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चौथा खंभा

Critical News of Journalism – The Fourth Pillar of Democracy, Opinion, and Media Education लोकतंत्र का चौथा खंभा पत्रकारिता जगत की आलोचनात्मक खबरें, ओपिनियन, और मीडिया शिक्षा

जस्टिस काटजू ने बताया भारतीय मीडिया का मानसिक स्तर कितना नीचा है

Ajit Anjum Ashutosh Justice Katju

भारतीय मीडिया का मानसिक स्तर हमारी मीडिया का मानसिक स्तर कितना नीचा है वह इस वीडियो से मालूम हो जाता हैI हर राजनैतिक व्यवस्था या राजनैतिक कार्य का एक ही परख और कसौटी है : क्या उससे आम लोगों का जीवन स्तर बढ़ रहा है कि नहीं ? क्या उससे लोगों को बेहतर ज़िन्दगी मिल रही है कि नहीं ? …

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जस्टिस काटजू ने पत्रकारों को जनरल वी के सिंह द्वारा प्रेस्टिट्यूट्स कहने को अब सही क्यों ठहराया ?

Justice Markandey Katju

कहाँ वोल्टेयर और रूसो और कहाँ भारतीय पत्रकार ? कहाँ राजा भोज और कहाँ गंगू तेली ? आजकल कई समाचारपत्रों, वेबसाइट और टीवी चैनल पर पत्रकारों द्वारा यही चर्चा चल रही है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से योगी आदित्यनाथ हटाए जाएंगे कि नहीं, अरविन्द कुमार शर्मा, जो मोदीजी के बहुत क़रीबी माने जाते हैं, को योगी आदित्यनाथ उत्तर …

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बीजेपी का भविष्य : स्वघोषित बुद्धिजीवी पत्रकारों के उतावलेपन पर जस्टिस काटजू की दो टूक

Ajit Anjum Ashutosh Justice Katju

बीजेपी का भविष्य कई पत्रकार, वेबसाइट और टीवी चैनल कह रहे हैं कि बीजेपी की जनप्रियता गिर रही है और इसलिए उसका भविष्य अंधकारमय हैI (संदर्भ के लिए लेख के अंत में यूट्यूब लिंक देखें) यह स्वघोषित बुद्धिजीवी पत्रकार फरवरी 2022 के उत्तर प्रदेश विधान सभा के आगामी चुनाव के बारे में अटकलें लगा रहे हैं कि इसमें बीजेपी की …

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भारत के ‘स्वतंत्र’ पत्रकारों के विचित्र कारनामे

Justice Markandey Katju

The bizarre exploits of India’s ‘independent’ journalists भारत में ‘गोदी’ मीडिया की तो बहुत निंदा हुई है, मगर हमारे तथाकथित ‘स्वतंत्र’ पत्रकारों की हरकतें, हथकंडे और अनोखे कार्य भी आश्चर्यजनक और टिप्पणी योग्य हैंI उदाहरण के लिए एक महिला पत्रकार हैं, जो राडिया टेप्स के स्कैंडल में लिप्त थींI 1999 की कारगिल युद्ध और 2008 के मुंबई आतंकी हमले में …

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जस्टिस काटजू का लेख : मीडिया की भूमिका

Justice Markandey Katju

मीडिया की भूमिका मीडिया की मुख्य भूमिका होती है जनता को वारदातों की सही जानकारी देना। पर इसके अलावा उसकी यह भी ज़िम्मेदारी होती है कि जनता को उज्ज्वल जीवन पाने की दिशा दिखाना और वैचारिक क्षेत्र में जनता को सही नेतृत्व प्रदान करना। ऐतिहासिक दृष्टिकोण से मीडिया का उदय पश्चिमी यूरोप में १८वीं सदी में हुआ। उस समय सारे …

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जस्टिस काटजू ने कहा “सत्यहिंदी.कॉम” की मोटी बुद्धि सिर्फ मोदी विरोध तक सीमित है

Justice Markandey Katju

Justice Katju said that the idea of “Satyahindi.com” is limited only to the Modi opposition. एक हिंदी वेबसाइट है सत्यहिंदी.कॉम जो लगातार मोदी और बीजेपी की निंदा कर रहा है। मैं कोई बीजेपी या मोदी का समर्थक नहीं हूँ, मगर मैं इस वेबसाइट के संस्थापकों और चालकों से एक सवाल पूछना चाहता हूँ। यदि मोदी और बीजेपी अगले चुनाव में …

