भारत में श्रमिक संघर्षों पर केंद्रित पाँचवीं वेबिनार 19 को

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महिला श्रमिक और उनके संघर्ष | Women workers and their struggle

इंदौर, 17 नवम्बर, 2020 : जोशी-अधिकारी इंस्टिट्यूट ऑफ सोशल स्टडीजJoshi-Adhikari Institute of Social Studies (जैस), दिल्ली द्वारा भारत में श्रमिक संघर्षों पर केंद्रित वेबिनार (Webinar focused on labor struggles in India) का आयोजन 19 नवंबर, 2020, गुरुवार को शाम 5 से 7:30 बजे किया जा रहा है।

यह वेबिनार, छः वेबिनार श्रृंखला की पाँचवीं वेबिनार है। इसका विषय है- महिला श्रमिक और उनके संघर्ष।

यह पाँचवीं वेबिनार इसलिए भी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि देश की आधी आबादी कही जाने वाली महिलाएँ देश के श्रम में भी आधा योगदान दर्ज करती हैं। महिला श्रम के इस योगदान और उनके संघर्षों को समझने के लिए इस वेबिनार की अलहदा महत्ता है।

यह पांचवीं वेबिनार 19 नवम्वर 2020 को महिला श्रमिकों और उनके संघर्षों पर केंद्रित है। इस वेबिनार में आँगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ता, गारमेंट इंडस्ट्री के महिला श्रमिकों, आधुनिक औद्योगिक क्षेत्रों में काम कर रहीं महिला श्रमिकों, चाय बागानों की महिला श्रमिकों के संघर्षों पर चर्चा की जाएगी।

वेबिनार में “हमारी अर्थव्यवस्था में महिला श्रमिकों का एक व्यापक अवलोकन” पर अपनी बात रखेंगी कॉमरेड वहीदा निजाम जो तमिलनाडु से हैं।

“आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के संघर्ष” के बारे में बताएँगी कॉमरेड सरोज (पंजाब) से हैं।

“आशा कार्यकर्ताओं के संघर्ष” के बारे में हरियाणा से कॉमरेड सुरेखा और “आधुनिक उद्योगों में महिला श्रमिकों के संघर्ष” पर हरियाणा से ही कॉमरेड अनीता यादव अपनी बात रखेंगी।

“चाय बागानों में महिला श्रमिकों के संघर्ष” पर जानकारी देंगी केरल की साथी कॉमरेड कविता और “गारमेंट क्षेत्र में महिला श्रमिकों के संघर्ष” पर प्रकाश डालेंगे बेंगलुरु से कॉमरेड सत्यानंद।

पहली वेबिनार श्रम नियमों की जानकारी, उनके अधिकार और हमलों तथा प्रतिक्रियाओं एवं संगठित क्षेत्र के श्रमिकों की स्थितियों पर केंद्रित थी। दूसरी वेबिनार “उद्योगों में श्रम का दमन- चुनौतियाँ” विषय पर हुई।

तीसरी वेबिनार “उर्जा के क्षेत्र में संकट और कर्मचारियों का संघर्ष” तथा चौथी वेबिनार “नवउदारवादी नीतियों के खिलाफ सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारी (बैंकिंग, बीमा और दूरसंचार क्षेत्र)” विषय पर केंद्रित थी।

पाँचवीं वेबिनार 19 नवंबर 2020 को है।

पूरी श्रृंखला में एक-दो वक्तव्यों को छोड़ सभी वक्तव्य हिंदी में होंगे। जो वक्तव्य अंग्रेजी में होंगे उनके संक्षिप्त अनुवाद भी प्रस्तुत किये जाएँगे।

होप-पंच डिजाइन वाले फ्लैट डिस्प्ले से लैस आ रहा है वनप्लस 9

Mobile and gadgets

Mobile and gadgets | new mobile news global

नई दिल्ली, 17 नवंबर 2020. चीनी स्मार्टफोन निर्माता वनप्लस (Chinese smartphone manufacturer OnePlus) आने वाले मार्च में वनप्लस 9 लॉन्च करने की तैयारी में है और ऐसा कहा जा रहा है कि उसका यह डिवाइस होप-पंच डिजाइन वाले फ्लैट डिस्प्ले से लैस होगा।

The OnePlus mobile phone company is amongst the major Android smartphone companies

वनप्लस मोबाइल फोन कंपनी प्रमुख एंड्रॉइड स्मार्टफोन कंपनियों में से एक है और इसके 34 देशों और क्षेत्रों में परिचालन हैं …

एक रिपोर्ट के मुताबिक वनप्लस 9 का बैक पैनल (Back panel of oneplus 9) कवर्ड होगा और इसका कैमरा मॉड्यूल त्रिकोण आकार का होगा। कैमरों में दो बड़े आकार के लेंस, एक छोटे आकार का कैमरा और एक एलईडी फ्लैश होगा।

यह स्मार्टफोन 120हट्ज रिफ्रेश रेट वाला होगा और इस सीरीज के तहत तीन फोन लॉन्च किए जाने हैं लेकिन इनके नाम सिर्फ वनप्लस 9 और वनप्लस 9 प्रो (OnePlus 9 Pro) होंगे।

यह फोन क्वॉलकैम स्नैपड्रैगन 875, एमोलेड डिस्प्ले (सेंटर्ड पंच होल के साथ), 144एचजेड रिफ्रेश रेट स्क्रीन, आईपी68 रेटिंग, एनएफसी, डुअल स्टीरियो स्पीकर्स और कई अन्य विशेषताओं से लैस होगा।

नोबेल पुरस्कार विजेता के साथ मिलकर ब्रह्मांड के रहस्य उजागर करेंगे भारतीय खगोलविद्

Indian astronomer will unveil the secrets of the universe together with Nobel Prize winner

Indian astronomer will unveil the secrets of the universe together with Nobel Prize winner

नई दिल्ली, 11 नवंबर: ब्रह्मांड के रहस्यों को उजागर करने के लिए असीमित अंतरिक्ष में झांकने के उद्देश्य से अमेरिका के हवाई द्वीप के मोनाकिया में तीस मीटर का विशालकाय टेलीस्कोप लगाया जा रहा है। इस अंतरराष्ट्रीय परियोजना में टेलीस्कोप से जुड़े उपकरणों के संबंध में भौतिक विज्ञान के वर्ष 2020 के नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर एंड्रिया गेज भारतीय खगोलविदों के साथ सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

हमारी आकाश गंगा के केन्द्र में स्थित एक विशालकाय ठोस वस्तु का पता लगाने के लिए प्रोफेसर गेज को प्रोफेसर रोजर पेनरोस और प्रोफेसर रिनहार्ड गेंजेल के साथ संयुक्त रूप से यह पुरस्कार दिया गया है। प्रोफेसर गेज ने थर्टी मीटर टेलीस्कोप (टीएमटी) परियोजना में उपयोग होने वाले बैक ऐंड उपकरणों और परियोजना की वैज्ञानिक संभावनाओं से जुड़े तकनीकी पहलुओं के विकास में अहम भूमिका निभायी है। 

भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (Indian Institute of Astrophysics) की निदेशक डॉ.अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम और आर्यभट्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ ऑब्जर्वेशन साइंसेज के वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडे जैसे कई भारतीय खगोलविदों के साथ-साथ कई अन्य लोगों ने प्रोफेसर गेज के साथ इस परियोजना के अनुसंधान और विकासात्मक गतिविधियों में सहयोग किया है।

टीएमटी परियोजना अंतरराष्ट्रीय साझेदारी वाली परियोजना है, जिसमें कैल टेक, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, कनाडा, जापान, चीन और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और परमाणु ऊर्जा विभाग के संग भारत सहयोग कर रहा है।

तीस मीटर का यह विशालकाय टेलीस्कोप एवं इससे जुड़े साझेदार देशों और उनकी जनता को करीब लाने के साथ ही खगोल विज्ञान और भौतिकी के क्षेत्र में कई अनसुलझे प्रश्नों का उत्तर देने में महत्वपूर्ण हो सकता है। इसके लिए प्रोफेसर ऐंड्रिया गेज और भारतीय खगोलविद मिलकर काम कर रहे हैं।

Scientific utility of telescope

कई अध्ययन रिपोर्टों में टेलीस्कोप की वैज्ञानिक उपयोगिता के साथ-साथ अन्य महत्वसपूर्ण विषयों पर भी विस्तार से प्रकाश डाला गया है। इसमें हमारे सौरमंडल से संबंधित डेटा सिम्युलेटर, ऊर्जावान क्षणिक वस्तुओं, आकाशगंगाओं की सक्रिय नाभिक और दूर के गुरुत्वाकर्षण-लेंस वाली आकाशगंगाओं का अध्ययन शामिल है। इसमें हमारी आकाशगंगा के केंद्र में सुपरमैसिव कॉम्पैक्ट ऑब्जेक्ट की प्रकृति और इससे सबंधित कई अज्ञात चीजों की खोज करने के लिए कई और नए पहलुओं को समझने के लिए निकट भविष्य में आईआरआईएस/टीएमटी की क्षमता को दिखाया गया है। (इंडिया साइंस वायर)

नीतीश कुमार मुख्य ‘मौका’ मंत्री और मोदी उप मुख्य ‘धोखा’ मंत्री !

Lalu Prasad Yadav

Nitish Kumar chief ‘chance’ minister and Modi deputy chief ‘cheat’ minister!

नई दिल्ली, 22 अक्टूबर2020. राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव भले ही सजा काट रहे हों, लेकिन अपने ट्विटर हैंडल से वे बिहार विधानसभा चुनाव (Bihar Assembly Elections) में लगातार अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। लालू यादव के ट्विटर हैंडल (lalu prasad yadav twitter,) से लगातार विरोधियों पर निशाना साधा जा रहा है। इसी क्रम में गुरुवार को लालू के ट्विटर हैंडल से किए गए ट्वीट (lalu yadav tweet) से बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को मुख्य ‘मौका’ मंत्री और उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी को उप मुख्य ‘धोखा’ मंत्री बताया गया है।

लालू के ट्विटर हैंडल से एक कार्टून भी पोस्ट किया गया है, जिसमें नीतीश, सुशील मोदी को मौका मांगते दिखाया गया है, जबकि जनता उनसे कितना मौका देने की बात कह रही है।

लालू ने कार्टून के साथ ट्वीट करते हुए लिखा,

 ”मुख्य-मौका मंत्री जी और उप मुख्य-धोखा मंत्री जी, जनता ने बहुत दिया आपको मौका और आप ने दिया जनता को धोखा।”

उल्लेखनीय है कि लालू ट्विटर के जरिए लगातार विरोधियों पर निशाना साध रही है। लालू चारा घोटाला के मामले में जेल में बंद हैं। फिलहाल स्वास्थ्य कारणों से वे रांची के रिम्स में भर्ती हैं।

आपातस्थिति में आपके प्रियजनों से जोड़ने वाले ऐप को बंद करेगा गूगल

Google

Google will close the app connecting your loved ones in an emergency

Google shuts down Trusted Contacts, its emergency location sharing app

नई दिल्ली, 19 अक्टूबर 2020. अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दिग्गज सर्च इंजन कंपनी गूगल (Giant search engine company google) ने कहा है कि वह अपने इमरजेंसी लोकेशन शेयरिंग ऐप-ट्रस्टेड कांटैक्ट्स (personal safety app Trusted Contacts) को दिसम्बर से बंद कर रहा है। गूगल के इस घोषणा के बाद से अब यह एप प्लेस्टोर पर दिखाई नहीं दे रहा है।

क्या है ट्रस्टेड कॉन्टैक्ट्स ऐप | What is Trusted Contacts App,

तीन साल पहले लॉन्च किया गया यह ऐप एक व्यक्तिगत सुरक्षा ऐप था जो आपके और आपके परिवार के बीच साझा करने की एक सीधी रेखा खोलता था, जिससे कि आपात स्थिति में वे उनकी मदद ले सकें।

अगर आप काफी प्रयास के बावजूद रेस्पांस नहीं कर रहे हैं तो यह ऐप स्वत: ही आपका अंतिम ज्ञात लोगेशन आपके प्रियजनों से शेयर कर देगा, जिसकी मदद से वे आपकी खोज शुरू कर सकते हैं।

आईआईटी दिल्ली के स्टार्टअप ने लॉन्च की रोगाणुरोधी पेयजल बोतलें

AqCure

IIT Delhi Startup Launches Antimicrobial Drinking Water Bottles

नई दिल्ली, 09 अक्तूबर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) जैसे संस्थान नवीनतम विचारों पर आधारित स्टार्टअप कंपनियों को तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रहे हैं। स्टार्टअप कंपनियों द्वारा अनेक नवाचारी एवं उपयोगी उत्पाद बाजार में लगातार उतारे भी जा रहे हैं। इसी कड़ी में काम करते हुए आईआईटी दिल्ली द्वारा इनक्यूबेटेड स्टार्टअप कंपनी ‘नैनोसेफ सॉल्यूशन्स’ ने रोगाणु-रोधी पानी की बोतलों की एक नयी श्रृंखला विकसित की है। पानी की ये नयी बोतलें ताँबे के सूक्ष्मजीव-रोधी गुणों पर आधारित हैं। इन रोगाणु-रोधी पेयजल बोतलों को एक्यूक्योर (AqCure) के नाम से लॉन्च किया गया है।

एक्यूक्योर के बारे में जानकारी Information about AqCure

एक्यूक्योर एक पेटेंट तकनीक है, जिसमें पॉलीमर मैट्रिक्स से सक्रिय नैनो-ताँबा उत्सर्जित होता है। उत्सर्जित ताँबा बोतल की बाहरी और आंतरिक सतह को सूक्ष्मजीव-रोधी बनाता है। ताँबे का संपर्क रोगाणुओं के संचरण को कम करता है और संग्रहीत पानी को सूक्ष्मजीवों से सुरक्षित बनाता है। एक मान्य सीमा के भीतर पानी में उत्सर्जित ताँबा संग्रहीत पानी को पोषित करता है। उल्लेखनीय है कि तांबा भी एक आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्व है।

आईआईटी दिल्ली की पूर्व छात्रा और नैनोसेफ सॉल्यूशन्स की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. अनसूया रॉय ने बताया कि

“आईएसओ और एएसटीएम मानकों के अनुसार एक्यूक्योर कंटेनरों में 99.99% सूक्ष्मजीव प्रतिरोधी, 99.99% फफूंद-रोधी और 99% से अधिक वायरस-रोधी गतिविधि का सफल परीक्षण किया गया है। ये कंटेनर बिस्फेनॉल-ए (बीपीए)/ बिस्फेनॉल-एस (बीपीएस) मुक्त हैं और इन्हें उच्च गुणवत्ता वाले खाद्य ग्रेड प्लास्टिक पॉलिमर से बनाया गया है, जो घर और कार्यालय में उपयोग के लिए पूरी तरह उपयुक्त हैं।”

