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हस्तक्षेप

मूर्तियों की राजनीति : कर्नाटक में ईसा मसीह की प्रतिमा पर विवाद

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

Statue of Politics: Controversy over the statue of Jesus Christ in Karnataka  हमारे देश में हर छोटे-बड़े शहर के हर छोटे-बड़े चौराहे पर, पार्कों में व अन्य सार्वजनिक स्थलों पर मूर्तियाँ देखी जा सकती हैं. मूर्तियों की अपनी राजनीति (Idol politics) है. जब मायावती उत्तरप्रदेश की मुख्यमंत्री थीं तब उन्होंने प्रदेश में जगह-जगह स्वयं की, बसपा के चुनाव चिन्ह हाथी …

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राजनीतिक पराजय (जो पहले ही हो चुकी है) के बाद की पुकार !

The anti-corruption movement under the aegis of the India Against Corruption (IAC) was a unique scene of NGO mobsters' actions. एनजीओ सरगनाओं की करामात का विलक्षण नज़ारा था इंडिया अगेंस्ट करप्शन (आईएसी) के तत्वावधान में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन

लेख के शीर्षक में राजनीतिक पराजय से आशय देश पर नवसाम्राज्यवादी गुलामी लादने वाली राजनीति के खिलाफ खड़ी होने वाली राजनीति की पराजय से नहीं है. वह पराजय पहले ही हो चुकी है. क्योंकि देश के लगभग तमाम समाजवाद, धर्मनिरपेक्षता और लोकतंत्र के दावेदार नेता और बुद्धिजीवी नवसाम्राज्यवाद विरोधी राजनीति के विरोध में हैं. 1991, जब नई आर्थिक नीतियां लागू …

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आरक्षण समाप्त करने और जनता को गुलाम बनाने वाला है सीएए, एनपीआर, एनआरसी

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CAA, NPR, NRC to end reservation and enslave public विश्व में उसी देश ने अपनी जनता के लिए विकास के बहु आयामी प्रतिमान स्थापित किये हैं जिसने भी सतत् रूप से रिसर्च एवं डेवलपमेंट की दिशा में काम किया है। आजादी के बाद सभी सरकारों ने इस दिशा में कार्य किया है, मोदी सरकार को छोड़ कर। देश की खाद्यान्न …

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दलित मीडिया के उत्थान का एकमेव उपाय : विज्ञापन बाज़ार में डाइवर्सिटी

Dr B.R. Ambedkar

बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा सम्पादित –प्रकाशित मूकनायक के सौ वर्ष होने के अवसर पर विशेष लेख Special article on the occasion of hundred years of Mooknayak edited and published by Baba Saheb Dr. Bhimrao Ambedkar The only way to uplift Dalit media: Diversity in the advertising market आगामी 31 जनवरी को दलित पत्रकारिता के सौ साल पूरे (100 …

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नड्डा कैसे भरेंगे भाजपा का गड्ढा जिसे मोशा ने है खोदा

BJP Logo

JP Nadda replaced Amit Shah as BJP president: analysis The BJP has a new president – JP Nadda replacing Amit Shah. अमित शाह की जगह जे पी नड्डा को भाजपा अध्यक्ष बनाए जाने के मायने : एक विश्लेषण भाजपा में नये अध्यक्ष आ गये हैं — अमित शाह की जगह जे पी नड्डा। नड्डा पता नहीं इस प्राणहीन जीव के …

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टीवी और मोदी का पत्थर दिल !

Narendra Modi new look

Stop watching PM Modi through television images टेलीविजन इमेजों के माध्यम से पीएम मोदी को देखना बंद करो, मोदी के कामों के माध्यम से देखना आरंभ करो। टीवी इमेजों में मोदी जितना लुभावना लगता है,कामों के जरिए उतना ही डरावना लगता है। टीवी इमेजों ने मोदी की लुभावनी इमेज बनायी है। हम सबकी आदत है फोटो को ही सच मानने …

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आज संपादक इवेंट मैनेजर है तो तब वो हुआ करता था बनिये का मुनीम या मंत्र पढ़ता पंडत

Rajeev mittal राजीव मित्तल वरिष्ठ पत्रकार हैं।

पिछली सदी के नवें दशक की शुरुआत में दिल्ली के बहादुरशाह जफर मार्ग पर कतार से लगी बाटा की दुकान (Bata shop lined up on Bahadur Shah Zafar Marg, Delhi) पर रैक में सजे जूतों के डिब्बों सरीखी इमारतों में एक बैनेट कोलमैन (Bennett Coleman) में जब अपन ने प्रवेश किया तो तब अखबार पाठक के लिए छपा करते थे, …

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सीएए, एनपीआ,र एनआरसी : देश को दास युग में धकेलने की साजिश

NRC

CAA, NPA, NRC: Conspiracy to push the country into slave era पहले सीएबी आएगा। सभी शरणार्थियों को नागरिकता मिल जाएगी। उसके बाद एनआरसी आएगी। इसलिए शरणार्थियों को चिंता करने की जरूरत नहीं है, पर घुसपैठियों को जरूर डरना चाहिए। इनके क्रम को जरूर समझ लीजिए — सीबीए पहले आएगा, तब एनआरसी आएगी। एनआरसी सिर्फ बंगाल के लिए नहीं है, यह …

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हिंदुत्व टोली ने किस तरह नेताजी के साथ ग़द्दारी की, सावरकर ने नेताजी के खिलाफ अंग्रेजों का साथ दिया

Subhas Chandra Bose

सुभाष चंद्र बोस की 124वीं जयंती (2020) Subhash Chandra Bose’s 124th Birth Anniversary (2020) आरएसएस/भाजपा शासक आजकल भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानतम नेताओं में से एक शहीद नेताजी सुभाष चंद्र बोस से बहुत नज़दीकी जता रहे हैं। इस से ज़्यादा शर्मनाक हरकत कोई और नहीं हो सकती। आईए हम हिंदुत्व टोली के शर्मनाक अपराधों के बारे में जानने के लिए …

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जनता अब क्या करे? जब राजनीतिक दल फासिस्ट ताकतों का मुकाबला करने में सक्षम नहीं रह गये हैं

opinion

What should the public do now? When political parties are no longer able to counter fascist forces जनता अब क्या करे? जब राजनीतिक दल फासिस्ट ताकतों का मुकाबला करने में सक्षम नहीं रह गये हैं। विरोधी राजनीतिक दलों ने अपनी विश्वसनीयता खो दी है, जिसकी वजह से किसी भी राजनीतिक दल की इतनी सर्व स्वीकार्यता नहीं रह गई है कि …

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