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स्तंभ

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मण्डल मसीहा का सादर स्मरण, ओबीसी प्रधानमंत्री को भारत भाग्यविधाता वही बना गए

vishwanath pratap singh

करीब चार दशक की पेशेवर पत्रकारिता में मुझे रिपोर्टिंग का मौका बेहद कम मिला है, क्योंकि हमेशा अखबार निकालना मेरी जिम्मेदारी होती थी। इसलिए राजनेताओं से मेरा संवाद बहुत कम रहा है। न के बराबर। झारखण्ड में शिबू सोरेन, एके राय, विनोद बिहारी महतो आंदोलनों के साथी थे। जैसे सांसद प्रदीप टम्टा। कुछ लोग विश्वविद्यालयों के सहपाठी भी हुए। त्रिपुरा …

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‘संविधान दिवस’ कार्यक्रम : तिलमिला क्यों गए प्रधानमंत्री मोदी?

the prime minister, shri narendra modi addressing at the constitution day celebrations, at parliament house, in new delhi on november 26, 2021. (photo pib)

दिवस वहां, संविधान कहां! ‘संविधान दिवस’ के इस आयोजन से अनुपस्थित रहने का 14 विपक्षी दलों का फैसला : तिलमिला गए प्रधानमंत्री ‘Constitution Day’ program: Why did Prime Minister Modi go to tears? इस में हैरानी की कोई बात नहीं है कि सेंट्रल हाल में आयोजित सातवें ‘संविधान दिवस’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi at the 7th ‘Constitution Day’ …

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जेवर एयरपोर्ट : भाजपा का चुनावी हित या विकास की राष्ट्रनीति ?

prime minister, shri narendra modi at the foundation stone laying ceremony of noida international airport, jewar

Jewar Airport: BJP’s electoral interest or national policy of development? देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today उत्तरप्रदेश में भाजपा की स्थिति (BJP’s position in Uttar Pradesh) मजबूत करने के लिए परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यासों के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 25 नवंबर गुरुवार को जेवर में अंतरराष्ट्रीय विमानतल की नींव रखी। यह …

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जानिए पीएम की बदनाम तीन किसान बिल वापसी की घोषणा का आंतरिक सत्य क्या है

the inner truth of pm's infamous three kisan bill withdrawal announcement

Farm laws explained: Know what is the inner truth of PM’s infamous Three Kisan Bill return announcement? कृषि कानून के वो कौन से विवाद थे कि मोदी सरकार की तपस्या फेल हो गई? नरेंद्र मोदी की मानसिकता जनविरोधी और किसान विरोधी है। आज 80 करोड़ लोग बिना खाए रहते हैं भारत में। आखिर क्यों वापस लिए गए कानून? नरेंद्र मोदी …

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कृषि कानूनों का निरस्तीकरण : मोदीजी की माफीवीरता किसानों के संघर्ष और बलिदान की पहली उपलब्धि

deshbandhu editorial

कृषि कानूनों का निरस्तीकरण : किसानों के संघर्ष और बलिदान की पहली उपलब्धि Repeal of cruel agricultural laws: the first achievement of the struggle and sacrifices of the farmers देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today 16 जून 2019 को भारत-पाक के बीच वर्ल्ड कप मैच (world cup match between india pakistan) के बाद पाकिस्तान के क्रिकेट प्रेमी …

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कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले का ऐलान : एक पत्थर तो तबियत से उछालो यारो!

pm narendra modi

किसानों के संघर्ष के आगे झुक गई मोदी सरकार Modi government bowed before the farmers’ struggle आखिरकार, किसानों के संघर्ष ने मोदी सरकार को झुकने को मजबूर कर दिया है। गुरु पर्व के मौके पर, राष्ट्र के नाम एक विशेष संबोधन के जरिए, प्रधानमंत्री मोदी ने न सिर्फ तीन विवादित कृषि कानूनों को वापस लेने के फैसले का ऐलान किया …

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जानिए क्या आज भी प्रासंगिक है महात्मा गांधी का ट्रस्टीशिप सिद्धांत

Mahatma Gandhi महात्मा गांधी

महात्मा गांधी के ट्रस्टीशिप सिद्धांत की प्रासंगिकता | Relevance of Mahatma Gandhi’s doctrine of trusteeship in Hindi | relevance of mahatma gandhis trusteeship doctrine india गांधीवाद के चार प्रमुख आयाम माने जाते हैं: सत्य, अहिंसा, स्वालंबन और ट्रस्टीशिप। गांधीवाद महात्मा गांधी के उन राजनीतिक एवं सामाजिक विचारों पर आधारित है जिनको उन्होंने सबसे पहले व्यवहार में प्रयोग किया तथा उनको …

