होगा, जब लाइव बात करना चैटिंग से बेहतर है।”

वर्तमान में, यह ग्रुप वॉयस कॉल पर आठ लोगों को अनुमति देता है।

ग्रुप एडमिन को मिलेंगे और अधिकार

ग्रुप एडमिन हर किसी की चैट से गलत या परेशानी वाले मैसेज को भी हटा सकेंगे।

कैथकार्ट ने कहा,

“हम एक बार में 2 जीबी तक बड़ी फाइल शेयरिंग और 32 व्यक्ति ग्रुप कॉन्फ्रेंस कॉल का भी समर्थन करेंगे, जिसे आप केवल एक टैप से शुरू कर सकते हैं।”

व्हाट्सएप के नए फीचर आने वाले हफ्तों में आने की उम्मीद है।

Anti-Tank Guided Missile HELINA : एक झटके में दुश्मन का टैंक तबाह कर सकती है भारत में बनी मिसाइल

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टैंक-रोधी गाइडेड मिसाइल ‘हेलीना’ का सफल परीक्षण

India carries out successful test firing of HELINA anti-tank missile

नई दिल्ली, 14 अप्रैल 2022: स्वदेश में ही विकसित हेलीकॉप्टर से लॉन्च की जाने वाली टैंक-रोधी गाइडेड मिसाइल ‘हेलीना’ (Indigenously developed helicopter-launched anti-tank guided missile ‘Helina’) का सोमवार को ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सफल परीक्षण किया गया है।

क्या है एटीजीएम प्रणाली?

हेलिना यानी हेलीकॉप्टर आधारित नाग (NAG) तीसरी पीढ़ी की फायर ऐंड फॉरगेट क्लास एंटी टैंक गाइडेड मिसाइल (एटीजीएम) प्रणाली (Third Generation Fire and Forget Class Anti Tank Guided Missile (ATGM) system,) है, जो एडवांस्ड लाइट हेलीकॉप्टर (एएलएच) पर लगायी जा सकती है।

यह प्रणाली दिन-रात हर प्रकार की मौसमी परिस्थितियों में प्रभावकारी प्रहार करने में सक्षम है। यह पारंपरिक आर्मर के साथ-साथ विस्फोटक प्रतिक्रियाशील आर्मर के साथ युद्धक टैंकों को भी परास्त कर सकता है।

Features of Helina Anti-Tank Guided Missile | टैंक-रोधी गाइडेड मिसाइल हेलीना की खासियत

हेलिना मिसाइल सीधे हिट मोड के साथ-साथ टॉप अटैक मोड दोनों में लक्ष्य को भेद सकती है। हेलिना वेपन सिस्टम्स को भारतीय सेना में शामिल किया जा रहा है। ‘ध्रुवास्त्र’ नामक हेलीना हथियार प्रणाली का एक प्रकार भारतीय वायु सेना में शामिल किया जा रहा है।

‘हेलीना’ मिसाइल को एक इन्फ्रारेड इमेजिंग सीकर (आईआईआर) द्वारा निर्देशित किया जाता है, जो लॉन्च से पहले लॉक ऑन मोड में काम करता है। यह दुनिया के सबसे उन्नत टैंक-रोधी हथियारों में से एक है।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय सेना और भारतीय वायुसेना के वैज्ञानिकों की टीमों द्वारा यह परीक्षण उपयोगकर्ता प्रमाणीकरण ट्रायल्स के हिस्से के रूप में संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था। यह परीक्षण एक उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर (एएलएच) से किए गए थे, और मिसाइल को टैंक प्रतिकृति लक्ष्य पर सफलतापूर्वक दागा गया।

रक्षा मंत्रालय ने दी जानकारी

रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी वक्तव्य में बताया गया है कि राजस्थान के पोखरण में किए गए प्रमाणीकरण परीक्षण, और अत्यधिक ऊंचाई पर इस मिसाइल की क्षमता प्रमाणित होने से उन्नत हल्के हेलीकॉप्टर के साथ इसे एकीकृत किए जाने का मार्ग प्रशस्त हुआ है। इन परीक्षणों को सेना के वरिष्ठ कमांडरों और डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिकों की मौजूदगी में किया गया है।

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संयुक्त रूप से यह उपलब्धि हासिल करने के लिए डीआरडीओ और भारतीय सेना को बधाई दी है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ जी. सतीश रेड्डी ने कठिन परिस्थितियों में किए गए सराहनीय प्रयास के लिए टीमों को बधाई दी है।

(इंडिया साइंस वायर)

Topics: DRDO, Anti-Tank, Guided Missile, HELINA, Indigenous, High-altitude, Trials, Defence Research, DRDO, Indian Army, Indian Air Force

क्या विकास की बलि चढ़ जाएगा रेगिस्तान? सौर ऊर्जा के नाम पर प्रकृति का विनाश

thar ka registan

Will the desert have to sacrifice development?

जैसलमेर जिले के गांव कुछड़ी में आलाजी लोक देवता के नाम से छोड़ी गई 10 हजार बीघा ओरण भूमि भू-सैटलमेंट के दौरान राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुई. एक दर्जन गांवों के मवेशी तथा जीव-जंतुओं की प्रजातियां इसी ओरण की शरण में जीवन-यापन करती हैं तथा थार की जैव विविधता एवं पारिस्थितिकी तंत्र के संतुलन (Thar’s biodiversity and ecosystem balance) में योगदान देती है. पूर्वजों ने ओरण में विविध प्रकार के जल स्त्रोत बनाए थे जिनसे पशुओं व जीव-जंतुओं को चारा, पानी मिल सके. कुछड़ी गांव के लोगों ने इस भूमि का एक बड़ा भाग विकास के नाम पर एक निजी कंपनी को आवंटित किए जाने की आशंका जताई. वहीं कुछ लोग गोचर में अवैध तरीके से खेती करने लगे हैं. सीमाज्ञान और अतिक्रमण हटाने की पशुपालकों की मांग को नजरअंदाज किया जा रहा है.

सियांबर गांव के लोग एवं ग्राम पंचायत सदियों से चारागाह के रूप में उपयोग करने वाली भूमि को सौर ऊर्जा उत्पादन कंपनी को आवंटित किए जाने की संभावना का विरोध कर रहे हैं.

प्रकृति का विनाश : गौचर जमीनों को बचाने के लिए किए जा रहे हैं जन आंदोलन

जैसलमेर की देगराया औरण को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की मांग निरंतर उठ रही है. बाप क्षेत्र अखाधना गांव के लोग अपने तालाब के आगौर को राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज कराने की मांग कर रहे हैं. गौचर जमीनों को बचाने के लिए किए जा रहे जन आंदोलन इसका उदाहरण है.

विकास के नाम पर सरकार कंपनियों के साथ खड़ी है

रेगिस्तान में जीवन की संभावनाओं (life prospects in the desert) को पूर्वजों ने ओरण, गोचर, तालाबों के विकास में देखा था. प्रत्येक गांव में इसकी शृंखला जीवन का हिस्सा थी. यहां गांव नदियों के किनारे नहीं बसे. ओरण, गोचर और तालाबों के किनारे बसे. सरकार के भू-राजस्व अभिलेखों में यह जमीनें कहीं दर्ज हुई, कहीं नहीं हुई. आज इनकी स्थिति खराब हुई है. लोग चाह कर भी इनकी सुरक्षा और संरक्षण नहीं कर पा रहे हैं. हालांकि रेगिस्तान के लोग अपने शामलात संसाधनों को बचाने के लिए अलग-अलग तरह से संघर्ष कर रहे हैं. जबकि सरकार और प्रशासन विकास की दुहाई देकर कंपनियों के साथ खड़ा है (Government stands with companies in the name of development). वहीं दूसरी तरफ लोग अपने बूते पर संसाधनों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं. पूंजी की क्रूरता और जीवन के बीच के युद्ध में जीत किसकी होगी, यह समय ही बताएगा.

