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स्तंभ

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हाल फिलहाल : पंजाब में कांग्रेस का खेला ! चरणजीत सिंह चन्नी और पंजाब की राजनीति

पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को नया मुख्यमंत्री बनाए जाने पर टिप्पणी. पंजाब की राजनीति का यक्ष प्रश्न – क्या कांग्रेस अपना किला बचा पाएगी ? पंजाब की राजनीति का यूपी की राजनीति पर क्या असर होगा ? क्या राजस्थान और छत्तीसगढ से भी उठेंगी नेतृत्व परिवर्तन की मांग  This is being called a masterstroke of the Congress high command …

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भारतीय राजनीति का बाल्कनीकरण / ‘बाल्कनाइज़ेशन’

pushpranjan

बाल्कनीकरण / ‘बाल्कनाइज़ेशन‘ क्या है ? | What is ‘Balkanization’in Hindi? लेबनानी अर्थशास्त्री व पूर्व वित्तमंत्री जार्ज कार्म (Lebanese economist and former finance minister Georges Karam) अभी जीवित हैं। रोम स्थित फूड एंड एग्रीकल्चर आर्गेनाइजेशन (एफएओ) के वो आर्थिक सलाहकार थे, तभी वहां उनसे पहली मुलाक़ात हुई थी। वैल्यू एडेड टैक्स (वैट) इन्हीं की दिमाग़ी उपज थी। 81 साल के …

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“डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिन्दुत्व” : क्या हिन्दुत्व और हिन्दू धर्म एक ही हैं?

Dr. Ram Puniyani

Dismantling Global Hindutva: Are Hinduism and Hindutva the same? गत 10 से 12 सितंबर तक एक ऑनलाइन वैश्विक संगोष्ठी (online global seminar) आयोजित की गई जिसका विषय था “डिसमेंटलिंग ग्लोबल हिन्दुत्व” (वैश्विक हिन्दुत्व का विनिष्टीकरण– Dismantling Global Hindutva). इस संगोष्ठी को दुनिया भर के ऐसे 15 कार्यकर्ताओं और अध्येताओं ने संबोधित किया जो अपने-अपने देशों में हिन्दू राष्ट्रवाद के विभिन्न …

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हिंदी के बेडौल अपराध साहित्य की एक नजीर — ‘पिशाच’

Arun Maheshwari - अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

Review of crime novel Pishach by Arun Maheswari पिछली 29 अगस्त को वीडियो पत्रकार अजित अंजुम ने अपने यूपी चुनाव और किसान आंदोलन संबंधी कवरेज के बीच अचानक ही हिंदी के हाल में प्रकाशित एक ‘क्राइम थ्रिलर’ ‘पिशाच’ पर चर्चा की। इसके लेखक संदीप पालीवाल के साथ ही उनके एक मित्र विनोद कापड़ी भी चर्चा में शामिल थे। ये तीनों …

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हिंदी आज़ादी की लड़ाई की राष्ट्रभाषा थी, जो सत्ता की राजभाषा बन गयी?

debate

Hindi Diwas : Hindi was the national language of the freedom struggle, which became the official language of power? What were the objectives of making Hindi the national language? Photo by Ketut Subiyanto on Pexels.com हिंदी दिवस पर रस्म अदायगी (Rituals on Hindi Diwas) करने वालों से निवेदन है कि भारत के सभी प्रान्तों के मनीषियों और विशेष तौर पर …

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जानिए कौन थे जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह, जिनके नाम पर अलीगढ़़ में बन रही यूनिवर्सिटी

कौन थे जाट राजा महेंद्र प्रताप सिंह, जिनके नाम पर अलीगढ़़ में बन रही यूनिवर्सिटी Who was Jat Raja Mahendra Pratap Singh, in whose name a university is being built in Aligarh? कौन थे राजा महेंद्र सिंह, जिनके नाम पर बनने वाली है यूनिवर्सिटी क्रांतिकारी राजा महेन्द्र प्रताप और आधुनिक भारत Revolutionary King Mahendra Pratap and Modern India. https://www.hastakshep.com का …

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जनांदोलन बन चुका है किसान आंदोलन

Ghazipur border: farmers will plant flowers near police forts.

