टाइप 1 डायबिटीज क्या है | What is type 1 diabetes?

Diabetes Care

टाइप 1 डायबिटीज क्या है What is type 1 diabetes?

मधुमेह यानी डायबिटीज एक ऐसी बीमारी है जो तब होती है जब आपका रक्त ग्लूकोज, जिसे रक्त शर्करा भी कहा जाता है, बहुत अधिक हो जाता है। रक्त ग्लूकोज आपकी ऊर्जा का मुख्य स्रोत है और यह आपके द्वारा खाए गए भोजन से आता है। इंसुलिन, एक हार्मोन होता है जो अग्न्याशय द्वारा बनाया जाता है। इंसुलिन भोजन से ग्लूकोज को आपकी कोशिकाओं में ऊर्जा के लिए उपयोग करने में मदद करता है। कभी-कभी आपका शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बनाता है – या अच्छी तरह से इंसुलिन का उपयोग नहीं करता है, तब ग्लूकोज आपके रक्त में रहता है और आपकी कोशिकाओं तक नहीं पहुंचता है। एक अन्य हार्मोन, ग्लूकागन, (hormone, glucagon,) रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने के लिए इंसुलिन के साथ काम करता है।

टाइप 1 मधुमेह वाले अधिकांश लोगों में, शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली, जो आम तौर पर संक्रमण से लड़ती है, अग्न्याशय में उन कोशिकाओं पर हमला करके उनको नष्ट करती है जो इंसुलिन बनाती हैं। इंसुलिन के बिना, ग्लूकोज आपकी कोशिकाओं में नहीं जा सकता है और आपकी रक्त शर्करा सामान्य से ऊपर उठ जाती है। टाइप 1 मधुमेह वाले लोगों को जीवित रहने के लिए हर दिन इंसुलिन लेने की आवश्यकता होती है।

टाइप 1 डायबिटीज विकसित होने की अधिक आशंका किसे है? Who is more likely to develop type 1 diabetes?

टाइप 1 मधुमेह आम तौर पर बच्चों और युवा वयस्कों में होता है, हालांकि यह किसी भी उम्र में हो सकता है। यदि आपके माता-पिता अथवा सहोदर को डाइबिटीज है तो आपमें भी टाइप 1 डायबिटीज विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।

टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण क्या हैं? What are the symptoms of type 1 diabetes?

टाइप 1 डायबिटीज के लक्षण गंभीर होते हैं और आमतौर पर कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों अचानक प्रकट हो सकते हैं। लक्षण में शामिल हो सकते हैं-

  • प्यास और पेशाब का बढ़ना
  • भूख में वृद्धि
  • धुंधली दृष्टि
  • थकान
  • अस्पष्टीकृत वजन घटना (unexplained weight loss)

कभी-कभी टाइप 1 डायबिटीज के पहले लक्षण, जीवन के लिए खतरनाक स्थिति जिसे डायबिटिक केटोएसिडोसिस (डीकेए)- diabetic ketoacidosis (DKA) कहा जाता है, के संकेतक होते हैं।

डीकेए के कुछ लक्षणों में शामिल हैं

  • सांस जिसमें बदबू आती है
  • सूखी या दमकती त्वचा
  • उलटी अथवा मितली
  • पेट दर्द
  • साँस लेने में कठिनाई
  • ध्यान देने में परेशानी या उलझन महसूस करना

डीकेए गंभीर और खतरनाक है। यदि आपमें या आपके बच्चे में डीकेए के लक्षण हैं, तो तुरंत अपने स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर से संपर्क करें, या निकटतम अस्पताल के आपातकालीन कक्ष में जाएं।

टाइप 1 डायबिटीज किन कारणों से होता है? What causes type 1 diabetes?

विशेषज्ञों का मानना है कि टाइप 1 डायबिटीज जीन और वातावरण में उपस्थित कारकों, जैसे वायरस, जो रोग को ट्रिगर कर सकते हैं, के कारण होता है। शोधकर्ता अध्ययन के माध्यम से टाइप 1 मधुमेह के कारणों को इंगित करने के लिए काम कर रहे हैं।

स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर टाइप 1 मधुमेह का निदान कैसे करते हैं? How do healthcare professionals diagnose type 1 diabetes?

स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर आमतौर पर टाइप 1 मधुमेह के लिए लोगों का परीक्षण करते हैं अगर उनके स्पष्ट-कट मधुमेह के लक्षण (clear-cut diabetes symptoms) हैं। स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर अक्सर टाइप 1 मधुमेह का निदान करने के लिए यादृच्छिक प्लाज्मा ग्लूकोज (आरपीजी)- random plasma glucose (RPG) test परीक्षण का उपयोग करते हैं। यह रक्त परीक्षण एक समय में आपके रक्त शर्करा के स्तर को मापता है। कभी-कभी स्वास्थ्य पेशेवर ए 1 सी रक्त परीक्षण (A1C blood test ) का भी उपयोग करते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि किसी को उच्च रक्त शर्करा (high blood glucose) कितने समय से है।

भले ही ये परीक्षण इस बात की पुष्टि कर सकते हैं कि आपको मधुमेह है, परन्तु वे यह नहीं पहचान सकते कि आपको पास किस प्रकार का मधुमेह है। डायबिटीज का उपचार इस बात पर निर्भर करता है कि आपको कैसा मधुमेह है। इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण होता है कि आपको टाइप 1 मधुमेह है अथवा टाइप 2 मधुमेह।

यह पता लगाने के लिए कि क्या आपका मधुमेह टाइप 1 है, आपके स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर आपके रक्त को कुछ ऑटोएंटिबॉडी के लिए परीक्षण कर सकते हैं। ऑटोएंटिबॉडी ऐसे एंटीबॉडी होते हैं जो गलती से आपके स्वस्थ ऊतकों और कोशिकाओं पर हमला करते हैं। कुछ प्रकार के ऑटोएंटिबॉडी की उपस्थिति टाइप 1 में आम होती है लेकिन टाइप 2 मधुमेह में नहीं।

क्योंकि टाइप 1 डायबिटीज आनुवंशिक हो सकता है, इसलिए आपके स्वास्थ्य देखभाल पेशेवर आपके परिवार के सदस्यों का भी ऑटोएंटिबॉडी का परीक्षण कर सकते हैं।

टाइप 1 डायबिटीज़ ट्रायलनेट (Type 1 diabetes TrialNet), एक अंतरराष्ट्रीय शोध नेटवर्क है, जो रोग से पीड़ित लोगों के परिवार के सदस्यों को ऑटोएंटिबॉडी परीक्षण प्रदान करता है। मधुमेह के लक्षणों के बिना भी ऑटोएंटिबॉडी की उपस्थिति का मतलब है कि  परिवार के सदस्यों में टाइप 1 मधुमेह विकसित होने की अधिक आशंका है। यदि आपके किसी भाई या बहन, बच्चे को या माता-पिता को टाइप 1 मधुमेह है, तो आपको एक ऑटोएन्टीबॉडी परीक्षण करवाना चाहिए। 20 वर्ष या उससे कम आयु के लोग जिनके चचेरे भाई-बहनों, चाचा-चाची, भतीजा-भतीजी या दादा-दादी को टाइप 1 डायबिटीज है, उन्हें भी ऑटोएन्टीबॉडी परीक्षण करवाना चाहिए।

टाइप 1 मधुमेह के इलाज के लिए किन दवाओं की आवश्यकता है? What medicines do I need to treat my type 1 diabetes?

यदि आपको टाइप 1 मधुमेह है, तो आपको इंसुलिन लेना चाहिए क्योंकि आपका शरीर अब इस हार्मोन को नहीं बनाता है। विभिन्न प्रकार के इंसुलिन अलग-अलग गति से काम करना शुरू करते हैं, और प्रत्येक के प्रभाव अलग-अलग अवधि के होते हैं।

आपको एक से अधिक प्रकारों का उपयोग करने की आवश्यकता हो सकती है। आप कई तरीकों से इंसुलिन ले सकते हैं। सामान्य विकल्पों में एक सुई और सिरिंज, इंसुलिन पेन, या इंसुलिन पंप शामिल हैं। कुछ लोग जिन्हें अकेले इंसुलिन के साथ अपने रक्त शर्करा के लक्ष्य तक पहुंचने में परेशानी होती है, उन्हें एक और प्रकार की मधुमेह दवा लेने की आवश्यकता हो सकती है जो इंसुलिन के साथ काम करती है, जैसे कि प्राम्लिनटाइड (pramlintide)। इंजेक्शन द्वारा दिया जाने वाला प्राम्लिंटाइड खाने के बाद रक्त शर्करा के स्तर को बहुत अधिक जाने से रोकने में मदद करता है। हालाँकि, टाइप 1 मधुमेह वाले कुछ लोग ही प्राम्लिंटाइड लेते हैं।

एक अन्य मधुमेह दवा, मेटफॉर्मिन (diabetes medicine, metformin,), आपको इंसुलिन की मात्रा को कम करने में मदद कर सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि करने के लिए अधिक अध्ययन की आवश्यकता है। शोधकर्ता अन्य मधुमेह की गोलियों का भी अध्ययन कर रहे हैं जो टाइप 1 मधुमेह वाले लोग इंसुलिन के साथ ले सकते हैं।

यदि आप इंसुलिन लेते हैं और यह आपके भोजन या शारीरिक गतिविधि के साथ आपकी खुराक से मेल नहीं खाता है तो हाइपोग्लाइसीमिया या निम्न रक्त शर्करा (Hypoglycemia, or low blood sugar) हो सकता है। गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया खतरनाक हो सकता है और तुरंत इसका इलाज किया जाना चाहिए।

टाइप 1 मधुमेह का प्रबंधन कैसे करें ? How to manage type 1 diabetes?

इंसुलिन और आपके द्वारा उपयोग की जाने वाली किसी भी अन्य दवाओं के साथ, आप प्रत्येक दिन अपनी देखभाल करके अपने मधुमेह का प्रबंधन कर सकते हैं।

अपने मधुमेह भोजन योजना के बाद, शारीरिक रूप से सक्रिय होकर (being physically active) और अपने रक्त शर्करा की जांच करना (checking your blood glucose) अक्सर कुछ ऐसे तरीके हैं जिनसे आप अपना ख्याल रख सकते हैं।

यदि आपको मधुमेह है और आप गर्भधारण की योजना बना रही हैं, तो गर्भवती होने से पहले अपने रक्त शर्करा के स्तर को अपने लक्ष्य सीमा में लाने का प्रयास करें।

टाइप 1 डायबिटीज वाले लोगों में कौन सी स्वास्थ्य समस्याएं विकसित हो सकती हैं? What health problems can people with type 1 diabetes develop?

समय के साथ, उच्च रक्त शर्करा से निम्न समस्याएं हो सकती हैं –

  • दिल की बीमारी heart disease
  • आघात stroke
  • गुर्दे की बीमारी kidney disease
  • आँखों की समस्या eye problems
  • दंत रोग dental disease
  • नस की क्षति nerve damage
  • पैरों की समस्या foot problems
  • डिप्रेशन depression
  • स्लीप एप्निया sleep apnea

यदि आपको टाइप 1 मधुमेह है, तो आप अपने रक्त शर्करा, रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल का प्रबंधन करके और अपनी स्वयं की देखभाल योजना का पालन करके मधुमेह की स्वास्थ्य समस्याओं को रोकने या देरी करने में मदद कर सकते हैं।

नोट – यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। यह समाचारों में उपलब्ध सामग्री के अध्ययन के आधार पर जागरूकता के उद्देश्य से तैयार की गई अव्यावसायिक रिपोर्ट मात्र है। आप इस समाचार के आधार पर कोई निर्णय कतई नहीं ले सकते। स्वयं डॉक्टर न बनें किसी योग्य चिकित्सक से सलाह लें।)

जानकारी का स्रोत – The National Institute of Diabetes and Digestive and Kidney Diseases (संबद्ध – U.S. Department of Health and Human Services

माले का नागरिकता संशोधन विधेयक व एनआरसी के खिलाफ प्रतिरोध दिवस आज

CPI ML

माले का नागरिकता संशोधन विधेयक व एनआरसी के खिलाफ प्रतिरोध दिवस आज

CPI (ML)’s protest today against citizenship amendment bill and NRC

लखनऊ, 10 दिसंबर। भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माले) केंद्रीय कैबिनेट द्वारा पारित नागरिकता संशोधन विधेयक– Citizenship Amendment Bill (सीएबी) और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर – National citizenship register (एनआरसी) को देश स्तर पर लागू करने की केंद्र की कोशिश के खिलाफ मानवाधिकार दिवस 10 दिसंबर को  देशव्यापी प्रतिरोध दिवस मनाएगी।

यह जानकारी देते हुए पार्टी के राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल के माध्यम से आरएसएस के हिन्दू राष्ट्र के एजेण्डे (RSS’s agenda of Hindu nation) को पिछले दरवाजे से लागू कराने की कोशिश की जा रही है। यह संविधान विरोधी, गरीब विरोधी व साम्प्रदायिक विधेयक है।

NRC being implemented in Assam has taken the form of humanitarian disaster

उन्होंने कहा कि असम में लागू किया जा रहा एनआरसी मानवीय आपदा का रूप ले चुका है, जहां 19 लाख से भी ज्यादा लोगों पर नागरिकता विहीन होने की तलवार लटक रही है। इनमें से कइयों की असम के डिटेंशन कैम्पों में मौतें हो चुकी हैं। अब एनआरसी रूपी आफत को देश भर में फैलाने की केंद्र की योजना है। इसके लिए असम की तर्ज पर डिटेंशन कैम्प पूरे देश में बनेंगे, जहां संवैधानिक अधिकारों से महरूम किये गए लोगों को नारकीय स्थितियों में रहने के लिए मजबूर किया जाएगा।

Attack on the country’s constitution and secularism

माले नेता ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल में मात्र तीन पड़ोसी देशों – पाकिस्तान, बांग्लादेश व अफगानिस्तान – के गैर-मुस्लिम छह धर्मों के उत्पीड़ित शरणार्थियों को नागरिकता देने के लिए धार्मिक व क्षेत्रीय पहचान को आधार बनाया गया है, जो देश के संविधान व धर्मनिरपेक्षता पर हमला है। इसका असल उद्देश्य तो भारतीय नागरिकता की परिभाषा में से मुसलमानों को बाहर करना है।

उन्होंने कहा कि एनआरसी के कारण हर भारतीय की नागरिकता खतरे में पड़ गई है। यह गरीबों की नागरिकता पर हमला करने वाला एक हथियार है। जो गरीब अपनी गरीबी का सबूत तक नहीं दे पाने के चलते बीपीएल सूची तक में जगह नहीं पाते वे भला इस बात के कागजात और सबूत कहां से लायेंगे जिससे प्रमाणित हो सके कि उनके पूर्वज 1951 में भारत के नागरिक थे।

