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स्तंभ

चिकित्सक भगवान है, ताली बजाओ, फिर लट्ठ बजाओ ?

Randhir Singh Suman CPI

The doctor is god, clap, then play the stick… देश में जनता कर्फ्यू (Janata curfew in the country) के दौरान प्रधानमंत्री की सलाह पर मीडिया, चिकित्सक व कोरोना के खिलाफ कार्य कर रहे लोगों के उत्साहवर्धन के लिए 5 बजे ताली, शंख, घड़ियाल, थाली बजाने का आवाहन किया गया था, जिस पर जनता ने जलूस निकालकर इन कर्मियों का उत्साहवर्धन …

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नोटबंदी पर पचास दिन माँगकर चौराहे पर आने को कहा था, प्रवंचक ने अब इक्कीस दिन में कोरोना के प्रभाव को ख़त्म करने की बात कही है

Modi's truth on corona virus

नोटबंदी पर पचास दिन माँगने वाले प्रवंचक ने अब इक्कीस दिन में कोरोना के प्रभाव को ख़त्म करने की बात कही है। इनकी बात पर कभी कोई यक़ीन न करें, पर लॉक डाउन (#CoronavirusLockdown) का यथासंभव सख़्ती से पालन जरूर करे। सोशल डिस्टेंसिंग छूत की ऐसी बीमारी से लड़ने के लिए सबसे ज़रूरी है। | Social distancing is most important …

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यह फरेब और धोखा है कि बिना जांच, इलाज के सिर्फ लॉक डाउन से कोरोना खत्म होगा

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

It is deceit and deception that without investigation, treatment, only the lock down will end the corona यह फरेब और धोखा है कि बिना जांच, इलाज के सिर्फ लॉक डाउन से कोरोना खत्म होगा। अपनी नाकामी पर पर्दा डालने की बेशर्म कोशिश ने पूरे देश में संक्रमण का खतरा बढ़ाया है। अर्थव्यवस्था तनहा की और आम लोगों के लिए रोजी …

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कोविड-19 : गरीब ज्यादा मरेंगे, लेकिन अमीर भी बड़ी संख्या में महामारी का शिकार होंगे, चार सुझाव

डॉ. प्रेम सिंह, Dr. Prem Singh Dept. of Hindi University of Delhi Delhi - 110007 (INDIA) Former Fellow Indian Institute of Advanced Study, Shimla India Former Visiting Professor Center of Oriental Studies Vilnius University Lithuania Former Visiting Professor Center of Eastern Languages and Cultures Dept. of Indology Sofia University Sofia Bulgaria

Covid-19: The poor will die more, but the rich will also be victims of epidemic in large numbers, four suggestions चीन में कोविड-19 की शुरुआत और फैलाव के कुछ दिनों बाद से ही यह साफ़ होता गया है कि इस महामारी से दुनिया की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है. करीब तीन महीने के अनुभव के बाद यह भी साफ़ है कि …

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म.प्र. में ऑपरेशन कमल जीता, लोकतंत्र हारा! न्यायपालिका की विफलता

Kamalnath

M.P. Operation Kamal wins, democracy loses! आखिरकार, कर्नाटक के बाद मध्य प्रदेश में भी भाजपा का ‘ऑपरेशन कमल’ जीत गया। और लोकतंत्र हार गया। सुप्रीम कोर्ट की शुक्रवार, 20 मार्च को विधानसभा में शक्ति परीक्षण कर बहुमत साबित करने (FLOOR test in assembly to prove majority) के लिए शाम 5 बजे तक की डैडलाइन से पांच घंटे पहले ही कांग्रेसी …

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भगतसिंह ने इंक़लाब ज़िंदाबाद कहा गर्व से कहा मैं मनुष्य हूँ और नास्तिक हूँ

Bhagat Singh

शहीद दिवस पर विशेष | Special on martyr’s day उनकी माला और हमारे भगतसिंह- माला कोई भी चढ़ाए भगतसिंह तो भगतसिंह हैं, माला चढ़ाने से भगतसिंह के नास्तिक भावबोध, समाजवाद के प्रति अटूट आस्था, शोषणमुक्त समाज का सपना धुँधला नहीं होता। Meaning of becoming Bhagat Singh भगतसिंह को पाना है तो भगतसिंह बनना होगा। भगतसिंह बनने का अर्थ है सत्तामोह …

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राम पुनियानी का लेख : दंगों में दलितों का मोहरे की तरह हो रहा इस्तेमाल

Role of caste in communal violence

Caste is a factor in the communal violence in India दिल्ली में हुए खून-खराबे, जिसे मुसलमानों के खिलाफ हिंसा (Violence against muslims) कहना बेहतर होगा, ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। विभिन्न टिप्पणीकार और विश्लेषक यह पता लगाने का भरसक प्रयास कर रहे हैं कि इस हिंसा के अचानक भड़क उठने के पीछे क्या वजहें थीं। लेकिन …

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कोरोना का कहर : मुफ़्त सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं का सिर्फ़ राष्ट्रीय नहीं, अन्तर्राष्ट्रीय ढाँचा तैयार हो

Arun Maheshwari - अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

कोरोना वायरस की वैश्विक चुनौती के विचारधारात्मक आयाम | Ideological dimensions of the global challenge of corona virus यूरोप में द्वितीय विश्व युद्ध के काल में जब मनुष्यता के अस्तित्व पर ख़तरा (Danger on the existence of humanity) महसूस किया जाने लगा था, तब बौद्धिक जगत में प्लेग और हैज़ा जैसी महामारियों से जूझते हुए इंसान के अस्तित्वीय संकट के वक़्त …

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सार्क के मंच पर भी झूठ ! पर हमारे मोदी जी लाचार हैं !

Narendra Modi in anger

सार्क के मंच को नष्ट करने का नुक़सान शायद मोदी जी को अब समझ में आ रहा होगा। सार्क देशों में समन्वय के प्रयत्नों की शिक्षा | lesson of coordination efforts in SAARC countries सार्क के मंच को नष्ट करने का नुक़सान शायद मोदी जी को अब समझ में आ रहा होगा। पर, सार्क देशों के बीच समन्वय (Coordination among SAARC …

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बुरी तरह से डरी हुई सरकार राष्ट्र के अस्तित्व पर संकट के अशनि संकेत दे रही

PM Narendra Modi at 100 years of ASSOCHAM meet

आरएसएस के लोगों के द्वारा ‘देशद्रोहियों’ के सफ़ाए का उत्तेजक प्रचार देश के सर्वनाश का कारण बनता हुआ नज़र आता है। Badly scared government proving signs of crisis over the existence of the nation सारे संकेत बता रहे हैं कि सरकार के पास दैनंदिन खर्च के लिये पैसों की कमी पड़ सकती है, अन्यथा आज के काल में मोबाइल और …

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