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ज्यॉक देरिदा के बहाने मित्रता की राजनीति

video essay on social media in hindi

सोशल मीडिया पर निबंध | Video Essay on Social Media in Hindi | सोशल मीडिया पर वीडियो निबंध हिंदी में सोशल मीडिया पर मित्रता क्या सोशल माडिया की मित्रता से परिवार पर बुरा असर पड़ा है ? सोशल मीडिया में निष्क्रिय समाज सक्रिय है। सोशल मीडिया का भारतीय संस्कृति पर क्या प्रभाव पड़ा है विवेचना कीजिये? इस वीडियो संवाद में …

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जिन्ना पर अखिलेश यादव की टिप्पणी : समकालीन राजनीति पर साम्प्रदायिकता की छाया

Dr. Ram Puniyani

Akhilesh Yadav on Jinnah: Communal Signaling in Contemporary Politics हमारे देश में जैसे-जैसे साम्प्रदायिकता का बोलबाला बढ़ता जा रहा है वैसे-वैसे राजनैतिक लक्ष्यों को हासिल करने के लिए सांप्रदायिक प्रतीकों और नायकों के इस्तेमाल का चलन भी बढ़ रहा है. अपने-अपने राजनैतिक एजेंडे की पूर्ति के लिए विभिन्न राजनैतिक शक्तियां अलग-अलग व्यक्तित्वों का इस्तेमाल कर रहीं हैं. लोगों को बांटने …

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उप्र : योगी का हिंदुत्व नाम केवलम्, सांप्रदायिकता का ही सहारा

yogi adityanath

UP: Yogi’s Hindutva name Kevalam, only the support of communalism Sampradayikata ka hi sahara : भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक का संदेश क्या है? भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की पिछली बैठक का सत्ताधारी पार्टी के शीर्ष नीति-निर्धारक निकाय की दो साल अंतराल के बाद हुई बैठक के नाते, रस्म-अदायगी के सिवा कोई खास अर्थ भले न हो, पर इस …

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अब प्रदूषण के लिए भी किसान जिम्मेदार! बधाई हो मोदी सरकार में भारत केवल गलत चीजों में टॉप पर है

deshbandhu editorial

प्रदूषण के लिए कौन जिम्मेदार? Who is responsible for pollution? देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today देश में दीपावली के बाद से वायु प्रदूषण बेहद बढ़ गया है। ऐसा कोई पहली बार नहीं हुआ है। साल दर साल ऐसा ही होता जा रहा है। पिछले कुछ बरसों में इसे लेकर कुछ जागरुकता फैलना की कोशिश भी जा …

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भारत के अतीत के असली उत्तराधिकारी हैं नेहरू

best quotes by pt.jawahal lal nehru in hindi

Nehru the real heir of India’s past भगवत गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाए, सुषमा स्वराज ने की थी मांग कुछ वर्ष पहले तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज (The then External Affairs Minister Sushma Swaraj) ने यह मांग की कि भगवत गीता को राष्ट्रीय ग्रंथ घोषित किया जाए। सुषमा जी की इस मांग के बाद एक राष्ट्रीय बहस प्रारंभ …

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त्रिपुरा भी धार्मिक कट्टरता की चपेट में

deshbandhu editorial

Tripura also in the grip of religious bigotry देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा में कुछ दिनों पहले तक सांप्रदायिक हिंसा और तनाव की खबरें (Reports of communal violence and tension in Tripura) फिक्र बढ़ा रही थीं। अब खबर आई है कि 25 नवंबर को नगरीय निकाय के लिए होने वाले चुनाव से पहले …

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अच्छे दिन : भूखा भारत, कुपोषित विकास

deshbandhu editorial

भाजपा के शासनकाल में भारत में भूख भी बढ़ी और कुपोषण भी क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहे हैं? (Is Prime Minister Narendra Modi fulfilling his responsibility?) देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today भारत में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अक्सर साधु-संत की तरह विभिन्न विषयों पर प्रवचन करते नजर आते हैं। ताजा उदाहरण केदारनाथ का …