माले राज्य सचिव ने कहा कि यह अलग बात है कि असम में लागू एनआरसी भाजपा पर ही भारी पड़ गया है, क्योंकि इसके जरिये जो साम्प्रदायिक विभाजन वह हासिल करना चाहती थी, उसके उलट एनआरसी के खिलाफ वहां हिन्दुओं व मुसलमानों की एकता बन गयी है। भाजपा ने खुद इस बात को माना है कि पश्चिम बंगाल में हाल के उपचुनावों में एनआरसी के खिलाफ बनी एकजुटता के चलते उसे वोटों का नुकसान हुआ।

माले नेता ने कहा कि इसीलिए अब मोदी-शाह की जोड़ी सोच रही है कि नागरिकता संशोधन बिल लाकर एनआरसी के खिलाफ बनी एकता को तोड़ा जा सकता है, क्योंकि जिन हिन्दुओं के नाम नागरिकता रजिस्टर से बाहर रह जायेंगे उनसे कहा जायेगा कि नागरिकता संशोधन बिल के रास्ते से उन्हें एनआरसी में शामिल कर लिया जायेगा। इसलिए एनआरसी से पहले नागरिकता संशोधन बिल को पारित करने की जल्दी है।

राज्य सचिव ने कहा कि ‘गैरकानूनी शरणार्थियों’ जैसी कोई समस्या अपने देश में है ही नहीं। इस बात का कोई सबूत नहीं है कि भारत में भारी पैमाने पर ‘घुसपैठिये’ घुसे हुए हैं।

उन्होंने कहा कि सही बात यह है कि मोदी-शाह की सरकार ने अर्थव्यवस्था, नौकरियों और पूरे समाज को तबाह कर दिया है, जिसके कारण देश के लोग बेरोजगारी और वंचना से बुरी तरह परेशान हैं, न कि ‘बगैर कागजात के यहां आये घुसपैठियों’ की वजह से। इसीलिए भारत के धर्मनिरपेक्ष संविधान को बचाने के लिए नागरिकता रजिस्टर और नागरिकता संशोधन बिल को हर हाल में रोकने की जरूरत है।

भारत-पाक की जेलों में बंद विदेशी कैदियों को रिहा करने की मांग

Prof. Bhim Singh

नई दिल्ली, 9 दिसम्बर, 2019 : स्टेट लीगल एड कमेटी के कार्यकारी चेयरमेन प्रो. भीम सिंह की अध्यक्षता में नई दिलली में एक बैठक आयोजित की गयी, जिसमें भारत और पाकिस्तान पर जोर दिया गया कि जो पाकिस्तानी भारतीय जेलों में और भारतीय पाकिस्तानी जेलों में तीन साल से ज्यादा जेल काट चुके हैं, उन सभी कैदियों को रिहा किया जाय।

सुप्रीम कोर्ट भारत सरकार को निर्देश दे चुकी है कि उन सभी पाकिस्तानी कैदियों को, जो भारत की विभिन्न जेलों में अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, के लिए उपयुक्त ट्रायल और रिहाई के प्रबंध करे। यह भी दिलचस्प है कि भारत-पाक सरकारों ने उचित परामर्श देने के लिए भारत-पाक कैदियों के लिए लीगल कमेटी (Legal Committee for Indo-Pak Inmates) बनायी थी। स्टेट लीगल एड कमेटी ने महसूस किया कि 2015 से दोनों देशों की सरकारों ने कोई कार्रवाई नहीं की।

प्रो. भीम सिंह ने कहा कि उन पाकिस्तानी कैदियों की जो अपनी सजा पूरी कर चुके हैं, कr देश-वापिसी के लिए दी गयी दिशा-निर्देशों का पालन नहीं किया गया। दूसरी तरफ पाकिस्तान में बंद भारतीय कैदियों (Indian prisoners held in Pakistan) को भी भारत-पाक संयुक्त कंसलटैंट कमेटी की सिफारिशों के फायदे नहीं दिये गये।

Nearly 1000 Pakistanis released from Indian jails on Supreme Court intervention

प्रो. भीम सिंह ने कहा कि इससे सम्बंधित एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में 2005 से लम्बित है और सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप पर लगभग 1000 पाकिस्तानी भारतीय जेलों से रिहा हो चुके हैं। पांच वर्ष पहले भारत सरकार की तरफ से पेश हुए अधिवक्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया था कि अमृतसर की जेल में दिव्यांग कैदी हैं, लेकिन भारत सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद अमृतसर जेल में बंद गूंगे-बहरे कैदियों की रिहाई के लिए उचित कार्यवाही करने में भी विफल रही है।

प्रो. भीम सिंह ने भारतीय अधिवक्ताओं विशेष रूप से स्टेट लीगल एड कमेटी के साथ जुड़े अधिवक्ताओं श्री बी.एस. बिलौरिया, बंसी लाल शर्मा, डी.के गर्ग और सतीश विज का धन्यवाद किया। उन्होंने भारत और पाकिस्तान सरकारों से ज्वांइट लीगल कंसलटैंट कमेटियों को फिर पुनर्जीवित करने का आग्रह किया, जिससे कैदियों की विशेष रूप से उन कैदियों की रिहाई सम्भव हो सके, जो 14 वर्ष से ज्यादा जेलों में काट चुके हैं। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी अधिवक्ताओं की दावत पर पाकिस्तान दौरे के दौरान मुझे पाकिस्तान में वर्षा से गैरकानूनी रूप से बंद भारतीय कैदियों की दशा के बारे पता चला, जिन्हें भारत सरकार और विधि विभाग नजरअंदाज कर रहा है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान सरकार को कई पत्र लिखे जाने के बावजूद वहां बंद भारतीय कैदियों की संख्या और नामों के सम्बंध संतोषजनक जवाब नहीं मिला है।

भारतीय सरकार ने जेलों में पाकिस्तानी कैदियों का रक्षा और सुरक्षा के लिए कई उपाय किय हैं, जबकि पाकिस्तान में बंद भारतीय कैदियों के सम्बंध में इस तरह की कोई सूचना नहीं है।

प्रो. भीम सिंह ने विधि विभाग से अपील की कि भारत की विभिन्न जेलों में बंद पाकिस्तानी कैदियों की रिहाई के सम्बंध में सुप्रीम कोर्ट में लम्बित उनकी याचिका का विरोध न करे। उन्होंने पाकिस्तान सरकार से पाक जेलों में बंद भारतीय कैदियों की संख्या और नामों के सम्बंध में सूची जारी करने और स्टेट लीगल एड कमेटी के प्रतिनिधि को पाक जेलों में बंद भारतीय कैदियों से मुलाकात की अनुमति देने का आग्रह किया। उन्होंने भारत-पाक सरकारों से ज्वांइट लीगल एड कमेटी को पुनर्जीवित करने का आग्रह किया, जिससे भारत में बंद पाकिस्तानी कैदियों और पाक जेल में भारतीय कैंदियों की रिहाई का रास्ता प्रशस्त हो सके।

जहां बने थे अफजल गुरु के लिए मौत के फंदे वहीं बन रहे निर्भया कांड के दोषियों के लिए

hanging rope

निर्भया कांड के दोषियों के लिए बक्सर जेल में बन रहे मौत के फंदे

किसी समय फिलीपींस की मनीला जेल (Philippines Manila Jail) में तैयार होता था फांसी का फंदा (hanging rope), इसकी वजह से फांसी का फंदा जिस रस्सी से बनता है उसे मनीला कहा जाता है

1844 में अंग्रेजी हुकूमत ने बक्सर के केंद्रीय कारागार में फांसी के फंदा तैयार करने की फैक्टरी लगाई थी, तभी से देश में जो भी फांसी होती है इसी कारागार में कैदी ही फांसी का फंदा तैयार करते हैं

Buxar central jail is the only producer of hanging ropes in India

नई दिल्ली। हैदराबाद गैंगरेप के बाद आरोपियों का एनकाउंटर और उन्नाव गैंगरेप पीड़िता की जलाकर हत्या के बाद देश में मचे बवाल के बाद सात साल पहले वाले निर्भया कांड के दोषियों को फांसी देने की तैयारी (Preparations to hang the culprits of Nirbhaya incident) में सरकार लग गई है। देश ही नहीं विदेश के मीडिया में भी छाये रहे इस शर्मसार करने वाले कांड  के दोषियों को फांसी देने के लिए बिहार के बक्सर जेल में विशेष रस्सियां तैयार की जा रहीं हैं।

ज्ञात हो कि हैदराबाद गैंगरेप (Hyderabad gangrape) और उन्नाव प्रकरण को लेकर देश में मचे बवाल में निर्भया कांड में अभी तक दोषियों को फांसी न होने का मुद्दा मुख्य रहा। निर्भया कांड में न्याय में हो रही देरी के पीछे जल्लाद  का न होना बताया जा रहा था।

अब जब महिलाओं की सुरक्षा को लेकर देश में चल रहे आंदोलन में निर्भया कांड के दोषियों को सजा में देरी की बात आई तो देश के एममात्र जल्लाद पवन सिंह ने आगे बढ़कर कहा कि इन दोषियों को जल्द से जल्द फांसी होनी चाहिए।

इस बीच हिमाचल के अलावा दूसरे प्रदेशों से भी कई युवक फांसी देने के लिए जल्लाद बनने के लिए तैयार होने लगे। अब जब केंद्र सरकार को लगा कि अब निर्भया कांड में दोषियों का फांसी देन में देरी की तो उसका खामियाजा देश को भुगतना पड़ सकता है तो अब युद्ध स्तर पर दोषियों को फांसी देन की तैयारी शुरू होने लगी है।

क्या है निर्भया कांड

ज्ञात हो कि 16 दिसम्बर 2012 को देश की राजधानी दिल्ली में घटे निर्भया कांड ने देश को दुनिया भर में शर्मसार कर दिया था। उस रात दिल्ली की सड़क पर एक बस में अपने दोस्त के साथ घर जा रही एक युवती के साथ गैंगरेप की हैवानियत की गई थी। उसके बाद दोनों को सर्द रात में मरने के लिए सड़क किनारे फेंक दिया गया था। गैंगरेप के दोषियों की बर्बरता की शिकार हुई निर्भया की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।

यह मुद्दा लोकसभा और राज्यसभा दोनों में गर्माया था। दिल्ली के जंतर-मंतर पूरा बवाल मचा था। देश के राजनीतिक, सामाजिक संगठनों के अलावा सोशल एक्टिविस्टों और बुद्धिजीवियों ने एक सुर में इस कांड की भर्त्सना की थी तथा जल्द से जल्द न्याय की मांग की थी।

मामला ठंडा पड़ गया तो न्याय मिलने की अवधि भी खिंचती गई। अब सात साल से ऊपर इस कांड को हो गये हैं। अब महिलाओं की सुरक्षा को लेकर देश में मचे बवाल के बीच शासन-प्रशासन को इस कांड की याद आई है।

निर्भया की मां ने भी कई बार बेटी को न्याय दिलाने की मांग की है। तमाम दबाव के बबाद लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब यह मामला अपने अंजाम तक पहुंचता दिख रहा है। गैंगरेप व हत्या के इस मामले में दोषी मुकेश, पवन शर्मा, अक्षय ठाकुर और विनय शर्मा को फांसी देने की तैयारी तेजी से चल रही है।

यह अपने आप में दिलचस्प है कि इस बीच गृह मंत्रालय ने शुक्रवार को दोषी विनय शर्मा की राष्ट्रपति को भेजी दया याचिका खारिज करने की सिफारिश की तो विनय शर्मा ने दया याचिका इस आधार पर वापस करने की मांग की है कि वह उसकी ओर से अधिकृत नहीं है। इस पर उसके हस्ताक्षर ही नहीं हैं। अब जब फांसी के फंदे तैयार होने लगे हैं तो इन दोषियों का फांसी लगना तय है।

बक्सर जेल में बन रहे हैं मौत के फंदे : Hanging ropes are being made in Buxar jail

सात साल पहले हुए इस जघन्य कांड में अब न्याय को अंजाम मिलने की तैयारी शुरू हो गई है। कांड में दोषी करार चारों गुनाहगारों को बक्सर जेल में बने फंदे पर लटकाया जाएगा। मनीला रस्सी के नाम से मशहूर फांसी के लिए रस्सी को तैयार करने के लिए बक्सर केंद्रीय कारा को निर्देश मिल चुका है।

बक्सर जेल की बनी रस्सी से लटकाए गए थे अफजल व कसाब : Afzal and Kasab were hung from the rope made of Buxar jail:

देश में केवल बक्सर जेल में ही फांसी देने वाली खास रस्सी तैयार होती है। अंग्रेजी हकुमूत से कुख्यात रही इस जेल से बनी रस्सी से आतंकी कसाब व अफजल गुरु को भी फांसी पर लटकाया गया था।

देश में केवल बक्सर जेल में ही बनता मौत का फंदा :

CHARAN SINGH RAJPUT, चरण सिंह राजपूत, लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। यह भी अपने आप में दिलचस्प है कि जिस जेल में क्रांतिकारियों के लिए फांसी के फंदे बनते थे उसी जेल में आजाद भारत में दोषियों के लिए फांसी के फंदे तैयार होते हैं। यह अपने आप में इतिहास ही है कि देश में आजादी के पहले से अब तक जितनी फांसी दी गई हैं, उनमें बक्सर जेल में बनी मनीला रस्सी का ही इस्तेमाल हुआ है।

क्यों बोला जाता है मनीला रस्सी

दरअसल मनीला रस्सी इसे इसलिए बोला जाता है क्योंकि हमारे देश में रस्सी बनने से पहले यह रस्सी फिलीपिंस की मनीला जेल में बनती थी। 1844 ई. में अंग्रेज शासकों ने बक्सर केंद्रीय कारागार में मौत का फंदा तैयार करने की फैक्ट्री लगाई थी। यह भी अपने आप में दिलचस्प है कि देश में जब-जब मौत का फरमान जारी होता है तब-तब केंद्रीय कारा, बक्सर के कैदी ही मौत का फंदा तैयार करते हैं। इसे खास किस्म के धागों से तैयार किया जाता है।

चरण सिंह राजपूत की रिपोर्ट

यूपी पुलिस ने मायावती को दिया जवाब जंगलराज बीते दिनों की बात तो ट्विटराती बोले उन्नाव वाले दरिंदों को उड़ाओ तब पोस्ट करना श्रीमान जी……

Twitter

यूपी पुलिस ने मायावती को दिया जवाब जंगलराज बीते दिनों की बात तो ट्विटराती बोले उन्नाव वाले दरिंदों को उड़ाओ तब पोस्ट करना श्रीमान जी……

लखनऊ, 06 दिसंबर 2019. भाजपा राज में भले ही अपराध और अपराधी बढ़े हों, ए नकाउंटर्स पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल किए हों और यूपी के बारे में सख्त टिप्पणी की हो, पर एक बात जरूर हुई है कि प्रशासनिक मशीनरी का खुलेआम राजनीतिकरण हुआ है और सरकारी महकमे अब भाजपा के आनुषंगिक संगठनों की तरह व्यवहार कर रहे हैं।

दरअसल टाइम्स नाउ चैनल ने बसपा सुप्रीमो मायावती के हैदराबाद एनकाउंटर पर बयान (BSP supremo Mayawati’s statement on Hyderabad encounter) की खबर का वीडियो डालते हुए ट्वीट किया था, “मायावती कहती हैं, ‘यूपी पुलिस को हैदराबाद पुलिस से सीखना चाहिए’।“ (‘U.P police must learn from the Hyderabad police’, says Mayawati.)