जानिए बिस्फेनॉल-ए (बीपीए) क्या है | Know what is Bisphenol-A (BPA)

शोधकर्ताओं के अनुसार बिस्फेनॉल-ए (बीपीए), एक एस्ट्रोजेन जैसा रसायन है, जिसका उपयोग पुन: प्रयोज्य प्लास्टिक उत्पाद बनाने में होता है। बच्चों की बोतलें, बच्चों के सिप्पी कप और खाद्य उत्पादों को रखने वाले प्लास्टिक कंटेनर बनाने में भी इसका उपयोग होता है। जबकि, बिस्फेनॉल-एस (बीपीएस) का उपयोग तेजी से सूखने वाले एपॉक्सी गोंद और जंग अवरोधक के रूप में किया जाता है। आमतौर पर बहुलक प्रतिक्रियाओं में एक अभिकारक के रूप में भी इसका उपयोग किया जाता है।

एक्यूक्योर बहुलक मास्टरबैच (सक्रिय नैनो-ताँबा के साथ मिश्रित पॉलिमर), विभिन्न वाहक पॉलिमर पर आधारित कण भी उपलब्ध हैं, जो कि अंतिम उत्पादों को सूक्ष्मजीव प्रतिरोधी बनाने के लिए बहुलक मोल्डिंग और एक्सट्रूजन संचालन में उपयोग में लाये जा सकते हैं। इस अवधारणा को जैव प्रौद्योगिकी अनुदान भी मिला है, जो भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग के तहत कार्यरत जैव प्रौद्योगिकी उद्योग अनुसंधान सहायता परिषद (BIRAC) द्वारा प्रायोजित है।

एक्यूक्योर कंटेनर विभिन्न भंडारण क्षमता और आकार में उपलब्ध हैं। इस श्रृंखला में 700 मिलीलीटर भंडारण क्षमता वाली लघु आकार की बोतलों से लेकर घरों में उपयोग किए जाने वाली एक लीटर क्षमता वाली रेफ्रिजरेटर की बोतलें शामिल हैं। इसी श्रृंखला में पेयजल भंडारण और वितरण के लिए उपयुक्त 10-20-लीटर क्षमता वाले “बबल टॉप्स” और “वाटर कैन” भी उपलब्ध हैं। 

आईआईटी दिल्ली के टेक्सटाइल एवं फाइबर इंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर और नैनोसेफ सॉल्यूशन्स की मेंटर डॉ. मंगला जोशी ने कहा है कि

“स्वच्छ पेयजल की हर समय उपलब्धता आज भी एक चुनौती है। ग्रामीण और शहरी गरीब इलाकों में यह स्थिति विशेष रूप से देखने को मिलती है। गंदा पेयजल कई जानलेवा वायरस और बैक्टीरिया का प्रमुख स्रोत होता है, जो पिछली कई महामारियों का कारण भी रह चुका है। हमें उम्मीद है कि एक्यूक्योर लोगों तक स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल पहुँचाने में और एक स्वस्थ जीवनशैली को बनाए रखने के साथ ही शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाए रखने में भी मदद करेगा।”

अक्तूबर-दिसंबर 2020 के चक्रवाती मौसम को लेकर तैयार है भारतीय मौसम-विज्ञान विभाग

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Indian Meteorological Department is ready for the cyclonic weather of October-December 2020

नई दिल्ली,08 अक्तूबर 2020: भारत की तटीय सीमा (India’s coastal border) लगभग सात हजार पांच सौ सोलह किलोमीटर के विशाल क्षेत्र में फैली है। इसमें से लगभग चौवन सौ किलोमीटर की सीमा मुख्य भूमि से लगी है। सम्पूर्ण तटीय क्षेत्र पर चक्रवात की चपेट में आने का खतरा मंडराता रहता है।

चक्रवातों के दुष्प्रभाव

चक्रवात अपने संग भयानक गति वाली हवाएं और अत्यधिक वर्षा लेकर आते हैं, जिनसे कई बार जन-धन की बड़े पैमाने पर हानि होती है। ऐसे में, भारत के लिए मौसम का पूर्वानुमान (Weather forecast) सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाता है।

उत्तर हिन्द महासागर में उत्पन्न होने वाले चक्रवातों की सक्रियता अप्रैल से जून और पुनः अक्टूबर से दिसंबर तक की अवधि में अपने चरम पर होती है। यही कारण है कि अपनी दैनिक गतिविधियों के अतिरिक्त भारतीय मौसमविज्ञान विभाग (आई एम डी ) प्रत्येक वर्ष अप्रैल से जून और अक्टूबर से दिसंबर के महीनों में मौसम पूर्वानुमान, और उसके आकलन-विश्लेषण से जुड़ी विशेष तैयारियाँ करता है। इनमें उत्तर हिन्द महासागर में चक्रवात के बनने, उसको चिन्हित करने, उसकी दिशा और तीव्रता के आकलन के साथ उसके तट से टकराने से जुड़ी हर महत्वपूर्ण जानकारी का विश्लेषण शामिल होता है।

इसी कड़ी में अक्टूबर-दिसंबर 2020 के चक्रवाती मौसम को लेकर भारतीय मौसम-विज्ञान विभाग द्वारा गत 6 अक्टूबर को एक पूर्व-चक्रवात अभ्यास बैठक का आयोजन किया गया।

बैठक में चक्रवात से जुड़ी विभागीय तैयारिओं की समीक्षा, आवश्यकताओं के आकलन, चक्रवाती मौसम (अक्टूबर-दिसंबर ) को लेकर योजना बनाने और विभाग की नयी पहल से साझेदार विभागों को अवगत करने आदि बिंदुओं पर व्यापक चर्चा हुई। इस ऑनलाइन पूर्व-चक्रवात अभ्यास बैठक में चक्रवात से जुडी बारिश और तूफ़ान जैसी आपदाओं के सटीक पूर्वानुमान और विश्लेषण के निमित्त विभाग द्वारा की गयी तैयारिओं पर चर्चा करते हुए भारतीय मौसम-विज्ञान विभाग के महानिदेशक और इस ऑनलाइन बैठक के अध्यक्ष डॉ मृत्युंजय महापात्र ने बताया कि पिछले कुछ दिनों में भारतीय मौसम विभाग ने अपनी मौसम पूर्वानुमान क्षमता में उल्लेखनीय सुधार किया है।

मौसम के सही पूर्वानुमान के साथ साथ मौसम से जुड़ी पूर्व सूचना का लोगों तक त्वरित गति से पहुँचाए जाने पर विशेष बल देते हुए डॉ मोहापात्रा ने सूचित किया कि आसन्न चक्रवाती मौसम में भारतीय मौसम विभाग चक्रवात की वर्त्तमान और अनुमानित स्थिति एवं दिशा तथा उसकी तीव्रता दर्शाने के लिए भौगोलिक सूचना प्लैटफॉर्म्स के जरिये संवादात्मक डिस्प्ले का प्रबंध करेगा।

बैठक में भारतीय मौसम-विज्ञान विभाग के अलावा राष्ट्रीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान केन्द्र, भारतीय वायु सेना, भारतीय नौसेनां केन्द्रीय जल आयोग, भारतीय राष्ट्रीय महासागर सुचना केन्द्र, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन विभाग, आई.आई.टी दिल्ली, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एन डी आर एफ), मत्स्य विभाग एवं भारतीय रेल से जुड़े विशेषज्ञों ने भी भाग लिया। डॉ मोहापात्रा ने विभिन्न विभागों से जुड़े विशेषज्ञों को सम्बोधित करते हुए विभाग द्वारा लांच किये गए अनेक उपयोगी मोबाइल ऐप के विषय में भी बताया। इनमें आकाशीय बिजली के पूर्वानुमान के लिए ऐप (App for celestial lightning forecast) ‘दामिनी’, मौसम पूर्वानुमान और चक्रवात की चेतावनी के लिए ऐप (App for weather forecast and cyclone warning) ‘मौसम और उमंग’ तथा कृषि -क्षेत्र को समर्पित ‘मेघदूत’ ऐप शामिल हैं।

इसके अतिरिक्त भारतीय मौसम-विज्ञान विभाग के क्षेत्रीय केन्द्रों के वेबसाइट्स पर उपलब्ध निःशुल्क निबंधन की सुविधा पर भी बैठक में चर्चा हुई जिसके द्वारा कोई भी व्यक्ति चक्रवात से जुड़ी चेतावनी (Cyclone warning) सीधे प्राप्त कर सकता है।

डॉ मृत्युंजय महापात्र ने इस दिशा में पूर्व के अनुभवों से सीखने एवं गलतियों न दुहराने पर विशेष बल देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि एक त्रुटिहीन एवं प्रभावी आपदा पूर्वानुमान और प्रबंधन तंत्र के विकास तथा विभिन्न विभागों की सक्रिय भागीदारी द्वारा जन-धन की हानि बचायी जा सकती है।

बैठक में शामिल विभिन्न विभागों के विशेषज्ञों ने भारतीय मौसम-विज्ञान विभाग की पूर्व-चक्रवात तैयारियों की प्रशंसा करते हुए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के बारे में जानकारी | Information about Indian Meteorological Department

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आई.एम.डी ) भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत मौसम विज्ञान प्रेक्षण, मौसम पूर्वानुमान और भूकम्प विज्ञान का कार्यभार सँभालने वाली सर्वप्रमुख एजेंसी है। देश भर में फैले अपने सैकड़ों प्रेक्षण केंद्रों और उच्च कोटि की तकनीक के प्रयोग से यह विभाग मौसम का पूर्वानुमान लगाने के अतिरिक्त तूफ़ान के आकलन,नामकरण और उनसे जुड़ी चेतावनी जारी करने का दायित्त्व निभाता है। (इंडिया साइंस वायर)

हमें वैश्विक से स्थानिक होना होगा एवं देशज तकनीकी के विकास से रोजगार के नए अवसर सृजन करने होंगें – प्रो.संजय पासवान

National News

ऑनलाइन “राष्ट्रीय युवा संवाद” कार्यक्रम – Online “National Youth Dialogue” Program

भारत के निर्माण में युवाओं की सबसे अग्रणी भूमिका है युवाओं को समृद्ध भारतीय परम्परा एवं सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करना होगा – विशिष्ट अतिथि राज सिन्हा

धनबाद। नवजीवन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी, धनबाद (Navjeevan Research and Development Society, Dhanbad), ह्यूमन एम्पावरमेंट एंड डेवलपमेंट सोसाइटी, वाराणसी एवं माय ड्रीम लाइफ फाउंडेशन, जमशेदपुर (Human Empowerment and Development Society, Varanasi and My Dream Life Foundation, Jamshedpur) के संयुक्त तत्वाधान में ‘राष्ट्रीय युवा संवाद’ ( नेशनल यूथ डायलाग) का शुभारंभ उद्घाटन ‘21 वीं सदी भारत के निर्माण में युवा’ (21 वीं सदी भारत के निर्माण में युवा’) विषय पर परिचर्चा से शुरू हुआI ज्ञात हो कि ‘राष्ट्रीय युवा संवाद’ कार्यक्रम के तहत सितंबर एवं अक्टूबर माह के हर रविवार को समकालीन सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक एवं पर्यावरणीय मुद्दों पर देश भर से आमंत्रित युवाओं का व्याख्यान सह परिचर्चा होना है I

कार्यक्रम के मॉडरेटर एवं नवजीवन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसाइटी, धनबाद के संयुक्त सचिव मिथलेश दास ने बताया कि उद्घाटन सत्र में बतौर मुख्य अतिथि बिहार विधान परिषद् के सदस्य प्रो. संजय पासवान, विशिष्ट अतिथि के रूप में, झारखण्ड के धनबाद विधानसभा क्षेत्र के विधायक राज सिन्हा एवं आमंत्रित वक्ता के रूप में युवा साहित्य अकादमी पुरुष्कार के सम्मानित कवि एवं साहित्यकार डॉ अनुज लुगुन एवं जमशेदपुर के जाने – माने सामाजिक कार्यकर्ता बिनॉय अम्बेर मिंज ने पूरे देश भर के 2000 से ज्यादा युवाओं को संबोधित किया जबकि बिनोद बिहारी महतो कोयलांचल यूनिवर्सिटी के माननीय कुलपति प्रो. डॉ अंजनी कुमार श्रीवास्तव कार्यक्रम की अध्यक्षता की I

मुख्य अतिथि प्रो. संजय पासवान ने कहा कि बिना युवा संवाद के देश का निर्माण संभव नहीं है, हमें वैश्विक से स्थानिक होना होगा एवं देशज तकनीकी के विकास से रोजगार के नए अवसर सृजन करने होंगेंl

विशिष्ट अतिथि राज सिन्हा ने कहा कि नए भारत के निर्माण में युवाओं की सबसे अग्रणी भूमिका है युवाओं को समृद्ध भारतीय परम्परा एवं सांस्कृतिक मूल्यों को पुनर्स्थापित करना होगा I

आमंत्रित वक्ता डॉ अनुज लुगुन ने कहा कि हमने इतिहास को नहीं समझा, उसे समझना जरुरी है फिर वर्तमान एवं भविष्य के लिए साझा प्रयास करना चाहिएl

सामाजिक कार्यकर्त्ता बिनोय मिंज ने ग्रामीण क्षेत्रों में कैसे रोजगार सृजन किया जा सकता इस पर अपनी बात रखी l

आर.एस.पी.कॉलेज, झरिया के सहायक प्राध्यापक प्रो. रामचंद्र कुमार ने कार्यक्रम का संचालन, धनबाद की शिक्षिका प्रत्युषा मुखर्जी ने स्वागत गीत प्रस्तुत, खोरठा श्री से सम्मानित बोकारो के लोक कलाकार बिनोद कुमार महतो “रसलीन” ने लोक संगीत प्रस्तुत किया I

बी.एच.यू के प्रो. डॉ अमरनाथ पासवान ने स्वागत भाषण, छत्रपति साहू जी महाराज यूनिवर्सिटी कानपूर के प्रो. डॉ मुनेश कुमार ने परिचय भाषण,  कार्यक्रम के औचित्य पर पी. के. रॉय मेमोरियल कॉलेज, धनबाद के प्रो. डी. के. चौबे ने प्रकाश डाला जबकि धन्यवाद ज्ञापन हजारीबाग की  श्यामली सलकर ने किया I