इन सामुदायिक संसाधनों, चारागाह, ओरण गौचर, तांडा, तालाब, बेरियां, खड़ीनें, बरसाती नदियां और उनका कैचमेंट ऐरिया राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हुआ. भू-सेटलमेंट के दौरान के समय में लोगों की आजीविका का मुख्य साधन पशुपालन था. किसानों की खातेदारी जमीनों के उत्पादन पर टेक्स (बिगोड़ी) लगता था, इस कारण से किसान अपनी व्यक्तिगत भूमि भी रिकॉर्ड में कम दर्ज कराता था. स्थानीय लोगों को लगता था कि इस जटिल भौगोलिक और गर्म व शुष्क जलवायु वाले क्षेत्र में कौन आएगा? रिकॉर्ड में दर्ज हो, या नहीं, जमीन और संसाधन हमारे रहेंगे.

राजस्थान की अधिकांश ओरण, गौचर पर कुछ स्थानीय लोगों ने कब्ज़ा किया हुआ है. कुछ जगहों पर सरकार द्वारा कंपनियों को आवंटित की गयी है और यह सिलसिला जारी है. सरकार भूल सुधार के बजाय मौके का फायदा उठा रही है.

समुदाय की मांग को दरकिनार कर एकतरफा फैसले लिए जा रहे हैं. समुदाय द्वारा जीवन की संभावनाओं को संजो कर रखा गया था, उन जमीनों को विंड एवं सौर ऊर्जा कंपनियों को दे रही है. इससे रेगिस्तान के स्थानीय लोगों की आजीविका के साथ-साथ पर्यावरण, जैव विविधता बर्बाद हो रही है, इस पर किसी का ध्यान अब तक नहीं गया है.

विश्व की सबसे बड़ी कृत्रिम इंदिरा गांधी नहर (world’s largest artificial canal Indira Gandhi Canal) आगमन से रेगिस्तान में बड़ा बदलाव आया. पानी की बूंद-बूंद की हिफाजत करने वाले क्षेत्र में रावी और सतलुज के पानी की धार बहने लगी. शुष्क मरू प्रदेश का सीमांत क्षेत्र नम हुआ. पशुपालन आधारित खेती से चलने वाली आजीविका की जगह आधुनिक कृषि ने जड़ें जमाई. सिंचाई और पेयजल विकास की योजनाएं गतिमान हुईं. पानी की किल्लत दूर होने के साथ-साथ ढांचागत एवं औद्योगिक विकास हुआ और लगातार हो रहा है. इससे पूंजी का प्रवाह बढ़ा है और निवेश के द्वार खुले हैं.

thar biodiversity
thar biodiversity

पूर्वजों द्वारा प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर विकसित की गयी टिकाऊ आजीविका घौर अनिश्चितता के दौर में है. नहर और उससे सिंचित भूमि हरियाली, खुशहाली के साथ पानी, मिट्टी, हवा और रगों में जहर का प्रवाह कर रही है. नहर क्षेत्र में भी कभी चारागाह, तालाब, बेरियां व उनके कैचमेंट हुआ करते थे, जिनको कृषि भूमि में बदल कर बेचा गया. बिलायती व देसी बवूल से हरियाली के जंगल खड़े किए गये. नहर निकालने से पहले यहां की भूगर्भीय संरचना को नहीं समझा गया. पूरे क्षेत्र में जिप्सम और मुल्तानी मिट्टी की परत में अथाह पानी उड़ेलने से दलदल और लवण के कारण भूमि बंजर हो रही है. विकास के नए पन्नों पर स्थानीय वनस्पति, जीव-जंतु, पर्यावरण, जैव विविधता, जन और जानवर हाशिये पर हैं.

प्रकृति को नष्ट किया जा रहा है सौर ऊर्जा के नाम पर

पानी, बिजली और यातायात विकास के साथ खनिज संसाधनों का दोहन, औद्योगिक विकास के अवसर खुले हैं. जिप्सम, कोयला, तेल, गैस, लाइमस्टोन, चाइना क्ले का खनन एवं इससे संबंधित उद्योग लगे हैं. पवन और सौर ऊर्जा की संभावनाओं को पहचाना गया है. भले ही यह क्षेत्र के लिए अनुकूल है, अथवा नहीं, लेकिन इसमें मुनाफा भरपूर है. मुनाफे ने बड़ी कंपनियों को आकर्षित किया. अथाह जल, जंगल, जमीन और सरकार का अवसर उपलब्ध कराने में भरपूर सहयोग कंपनियों को पांव पसारने में मददगार साबित हो रहा है. जिन जमीनों का उपयोग खड़ीनों, तालाबों, बेरियों के आगौर और पशुओं की चराई में करते थे, वह राजस्व रिकॉर्ड में आगौर, ओरण, गोचर के नाम से दर्ज नहीं हुई. अब यह जमीनें सरकार खनन, सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा पैदा करने वाली कंपनियों को आवंटित कर रही है.

सौर ऊर्जा गर्म और शुष्क जलवायु वाले क्षेत्र के लिए कितनी अनुकूल है?

कांच के बने सौर ऊर्जा पैनल बिजली के साथ कितनी गर्मी पैदा करेंगे? इसका कोई अध्ययन अभी तक सामने नहीं आया है. जिस भूमि पर सोलर प्लांट लगया जाता है, उसे वनस्पति विहीन किया जाता है. सौर ऊर्जा के नाम पर प्रकृति को नष्ट किया जा रहा है.

दुनिया के रेगिस्तानों में जीवंत है थार का रेगिस्तान

यह सर्वविदित है कि थार के रेगिस्तान में सूखा, अकाल की बारंबारता है. पूर्वजों ने थार में जीवन की संभावनाओं को अकाल जैसी आपदा के सामने अपने आप को टिकाए रखने के लिए तरीके निकाले. लोगों ने बताया लगातार दो-तीन वर्ष सूखा होने पर बेरियों में पानी मिल जाता था. पूरे देश में खाद्यान्न संकट के चलते विदेशों से गेहूं आयात किया जाता था, उस समय जैसलमेर की खड़ीनों में गेहूं का उत्पादन होता था. सरकार का एक विभाग आपदा प्रबंधन एवं जोखिम घटाव का काम करता है. यहां के स्थानीय लोगों ने हजारों वर्ष पहले अकाल से संबंधित आपदा जोखिम घटाव के तरीकों को विकसित कर लिया था. लेकिन अब अंध विकास की गति के सामने यह सब टिकने वाले नहीं है.

कुछ स्थानीय लालची वर्ग और मुनाफा कमाने वाली बड़ी कंपनियों की नजरें थार के रेगिस्तान पर पड़ गई हैं. इससे स्थानीय लोगों की मूल आजीविका और जीने के तरीके बदल जाएंगे. जिनको यह तरीके पसंद नहीं आएंगे वो पलायन कर जाएंगे. अंध विकास तेजी से आगे बढ़ते हुए चंद लोगों को मुनाफा देते हुए उजाड़, बिगाड़ और विरानता के पदचिन्ह छोड़ जाएगा. संभव है कि दुनिया के रेगिस्तानों में जीवंत थार का रेगिस्तान आने वाले समय में जीवन विहीन रेगिस्तान बन जाए. लगता है रेगिस्तान को भी अब विकास की बलि देनी होगी.

दिलीप बीदावत

बीकानेर, राजस्थान

(चरखा फीचर)

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दिलीप बीदावत
बीकानेर, राजस्थान
(चरखा फीचर)

ब्रेकिंग : आज भारत की टॉप हेडलाइंस। आज की बड़ी खबरें | 20 मार्च 2022

breaking news

मप्र में आदिवासी किशोरी से दुष्कर्म करने वालों के घरों पर चला बुलडोजर

मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में एक आदिवासी नाबालिग लड़की से सामूहिक दुष्कर्म करने वालों के खिलाफ प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद प्रशासन ने उनके आवासों पर बुलडोजर चलाकर उन्हें जमींदोज कर दिया।

ममता बनर्जी के भतीजे से सोमवार को ईडी करेगी पूछताछ

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक तृणमूल कांग्रेस के सांसद और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी और उनकी पत्नी रुजिरा बनर्जी से प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) मनी लॉड्रिंग मामले में सोमवार को पूछताछ करेगा।

शरद यादव की पार्टी का आरजेडी में विलय. शरद यादव बोले : बिहार का आने वाला भविष्य तेजस्वी यादव

