Home » हस्तक्षेप » स्तंभ (page 20)

स्तंभ

article, piece, item, story, report, account, write-up, feature, review, notice, editorial, etc. of our columnist

अमेरिका बन रहे देश के लिए जरूरी सूचना – एक बार फिर महाशक्ति अमेरिका वियतनाम से हार गया

Namaste Trump

अमेरिका बन रहे देश के लिए जरूरी सूचना एक बार फिर महाशक्ति अमेरिका वियतनाम से हार गया विडम्बना देखें, इतिहास का खेल। अमेरिका में कोरोना से एक लाख लोग मारे गए (One Lakh people died in America from Corona)। लेकिन वियतनाम में एक भी मृत्यु कोरोना से नहीं हुई। एक बार फिर महाशक्ति अमेरिका वियतनाम से हार गया। डॉ पार्थ …

Read More »

मेहनतकशों के नरसंहार का महिमामंडन कर रहा है सम्पन्न नवधनाढ्य तबका

How many countries will settle in one country

The rich middle class is glorifying the massacre of working people अमेरिका में एक लाख से ज्यादा लोगों की कोरोना से मृत्यु हो गई है। चार करोड़ लोग बेरोज़गार हो गए हैं, लेकिन सम्पन्न ट्रम्प समर्थकों के लिए यह मृत्यु पर्व महोत्सव बन गया है। डॉ पार्थ बनर्जी, जो रोजनामचा लिख रहे हैं, उसमें मज़दूरों, अश्वेतों और गरीबों के इस …

Read More »

नफरत की आंधी नहीं बुझा सकेगी इंसानियत की शमा

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

The storm of hate will not be able to extinguish humanity इस समय हमारा देश कोरोना महामारी की विभीषिका (The devastation of the corona epidemic) और उससे निपटने में सरकार की गलतियों के परिणाम भोग रहा है. इस कठिन समय में भी कुछ लोग इस त्रासदी का उपयोग एक समुदाय विशेष का दानवीकरण करने के लिए कर रहे हैं. नफ़रत …

Read More »

लॉकडाउन रणनीति की विफलता और आत्मनिर्भरता मिशन की मरीचिका और विफल मोदी

Modi in Gamchha

Failure of lockdown strategy and self-reliance illusions and Modi failed नरेंद्र मोदी की लॉकडाउन की घोषणा (Narendra Modi’s lockdown announcement) की संरचना से जो बात शुरू से ही स्पष्ट थी, उसे लॉकडाउन के अघोषित विसर्जन की शुरूआत तक पहुंचते-पहुंचते, बाकायदा एलान कर के ही बता दिया गया है। और यह बात है क्या है? संक्षेप में यह बात है–कोरोना संकट …

Read More »

गधे भी ताकतवर हैं हिटलर जमाने में, लेकिन घोड़े मारे नहीं जाते, जब तक काम के होते हैं तब तक

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

गधों के सींग नहीं होते। हमारे लोगों के अपने ही नरसंहार के लिए गठित पैदल सेना के अंधे आत्मघाती सिपाही बनते देखकर कभी मैंने लिखा था। वह लेख “हस्तक्षेप” पर भी लगा था, जो अभी मिल नहीं रहा वरना शेयर जरूर करता। गधे भी इतने मूर्ख और अंधे नहीं होते जितने हमारे लोग। The horses were used by the raiders …

Read More »

बंगाल की तूफान पीड़ित जनता के साथ प्रधानमंत्री का क्रूर हास्य विनोद

Modi in Gamchha

Prime Minister’s brutal comic humor with the storm-affected masses of Bengal यह बंगाल की तूफान पीड़ित जनता के साथ प्रधानमंत्री का क्रूर हास्य विनोद है। रोम से नीरो निकलकर आये और ध्वस्त बंगाल के आसमान में उड़ते हुए अपनी बांसुरी का कमाल दिखाकर चले गए। It is a cruel joke. The prime minister insulted the people of Bengal hit by …

Read More »

यह महाविनाश का परिदृश्य है : मीडिया के लिए कोरोना काल में पाकिस्तान, चीन और अमेरिका से बड़ी कोई खबर नहीं है

super cyclone Amphan

कहा जा रहा है कि 1734 के बाद करीब तीन सौ साल बाद बंगाल में इतना भयानक तूफान आया। 1734 में तो कोलकाता बसा भी नहीं था, जहां एक करोड़ से ज्यादा आबादी (Kolkata population) है तो रोज़ एक करोड़ लोग महानगर में आते-जाते हैं। इन तीन सौ सालों से कोलकाता और बंगाल को मैनग्रोव जंगल सुंदरवन (The Sundarbans is …

Read More »

भारतीय राष्ट्रवाद का घिनौना चेहरा : सारे विश्व को कुनबा मानने वाले हमारे देश के निर्लज्ज प्रवासी शासक