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हिंदी पत्रकारिता दिवस : उत्तराखंड के जनांदलनों का प्रतिबिंब रहा है ‘नैनीताल समाचार’

nainital samachar

उत्तराखंड नैनीताल समाचार | Uttarakhand Nainital Samaachaar पण्डित युगुल किशोर शुक्ल ने 30 मई 1826 को हिन्दी समाचार पत्र उदन्त मार्तण्ड का प्रकाशन आरम्भ किया था । उसी ऐतिहासिक दिन की याद में और हिंदी पत्रकारिता को बढ़ावा देने के लिए हर वर्ष 30 मई को हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाया जाता है। उदन्त मार्तण्ड के बाद से सैंकड़ों हिंदी समाचार …

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कोरोना डायरी से जन्मदिन डायरी बनने की रोचक कहानी

himanshu joshi jouranalism हिमांशु जोशी, पत्रकारिता शोध छात्र, उत्तराखंड।

जन्मदिन की डायरी : पत्रकारिता का एक दस्तावेज़ Birthday Diary: A Journalism Document पिछले मई जब क़लम को दुनिया की सबसे बड़ी ताकत मानते लिखना शुरू किया था तब यह समझ नहीं आया था कि यह मेरा भ्रम है या विश्वास। तब से आज एक साल पूरा हो गया और कोरोना काल में बहुत बार ऐसा लगा कि यह मेरा …

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अखिलेश कृष्ण मोहन : बहुजन पत्रकारिता के विरल रत्न

akhilesh krishna mohan

अखिलेश कृष्ण मोहन के निधन पर श्रद्धांजलि! | Tribute to the demise of Akhilesh Krishna Mohan! कल सुबह एक खास लेख लिखने में व्यस्त था. उसका अंतिम वाक्य लिखना शुरू ही किया था कि मोबाइल बज उठा. वह डॉ. कौलेश्वर प्रियदर्शी का कॉल था. अंतिम वाक्य पूरा करना इतना जरूरी लगा कि कॉल रिजेक्ट कर दिया. ज्यों ही लेख पूरा …

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श्रीमान हम आपको इस आलेख के कोई पैसे नहीं दे सकते !

media

“श्रीमान हम आपको इस आलेख के कोई पैसे नहीं दे सकते। सहयोग के लिए सम्पादक के धन्यवाद सहित सादर।“ किसी स्वतंत्र पत्रकार के लिए उसके किसी आलेख पर यह जवाब अब आम हो चुका है। स्वतंत्र पत्रकार ही नहीं किसी न किसी संस्थान से जुड़े बहुत से पत्रकार भी कोरोना के दौरान अपनी नौकरी खोने के बाद अब उस दिन …

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सीरियल संस्कृति, राजनीति और विचारधारा : टेलीविजन की खतरनाक राजनीति

Dangerous politics of television

Jagadishwar Chaturvedi was live on 6th April 2020 टीवी एक माध्यम के रूप में जहां भी TV  गया, स्वभावतः वह कंजर्वेटिव है। टीवी ने समाज में तरह तरह के घेटो तैयार किए। अमेरिका के समाज में हजारों घेटो मिलेंगे टीवी की अंतर्वस्तु महत्वपूर्ण नहीं है। सोवियत संघ में टीवी का सबसे बड़ा नेटवर्क था। सोवियत संघ पहला राष्ट्र था जिसने …

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बढ़ता दायरा फेक न्यूज़ का

Opinion, Mudda, Apki ray, आपकी राय, मुद्दा, विचार

फेक न्यूज की तरह सरकार भी बेलगाम                आप सबने एक कहावत सुनी होगी – “लम्हों  ने खता की, सदियों ने सज़ा पाई।” मानव सभ्यता के इतिहास में जब कोई शासक कोई बड़ी भूल कर देता है तो लंबे समय तक समाज उसके परिणाम भुगतता रह जाता है। नेता का काम समाज को बांटना नहीं, समाज को जोड़ना होता है, लेकिन …

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उत्तराखंड की उठापटक का संदेश और जनता की जनमीडिया के प्रति जिम्मेदारी

trivendra singh rawat

After Trivendra Singh Rawat’s resignation, Uttarakhand political developments वर्ष 2017 में हुए उत्तराखंड विधानसभा चुनाव (Uttarakhand Assembly Elections) में भाजपा ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 70 विधानसभा सीटों में से 56 सीटों में जीत हासिल की थी। इसी उपलब्धि के चार साल पूरे होने के जश्न में उत्तराखंड सरकार 18 मार्च को ‘बातें कम काम ज्यादा’ कार्यक्रम मनाने की तैयारी …

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अमित शाह ने भक्त संपादक सुमित अवस्थी को धो डाला, वीडियो हुआ वायरल, आपने देखा ?

aMIT sHAH VIRTUAL RALLY

Amit Shah insults Sumit Awasthi टीवी एंकरों में एक बड़ा समुदाय भक्त प्रजाति का है। ये बक्त एंकर संपादक  24*7 देश में द्वेष ही फैलाते रहते हैं और पत्रकारिता न करके सत्ता की चारण वंदना ही करते रहते हैं। लेकिन गृह मंत्री अमित शाह इन भक्तों को उनकी सही जगह पर ही रखते हैं। अब एक वीडियो एबीपी न्यूज के …

