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चौथा खंभा

सीएए : नागरिकता का पता नहीं पर बढ़े पत्रकारों पर हमले, अकेले दिल्ली में 2.5 माह में 3 दर्जन पत्रकारों पर हमला, पुलिस भी हमलावरों में शामिल

Assault on Journalists

CAA: Attacks on journalists increased, 3 dozen journalists attacked in 2.5 months in Delhi alone, police also included in attackers नई दिल्ली, 09 मार्च इन दिनों देश में प्रेस की आजादी गंभीर खतरे में आ गई है। पूरे देश में पिछले कुछ दिनों में पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं (Attacks on journalists have increased)। अकेले राजधानी दिल्ली में पिछले ढाई …

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योगी का राम राज्य : 15 लेबर कोर्ट में जज ही नहीं !

Yogi Adityanath

फिर से सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख करें मजीठिया वेज बोर्ड के क्रांतिकारी साथी Majithia wage board supreme court latest news मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे क्रांतिकारी साथियों क्या हो गया ? कैसे शांत हो गये ? लड़ाई निर्लज्ज, बेगैरत और प्रभावशाली लोगों से है तो बाधाएं भी बड़ी ही आएंगी। निश्चित रूप से लेबर कोर्ट में यह …

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जब-जब यह सोच सरकार बनाती है विचारों का खुलापन सीलेपन की बदबू से घिर जाता है,

Rajeev mittal राजीव मित्तल वरिष्ठ पत्रकार हैं।

इतिहास, शिक्षा, साहित्य और मीडिया।  (History, education, literature and media । ) ये चार ऐसे शक्तिशाली हथियार हैं, जो किसी भी समाज को लंबे समय तक कूपमंडूक और बौरा देने की क्षमता रखते हैं। युद्ध में हुई क्षति के घाव तो देर-सबेर भर जाते हैं, लेकिन ज़रा बताइये कि उन घावों जख्मों का क्या किया जाए, जो मनुस्मृतियों, वेद पुराण …

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देशबन्धु को अपनी स्वतंत्र नीति, सिद्धांतपरकता, निर्भीकता और राजाश्रय या सेठाश्रय के बिना कितनी मुश्किलों से गुजरना पड़ा है

Lalit Surjan ललित सुरजन देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं. वे 1961 से एक पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे एक जाने माने कवि व लेखक हैं. ललित सुरजन स्वयं को एक सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं तथा साहित्य, शिक्षा, पर्यावरण, सांप्रदायिक सद्भाव व विश्व शांति से सम्बंधित विविध कार्यों में उनकी गहरी संलग्नता है. यह आलेख देशबन्धु से साभार लिया गया

देशबन्धु के साठ साल Sixty years of Deshbandhu दृश्य-1 मि.मजूमदार! आई हैव डन माई इनिंग्ज़ मोर ऑर लैस. बट गॉड विलिंग, यू हैव अ लॉंग वे टू गो. आफ्टर ऑल, यू एंड ललित आर ऑफ सेम एज. (श्री मजूमदार! मैं अपनी पारियां लगभग खेल चुका हूं। लेकिन प्रभु कृपा से आपको लंबा सफर तय करना है। आखिरकार, आप और ललित हमउम्र …

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इसका, उसका, किसका मीडिया

newspapers by babasaheb ambedkar

31 जनवरी :  बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की प्रकाशित `मूकनायक` पत्र की 100वीं साल गिरह पर विशेष 31 January: Special on 100th year of Baba Saheb Bhim Rao Ambedkar published ‘Mooknayak’ newspaper बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने 31 जनवरी 1920 को मराठी पाक्षिक ‘मूकनायक’ का प्रकाशन प्रारंभ किया था. सौ साल पहले पत्रकारिता पर अंग्रेजी हुकूमत का दबाव …

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मीडिया की छह साल की कीमियागिरी का नतीजा है युवाओं में नफरत और तीस जनवरी का गोलीकांड…

Shaheen Bagh

पहले तो चार साल तक एक सी ग्रेड एक्टिविस्ट को महात्मा गांधी बना कर पेश किया जाता रहा.. जिसके चलते सारे भ्रष्ट अधिकारी और नेता सड़कों पर जाजम बिछा कर आम जनता, सरकारी कर्मचारियों और दुकानदारों को ईमानदार बनने की कसमें दिलाते हुए मीडिया में जगह पाते रहे.. फिर राष्ट्रवाद ने अंगड़ाई ली और अन्ना हजारे को उनके गांव का …

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अंजना ओम कश्यप की शाहीन बाग की रिपोर्ट : अच्छी बात, पर आगे क्या करेंगीं ?

Anjana Om Kashyap

अंजना ओम कश्यप की शाहीन बाग की रिपोर्ट पर  Anjana Om kashyap’s Shaheen Bagh report रचना में व्यक्त यथार्थ कैसे लेखक के विचारों का अतिक्रमण करके अपने स्वतंत्र  सत्य को प्रेषित करने लगता है, अंजना ओम कश्यप की शाहीन बाग की रिपोर्टिंग (Anjana Om Kashyap’s reporting of Shaheen Bagh) से फिर एक बार यह सच सामने आया। वैसे रचना और …

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एच.एल. दुसाध : खूबियों से लैस एक दलित पत्रकार !

एच.एल. दुसाध (लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.)  

Hl Dusadh: A Dalit journalist equipped with merits! मूकनायक के प्रकाशन के सौ वर्ष पूरे होने पर विशेष लेख -डॉ. कौलेश्वर प्रियदर्शी मूकनायक की शतवार्षिकी पर आयोजित हो रहे हैं बड़े-बड़े समारोह   31  जनवरी दलित पत्रकारिता के इतिहास (History of Dalit Journalism,) का सबसे स्मरणीय दिवस है. इसी दिन “बहिष्कृत लोगों पर हो रहे और भविष्य में होनेवाले अन्याय के …

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दलित मीडिया के उत्थान का एकमेव उपाय : विज्ञापन बाज़ार में डाइवर्सिटी

Dr B.R. Ambedkar

बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा सम्पादित –प्रकाशित मूकनायक के सौ वर्ष होने के अवसर पर विशेष लेख Special article on the occasion of hundred years of Mooknayak edited and published by Baba Saheb Dr. Bhimrao Ambedkar The only way to uplift Dalit media: Diversity in the advertising market आगामी 31 जनवरी को दलित पत्रकारिता के सौ साल पूरे (100 …

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आज संपादक इवेंट मैनेजर है तो तब वो हुआ करता था बनिये का मुनीम या मंत्र पढ़ता पंडत

Rajeev mittal राजीव मित्तल वरिष्ठ पत्रकार हैं।

पिछली सदी के नवें दशक की शुरुआत में दिल्ली के बहादुरशाह जफर मार्ग पर कतार से लगी बाटा की दुकान (Bata shop lined up on Bahadur Shah Zafar Marg, Delhi) पर रैक में सजे जूतों के डिब्बों सरीखी इमारतों में एक बैनेट कोलमैन (Bennett Coleman) में जब अपन ने प्रवेश किया तो तब अखबार पाठक के लिए छपा करते थे, …

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