Farmers’ movement has become a mass movement बेनतीजा रही सरकार और किसानों के बीच बातचीत भारत सरकार के तीन नए कृषि कानूनों के विरोध में पिछले 9-10 महीनों से दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में किसान शांतिपूर्ण और अहिंसक आंदोलन कर रहे हैं। सरकार के साथ किसान नेताओं की कई दौर की बातचीत (Several rounds of talks of farmer …

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आपका तो लगता है बस यही सपना, अब्बाजान जपना, पराया विकास अपना

deshbandhu editorial

योगी सरकार के विज्ञापन पर क्यों फंसे योगी आदित्यनाथ ? Why Yogi Adityanath stuck on Yogi Sarkar’s advertisement? एक प्रतिष्ठित अंग्रेजी अखबार के रविवार के अंक में योगी सरकार की उपलब्धियों का एडवरटोरियल यानी विज्ञापन छपा | In the Sunday issue of a reputed English newspaper, an advertisement of the achievements of the Yogi government was published. देशबन्धु में संपादकीय आज | …

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एक विमर्श से खुलती गांठों की कहानी और ऐंकर की कुर्सी पर आशुतोष का गदलापन

opinion, debate

Arun Maheshwari on Satya Hindi Debate on Hindutwa —अरुण माहेश्वरी ‘सत्य हिंद’ वेब पोर्टल पर ‘आशुतोष की बात’ कार्यक्रम में दो दिन पहले की एक लगभग डेढ़ घंटा की चर्चा को सुना जिसका शीर्षक था — ‘हिंदुत्व पर बहस से डरना क्यों’। संदर्भ था ‘विश्व हिंदुत्व को ध्वस्त करने’ के विषय में दुनिया के कई विश्वविद्यालयों का एक घोषित अन्तर्राष्ट्रीय …

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मुक्तिबोध के बहाने : प्रेम को कैसे व्यक्त करें ?

मुक्‍ति‍बोध पहले हि‍न्‍दी लेखक हैं जो अपने प्रेम का अपने ही शब्‍दों में बयान करते हैं। मुक्‍ति‍बोध का अपनी प्रेमि‍का जो बाद में पत्‍नी बनी, के साथ बड़ा ही गाढ़ा प्‍यार था, इस प्‍यार की हि‍न्‍दी में मि‍साल नहीं मि‍लती। आज गजानन माधव मुक्तिबोध की पुण्यतिथि है- Today is the death anniversary of Gajanan Madhav Muktibodh. हि‍न्‍दी का लेखक अभी …

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भारत : क्या हम आज झूठ की एक दुनिया में रह रहे हैं?

गांधीजी ने क्यों कहा था कि सत्य ही ईश्वर है? हम झूठ कब बोल रहे होते हैं? क्या हम आज भी झूठ की एक दुनिया में रह रहे हैं? India: Are we still living in a world of lies?  –इरफान इंजीनियर महात्मा गांधी ने एक बार कहा था, “सत्य ही ईश्वर है”. सत्य शब्द का प्रयोग कई अर्थों में किया …

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नेहरू के व्यक्तित्व और आचरण से हम क्या सीख सकते हैं?

नेहरू के व्यक्तित्व और आचरण से हम क्या सीख सकते हैं? जवाहरलाल नेहरू का पत्नी प्रेम. व्यक्तित्व मूल्यांकन का आधार क्या हो ?  जवाहरलाल नेहरू का पत्नी प्रेम – Jawaharlal Nehru’s wife-love व्यक्तित्व मूल्यांकन का आधार क्या हो ? What is the basis of personality assessment? व्यक्तित्व मूल्यांकन का आधार नैतिकता नहीं, नजरिया होना चाहिए। व्यक्ति के नजरिए और निजी …

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क्या तालिबान की तुलना आरएसएस से हो सकती है?

Dr. Ram Puniyani - राम पुनियानी

Hindi Article By Dr Ram Puniyani- Are all Fundamentalisms Similar: Can Taliban be compared to RSS? Naseeruddin Shah: Javed Akhatar and Comments on Taliban क्या सभी कट्टरपंथी एक ही थैली के चट्टे-बट्टे होते हैं? अफगानिस्तान में तालिबान की सत्ता में वापिसी (Taliban coming to power in Afghanistan) ने उनके पिछले शासनकाल की यादें ताजा कर दी हैं. उस दौरान तालिबान …

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ज्ञानवापी पर बड़ा अदालती फैसला

Today's Deshbandhu editorial

ज्ञानवापी मस्जिद मामले में इलाहाबाद उच्च न्यायालय का फैसला देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों से चंद महीने पहले एक अहम अदालती फैसला आया है। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने ज्ञानवापी मस्जिद मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मस्जिद परिसर में पुरातत्व विभाग यानी एएसआई के सर्वेक्षण पर रोक लगा दी है। उच्च न्यायालय ने …