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पत्रकारों को कानूनी सुरक्षा देने के लिए जेजेए का संघर्ष

Press Freedom

रांची से शाहनवाज हसन. झारखंड में पत्रकारों की सुरक्षा (Security of journalists in Jharkhand) हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है। रघुवर दास के कार्यकाल में झारखण्ड के विभिन्न जिलों में बड़ी संख्या में पत्रकारों की हत्यायें एवं झूठे मुकदमों के बाद जेल भेजने की घटनाओं को तब विपक्षी दलों  चुनावी मुद्दा बनाते हुए इसे अपने घोषणापत्र में शामिल करने …

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अधिक खतरनाक होता है कम वेतन पाने वाला पत्रकार

media

Low paid journalist is more dangerous : Vijay Shankar Singh पत्रकारों को कम वेतन नहीं देना चाहिए। कम वेतन पाने वाला पत्रकार अधिक खतरनाक हो सकता है। कभी यह रोचक निष्कर्ष निकाला था, पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ केनेडी ने। कार्ल मार्क्स पर उनकी यह एक रोचक टिप्पणी है। यह कथन जॉन एफ केनेडी के ओवरसीज प्रेस क्लब न्यूयॉर्क में …

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Attack on Newsclick: पत्रकारिता और लोकतंत्र के लिए जरूरी है न्यूज़क्लिक पर हमले का विरोध

media

MEDIA FREEDOM: The attack on Newsclick must be resisted by those who care about journalism – and democracy in India मैं पत्रकारों पर हमले, कार्यकर्ताओं और लेखकों की गिरफ़्तारी (Attack on Newsclick) के बारे में पढ़ती रही हूँ और देख रही हूँ कि असहमति के सभी लोकतांत्रिक जगहों को कैसे समाप्त किया जा रहा है। 2010 से 2020 के बीच …

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दूबधान : समय और समाज का हलफनामा

Doobdhan

उषा किरण खान का कथा संग्रह ‘‘दूबधान’’ : पुस्तक समीक्षा उषा किरण खान अपनी कहानियों के लिए जानी जाती हैं। गांँव की हसीन भंगिमाएं, इनकी कहानी की पहचान है। ‘‘दूबधान’’की 24 कहानियाँ समय और समाज की सच्चाई का हलफ़नामा हैं, तो दूसरी ओर कहानियाँ, नई जमाने को हैरान भी करती हैं। क्यों कि, कहानी की सभी महिलाएं गाँव की पुरानी …

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पूछता है भारत : राष्ट्रवाद के स्वांग से खोखला होता गणतंत्र

arnab goswami,

Poochta Hai Bharat : Republic becomes hollow due to nationalism drama रिपब्लिक टीवी के मुख्य कर्ताधर्ता और मोदी सरकार का विशेष संरक्षणप्राप्त समाचार टीवी संपादक/ एंकर, Arnab Goswami (अर्णव गोस्वामी) और टीवी रेटिंग एजेंसी, ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (Broadcast Audience Research Council -बीएआरसी या बार्क) के मुखिया, पार्थो दासगुप्त की व्हाट्सएप के जरिए बातचीत का, भारत के बहत्तरवें गणतंत्र दिवस …

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जब बहुत से कांग्रेसी खुलकर या दबे-छिपे भाजपा के मददगार बन गए थे

Lalit Surjan

देशबन्धु : चौथा खंभा बनने से इंकार – 31 अविभाजित मध्यप्रदेश में छत्तीसगढ़ ने प्रदेश को चार मुख्यमंत्री दिए- प्रथम मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल, राजा नरेशचंद्र सिंह, श्यामाचरण शुक्ल और मोतीलाल वोरा। इस लिस्ट में रिकॉर्ड के लिए चाहें तो क्रमश: कसडोल व खरसिया से पद ग्रहण के बाद उपचुनाव जीते द्वारकाप्रसाद मिश्र तथा अर्जुन सिंह के नाम भी जोड़ लें। …

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क्या सरकार द्वारा पत्रकारों को पुरस्कृत करना उचित है?

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Is it fair for the government to reward journalists? अभी हाल में मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रति प्रतिबद्ध रहे प्रतिष्ठित पत्रकार स्वर्गीय माणिक चंद वाजपेयी (Eminent journalist late Manik Chand Vajpayee who was committed to the Rashtriya Swayamsevak Sangh) के नाम व स्मृति में पत्रकारों के लिए पुरस्कार की पुर्नस्थापना की है। यह पुरस्कार पूर्व में …

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