कार्यक्रम के आयोजन समीति में नवजीवन रिसर्च एंड डेवलपमेंट सोसायटी के संयुक्त सचिव मिथलेश दास, तकनीकी सहायक व युवा सामाजिक कार्यकर्त्ता अजय कुमार रवानी, धनबाद के युवा सामाजिक कार्यकर्त्ता जितेंद्र देवगम एवं राजन कुमार; दिल्ली यूनिवर्सिटी की सहायक प्राध्यापिका, नीतिसा खलखो; एस.आर.एस.ए.टी.टी. कॉलेज, हजारीबाग की सहायक प्राध्यापिका श्यामली सलकर;  नेताजी नागर कॉलेज, कोलकत्ता के सहायक प्राध्यापक सद्दाम; द पर्सपेक्टिव इंटरनेशनल जर्नल के उप संपादक अनिश कुमार; एस.एस.एल.एन.टी, महाविद्यालय की इंटर सेक्शन की अध्यापिका अर्पणा सिन्हा; कोलकत्ता की शिक्षिका व आदिवासी चिंतक पुजा गौतम; महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा के शोधार्थी चांदनी शाह, दीनानाथ यादव एवं रजनीश कुमार आंबेडकर; जलपाईगुडी के शिक्षक मुकेश कुमार; बिलासपुर छतीसगढ़ के सामाजिक कार्यकर्त्ता शैलेश कुमार; बी.एच.यू के शोधछात्र प्रवीण कुमार पाल; दुबई में कार्यरत ग्राफिक डिज़ाइनर नितीश कुमार;  बनारस के युवा गजल गायक अशोक कुमार;  दिल्ली के युवा लेखक अलोक कुमार; जमशेदपुर की सामजिक कार्यकर्ता प्रियंका सिरका; शेरघाटी गया, बिहार के शिक्षक रजनीकांत वैद्या; विनोबा भावे यूनिवर्सिटी, हजारीबाग की एम.एड. की छात्रा सीमा कुमारी सिंह; धनबाद की शिक्षिका प्रत्युषा मुखर्जी, काकली दत्ता, राधा चौहान, मनप्रीत कौर, कंचन वर्मा, अनिता अग्रवाल, मोनिका चौधरी; आचार्य नागार्जुन यूनिवर्सिटी, गुंटुर की एम.एड. की छात्रा वाई प्रियंका आदि शामिल थें I

कार्यक्रम का मार्गदर्शन, बी.एच.यू के प्रो. डॉ अमरनाथ पासवान; छत्रपति साहू जी महाराज यूनिवर्सिटी, कानपूर के प्रो. डॉ मुनेश कुमार महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा के कलकत्ता स्थित क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र के निर्देशक डॉ सुनील कुमार ‘सुमन’; विनोबा भावे यूनिवर्सिटी, हजारीबाग के डॉ तनवीर युनुस;  पी. के. रॉय मेमोरियल कॉलेज, धनबाद के प्रो. डी. के.चौबे; आर. एस. पी. कॉलेज, झरिया के असिस्टेंट प्रोफेसर- डॉ निलेश कुमार, प्रो. रितेश रंजन, प्रो. रामचंद्र कुमार, डॉ. श्याम किशोर प्रसाद, प्रो.एतवा टूटी, प्रो. अशोक कुमार चौबे, प्रो. विजय कुमार विश्वकर्मा; बी.बी.एम्.के.यू.,धनबाद के डॉ मुकुंद रविदास; संत कोलंबा कॉलेज, हजारीबाग के प्रो. भागवत राम आदि कर रहें हैं I

फेफड़ों की बीमारी का पता अब डिजिटल तकनीक से

Health News in Hindi

Lung disease is now detected with digital technology

नई दिल्ली, 12 सितंबर: सांस लेने में तकलीफ है, शारीरिक श्रम करने से सांस फूलने लगती है, सांसों में घरघराहट और सीने में जकड़न रहती है, लगातार बलगम की तकलीफ रहती है और खांसी के सामान्य सिरप एवं दवाएं बेअसर साबित हो रही हैं तो सतर्क हो जाएं। ये लक्षण क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) – Symptoms of ‘Chronic Obstructive Pulmonary Disease’ (COPD), के हो सकते हैं, जो फेफड़ों की पुरानी बीमारी (Chronic lung disease) के रूप में जानी जाती है। एड्स, टीबी, मलेरिया और डायबिटीज से होने वाली मौतों की कुल संख्या से कहीं अधिक मृत्यु अकेले सीओपीडी के कारण होती है। पारंपरिक रूप से सीओपीडी का निदान बीमारी के इतिहास और नैदानिक लक्षणों के आधार पर किया जाता है। हालांकि, निदान के इस तरीके में सही समय पर रोग का पता नहीं चल पाता और बीमारी विकराल रूप धारण कर लेती है।

सीओपीडी के निदान के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित डायग्नोस्टिक सिस्टम | Artificial Intelligence (AI) based diagnostic system for diagnosis of COPD

भारतीय शोधकर्ताओं ने सीओपीडी के निदान के लिए इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित एक नया डायग्नोस्टिक सिस्टम ईजाद किया है। यह सिस्टम सांस लेने के पैटर्न, श्वसन दर, हृदयगति और रक्त में ऑक्सीजन संतृप्ति के स्तर की निरंतर निगरानी में मददगार हो सकता है।

इस सिस्टम के मुख्य रूप से तीन घटक हैं, जिसमें सेनफ्लेक्स.टी नामक स्मार्ट-मास्क, सेनफ्लेक्स मोबाइल ऐप और आईओटी क्लाउड सर्वर शामिल है। स्मार्ट मास्क ब्लूटुथ के जरिये एंड्रॉइड मॉनिटरिंग ऐप के साथ जुड़ा रहता है। जबकि, मोबाइल ऐप क्लाउड कंप्यूटिंग सर्वर से जुड़ा रहता है, जहाँ मशीन लर्निंग (एमएल) के माध्यम से सीओपीडी की गंभीरता का अनुमान लगाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का उपयोग किया जाता है।

यह सिस्टम भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) खड़गपुर के भौतिक विज्ञान विभाग के ऑर्गेनिक इलेक्ट्रॉनिक्स लैबोरेटरी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किया गया है। इससे संबंधित अध्ययन शोध पत्रिका एसीएस एप्लाइड मैटेरियल्स ऐंड इंटरफेसेस में प्रकाशित किया गया है। शोधकर्ताओं ने इस तकनीक के पेटेंट के लिए आवेदन कर दिया है। उनका कहना है कि यह तकनीक व्यावसायिक उपयोग के लिए पूरी तरह तैयार है।

इस अध्ययन से जुड़े आईआईटी खड़गपुर के शोधकर्ता प्रोफेसर दीपक गोस्वामी ने बताया कि

“सिस्टम में शामिल मोबाइल ऐप आईओटी क्लाउड  सर्वर के साथ संचार करता है, जहाँ से ऐप में एकत्रित डेटा को मशीन लर्निंग एल्गोरिदम के माध्यम से आगे के विश्लेषण के लिए स्थानांतरित किया जाता है और बीमारी की गंभीरता का अनुमान लगाया जाता है। एक बार विश्लेषण पूरा होने के बाद परिणाम मोबाइल ऐप पर आ जाते हैं। रिपोर्ट सर्वर में उत्पन्न होती है और ऐप पर उपलब्ध रहती है। सिस्टम से संबंधित घटक पूरी तरह विकसित हैं और एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं।”

इस सिस्टम में तापमान मापने वाले संवेदनशील सेंसर और मापन के लिए ब्लूटुथ आधारित इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लगे हैं।

ऑक्सीजन संतृप्ति स्तर की निगरानी के लिए इसमें सेंसर प्रणाली के साथ व्यावसायिक रूप से उपलब्ध एक पल्स ऑक्सीमीटर भी लगाया गया है। रोगी से संबंधित डेटा मोबाइल ऐप के माध्यम से स्वतः क्लाउड सर्वर पर अपलोड होता रहता है। डेटा को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मार्कअप लैंग्वेज (एआईएमएल) के माध्यम से संसाधित किया जाता है, और ऐप पर रिपोर्ट उपलब्ध हो जाती है, जिसे डॉक्टरों के परामर्श के लिए उपयोग किया जा सकता है।

प्रोफेसर गोस्वामी ने बताया कि

“इस मास्क का उपयोग रोगी घर पर आसानी से कर सकते हैं। इसके उपयोग से बार-बार डायग्नोस्टिक केंद्रों पर जाने से निजात मिल सकता है और सही समय पर निदान हो सकता है। इस तरह, उन्नत स्वास्थ्य तकनीकों की मदद से सीओपीडी से संबंधित जटिलताओं से शुरुआती स्तर पर निपटा जा सकता है, जो रोगियों और स्वास्थ्य प्रणाली दोनों के लिए एक वरदान साबित हो सकता है।”

COPD is a leading cause of death

शोधकर्ताओं ने बताया कि सीओपीडी मौतों का एक प्रमुख कारण है। दिल की बीमारियों के कारण होने वाली मौतों के बाद सीओपीडी का इस मामले में दूसरा स्थान है। वर्ष 2017 में इस रोग के कारण भारत में लगभग 10 लाख लोगों को अपनी जान गवांनी पड़ी थी। एक ताजा सर्वेक्षण के अनुसार सीओपीडी रोगियों में कोरोना वायरस के प्रकोप की गंभीरता एवं मृत्यु दर 63% से अधिक देखी गई है।

प्रोफेसर गोस्वामी ने बताया कि

“श्वसन तंत्र में अवरोध पैदा करने वाले अस्थमा और सीओपीडी जैसे रोगों के निदान के लिए स्पिरोमेट्री एक मानक परीक्षण है। पर, उपकरणों की अनुपलब्धता, डेटा की व्याख्या में कठिनाई और परीक्षण की अधिक लागत के कारण इसके उपयोग में बाधा आती है। इस चुनौती ने हमें एआई-आधारित प्रणाली विकसित करने के लिए प्रेरित किया, जो परिणामों की व्याख्या की समस्या को दूर कर सकती है और डॉक्टरों एवं रोगियों के लिए सुलभ हो सकती है।”

इस अध्ययन से जुड़े शोधकर्ताओं में प्रोफेसर गोस्वामी के अलावा आईआईटी खड़गपुर की शोधकर्ता सुमन मंडल, सत्यजीत रॉय, अजय मंडल, अर्णब घोष, साहा इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर फिजिक्स, कोलकाता के शोधकर्ता बिस्वरूप सतपति और मिदनापुर कॉलेज, मिदनापुर की शोधकर्ता मधुचंदा बैनर्जी शामिल हैं।

(इंडिया साइंस वायर)

समाचार संध्या | आज रात्रि की 10 प्रमुख खबरें | 05th September 2020

Headlines

Evening News | Tonight’s 10 top stories. 05th September 2020

कोरोना का कहर

(1)

बिहार में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 1,45,861 तक पहुंच गई है। बिहार में शनिवार को 1,727 नए मामले सामने आए हैं।

(2)

सुशांत सिंह राजपूत मौत मामले में ड्रग्स एंगल (Drugs angle in Sushant Singh Rajput death case) से चल रही मौजूदा जांच के सिलसिले में हिरासत में भेजे गए ड्रग्स पैडलर्स (Drugs paddlers,) में से एक कैजन इब्राहिम को मुंबई के एक मजिस्ट्रेट ने शनिवार को जमानत दे दी। उधर शोविक चक्रवर्ती और उनके हाउस मैनेजर और सैमुअल 9 सिंतबर तक एनसीबी की कस्टडी में भेज दिए गए हैं।

(3)

शिक्षक दिवस (Teacher’s day) पर जामिया टीचर्स एसोसिएशनJamia Teachers Association (जेटीए) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जामिया विश्वविद्यालय के बुनियादी ढांचे, शिक्षाविदों, शोध एवं अनुसंधान के लिए 100 करोड़ रुपये का अनुदान जारी करने का अनुरोध किया है।

(4)

बिहार के पूर्व उपमुख्यमंत्री और विधानसभा में विपक्ष के नेता तेजस्वी यादव (Tejashwi Yadav, former Deputy Chief Minister of Bihar and Leader of the Opposition in the Legislative Assembly) ने शनिवार को चुनाव से पूर्व बेरोजगारों को रिझाने की कोशिश की है। उन्होंने घोषणा करते हुए कहा कि अगर सरकार बनी तो मेगा ड्राइव चलाकर सभी बेरोजगारों को नौकरी दी जाएगी। तेजस्वी ने बेरोजगारों के पंजीयन के लिए ‘बेरोजगारी हटाओ’ नाम से एक वेबपोर्टल और एक टॉल फ्री नंबर भी जारी किया।

(5)

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (US President Donald Trump) ने दावा किया है कि वाशिंगटन लद्दाख क्षेत्र में ‘बेहद खराब हालात’ से उबरने के उपायों पर भारत और चीन से बात कर रहा है, हालांकि यह पूछे जाने पर कि क्या बीजिंग का भारत के प्रति धौंस जमाने वाला रुख रहा है, तो इस बात का उन्होंने गोलमोल जवाब दिया।

(6)

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अमेरिकी राजनीति के संभावित क्षेत्र में यह कहते हुए शामिल किया कि भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन्हें अमेरिकी चुनाव के संदर्भ में ‘बड़ा समर्थन’ देते हैं।

(7)

रेलवे 12 सितंबर से 80 और ट्रेनों का परिचालन करेगा। भारतीय रेलवे अभी फिलहाल 230 ट्रेनों का परिचालन कर रहा है। रेलवे ने इसके अलावा 12 सितंबर से 80 और ट्रेनों का संचालन करने का निर्णय लिया है। इसके लिए रिजर्वेशन 10 सितंबर से शुरू होगा।

(8)

फर्जी रेटिंग्स से निपटने को एमेजॉन ने 20 हजार प्रोडक्ट रिव्यू हटाए हैं। एमेजॉन को जब ब्रिटेन के कुछ शीर्ष समीक्षकों द्वारा फाइव स्टार रेटिंग्स के बदले पैसे या प्रोडक्ट लेने का शक हुआ तो ई-कॉमर्स कंपनी ने अपनी साइट से करीब 20,000 प्रोडक्ट के रिव्यूज को हटवा दिए।

(9)

गूगल 25 सितंबर को पिक्सल 5, पिक्सल 4ए 5जी लॉन्च करेगा। गूगल अपने अत्याधुनिक स्मार्टफोन पिक्सल 5 के साथ पिक्सल 4ए 5जी को 25 सितंबर को जर्मनी में लॉन्च कर सकता है।

(10)

ट्विटर पर ट्रेंड कर रहे हैं #कांप_गया_गोदी #5बजे5मिनिट #5बजे5मिनिट

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कृषि को मिलेगी ‘सौर-वृक्ष’ की नयी ऊर्जा

solar tree

Agriculture will get new energy of ‘solar tree’

नई दिल्ली, 02 सितंबर (इंडिया साइंस वायर): भारत की उत्तरोत्तर बढ़ती ऊर्जा आवश्यकता पारंपरिक ऊर्जा-स्रोतों (Conventional energy sources) के लिए एक कठिन चुनौती है। इस दिशा में प्रकृति सुलभ सौर-ऊर्जा एक बड़ी और प्रभावी भूमिका निभा सकती है। लेकिन, सौर-ऊर्जा बनाने वाले सोलर पैनल के लिए बड़ा स्थान चाहिए होता है। इसके लिए एक खंभे पर वृक्ष की डालियों से लटके पत्तों की तरह, अनेक छोटे-छोटे पैनल वाले ‘सौर-वृक्ष’ विकसित किए गए हैं। लेकिन, सघन सौर-वृक्ष का डिजाइन नीचे के पैनल तक सूर्य की पर्याप्त रोशनी पहुँचने में बाधक होता है। ऐसे में, एक महत्वपूर्ण प्रगति की बात सामने आयी है।

Indian researchers claim to have developed the world’s largest solar tree.