इस पर यूपी पुलिस के सत्यापित ट्विटर हैंडल से इस ट्वीट का उत्तर देते हुए ट्वीट किया गया

“आंकड़े खुद लिए बोलते हैं। जंगल राज अतीत की बात है। अब नहीं है।

पिछले 2 वर्षों में 5178 पुलिस की कार्रवाई में 103 अपराधी मारे गए और 1859 घायल हुए।

17745 अपराधियों ने आत्मसमर्पण किया या जेल जाने के लिए अपनी खुद की बेल रद्द करा ली।

मुश्किल से राज्य के मेहमान।“

यूपी पुलिस के ट्वीट (Tweets of UP police) पर ट्विटराती ने ट्रोलिंग शुरू कर दी।

एक यूजर ने ट्वीट किया –

“उन्नाव वाले दरिंदों को उड़ाओ तब पोस्ट करना श्रीमान जी……”

एक अन्य यूजर ने कहा,

“महोदय उन्नाव केस के आरोपियो को भी ऐसे ही जला दो तो सारे पाप धुल जायेंगे हमे पता है आप लोग अच्छा काम कर रहे है लेकिन उन्नाव केस में असमर्थता ने एक बदनुमा दाग लगा दिया है खाकी पर।“

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा हैदराबाद ‘एनकाउंटर’ स्पष्ट रूप से फर्जी प्रतीत होता है

 

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा हैदराबाद ‘एनकाउंटर’ स्पष्ट रूप से फर्जी प्रतीत होता है

Justice Markandey Katju

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज ने कहा हैदराबाद एनकाउंटरस्पष्ट रूप से फर्जी प्रतीत होता है

नई दिल्ली, 06 दिसंबर 2019. सर्वोच्च न्यायालय के अवकाश प्राप्त न्यायाधीश जस्टिस मार्कंडेय काटजू (Justice Markandey Katju, retired Supreme Court judge) ने कहा है कि हैदराबाद एनकाउंटरस्पष्ट रूप से फर्जी प्रतीत होता है।

बता दें कि शुक्रवार की सुबह खबर मिली थी कि तेलंगाना पुलिस ने हैदराबाद में सामूहिक दुष्कर्म के बाद हत्या की शिकार हुई पशु चिकित्सक के सभी आरोपियों की उसी स्थान पर गोली मारकर हत्या कर दी, जहां उनकी बेटी की 27 नवंबर को सामूहिक दुष्कर्म व हत्या करने के बाद उसके शव को जला दिया गया था।

इस खबर से जुड़े हैश टैग #Encounter #hyderabadpolice #justiceforpriyanakareddy #JusticeForDisha माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर ट्रेंड करने लगे। उधर जस्टिस मार्कण्डेय काट्जू (Justice Markandey Katju) ने ट्वीट किया

“प्रकाश कदम बनाम रामप्रसाद विश्वनाथ गुप्ता (ऑनलाइन देखें) में मेरे सभापतित्व वाली एक सर्वोच्च न्यायालय की पीठ ने यह माना कि फर्जी एनकाउंटर ’के मामलों में संबंधित पुलिसकर्मियों को मृत्युदंड दिया जाना चाहिए। हैदराबाद ‘एनकाउंटर’ स्पष्ट रूप से फर्जी प्रतीत होता है।“

एक अन्य ट्वीट में जस्टिस काटजू ने जस्टिस एएन मुल्ला का सुप्रसिद्ध वक्तव्य ट्वीट करते हुए कहा,

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के जज जस्टिस आनंद नारायण मुल्ला ने एक फैसले में कहा था, “मैं  जिम्मेदारी के सभी अर्थों के साथ कहता हूं, पूरे देश में एक भी कानूनविहीन समूह नहीं है जिसका अपराध का रिकॉर्ड अपराधियों के संगठित गिरोह भारतीय पुलिस बल की तुलना में कहीं भी ठहरता हो।”

बता दें जस्टिस आनंद नारायण मुल्ला (ANAND NARAYAN MULLA), इलाहाबाद उच्च न्यायालय के एक प्रमुख न्यायाधीश थे व 4 वीं लोकसभा के सदस्य थे।

मुल्ला लखनऊ में पैदा हुए एक कश्मीरी पंडित थे। उनके पिता जगत नारायण मुल्ला प्रमुख वकील और लखनऊ विश्वविद्यालय के कुलपति थे। 1946 और 1952 के बीच, वह भारत-पाक ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष और 1954 और 1961 के बीच इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश थे।

कौन हैं मार्कंडेय काटजू?

अपने ऐतिहासिक फैसलों के लिए प्रसिद्ध रहे जस्टिस मार्कंडेय काटजू 2011 में सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त हुए उसके बाद वह प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन रहे। आजकल वह अमेरिका प्रवास पर कैलीफोर्निया में समय व्यतीत कर रहे हैं और सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय हैं और भारत की समस्याओं पर खुलकर अपने विचार व्यक्त कर रहे हैं।

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अपने नमक को कम करें, अपने जोखिम को कम करें

Health news

अपने नमक को कम करें, अपने जोखिम को कम करें

Lower Your Salt, Lower Your Risk

सभी को कार्य करने के लिए कुछ नमक या सोडियम क्लोराइड की आवश्यकता होती है। लेकिन, क्या आप जानते हैं कि आपके शरीर को ठीक से काम करने के लिए थोड़ी मात्रा में ही नमक की आवश्यकता होती है?

नमक दो खनिजों का एक संयोजन है – सोडियम और क्लोराइड

भोजन की पैकेजिंग पर दिखाई देने वाले पोषण तथ्यों के लेबल पर भोजन में नमक की मात्रा (amount of salt in a food) को “सोडियम” के रूप में सूचीबद्ध किया जाता है। आहार संबंधी दिशानिर्देश यह सलाह देते हैं कि अधिकांश वयस्क प्रति दिन 2300 मिलीग्राम से कम सोडियम खाना चाहिए। यह एक दिन में लगभग एक चम्मच टेबल सॉल्ट के बराबर होता है।

आपके शरीर को ठीक से काम करने के लिए कुछ सोडियम की आवश्यकता होती है।

सोडियम तंत्रिकाओं और मांसपेशियों के कार्य में मदद करता है। यह आपके शरीर में तरल पदार्थों के सही संतुलन को बनाए रखने में भी मदद करता है। आपके गुर्दे नियंत्रित करते हैं कि आपके शरीर में सोडियम कितना है।

यदि आपने बहुत अधिक नमक का सेवन किया है तो आपके गुर्दे इसे छुटकारा नहीं दे सकते हैं, ऐसी स्थिति में सोडियम आपके रक्त में बनता है। इससे उच्च रक्तचाप हो सकता है। उच्च रक्तचाप अन्य स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।

उच्च रक्तचाप हृदय रोग और स्ट्रोक के लिए आपके जोखिम को बढ़ा सकता है। खाद्य लेबल पढ़ने से आपको हर दिन खाने वाले सोडियम की मात्रा को मॉनिटर करने और कम करने में मदद मिल सकती है।

“Source: MedlinePlus, National Library of Medicine.” (Affiliated with  U.S. Department of Health and Human Services)

जानिए एक्स-रे, सीटी स्कैन या एमआरआई में क्या अंतर है?

ct scan mri

What is the difference between an x-ray, CT scan, or MRI?

क्या आपको कभी एक्स-रे, एमआरआई या अन्य मेडिकल स्कैन करवाना पड़ा है? क्या आप जानते हैं कि इन परीक्षणों में क्या शामिल है? या वे क्या कर सकते हैं? यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेस से संबद्ध राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (National Institutes of Health affiliated to U.S. Department of Health and Human Services) ने चिकित्सा स्कैन (medical scan) के विषय में विस्तार से बताया है।

Medical Scans Explained : A Look Inside the Body

मेडिकल स्कैन से डॉक्टरों को सिर के आघात से लेकर पैर के दर्द तक सभी चीजों का निदान करने में सहायता मिलती है। इमेजिंग तकनीकों के कई अलग-अलग प्रकार हैं। प्रत्येक अलग तरह से काम करता है।

कुछ प्रकार के इमेजिंग परीक्षण विकिरण का उपयोग करते हैं। अन्य ध्वनि तरंगों, रेडियो तरंगों या चुम्बकों का उपयोग करते हैं। अगर आपको या किसी प्रियजन को एक की आवश्यकता हो तो मेडिकल स्कैन कैसे काम करता है, इसके बारे में जानना आपको और अधिक सुकून दे सकता है। यह आपको यह जानने में भी मदद कर सकता है कि इमेजिंग टेस्ट लेने से पहले अपने स्वास्थ्य सेवा प्रदाता से क्या पूछना चाहिए।

X-Rays एक्स-रे

शरीर में अंदर देखने की पहली क्रांति एक्स-रे के साथ आई। एक्स-रे का उपयोग क्लिनिक में 120 से अधिक वर्षों से किया जा रहा है।

एनआईएच के एक इमेजिंग विशेषज्ञ डॉ. क्रिस कंदर्प (Dr. Kris Kandarpa, an imaging expert at NIH) कहते हैं, “एक्स-रे का उपयोग अभी भी हर दिन किया जाता है, क्योंकि वे बहुत कुछ कर सकते हैं।” वे हड्डियों को देखने और फेफड़ों में निमोनिया जैसे कुछ प्रकार के ऊतकों में समस्याओं को खोजने के लिए उपयोगी हैं।

एक्स-रे कैसे काम करता है How does x-ray work

एक्स-रे इमेजिंग आपके शरीर के एक हिस्से के माध्यम से एक ऊर्जा किरण को पारित करके काम करता है। आपकी हड्डियाँ या शरीर के अन्य अंग एक्स-रे बीम से कुछ को गुजरने से रोकेंगे। इससे बीम पर कब्जा करने के लिए उपयोग किए जाने वाले डिटेक्टरों पर उनकी आकृतियाँ दिखाई देती हैं। डिटेक्टर रेडियोलॉजिस्ट को देखने के लिए एक्स-रे को डिजिटल इमेज में बदल देता है।

एक्स-रे बीम विकिरण का उपयोग करते हैं (X-ray beams use radiation)। विकिरण ऊर्जा है जिसे अदृश्य कणों या तरंगों के रूप में जारी किया जाता है। बहुत बड़ी मात्रा में विकिरण के संपर्क में होने से कोशिकाओं और ऊतकों को नुकसान हो सकता है। यह आपके कैंसर के विकास के जोखिम को भी बढ़ा सकता है।

लेकिन आधुनिक एक्स-रे परीक्षण विकिरण की एक बहुत छोटी मात्रा का उपयोग करते हैं। लोग प्राकृतिक रूप से आकाश, चट्टानों और मिट्टी जैसे कई स्रोतों से विकिरण के संपर्क में आते हैं।

कंदर्प बताते हैं कि “एक छाती एक्स-रे आपको उतनी ही मात्रा में विकिरण देता है जितना कि आप अटलांटिक महासागर को पार करते समय एक विमान की उड़ान में पाते हैं” ।

CT Scans सीटी स्कैन
technology hospital medicine indoors
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सीटी स्कैन भी एक्स-रे बीम का उपयोग करते हैं। लेकिन 3 डी तस्वीर बनाने के लिए आपके पूरे शरीर पर बीम घूमते हैं। इन छवियों में एक नियमित एक्स-रे की तुलना में अधिक जानकारी होती है। स्कैन एक मिनट से भी कम समय में किया जा सकता है। यह आपातकालीन विभाग जैसी जगहों पर विशेष रूप से उपयोगी है। वहां, डॉक्टरों को तुरंत यह जानने की जरूरत होती है कि क्या मरीज की जान को खतरा है।

क्योंकि सीटी स्कैन एक सामान्य एक्स-रे की तुलना में अधिक एक्स-रे बीम का उपयोग करते हैं, वे अक्सर विकिरण की उच्च मात्रा देते हैं। मेयो क्लिनिक में सीटी इमेजिंग शोधकर्ता डॉ. सिंथिया मैककोलॉफ (Dr. Cynthia McCollough, a CT imaging researcher at the Mayo Clinic) बताते हैं कि चिकित्सा विशेषज्ञों के पास आवश्यक छोटी विकिरण मात्रा की गणना करने के तरीके मौजूद हैं।

मैककोलॉफ कहते हैं, “हम रोगी के आकार के लिए मात्रा का अनुकूलन करते हैं, और हम फिर इसका सीटी स्कैन के कारण के लिए दर्जी अनुकूलन करते हैं”। उदाहरण के लिए, छाती के सीटी स्कैन (CT scan of the chest) में पेट क्षेत्र के सीटी स्कैन की तुलना (CT scan of the stomach area) में कम विकिरण की आवश्यकता होती है।

मैककोलॉफ कहते हैं, “हमने पाया है कि जब आप विकिरण की मात्रा का तरीका कम करते हैं, तो छवियां बहुत कम साफ होती हैं, लेकिन वे अक्सर डॉक्टरों को सही जवाब दे देती हैं”।

उनका कहना है कि यदि मानक मात्रा पहले से ही काफी कम है तो विकिरण की कम मात्रा से जोखिम कम होने की आशंका होगी। वह कहती हैं कि “लोगों को यह जानना ज़रूरी है क्योंकि कुछ रोगियों को जिन्हें सीटी स्कैन की ज़रूरत होती है, वे इसे कराने से डरते हैं।”

विकिरण का डर कभी-कभी किसी को सीटीस्कैन कराने से रोक सकता है जबकि यह उनके स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है, या यहां तक कि उनके जीवन को बचा भी सकता है। वे कहती हैं “वर्तमान में सीटी स्कैन में विकिरण की मात्रा एक ऐसी सीमा में हैं जहां जोखिम साबित करना संभव नहीं है। वह कम है ।”

MRI एमआरआई

एमआरआई (Magnetic Resonance Imaging) बहुत अलग तरीके से काम करता है। यह एक्स-रे का उपयोग नहीं करता है। इसके बजाय, यह आपके शरीर के ऊतकों के भीतर पानी के अणुओं में परमाणुओं को प्रभावित करने के लिए मजबूत मैग्नेट और रेडियो तरंगों का उपयोग करता है। जब रेडियो तरंगों को बंद कर दिया जाता है, तो परमाणु ऊर्जा को छोड़ते हैं जिसकी एमआरआई मशीन द्वारा पहचान की जाती है।