How many countries will settle in one country

Disgusting face of Indian nationalism: the shameless migrant ruler of our country who considers the whole world a family राजनीति शास्त्र के छात्र के तौर पर मैंने सेम्युएल जॉनसन (Samuel Johnson) का यह कथन पढ़ा था कि देश-भक्ति के नारे दुष्ट चरित्र वाले लोगों के लिए अंतिम शरण (कुकर्मों को छुपाने का साधन) होते हैं।  इस की अगर जीती-जागती तस्वीर …

Read More »

कोरोना से मरने वाले तीन लाख लोगों के चेहरे को पहचानें। अपना चेहरा देखना न भूलें

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

कोरोना से हो रही मौतें कुछ भी नही है जो यह नई नरसंहारी ग्लोबल आर्डर भूख, बेरोजगारी के जरिये करने वाला है। कोरोना से मरने वाले तीन लाख लोगों के चेहरे को पहचानें। अपना चेहरा देखना न भूलें। करोड़ों औऱ मारे जाएंगे। पलाश विश्वास न्यूयार्क से डॉ पार्थ बनर्जी का ताजा अपडेट। Lockdown = Loss of jobs (of the poor). …

Read More »

आपदा बना कारपोरेट लूट का अवसर : योजनाबद्ध नरसंहार है यह, मजदूरों के बाद आदिवासियों और शरणार्थियों, पहाड़ियों का नम्बर

How many countries will settle in one country

नरसंहार बिना प्रतिरोध। योजनाबद्ध नरसंहार है यह। कारपोरेट हिंदुत्व का मनुस्मृति एजेंडा लागू करना ही सत्ता की राजनीति और राजकाज का मकसद रहा है। मजदूरों के बाद आदिवासियों और शरणार्थियों, पहाड़ियों का नम्बर। कोयला और खनिज प्राइवेट सेक्टर को। जल जंगल जमीन से उजाड़े जाएंगे और मारे भी जाएंगे। हम पहले भी लिख रहे थे, बोल रहे थे कि मुसलमान …

Read More »

डॉ. राम पुनियानी से समझिए जिहाद का असली अर्थ

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

जिहाद के असली अर्थ को समझने की ज़रूरत Jihad and Jihadi : ARTICLE BY DR RAM PUNIYANI IN HINDI – JIHAD जिहाद और जिहादी – इन दोनों शब्दों का पिछले दो दशकों से नकारात्मक अर्थों और सन्दर्भों में जम कर प्रयोग हो रहा है. इन दोनों शब्दों को आतंकवाद और हिंसा (Terrorism and violence) से जोड़ दिया गया है. 9/11 …

Read More »

जीडीपी शून्य से नीचे है, तो इसका 20% कितना होगा? हिन्दूराष्ट्र का एजेंडा पूरा हुए बिना न कोरोना खत्म होगा और न लॉक डाउन

#CoronavirusLockdown, #21daylockdown , coronavirus lockdown, coronavirus lockdown india news, coronavirus lockdown india news in Hindi, #कोरोनोवायरसलॉकडाउन, # 21दिनलॉकडाउन, कोरोनावायरस लॉकडाउन, कोरोनावायरस लॉकडाउन भारत समाचार, कोरोनावायरस लॉकडाउन भारत समाचार हिंदी में, भारत समाचार हिंदी में,

नीरो खूब बजाता था और हिटलर से बेहतर कोई बोल नहीं सकता Nero played a lot and no one could speak better than Hitler बीस लाख करोड़। जीडीपी का दस प्रतिशत। आत्मनिर्भर अर्थ व्यवस्था। जीडीपी शून्य से नीचे है। तो इसका बीस प्रतिशत कितना होगा? कारोबार और उद्योग धंधे को दो महीने में जो नुकसान हुआ है, नौकरियां और आजीविका …

Read More »

देश की अधिकांश आबादी की दुर्दशा से न सरकार को डर है, न कोई बेचैनी

Modi in Gamchha

कोरोना महामारी : श्रमिक चेतना के उन्मेष का समय   तालाबंदी के डेढ़ महीना बीत जाने के बाद भी देश-व्यापी स्तर पर मेहनतकश मजदूरों की दुर्दशा (Plight of toiling laborers) का सिलसिला थमा नहीं है. हर दिन भूख, जिल्लत और अपने ही देश में बेगानेपन का दंश झेलते मजदूरों के हुजूम-दर-हुजूम चारों तरफ दिखाई दे रहे हैं. गौर कर सकते हैं …

Read More »

अमेरिका के हालात से अपने हालात की तुलना कर लें, वहां जो हो रहा है,हू-ब-हू भारत में वही हो रहा है

