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स्तंभ

मेहनतकशों के नरसंहार का महिमामंडन कर रहा है सम्पन्न नवधनाढ्य तबका

How many countries will settle in one country

The rich middle class is glorifying the massacre of working people अमेरिका में एक लाख से ज्यादा लोगों की कोरोना से मृत्यु हो गई है। चार करोड़ लोग बेरोज़गार हो गए हैं, लेकिन सम्पन्न ट्रम्प समर्थकों के लिए यह मृत्यु पर्व महोत्सव बन गया है। डॉ पार्थ बनर्जी, जो रोजनामचा लिख रहे हैं, उसमें मज़दूरों, अश्वेतों और गरीबों के इस …

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नफरत की आंधी नहीं बुझा सकेगी इंसानियत की शमा

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

The storm of hate will not be able to extinguish humanity इस समय हमारा देश कोरोना महामारी की विभीषिका (The devastation of the corona epidemic) और उससे निपटने में सरकार की गलतियों के परिणाम भोग रहा है. इस कठिन समय में भी कुछ लोग इस त्रासदी का उपयोग एक समुदाय विशेष का दानवीकरण करने के लिए कर रहे हैं. नफ़रत …

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लॉकडाउन रणनीति की विफलता और आत्मनिर्भरता मिशन की मरीचिका और विफल मोदी

Modi in Gamchha

Failure of lockdown strategy and self-reliance illusions and Modi failed नरेंद्र मोदी की लॉकडाउन की घोषणा (Narendra Modi’s lockdown announcement) की संरचना से जो बात शुरू से ही स्पष्ट थी, उसे लॉकडाउन के अघोषित विसर्जन की शुरूआत तक पहुंचते-पहुंचते, बाकायदा एलान कर के ही बता दिया गया है। और यह बात है क्या है? संक्षेप में यह बात है–कोरोना संकट …

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गधे भी ताकतवर हैं हिटलर जमाने में, लेकिन घोड़े मारे नहीं जाते, जब तक काम के होते हैं तब तक

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

गधों के सींग नहीं होते। हमारे लोगों के अपने ही नरसंहार के लिए गठित पैदल सेना के अंधे आत्मघाती सिपाही बनते देखकर कभी मैंने लिखा था। वह लेख “हस्तक्षेप” पर भी लगा था, जो अभी मिल नहीं रहा वरना शेयर जरूर करता। गधे भी इतने मूर्ख और अंधे नहीं होते जितने हमारे लोग। The horses were used by the raiders …

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बंगाल की तूफान पीड़ित जनता के साथ प्रधानमंत्री का क्रूर हास्य विनोद

Modi in Gamchha

Prime Minister’s brutal comic humor with the storm-affected masses of Bengal यह बंगाल की तूफान पीड़ित जनता के साथ प्रधानमंत्री का क्रूर हास्य विनोद है। रोम से नीरो निकलकर आये और ध्वस्त बंगाल के आसमान में उड़ते हुए अपनी बांसुरी का कमाल दिखाकर चले गए। It is a cruel joke. The prime minister insulted the people of Bengal hit by …

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यह महाविनाश का परिदृश्य है : मीडिया के लिए कोरोना काल में पाकिस्तान, चीन और अमेरिका से बड़ी कोई खबर नहीं है

super cyclone Amphan

कहा जा रहा है कि 1734 के बाद करीब तीन सौ साल बाद बंगाल में इतना भयानक तूफान आया। 1734 में तो कोलकाता बसा भी नहीं था, जहां एक करोड़ से ज्यादा आबादी (Kolkata population) है तो रोज़ एक करोड़ लोग महानगर में आते-जाते हैं। इन तीन सौ सालों से कोलकाता और बंगाल को मैनग्रोव जंगल सुंदरवन (The Sundarbans is …

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भारतीय राष्ट्रवाद का घिनौना चेहरा : सारे विश्व को कुनबा मानने वाले हमारे देश के निर्लज्ज प्रवासी शासक

How many countries will settle in one country

Disgusting face of Indian nationalism: the shameless migrant ruler of our country who considers the whole world a family राजनीति शास्त्र के छात्र के तौर पर मैंने सेम्युएल जॉनसन (Samuel Johnson) का यह कथन पढ़ा था कि देश-भक्ति के नारे दुष्ट चरित्र वाले लोगों के लिए अंतिम शरण (कुकर्मों को छुपाने का साधन) होते हैं।  इस की अगर जीती-जागती तस्वीर …

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कोरोना से मरने वाले तीन लाख लोगों के चेहरे को पहचानें। अपना चेहरा देखना न भूलें

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

कोरोना से हो रही मौतें कुछ भी नही है जो यह नई नरसंहारी ग्लोबल आर्डर भूख, बेरोजगारी के जरिये करने वाला है। कोरोना से मरने वाले तीन लाख लोगों के चेहरे को पहचानें। अपना चेहरा देखना न भूलें। करोड़ों औऱ मारे जाएंगे। पलाश विश्वास न्यूयार्क से डॉ पार्थ बनर्जी का ताजा अपडेट। Lockdown = Loss of jobs (of the poor). …

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आपदा बना कारपोरेट लूट का अवसर : योजनाबद्ध नरसंहार है यह, मजदूरों के बाद आदिवासियों और शरणार्थियों, पहाड़ियों का नम्बर

How many countries will settle in one country

नरसंहार बिना प्रतिरोध। योजनाबद्ध नरसंहार है यह। कारपोरेट हिंदुत्व का मनुस्मृति एजेंडा लागू करना ही सत्ता की राजनीति और राजकाज का मकसद रहा है। मजदूरों के बाद आदिवासियों और शरणार्थियों, पहाड़ियों का नम्बर। कोयला और खनिज प्राइवेट सेक्टर को। जल जंगल जमीन से उजाड़े जाएंगे और मारे भी जाएंगे। हम पहले भी लिख रहे थे, बोल रहे थे कि मुसलमान …

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डॉ. राम पुनियानी से समझिए जिहाद का असली अर्थ

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

जिहाद के असली अर्थ को समझने की ज़रूरत Jihad and Jihadi : ARTICLE BY DR RAM PUNIYANI IN HINDI – JIHAD जिहाद और जिहादी – इन दोनों शब्दों का पिछले दो दशकों से नकारात्मक अर्थों और सन्दर्भों में जम कर प्रयोग हो रहा है. इन दोनों शब्दों को आतंकवाद और हिंसा (Terrorism and violence) से जोड़ दिया गया है. 9/11 …

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