शरद यादव की पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल (एलजेडी) का राजद के साथ रविवार को विलय हो गया है। रविवार को दिल्ली स्थित उनके आवास पर इसकी घोषणा की गई। इस अवसर पर राजद नेता तेजस्वी यादव भी मौजूद रहे। इस दौरान शरद यादव ने कहा कि, बिहार का आने वाला भविष्य तेजस्वी यादव है।

हिजाब पर फैसला देने वाले कर्नाटक हाईकोर्ट के जजों को मिलेगी वाई-श्रेणी की सुरक्षा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कर्नाटक सरकार ने मुस्लिम छात्राओं को स्कूल और कॉलेज की कक्षाओं में हिजाब पहनने की अनुमति देने वाली याचिका के खिलाफ फैसला सुनाने वाली विशेष पीठ का हिस्सा रहे उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों की सुरक्षा कड़ी करने का फैसला किया है।

छत्तीसगढ़ की नदियों के किनारे 11 लाख पौधों का रोपण

छत्तीसगढ़ में नदियों के किनारे हरियाली लाने और भू-क्षरण रोकने के लिए पौधों के रोपण का अभियान जारी है। प्राप्त जानकारी के अनुसार आगामी साल के लिए बजट में पौधारोपण के लिए सात करोड़ से ज्यादा की राशि का प्रावधान किया गया है, बीते साल में 23 नदियों के तट पर लगभग 11 लाख पौधे रोपे गए हैं।

राजभर का एनडीए में लौटने से इनकार, सपा के साथ रहेंगे

सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के नेता ओम प्रकाश राजभर ने स्पष्ट रूप से भाजपा नेतृत्व के साथ किसी भी बैठक से और एनडीए गठबंधन में उनकी वापसी की संभावना से इनकार किया है।

शिया धर्मगुरू के मुताबिक हिजाब विवाद इस्लामोफोबिया का एक उदाहरण

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जाने-माने शिया धर्मगुरु मौलाना कल्बे जवाद ने कहा है कि ‘हिजाब’ पर विवाद ‘इस्लामोफोबिया का उदाहरण’ है। मुसलमानों को यह सुनिश्चित करने के लिए अधिक से अधिक शैक्षणिक संस्थानों की स्थापना करनी चाहिए कि उन्हें शिक्षा के लिए दूसरों पर निर्भर न रहना पड़े।

सीजेआई ने अंतर्राष्ट्रीय विवाद समाधान संस्थानों पर रोशनी डाली

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के प्रधान न्यायाधीश एन.वी. रमण ने कहा है कि विवादों के त्वरित और प्रभावी समाधान के साथ वाणिज्यिक दुनिया को प्रदान करने के लिए पूरे भारत में कई अंतर्राष्ट्रीय विवाद समाधान संस्थान स्थापित किए जा रहे हैं।

यूएस नेशनल राइफल एसोसिएशन ने 2021 रैंसमवेयर हमले की पुष्टि की

यूएस नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए) ने पुष्टि की है कि यह पिछले अक्टूबर में हुए रैंसमवेयर हमले का विषय था। ये जानकारी मीडिया स्पोटर्स ने दी।

बड़ी स्क्रीन वाले डिवाइस को बेहतर बनाने के लिए प्ले स्टोर में बदलाव करेगा गूगल

उपभोक्ताओं को बड़ी स्क्रीन पर ऐप्स खोजने में मदद करने के लिए टेक दिग्गज गूगल, प्ले स्टोर में बड़े बदलाव कर रहा है, ताकि यूजर्स उच्च गुणवत्ता वाले ऐप्स और गेम को खोज कर उनके साथ जुड़ सकें.

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यहां नेटवर्क की समस्या भी चुनावी मुद्दा है?

Vote

Here the problem of network is also an election issue.

14 फरवरी को उत्तराखंड में वोट डाले जायेंगे

देश के जिन पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव (Assembly elections in five states) की सरगर्मियां चल रही हैं उनमें पहाड़ी राज्य उत्तराखंड भी शामिल है. जहां 14 फरवरी को वोट डाले जायेंगे. ऐसे में मतदाताओं को अपने अपने पक्ष में करने के लिए सभी पार्टियां एड़ी चोटी का ज़ोर लगा रही हैं. पिछले चुनावों की तरह इस बार भी विकास प्रमुख मुद्दा रहेगा क्योंकि गठन के 21 साल बाद भी उत्तराखंड विकास के कई पैमानों पर अन्य राज्यों की अपेक्षा पिछड़ा हुआ है. विशेषकर इसके दूर दराज़ के ग्रामीण क्षेत्र अब भी विकास की लौ से वंचित हैं.

हम बात कर रहे हैं उत्तराखंड के बागेश्वर जिला स्थित गरुड़ ब्लॉक से 20 किमी दूर रौलियाना गांव की. जो आज भी नेटवर्क की समस्या से जूझ रहा है. ग्रामीणों के पास नई तकनीक से लैस मोबाइल फोन तो उपलब्ध हैं, परंतु नेटवर्क नहीं होने के कारण वह केवल सजावटी वस्तु मात्र रह जाता है. इस समस्या से जहां ग्रामीण परेशान हैं, वहीं पिछले दो वर्षों से सबसे अधिक कठिनाई विद्यार्थियों को भी हुई है.

कोरोना काल में जब स्कूल, कॉलेज और सभी प्रकार के शिक्षण संस्थान बंद हो गए थे और पढ़ाई का एकमात्र सहारा ऑनलाइन क्लास थी. ऐसे समय में गांव में नेटवर्क की कमी (lack of network in the village) ने छात्र-छात्राओं को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाया है.

छात्राओं की शिक्षा को सबसे अधिक प्रभावित किया है ऑनलाइन क्लास और नेटवर्क की कमी ने

इसके कारण न केवल ग्रामीण स्तर पर शिक्षा प्रणाली पूरी तरह ध्वस्त हो गई बल्कि प्राथमिक और मध्य विद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को शिक्षा से लगभग दूर ही कर दिया है. हाई स्कूल के विद्यार्थी किसी प्रकार नेटवर्क एरिया में पहुंच कर अपना क्लास अटेंड करने का प्रयास कर लेते थे, लेकिन छोटे बच्चों के लिए यह मुमकिन नहीं था. ऑनलाइन क्लास और नेटवर्क की कमी ने छात्राओं की शिक्षा को भी सबसे अधिक प्रभावित किया है. जहां लड़कियों की अपेक्षा लड़कों को ऑनलाइन क्लास की प्राथमिकता दी गई.

अधिकतर घरों में आर्थिक स्थिति कमज़ोर होने की वजह से केवल एक फोन की सुविधा होती है, जिसे पहले लड़कों के लिए उपलबध कराई जाती है. अफ़सोस की बात यह है कि लड़की के सीनियर क्लास में होने के बावजूद कई घरों में जूनियर क्लास में पढ़ने वाले लड़के को मोबाइल उपलब्ध कराई जाती है. पहले तो लड़कियों से घर का काम लिया जाता है. काम ख़त्म होने के बाद यदि समय मिला तो उन्हें फोन उसी वक्त मिलता है, जब भाई की क्लास पूरी हो चुकी होगी. लड़के की क्लास में नेटवर्क की समस्या को घर में जहां गंभीरता से लिया जाता है, वहीं लड़की को आने वाली इस समस्या पर कोई ख़ास ध्यान नहीं दिया जाता है.

यह समस्या आज भी जस की तस है. इस संबंध में गांव की एक किशोरी ममता का कहना है कि जब हमें ऑनलाइन क्लास के लिए फोन उपलब्ध हो भी जाता है तो नेटवर्क की समस्या आड़े आ जाती है. कई बार घर से एक किमी दूर पहाड़ पर एक निश्चित स्थान पर जाना होता है, जहां कुछ समय के लिए नेटवर्क उपलब्ध होता है. कई किशोरियों के अभिभावक इतनी दूर आने की इजाज़त भी नहीं देते हैं. वहीं एक अन्य स्कूली छात्रा का कहना था कि पिछले दो वर्षों में नेटवर्क की कमी के कारण शायद ही ऐसा कोई दिन होता है जब हम अपनी क्लास पूरी कर पाए हैं. नेटवर्क की कमी के कारण न तो हम शिक्षक से सवाल पूछ पाते हैं और न ही गूगल पर सर्च करने में सक्षम हो पाते हैं. ज्ञान विज्ञान में रुचि होने के बावजूद हम देश और दुनिया की ख़बरों को जानने से वंचित रह जाते हैं.