भारतीय शोधकर्ताओं ने दुनिया का सबसे बड़ा सौर-वृक्ष (Solar Tree) विकसित करने का दावा किया है। दुर्गापुर स्थित सीएसआईआर-सेंट्रल मैकेनिकल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीएमईआरआई) के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित इस सौर-वृक्ष की क्षमता 11.5 किलोवाट पीक (kWp) ऊर्जा उत्पादन की है। पूरे साल में 12,000-14,000 यूनिट स्वच्छ एवं हरित ऊर्जा उत्पादित करने में सक्षम इस सौर-वृक्ष को सीएसआईआर-सीएमईआरआई की आवासीय कॉलोनी में लगाया गया है।

सीएसआईआर-सीएमईआरआई के निदेशक डॉ हरीश हिरानी ने बताया कि “इस सौर-वृक्ष को विभिन्न स्थानों एवं आवश्यकताओं के अनुसार कस्टमाइज किया जा सकता है। इसे कुछ इस तरह डिजाइन किया गया है, जिससे इसके नीचे छाया क्षेत्र कम से कम बनता है, जो इसे विभिन्न कृषि गतिविधियों में उपयोग के अनुकूल बनाता है। उच्च क्षमता के पंप, ई-ट्रैक्टर, ई-पावर टिलर्स जैसे कृषि उपकरणों के संचालन में यह मददगार हो सकता है। सौर-वृक्ष को जीवाश्म ईंधन के स्थान पर कृषि में शामिल कर सकते हैं। जीवाश्म ईंधन उपयोग से तुलना करें तो प्रत्येक सौर-वृक्ष में ग्रीनहाउस गैस के रूप में छोड़ी जाने वाली 10-12 टन कार्बनडाईऑक्साइड का उत्सर्जन बचाने की क्षमता है। इसके अलावा, आवश्यकता से अधिक उत्पन्न ऊर्जा को ग्रिड में भेजा जा सकता है। यह कृषि मॉडल सुसंगत रूप से आर्थिक प्रतिफल देने के साथ-साथ किसानों को कृषि से संबंधित गतिविधियों में अनिश्चितताओं का सामना करने में भी मदद कर सकता है।”

कैसा है सौर-वृक्ष का डिजाइन ? How is the design of the solar tree?

सौर-वृक्ष का डिजाइन ऐसा है, जिससे प्रत्येक सोलर पीवी पैनल को  सूर्य का अधिकतम प्रकाश मिलता रहता है। इसे विकसित करने में इस बात का भी ध्यान रखा गया है कि सोलर पैनल के नीचे न्यूनतम छाया बने। प्रत्येक सौर-वृक्ष में 35 सोलर पीवी पैनल लगाए गए हैं। प्रत्येक पैनल की क्षमता 330 वॉट पीक है। सौर पीवी पैनलों को पकड़ने वाली भुजाओं का झुकाव लचीला है, जिसे आवश्यकता के अनुसार समायोजित किया जा सकता है। यह विशेषता रूफ-माउंटेड सौर सुविधाओं में उपलब्ध नहीं है। यह उल्लेखनीय है कि इसमें ऊर्जा उत्पादन के आंकड़ों की निगरानी वास्तविक समय या दैनिक आधार पर की जा सकती है।

सौर-वृक्ष का मूल्य | Value of solar tree

डॉ हिरानी ने बताया कि

“ऐसे प्रत्येक सौर-वृक्ष का मूल्य करीब 7.5 लाख रुपये है। नवीकरणीय ऊर्जा ग्रिड बनाने के लिए सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयां अपने बिजनेस मॉडल को प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (पीएम कुसुम) योजना से जोड़ सकती हैं। इस सौर-वृक्ष में इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) आधारित फीचर्स, जैसे – खेतों की सीसीटीवी निगरानी, वास्तविक समय में आर्द्रता एवं हवा की गति का पता लगाना, वर्षा का पूर्वानुमान और मिट्टी का विश्लेषण करने वाले सेंसर्स को शामिल किया जा सकता है।”

सीएसआईआर-सीएमईआरआई ने सौर-ऊर्जा से संचालित ई-सुविधा किओस्क भी विकसित किया है, जिसे सौर-वृक्ष से जोड़ा जा सकता है।

इस किओस्क का लाभ यह होगा कि इसके जरिये विभिन्न कृषि डाटाबेस तक पहुँचा जा सकता है। इसका एक उदाहरण ई-नैम (नेशनल एग्रीकल्चरल मार्केटप्लेस) है। इसे विकसित करने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि यह सौर-वृक्ष, भारत को ऊर्जा में आत्मनिर्भर और कार्बन मुक्त बनाने में मददगार हो सकता है। (इंडिया साइंस वायर)

(इंडिया साइंस वायर)

दिग्विजय सिंह का बड़ा आरोप- 2024 का चुनाव अंतिम होगा यदि…..

digvijaya singh

मतपत्र से मतदान नहीं हुए तो 2024 का चुनाव अंतिम होगा : दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह ने ईवीएम पर उठाए सवाल | Digvijay Singh raised questions on EVMs

नई दिल्ली, 31 अगस्त. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह (Former Chief Minister of Madhya Pradesh and senior Congress leader Digvijay Singh) ने चुनाव में ईवीएम के उपयोग पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि अगर मतपत्र की तरफ वापस नहीं लौटे तो वर्ष 2024 में होने वाला संसद का चुनाव आखिरी चुनाव हो सकता है।

कांग्रेस नेता ने ने सोमवार को ट्वीट करते हुए ब्रिटिश लेखक केरोल जेने केडवाल्डर के बयान पर सहमति जताते हुए कहा, आप बिलकुल सही कह रही हैं मैडम, भारत में ईवीएम टेक्नोलॉजी के माध्यम से संसद चुनाव में बड़े पैमाने पर धांधली करके भारतीय लोकतंत्र को नष्ट किया जा रहा है। वर्ष 2024 के संसद (लोकसभा) का चुनाव भारत का आखिरी चुनाव हो सकता है। अगर हम भारतीय, मतपत्र के लिए वापस जाने के लिए नहीं उठते हैं।

Facebook is a deadly global force destroying liberal democracy.

ब्रिटिश लेखक केरोल जेने केडवाल्डर (Carole Cadwalladr) के उस बयान को भी दिग्विजय सिंह ने टैग किया है जिसमें वे कह रही हैं कि फेसबुक एक घातक वैश्विक शक्ति है जो उदार लोकतंत्र को नष्ट कर रही है।

भारत भी बनाएगा हाइब्रिड क्वांटम कम्प्यूटर

Research News

India will also make hybrid quantum computer

नई दिल्ली, 28 अगस्त (इंडिया साइंस वायर) : भारत क्वांटम कम्प्यूटिंग की क्षमता वाले विकसित देशों के चुनिंदा वैश्विक क्लब का हिस्सा बनने की इच्छा रखता है। इस दिशा में एक नई पहल करते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) के पूर्ववर्ती छात्रों की परिषद ने रूस के प्रमुख प्रौद्योगिकी बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) के मालिकों और विश्वविद्यालयों के साथ साझा क्वांटम मिशन की घोषणा की है।

इस समझौते से दुनिया के तीव्रतम हाइब्रिड क्वांटम कम्प्यूटर के भारत में निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो सकता है। आईआईटी पूर्ववर्ती छात्र परिषद के अनुसार यह समझौता, अत्याधुनिक तकनीक तक भारत की पहुंच सुनिश्चित करने के अतिरिक्त  रूस से प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना के समझौता पत्र पर आईआईटी पूर्ववर्ती छात्र परिषद, रूस की लोमोसोव मॉस्को स्टेट यूनिवर्सिटी और रूस्सॉफ्ट (Russoft) के प्रतिनिधियों ने हस्ताक्षर किए हैं। रूस्सॉफ्ट रूस का उद्योग-व्यापार निकाय है, जो भारत में नैस्कॉम के समकक्ष है।

आईआईटी पूर्ववर्ती छात्र परिषद के अध्यक्ष डॉ रवि शर्मा बताते हैं

“हमने भारत में दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे तेज हाइब्रिड क्वांटम कम्प्यूटर बनाने का मिशन शुरू किया है। रूस के साथ यह करार इस क्षेत्र के वैश्विक विशेषज्ञों की प्रमुख प्रौद्योगिकियों को एकीकृत करने की ओर महत्वपूर्ण कदम है। हमें यकीन है कि क्वांटम कम्प्यूटर रूस और भारत के बीच संबंधों को और मजबूत करेगा।”

इस पहल के अंतर्गत रूस की सरकारी स्वामित्व वाली विश्व विख्यात कंपनियां क्रायोजेनिक्स से संबंधित जटिल मॉड्यूल, क्रिप्टोग्राफी और मॉड्यूलर क्लाउड प्रबंधन तकनीक भारत को हस्तांतरित करेंगी।

डॉ रवि शर्मा ने बताया कि

“इस पहल का अगला चरण इन प्रौद्योगिकियों को उच्च थ्रूपुट, उच्च गति क्वांटम कम्प्यूटर के रूप में एकीकृत करना, डिस्ट्रिब्यूटेड कम्प्यूटिंग के लिए उसे स्मार्टफोन व लैपटॉप से जोड़ना है। इसका उपयोग स्वास्थ्य, कृषि, परिवहन व लॉजिस्टिक्स, मौसम पूर्वानुमान और प्रदूषण जैसी प्रमुख समस्याओं से संबंधित बुनियादी ढांचे की चुनौतियों के समाधान को मजबूती प्रदान करने में हो सकता है।”

रूसी व्यापार आयुक्त अलेक्जेंडर रयबास ने कहा है कि

“सबसे पहले मैं इस बात पर जोर देना चाहूंगा कि हमारे देशों के बीच साझेदारी और परस्पर समझ का एक लंबा इतिहास रहा है। बदलते समय के साथ आज हम आईआईटी के पूर्व छात्रों के साथ संयुक्त रूप से नई ऊंचाइयों तक पहुंचने के लिए एक नये क्षेत्र के रूप में क्वांटम प्रौद्योगिकी को देख रहे हैं।”

क्वांटम कम्प्यूटर; आधुनिक सुपरकम्प्यूटर से हजारों गुना तेज काम कर सकते हैं। इससे कई प्रमुख क्षेत्रों में सूचनाओं का प्रसंस्करण अपेक्षाकृत कम कीमत पर द्रुत गति से किया जा सकेगा।

(इंडिया साइंस वायर)

एक मुख्यमंत्री ने पूछा “करोना काटता कैसे है?”

Novel Coronavirus SARS-CoV-2 Colorized scanning electron micrograph of a cell showing morphological signs of apoptosis, infected with SARS-COV-2 virus particles (green), isolated from a patient sample. Image captured at the NIAID Integrated Research Facility (IRF) in Fort Detrick, Maryland.

करोना काटता कैसे है?

यह प्रश्न मेरा नहीं है, बल्कि पाकिस्तानी पंजाब के मुख्यमंत्री उस्मान बुजदार (Pakistan Punjab Chief Minister Usman Buzdar) ने स्वास्थ्य विभाग के एक मीटिंग में अधिकारियों से पूछा था! इस को लेकर तब के पाकिस्तानी चैनलो ने काफी खिल्ली उड़ाई थी!

हमारे ज्यादातर जन प्रतिनिधियों का स्तर पाकिस्तानी पंजाब प्रांत के मुख्यमंत्री से मिलता जुलता नहीं है क्या? ये जब जनता से संबंधित मुद्दों की समझ नहीं रखते हैं तो अपनी राजनीति का आधार जाति, धर्म, पैसा, और व्यक्तिगत संबंधों को बनाते हैं। इस के लिए सिर्फ ये लोग ही जिम्मेदार हैं? इन्हें वोट दे कर यहँ तक पहुंचाने वाली जनता की कोई जवाबदेही नहीं है क्या?