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क्रूर नोटबंदी के पांच साल

deshbandhu editorial

Five years of brutal demonetisation नोटबंदी पर देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today आज से ठीक पांच साल पहले 8 नवंबर 2016 को नरेन्द्र मोदी ने भारत की अर्थव्यवस्था से जुड़ा एक ऐतिहासिक लेकिन क्रूर फैसला (A historic but cruel decision related to India’s economy) लिया था। पांच सौ और हजार रुपए के नोट एक झटके में …

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चुनाव में हार का डर लगा तो पब्लिक याद आयी! बड़े-बड़ों की अकड़ ढीली कर देता है चुनाव में हार का डर

Narendra Modi flute

When there was a fear of defeat in the election, then the public remembered! उपचुनाव के ताजा चक्र के नतीजों ने मोदी-शाह की भाजपा की ‘कड़े फैसले’ लेने की तानाशाहीपूर्ण ठसक निकाल दी है। जाहिर है कि ये ‘कड़े फैसले’ आम जनता के लिए ही ‘कड़े’ साबित होने वाले फैसले रहे हैं और ऐसे फैसले लेने की अकड़ के पीछे, …

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महात्मा गांधी का पुनर्पाठ : क्या आपको पता है गांधी का धर्म क्या था?

महात्मा गांधी का पुनर्पाठ पांचवां एपिसोड गांधी, सनातनी हिन्दू और हिन्दू धर्म की आलोचना

Rereading of Mahatma Gandhi: Do you know what was Gandhi’s religion? महात्मा गांधी का पुनर्पाठ पांचवां एपिसोड- गांधी, सनातनी हिन्दू और हिन्दू धर्म की आलोचना hastakshep इस वीडियो संवाद में प्रोफेसर जगदीश्वर चतुर्वेदी से जानिए क्या गांधी हिन्दू थे ? क्या आपको पता है गांधी का धर्म क्या था? आखिर क्यों गांधी सभी हिंदुओं से थोड़ा ज्यादा हिंदू थे? महात्मा …

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उपचुनाव : भाजपा का दरकता किला

deshbandhu editorial

उपचुनाव में भाजपा का अपराजेय होने का भरम टूट गया देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today भाजपा को अब तक ये गुमान है कि वो अपराजेय है। भाजपा के लिए किसी भी चुनाव में जीत दर्ज करना बाएं हाथ का खेल है। लेकिन मंगलवार को भाजपा का ये भरम टूट गया। 30 अक्टूबर को देश की तीन …

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शाहरुख खान की 24 बरस तक दबी ख्वाहिश पूरी हो गई ?

pushpranjan

आर्यन खान से आगे भी है दुनिया (The world is even ahead of Aryan Khan) आज से 24 साल पहले 1997 में सिमी ग्रेवाल शो होस्ट (Simi Grewal show host) कर रही थीं, जिसमें शाहरूख़ ख़ान और गौरी छिब्बर ख़ान स्क्रीन पर नमूदार थे। इस इंटरव्यू के तीन हफ्ते पहले आर्यन का जन्म हो चुका था। जैसा कि सिमी ग्रेवाल …

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क्यों कांग्रेस के शीर्ष पर ‘गांधी’ परिवार का कोई विकल्प दूर-दूर तक नजर नहीं आता?

Rahul Gandhi

गंभीर अनिश्चितताओं को खुद न्यौत लिया है कांग्रेस ने | Congress itself has invited serious uncertainties अचरज की बात नहीं है कि पंजाब सरकार में पिछले ही महीने हुए उलट-फेर पर कई टिप्पणीकारों ने अपनी इस धारणा को दोहराया था कि कांग्रेस, आत्मघात की प्रवृत्ति से ग्रस्त नजर आती है। विधान सभाई चुनाव से चंद महीने पहले, मुख्यमंत्री बदलने और …

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ईसाई अल्पसंख्यक और भारतीय प्रजातंत्र : अल्पसंख्यकों के विरूद्ध हिंसा की घटनाएं क्यों बढ़ रही हैं?

Dr. Ram Puniyani - राम पुनियानी

Christian Minority and Indian Democracy: Dr. Ram Puniyani’s article in Hindi जैसे-जैसे साम्प्रदायिक राष्ट्रवाद और मजबूत, और मुखर होता जा रहा है वैसे-वैसे धार्मिक अल्पसंख्यकों को डराने-धमकाने और उनके विरूद्ध हिंसा की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं. पिछले एक दशक में इस प्रवृत्ति में तेजी से वृद्धि हुई है. मुस्लिम विरोधी हिंसा की चर्चा तो फिर भी होती रहती है …

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