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माणिक बंदोपाध्याय और समरेश बसु की कहानियों से ज्यादा मानवीय है शेखर जोशी का कथा संसार

shekhar joshi

आज हिंदी के शीर्ष कथाकार शेखर जोशी का जन्मदिन है Today is the birthday of top Hindi story writer Shekhar Joshi. पलाश विश्वास आज हिंदी के शीर्ष कथाकार अपने सोमेश्वर के ओलिया गांव के शेखर जोशी का जन्मदिन है। उन्हें प्रणाम और हस्तक्षेप परिवार की ओर से जन्मदिन की बधाई। मानवीय हैं शेखर जोशी की कहानियां कोसी के घटवार और …

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जनता को सताकर मालामाल होती मोदी सरकार

deshbandhu editorial

Modi government getting rich by persecuting the public  देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों से देशवासी चाहे जितने परेशान हों लेकिन भारत सरकार को इससे भरपूर फायदा हो रहा है। शायद यही कारण हो कि सरकार इनकी कीमतें घटाने के लिये तैयार नहीं है और लोगों की मजबूरी का फायदा उठाकर खूब धन बटोर लेना …

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पीएम मोदी पर भगवान कुपित क्यों हैं !

Why is God angry with PM Modi? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अभागे और कमअक्ल पीएम हैं ! वे जिस लक्ष्य को हासिल करना चाहते हैं, भगवान की कृपा से ठीक उलटा हो जाता है। उन्होंने दावे किए दो करोड़ लोगों को सालाना रोजगार देने के, लेकिन उलटा हो गया,15 करोड़ से अधिक लोगों के रोजगार छिन गए। पांच ट्रिलियन डॉलर की …

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विभीषिका का स्मरण या स्मरण की विभाषिका : नयी विभीषिकाएं रचने के लिए विभीषिका स्मरण

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने स्वतंत्रता के साल भर चलने वाले अमृत महोत्सव की पूर्व-संध्या में, ट्वीट कर के जिस तरह अचानक इसका एलान किया कि अब से 14 अगस्त के दिन का ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ (partition horror memorial day) के रूप में पालन किया जाएगा, उसने जाहिर है कि खुद शासन में शामिल लोगों समेत …

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मोदी कंपनी को देखकर चर्चिल की बात याद आती है “भारत के नेता मीठी बातें करेंगे पर मन से गंदे होंगे।“

 अफ़ग़ानिस्तान का सबक : पुरातनपंथी जुझारूपन कहीं भी स्थिरता नहीं ला सकता सम्मति का अर्थ क्या होता है –अरुण माहेश्वरी अफ़ग़ानिस्तान में हामिद करजाई और अब्दुल्ला अब्दुल्ला जैसे नेताओं से पहले वार्ता और उसके बाद उन्हें नज़रबंद करने का वाक़या यह सवाल उठाता है कि उस देश में किसी सर्वसमावेशी सरकार का गठन कैसे संभव होगा जहां किसी भी सभा …

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राजधानियों में ही नहीं, हर जिले में हर गांव में किसान आंदोलन की जरूरत

Not only on the road, not only in the capitals but there is also a need for farmers’ movement in every village in every district. पलाश विश्वास रुद्रपुर गोल मार्केट गुरुद्वारा (Rudrapur Gol Market Gurdwara) में हुई बैठक आम बैठक नहीं थी। यह बैठक समस्त किसान संगठनों को लेकर उत्तराखण्ड में संयुक्त किसान मोर्चा के निर्माण,  मोर्चे के कार्यक्रमों की …

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अफगानिस्तान : भारत अपने हितों के बारे में स्पष्ट संदेश दे!

Opinion, Mudda, Apki ray, आपकी राय, मुद्दा, विचार

Afghanistan: India should give a clear message about its interests! The latest developments in Afghanistan have sent a complex message अफगानिस्तान के ताजा घटनाक्रम ने कई जटिल संदेश भेजे हैं लेकिन उनमें सर्वाधिक महत्वपूर्ण यह है कि यदि योद्धा लक्ष्य प्राप्ति के लिए लड़ रहे हों तो धन, शस्त्र और सैनिकों की अंतहीन आपूर्ति के बावजूद उबड़-खाबड़ भूमि पर कब्जा …

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