Wheeler Island Is Now Abdul Kalam Island | Abdul Kalam Island: Latest News

ऐसा नही हैं कि सभी जनप्रतिनिधि इसी तरह के हैं! वैसे तो अब्दुल कलाम साहब ने बहुत कम नेताओं की प्रशंसा में कुछ लिखा है, लेकिन एक घटना में उन्होंने बीजू पटनायक की प्रशंसा करते हुए लिखा है कि, बात तब की है जब कलाम साहब युवा वैज्ञानिक के रूप में कैरियर के शुरूआती पड़ाव में थे, उन्हें बीजू पटनायक तब के उड़ीसा के मुख्यमंत्री से मिलने जाना था। कार्य महत्वपूर्ण था, भारत ने अपना मिसाइल कार्यक्रम शुरू करने का फैसला किया था। मिसाइलों के परीक्षण के लिए एक निर्जन स्थान की आवश्यकता थी, ताकि परीक्षण के असफल होने के स्थिति में जान माल की नुकसान न हो सके।

बहुत खोजने पर उड़ीसा के पास एक द्वीप मिला जो काम लायक था, उस का नाम व्हीलर द्वीप ओडिशा, था, अब इस का नाम अब्दुल कलाम द्वीप है। यह उड़ीसा सरकार के अधिकार में था, इसी द्वीप को DRDO लेना चाहता था। इस के लिए विभाग द्वारा आवेदन किया गया था, मुख्यमंत्री को सहमत करने की जवाबदेही कलाम साहब पर थी।

इस से पहले इतना बड़ा नेता से मिलने का अनुभव कलाम साहब को तब नहीं था। अंदर से थोड़ा घबराहट थी, वो मिलने के लिए निर्धारित समय से कुछ पहले पहुंचना चाहते थे ताकी कुछ गड़बड़ न हो, लेकिन पहुँचते ही सारी घबराहट दूर हो गई।

बीजू बाबू पोर्टिको में ही कलाम साहब का इंतजार करते मिल गए। वह कलाम साहब का हाथ पकड़ कर अंदर ले गए और नाश्ता मंगवाया। बड़े प्यार से पूछा, भारत की सुरक्षा के लिए क्या-क्या कार्यक्रम चल रहा है। कुछ व्यक्तिगत प्रश्न भी थे।

कुछ देर बाद कलाम साहब ने फाइल पर चर्चा करनी चाही तो बीजू बाबू ने कहा, मैंने फाइल देख ली है, और अनुमति भी दे दी है। आज से यह द्वीप आप का है। आप हमारे राष्ट्र को सुरक्षित करने के लिए इतना परिश्रम कर रहे हैं, हमारे लिए और कोई काम हो तो बे झिझक बोलिए। कलाम साहब बीजू बाबू के कायल हो गए।

व्हीलर द्वीप का नया नाम | व्हीलर द्वीप का क्या महत्व है | व्हीलर द्वीप इन हिंदी | Wheeler Island’s new name | What is the significance of Wheeler Island? Wheeler Island In Hindi

आज उस द्वीप पर भारत ने पृथ्वी मिसाइल का परीक्षण (Prithvi missile test) किया, फिर अग्नि सीरीज की बैलिस्टिक मिसाइल (agni series ballistic missile of india) अग्नि 1, से अग्नि 5 तक, सबसोनिक क्रूज मिसाइल निर्भय (Nirbhay Subsonic Cruise Missile), ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल (BrahMos ब्रह्मोस प्रक्षेपास्त्र), के अलावा, नाग, धनुष, एयर डिफेंस के लिए आकाश, QRSM, XRSM मिसाइलों का परीक्षण यहीं चल रहा है। इस के अलावा आने वाले 20 से 22 अगस्त के बीच भारत इस द्वीप से भारत की सबसे शक्तिशाली हाइपर सोनिक मिसाइल के परीक्षण के नोटिस जारी कर दिया है। भारत यदि ऐसा करने में कामयाबी हासिल कर लेता है तो रूस के बाद हाइपर सोनिक मिसाइल बनाने वाला दुनिया का दूसरा ही देश होगा।

अजय कुमार सिंह (AJAY  KUMAR SINGH आरा) लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।
अजय कुमार सिंह (AJAY KUMAR SINGH आरा)
लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

कहा जाता है कि हाइपर सोनिक मिसाइल दुनिया के किसी भी रडार के पकड में नहीं आता है, इस तरह से देश को सुरक्षित बनाने के लिए बीजू बाबू और कलाम साहब जैसे वैज्ञानिकों द्वारा तालमेल शुरू किया गया। प्रयास की आवश्यकता होती है, हमारे देश के वैज्ञानिक कलाम साहब के तरह प्रतिभावान होने चाहिएं, तो यह भी जरूरी है कि बीजू बाबू जैसे समझदार और प्रोत्साहन देने वाले जनप्रतिनिधियों की भी आवश्यकता है। हमने प्रधान मंत्री और रक्षा मंत्री को छोड कर एक छोटे राज्य के मुख्यमंत्री का हवाला इस कारण दिया क्योंकि देश की उन्नति के लिए सभी जनप्रतिनिधियों की भूमिका होती है। इन की समझदारी और बेवकूफी अंततः जनता को ही प्रभावित करती है!

जय हिंद

अजय कुमार सिंह (AJAY  KUMAR SINGH आरा)

लेखक स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

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देशभक्ति के उल्‍लास के साथ 74वां स्‍वतंत्रता दिवस मनाया गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर आत्मनिर्भर भारत का संकल्प दोहराया है। देश को संबोधन में प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (National Digital Health Mission) के तहत सभी नागरिकों को स्‍वास्‍थ्‍य पहचान देने की घोषणा की है।

केंद्र सरकार ने एक विज्ञापन में प्रधानमंत्री किसान ट्रैक्टर योजना (pradhan mantri kisan tractor yojana 2020) के तहत किसानों को आधे दाम पर ट्रैक्टर (Tractor at half price to farmers) दिए जाने के दावे को गलत बताया है। केंद्र ने इस विज्ञापन को फर्जी बताते हुए कहा है कि ऐसी कोई योजना लागू नहीं है। केंद्र ने लोगों से कहा कि वे ऐसे निराधार दावों और विज्ञापनों के छलावे में न आएं। केंद्र ने यह भी अपील की है कि किसी सरकारी योजना से संबंधित पंजीकरण कराने या दस्तावेज प्राप्त करने से पहले अच्छी तरह तथ्यों की जानकारी लें।

फल-सब्जी पर वायरस के होने की आशंका है तो क्या करें ? (What to do if there is a possibility of virus on fruits and vegetables?)

आकाशवाणी समाचार के एक ट्वीट में कोरोना पर विशेषज्ञ लोक नायक अस्पताल के डॉ. नरेश गुप्ता के हवाले से बताया गया है कि “पहली बात अगर फल, सब्जी, मेज, कुर्सी या किसी सतह पर कोरोना वायरस है, तो संक्रमण की संभावना कम रहती है। ऐसी वस्तुओं पर कुछ घंटे रहने के बाद वायरस नष्ट हो जाता है। लेकिन अगर बेचने वाला संक्रमित हुआ या फल-सब्जी पर कोई खांस रहा है, तो वायरस उस पर बैठा रह सकता है। इसलिए ऐसी चीजों को घर लाकर पानी से अच्छी तरह धोएं, या कुछ घंटों या रात भर के लिए अलग रख दें। इससे वायरस नष्ट हो जाता है। इस बीच यह भी ध्यान रखना है कि सामान लाने के बाद साबुन-पानी से हाथ जरूर धोना है”

मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी की पुण्यतिथि पर दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी की दूसरी पुण्यतीथि पर रविवार को उन्हें स्मरण कर अपनी श्रद्धांजलि दी।

भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता और पूर्व प्रधानमंत्री वाजपेयी का 16 अगस्त 2018 को 93 साल की उम्र में निधन हो गया था और आज उनकी दूसरी पुण्यतीथि है।

श्री मोदी ने स्वर्गीय वाजपेयी का ट्विटर पर वीडियो पोस्ट कर कहा, हमारे प्यारे अटल जी को पुण्य तीथि पर श्रद्धांजलि। भारत हमेशा उनकी उत्कृष्ट सेवा और उनके द्वारा राष्ट्र की प्रगति के प्रयासों को याद रखेगा।

सोमालिया की सेना ने 33 बच्चों को अल शबाब के आतंकियों से मुक्त कराया

सोमालिया की सेना ने शाबेले क्षेत्र से एक सैन्य अभियान के तहत 33 बच्चों को आतंकवादी समूह अल शबाब से मुक्त कराया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमालिया सेना के अभियान में अल शबाब के कम से कम चार आतंकवादी मारे गए और बच्चों को बचाया गया। इन बच्चों को शाबेले क्षेत्र से बचाया गया है।

कश्मीर में आतंकियों ने की नागरिक की हत्या

मीडिया रिपोर्ट्स में बताया गया है कि दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा जिले में संदिग्ध आतंकियों ने शनिवार की शाम एक आम नागरिक की गोली मारकर हत्या कर दी।

समाजवादी एकता के लिए कोई भी कुर्बानी देने को तैयार : शिवपाल

प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के मुखिया शिवपाल सिंह यादव ने एक बार फिर एकता का सुर अलापते हुए कहा है कि मैं केवल इतना चाहता हूं कि समाजवादी एक हो जाएं, इसके लिए मैं कोई भी कुर्बानी देने को तैयार हूं। प्रगतिशील समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवपाल सिंह कल इटावा में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर जिले के शहीद स्मारक पर श्रद्धांजलि देने आए थे। यहां शिवपाल सिंह ने शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की और सभी देशवासियों को बधाई दी। उन्होंने इशारों ही इशारों में कहा कि समाजवादियों को एक करने के लिए मैं कुछ भी कुर्बानी देने के लिए तैयार हूं।

भारत को 2011 का विश्व कप जिताने वाले पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी और भारतीय क्रिकेटर सुरेश रैना ने अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों से संन्यास ले लिया।

भारत में वीवो वाई20 स्मार्टफोन जल्द हो सकता है लॉन्च

बीचीनी स्मार्टफोन निर्माता कंपनी वीवो अपने नए स्मार्टफोन वाई 20 पर काम कर रही है जो क्वालकॉम स्नैपड्रैगन 460 चिपसेट के साथ आने की संभावना है।

रूस ने कोविड-19 वैक्सीन का उत्पादन शुरू किया

रूस ने कोविड-19 के इलाज के लिए अपने वैक्सीन (Russian vaccine to treat COVID-19) के पहले बैच का उत्पादन शुरू कर दिया है। यह जानकारी उनके स्वास्थ्य मंत्रालय ने शनिवार को जारी एक बयान में दी।

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आदिवासियों का अस्तित्व बचाने को कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ लड़ना जरूरी : पराते

Sanjay Parate संजय पराते, माकपा छत्तीसगढ़ के राज्य सचिव हैं।

The life of tribals is in danger

रायपुर/ भोपाल, 31 जुलाई. छत्तीसगढ़ और पूरे देश में आदिवासियों का अस्तित्व बचाने के लिए कॉर्पोरेट लूट के खिलाफ लड़ना जरूरी है। कॉर्पोरेट युग का बर्बर और आदमखोर पूंजीवादी शोषण वनों, जैव विविधता और वन्य जीवों का विनाश, पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को बर्बाद और आदिवासी सभ्यता व संस्कृति की तबाह कर रहा है। वह समूचे प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करके अपने मुनाफे को बढ़ाना चाहता है। इसके चलते आदिवासियों का जीवन अस्तित्व खतरे में है

उक्त विचार मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव संजय पराते ने मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ के पाक्षिक लोकजतन द्वारा फेसबुक पर आयोजित एक व्याख्यानमाला को संबोधित करते हुए व्यक्त किये।

यह व्याख्यानमाला मप्र माकपा के पूर्व सचिव शैलेन्द्र शैली की स्मृति में हर वर्ष 24 जुलाई से 7 अगस्त तक आयोजित किया जाता है। पराते इस वैचारिक आयोजन के 7वें दिन “अबूझमाड़ से खोंगपाल तक अस्तित्व के संकट से जूझते आदिवासी” विषय पर बोल रहे थे।

इस आभासीय मंच पर 10000 से ज्यादा लोगों ने उनके व्याख्यान को सुना।

उन्होंने कहा कि जिस प्रदेश में 75% परिवारों की औसत मासिक आय 5000 रुपयों से कम हो और जहां औसतन 65 रुपये दैनिक मजदूरी के साथ सबसे सस्ते मजदूर मिलते हो, उस प्रदेश में सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े आदिवासी समुदाय की आर्थिक स्थिति और इस पर टिके मानव विकास सूचकांक की स्थिति का सहज अंदाजा लगाया जा सकता है। यही कारण है कि पूरे प्रदेश के लिए कुपोषण की दर 38% होने के बावजूद आदिवासी समुदायों की दो-तिहाई महिलाएं और बच्चे गंभीर रूप से कुपोषित है। स्पष्ट है कि उन्हें न्यूनतम पोषण आहार 2200 कैलोरी तक उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य बीमा योजना पूरी तरह फ्लॉप है और स्वास्थ्य क्षेत्र के निजीकरण के कारण होने वाली लूट से हर साल 10 लाख लोग गरीबी रेखा के नीचे चले जाते हैं और इनमें अधिकांश आदिवासी होते हैं।

Only displacement and destruction have come on the part of tribals

माकपा नेता ने कहा कि आदिवासी क्षेत्रों में विकास के नाम पर जिन परियोजनाओं को थोपा गया है, उससे आदिवासियों के हिस्से में केवल विस्थापन और विनाश ही आया है। पिछले 40 सालों में छत्तीसगढ़ में लगभग 2 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि का अधिग्रहण किया गया है और 2 लाख हेक्टेयर वन भूमि का गैर-वानिकी कार्यों के लिए। वनों पर 70% परियोजनाएं खनिज खनन की है। इस प्रकार, औसत भूमिधारिता को ध्यान में रखें, तो 4 लाख हेक्टेयर भूमि से 10 लाख आदिवासी और गरीब किसान परिवारों का विस्थापन तो हुआ है, लेकिन उनका पुनर्वास नहीं।

उन्होंने कहा कि कॉर्पोरेटों को मुनाफ़ा कमाने का मौका देने के लिए ही वनाधिकार कानून, पेसा और 5वीं अनुसूची के प्रावधानों को धता बताते हुए डिब्बे में बंद बोधघाट परियोजना को बाहर निकाला गया है और सिचाई के फर्जी आंकड़ों को गढ़कर आदिवासियों की सहमति हासिल करने की कोशिश हो रही है। यदि यह परियोजना अमल में आती है, तो कॉरपोरेटों की तिजोरी में तो 3 लाख करोड़ आएंगे, लेकिन 42 गांवों के 35000 आदिवासियों के हिस्से में बर्बादी। इसी प्रकार पोलावरम परियोजना से 25000 से ज्यादा आदिवासी उजड़ेंगे और दोरला जनजाति ही विलुप्ति के कगार पर पहुंच जाएगी।

पराते ने कहा कि भाजपा राज ने जिस सलवा जुडूम अभियान को प्रायोजित किया था, उसका स्पष्ट मकसद था कि कॉरपोरेटों को यहां की प्राकृतिक संपदा को लूटने का मौका दिया जाए। इसके लिए दसियों गांवों में आग लगाकर 700 गांव खाली करवाये गए और हजारों लोगों को कथित शिविरों में कैद कर लिया गया। नक्सलियों के नाम पर आज भी निर्दोष आदिवासियों की हत्याएं की जा रही हैं और उनको जेलों में ठूंसा जा रहा है। आदिवासी क्षेत्रों में कॉर्पोरेट लूट के लिए सरकारें भी उनके साथ में है। इसलिए आप आदिवासियों के साथ खड़े हो सकते है या फिर उनके खिलाफ कार्पोरेटों के साथ। बीच का कोई रास्ता नहीं है और कांग्रेस-भाजपा की सरकारों ने आदिवासियों के खिलाफ और कार्पोरेटों के साथ खड़ा होना तय किया है। यही कारण है कि बोधघाट मामले में भी वे एक हैं।