विभिन्न ऊतकों में परमाणु अलग-अलग गति से सामान्य हो जाते हैं और विभिन्न मात्रा में ऊर्जा छोड़ते हैं। एमआरआई सॉफ्टवेयर इस जानकारी का उपयोग विभिन्न ऊतक प्रकारों के 3डी चित्र बनाने के लिए करता है।

स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के एमआरआई के शोधकर्ता डॉ. श्रेयस वासनवाला (Dr. Shreyas Vasanawala, an MRI researcher at Stanford University) बताते हैं, “जब आप नरम ऊतकों (soft tissue) की बीमारियों, जैसे मांसपेशियों, कण्डरा और रक्त वाहिकाओं को देखना चाहते हैं, तो एमआरआई सबसे मददगार होता है।”

एमआरआई जानकारी दे सकता है कि वास्तविक समय में शरीर कैसे काम कर रहा है।

वासनवाला कहते हैं, “उदाहरण के लिए, हम माप सकते हैं कि रक्तवाहिकाओं में कितना रक्त बह रहा है, जो डॉक्टरों को हृदय में छोटे ब्लॉकेज या दोष खोजने में मदद कर सकता है।”

क्योंकि एमआरआई एक्स-रे का उपयोग नहीं करता है, इसलिए डॉक्टर बच्चों में इसका अधिक उपयोग करना चाहेते हैं। लेकिन एमआरआई मशीनों के लिए आपको लंबे समय तक गतिहीन पड़ा रहना पड़ता है। वासनवाला कहते हैं, “बच्चों को पकड़कर रखना मुश्किल हो सकता है।” यदि आवश्यक हो, तो सामान्य संज्ञाहरण परीक्षण (general anesthesia) के माध्यम से बच्चों का एमआरआई किया जा सकता है। एनेस्थिसिया बच्चों को बेहोश कर देता है और उन्हें हिलने-डुलने में असमर्थ बना देता है। यह आमतौर पर बहुत सुरक्षित है, लेकिन इसके कुछ जोखिम भी हैं।

अन्य स्कैन Other Scans

x-ray CT scan MRI

एक और आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली इमेजिंग विधि को अल्ट्रासाउंड (ultrasound) कहा जाता है। यह शरीर में ध्वनि तरंगें भेजता है। विभिन्न प्रकार के ऊतक ध्वनि तरंगों को अलग तरीके से दर्शाते हैं। इन अंतरों को एक अल्ट्रासाउंड मशीन द्वारा उठाया जा सकता है और एक तस्वीर में बदल दिया जा सकता है। दिल और अन्य अंगों, या एक विकासशील बच्चे को देखने के लिए अल्ट्रासाउंड मददगार है।

Doctors also use tests called nuclear imaging.

डॉक्टर न्यूकलियर इमेजिंग नामक परीक्षणों का भी उपयोग करते हैं। ये परीक्षण एक छोटी मात्रा में एक रेडियोधर्मी पदार्थ, या “ट्रेसर” का उपयोग करते हैं। अधिकांश ट्रैसर्स को शरीर में इंजेक्ट किया जाता है, लेकिन कुछ इनहेल या निगल (inhaled or swallowed) लिए जाते हैं। शरीर के अंदर के ट्रैसर्स रेडिएशन छोड़ते हैं जिन्हें शरीर के बाहर डिटेक्टर द्वारा मापा जा सकता है। ट्रेसर का प्रकार अलग-अलग होता है जो डॉक्टर क्या देखना चाहते हैं, इस पर निर्भर करता है।

पीईटी स्कैन – PET scan

एक पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पीईटी) स्कैन (positron emission tomography (PET) scan), उदाहरण के लिए, अक्सर कैंसर का निदान करने के लिए एक रेडियोधर्मी चीनी (radioactive sugar) का उपयोग करता है। जब कैंसर कोशिकाएं रेडियोधर्मी चीनी लेती हैं, तो उन्हें पीईटी स्कैनर के साथ देखा जा सकता है।

#Breaking : मोदी के सांसद ने कहा, वित्त मंत्री सीतारमण अर्थशास्त्र नहीं जानतीं… दिन की शीर्ष सुर्खियाँ

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मोदी के सांसद ने कहा, वित्त मंत्री सीतारमण अर्थशास्त्र नहीं जानतीं… दिन की शीर्ष सुर्खियाँ

सीतारमण अर्थशास्त्र नहीं जानती हैं : सुब्रमण्यम स्वामी

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण पर तीखे हमले में, भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है, “वह अर्थशास्त्र नहीं जानती हैं”।

राहुल गांधी सोमवार को झारखंड में पहली रैली करेंगे

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सोमवार को सिमडेगा जिले में एक रैली के साथ, चल रहे झारखंड विधानसभा चुनावों में अपने अभियान की शुरुआत करने के लिए तैयार हैं।

महाराष्ट्र विधानसभा में मी पुनः येईनने हास्य बिखेरा

महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री और विपक्ष के नए नेता देवेंद्र फड़नवीस की प्रसिद्ध पूर्व-चुनाव भविष्यवाणी “Mee punha yaeen, मी पुनः येईन, मी पुनः येईन (मैं लौटूंगा!)” ने विधानसभा के विशेष सत्र में अपनी फजीहत को हवा दी। स्प्लिट्स में ट्रेजरी और विपक्षी बेंच दोनों पर सदस्यों ने मजे लिए।

कांग्रेस ने मोबाइल टैरिफ बढ़ोतरी पर सरकार की खिंचाई की

सेलफोन कंपनियों द्वारा घोषित मोबाइल डेटा और कॉल शुल्क में वृद्धि के लिए कांग्रेस ने सरकार को फटकार लगाई है।

6 साल की बच्ची के साथ बलात्कार, उसकी स्कूल बेल्ट से गला दबाकर हत्या

मीडिया रिपोर्ट्स मे पुलिस ने बताया है कि राजथान के टोंक जिले में शनिवार को लापता हुई छह वर्षीय एक छात्रा के साथ कथित रूप से बलात्कार किया गया और उसकी अपने स्कूल बेल्ट से गला दबाकर हत्या कर दी गई।

ट्विटर यूजर्स ने वर्ल्ड एड्स डे मनाया

रविवार को विश्व एड्स दिवस मनाया गया, जिसमें हस्तियों ने ट्वीट करके लोगों को यह याद दिलाने के लिए कहा कि अभी भी क्या करना है।

हैदराबाद रेप-मर्डर को लेकर ट्विटर पर हुआ गुस्सा

हैदराबाद के बाहरी इलाके में एक पशुचिकित्सक की गैंगरेप और हत्या के तीन दिन बाद भी, ट्विटर उपयोगकर्ताओं ने रविवार को अपराध पर अपना गुस्सा निकालना जारी रखा, बलात्कारियों के लिए मौत की मांग करते हुए और पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की।

केरल के पूर्व न्यायाधीश ने ड्रग्स पर टिप्पणी के लिए राज्य मंत्री की खिंचाई की

केरल उच्च न्यायालय के एक पूर्व न्यायाधीश ने रविवार को एक राज्य मंत्री द्वारा दिए गए बयान को मूर्खतापूर्ण बताते हुए कहा कि पुलिस को फिल्म की शूटिंग के स्थानों पर दवाओं की खोज के लिए शिकायत की आवश्यकता है।

कांग्रेस के पटोले महामंत्री के रूप में निर्विरोध चुने गए।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाना एफ. पटोले को रविवार को महाराष्ट्र विधानसभा के 14 वें अध्यक्ष के रूप में निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया।

रोहित शर्मा लारा के नाबाद 400 रन के रिकॉर्ड को तोड़ सकते हैं: वार्नर

ऑस्ट्रेलियाई सलामी बल्लेबाज डेविड वार्नर को लगता है कि रोहित शर्मा वेस्टइंडीज के दिग्गज ब्रायन लारा के टेस्ट मैच में नाबाद 400 रन के रिकॉर्ड को तोड़ सकते हैं।

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एड्स के प्रति जागरूकता की जरूरत

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विश्व एड्स दिवस (1 दिसम्बर) पर विशेष Special on World AIDS Day in Hindi (1 December)

एड्स को लेकर स्थापित तथ्य यही है कि एचआईवी (ह्यूमन इम्यूनो डिफिशिएंसी वायरस – Human immunodeficiency virus) के एक बार शरीर में प्रवेश कर जाने के बाद इसे किसी भी तरीके से बाहर निकालना असंभव है और यही वायरस धीरे-धीरे एड्स में परिवर्तित हो जाता है।

AIDS is not really a disease in itself

हालांकि एड्स वास्तव में अपने आप में कोई बीमारी नहीं है बल्कि एचआईवी के संक्रमण के बाद जब रोगी व्यक्ति छोटी-छोटी बीमारियों से लड़ने की शारीरिक क्षमता भी खो देता है और शारीरिक शक्ति का विनाश हो जाता है, तब जो भयावह स्थिति पनपती है, वही एड्स है। एचआईवी संक्रमण को एड्स की स्थिति तक पहुंचने में 10-12 साल और कभी-कभी तो इससे भी ज्यादा समय लग सकता है।

यह बीमारी कितनी भयावह है, यह इसी से समझा जा सकता है कि एड्स की वजह से दुनियाभर में हर साल लाखों लोग काल का ग्रास बन जाते हैं। हालांकि विश्वभर में एड्स के खात्मे के लिए निरन्तर प्रयास किए जा रहे हैं किन्तु अभी तक किसी ऐसे इलाज की खोज नहीं हो सकी है, जिससे एड्स के पूर्ण रूप से सफल इलाज का दावा किया जा सके।

यही कारण है कि एड्स तथा एचआईवी के बारे में हर व्यक्ति को पर्याप्त जानकारी होना अनिवार्य माना जाता है क्योंकि अभी तक केवल जन जागरूकता के जरिये ही इस बीमारी से बचा और बचाया जा सकता है।

विश्व एड्स दिवस का महत्व Importance of World AIDS Day

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ऐसे में प्रतिवर्ष मनाए जाने वाले विश्व एड्स दिवस के महत्व को आसानी से समझा जा सकता है, जो सन् 1988 के बाद से प्रतिवर्ष 1 दिसम्बर को मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य (Objective of World AIDS Day) एचआईवी संक्रमण के प्रसार की वजह से ‘एड्स’ की महामारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

यह दिवस मनाए जाने की कल्पना पहली बार अगस्त 1987 में थॉमस नेट्टर और जेम्स डब्ल्यू बन्न द्वारा की गई थी। ये दोनों विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) जेनेवा तथा स्विट्जरलैंड के ‘एड्स ग्लोबल कार्यक्रम’ (AIDS Global Program) के लिए सार्वजनिक सूचना अधिकारी थे, जिन्होंने ‘एड्स दिवस’ का अपना विचार ‘एड्स ग्लोबल कार्यक्रम’ के निदेशक डा. जॉननाथन मन्न के साथ साझा किया।

डा. मन्न द्वारा दोनों के उस विचार को स्वीकृति दिए जाने के बाद 1 दिसम्बर 1988 से इसी दिन ‘विश्व एड्स दिवस’ मनाए जाने का निर्णय लिया गया।

सन् 2007 के बाद से विश्व एड्स दिवस को अमेरिका के ‘व्हाइट हाउस’ द्वारा लाल रंग के एड्स रिबन का एक प्रतिष्ठित प्रतीक देकर शुरू किया गया। एचआईवी-एड्स पर ‘यूएन एड्स’ के नाम से जाना जाने वाला संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम सन् 1996 में प्रभाव में आया और उसके बाद ही दुनियाभर में इसे बढ़ावा देना शुरू किया गया। एक दिन के बजाय सालभर एड्स कार्यक्रमों पर ध्यान केन्द्रित करने के लिए इस कार्यक्रम की शुरूआत बेहतर संचार, इस बीमारी की रोकथाम और रोग के प्रति जागरूकता पैदा करने उद्देश्य से की गई।

सन् 1981 में अमेरिका में लॉस एंजिल्स के अस्पतालों में न्यूमोसिस्टिस न्यूमोनिया, कपोसी सार्कोमा तथा चमड़ी रोग जैसी असाधारण बीमारी का इलाज करा रहे पांच समलैंगिक युवकों में एड्स के लक्षण पहली बार मिले थे। उसके बाद ही यह बीमारी दुनिया भर में तेजी से फैलती गई। भारत में भी बीते वर्षों में एड्स के बहुत सारे मामले सामने आए हैं।

1986 में भारत में एड्स का पहला रोगी तमिलनाडु के वेल्लूर में मिला थाIn 1986, the first AIDS patient in India was found in Vellore, Tamil Nadu.

भारत में एचआईवी के मामलों में लगातार होती वृद्धि के मद्देनजर देश में एचआईवी तथा एड्स की रोकथाम व नियंत्रण संबंधी नीतियां तैयार करने और उनका कार्यान्वयन करने के लिए भारत सरकार ने सन् 1992 में राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन की स्थापना (Establishment of National AIDS Control Organization) की थी।

यूनीसेफ की एक रिपोर्ट के अनुसार दुनियाभर में एड्स पीडि़त सर्वाधिक संख्या किशोरों की है, जिनमें से दस लाख से भी अधिक किशोर दुनिया के छह देशों दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, केन्या, मोजांबिक, तंजानिया तथा भारत में हैं।

अगर एड्स के कारणों (cause of AIDS) पर नजर डालें तो मानव शरीर में एचआईवी का वायरस फैलने का मुख्य कारण हालांकि असुरक्षित सेक्स तथा अधिक पार्टनरों के साथ शारीरिक संबंध बनाना ही है लेकिन कई बार कुछ अन्य कारण भी एचआईवी संक्रमण के लिए जिम्मेदार होते हैं। शारीरिक संबंधों द्वारा 70-80 फीसदी, संक्रमित इंजेक्शन या सुईयों द्वारा 5-10 फीसदी, संक्रमित रक्त उत्पादों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया के जरिये 3-5 फीसदी तथा गर्भवती मां के जरिये बच्चे को 5-10 फीसदी तक एचआईवी संक्रमण की संभावना रहती है।

Symptoms of hiv infection

बात करें एचआईवी संक्रमण के बाद सामने आने वाले लक्षणों की तो शरीर में इस खतरनाक वायरस के प्रवेश कर जाने के 15-20 दिनों बाद तक ऐसे व्यक्ति को बुखार, गले में सूजन, सिरदर्द व शरीर दर्द, शरीर पर छोटे-छोटे लाल रंग के धब्बे, शरीर में सामान्य-सी खुजली, ठंड लगना, रात के दौरान पसीना आना, बढ़ी हुई ग्रंथियां, वजन घटना, थकान, दुर्बलता, ज्यादा दस्त इत्यादि जैसे कुछ सामान्य लक्षण देखने को मिलते हैं। इस प्रकार के लक्षणों को प्रायः कोई सामान्य संक्रमण समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है और आमतौर पर एचआईवी टेस्ट (HIV test) करवाने के बजाय बहुत से चिकित्सक भी सामान्य फ्लू या बुखार की ही दवाई मरीज को दे देते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि इस प्रकार के लक्षण 10-12 दिनों से ज्यादा समय तक लगातार बरकरार रहने पर अगर पहले ही चरण में परीक्षण के जरिये एचआईवी संक्रमण का पता लग जाए तो इस वायरस को आगे बढ़ने और भविष्य में एड्स के रूप में परिवर्तित हो जाने से रोका जा सकता है।

