रवीश कुमार का गला घोंटने की कोशिश !

एनडीटीवी और रवीश कुमार की तरह की पत्रकारिता पर कोई भी हमला पत्रकारिता-धर्म पर हमला है। यह जनतंत्र का एक स्तंभ कही जाने वाली एक प्रमुख संस्था पर हमला है।

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IFFI के ज्यूरी ने क्यों कहा – “कश्मीर फाइल्स” एक प्रोपेगेंडा और वल्गर (अश्लील) फिल्म है !

पणजी में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के समापन समारोह में इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल के निर्णायक मंडल के अध्यक्ष, नादव लापिड ने कहा कि, विवेक अग्निहोत्री की फिल्म, “द कश्मीर फाइल्स” एक ‘प्रोपेगेंडा और वल्गर फिल्म’ है और IFFI में भारत के अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिता खंड में, शामिल होने के योग्य नहीं है।

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जगदीश तिरोड़कर : एक सौम्य समाजवादी का जाना

महाराष्ट्र ने समाजवादी आंदोलन और देश-दुनिया को कई समाजवादी विचारक/नेता दिए हैं. जगदीश तिरोड़कर जी पर जरूर उनका प्रभाव रहा होगा.

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श्रद्धा वाल्कर के गिद्ध-भोज के लिए जुटान

क्या श्रद्धा वाल्कर अकेली है? यह पक्का किया जाना चाहिए कि उन्नाव और बदायूं के ऐसे ही अपराधियों की तरह श्रद्धा वाल्कर के अपराधी छूट नहीं जाएंगे। हाथरस और कठुआ के वहशियों की तरह सम्मानित नहीं किये जायेंगे।

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क्या है मोदी जी की परेशानी का सबब! मन की बात छोड़कर अपनी औकात पर क्यों आए नरेन्द्र मोदी?

मोदी जी को गुजरात में घर-घर वोट क्यों मांगने पड़ रहे हैं? क्या राहुल गांधी मोदी जी के मुकाबले में हैं? वे दो काम कौन से हैं जो पीएम मोदी नहीं कर पाए?

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सावरकर के बचाव में शिवाजी का उल्लेख : भाजपा वालों ऐसी निर्लज्जता न करो

भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने खड़ा कर दिया है एक नया विवाद. सावरकर पर विवाद क्या है? भाजपा शिवाजी का अपमान क्यों कर रही है?

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सावरकर-विवाद : ताकि नवउपनिवेशवादी गुलामी बनी रहे!

भारत में जब तक सांप्रदायिक राजनीति रहेगी तब तक सावरकर भी रहेंगे. भाजपा नेता कहते हैं कि महाराष्ट्र सावरकर का है. तो क्या महाराष्ट्र साने गुरुजी का नहीं है? बाबा साहेब का नहीं है?

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अपने उद्देश्य की सही दिशा में सफलता से आगे बढ़ रही है — भारत जोड़ो यात्रा

‘भारत जोड़ो यात्रा’ को भारत के बहुलतावाद और सर्वधर्म सम भाव पर आधारित धर्मनिरपेक्ष राज्य के मुद्दों को दृढ़ता के साथ सामने लाना है,

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भारत जोड़ो यात्रा : ऐ भाई राहुल! जाना किधर है ? मंजिल कहाँ है ?

यात्राएं वही सफल होती हैं जो अपनी मंजिल ठीक तरह से चुनती हैं और उसके अनुरूप मार्ग निर्धारित करती है। अभी तक नहीं लगता कि भारत जोड़ो यात्रा की कोई निश्चित मंजिल है,

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लौह पुरुष सरदार पटेल ने देश को बनाया तो आयरन लेडी इंदिराजी ने देश बचाया

इंदिराजी ने अपने प्रधानमंत्रित्व के दौरान कुछ ऐसे करिश्माई काम किए जो शायद एक साधारण राजनीतिज्ञ नहीं कर सकता। इंदिरा गांधी जानती थीं 1977 में उनकी हार होगी, फिर उन्होंने चुनाव की घोषणा क्यों की?