उन्होंने कहा कि देश के 115 सबसे पिछड़े जिलों में छत्तीसगढ़ 7 आदिवासीबहुल जिलों सहित 10 जिले शामिल हैं। उर्जाधानी कोरबा का भी सबसे पिछड़ा होना चौंकाता है। केंद्र और राज्य सरकारों की जो आदिवासी विरोधी और नव-उदारवादी नीतियां हैं, उसका दुष्परिणाम है कि वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार उनकी जनसंख्या में सवा प्रतिशत की गिरावट आई है और भील, कोरकू, परजा, सहरिया, सौर और सोंर जैसी जनजातियां विलुप्ति की कगार पर है। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले वर्ष वनाधिकार से वंचित आदिवासियों की बेदखली का जो आदेश दिया है, वह इस संकट को और बढ़ाता है। इससे हमारे प्रदेश के 12 लाख आदिवासी परिवार प्रभावित होंगे।

प्रदेश में फैल रहे कोरोना महामारी पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में अभी तक जितने टेस्ट हुए हैं, उसमें 3% लोग संक्रमित पाए गए हैं।

इस प्रकार 7-8 लोग संक्रमित होंगे और निश्चित ही इसमें एक बहुत बड़ी आबादी आदिवासियों की भी है। आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं की जो हालत है, उसमें सामान्य बीमारी भी महामारी का रूप ले लेती है और महामारी से होने वाली मौतों को भी सामान्य मौतों में गिना जाता है। इस बात का कोई रिकॉर्ड नहीं मिलेगा कि कितने कोरोना संक्रमित इन क्षेत्रों में रोज मर रहे होंगे। यह एक दुखद स्थिति है।

उन्होंने कहा कि आदिवासियों के पास नगद धन-दौलत नहीं है और वे पूंजीवादी बाजार के लिए किसी काम के नहीं है, क्योंकि वे उनका मुनाफा नहीं बढ़ा सकते। लेकिन उनके पास जो प्राकृतिक संपदा है, उसको लूटकर कॉर्पोरेट अपनी तिजोरियां जरूर भर सकते हैं। इसलिए उनकी सभ्यता, संस्कृति और उनके समूचे जीवन अस्तित्व को मिटाकर वे उनके प्राकृतिक संसाधनों पर कब्जा करना चाहते हैं। इस लूट के खिलाफ सभी शोषित-उत्पीड़ित-दमित लोगों को संगठित करके, एक शोषण विहीन – जाति विहीन समाज की स्थापना में यकीन रखने वाले लोगों की अगुआई में ही इस लड़ाई को लड़ा जा सकता है। वामपंथी आंदोलन की यही दिशा है, जो हमारे देश, संविधान और आदिवासियों के जीवन अस्तित्व की रक्षा कर सकती है और इस देश में मनुवाद के रूप में फासीवाद लादने की हिंदुत्ववादी ताकतों के कुचक्र को विफल कर सकती है।

जानिए पैराशूट का इतिहास और कैसे हुआ पैराशूट का आविष्कार

Things you should know

Learn the history of parachute and how the invention of parachute happened

लोगों को पैराशूट से उड़ते देखकर सभी के मन में पैराशूट के आविष्कार और इतिहास को जानने का विचार जरूर आता हैं। पैराशूट के आविष्कार के बाद लोगों के मन से आसमान में जाने और गिरने का डर समाप्त हो गया है।

पैराशूट एक ऐसा वैज्ञानिक उपकरण है, जो आपातकाल में उड़ते हुए वायुयान से सुरक्षापूर्वक धरती पर उतारने के काम आता है। पैराशूट का आविष्कार आंद्रे गार्नेरिन ने किया था

पैराशूट का इतिहास | When was the parachute invented ?

दुनिया में सबसे पहले व्यवहारिक रूप से सफल पैराशूट बनाने का श्रेय एक फ्रांसीसी व्यक्ति ‘लुइ सेबास्तियन लेनोर्मां’ (french inventor of the parachute) को दिया जाता है। जिसने वर्ष 1783 में पहली बार पैराशूट का सार्वजनिक प्रदर्शन किया था। यह पैराशूट लकड़ी के ढांचे पर कपड़ा डालकर बनाया गया था। जबकि 15वीं शताब्दी में ‘लिओनार्दो दा विंची’ ने कल्पना करते हुए सबसे पहले पैराशूट का रेखाचित्र बनाया था।

Parachute Designed by Leonardo Da Vinci

लिओनार्दो दा विंची के पैराशूट की डिजाइन को ध्यान में रखकर ही ‘फॉस्ट ब्रांसिस’ ने एक सख्त फ्रेम वाला होमो वोलंस नाम का पैराशूट बनाया, जिसे पहनकर वर्ष 1617 में ब्रांसिस ने वेनिस टॉवर से छलांग लगाई थी (first parachute jump)। उस समय आकाश से इस तरह छलांग लगाना कोई आसान काम नहीं था।

हालांकि वर्ष 1785 में फ्रांसीसी नागरिक ज्यां पियरे ब्लांचार्ड  ने आपातकाल में पैराशूट का पहला प्रयोग किया था। इन्होंने ऊंचाई पर उड़ रहे एक हॉट एयर बैलून से एक कुत्ते को पैराशूट बंधी टोकरी के द्वारा नीचे उतारा था।

ज्यां पियरे ब्लांचार्ड ने पहली बार उपयोग करने में आसान होने के कारण सिल्क के कपड़े से पैराशूट बनाया था। इसी तरह के पैराशूट द्वारा वर्ष 1797 में फ्रांस के आंद्रे गार्नेरिन ने 3000 फुट की ऊंचाई से एक सफल छलांग लगाई थी और आंद्रे गार्नेरिन ने पैराशूट में कंपन्न को कम करने के लिए कुछ सुधार किये थे जिससे पहला छिद्रित पैराशूट’ अस्तित्व में आया था।

वर्ष 1797 में एंड्रयू नाम के व्यक्ति ने एक हॉट एयर बैलून में पेरिस के ऊपर 3200 फिट की ऊंचाई पर उड़कर पैराशूट के इतिहास में नाम लिखा।

24 जुलाई 1837 को लन्दन के बॉक्स हाल गार्डन में राबर्ट काकिंग ने पैराशूट की उडान का प्रदर्शन किया था। लेकिन पांच हजार फुट की ऊंचाई से गिरते समय पैराशूट का लकड़ी का ढांचा हवा के दबाव से टूटने के कारण राबर्ट की मृत्यु हो गई थी।

शुरुआत में पैराशूट लकड़ी के ढांचे पर कपड़ा डालकर बनाये जाते थे। बाद में फान टासल ने सूती कपडे का एक छतरी के आकार का पैराशूट बनाया था जो काफी लोकप्रिय भी हुआ।

कुछ समय बाद पैराशूट बनाने में सूती कपड़े की जगह रेशमी कपडे (सिल्क) का उपयोग किया जाने लगा जिससे पैराशूट ओर हल्के व मजबूत हो गए। आजकल पैराशूट बनाने के लिए नायलोन का उपयोग किया जाता है।

पैराशूट के उपयोग | Parachute usage

दूसरे विश्व युद्ध के समय अमेरीकी सैनिकों को कहीं पहुँचाने के लिए पैराशूट का काफी उपयोग किया गया था, क्योंकि पैराशूट से जटिल जगहों पर भी जा सकते हैं। लड़ाकू जहाज काफी तेज गति से उड़ते व रनवे पर उतरते हैं और आपातकाल के समय में लम्बा रनवे नहीं मिलने से लड़ाकू जहाज को रोक पाना खतरनाक होता है। लेकिन पैराशूट की मदद से इनकी गति को नियंत्रण में करके विमान को सुरक्षित उतार सकते हैं।

युद्ध के समय में पैराशूट के द्वारा शत्रु के क्षेत्र में सैनिक, गोला बारूद और खाने पीने की सामग्री सेना के लिए गिराए जाते हैं।

अन्तरिक्ष यात्री जिस केप्सूल में बैठकर धरती पर उतरते हैं, उसमें पैराशूट लगा होने के कारण यात्री सुरक्षित उतर पाते हैं।   समुद्र के किनारे सैलानियों के लिए हवा में उड़ने में पैराशूट का उपयोग किया जाता है और जैव वैज्ञानिक और डिस्कवरी चैनल वाले भी जंगलों के ऊपर घूमने के लिए पैराशूट इस्तेमाल करते हैं।

पैराशूट की रोचक जानकारी | Interesting information about parachute

वर्ष 1937 में सबसे पहले रूस ने आर्कटिक पर खोज के दौरान बर्फ पर प्लेन रोकने के लिए प्लेन के पीछे पैराशूट लगाकर उपयोग किया गया था, क्योंकि बर्फ पर फिसलने के कारन प्लेन को रोकना मुश्किल काम था।

वर्ष 1914 में प्रथम विश्वयुद्ध के समय विमानों से बमवर्षा की गई थी। इसके ठीक 12 वर्ष बाद दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान विमान चालकों द्वारा पैराशूट का उपयोग करके हजारों लोगों की जान बचाई गई थी।

आजकल इतने बड़े-बड़े पैराशूट भी बन चुके हैं, जो आपातकाल में उड़ते हुए हवाई जहाज या विमान को भी हवा में लटका कर सुरक्षित नीचे उतार सकते हैं।

मुकेश कुमार माली

Note – André-Jacques Garnerin (31 January, 1769 – 18 August, 1823) was a French balloonist and the inventor of the frameless parachute.

स्रोत – देशबन्धु

भारत में डेल ने 2020 गेमिंग लैपटॉप लाँच किए

Dell unveils 2020 gaming laptop portfolio in India

Dell unveils 2020 gaming laptop portfolio in India

नई दिल्ली, 23 जुलाई 2020. डेल टेक्नोलॉजीज (Dell Technologies) और इसकी सहयोगी कंपनी-एलाइनवेयर (Alienware) ने गुरुवार को भारतीय बाजार के लिए नवीनतम 2020 गेमिंग लैपटॉप (Latest 2020 gaming laptop) का अनावरण किया। एलाइनवेयर एम15 आर3 की कीमत (alienware m15 r3 price in india) 199,990 रुपये से शुरू होती है, डेल जी5 एसई (dell g5 se price in india 2020) को 74,990 रुपये में उपलब्ध कराया जा रहा है, डेल जी5 15 की कीमत (dell g5 15 price in india) 82,590 है और डेल जी3 15 की कीमत (Dell G3 15 Price in india) 73,990 से शुरू होगी।

डेल टेक्नोलॉजीज इंडिया में कंज्यूमर एंड स्मॉल बिजनेस के लिए प्रबंध निदेशक और उपाध्यक्ष राज कुमार ऋषि (Raj Kumar Rishi, Managing Director and Vice President, Consumer and Small Business at Dell Technologies India) ने कहा, अगर आप पीसी गेमिंग (Pc gaming) के मामले में नए हैं या मोबाइल से अब पीसी की ओर मूव कर रहे हैं तो डेल जी सीरीज पोर्टफोलियो शुरूआत करने के लिए बेहतरीन है।

एलाइनवेयर एम15 आर3 क्रायो-टेक थर्मल टेक्नोलॉजी द्वारा संचालित है जो न्यू वैपर कूलिंग सिस्टम के साथ आता है।

सीईएस 2020 में पहले पेश किए गए डेल जी5 15 एसई, डेल के जी सीरीज पोर्टफोलियो में नवीनतम है।

यह डेल का पहला जी सीरीज लैपटॉप (Dell’s G Series Laptop) है जिसमें एएमडी राइजेन 4000 एच-सीरीज मोबाइल प्रोसेसर (8-कोर, 16-थ्रेड तक) की सुविधा है जिसे नए एएमडी रेडॉन आरएक्स 5600एम जीपीयू के साथ डेस्कटॉप ग्रेड परफॉर्मेंस देने के लिए जोड़ा गया है।

चिप्स एएमडी स्मार्टशिफ्ट तकनीक का उपयोग जरूरत के हिसाब से परफॉर्मेंस को अनुकूलित करने के लिए समझदारीपूर्वक राइजेन प्रोसेसर और रेडॉन जीपीयू के बीच पावर को शिफ्ट करके करते हैं।

डेल जी5 15 टेंथ जेनरेशन इंटेल कोर आई7 प्रोसेसर के साथ आता है। गेमिंग सेशन के दौरान गर्मी को फैलने से रोकने के लिए इसमें बड़े कूलिंग वेंट्स और एक डुअल-फैन कूलिंग तकनीक है।

कंपनी के मुताबिक, डेल जी5 उन गेमर्स के लिए है जिन्हें खासतौर पर गेमिंग के लिए एक पीसी की तलाश है। यह 1650 टीआई ग्राफिक्स के साथ आता है ताकि परफॉर्मेंस के साथ कोई समझौता न करना पड़े।

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स्वास्थ्य का मुद्दा अस्पतालों और डॉक्टरों का ही नहीं, राजनीति का मुद्दा है

Webinar on Health.... A webinar on the topic "Nationalization of Health Services in India",

कोविड 19 के सन्दर्भ में स्वास्थ्य सेवाओं के राष्ट्रीयकरण पर हुई वेबिनार

भोपाल, 19 जुलाई 2020. (राहुल भाईजी). भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी की मध्यप्रदेश इकाई द्वारा “भारत में स्वास्थ्य सेवाओं के राष्ट्रीयकरण” विषय पर एक वेबिनार (A webinar on the topic “Nationalization of Health Services in India”) का आयोजन किया गया। वेबिनार का संयोजन जोशी अधिकारी इंस्टीट्यूट आफ सोशल स्टडीज द्वारा किया गया।

वेबिनार में डॉ अभय शुक्ला (पुणे) राष्ट्रीय सहसंयोजक, जन स्वास्थ्य अभियान, ने अपनी बात रखते हुए कहा कि वर्ष 1986-87 में भारत की सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं निजी क्षेत्र की तुलना में ज्यादा थीं, और 1000 मरीज में 400 मरीज ही निजी स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेते थे। तब से 2020 तक स्थितियां बिल्कुल विपरीत हो गई हैं। अब बमुश्किल 40 फ़ीसदी लोग सार्वजानिक स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाते हैं और शेष 60 फ़ीसदी को निजी क्षेत्र के अस्पतालों की शरण लेना पड़ती है।