Yogesh Kumar Goyal योगेश कुमार गोयल वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं
योगेश कुमार गोयल वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं

हालांकि पिछले कई वर्षों से एड्स और एचआईवी को लेकर लोगों में जागरूकता पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं लेकिन फिर भी विड़म्बना ही है कि बहुत से लोग इसे आज भी छूआछूत से फैलने वाला संक्रामक रोग मानते हैं। एड्स तथा एचआईवी के संबंध में यह जान लेना बेहद जरूरी है कि इस संक्रमण के शिकार व्यक्ति के साथ हाथ मिलाने, उसके साथ भोजन करने, स्नान करने या उसके पसीने के सम्पर्क में आने से यह रोग नहीं फैलता। इसलिए एड्स के प्रति जागरूकता पैदा किए जाने की आवश्यकता तो है ही, समाज में ऐसे मरीजों के प्रति हमदर्दी और प्यार का भाव होना तथा ऐसे रोगियों का हौसला बढ़ाए जाने की भी जरूरत है। ऐसे बहुत से मामलों में आज भी जब यह देखा जाता है कि इस तरह के मरीज न केवल अपने आस-पड़ोस के लोगों के बल्कि अपने ही परिजनों के भेदभाव का भी शिकार होते हैं तो चिंता की स्थिति उत्पन्न होती है। इसलिए इस बीमारी का कारगर इलाज खोजे जाने के प्रयासों के साथ-साथ ऐसे मरीजों के प्रति समाज और परिजनों की सोच को बदलने के लिए अपेक्षित कदम उठाए जाने की भी सख्त जरूरत है।

Anti-retroviral treatment method

सुखद तथ्य यह है कि एंटी-रेट्रोवायरल उपचार पद्धति को अपनाए जाने के बाद एड्स से जुड़ी मौतों का आंकड़ा साल दर साल कम होने लगा है। इसलिए लोगों को इस दिशा में जागरूक किए जाने की भी जरूरत है कि एड्स भले ही अब तक एक लाइलाज बीमारी ही है लेकिन फिर भी एड्स पीड़ित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है और एचआईवी संक्रमित हो जाने का अर्थ बहुत जल्द मृत्यु कदापि नहीं है बल्कि उचित दवाओं और निरन्तर चिकित्सीय परामर्श से ऐसा मरीज काफी लंबा और स्वस्थ जीवन जी सकता है।

योगेश कुमार गोयल

(लेखक योगेश कुमार गोयल वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तंभकार हैं)

दुनिया भर में अब तक 21 लाख से अधिक लोगों को प्रभावित कर चुका है फेफड़ों का कैंसर

Cancer

दुनिया भर में अब तक 21 लाख से अधिक लोगों को प्रभावित कर चुका है फेफड़ों का कैंसर

नवम्बर लंग कैंसर जागरूकता माह

नोएडा 30 नवंबर 2019 : नवंबर को लंग कैंसर जागरूकता माह (Lung Cancer Awareness Month) घोषित किया गया है, जिसका उद्देश्य जनता के बीच फेफड़ों के कैंसर के बारे में जागरूकता (Awareness of lung cancer) फैलाना है। इसका मुख्य उद्देश्य धूम्रपान के हानिकारक प्रभावों (Harmful effects of smoking) के बारे में लोगों को जागरूक करना एवं ऐसे लोगों को शिक्षित करना है जो फेफड़ों के कैंसर के अधिक जोखिम में हैं।

गौरतलब है कि फेफडों के कैंसर से होने वाली 80 प्रतिशत मौतों का मुख्य कारण धूम्रपान होता है।

फेफड़े का कैंसर सबसे आम कैंसर है जो कि दुनिया भर में अब तक 21 लाख से अधिक लोगों को प्रभावित कर चुका है।

लंग कैंसर फाउंडेशन ऑफ़ अमेरिका एवं अन्य कई संगठन और भी हैं जो फेफडों के कैंसर के बारे में जागरूकता फ़ैलाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

हालांकि अगर लोग अतिशीघ्र धूम्रपान छोड़ देते हैं और अपनी दिनचर्या में फाइबर और दही का अधिक सेवन शुरू करते हैं, तो वे फेफड़ों के कैंसर के खतरे को 33 प्रतिशत तक कम कर सकते हैं।

Dr. Ashish Jaiswal, senior oncologist at Bhardwaj Hospital Noida gave information about cancer

यह जानकारी देते हुए भारद्वाज अस्पताल नोएडा के वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ आशीष जायसवाल ने एक विज्ञप्ति में बताया कि अज्ञानता की वजह से लोग हमारे पास तब आते हैं जब उनका कैंसर उच्च अवस्था तक पंहुच चुका होता है। यदि कैंसर का पता प्रारंभिक अवस्था में लग जाता है तो इसके उन्मूलन की संभावना 5 गुना बढ़ जाती है।

Inconsistent routines are also a cause of cancer

डॉ आशीष जायसवाल ने बताया कि असंगत दिनचर्या भी कैंसर का एक कारण है जो लोग प्राप्त कर रहे हैं। प्रदूषित वायु में मौजूद सूक्ष्म कण श्वास के माध्यम से आसानी से हमारे श्वसन एवं परिसंचरण तंत्र में प्रवेश कर हमारे फेफड़ों, हृदय एवं मस्तिष्क जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पंहुचते हैं। अगर हम अपने आस-पास जागरूकता पैदा करना शुरू करते हैं और लोगों को धूम्रपान छोड़ने के लिए प्रेरित करते हैं तो निश्चित रूप से फेफड़ों के कैंसर से पीड़ित लोगों की संख्या में भारी गिरावट आएगी।

डॉ जायसवाल ने आगे बताया कि आज के दौर में पुरुष और महिलाएं दोनों धूम्रपान के आदी हैं, कुछ लोग इसकी लत का कारण तनाव कम करना तो कुछ इसे अपना दिन शुरू करने के पुश बटन के रूप में इस्तेमाल करते हैं, लेकिन हम सभी को यह पता होना चाहिए कि सिगरेट पीने से फेफड़ों के कैंसर की संभावना 15 से 30 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

मलेशिया एक अध्ययन गंतव्य के रूप में

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मलेशिया एक अध्ययन गंतव्य के रूप में

एक स्टडी डेस्टिनेशन के रूप में मलेशिया Malaysia as a Study Destination

मलेशिया एशिया का वो हिस्सा है जो दक्षिण चीन सागर के पास स्थित है। रंगीन परंपराओं, विविध संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के साथ मलेशिया एक सुंदर भविष्य रखता है। मलेशिया एक बड़े पर्यटन स्थल के रूप में उभरा है और एशिया में उच्च शिक्षा के लिए एक शानदार विकल्प के रूप में जाना जाता है।

Malaysia for education

यदि आप शिक्षा के लिए मलेशिया को चुनते हैं तो आप इसकी विविध सुंदरता के बारे में जान पाएंगे, जो प्राचीन रेनफॉरेस्ट, नेशनल पार्क और समुद्रों के शानदार तटों (बीच) से कहीं परे है। इस देश के सभी शहरों के रंगीन बाजारों से लेकर मस्जिद, बौद्ध मंदिर और हिंदू मंदिर जो हर कुछ दूरी पर नजर आते हैं और बड़ी ही धूमधाम से मनाए जाने वाले पारंपरिक और आधुनिक दोनों प्रकार के वार्षिक त्यौहारों से आपका मन प्रफुल्लित हो उठेगा।

दुनिया के सबसे राजनीतिक रूप से स्थिर देशों में से एक, मलेशिया क्षेत्रीय आर्थिक ताकत के मामले में सिंगापुर से दूसरे स्थान पर हो सकता है लेकिन यह अपने शहर-राज्य प्रतिद्वंदी से कहीं अधिक अच्छी जीवनशैली प्रदान करता है। देश का आधा हिस्सा, जो थाईलैंड के नीचे पेनिनिसुलर के दक्षिणी सिरे पर स्थित है, पेनिनसुलर मलेशिया (प्रायद्वीपीय मलेशिया) के रूप में जाना जाता है। यही वह हिस्सा है जहां मलेशिया के सबसे विविध और शानदार शहर के साथ सबसे अधिक रैंक वाले विश्वविद्यालय पाए जाते हैं। देश का दूसरा आधा हिस्सा यानी कि मलेशियाई बोर्नियों, इंडोनेशिया के साथ एक आईलैंड (द्वीप) साझा करता है और यह हिस्सा देश का सबसे शांत हिस्सा है, जो एकांत और जंगलों के जीवन को दर्शाता है।

मलेशिया में उपलब्ध विश्वविद्यालय Universities in Malaysia,

मलेशिया अन्य देशों के विश्वविद्यालयों के विभिन्न अंतराष्ट्रीय शाखाओं के लिए मशहूर है। मौजूदा ब्रांच कैंपसों में यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ नॉटिंघम और ऑस्ट्रेलिया की मोनाश यूनिवर्सिटी शामिल है।

ब्रांच कैंपसों में मलेशिया के निवेश के परिणामों के अनुसार जोहोर में नई एडूसिटी का विकास हुआ है, जो सिंगापुर के उत्तर इलाके से 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। 350 एकड़ के इस कैंपस में दुनिया के अग्रणी विश्वविद्यालयों की 8 अतंरराष्ट्रीय शाखाएं होंगी। इनमें यूके की यूनिवर्सिटी ऑफ रीडिंग, दी यूनिवर्सिटी ऑफ साउथेम्पटन और न्यूकैसल यूनिवर्सिटी मेडिसिन, नीदरलैंड की मैरीटाइम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, सिंगापुर की प्राइवेट रैफल्स यूनिवर्सिटी और यूएस से यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न केलिफोर्नियाज स्कूल ऑफ सिनेमेटिक आर्ट्स शामिल हैं।

हालांकि, मलेशिया में विदेशी विश्वविद्यालयों (Foreign Universities in Malaysia) की बढ़ती उपस्थिति देश की उच्च शिक्षा के स्तर को बढ़ा रही है, लेकिन इनके आगे स्थानीय विश्वविद्यालयों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 2018 में मलेशिया के उच्च शिक्षा सिस्टम को 25वां स्थान दिया गया था, जो यहां के स्थानीय विश्वविद्यालयों की ताकत को दर्शाता है।

यूनिवर्सिटी ऑफ मलय – University of malay (यूएम)

मलेशिया का सबसे पुराना और सबसे ऊंची रैंकिंग वाला विश्वविद्यालय (Highest ranked university), यूनिवर्सिटी ऑफ मलय (यूएम) क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिग में संयुक्त 70वें स्थान पर है। यह विश्वविद्यालय कैंद्रीय कौला लुंपुर में स्थित है। 21,050 छात्रों की आबादी के साथ यूएम लगातार प्रगति करता रहा है।

–      रितुराज गोस्वामी,

प्रॉडक्ट हेड,

इंटरनेशनल एजुकेशन डेस्क,

प्रथम एजुकेशन

नोट – यह समाचार किसी भी हालत में परामर्श नहीं है। यह सिर्फ एक जानकारी है। कोई निर्णय लेने से पहले अपने विवेक का प्रयोग करें।)

(Note – This news is not advisable in any condition. This is just an information. Use your discretion before making any decision.)

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स्तन कैंसर से होने वाली मौतों को रोकने के लिए और जागरूक होने की जरूरत

Cancer

स्तन कैंसर से होने वाली मौतों को रोकने के लिए और जागरूक होने की जरूरत

हमारे यहां कैंसर शब्द आज भी डराता है, लेकिन पश्चिमी देशों में कैंसर का इलाज आज उसी तरह हो रहा है, जैसे अपने यहां तपेदिक का। लेकिन अपने देश में महिलाओं में स्तन कैंसर का कहर (Breast cancer havoc in women) तेजी से बढ़ रहा है। कुछ सर्वेक्षणों से चौंकाने वाले नतीजे सामने आए हैं। वहीं नई खोजों से स्तन कैंसर का इलाज (Treatment of breast cancer) अब आसान बड़ा हो गया है।

क्यों बढ़ रहा है स्तन कैंसर

गत कुछ सालों में देश में महिलाओं में स्तन कैंसर के अधिक मामले सामने आ रहे हैं। अपने देश में महिलाओं में यह रोग नगरों की महिलाओं में अधिक पाया जाता रहा है। कम उम्र में विवाह और अधिक गर्भधारण भारतीय महिलाओं में गर्भाशय ग्रीवा के कैंसर का एक बड़ा कारण (A major cause of cervical cancer in Indian women) रहा है। लेकिन विवाह को अधिक उम्र तक टालते जाने, गर्भधारण का फासला बढ़ाने या स्वेच्छा से इससे बचने की शहरी औरतों की प्रवृत्ति उनमें स्तन कैंसर की संभावना बढ़ा रही है। नए शोधों से यह पता चला कि किसी भी कैंसर के होने में आनुवांशिक कारण सबसे बड़ा कारण है और यह बात स्तन कैंसर पर भी लागू होती है।

Breast cancer is one of the leading causes of death in cancer patients worldwide.