उत्तराखंड में कोरोना की तीसरी लहर

बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा सरोजिनी कहती है कि उत्तराखंड में कोरोना की तीसरी लहर (third wave of corona in uttarakhand) को देखते हुए फिर से लॉकडाउन लगा दी गई और ऑनलाइन क्लास की जा रही है. सभी जानते हैं कि बोर्ड का पेपर किसी भी विद्यार्थी के लिए कितना महत्वपूर्ण होता है. इसकी महत्ता को समझते हुए हमारे शिक्षक ऑनलाइन उपलब्ध रहते हैं, लेकिन नेटवर्क की कमी के कारण मैं उनसे संपर्क करने और किसी भी प्रश्न का हल जानने से वंचित रह जाती हूँ. जिससे मेरी पढ़ाई का बहुत अधिक नुकसान हो रहा है. यदि दूरसंचार विभाग और नेटवर्क कंपनियां इस दूर दराज़ ग्रामीण क्षेत्रों में भी नेटवर्क सुधार पर ध्यान देती तो मेरे जैसे कई विद्यार्थियों का नुकसान नहीं होता.

विद्यार्थियों को हो रहे इस नुकसान से शिक्षक भी चिंतित हैं. शिक्षक नीरज पंत के अनुसार बोर्ड परीक्षा किसी भी विद्यार्थी के जीवन का निर्णायक मोड़ होता है. जिसे स्कूल प्रशासन बखूबी समझता है. इसीलिए लॉकडाउन में भी ऑनलाइन क्लासेज (online classes in lockdown) के माध्यम से उनका मार्गदर्शन किया जाता है. लेकिन रौलियाना गांव में नेटवर्क की कमी (Lack of network in Rauliana village) के कारण वहां के छात्र-छात्राओं को ऑनलाइन क्लास के माध्यम से गाइड करना बहुत मुश्किल हो जाता है. जो स्कूल और शिक्षा विभाग के लिए भी चिंता का विषय है.

विद्यार्थियों के साथ-साथ आम ग्रामीणों को भी नेटवर्क की समस्या से कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है.

मंजू देवी के अनुसार रोज़गार की तलाश में शहर गए परिवार के सदस्यों से संपर्क का एकमात्र साधन फोन है, लेकिन नेटवर्क की कमी के कारण उनसे संपर्क करना किसी जंग के जीतने के समान है. आजकल सभी चीज़ें डिजिटल हो गई हैं. इंटरनेट के माध्यम से कई काम आसानी से संभव हो जाते हैं, लेकिन यह उसी वक्त मुमकिन है जब नेटवर्क की समस्या न हो. जबकि यही इस गांव की सबसे बड़ी समस्या बन चुकी है.

बहरहाल अब देखना यह है कि डिजिटल इंडिया के इस युग में, जबकि चुनाव प्रचार भी डिजिटल होता जा रहा है, ऐसे में राजनीतिक दल इस समस्या के निदान में क्या भूमिका निभाते हैं? क्योंकि नेटवर्क के बिना किसी भी गांव का विकास अधूरा है. ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या नेटवर्क जैसी बुनियादी सुविधा की कमी इस चुनाव में प्रमुख मुद्दा बन सकता है?

हेमा

रौलियाना, बागेश्वर

उत्तराखंड

(चरखा फीचर)

हिंदी कंप्यूटर लेखन की समस्याएं और समाधान

Mobile and gadgets

Hindi computer writing problems and solutions

तकनीकी विकास ने हमारा काम लगातार आसान किया है। हाथ से लिखने के बजाय टाइपराइटर से लिखना अधिक सुविधाजनक हुआ और टाइपराइटर की तुलना में कंप्यूटर पर लिखना। फिर भी हर दौर की कुछ समस्याएं रही हैं जिनके समाधान के लगातार प्रयास भी किए जा रहे हैं। इस आलेख में मैं कंप्यूटर पर हिंदी लेखन की कुछ समस्याओं की ओर आपका ध्यान बिंदुवार आकृष्ट कराने और उसके साथ ही कुछ समाधान भी प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा।

यूनीकोड के आरंभ के पहले कंप्यूटर पर हिंदी में काम करने के लिए अनेक फौंट विकसित किए गए। लेकिन अंग्रेजी के विपरीत हिंदी में शब्दों, मात्राओं और संयुक्ताक्षरों की बड़ी संख्या के चलते कीबोर्ड पर सबको एक साथ समेटना संभव नहीं हुआ। फलतः अधिक उपयोग में आने वाले शब्दों को मुख्य कीबोर्ड पर जगह देकर शेष को न्यूमेरिक की के माध्यम से लिखने की व्यवस्था बनाई गई। इस क्रम में विकसित किए गए फौंट में कुछ कुंजियों का अंतर बना रहा और अंग्रेजी की तरह एकरूपता नहीं विकसित की जा सकी।

हिन्दी कम्प्यूटिंग : कुछ बाधाएं और कुछ उपाय –

व्यवहार में सर्वसुलभ गैर-यूनीकोड फौंट के बीच वाकमैन चाणक्य फौंट मुझे सबसे अच्छा लगा। इसलिए कि इसमें मुख्य कीबोर्ड पर होने के कारण कोष्ठकों का उपयोग आसान होता है जिसकी धाराप्रवाह लेखन के दौरान काफी जरूरत पड़ती है। हां, इस फौंट में इस कारण द्ध और ऋ को न्यूमेरिक में डालना पड़ा है। इनमें से द्ध को तो द + ् + ध लिखकर और बाद में Find & Replace के जरिए एक साथ बदलकर आसानी से काम किया जा सकता है लेकिन ऋ के लिए बार-बार न्यूमेरिक में जाना कष्टकर और गति को कमजोर करने वाला होता है। दूसरी समस्या ध को लेकर है जिसे दूसरे फौंट के विपरीत इस फौंट में पूर्णाक्षर लिखा जाता है। तीसरी समस्या त्र को लेकर है जिसे इस फौंट में अन्य फौंट के विपरीत अर्धाक्षर लिखा जाता है जबकि उसका उपयोग बहुत कम होता है।

वाकमैन चाणक्य फौंट में मैं दो सुधार प्रस्तावित करता हूं। पहला, ध और त्र को वाकमैन चाणक्य में भी दूसरे फौंट की तरह ही (अर्थात ध को अर्धाक्षर और त्र को पूर्णाक्षर) लिखा जाय। और दूसरा तथा सबसे महत्वपूर्ण सुधार ऋ के संबंध में किया जाना चाहिए जिसे रु की जगह लिखा जा सकता है। जिस तरह वाकमैन चाणक्य में फ लिखा जाता है उसी तरह रु को भी लिखा जा सकता है।

अब यूनीकोड फौंट की बात की जाय। इससे हिंदी लेखन की बहुत सारी समस्याओं का समाधान हुआ है लेकिन कई समस्याओं के चलते यह आज भी कार्यालयों में या प्रकाशकों के बीच उतना लोकप्रिय नहीं हो पाया है। लेकिन भविष्य यूनीकोड का ही है इसलिए इस पर विस्तार से चर्चा करना चाहूंगा।

इन्सक्रिप्ट के लगातार विकास के जरिए यूनीकोड फौंट में हिंदी लेखन को काफी आसान बना दिया गया है। इसके लिए इसे विकसित करने वाली टीम(मों) की जितनी भी प्रशंसा की जाय कम है।

लेकिन शायद कोई भी चीज स्वयंसंपूर्ण नहीं होती है। इसलिए किसी भी चीज में विकास की गुंजाइश प्रायः हमेशा बनी रहती है ताकि उसे अधिकाधिक उपादेय बनाया जा सके। इसलिए इन्सक्रिप्ट कीबोर्ड में मौजूद रह गई कमियों या समस्याओं पर विचार करना उचित होगा।

इन्सक्रिप्ट कीबोर्ड में अब भी सबसे बड़ी समस्या विराम चिह्नों के प्रयोग की है। यह सच है कि अंग्रेजी में जाकर उन्हें लिखा जा सकता है लेकिन बार-बार भाषा बदलने से लेखन की गति प्रभावित होती है। इसलिए इन्सक्रिप्ट पर कुछ विचार करना उचित होगा।