डॉ. अभय शुक्ल ने कहा कि स्वास्थ्य पर खर्च के मामले में भारत दुनिया के कई मुल्कों के मुक़ाबले में सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है।

उन्होंने कहा कि भारत में प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर शासन द्वारा खर्च 19 अमेरिकी डॉलर प्रति वर्ष किया जाता है जो फिलीपींस, इंडोनेशिया और अफ्रीका जैसे देशों की तुलना में 3 से 4 गुना कम है, वहीं दूसरी ओर समाजवादी देश क्यूबा प्रति व्यक्ति प्रति वर्ष 883 अमेरिकी डॉलर का खर्च अपने नागरिकों के स्वास्थ्य पर करके सबसे ऊंचे स्तर पर है। वर्ष 2019-20 में भारत में रूपये 1765 प्रति व्यक्ति स्वास्थ्य पर औसतन खर्च किया जा रहा था, यानि मात्र रूपये 3.50 प्रति व्यक्ति प्रतिदिन का खर्च। उन्होंने कहा कि सरकार ने जैसे-जैसे सरकारी स्वास्थ्य खर्चों में कटौती करने के साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण को नीतिगत बढ़ावा दिया।

उन्होंने कहा कि देश के कुछ राज्य तो सिर्फ निजी स्वास्थ्य सेवाओं के हवाले कर दिए गए हैं। जिसके चलते सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं खुले बाजार की व्यवस्था में लूट का माध्यम बन गई हैं। स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ गए लोगों के निजी खर्च का नतीजा ये हुआ है कि देश में प्रतिवर्ष लगभग 5.5 करोड़ लोग गरीबी की खाई में गिरते जा रहे हैं। वर्ष 2005 से 2015 के बीच निजी स्वास्थ्य सेवाओं का व्यापार औसतन तीन गुना बढ़ गया। देश के शीर्ष 78 डॉक्टर्स ने एक सर्वे में बताया कि मुनाफाखोरी की चाहत ने निजी संस्थाओं को गैर तार्किक और अनुचित तरीके अपनाने की छूट भी ली जिससे निजी क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाएं बेहद मॅहगी हुई हैं। बहुराष्ट्रीय पूंजी भी इस क्षेत्र में अपनी भागीदारी बढ़ाकर देश की जनता को लूटने तेजी से पांव पसार रही हैं। इस तरह सामान्य स्वास्थ्य सेवाएं सरकार द्वारा कारपोरेट घरानों को सौंप दी गईं और चुनी हुई लोकतान्त्रिक सरकारों ने ही देश की जनता को लुटाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

उन्होंने कहा कि निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र को दवा, उपकरण और स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से देशवासियों को दोनों हाथों से लूटने की आजादी दे दी गई। हाल ही के कोविड महामारी के रोगियों से बड़ी निजी अस्पतालों द्वारा प्रतिदिन का रुपये 1 लाख से 4-5 लाख तक का खर्च वसूला जा रहा है। देश के लगभग सभी प्रदेशों में जिला और विकासखंड स्तर पर मौजूद अस्पताल संसाधन विहीन हैं, पर्याप्त स्टाफ, डॉक्टर्स नहीं हैं, जिससे कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़ रही है। सरकार को निजी क्षेत्रों के अस्पतालों में इलाज की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सही तरीका इस्तेमाल करना चाहिए ताकि सभी को जीने के अधिकार से वंचित न किया जा सके। साथ ही सरकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को सुविधा युक्त बनाने प्रति व्यक्ति का खर्च बढ़ाने चाहिए तो कोरोना महामारी से लड़ा जाना संभव होगा। ताकि उनकी रोजमर्रा की आम स्वास्थ्य से जुड़ी जरूरत पूरी हो सके। इसे मैं राष्ट्रीयकरण नहीं बल्कि सामाजिकीकरण कहना चाहूँगा।

Health and education is our constitutional right which should be readily available to every citizen of the country.

इंडियन डॉक्टर फॉर पीस एंड डेमोक्रेसी- Indian Doctor for Peace and Democracy (आइडीपीडी) के वरिष्ठ उपाध्यक्ष डॉक्टर अरुण मित्रा (लुधियाना) ने कहा कि स्वास्थ्य और शिक्षा हमारा संवैधानिक अधिकार है जिसे देश प्रत्येक देशवासी को सहजता से उपलब्ध होना चाहिए। देश की सरकार ने आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं, जन स्वास्थ्य विभाग बनाने के बजाय मुनाफा कमाने वाली कंपनियों को खुली छूट दे रही हैं। सरकार को देश में विकेन्द्रित स्वास्थ्य सेवाएँ सहज रूप से उपलब्ध कराना चाहिए एवं साथ ही निजी क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं का राष्ट्रीयकरण बेहद आवश्यक हो गया है। जैसा कि बैंकों का राष्ट्रीयकरण (Nationalization of banks) किया गया था जो आज भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए जीवनदायिनी बनकर उभरे हैं, उतना ही महत्वपूर्ण देश के नागरिकों का स्वास्थ्य है। समय की आवश्यकता है कि सभी निजी स्वास्थ्य सेवाओं का राष्ट्रीयकरण हो।

उन्होंने बताया कि किस तरह उनके संगठन द्वारा राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं का मुआयना करते हुए पाया गया कि सरकारी नीतियों की खामी के चलते निजी अस्पतालों में एक बहुत बड़े तबके के इलाज ना कर पाने से उन्हें मौत का सामना करना पड़ता है। देश के राजनीतिक दलों द्वारा स्वास्थ्य एवं शिक्षा पर कोई ध्यान ना देने से देश की शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई है।

वेबीनार को भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा आयोजित किये जाने पर उन्होंने खुशी जाहिर की और कहा कि यह बहुत अच्छी बात है कि किसी राजनीतिक दल ने स्वाथ्य सेवाओं को राजनीतिक मुद्दे की तरह देखा है। स्वास्थ्य सेवाएँ कैसी हों, यह एक राजनीतिक सवाल है और जैसी राजनीती देश पर शासन करेगी, वैसा ही हाल स्वास्थ्य सेवाओं का होगा। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य का सवाल केवल अस्पतालों और डॉक्टरों से जुड़ा हुआ नहीं है. इसमें बड़ी भूमिका दवा कंपनियों की भी है। आपको हैरत होगी कि उदारीकरण के दौर में सरकारी क्षेत्र की दवा निर्माण करने वाली कम्पनियाँ बंद कर दी गईं। स्वास्थ्य का सवाल बुनियादी रूप से साफ़ पानी मुहैया करने, उचित सीवेरज व्यवस्था उपलब्ध कराने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने से जुड़ा है। हमें समाज ऐसा बनाना चाहिए जहाँ लोग ावाल तो बीमार पड़ें ही नहीं और अगर किसी वजह से कोई बीमार पड़े तो उसे ये फ़िक्र न हो कि पैसे कहाँ से आएंगे या डॉक्टर सही इलाज कर रहा है या लूट रहा है। इसके लिए हम सरकार से आइडीपीडी की ओर से राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग बनाने की मांग करते आ रहे हैं।

डॉक्टर माया वालेचा गुजरात के भरूच में एक सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ता हैं और समाज के गिरते मानवीय मूल्यों और सामाजिक संबंधों को बेहतर बनाने के लिए काम कर रही हैं।

वेबिनार में अपना वक्तव्य रखते हुए उन्होंने कहा कि आज देश की जो स्थिति है उसके पीछे एक वजह राजनीतिक दलों की राजनीतिक इच्छाशक्ति का बेहद कमजोर होना भी है। कोविड महामारी में देश की गरीब जनता, मेहनत करने वाले श्रमिक केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा उपेक्षित हुए हैं। प्रवासी मजदूरों को हजारों किलोमीटर पैदल चलना पड़ा, परंतु रास्ते में स्वास्थ्य केंद्रों के अभाव के चलते कईयों को अपनी जान गंवानी पड़ी, जिनमें महिलाओं की दुर्गति किसी से छिपी नहीं है। नीति निर्माताओं ने ऐसे हालात में निजी स्वास्थ्य सेवाओं की कोई जवाबदारी तय नहीं की। देश की बहुमत आबादी को सरकार द्वारा प्रदत्त स्वास्थ्य सेवाओं का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा है। कोरोना से बचाव कराने वाले स्वास्थ्य कर्मी, स्वयं की सुरक्षा सामग्री के अभाव में काम करने को मजबूर किए गए। सफाईकर्मियों को जान जोखिम में डालकर काम करने को मजबूर किया गया, स्वास्थ्य कर्मियों को समय पर उनकी तनख्वाह नहीं मिल पाई जिसके चलते कोरोना मरीज उपेक्षा का शिकार होते रहे, परंतु सरकार उनकी समस्याओं की अनदेखी करती रही है।

वे कहती हैं कि देश में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति भयावह है। जिसे एक चेतनशील राजनीति समाधान से बेहतर किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोविड-19 को अपने व्यापारिक उद्देश्य के लिए इस्तेमाल करने में बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, जो दुनिया में वैक्सीन के क्षेत्र में काम करने वाला सबसे बड़ा कॉर्पोरेट है, कोविड की वैक्सीन बनाकर मुनाफे की होड़ में हैं। स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का राष्ट्रीयकरण किये बिना, या जिसे सामाजिकीकरण भी कहा जा सकता है, इन सेवाओं को उन्नत नहीं किया जा सकता लेकिन साथ ही राजनीतिक हल की भी बेहद आवश्यकता है।

कार्यक्रम के संयोजक विनीत तिवारी ने कहा कि बेशक स्वास्थ्य और शिक्षा जैसे सवाल राजनीतिक सवाल हैं इसीलिए हम देख सकते हैं कि जहाँ भी सरकारें जनता के लिए फिक्रमंद हैं, वहाँ कोविड 19 का कहर कम टूटा है। क्यूबा और वेनेज़ुएला जैसे देशों की स्वास्थ्य सुविधाएँ दुनिया में श्रेष्ठ मानी जाती हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि बिल गेट्स और मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन जब अपने बनाये वैक्सीन का प्रयोग करेगी तब भी गरीब एशियाई और अफ़्रीकी देशों की जनता को ही उनके कहर का शिकार होना पड़ेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका में एक स्वास्थ्य सम्बन्धी आपदा का इस्तेमाल अपनी राजनीतिक स्थित्ति को मजबूत करने और आपदा का डर दिखाकर लोगों से विरोध और प्रतिरोध के सभी तरीकों को छीनने में किया जा रहा है।

वरवर राव के सन्दर्भ से उन्होंने कोविड-19 की आड़ में सरकार द्वारा किये जा रहे राजनीतिक दमन को रेखांकित किया और कहा कि राजनीतिक दलों को अनेक मोर्चों पर लड़ना होगा।

सभी वक्ताओं का आभार मानते हुए कहा कि भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी शिक्षा एवं स्वास्थ्य के सवालों पर सही मायनों में एक ऐसा राजनीतिक दल है जो शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण के खिलाफ शुरू से ही रहा है और अपना विरोध दर्ज कराया है। यही वजह है कि आज इस वेबिनार का आयोजन किया गया।

मप्र इकाई के पार्टी राज्य सचिव कामरेड अरविंद श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य सेवाओं का संज्ञान लेते हुए वक्ताओं के प्रभावशाली वक्तव्य और प्रस्तुति के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के राष्ट्रीयकरण के मसले पर प्रदेश के अन्य संगठनों से बात करने के बाद आंदोलनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे और स्वास्थ्यकर्मियों को संगठित करके प्रदेश ही नही बल्कि देश की जनता के सामने इस लड़ाई को मजबूत करने का आव्हान किया जाएगा।

वेबिनार हिंदी में था अतः मध्य प्रदेश के साथ ही दिल्ली, गुजरात, बंगाल, पंजाब एवं अन्य हिंदीभाषी राज्यों के उत्सुक और रुचिवान लोग शरीक हुए और सवाल जवाब का दौर भी हुआ।

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अब आपकी आंख के इशारे पर नाचेगी रोबोट की बांह

Scientists created robotic arm to be controlled by eyes

वैज्ञानिकों ने बनायी निगाहों से नियंत्रित होने वाली रोबोटिक बांह | Scientists created robotic arm to be controlled by eyes

नई दिल्ली, 15 जुलाई (उमाशंकर मिश्र): इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस (आईआईएससी), बंगलुरु के शोधकर्ताओं ने आँखों की हरकत से नियंत्रित कंप्यूटर इंटरफेस आधारित रोबोटिक बाँह बनायी है। इसे बनाने वाले शोधकर्ताओं का कहना है कि यह स्पीच एवं मोटर अक्षमता से ग्रस्त लोगों के लिए मददगार हो सकती है।

स्पीच एवं मोटर अक्षमता (Speech and motor disability); सेरेब्रल पाल्सी (cerebral palsy definition) जैसे डिस्ऑर्डर के कारण होने वाली एक शारीरिक स्थिति है। इससे ग्रस्त लोगों के लिए कई तरह के शारीरिक कार्यों को अंजाम देना मुश्किल होता है। इन कार्यों में जॉयस्टिक, माउस या ट्रैकबॉल जैसे उपकरणों का संचालन या फिर स्पीच रिकग्निशन सिस्टम का उपयोग शामिल है। शोधकर्ताओं का कहना है कि निगाहों से नियंत्रित यह कंप्यूटर इंटरफेस उन्हें विभिन्न कार्यों को करने में मदद कर सकता है।

आईआईएससी द्वारा जारी बयान में बताया गया है कि यह एक नॉन इन्वेसिव इंटरफेस है, जो आँखों की हरकत से संचालित हेड-माउंटेड सिस्टम युक्त दूसरे उपकरणों से अलग है। वेबकैम और कंप्यूटर से संचालित इस इंटरेफेस को आईआईएससी के सेंटर फॉर प्रोडक्ट डिजाइन ऐंड मैन्यूफैक्चरिंग के शोधकर्ताओं ने विकसित किया है। इस इंटरफेस को बनाने के लिए आईआईएससी के शोधकर्ताओं ने चेन्नई की संस्था विद्यासागर के स्पीच एवं मोटर अक्षमता से ग्रस्त छात्रों के साथ मिलकर काम किया है।

इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे आईआईएसी के शोधकर्ता प्रोफेसर प्रदीप्ता बिस्वास ने बताया कि “सेलेब्रल पाल्सी से ग्रस्त अधिकतर छात्र निगाहों की अनियंत्रित गतिविधि के कारण अपने दृश्य क्षेत्र (विजुअल फील्ड) में किसी एक बिंदु पर ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते। वे दृश्य क्षेत्र के हिस्सों को समान रूप से नहीं देख पाते।” उपयोगकर्ताओं के चेहरे की लाइव वीडियो फीड के विश्लेषण के लिए शोधकर्ताओं ने कंप्यूटर विज़न और मशीन लर्निंग एल्गोरिद्म का उपयोग किया है। इसे ऑग्मेंटेड रियलिटी एप्लीकेशन से जोड़ा गया है, ताकि उपयोगकर्ता रोबोटिक बांह के उपयोग से चीजों को उठाने या फिर रखने जैसे काम कर सकें।

निगाहों से नियंत्रित इस रोबोटिक बांह का मुख्य उपयोग स्पीच एवं मोटर अक्षमता से गंभीर रूप से ग्रस्त लोगों का फैब्रिक प्रिंटिंग जैसे कार्यों के जरिये पुनर्वास करना है। इस तरह के कामों में उन्हें मदद की जरूरत पड़ती है, क्योंकि ऐसे काम वे बिना मदद नहीं कर पाते हैं।

रोबोटिक बांह के उपयोग से स्पीच एवं मोटर अक्षमता से ग्रस्त लोग आँखों की हरकत से मैकेनिकल कार्य कर सकते हैं, जिससे उन्हें हैंडीक्राफ्ट जैसे कामों में मदद मिल सकती है।

इस इंटरफेस को चेन्नई की विद्यासागर संस्था में लगाया गया है। प्रोफेसर बिस्वास ने कहा है कि इंटरफेस और रोबोटिक बांह का परीक्षण एवं मूल्यांकन अंतिम उपयोगकर्ताओं के साथ करना इस अध्ययन का एक अहम योगदान है। उनका कहना है कि इस उपकरण में सुधार करके इसका उपयोग स्पीच एवं मोटर अक्षमता के शिकार लोगों की ई-लर्निंग में किया जा सकता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि यह इंटरफेस भविष्य की तकनीकों के विकास की दिशा में एक कदम है, जो यह सुनिश्चत कर सकती हैं कि शैक्षणिक प्रशिक्षण और कामकाजी जिंदगी में शारीरिक अक्षमता बाधा न बने। प्रोफेसर बिस्वास कहते हैं कि यह सिस्टम ऑटोमोटिव एवं ऐरोनॉटिकल एप्लीकेशन्स के साथ-साथ स्मार्ट मैन्यूफैक्चरिंग में उपयोग होने वाले कोलेबोरेटिव रोबोट्स के विकास में उपयोगी हो सकता है।

(इंडिया साइंस वायर)

साइबर क्राइम्स से कैसे करें खुद का बचाव?

Cyber security tutorial

साइबर का अर्थ कंप्यूटर होता है और यही कारण है कि साइबर क्राइम को कंप्यूटर क्राइम के नाम से भी जाना जाता है | Cyber means computer and this is why cybercrime is also known as computer crime.

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किसी प्रयोक्ता (user) के कंप्यूटर से इन्टरनेट की मदद से उनके व्यक्तिगत डाटा की चोरी (Theft of personal data) से लेकर बौद्धिक संपदा के कॉपीराइट का गैरकानूनी उपयोग (Unlawful use of copyright of intellectual property), चाइल्ड पोर्नोग्राफी (Child pornography), बुल्ल्यिंग (डराना और ब्लैकमेलिंग), वित्तीय धोखाधड़ी से लेकर कई अन्य अपराध भी साइबर क्राइम (cybercrime) के अंतर्गत आते हैं। इसके अतिरिक्त स्पैम मेल के द्वारा अपने वस्तु और सेवा का प्रमोशन करना, फिशिंग के माध्यम से किसी प्रयोक्ता (user) के प्राइवेट डाटा में सेंध लगा कर बैंकों से धन की निकासी करना, ड्रग ट्रैफिकिंग करने के अतिरिक्त कई अन्य गैरकानूनी कार्य भी साइबर अपराध की केटेगरी में सम्मिलित की जाती हैं।

साइबर क्राइम से बचने के लिए सावधानियां | Precautions to avoid cybercrime

आज हम तकनीकी उन्नति (Technological advancement) के उस चरण पर पहुँच चुके हैं जहाँ पर हम इन्टरनेट और कंप्यूटर के बिना अपना काम बिलकुल नहीं चला सकते हैं। लिहाजा यह अनिवार्य है कि जब हम कंप्यूटर और इन्टरनेट का प्रयोग कर रहे हों तो हमें कुछ ऐसी सावधानियों का अवश्य ध्यान रखना चाहिए जिससे हम साइबर क्राइम की घटनाओं से खुद की रक्षा कर पायें।

अपने कंप्यूटर के लिए एक मजबूत पासवर्ड सबसे अनिवार्य | A strong password for your computer is the most essential

वैसे तो यह सामान्य – सी बात है कि जब आप अपने कंप्यूटर पर इन्टरनेट चला रहे हों तो आप अपने पीसी को एक मजबूत पासवर्ड से सुरक्षित कर लें। जब कंप्यूटर पासवर्ड से सुरक्षित हो जाता है तो इसका इस्तेमाल कोई अन्य व्यक्ति गलत कार्य के लिए नहीं कर सकता है और न ही कोई अन्य व्यक्ति आपके कंप्यूटर से कोई निजी जानकारी चुरा सकता है।

इस बात का ध्यान रखें कि जब भी आप अपने कंप्यूटर को किसी पासवर्ड से सिक्योर करें तो पासवर्ड हमेशा ही मजबूत होना चाहिए। पासवर्ड का क्रिएशन अक्षर, चिन्ह और अंक का मेल (Combining letters, symbols and numbers) हो तो यह बहुत प्रभावशाली माना जाता है।

इसके साथ-साथ आप पासवर्ड के लिए लोअर केस लेटर्स और अपर केस लेटर्स का भी प्रयोग कर सकते हैं।

यदि आप एक से अधिक एकाउंट्स का इस्तेमाल कर रहे होते हैं तो आपको उन सब एकाउंट्स के लिए एक कॉमन पासवर्ड का इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसी स्थिति में साइबर क्राइम का खतरा बढ़ जाता है।

आप अपने मोबाइल नंबर, वाहन नंबर, हाउस नंबर, जन्मतिथि जैसे अंकों का भी प्रयोग अपने पासवर्ड के लिए नहीं करें क्योंकि इस प्रकार के पासवर्ड का अनुमान करना कठिन कार्य नहीं होता है।

सोशल मीडिया के प्रयोग के बारे में आपकी सतर्कता जरूरी | Your alertness about the use of social media is necessary

सोशल मीडिया के रूप में फेसबुक, ट्विटर, ब्लॉग इत्यादि का प्रयोग करते समय हमें सावधान रहने की जरूरत है। सोशल मीडिया की इन साइट्स पर कुछ भी अपलोड करने पर वे सभी दुनिया भर के यूजर्स के लिए हमेशा के लिए पोस्ट हो जाते हैं। इसीलिए हमेशा इस बात की सावधानी रखनी चाहिए कि हम ऐसा कुछ भी पोस्ट नहीं करें जो हमारे लिए बेहद निजी और संवेदनशील जानकारी (Sensitive information) वाला हो और जिनके लीक हो जाने पर हमें किसी खतरे का सामना करना पड़े।

संवेदनशील और व्यक्तिगत जानकारी का संरक्षण आवश्यक है | Protection of sensitive and personal information is necessary 

कई बार हमें ऑनलाइन शॉपिंग (shopping online) के अतिरिक्त इन्टरनेट बैंकिंग के इस्तेमाल के लिए कई व्यक्तिगत जानकारियां (Many personal information for the use of internet banking) शेयर करनी होती हैं, खासकर प्रयोक्ता (user) के एड्रेस, ईमेल और मोबाइल नंबर, बैंक्स अकाउंट नंबर इत्यादि की प्राइवेसी के बारे में ध्यान रखने की जरूरत है।

यदि आपके ईमेल इनबॉक्स में ऐसे मेल्स आते हैं जिसकी स्पेलिंग और ग्रामर शुद्ध नहीं है तो यह मान लेना चाहिए कि ऐसे ईमेल फेक हैं और इसीलिए इन सभी मेल्स को एंटरटेन नहीं करना चाहिए। बेहतर हो कि इस प्रकार के मेल्स को कभी भी खोलें ही नहीं।

ईमेल आईडी को भी हैक होने से बचाएं | Prevent email id from being hacked

फ़ास्ट तकनीक और इन्टरनेट के तेजी से बढ़ते प्रयोग के वर्तमान युग में ईमेल आइडी का प्रचलन अब एक सामान्य-सी बात हो गयी है। लेकिन प्रयोक्ता (user) के द्वारा अपने ईमेल आइडी को सिक्योर और सेफ रखने के बारे में लापरवाही बड़ी चिंता का विषय है, क्योंकि ईमेल आइडी केवल कम्युनिकेशन और कॉरेस्पोंडेंस के एक आधुनिक माध्यम के रूप में ही कार्य नहीं करता है बल्कि यह कई सेंसिटिव डाटा और प्राइवेट इनफार्मेशन को भी सुरक्षित रखता है। ऐसी स्थिति में ईमेल के हैक हो जाने पर प्रयोक्ता (user) के डाटा और इम्पोर्टेन्ट इनफार्मेशन की प्राइवेसी और सिक्यूरिटी खतरे में पड़ सकती है। इसीलिए अपने ईमेल आइडी को हैक होने से बचाने के लिए सबसे पहले एक मजबूत पासवर्ड की बड़ी आवश्यकता होती है।

आइये देखें कि अपने ईमेल आइडी को सुरक्षित खने के लिए और इसे किसी हैकर से बचाने के लिए क्या जरूरी कदम उठा सकते हैं- Let us see what important steps can be taken to keep your email id secure and safe and to protect it from a hacker –

रिकवरी डिटेल

जिस ईमेल आइडी का आप यूज कर रहे हैं उसे अपने मोबाइल नंबर और अन्य ईमेल आइडी के द्वारा सपोर्ट कर देने से ईमेल आइडी को रिकवर करने में काफी मदद मिलती है। सिक्यूरिटी के लिए कुछ ऐसे प्रश्न भी सेट करना चाहिए जिनके आंसर आसानी से कोई हैकर अनुमान नहीं लगा पाए।

रेगुलर यूज करते रहें अपने ईमेल आईडी को | Keep using your email ID regularly

कई बार ऐसा देखा गया है कि कोई प्रयोक्ता (user) अपने ईमेल आइडी को रेगुलरली यूज नहीं करते हैं। ऐसी स्थिति में ईमेल आइडी के हैक हो जाने पर प्रयोक्ता (user) को इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है और यूजर की डाटा की प्राइवेसी और सिक्यूरिटी खतरे में पड़ जाती है। इसीलिए यह जरूरी है कि अपने ईमेल आइडी को नियमित रूप से लॉग – इन करते रहें।

पब्लिक वाई-फाई के प्रयोग से सावधान रहें | Beware of using public Wi-Fi

अपने ईमेल आइडी को लॉग – इन करने के लिए पब्लिक वाई-फाई का यूज करना भी खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि ये फ्री या पब्लिक वाई-फाई ट्रिक्स से भरे होते हैं। पब्लिक वाई-फाई के यूज से कोई भी हैकर यूजर के ईमेल आइडी के कई इम्पोर्टेन्ट इनफार्मेशन में सेंध मार सकता है और उसे हैक कर सकता है। लिहाजा पब्लिक वाई-फाई को यूज करने से बचने की जरुरत है।

कई सुरक्षा लेयर का उपयोग करें | Use multiple security

मल्टीप्ल सिक्यूरिटी का अर्थ यह है कि अपने ईमेल आइडी को डबल ऑथेंटिकेशन से सिक्योर करें। प्राय: सभी ईमेल सर्विस प्रोवाइड करने वाली कंपनियां मल्टीप्ल सिक्यूरिटी का ऑप्शन उपलब्ध कराती हैं। इसके अंतर्गत सिक्यूरिटी सेटिंग्स में मोबाइल नंबर को रजिस्टर करना होता है जिसके परिणामस्वरूप प्रत्येक लॉग – इन पर यूजर के मोबाइल पर वेरिफिकेशन कोड भेजा जाता है जिसको फीड करने के बाद ही ईमेल आइडी लॉग – इन हो पाता है।

अपरिचित ईमेल और अटैचमेंट को ओपन नहीं करें | Do not open unfamiliar emails and attachments

प्राय: हर एक ईमेल आइडी यूजर के ईमेल इनबॉक्स में कई ईमेल्स आते हैं जिनके बारे में प्रयोक्ता (user) को कोई जानकारी नहीं होती है और जो प्रयोक्ता (user) से बिलकुल संबंधित नहीं होती हैं। इस प्रकार के ईमेल अटैचमेंट या इनबॉक्स को बिलकुल ओपन नहीं करें क्योंकि ऐसा करने पर आपके कंप्यूटर में कुछ मैलवेयर इंस्टाल हो सकते हैं जो हैकर को आपके ईमेल आइडी के बारे में सीक्रेट इनफार्मेशन भेज सकता है और आपका ईमेल आइडी हैक हो सकता है।

लॉगआउट करना न भूलें | Don’t forget to logout

जब भी आप अपने ईमेल आइडी को लॉग – इन करें तो इसे लॉग-आउट करना बहुत जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर जब कोई दूसरा प्रयोक्ता (user) आपके कंप्यूटर को प्रयोग करेगा तो आपका ईमेल आइडी बिना पासवर्ड के खुल जायेगा और आपकी महत्वपूर्ण इनफार्मेशन हैक कर लिए जायेंगे। इसके अतिरिक्त ईमेल के लॉगआउट करने के बाद इसकी हिस्ट्री भी क्लियर कर दें।

पासवर्ड काफी मजबूत रखें | Keep password strong

सच पूछें तो अपने ईमेल आइडी को सिक्योर और सेफ रखने के लिए एक मजबूत पासवर्ड सबसे बड़ी और पहली शर्त है। मजबूत पासवर्ड बनाने के लिए आपको कई बातों को ध्यान में रखना चाहिए। सबसे पहली बात तो यह है कि यह कम से कम आठ डिजिट या लेटर्स से कम का नहीं होना चाहिए। अपने पासवर्ड में अल्फाबेट लेटर्स के साथ नुमेरल्स और सिम्बल्स का भी यूज करना चाहिए।

श्रीप्रकाश शर्मा

स्रोत – देशबन्धु