स्तन कैंसर दुनिया भर में कैंसर से ग्रस्त मरीजों में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर दुनिया भर में सबसे ज्यादा होता है। कैंसर की मरीजों के सबंध में नई प्रवृत्तियां सामने आ रही हैं और अस्पताल आने वाली नई नए मरीजों के आयु समूह में धीरे-धीरे गिरावट आ रही है और यह 55 वर्ष से कम होकर 40 वर्ष से भी कम उम्र तक गिर गया है। आईसीएमआर 2017 में दर्ज आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल भारत में 1.5 लाख से अधिक नए स्तन कैंसर के रोगियों को दर्ज किया गया है।

भारत में, सालाना हर पच्चीस में से एक महिला में स्तन कैंसर का निदान किया जाता है, जो अमेरिका / ब्रिटेन जैसे विकसित देशों की तुलना में कम है, जहां सालाना 8 में से 1 रोगी में स्तन कैंसर का निदान किया जाता है। हालांकि इस तथ्य के कारण कि विकसित देशों में जागरूकता की काफी महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जहां शुरुआती चरणों में ही ऐसे अधिकतर मामलों का निदान और इलाज किया जाता है और इसलिए वहां जीवित रहने की दर बेहतर होती है। लेकिन जब हम भारतीय परिदृश्य पर विचार करते हैं, तो यहां उच्च जनसंख्या अनुपात और कम जागरूकता के कारण जीवित रहने की दर काफी कम है।

Transformation of T2 lesion into metastatic tumor

जिन मरीजों में स्तन कैंसर की पहचान होती है, उन मरीजों में से हर दो रोगियों में से एक रोगी की अगले पांच वर्षों में मौत हो जाती है, जो 50 प्रतिशत मृत्यु दर के लिए जिम्मेदार होते हैं। शहरों में कई रोगियों में रोग की पहचान दूसरे चरण में की जाती है जब टी 2 घाव ऐसे गांठ होते हैं, जिन्हें स्पर्श करने पर महसूस किया जा सकता है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के मामलों में, इन घावों का पता मेटास्टैटिक ट्यूमर में परिवर्तित होने के बाद ही चलता है।

वैश्विक स्तर पर, 40 साल से कम उम्र की 7 प्रतिशत आबादी स्तन कैंसर से पीड़ित है, जबकि भारत में यह दर दोगुनी है, यानी 15 प्रतिशत है और जिनमें एक प्रतिशत रोगी पुरुष हैं, जिसके कारण विश्व स्तर पर भारत से स्तन कैंसर रोगियों की सबसे ज्यादा संख्या हो जाती है।

Breast cancer is hereditary

स्तन कैंसर वंशानुगत होता है, इसके अलावा, कई अन्य जोखिम कारक जैसे निष्क्रिय जीवनशैली, शराब का सेवन, धूम्रपान, युवाओं में मोटापा और तनाव में वृद्धि और खराब आहार के सेवन को भी युवा भारतीय महिलाओं में स्तन कैंसर के मामलों में वृद्धि के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

एनसीबीआई 2016 द्वारा किए गए एक अध्ययन के अनुसार, शाकाहारी महिलाएं स्तन कैंसर के लिए 40 प्रतिशत कम संवेदनशील होती हैं।

हमें अधिक एडवांस चरण का कैंसर क्यों होता हैं?

भारतीय मरीजों में स्तन कैंसर के ग्रेड और चरण अन्य देशों की तुलना में अधिक होते हैं। यहां तक कि साक्षर जनसंख्या में भी जो उपचारात्मक उपायों का सहारा लेते हैं और वैकल्पिक उपचार विकल्पों का विकल्प चुनते हैं। कीमोथेरेपी या मास्टेक्टोमी सर्जरी के बारे में कई गलतफहमी (Many misconceptions about chemotherapy or mastectomy surgery) और जागरूकता की कमी के कारण वे समय पर इलाज नहीं कराते हैं और वैकल्पिक दवाओं का विकल्प चुनती हैं। प्रारंभ में ऐसे उपचार मरीजों के लिए लुभावने होते हैं, लेकिन जैसे ही बीमारी के चरण बढ़ते हैं और बीमारी उनके नियंत्रण से बाहर हो जाती है, तो वे एलोपैथिक उपचार का विकल्प चुनते हैं। इन स्थितियों के कारण वे समय पर इलाज नहीं करा पाते हैं।

प्रारंभिक निदान उपचार के लिए है महत्वपूर्ण

पिछले दशक में, हालांकि स्तन कैंसर के मामलों में वृद्धि हुई है, लेकिन कैंसर देखभाल के प्रति जागरूकता (Cancer care awareness), पहुंच और नजरिये में परिवर्तन के कारण इसके कारण होने वाली मृत्यु दर धीरे-धीरे कम हो रही है।

हो सकता है कि शुरुआती चरणों में डायग्नोसिस और कभी-कभी स्क्रीनिंग के दौरान इसके लक्षण लगातार प्रकट नहीं होते हों, लेकिन इसके लिए विभिन्न प्रकार के उपचार की आवश्यकता हो सकती है और इसके लिए विशेषज्ञ सर्वोत्तम उपयुक्त उपचार निर्धारित कर सकता है। हालांकि स्तन कैंसर के इलाज में बड़ी सफलताएं हासिल की गई हैं, लेकिन इसका इलाज और उपचार पूरी तरह से बीमारी के ग्रेड और चरण पर निर्भर करता है, जिसका निदान जांच में किया गया है। इसके आधार पर ही, आपको सर्जरी, रेडियोथेरेपी, कीमोथेरेपी, हार्मोन थेरेपी और जैविक थेरेपी (लक्षित थेरेपी) इन उपचारों में से एक या एक से अधिक उपचार कराने की सलाह दी जाएगी। इलाज का निर्णय करते समय डॉक्टर निम्नलिखित तथ्यों पर विचार करेगा –

कैंसर का चरण और ग्रेड (आकार और क्षेत्र जहां तक कैंसर फैल गया)

पूरे शरीर का स्वास्थ्य (अन्य रोग भी)

रजोनिवृत्ति का समय

लोगों में यह जागरूकता पैदा की जानी चाहिए कि प्रारंभिक चरणों में ही अधिकांश स्तन कैंसर का पता लग जाता है, क्योंकि स्तन कैंसर वाली अधिकांश महिला मेटास्टेसिस (जब ट्यूमर शरीर के अन्य अंगों में फैलता है) के बाद अस्पताल आती हैं। कैंसर के मेटास्टैटिक या उन्नत चरणों में, इसका पूरी तरह से इलाज नहीं हो पाता है और उपचार का उद्देश्य रेमिशन (जहां ट्यूमर सिकुड़ता है या गायब हो जाता है) प्राप्त करना होता है। स्तन कैंसर सर्जरी के दो मुख्य प्रकार हैं –

Dr. Sameer Kaul Senior oncologist Indraprastha Apollo Hospital, New Delhi. डॉ. समीर कौल सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली
Dr. Sameer Kaul
Senior oncologist
Indraprastha Apollo Hospital, New Delhi

 ब्रेस्ट कंजर्विंग सर्जरी Breast conservation surgery

इसमें सर्जरी केवल ट्यूमर नामक कैंसरयुक्त गांठ को हटाने के लिए की जाती है। ट्यूमर के प्रकार, आकार और मात्रा के आधार पर, लम्पेक्टोमी (आसपास के कुछ ऊतकों के साथ ट्यूमर को हटाना) या आंशिक मास्टेक्टोमी सर्जरी की जाती है। आम तौर पर, सर्जरी के बाद बची किसी भी शेष कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए रेडियोथेरेपी कराने की सलाह दी जाती है, जो प्रारंभिक चरण के स्तन कैंसर के इलाज (Early stage breast cancer treatment) में टोटल मास्टेक्टोमी (Total Mastectomy) के समान ही सफल होती है।

मास्टेक्टोमी – mastectomy surgery

इस सर्जरी के तहत पूरे स्तन को हटा दिया जाता है। विज्ञान और प्रौद्योगिकी में प्रगति के साथ, मास्टेक्टोमी के बाद स्तन के हटाए गए हिस्से को बनाने के लिए उसका पुनर्निमाण (mastectomy reconstruction) करने के लिए रिकंस्ट्रक्शन सर्जरी की जा सकती है। रिकंस्ट्रक्शन मास्टेक्टोमी के समय ही किया जा सकता है (तत्काल पुनर्निर्माण) या इसे बाद में किया जा सकता है (देर से पुनर्निर्माण)। नया स्तन बनाने के लिए ब्रेस्ट इंप्लांट इंसर्ट (Breast implant insert) किया जा सकता है या आपके शरीर के अन्य हिस्से के ऊतक से इसका निर्माण किया जा सकता है।

डॉ. समीर कौल
सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट
इंद्रप्रस्थ अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली

नोट – यह समाचार किसी भी हालत में चिकित्सकीय परामर्श नहीं है। यह सिर्फ एक जानकारी है। कोई निर्णय लेने से पहले अपने विवेक का प्रयोग करें।)

Need to be more aware to prevent breast cancer deaths

प्रशांत महासागर के गर्म होने के कारण बदला पूरी दुनिया का बारिश पैटर्न !

Water

प्रशांत महासागर के गर्म होने के कारण बदला पूरी दुनिया का बारिश पैटर्न !

पिछले दिनों देश भर में मानसून के विदा होने के वक्त भयंकर बारिश देखने को मिली थी। खासकर बिहार और देश की वित्तीय राजधानी मुंबई में पिछले कई वर्षों के वर्षा के रिकॉर्ड टूट गए। अब भारतीय वैज्ञानिक के नेतृत्व में किए गए एक अध्ययन में दावा किया गया है कि भारतीय-प्रशांत महासागर के गर्म होने के कारण बारिश का भारत का ही नहीं बल्कि वैश्विक पैटर्न भी बदला।

Twofold expansion of the Indo-Pacific warm pool warps the MJO life cycle

शोध पत्रिका नेचर में “इंडो-पैसिफिक वार्म पूल का दो गुना विस्तार एमजेओ जीवन चक्र को प्रभावित करता है” शीर्षक से प्रकाशित इस अध्‍ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया है कि भारतीय-प्रशांत महासागर के गर्म हिस्से का आकार दोगुना हो गया है और पृथ्‍वी पर महासागर के तापमान में यह सबसे बड़ी बढ़ोत्तरी है।

इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटियोरोलॉजी (आईआईटीएम)- Centre for Climate Change Research, Indian Institute of Tropical Meteorology, Pune, India पुणे से जुड़े एम. के. रॉक्सी (M. K. Roxy), के नेतृत्व में किए गए अध्ययन में आईआईटीएम से ही जुड़े पाणिनी दासगुप्ता (Panini Dasgupta), प्रशांत समुद्री पर्यावरण प्रयोगशाला, राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन, सिएटल, वाशिंगटन, यूएसए (Pacific Marine Environmental Laboratory, National Oceanic and Atmospheric Administration, Seattle, WA, USA) से जुड़े माइकल जे. मैकडेन (Michael J. McPhaden) व चिदोंग झांग (Chidong Zhang), वायुमंडल और महासागर अनुसंधान संस्थान, टोक्यो विश्वविद्यालय, काशीवा, चिबा, जापान (Atmosphere and Ocean Research Institute, The University of Tokyo, Kashiwa, Chiba, Japan) से जुड़े तमकी सुमात्सु (Tamaki Suematsu), और वायुमंडलीय विज्ञान विभाग, वाशिंगटन विश्वविद्यालय, सिएटल, वाशिंगटन, संयुक्त राज्य अमेरिका (Department of Atmospheric Sciences, University of Washington, Seattle, WA, USA) डेह्युन किम (Daehyun Kim) शामिल हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रशांत महासागर के गर्म हिस्से में हो रही बढ़ोत्तरी ने उस मौसम के उतार-चढ़ाव को बदल दिया है, जिसका स्रोत भूमध्‍य रेखा के ऊपर है। इसे मड्डेन जूलियन ऑस्‍सीलेशन (एमजेओ)- The Madden–Julian Oscillation (MJO) कहते हैं।

अध्ययन में यह बात निकलकर सामने आई कि एमजेओ के व्यवहार में बदलाव के कारण उत्तरी ऑस्‍ट्रेलिया, पश्चिम पैसिफिक, अमेजॉन बेसिन, दक्षिण-पश्चिम अफ्रीका और दक्षिण-पूर्वी एशिया (इंडोनेशिया, फिलीपींस और पापुआ न्यू गीनिया) में बारिश बढ़ गई है। उसी दौरान इन्हीं परिवर्तनों के कारण सेंट्रल पैसिफिक, यूनाइटेड स्टेट्स के पश्चिम और पूर्वी हिस्से में (उदाहरण के लिये कैलीफोर्निया), उत्तर भारत, पूर्वी अफ्रीका और चीन के यांगज़े बेसिन में बारिश में गिरावट दर्ज हुई है।

एमजेओ भूमध्‍यरेखा के ऊपर चक्रवात, मॉनसून, और एल नीनो साइकल को नियंत्रित करता है- और कभी-कभी एशिया, अफ्रीका, यूरोप और अमेरिका में मौसम की विनाशकारी घटनाओं को अंजाम देता है।

भूमध्‍य रेखा के ऊपर महासागर में एमजेओ 12,000 से 20,000 किलोमीटर तक की दूरी तय करता है, खास तौर से भारतीय-प्रशांत महासागर के गर्म हिस्से के ऊपर से, जिसका तापमान आमतौर पर समुद्री तापमान 28°C से अधिक रहता है।

कार्बन उत्सर्जन के कारण (Due to carbon emissions) हाल ही के दशकों में भारतीय-प्रशांत महासागर का गर्म हिस्सा और अधिक गर्म हो रहा है और तेज़ी से इसका विस्तार हुआ है।

1900-1980 तक महासागर के गर्म हिस्से का क्षेत्रफल 2.2 × 107 वर्ग किलोमीटर था। 1981-2018 में इसका आकार बढ़ कर 4 × 105 वर्ग किलोमीटर हो गया, जोकि कैलिफोर्निया के क्षेत्रफल के बराबर है।

अध्ययन में कहा गया है कि यद्यपि सम्पूर्ण भारतीय-प्रशांत महासागर गर्म हो गया है, इसमें सबसे गर्म पानी पश्चिमी प्रशांत महासागर में है, जिससे तापमान में अंतर पैदा होता है, जो भारतीय महासागर से नमी को साथ लेकर पश्चिम प्रशांत समुद्री महाद्वीप (West Pacific Maritime Continent) तक ले आता है, और यहां पर बादल बनते हैं। इसके परिणामस्वरूप एमजेओ का जीवनचक्र बदल गया है। हालांकि, शोधकर्ताओं का कहना है कि एमजेओ जीवन चक्र पर इस वार्मिंग का प्रभाव काफी हद तक अज्ञात है।

भारतीय महासागर पर एमजेओ के बादलों के बने रहने का समय औसतन 19 दिन से करीब 4 दिन घट कर औसतन 15 दिन हो गया है। जबकि पश्चिमी प्रशांत पर यह 5 दिन बढ़ गया है (औसतन 16 दिन से बढ़कर 21 दिन हो गया है)। एमजेओ बादलों के भारतीय महासागर और पश्चिमी प्रशांत सागर पर बने रहने के समय में बदलाव ही है जिसके कारण पूरी दुनिया के मौसम में परिवर्तन हुआ है।

अमलेन्दु उपाध्याय (Amalendu Upadhyaya) लेखक वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक व टीवी पैनलिस्ट हैं। वह हस्तक्षेप के संपादक हैं।
अमलेन्दु उपाध्याय (Amalendu Upadhyaya) लेखक वरिष्ठ पत्रकार, राजनैतिक विश्लेषक व टीवी पैनलिस्ट हैं। वह हस्तक्षेप के संपादक हैं।
 माइकल जे. मैकडेन लिखते हैं कि

“मौसम के सटीक अनुमान को लगाने के लिये समन्यवयक अंतर्राष्‍ट्रीय प्रयास चल रहे हैं, जो दो से चार हफ्ते में आगे आयेंगे और इस संस्‍था की सफलता के लिये एमजेओ एक महत्वपूर्ण कुंजी है”। वह कहते हैं कि, “हमारे द्वारा निकाले गये निष्‍कर्ष यह पता लगाने के लिये एक वेचनात्मक मानदंड हैं कि मौसम के विस्तारित भाग के अनुमान के लिये किस कंप्यूटर मॉडल पर भरोसा करें। यह उनकी क्षमता और एमजेओ के बनावटी व्यवहार और बदलते हुए पर्यावरण पर निर्भर करता है”

मुख्य शोधकर्ता एम. के. रॉक्सी ने कहा कि

“क्लाइमेट मॉडल के इस बनावटी रूप से यह पता चलता है कि यह सब भारतीय-प्रशांत महासागर में निरंतर बढ़ती गर्मी है, जो भविष्‍य में पूरी दुनिया में बारिश के पैटर्न में बदलाव करेगा।  इसका मतलब हमें हमारे महासागर पर नज़र रखने वाले निरीक्षण यंत्रों को अत्याधुनिक बनाने की जरूरत है, ताकि मौसम में होने वाले परिवर्तन का सटीक अनुमान लगाया जा सके, और गर्म होती दुनिया के कारण भविष्‍य में आने वाली चुनौतियों का भी कुशलतापूर्वक अनुमान लगाया जा सके।”

अमलेन्दु उपाध्याय

एड्स उन्मूलन का वादा पूरा करने के लिए 133 माह शेष

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विश्व एड्स दिवस पर लेख | Articles in Hindi on World AIDS Day

एड्स उन्मूलन का वादा पूरा करने के लिए 133 माह शेष

सरकार के 2030 तक एड्स उन्मूलन के वादे (Government promises to eradicate AIDS by 2030) को पूरा करने की दिशा में सराहनीय प्रगति तो हुई है परन्तु नए एचआईवी संक्रमण दर (HIV infection rate) में वांछित गिरावट नहीं आई है जिससे कि आगामी 133 माह में एड्स उन्मूलन (AIDS eradication) का स्वप्न साकार हो सके.