इन्सक्रिप्ट में सुविधापूर्वक काम करने और याद रखने के लिहाज से स्वरों और मात्राओं को बाएं हाथ की कुंजियों के साथ जोड़ा गया है। लेकिन इस सिद्धांत का भी पूरी तरह पालन नहीं किया गया है। ऋ और ऑ तथा उनकी मात्राएं दाएं हाथ की कुंजियों से जुड़ी हैं और म, न, ण तथा व बाएं हाथ की कुंजियों से। वहीं, ऎ, ऒ और ऍ तथा उनकी मात्राओं को बाएं हाथ की कुंजियों में बेवजह स्थान दिया गया है जबकि हिंदी में उनका उपयोग होता ही नहीं है। मेरी समझ में इनको अंग्रेजी के प्रभाव में स्थान दिया गया है लेकिन आज तक मुझे हिंदी लेखन में ऎ और ऒ तथा उनकी मात्राओं का प्रयोग कहीं नहीं दिखा। अंग्रेजी प्रभाव में हिंदी में ऑ और उसकी मात्रा का जरूर प्रयोग होने लगा है। अपवादस्वरूप ऍ तथा उसकी मात्रा का प्रयोग भी होता दिखता है।

इसी प्रकार, ऩ, य़, ऱ और ळ का हिंदी में बिल्कुल ही उपयोग नहीं होता है। यह सच है कि देवनागरी फौंट में हिंदी के अलावा भी कई भाषाएं लिखी जाती हैं जिनके लिए गैर-यूनीकोड फौंट में भी ळ को स्वीकार किया गया है। लेकिन ऩ, य़ और ऱ को क्रमशः न, य और र के नीचे नुक्ता लगाकर आराम से लिखा जा सकता है इसलिए स्वतंत्र कुंजियों पर उन्हें स्थान देना उचित नहीं लगता।

इन्सक्रिप्ट कीबोर्ड पर त्र और श्र भी बेकार ही जगह घेरते हैं। जैसे क से क्र लिखा जाता है वैसे ही उन्हें भी त और श से लिखा जा सकता है ।

इन्सक्रिप्ट कीबोर्ड पर ङ और ञ के स्थान भी विचारणीय हैं। हिंदी में तो इनका उपयोग समाप्तप्राय है लेकिन संस्कृत में भरपूर उपयोग होता है। इसलिए वर्तमान में प्रयुक्त महत्वपूर्ण कुंजियों की जगह इन्हें गौण कुंजियों पर स्थान दिया जा सकता है। और अगर संभव हो तो ङ को ड के सामने . लगाकर बनाने की व्यवस्ता की जा सकती है जैसा कि बहुत सारे संयुक्ताक्षरों के मामले में किया गया है।  

ऐसा ही मामला ः के उपयोग को लेकर है। इन्सक्रिप्ट कीबोर्ड में इसे व्यंजनों के साथ तो संयुक्त किया जा सकता है लेकिन स्वतंत्र रूप से नहीं लिखा जा सकता है। अगर इसे स्वतंत्र रूप से लिखना संभव हो तो मात्रा के लिए एक कुंजी आसानी से उपलब्ध हो जा सकती है।

इन्सक्रिप्ट कीबोर्ड में एक समस्या आसानी से याद रखने के नाम पर चवर्ग और टवर्ग को होम रो और ऊपरी रो में स्थान देने को लेकर रही है। इन दोनो रो में उन अक्षरों को स्थान देना उचित होता है जिनकी आवृत्ति सबसे अधिक बार होती है। लेकिन यहां इन दोनो वर्गों को स्थान देने के कारण म, न, ल, व, स और य जैसे अधिक आवृत्ति वाले अक्षरों को निचले रो में स्थान मिला है। इससे लेखन की गति निश्चित तौर पर प्रभावित होती है।

इन्सक्रिप्ट कीबोर्ड में कुछ चिह्नों को स्थान दे देने पर लेखन का प्रवाह निश्चित तौर पर बढ़ जाएगा। ये चिह्न हैं – ?, /, :, ;, ‘, “, !, %, =, +, और *  या x (गुणा के लिए)। इन 11 चिह्नों में से ‘ को दो बार लिखकर भी ” लिखा जा सकता है जैसा कि गैर-यूनीकोड हिंदी लेखन में किया जाता है। इस तरह 10 चिह्नों के लिए जगह बनाने की जरूरत पड़ेगी। ऎ, ऒ और ऍ तथा उनकी मात्राएं आसानी से 6 स्थान खाली कर दे सकती है। वहीं, ऩ, य़, ऱ, त्र और श्र को हटाकर 5 स्थान खाली किए जा सकते हैं और उनमें शेष चिह्नों को समंजित किया जा सकता है।

हिंदी में तो अ के अर्धाक्षर का उपयोग नहीं होता है लेकिन संस्कृत में बहुत अधिक उपयोग होता है। उक्त खाली स्थान में उसके लिए भी जगह बनाई जा सकती है क्योंकि उसे दूसरी तरह से नहीं लिखा जा सकता है।

अगर इन चिह्नों को स्थान देने पर बात की जाय तो एक तरीका इन्सक्रिप्ट कीबोर्ड में अधिक छेड़छाड़ किए बिना हटाने जाने वाले अक्षरों या मात्राओं की जगह कोई चिह्न रख दिया जा सकता है। जैसे, य़ की जगह ? को और इसी तरह दूसरे चिह्नों को रखा जा सकता है।

लेकिन दीर्घकालिक दृष्टि से व्यापक फेरबदल करना अधिक उपयुक्त होगा। इससे काम करने वालों को परेशानी तो होगी लेकिन शीघ्र ही वे टच मेमोरी विकसित कर लेंगे और उनके लेखन की गति काफी बढ़ जाएगी। इसके लिए अधिकांश को वहीं रहने दिया जा सकता है जहां से उन्हें अंग्रेजी में लिखा जाता है। अभी भी उनको अंग्रेजी फौंट के जरिए ऐसै ही लिखा जाता है। हालांकि ऐसा करना भी पूरी तरह संभव नहीं होगा क्योंकि होम की पर आने वाले  :, ;, ‘, और “, इतने अधिक उपयोग में नहीं आते हैं कि उन्हें होम की पर रखा जाय।

इस तरह लगभग त्रुटिरहित कीबोर्ड के विकास के लिए हर अक्षर, मात्रा और चिह्न के स्थान पर सावधानी से विचार की जरूरत है। इसके लिए बहुत से स्थानों का पुनर्समंजन भी करना होगा लेकिन हिंदी लेखन की समस्या के स्थायी समाधान के लिए यह जरूरी है। इससे हिंदी का और भावी पीढ़ी का काफी उपकार होगा।

राज बल्लभ

(लेखक साहित्यकार, समाजसेवी और हिंदी अनुवादक हैं)

जैसलमेर के रेगिस्तान में मिले जुरासिक-युगीन शार्क के दाँत

Science news

Jurassic-age shark’s teeth discovered from Jaisalmer basin

प्राचीन चट्टानों में मिले हैं शार्क प्रजातियों के दाँत | Teeth of shark species found in ancient rocks

नई दिल्ली, 18 सितंबर: एक दुर्लभ खोज में, भारतीय शोधकर्ताओं को एक विलुप्त शार्क समूह, जिसे हायबोडोंट कहा जाता है (hybodus shark fossil), की एक प्रजाति के प्रमाण राजस्थान के जैसलमेर के रेगिस्तान से मिले हैं।

शोधकर्ताओं को शार्क प्रजातियों के दाँत प्राचीन चट्टानों में मिले हैं, जिनकी आयु 160 से 168 मिलियन वर्ष आंकी गई है।

ट्राइऐसिक काल और प्रारंभिक जुरासिक काल (252-174 मिलियन वर्ष पूर्व) के दौरान समुद्री और नदी; दोनों वातावरणों में हायबोडोंट मछलियों का एक प्रमुख समूह था। हालांकि, मध्य जुरासिक काल (174-163 मिलियन वर्ष पूर्व) से समुद्री वातावरण में रहने वाली इन मछलियों की संख्या में गिरावट होने लगी, जब तक कि वे खुले समुद्री शार्क संयोजन का अपेक्षाकृत अल्पवयस्क घटक नहीं बन गईं।

This species of fish, the Hybodus, became extinct at the end of the Cretaceous period 65 million years ago.