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हिन्दी; ई की जगह ऊ की मात्रा : हिंदी के हिन्दुत्वीकरण की साजिश

अमित शाह की अध्यक्षता वाली संसदीय समिति की रिपोर्ट (Report of the parliamentary committee headed by Amit Shah) ने भाषा के संबंध में अब तक की मान्य, स्वीकृत और संविधानसम्मत नीति को उलट कर पूरे देश पर जबरिया हिंदी थोपने का रास्ता खोलने की आशंका साफ़-साफ़ सामने ला दी है। 

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स्वामी दयानन्द सरस्वती और मूर्तिपूजा

Swami Dayanand Saraswati and idol worship : स्वाधीनता संग्राम में स्वामी दयानन्द सरस्वती की भूमिका का विश्लेषण कर रहे हैं प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी। वासुदेव वर्मा की लिखी किताब “अठारह सौ सत्तावन और दयानन्द सरस्वती” महत्वपूर्ण कृति है।

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फोटो हिन्दी की देह है और संगीत प्राण है

हिन्दी के विकास में बाधा क्यों आयी ? नए दौर की हिन्दी की देह है फोटो और प्राण है संगीत। भाषा को क्या साहित्य बनाता है? हिन्दी में उदारता का प्रधान कारण क्या है?

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जस्टिस काटजू ऐसा क्यों लिखते हैं कि आजकल ज्यादातर उर्दू शायरी बकवास होती है

मिर्ज़ा ग़ालिब ने कभी किसी शायर की शायरी को ‘दाद’ नहीं दिया जब तक कि वो संतुष्ट न हो जाते कि शेर सचमुच प्रशंसा के लायक हैं (देखें हाली की ग़ालिब पर जीवनी)।

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क्या भारत को आधुनिक सोच वाली तानाशाही की आवश्यकता है?

जातिवाद और साम्प्रदायिकता सामंती ताकतें हैं, यदि भारत को आगे बढ़ाना है तो इन्हें नष्ट करना होगा, लेकिन संसदीय लोकतंत्र उन्हें और भी जकड़े हुए है। इसलिए इसे एक ऐसी व्यवस्था से बदलना होगा जिसके तहत देश तेजी से आगे बढ़े।

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गालियाँ और मोदी जी ! ओह माई गॉड! इन सज्जन को परेशानी क्या है?

मोदी जी की छवि झूठ बोलने वाले मसखरे की होती जा रही है. अक्सर हर थोड़े दिनों के अंतराल पर मोदी जी गालियों और कुत्साओं की गलियों में भटकते हुए पाए जाते हैं। या तो वे खुद अन्य लोगों को नाना प्रकार की गालियों से नवाजते हुए देखे जाते हैं, या अन्य की गालियों की गंदगी में लोटते-पोटते, आनंद लेते दिखाई देते हैं।

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ईडब्ल्यूएस यानी सवर्ण आरक्षण : दुनिया के सबसे बड़े अपात्र बने आरक्षण के पात्र!

ईडब्ल्यूएस यानी सवर्ण आरक्षण : हिन्दू आरक्षण व्यवस्था क्या है? जिन सवर्णों को नया आरक्षण सुलभ कराया गया है, उनकी गरीबी का एक बार ठीक से जायजा लेने पर किसी का भी सर चकरा जायेगा.

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वर्ण और जाति मुक्त भारत का संघी अभियान : नौ सौ चूहे खाके बिल्ली का हज करने का ऐलान

दलितों और पिछड़ी जातियों के उत्थान के लिए किये जाने वाले विशेष प्रावधानों का आरएसएस हमेशा से विरोधी रहा। इनके बारे में उनकी हिकारत इस कदर रही कि गोलवलकर ने इन तबकों को “माँस का टुकड़ा फेंकने पर इकट्ठे होने वाले कौए” तक बता दिया।

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न्याय नहीं पंचायती फैसले कर रहा है सर्वोच्च न्यायालय : ईडब्ल्यूएस आरक्षण पर आईपीएफ का बयान

तात्कालिक जरूरत यह है कि हम मांग करें कि इस केस का पुनर्परीक्षण हो और बेहतर तो यह है कि एक बड़ी संवैधानिक पीठ में इस प्रकरण को ले जाया जाये। 

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शांति की राह में बाधक है कश्मीर के इतिहास को तोड़ना-मरोड़ना

अनुच्छेद 370 हटाने के बाद भी कश्मीर में हिंसा समाप्त क्यों नहीं हुई? क्या कश्मीर के महाराज हरिसिंह भारत का हिस्सा बनने के लिए तैयार थे? कश्मीर के भारत में शामिल होने का सच क्या है?

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