इंटरनेशनल एड्स सोसाइटी की संचालन समिति में एशिया पैसिफ़िक क्षेत्र के प्रतिनिधि और एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया (AIDS Society of India) के अध्यक्ष डॉ ईश्वर गिलाडा ने कहा कि “2020 तक, विश्व में नए एचआईवी संक्रमण दर और एड्स मृत्यु दर को 5 लाख से कम करने के लक्ष्य से हम अभी दूर हैं. 2018 में नए 17 लाख लोग एचआईवी संक्रमित हुए और 7.7 लाख लोग एड्स से मृत. दुनिया में 3.79 करोड़ लोग एचआईवी के साथ जीवित हैं. भारत में अनुमानित है कि 21.4 लाख लोग एचआईवी के साथ जीवित हैं, जिनमें से 13.45 लाख लोगों को जीवनरक्षक एंटीरेट्रोवायरल दवा प्राप्त हो रही है. एक साल में 88,000 नए लोग एचआईवी से संक्रमित हुए और 69,000 लोग एड्स से मृत.”

चेन्नई के वोलंटरी हेल्थ सर्विसेज़ अस्पताल के संक्रामक रोग केंद्र के निदेशक और एड्स सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के महासचिव डॉ एन कुमारसामी ने कहा कि

भारत सरकार की राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 (Government of India National Health Policy 2017) और संयुक्त राष्ट्र के एड्स कार्यक्रम (UNAIDS) दोनों के अनुसार, 2020 तक एचआईवी का 90-90-90 का लक्ष्य पूरा करना है: 2020 तक 90% एचआईवी पॉजिटिव लोगों को यह पता हो कि वे एचआईवी पॉजिटिव हैं; जो लोग एचआईवी पॉजिटिव चिन्हित हुए हैं उनमें से कम-से-कम  90% को एंटीरेट्रोवायरल दवा (एआरटी) मिल रही हो; और जिन लोगों को एआरटी दवा मिल रही है उनमें से कम-से-कम 90% लोगों में ‘वायरल लोड’ नगण्य हो. वायरल लोड नगण्य रहेगा तो एचआईवी संक्रमण के फैलने का खतरा भी नगण्य रहेगा, और व्यक्ति स्वस्थ रहेगा.”

डॉ गिलाडा ने बताया कि विश्व में 79% एचआईवी पॉजिटिव लोगों को एचआईवी टेस्ट सेवा (HIV test service) मिली, जिनमें से 62% को एंटीरेट्रोवायरल दवा (Antiretroviral medication) मिल रही है और 53% लोगों में ‘वायरल लोड’ नगण्य है. भारत में 79% एचआईवी पॉजिटिव लोगों को टेस्ट सेवा मिली, जिनमें से 71% लोगों को एंटीरेट्रोवायरल दवा भी मिल रही है. 90-90-90 के लक्ष्य की ओर प्रगति अधिक रफ़्तार से होनी चाहिए क्योंकि सिर्फ 13 माह शेष हैं.

Scientifically certified policy and programs to prevent the spread of HIV infection

डॉ गिलाडा ने कहा कि आज एचआईवी संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित अनेक नीति और कार्यक्रम हमें ज्ञात हैं। हमें यह भी पता है कि कैसे एचआईवी से संक्रमित व्यक्ति भी एक स्वस्थ और सामान्य जीवन जी सकते हैं। परन्तु जमीनी हकीकत भिन्न है. यदि हम प्रमाणित नीतियों और कार्यक्रमों को कार्यसाधकता के साथ लागू नहीं करेंगे तो 2030 तक एड्स-मुक्त कैसे होंगे?

एचआईवी पॉजिटिव लोगों में सबसे बड़ा मृत्यु का कारण क्यों हैं टीबी? Why is TB the leading cause of death among HIV positive people?

टीबी से बचाव मुमकिन है और इलाज भी संभव है. तब क्यों एचआईवी पॉजिटिव लोगों में टीबी सबसे बड़ा मृत्यु का कारण बना हुआ है?

सीएनएस निदेशिका शोभा शुक्ला ने बताया कि 2018 में 15 लाख लोग टीबी से मृत हुए जिनमें से 2.5 लाख लोग एचआईवी से भी संक्रमित थे (2017 में 16 लाख लोग टीबी से मृत हुए जिनमें से 3 लाख लोग एचआईवी से संक्रमित थे).

हर नया टीबी रोगी, पूर्व में लेटेंट टीबी से संक्रमित (Latent TB infected) हुआ होता है। और हर नया लेटेंट टीबी से संक्रमित रोगी इस बात की पुष्टि करता है कि संक्रमण नियंत्रण निष्फल था जिसके कारणवश एक टीबी रोगी से टीबी बैक्टीरिया एक असंक्रमित व्यक्ति तक फैला।

What is latent TB

लेटेंट टीबी, यानि कि, व्यक्ति में टीबी बैकटीरिया तो है पर रोग नहीं उत्पन्न कर रहा है। इन लेटेंट टीबी से संक्रमित लोगों में से कुछ को टीबी रोग होने का ख़तरा रहता है। जिन लोगों को लेटेंट टीबी के साथ-साथ एचआईवी, मधुमेह, तम्बाकू धूम्रपान का नशा, या अन्य ख़तरा बढ़ाने वाले कारण भी होते हैं, उन लोगों में लेटेंट टीबी (latent TB in Hindi) के टीबी रोग में परिवर्तित होने का ख़तरा बढ़ जाता है।

Successful treatment of latent TB

दुनिया की एक-चौथाई आबादी को लेटेंट टीबी है। पिछले 60 साल से अधिक समय से लेटेंट टीबी के सफ़ल उपचार हमें ज्ञात हैं पर यह सभी संक्रमित लोगों को मुहैया नहीं करवाया गया है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2018 मार्गनिर्देशिका के अनुसार, लेटेन्ट टीबी उपचार हर एचआईवी संक्रमित व्यक्ति को मिले, फेफड़े के टीबी रोगी, जिसकी पक्की जांच हुई है, उनके हर परिवार सदस्य को मिले, और डायलिसिस आदि करवा रहे लोगों को भी दिया जाए.

संयुक्त राष्ट्र उच्च स्तरीय बैठक में सरकारों द्वारा पारित लेटेन्ट टीबी लक्ष्य इस प्रकार हैं: 2018-2022 तक 3 करोड़ को लेटेन्ट टीबी इलाज मिले (इनमें 60 लाख एचआईवी संक्रमित लोग हैं, और 2.4 करोड़ फेफड़े के टीबी रोगी – जिनकी पक्की जांच हुई है – के परिवार सदस्य (40 लाख 5 साल से कम उम्र के बच्चे और 2 करोड़ अन्य परिवार जन).

2018 में 65 देशों में लेटेन्ट टीबी इलाज 18 लाख एचआईवी से संक्रमित लोगों को प्रदान किया गया (2017 में 10 लाख एचआईवी से संक्रमित लोगों को लेटेन्ट टीबी इलाज मिला था). परन्तु वैश्विक लेटेन्ट टीबी इलाज का 61% तो सिर्फ एक ही देश – दक्षिण अफ्रीका – में प्रदान किया गया.

भारत में 2018 में, नए एचआईवी संक्रमित चिन्हित हुए लोगों (1.75 लाख) में से, सिर्फ 17% को लेटेन्ट टीबी इलाज मिल पाया (29,214).

सीएनएस निदेशिका शोभा शुक्ला ने कहा कि

“यह अत्यंत आवश्यक है कि एचआईवी से संक्रमित सभी लोगों को उनके संक्रमण के बारे में जानकारी हो, उन्हें एआरटी दवाएं मिल रही हों, और उनका वायरल लोड नगण्य रहे तथा वह टीबी से बचें, अन्यथा एचआईवी रोकधाम में जो प्रगति हुई है वो पलट सकती है, जो नि:संदेह अवांछनीय होगा.”

बॉबी रमाकांत – सीएनएस

(विश्व स्वास्थ्य संगठन महानिदेशक द्वारा पुरुस्कृत बॉबी रमाकांत, सीएनएस (सिटिज़न न्यूज़ सर्विस) के संपादक मंडल में हैं और आशा परिवार से जुड़े हैं.

राष्ट्रीय दिवस पर फिलिस्तीन के लोगों के प्रति भारत से एकता संदेश

Prof. Bhim Singh

फिलिस्तीन के साथ एकजुटता Solidarity with Palestine

राष्ट्रीय दिवस पर फिलिस्तीन के लोगों के प्रति भारत से एकता संदेश

जम्मू/कश्मीर/कोलकाता/मुंबई 29 नवंबर, 2019. नेशनल पैंथर्स पार्टी और अन्य क्रांतिकारी संगठनों के सहयोग से भारत-फिलिस्तीन मैत्री समिति (Indo-Palestine Friendship Committee) ने फिलस्तीन के लोगों के साथ एक एकता दिवस का आयोजन करके उनको राष्ट्रीय दिवस पर बधाई दी, जो भारत-फिलस्तीन मैत्री समिति व नेशनल पैंथर्स पार्टी के तत्वावधान में भारत के कई स्थानों पर 15 नवंबर, 2019 को मनाया गया था।

United Nations resolution number 181 that partitioned Palestine in 1948 to create Israel

अधिवक्ता, मीडियाकर्मियों, पूर्व सैनिकों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं की एक बैठक को संबोधित करते हुए भारत-फिलस्तीन मैत्री समिति के चेयरमैन प्रो.भीम सिंह ने फिलिस्तीन के संघर्षरत लोगों के साथ पूर्ण एकजुटता और समर्थन व्यक्त किया, जो 1948 से संयुक्त राष्ट्रसंघ प्रस्ताव स.181 के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं, जिसने फिलिस्तीन का 1948 में विभाजन कर इजरायल बनाया, जिसे आज भी एक राज्य के रूप में परिभाषित नहीं किया जा सकता है, जिसका न तो कोई परिभाषित क्षेत्र है, न ही भूगोल और यहां तक कि इसकी आबादी पूरी दुनिया में बिखरी है।

Pt. Nehru, Nasir and President Tito started the Non-Aligned Movement in 1956

प्रो. भीम सिंह ने पं. नेहरू, नासिर और राष्ट्रपति टीटो को बधाई दी, जिन्होंने 1956 में गुटनिरपेक्ष आंदोलन की शुरूआत की, फिलस्तीन के विभाजन से असहमत थे और तथाकथित इजरायल राज्य को मान्यता देने से इनकार कर दिया था। यह भारत था, जिसने संयुक्त राष्ट्र द्वारा पारित किए गए 242, 338 और अन्य प्रस्तावों में इजरायल को फिलस्तीनी क्षेत्र और अन्य अरब क्षेत्रों से खाली करने को कहा गया था, को लागू करने के लिए यासिर अराफात के नेतृत्व में फिलस्तीनी आंदोलन (पीएलओ) का शुरू से ही समर्थन किया था।

स्टेट लीगल एड कमेटी के कार्यकारी चेयरमैन एवं नेशनल पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक प्रो.भीमसिंह ने ‘लीगलिटी आफ स्टेट आफ इजराइल‘ विषय पर एक पुस्तक भी लिखी थी, जिसका प्रकाशन 1970 में कुवैत ने किया था और बड़ी शक्तियों द्वारा स्पष्ट रूप से संयुक्त राष्ट्र प्रस्तावों के कार्यान्वयन के लिए जोर दिया गया था। उन्होंने एंग्लो-अमेरिकन धड़े की भी आलोचना की, जिसने अंतर्राष्ट्रीय कानून की अवहेलना करके इजरायल को उकसा कर फिलिस्तीन को ध्वस्त करने का प्रयास किया।

Unity message from India to the people of Palestine on National Day

प्रो. भीम सिंह ने फिलस्तीन का समर्थन करने वाले विश्व के लोगों की ओर से आभार व्यक्त किया और फिलस्तीन को पूर्ण राज्य का दर्जा देने के लिए 1967 और 1968 के संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को लागू करने की भी मांग की। उन्होंने भारत सरकार और उसके नेतृत्व में पंडित जवाहरलाल नेहरू और अन्य सभी को बधाई दी, जिन्होंने फिलस्तीन को फिलिस्तीन के समर्थन में पूरे गुटनिरपेक्ष आंदोलन को एकजुट करने का समर्थन किया था।

कल दोपहर जम्मू में प्रतिष्ठित सभा को संबोधित करते हुए प्रो. भीम सिंह ने संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद की विफलता के बारे में दुनिया को याद दिलाया कि वह अपने स्वयं के फिलस्तीन के निर्णय को लागू करने में विफल क्यों है।

उन्होंने यह भी खेद प्रकट किया कि वर्तमान भारत सरकार फिलस्तीन के लोगों के समर्थन में फिलस्तीन पर भारत के मिशन को पूरा करने में विफल रहा है। यह दुर्भाग्य से भाजपा की ही सरकार थी, जिसने भारत के लिए इजरायल से मिसाइलें खरीदीं और वह भारत के पहले प्रधानमंत्री थे, जिन्होंने भारत के सबसे पुराने दोस्त फिलस्तीन की अनदेखी करते हुए इजरायल का दौरा किया।

अनेक अधिवक्ताओं, मीडियाकर्मियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने संवाददाता सम्मेलन को सम्बोधित किया, जिनमें हर्षदेव सिंह, सुश्री अनीता ठाकुर, मसूद अहमद अंद्राबी, श्री पी.के. गंजू, सुश्री अप्पू सिंह आदि अन्य शामिल थे।

समुद्र संबंधी जानकारी प्रदान करने में मददगार हो सकती हैं समुद्री प्रजातियां : सर्वे

ocean

Marine animals are increasingly instrumented with environmental sensors that provide large volumes of oceanographic data.