माना जाता है कि मछलियों की यह प्रजाति अंततः 65 मिलियन वर्ष पहले क्रेटेशियस काल के अंत में विलुप्त हो गई थी।

शार्क का नया खोजा गया जीवाश्म स्ट्रोफोडस वंश से संबंधित बताया जा रहा है।

यह पहली बार है जब भारतीय उपमहाद्वीप से स्ट्रोफोडस वंश से संबंधित किसी प्रजाति की पहचान की गई है।

इसके अलावा, यह एशिया का केवल तीसरा ऐसा रिकॉर्ड है, जबकि अन्य दो रिकॉर्ड जापान और थाईलैंड से हैं। शोध दल को जिस स्थान पर यह जीवाश्म मिला है, उसके नाम पर ही इसका नाम स्ट्रोफोडसजैसलमेरेनसिस रखा गया है। इसे हाल ही में शार्क रेफरेंस डॉट कॉम में शामिल किया गया है, जो एक अंतरराष्ट्रीय मंच है, जो इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आईयूसीएन) और स्पीशीज सर्वाइवल कमीशन (एसएससी) सहित कई वैश्विक संगठनों के सहयोग से काम कर रहा है।

Study of Jurassic vertebrate fossils in Jaisalmer region of Rajasthan

यह खोज राजस्थान के जैसलमेर क्षेत्र में जुरासिक कशेरुकी जीवाश्मों के अध्ययन में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है, और यह कशेरुकी जीवाश्मों के क्षेत्र में आगे के शोध के लिए एक नये द्वार खोलती है।

दाँतों के इस जीवाश्म को भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) के जयपुर स्थित पश्चिमी क्षेत्रीय कार्यालय के अधिकारियों की एक टीम ने खोजा है।

इस टीम में कृष्ण कुमार, प्रज्ञा पांडे, त्रिपर्णा घोष और देबाशीष भट्टाचार्य शामिल हैं। उन्होंने हिस्टोरिकल बायोलॉजी, जर्नल ऑफ पैलियोन्टोलॉजी में अपनी खोज पर एक रिपोर्ट प्रकाशित की है। डॉ सुनील बाजपेयी, विभागाध्यक्ष, पृथ्वी विज्ञान विभाग, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रुड़की, जो इस अध्ययन के सह-लेखक हैं, ने इस महत्वपूर्ण खोज की पहचान और प्रस्तुति में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना कब हुई, इसका उद्देश्य क्या था ? | When was the Geological Survey of India established, what was its purpose?

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण की स्थापना 1851 में मुख्य रूप से रेलवे के लिए कोयले के भंडार का पता लगाने के लिए की गई थी। इन वर्षों में, यह न केवल देश में विभिन्न क्षेत्रों में आवश्यक भू-विज्ञान की जानकारी के भंडार के रूप में विकसित हुआ है, बल्कि इसने अंतरराष्ट्रीय ख्याति के भू-वैज्ञानिक संगठन का दर्जा भी प्राप्त किया है। इसका मुख्य कार्य राष्ट्रीय भू-वैज्ञानिक जानकारी और खनिज संसाधन के मूल्यांकन से संबंधित है।

इन उद्देश्यों को भूमि सर्वेक्षण, हवाई एवं समुद्री सर्वेक्षण, खनिजों की खोज एवं परीक्षण, बहु-विषयक भूवैज्ञानिक, भू-तकनीकी, भू-पर्यावरण तथा प्राकृतिक खतरों के अध्ययन, हिमनद विज्ञान, भूकंपीय विवर्तनिक अध्ययन और मौलिक अनुसंधान के माध्यम से प्राप्त किया जाता है।

सर्वेक्षण और मानचित्रण में जीएसआई की क्षमता में, प्रबंधन, समन्वय और स्थानिक डेटाबेस (रिमोट सेंसिंग के माध्यम से प्राप्त डेटा सहित) के उपयोग के माध्यम से निरंतर वृद्धि हुई है।

जीएसआई भू-सूचना विज्ञान क्षेत्र में अन्य हितधारकों के साथ सहयोग और सहयोग के माध्यम से भू-वैज्ञानिक सूचना और स्थानिक डेटा के प्रसार के लिए नवीनतम कंप्यूटर-आधारित तकनीकों का उपयोग करता है।

(इंडिया साइंस वायर)

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भारतीय शोधकर्ताओं ने विकसित किया गुणवत्ता वाला पारदर्शी सिरेमिक

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Researchers from International Advanced Research Center for Powder Metallurgy and New Materials (ARCI), Gurugram have developed magnesium aluminate spinel ceramics through colloidal processing.

पारदर्शी सिरेमिक क्या है? कोलाइडल प्रोसेसिंग तकनीक क्या है? What is transparent ceramic? What is colloidal processing technology?

नई दिल्ली, 18 सितंबर, 2021: भारतीय शोधकर्ताओं को एक पारदर्शी सिरेमिक (transparent ceramic) विकसित करने में सफलता मिली है। यह खोज थर्मल इमेजिंग अनुप्रयोगों और हेलमेट, फेस शील्ड्स और गोगल्स जैसे निजी सुरक्षा उपकरणों के लिए फरयोगी सिद्ध हो सकती है। शोधकर्ताओं ने कोलाइडल प्रोसेसिंग नामक तकनीक (technology called colloidal processing) से सैद्धांतिक पारदर्शिता के साथ-साथ ताप एवं दबाव के अनुप्रयोगों से अपेक्षित लक्ष्य को प्राप्त किया है।

भारत में पहली बार ऐसी कोई तकनीक विकसित हुई है।

पारदर्शी सेरेमिक्स एक अत्याधुनिक सामग्री (मैटीरियल) है। इसमें अद्वितीय पारदर्शिता एवं उत्कृष्ट मैकेनिकल विशिष्टताओं का समावेश है। वैश्विक स्तर पर कई देश पारदर्शी सेरेमिक्स का उत्पादन करते हैं, लेकिन इनका उपयोग रणनीतिक हितों की पूर्ति के लिए भी होता है ऐसे में उनकी आपूर्ति बहुत सीमित और कई मायनों में प्रतिबंधित है।

भारत में पारदर्शी सेरेमिक्स बनाने के प्रयास काफी समय से चल रहे थे, किंतु वे या तो प्रयोगशाला तक ही सिमटे रहे या फिर उनकी पारदर्शिता क्षमता बहुत निम्न स्तर की थी। वर्तमान में जिस प्रक्रिया के तहत इसे विकसित किया गया है, उसका कई तरह से प्रयोग किया जा सकता है। अभी यह प्रायोगिक दायरे में ही है।

कैसे तैयार हुआ पारदर्शी सेरेमिक सैंपल

पारदर्शी सेरेमिक सैंपल को क्रिटिकली इंजीनियर्ड प्रोसेसिंग पद्धति (critically engineered processing method) के जरिये उच्च शुद्धता वाले पाउडर से बनाया गया है।

पारदर्शी सेरेमिक्स के लिए ऐसी तैयारी प्रक्रिया आवश्यक है जो अशुद्धियों को बाहर कर सैद्धांतिक पारद्शिता के स्तर को प्राप्त करने में सहायक हो। इसमें रासायनिक वाष्प जमाव (सीवीडी) जिसमें ऊंचे तापमान पर वाष्प चरण में अग्रमामियों की प्रतिक्रियाएं शामिल होती हैं और हॉट आइसोस्टैटिक प्रेसिंग (एचआईपी) जिसमें तापमान और दबाव का एक साथ अनुप्रयोग शामिल होता है, ऐसी कुछ उन्नत प्रसंस्करण तकनीक हैं, जिन्हें प्रायः उपरोक्त चुनौतियों का समाधान करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है। दबाव द्वारा उच्च तापमान पर एक परिष्कृत विसरण प्रक्रिया संभावित समाधान में अशुद्धियों को दूर करने के लिए के लिए अपनाई जाती है।