Donald Trump

Compare your situation with the situation in America, what is happening there is happening exactly in India. अमेरिका के हालात से अपने हालात की तुलना कर लें। वहां जो हो रहा है,हू-ब-हू भारत में वही हो रहा है। सिर्फ मृतकों की संख्या वहां 81 हजार पार है। बेरोज़गार दस करोड़। हमारे यहां आंकड़े सच बोल रहे हैं? वहां भी गरीब …

Read More »

बेरोज़गार भूखी जनता के लिए रोज़ नए दुश्मन पैदा किये जा रहे हैं

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

Everyday new enemies are being created for the unemployed hungry masses. हम भारत में अंध राष्ट्रवाद का रोना रोते हैं। यकीन मानिए, अमेरिकियों के अमेरिकावाद (Americanism of Americans) ने दुनियाभर में तबाही मचाई है और कोरोना ने बाजी पलट दी है। यही युद्धक अमेरिकीवाद पलटवार करने वाले हथियार की तरह अमेरिका का ही विध्वंस कर रहा है। हमारे पश्चिम का …

Read More »

प्रवासी मजदूरों के खिलाफ मोदी सरकार का युद्ध : असंवेदनशीलता को कृपा मनवाने का अहंकार

PM Modi Speech On Coronavirus

हरेक आपदा कोई न कोई सबक जरूर देती है। कोविड-19 महामारी का एक बड़ा सबक (A big lesson of the COVID-19 epidemic) यह भी है कि मजदूरों और खासतौर पर शहरों के प्रवासी मजदूरों के प्रति मोदी सरकार की संवेदनहीनता (Modi government’s insensitivity towards migrant laborers) का मुकाबला सिर्फ और सिर्फ एक चीज कर सकती है। और यह है इस …

Read More »

साझी विरासत जिसको हिन्दुत्ववादी टोली मटियामेट करने में लगी है

{Dr. Shamsul Islam, Political Science professor at Delhi University (retired).}

1857 स्वतंत्रता संग्राम की 163वीं सालगिरह पर : On the 163rd anniversary of the freedom struggle of 1857 10 मई 1857, दिन रविवार को छिड़े भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में देश के हिंदुओं, मुसलमानों और सिखों ने मिलकर विश्व की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी ताक़त को चुनौती दी थी।[i] इस अभूतपर्व एकता ने अंग्रेज़ शासकों को इस बात का अच्छी …

Read More »

नफरत के ज़हर की नहीं, प्रेम की खुशबू की ज़रूरत है हमें

arnab goswami,

We need the fragrance of love, not the poison of hate हमारी दुनिया पर कोरोना वायरस के हमले के बाद सभी को उम्मीद थी कि इस अदृश्य शत्रु से लडाई हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता होगी और इस लड़ाई को नस्ल, धर्म आदि की दीवारों से ऊपर उठ कर लड़ा जायेगा. परन्तु यह दुखद है कि भारत में स्थितियां इतनी बदतर हो …

Read More »

अमेरिका में अब तक 76,928 लोग मारे गए। उनकी लाशें कहाँ गयी? अंत्येष्टि कैसे हुई?

Corona virus

76,928 people have died in the US so far. Where did their dead bodies go? How was the funeral? अमेरिका में अबतक 76,928 लोग मारे गए। उनकी लाशें कहाँ गयी? अंत्येष्टि कैसे हुई? ये हालात भारत में भी बन रहे हैं। हमें चुप कराने की संस्थागत कोशिश में लगे मित्र भविष्य और वर्तमान का सामना करें। पूंजीवादी मुक्तबाजारी विश्वव्यवस्था ने …

Read More »

कोरोना समय में शराब की नदी : नोटबन्दी के बाद तालाबन्दी में जनता की औकात खुलकर सामने आ गई

Ghar Se Door Bharat Ka Majdoor

हमारी हर समस्या के लिए पाकिस्तान जिम्मेदार है। चीन जिम्मेदार है। मुसलमान जिममेदार है। नेहरू पटेल जिम्मेदार हैं। सोनिया राहुल जिम्मेदार हैं। जो एकदम जिम्मेदार नहीं है वह भारत सरकार और सत्तादल है। दुनिया की किसी गरीब से गरीब अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए कोरोना समय में संक्रमण को दावत देकर शराब की नदी बहाने की कोई दूसरी …

Read More »

हम भारत के नागरिक हैं और कोई हमें नागरिकता नहीं दे सकता – पलाश विश्वास

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

We are citizens of India and no one can give us citizenship सीएए से नागरिकता मिल भी गई तो एनपीआर, एनआरसी से नागरिकता बचेगी नहीं। हम भारत के नागरिक हैं और कोई हमें नागरिकता नहीं दे सकता। सीएए हिंदुओं को नागरिकता देने का नहीं, आम जनता को नागरिकता साबित करने की बाध्यता और नागरिकता छीनने का कानून है। 2003 के …

Read More »