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चौथा खंभा

पत्रकारिता दिवस पर डॉ. कमला माहेश्वरी ‘कमल’ के कुछ दोहे

Dr. Kamla Maheshwari 'Kamal'

Some couplets of Dr. Kamla Maheshwari ‘Kamal’ on Journalism Day 💐आज पत्रकारिता दिवस पर सभी पत्रकार बन्धुओं को मेरी बहुत -बहुत शुभकामनाएं व शताधिक नमन __💐. कुछ दोहे उन्हें समर्पित करती हूँ __   पत्रकारिता क्षेत्र वह, दिखलाता है साँच. कठिन घड़ी कितनी रहे लेता है सब बाँच..   सत्य खोज हित छानता पर्त-पर्त वो बात. तब ही तो है …

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‘सिधपुर की भगतणें’ : प्रमादग्रस्त स्त्रियों की शील कथा

Sidhpur ki Bhagtanen

लगभग तीन साल पहले अपनी एक ट्रेन यात्रा में हमने इस उपन्यास को पढ़ने की कोशिश की थी। उसे इसलिये महज एक कोशिश ही कहेंगे, क्योंकि उपन्यास की तरह की एक रचनात्मक विधा में किये गये किसी भी गंभीर काम को तब तक सही ढंग से नहीं पढ़ा जा सकता है, जब तक आप इतने इत्मीनान में न हों जिसमें …

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कोरोना महामारी के नाम पर मीडिया हाउस का शिकार बन रहे हैं पत्रकार, कांग्रेस शासित राज्यों में भी हो रहे पत्रकारों पर जुल्म

Press Freedom

Journalists are becoming victims of media houses in the name of Corona epidemic, atrocities on journalists also happening in Congress ruled states पिछले सप्ताह तंगदस्ती से तंग आकर हिंदी ख़बर न्यूज चैनल के कैमरामैन पत्रकार सत्येंद्र की आत्महत्या बड़े मीडिया हाउस के लिये सुर्खियां नहीं बन पायीं, क्योंकि इस से मीडिया की साख पर बट्टा लग रहा था और मीडियाकर्मियों …

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‘अनसुनी आवाज’: एक जरूरी किताब

Ansuni Awaz

एक अच्छा लेखक वही होता है (Who is a good writer) जो अपने वर्तमान समय से आगे की समस्यायों, घटनाओं को न केवल भांप लेता है बल्कि उसे अभिव्यक्त करते हुए पाठक को सजग करता है। मास्टर प्रताप सिंह (Master Pratap Singh) ऐसे ही लेखक व पत्रकार रहे हैं। वे ‘मास्टर साहब’ के नाम से लोकप्रिय रहे हैं। उधम सिंह …

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कोरोना योद्धा के नाम पर ऑनलाइन सम्मान पत्र का धंधा

Novel Cororna virus

Online honor letter business in the name of Corona warrior कोरोना से जंग लड़ रहे योद्धाओं डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मियों के साथ पत्रकारों को भी सम्मानित किया जा रहा है। देश भर में कोरोना योद्धाओं को सम्मानित करने की होड़ मची है। सम्मान पत्र के नाम पर कुछ सामाजिक संस्था कोरोना योद्धाओं के नाम पर सम्मान पत्र जारी कर …

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तुम इतराते रहे हो अपने शहरी होने पर जनाब! काश! हम भी गाँव वापस लौट पाते

Rupesh Kumar Singh Dineshpur

कोरोना काल से- गुफ्तगू/पैदल रिपोर्टिंग “शहर रहने लायक बचे नहीं हैं। छोटे कस्बे और गाँव ही मुफ़ीद हैं। काश! हम भी गाँव वापस लौट पाते।” जाने-माने कवि मदन कश्यप जी कल पलाश विश्वास जी से मोबाइल पर बतिया रहे थे। बोले, “दिनेशपुर तराई का सबसे अच्छा इलाका है, वहीं किराये पर कमरा दिला दो।” मैं गुफ्तगू सुनकर मुस्कुरा भर दिया। …

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इन मज़दूरों का जुर्म था क्या ?

Ghar Se Door Bharat Ka Majdoor

What was the crime of these workers? (मोहम्मद खुर्शीद अकरम सोज़) ——————————–   रेल की पटरी पर मज़दूरों की बिखरी लाशें इधर-उधर इन लाशों के, बिखरी है कुछ सूखी रोटी सुनो ग़ौर से कुछ कहती है ! …………………………….. इन मज़दूरों का जुर्म था क्या ? जो केवल रोज़ी-रोटी की ख़ातिर अपने गाँव को छोड़ कर बड़े शहरों में आये थे …

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इस तरह चुपचाप निकल गया शशिभूषण द्विवेदी

Shashi Bhooshan Dwivedi

शशिभूषण द्विवेदी के असामयिक निधन (Untimely demise of Shashibhushan Dwivedi) से स्तब्ध हूँ। गम्भीर सिंह पालनो, ज्ञानेंद्र पांडेय और अवधेश प्रीत हमारी पीढ़ी के लेखक रहे हैं, जो एक साथ पले, पढ़े बढ़े और साथ ही बिखर गए। शशि हमसे जूनियर था। जब मेरे पिता पुलिनबाबू कैंसर से मरणासन्न थे तब वह उन्हें देखने रुद्रपुर से किसी के साथ आया …

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पत्रकारिता की मौत : प्रधानमंत्री की शान को बचाने के लिए एक प्रोफ़ेसर की मौत की खबर को दबाने की साजिश

Dr. K. Kanak Raju

Conspiracy to suppress news of death of a professor to save the Prime Minister’s pride एक प्रोफेसर की मौत की खबर से राष्ट्र बेखबर क्यों केन्द्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में सेवारत डॉ. के. कनक राजू (Dr. K. Kanak Raju) विश्वविद्यालय स्थित प्रोफ़ेसर क्वार्टर में मृत पाए गए हैं. चेन्नई से 320 किलोमीटर तिरूवरूर स्थित केन्द्रीय विश्वविद्यालय, …

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अर्णब गोस्वामी के साथ कौन है : दोगले लोग पत्रकारिता के लिए नहीं गोदी पत्रकारों के लिए चिंतित हैं

arnab goswami,

Who is with Arnab Goswami: The misbegotten people are worried about Godi journalists  not for journalism बहुत सारे लोग खुद को निष्पक्ष स्वतंत्र और बहुत बड़ा पत्रकार बताने के चक्कर में अर्णब गोस्वामी के साथ मुंबई पुलिस द्वारा की गई पूछताछ की निंदा कर रहे हैं। ऐसे लोग इसे प्रेस पर हमला भी बता रहे हैं। यह वही लोग हैं …

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