इंटरनेशनल एडवांस रिसर्च सेंटर फॉर पाउडर मेटालर्जी एंड न्यू मैटेरियल्स (एआरसीआई), गुरुग्राम के शोधकर्ताओं ने कोलाइडल प्रसंस्करण के माध्मय से मैग्नीशियम एल्यूमिनेट स्पिनल सिरेमिक को विकसित किया है।

यह शोध हाल में मैटीरियल्स केमिस्ट्री एंड फिजिक्समें प्रकाशित भी हुआ है।

वर्तमान में स्पाइनेल उत्कृष्ट ऑप्टिकल विशिष्टताओं के साथ एक पारदर्शी सेरेमिक के रूप में उभर रहा है। इसकी क्षमता दृश्यमान अवस्था में 75 प्रतिशत और अवरक्त (इन्फ्रा रेड) रेंज में 80 प्रतिशत से अधिक है। साथ ही इसमें 200 मेगापास्कल से अधिक की उच्चतर क्षमता और 13 गीगापास्कल की कठोरता (हार्डनेस) होती है। जानकार इस खोज को आत्मनिर्भर भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।

(इंडिया साइंस वायर)

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आईआईटी गुवहाटी ने विकसित किया उन्नत ऊर्जा-भंडारण उपकरणों के लिए हाइड्रोजेल आधारित इलेक्ट्रोड्स

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IIT Guwahati develops hydrogel based electrodes for advanced energy-storage devices

नई दिल्ली, 26 अगस्त, 2021: एनर्जी स्टोर करने वाली डिवाइसों की क्षमताएं बढ़ाने की दिशा में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) गुवाहाटी के शोधार्थियों को एक बड़ी सफलता मिली है। शोधकर्ताओं ने हाइड्रोजेल आधारित इलेक्ट्रोड्स विकसित किए हैं जो ऊर्जा संचित करने वाले उपकरणों की कुशलता बढ़ाने में उपयोगी हो सकते हैं।

हाइड्रोजेल क्या होते हैं

हाइड्रोजेल असल में इंटरकनेक्टेड मैटीरियल्स का एक छिद्रयुक्त ढांचा होता है जिसके छिद्रों में जमा पानी बाहर नहीं निकल सकता। हाइड्रोजेल के निर्माण में शोधकर्ताओं ने ग्रेफीन और मैक्सीन नामक दो नैनोशीट्स का इस्तेमाल किया है जो दो भिन्न प्रक्रियओं द्वारा चार्जिंग को संचित करते हैं।

क्या है इस परियोजना का लक्ष्य

आईआईटी गुवाहाटी के भौतिकी विभाग में इस शोध का नेतृत्व डॉ. उदय नारायण मैती ने किया। इसमें उन्हें आईआईटी गुवाहाटी के प्रो. शुभ्रादीप घोष और भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंट (बीएआरसी) में भौतिकी समूह की डॉ. एन पद्मा का भी सहयोग मिला। इस परियोजना का लक्ष्य सुपरकैपिसिटर डिवाइसों में एनर्जी स्टोरेज के प्रदर्शन को सुधारना है।

इस शोध की विशिष्टताओं को रेखांकित करते हुए आईआईटी गुवाहाटी में भौतिकी विभाग से जुड़े डॉ. उदय नारायण मैती ने कहा, ‘इसका सबसे उल्लेखनीय पहलू इसकी व्यापक सरलता में निहित है। इसकी व्यापकता और रूम टेंपरेचर पर संचालित होने वाली इसकी प्रक्रिया तापमान को लेकर संवेदनशील मैक्सीन नैनोशीट को अपना गुणधर्म बदलने से रोकती है, जिससे डिवाइस का बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित होता है।

हाइड्रोजेल इलेक्ट्रोड्स में ग्रेफीन और मैक्सीन एक जलीय माध्यम में डूबी धात्विक प्लेटों से स्वयं को एक साथ जोड़ लेती हैं। इसमें सिंगल एटम थिन कार्बन शीट वाली ग्रेफीन भौतिक अवशोषण के माध्यम से चार्जिंग को अपनी सरफेस (तल) पर संग्रहित करती है। वहीं टाइटेनियम कार्बाइड की नैनोशीट्स मैक्सीन अपनी सरफेस पर इलेक्ट्रिकल डबल लेयर मैकेनिज्म (ईएलडीसी) और रासायनिक अभिक्रियाओं दोनों के माध्यम से चार्जिंग को संग्रहित करता है।

सुपरकैपेसिटर्स में दो इलेक्ट्रोड्स (एनोड और कैथोड) होते हैं। ये इलेक्ट्रोलाइट सॉल्यूशंस में डूबे रहते हैं। इसमें ऊर्जा चार्जिंग के माध्यम से इलेक्ट्रोड्स सरफेस पर संग्रहित होती है। एटॉमिक-थिन शीट जैसे मैटीरियल सुपरकैपेसिटर्स के लिए सबसे उत्तम विकल्प माने जा रहे हैं। इन्हें नैनोशीट्स भी कहा जाता है। हालांकि माइक्रोस्कोपिक अल्ट्रा-स्मॉल नैनोशीट्स को उपयोग योग्य माइक्रोस्कोपिक स्केल के साथ एकीकृत करना बहुत चुनौतीपूर्ण कार्य है।

शोधार्थियों ने अपने इस प्रयोग को व्यापक स्तर पर परखा भी है। उन्होंने 10,000 से अधिक बार इसमें चार्जिंग-डिस्चार्जिंग करके उसकी गहन पड़ताल की है, जिसमें प्रदर्शन में मामूली उतार-चढ़ाव ही देखने को मिला।

उन्होंने इलेक्ट्रोड मैटीरियल की 1.13 केजी पावर डेन्सिटी का उच्चतम स्तर तक हासिल किया, जो वर्तमान में उपलब्ध लीथियम-आयन बैटरियों की क्षमता से लगभग दोगुना अधिक है। यह शोध हाल में इलेक्ट्रोचिमिका एक्टाऔर कार्बनमें प्रकाशित भी हुआ है।

(इंडिया साइंस वायर)

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निःसंतान दम्पत्तियों के लिए खुशियों की सौगात लाएगी यह नई खोज

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Assisted reproductive technology IVF for childless couples in India | How IVF is bringing joy to thousands of childless couples?

आईवीएफ की सफलता दर को और बेहतर बनाएगी नई तकनीक

नई दिल्ली, 13 अगस्त, 2021. निःसंतान दम्पत्तियों के लिए सहायक प्रजनन तकनीक आईवीएफ (Assisted Reproductive Technology IVF for Childless Couples) उम्मीद की एक किरण है, लेकिन इस तकनीक की सफलता की राह में कुछ चुनौतियां भी हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए वैज्ञानिकों ने एमपीटीएक्स (mPTX) या एमपीटैक्स नाम का एक लघु कार्बनिक अणु (स्मॉल ऑर्गेनिक मॉलिक्यूल – small organic molecules) का डिजाइन तैयार किया है  जो इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) प्रक्रिया की सफलता (In vitro fertilization (IVF) में अहम भूमिका निभाने वाले स्पर्म की क्षमताओं को बेहतर बनाती है। इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) हैदराबाद में जैवप्रौद्योगिकी विभाग के डॉ. राजाकुमारा ईरप्पा के समूह, मेंगलूर विश्वविद्यालय के डॉ. जगदीश प्रसाद दासप्पा के समूह और मणिपाल एकेडमी ऑफ हायर एजुकेशन के प्रो. गुरुप्रसाद कल्थूर के समूह ने मिलकर विकसित किया है।  

MPTx being seen as a better option

इन समूहों के अध्ययन ने यही स्थापित किया है कि एक पेंटोक्सिफाइलाइन डेरिवेटिव के रूप में एमपीटैक्स स्पर्म की आवाजाही या सक्रियता को बढ़ाने, वाइट्रो स्पर्म को लंबे समय तक अक्षुण्ण बनाए रखने और स्पर्म फर्टिलाइजेशन संभावनाओं को बढ़ाने में सहायक सिद्ध होता है।