नई दिल्ली, 28 नवंबर 2019. एक नए अध्ययन से पता चला है कि शार्क, पेंग्विन, कछुए और अन्य समुद्री प्रजातियां इंसानों को इलेक्ट्रॉनिक टैग से समुद्र संबंधी जानकारी (Electronic tag-related ocean information) प्रदान करने में मदद कर सकती हैं।

ब्रिटेन में एक्सेटर विश्वविद्यालय के नेतृत्व में एक टीम ने कहा कि सेंसर ले जाने वाले जानवर प्राकृतिक व्यवहार जैसे बर्फ के नीचे गोता लगाना, उथले पानी में तैरना या धाराओं के खिलाफ चलना जैसे कई काम कर सकते हैं।

tortoise type in hindi
कछुए

विश्वविद्यालय के प्रमुख लेखक डेविड मार्च (David March) के मुताबिक,

“हम समुद्र के बारे में सिखाने व बताने के लिए पशु-जनित सेंसर (Animal-borne sensors) की विशाल क्षमता को उजागर करना चाहते हैं।”

उन्होंने कहा,

“यह पहले से ही सीमित पैमाने पर हो रहा है, लेकिन इसमें बहुत अधिक गुंजाइश है।”

हजारों समुद्री जानवरों को विभिन्न प्रकार के अनुसंधान और संरक्षण उद्देश्यों के लिए टैग किया गया है। मगर वर्तमान में महासागरों में एकत्रित जानकारी का व्यापक रूप से जलवायु परिवर्तन और अन्य बदलावों को ट्रैक करने के लिए उपयोग नहीं किया जाता है।

इसके बजाए निगरानी ज्यादातर अनुसंधान जहाजों, पानी के नीचे ड्रोन और हजारों फ्लोटिंग सेंसर द्वारा की जाती है।

मार्च ने कहा,

“हमने 183 प्रजातियों को देखा, जिसमें ट्यूना, शार्क, व्हेल और उड़ने वाले समुद्री पक्षी शामिल हैं और वे क्षेत्र जहां वे निवास करते हैं। हमने खराब सेंसर वाले क्षेत्रों में महासागर की सतह (विश्व स्तर का 18.6 फीसदी) की पहचान करने के लिए फ्लोटिंग सेंसर से 15 लाख से अधिक माप संसाधित किए हैं।”

ग्लोबल चेंज बायोलॉजी (global change biology) नामक पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन Towards the integration of animal‐borne instruments into global ocean observing systems” से पता चलता है कि कछुए या शार्क द्वारा एकत्र किए गए डेटा वैश्विक जलवायु परिवर्तनशीलता (Global climate variability) और मौसम पर बड़े प्रभाव के साथ अन्य दूरदराज और महत्वपूर्ण क्षेत्रों जैसे उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी समुद्र की निगरानी बढ़ा सकते हैं।

डेविड मार्च के अतिरिक्त शोध दल में लार्स बोहमे, जोक्विन टिंटोरे, पेड्रो जोक्विन वेलेज बेलची व ब्रेंडन जे. गोडले भी शामिल हैं।

Topics – Animal‐borne instruments, Argo, global ocean observing system, marine vertebrates, multi‐platform ocean observation, operational oceanography, pinnipeds, satellite tracking, sea turtles.

क्या आपने भी लंबे समय से लॉगिन नहीं किया है अपना ट्विटर खाता ? तुरंत करें नहीं तो पछताएंगे

Twitter

क्या आपने भी लंबे समय से लॉगिन नहीं किया है अपना ट्विटर खाता ? तुरंत करें नहीं तो पछताएंगे

ट्विटर निष्क्रिय अकाउंट्स हटाएगा : रिपोर्ट

Twitter will delete inactive accounts: report

नई दिल्ली, 28 नवंबर 2019 माइक्रो ब्लागिंग साइट ट्विटर अपने निष्क्रिय अकांउट्स (Inactive accounts of micro-blogging site Twitter) के मालिकों को ईमेल भेज रही है कि या तो 11 दिसंबर तक साइन इन करें या उनका यूजरनेम हटा दिया जाएगा। ट्विटर उपयोगकर्ता, जिन्होंने छह महीने या उससे ज्यादा समय से लॉग इन नहीं किया है, उन्हें कंपनी की ओर से ईमेल अलर्ट मिलेगा।

द वर्ज ने मंगलवार को ट्विटर के प्रवक्ता के हवाले से कहा,

“सार्वजनिक संवाद की सेवा के तहत हमारी प्रतिबद्धता के हिस्से के रूप में, हम निष्क्रिय खातों को हटाने के लिए काम कर रहे हैं, जिससे लोगों को अधिक सटीक, विश्वसनीय जानकारी मिले और वे ट्विटर पर भरोसा कर सकें।”

उन्होंने कहा,

“इस प्रयास का हिस्सा लोगों को ट्विटर पर पंजीकरण करने के बाद सक्रिय रूप से लॉग-इन करने और उसके उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है, जैसा कि हमारी निष्क्रिय अकांउट नीति में कहा गया है।”

हालांकि, अकांउट्स को तुरंत नहीं हटाया जाएगा। इस प्रक्रिया में कई महीने लगेंगे।

द्वितीय विश्वयुद्ध : मानवजाति के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी

इतिहास में आज का दिन, Today’s History, Today’s day in history,आज का इतिहास,

द्वितीय विश्वयुद्ध से जुड़े तथ्‍य और जानकारियां | Facts and information related to World War II

  • द्वितीय विश्व-युद्ध के समय दुनिया में कुल कितने देश थे?
  • दूसरे विश्व युद्ध में कौन कौन से देश शामिल थे?
  • द्वितीय विश्व युद्ध में कितने लोगों की मौत हुई थी?
  • द्वितीय विश्वयुद्ध में भारत

द्वितीय विश्व-युद्ध मानवजाति के इतिहास की सबसे बड़ी त्रासदी रहा है। उस समय दुनिया में कुल 73 देश थे, जिनमें से 62 देशों ने उस दूसरी लड़ाई में भाग लिया था जो 40 देशों के इलाके में फैल गई थी। दुनिया की 80 प्रतिशत से ज़्यादा जनता द्वितीय विश्व-युद्ध से प्रभावित हुई थी। दुनिया के तीन महाद्वीपों पर और चार महासागरों में वह लड़ाई लड़ी गई थी। यह दुनिया का एकमात्र ऐसा युद्ध था, जिसमें परमाणु बमों का इस्तेमाल किया गया।

अगस्त 1945 में एक अमरीकी बमवर्षक विमान ने अमरीकी राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन के आदेश पर जापान के हिरोशिमा और नागासाकी नगरों पर एटम बम गिराए थे और इसके बाद इन नगरों में दो लाख से ज़्यादा लोग मारे गए थे। कुल मिलाकर दूसरे विश्व-युद्ध में 6 करोड़ से ज़्यादा लोग मारे गए थे।

पुतिन मिस्र, वियतनाम, भारत और चेक गणराज्य के नेताओं से मिलेंगे

9 मई को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Russian President Vladimir Putin) मिस्र, वियतनाम, भारत, दक्षिणी अफ्रीका. चेक गणराज्य के नेताओं और संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव से मुलाक़ात करेंगे। रूस के राष्ट्रपति के सहायक यूरी उषाकोफ़ ने बताया कि पूतिन मिस्र के राष्ट्रपति अस-सीसी, भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, वियतनाम के राष्ट्रपति, संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून (United Nations Secretary-General Ban Ki-moon) और चेक गणराज्य के राष्ट्रपति मिलोस ज़ेमान और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति जेकब ज़ूमा (South African President Jacob Zuma) से बातचीत करेंगे। उन्होंने बताया कि 8 से 10 मई के बीच द्वितीय विश्व-युद्ध में विजय की 70 वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों में 27 देशों के नेता भाग लेंगे। इनके अलावा संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव बान की मून, यूनेस्को की महानिदेशक इरीना बोकवा और कुछ अन्य अन्तरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख भी इन कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगे। 

उन्होंने कहा कि इन देशों के प्रमुखों के अलावा अन्य प्रतिष्ठित अतिथि भी कार्यक्रमों में शामिल होंगे। जैसे ब्रिटेन के भूतपूर्व प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल के पौत्र (Grandson of former British Prime Minister Winston Churchill) भी, जो ब्रिटिश संसद के सदस्य हैं, रूस आएंगे। इनके अलावा इटली, फ्राँस, मोनाक्को आदि देशों के विदेश मंत्री और रक्षामंत्री भी द्वितीय विश्व-युद्ध में विजय की 70 वीं जयन्ती के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए मास्को आएँगे।

9 मई को बान की मून मास्को पहुंचेंगे

संयुक्त राष्ट्र महासचिव बान की मून मास्को में महान देशभक्तिपूर्ण युद्ध में विजय की 70 वीं वर्षगांठ को समर्पित समारोही कार्यक्रमों में भाग लेंगे तथा वह रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने की भी योजना बना रहे हैं।

भारतीय ग्रेनेडियर द्वितीय विश्व युद्ध में विजय की 70 वीं जयन्ती परेड में भाग लेंगे

भारतीय सेना का विशेष सैन्य-दल ‘ग्रेनेडियर’ के जवान द्वितीय विश्व युद्ध में विजय की 70 वीं जयन्ती के अवसर पर मास्को में आयोजित परेड में हिस्सा लेंगे। यह जानकारी भारत के रक्षा मन्त्रालय के प्रवक्ता सीतांश कर ने दी है। भारतीय सेना के 70 जवान पहली बार मास्को के लाल चौक पर मार्च करेंगे।

जानिए भारत के ग्रेनेडियर सैन्य-दल के बारे में

ग्रेनेडियर सैन्य-दल का गठन सबसे पहले 1779 में किया गया था। इस समय भारत की थलसेना में 19 ग्रेनेडियर बटालियनें हैं।

मास्को में आयोजित सैन्य परेड अब तक लाल चौक पर आयोजित परेडों के इतिहास में सबसे बड़ी परेड होगी। रूस ने इस परेड में भाग लेने के लिए 68 देशों के नेताओं को आमन्त्रित किया है। इनके अलावा यूनेस्को, संयुक्त राष्ट्र संघ, यूरोसंघ और यूरो परिषद के संचालकों को भी इस परेड के अवसर पर आमन्त्रित किया गया है।

द्वितीय विश्व-युद्ध के सैनिकों को सोची में पदक दिए गए

महान् देशभक्तिपूर्ण युद्ध में (द्वितीय विश्व-युद्ध में) विजय की 70 वीं जयन्ती के कार्यक्रम सोची में उस युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व-सैनिकों को जयन्ती-पदक प्रदान करने से शुरू हुए। द्वितीय विश्व-युद्ध में भाग लेने वाले पूर्व-सैनिकों को जयन्ती-पदक प्रदान करने का यह कार्यक्रम रूसी पालदार जहाज़ क्रुज़ेनश्तेर्न’ (Russian cruise ship ‘Kruzenshtern‘) के डेक पर आयोजित किया गया था। इस तरह रूसी पालदार जहाज़ ‘क्रुज़ेनश्तेर्न’ ने महान् विजय की 70 वीं जयन्ती को समर्पित अपना अन्तरराष्ट्रीय ऐतिहासिक स्मरणीय अभियान सोची में पूरा किया। दो महीने तक चले इस अभियान के दौरान पालदार जहाज़ ने बेल्जियम, फ्राँस और यूनान की यात्रा की।

‘क्रुज़ेनश्तेर्न’ तीन दिन तक सोची में रुकेगा। इन तीन दिनों के भीतर सोची का कोई भी निवासी या अतिथि इस जहाज़ को देखने के लिए जहाज़ पर आ सकेगा। जहाज़ पर इस दौरान महान् देशभक्तिपूर्ण युद्ध में विजय की 70 वीं जयन्ती को समर्पित फ़ोटो-प्रदर्शनी आयोजित की गई है।

इसके अलावा जहाज़ के गाइड जहाज़ पर आने वाले दर्शकों को अपने जहाज़ के निर्माण की कहानी और उसके इतिहास से दर्शकों को अवगत कराएँगे।

सोची से यह पालदार जहाज़ नवारस्सीस्क और केर्च के रास्ते सिवस्तापोल पहुँचेगा, जहाँ विजय-दिवस 9 मई का त्यौहार मनाया जाएगा। उसके बाद यह तुलोन, रैक्याविक, मूरमन्स्क, अखऱ्न्गेल्स्क और ग्दीनो की यात्रा करेगा।

विजय दिवस परेड में रूस के नवीनतम अस्त्र दिखाए जाएंगे

आज मास्को के लाल चौक पर होने जा रही विजय दिवस परेड में 15 हज़ार लोग भाग लेंगे।

द्वितीय विश्वयुद्ध के विख्यात टी-34 टैंकों के साथ-साथ नवीनतम मिसाइल समुच्चय आरएस-24, बख्तरबंद गाड़ियां और अतिसटीक तोपें भी इस परेड में शामिल होंगी। विजय दिवस की 70वीं वर्षगांठ समारोह की प्रबंध समिति के अध्यक्ष, राष्ट्रपति कार्यालय के प्रधान सेर्गेई इवानोव ने ‘रशिया टुडे’ से भेंटवार्ता में बताया है कि ये नवीनतम शस्त्रास्त्र पहली बार परेड में दिखाए जाएंगे।

इस परेड में हम मशहूर सू-30 और सू-35 विमान भी देखेंगे। ये नवीनतम अत्याधुनिक लड़ाकू विमान हैं, इवानोव ने इंगित किया है।

उन्होंने यह भी बताया कि परेड में पंद्रह हज़ार से अधिक लोग भाग लेंगे। परेड के दो भाग होंगे : आधुनिक और ऐतिहासिक। दूसरे भाग में सैनिक विश्व युद्ध के दिनों की सोवियत वर्दी पहनकर भाग लेंगे। वे लाल सेना की विभिन्न टुकडिय़ों और मोर्चों के झंडे लेकर चौक से गुजऱेंगे।  इसके साथ ही उन दिनों की सैनिक मशीनरी — टी-34 टैंक और फौजी ट्रक भी परेड में शामिल होंगे।

2015-05-09 को देशबन्धु में प्रकाशित लेख का संपादित रूप साभार