यह भी उल्लेखनीय है कि एमपीटैक्स के माध्यम से आगे बढ़ने वाली इस प्रक्रिया के दुष्प्रभाव नगण्य हैं। फिलहाल आईवीएफ तकनीक में फार्माकोलॉजिकल एजेंट (Pharmacological agents in IVF technology) के रूप में जिस पेंटोक्सिफाइलिन का इस्तेमाल किया जाता है, उसकी तुलना में अपेक्षाकृत कम संकेंद्रण वाला एमपीटैक्स शरीर पर कम दुष्प्रभाव दिखाता है। ऐसे में सहायक प्रजनन प्रक्रियाओं में जिन दवाओं का उपयोग किया जा रहा है उनके मुकाबले एमपीटैक्स को एक बेहतर विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।

निःसंतान दंपत्तियों के लिए खुशियों की सौगात लाएगी यह खोज

आईआईटी हैदराबाद के निदेशक प्रो. बीएस मूर्ति कहते हैं, ‘मातृत्व-पितृत्व के सुख को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता। ऐसे में डॉ. राजकुमारा के नेतृत्व में हुई यह खोज निःसंतान दंपत्तियों के लिए खुशियों की सौगात लाएगी, क्योंकि इससे आईवीएफ में सफलता की संभावनाएं और बढ़ गई हैं। साथ ही यह खोज विभिन्न समूहों के साथ में काम करने के जबरदस्त प्रभाव को भी दर्शाती है।

बांझपन की प्रमुख वजह

पुरुष शुक्राणुओं में गतिशीलता की कमी बांझपन की एक प्रमुख वजह मानी जाती है। गर्भधारण के लिए शुक्राणुओं का निशेचन स्थान तक पहुंचना आवश्यक होता है। माना जा रहा है कि यह नई तकनीक गर्भाधान और उसके आगे की प्रक्रियाओं को निर्विघ्न बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

विज्ञान और इंजीनियरिंग अनुसन्धान बोर्ड के द्वारा पोषित इस शोध अध्ययन कस निष्कर्ष ‘नेचर साइंटिफिक रिपोर्ट्स में प्रकाशित किये गए हैं।

(इंडिया साइंस वायर)

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भारत में डेल ने पेश किए दो नए लैपटॉप

एलियनवेयर एम 15 आर 6 गेमिंग लैपटॉप 11वीं पीढ़ी के इंटेल कोर प्रोसेसर और एनवीडिया जीफोर्स आरटीएक्स 30-सीरीज ग्राफिक्स के साथ संचालित पहला उपकरण है।

Dell introduced two new laptops in India | Is Alienware m15 available in India?

Dell, the leading manufacturer of laptops sector, has launched two new laptops in India.

नई दिल्ली, 3 अगस्त 2021. लैपटॉप क्षेत्र की अग्रणी निर्माता कंपनी डेल ने भारत में दो नए लैपटॉप को लॉन्च किए हैं।

एलियनवेयर एम 15 आर 5 की भारत में कीमत | Alienware M15 R5 price in India

उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के उद्देश्य से डेल एलियनवेयर एम 15 आर 5 और एलियनवेयर एम 15 आर 6 लैपटॉप लाया है। एलियनवेयर एम 15 आर 5 की कीमत 1,34,990 रुपये और एलियनवेयर एम 15 आर 6 की कीमत 1,59,990 रुपये है। दोनों मॉडल डेल डॉट कॉम पर खरीदने के लिए उपलब्ध होगा।

कंपनी ने कहा कि एएमडी रायजेन आर 7-5800 एच-सीरीज मोबाइल प्रोसेसर और एनवीडिया जियोफोर्स आरटीएक्स 30 सीरीज लैपटॉप जीपीयू के समर्थन के साथ, एलियनवेयर एम 15 आर 5 एएमडी प्रोसेसर और एनवीडिया ग्राफिक्स (nvidia graphics) के साथ निर्मित पहला एलियनवेयर नोटबुक है, जो निर्माण और मनोरंजन के लिए उपयुक्त है।

एलियनवेयर एम 15 आर 6 गेमिंग लैपटॉप 11वीं पीढ़ी के इंटेल कोर प्रोसेसर और एनवीडिया जीफोर्स आरटीएक्स 30-सीरीज ग्राफिक्स के साथ संचालित पहला उपकरण है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एलियनवेयर एम 15 आर 6 कोर आई 7.11800 एच टाइगर लेक-एच सीपीयू प्रदान करता है। ग्राफिक्स विकल्प एनवीडिया आरटीएक्स 3060 से लेकर आरटीएक्स 3080 लैपटॉप जीपीयू तक हैं जो 10वॉट तक डायनामिक बूस्ट सुविधा प्रदान करते हैं।

यह मानक एलियनवेयर एमसीरीज 4-जोन एलियनएफएक्स आरजीबी कीबोर्ड के साथ 1.7 मिमी की यात्रा के साथ आता है जिसमें एंटी-घोस्टिंग तकनीक शामिल है। एलियनवेयर एचडी (1280 गुणा720 रेजोल्यूशन) कैमरा बायोमेट्रिक अनुभवों के लिए विंडोज हैलो आईआर के साथ दोहरे सरणी माइक्रोफोन का समर्थन करता है।

कंपनी ने कहा कि नए एलियनवेयर लैपटॉप बहुत पहले के साथ आते हैं, एम15 आर5 और आर6 एक बेहतरीन अनुभव देने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों और नई डिजाइन सुविधाओं को मिलाते हैं।

आईटी नियम : गूगल ने भारत में 11.6 लाख से अधिक आपत्तिजनक कंटेन्ट हटाया

Google removes more than 11.6 lakh objectionable content in India under IT rules

Google removes nearly 1.5 Lakh content peices in May-June in India. The US-based company has made these disclosures as part of compliance with India’s IT rules,

नई दिल्ली, 30 जुलाई 2021. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिग्गज सर्च इंजन गूगल (giant search engine google) ने अपने एक बयान में कहा कि उसने भारत में मई और जून के महीनों में 11.6 लाख से अधिक आप्पतिजनक ऑनलाइन कंटेन्ट को हटा दिया है। सोशल मीडिया एसएसएमआईएस को बताया गया कि, दो महीनों के लिए अपनी मासिक पारदर्शिता रिपोर्ट के हिस्से के रूप में, गूगल ने भारत में यूजर्स से प्राप्त शिकायतों और उन पर की गई कार्रवाई के विवरण (google complaince report) के अलावा, रिपोर्ट में अब स्वचालित पहचान प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप की गई कार्रवाइयों को हटा दिया है। यह कार्रवाई आईटी नियमों के तहत किया गया है।

गूगने अपनी स्वचालित पहचान प्रक्रियाओं के माध्यम से मई में हार्मफुल कंटेन्ट के 634,357 और जून 2021 के लिए 526,866 को हटा दिया।

Google has been publishing its Transparency Report since 2010 that provides details on government requests for content removals on a biannual basis.

प्राप्त जानकारी के अनुसार दिग्गज टेक कंपनी ने बयान में कहा, ये आंकड़े एक महीने की रिपोर्टिंग अवधि के दौरान स्वचालित पहचान प्रक्रियाओं के परिणामस्वरूप हमारे एसएसएमआई प्लेटफॉर्म पर भारत में उपयोगकतार्ओं से सामग्री पर हटाने की कार्रवाई की संख्या दिखाते हैं।

फेसबुक, व्हाट्सएप और ट्विटर जैसी अन्य सोशल मीडिया फर्मों ने भी नए आईटी नियमों के तहत अपनी मासिक पारदर्शिता रिपोर्ट प्रस्तुत की है।

अपने रुख को दोहराते हुए कि नए आईटी नियम निजता के अधिकार और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन नहीं करते हैं। सरकार ने बुधवार को संसद को बताया कि उनकी समीक्षा करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।

नियमों ने बड़े विवाद को जन्म दिया क्योंकि माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म ट्विटर शुरू में कुछ मानदंडों का पालन करने के लिए तैसर नही था। इस कारण तत्कालीन इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्लेटफॉर्म पर मानदंडों के घोर उल्लंघन का आरोप लगाया था।

हालाँकि, ट्विटर ने अब देश में एक शिकायत अधिकारी की नियुक्ति सहित विवादास्पद मानदंडों का पालन किया है।

गूगल सहित अन्य महत्वपूर्ण सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने पहले ही नियमों का पालन किया था।