चौथा खंभा

Critical News of Journalism – The Fourth Pillar of Democracy, Opinion, and Media Education
लोकतंत्र का चौथा खंभा पत्रकारिता जगत की आलोचनात्मक खबरें, ओपिनियन, और मीडिया शिक्षा

जब बहुत से कांग्रेसी खुलकर या दबे-छिपे भाजपा के मददगार बन गए थे

नाजुक समय में वी सी शुक्ल ने अप्रत्याशित रूप से भाजपा का दामन थाम लिया।… Read More

क्या सरकार द्वारा पत्रकारों को पुरस्कृत करना उचित है?

यदि ऐसे पत्रकार का सम्मान किया जाता है जो सरकार की प्रशंसा में ही लिखता… Read More

व्यक्ति नहीं संस्था थे ललित सुरजन

सामान्यतः समाचार पत्र का मालिक कलम का धनी नहीं होता परन्तु ललित और माया राम… Read More

आख़िर कुणाल कामरा ने किया क्या है ?

भारत के एडवोकेट जनरल ने कुणाल कामरा के ट्वीट को हज़ारों-लाखों लोगों तक पहले ही… Read More

मीडिया संस्थानों के नाम खुला पत्र, आपदा में अवसर न तलाशें, पत्रकारों की सेलरी न मारें

मीडिया संस्थान अपने सामाजिक दायित्वों में उपरोक्त मुद्दों को शामिल करते हुए अपने-अपने संस्थान के… Read More

डिजिटल मीडिया से घबराई सरकार अब कसना चाहती है नकेल !

सरकार सुदर्शन चैनल पर कुछ नहीं कह रही है। इसके विपरीत इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को बचाने… Read More

समयांतर का जून अंक और पंकज बिष्ट का लेख इसका बच्चस, उसका बच्चा?

June issue of Samayantar and article by Pankaj Bisht साहित्य और पत्रकारिता की क्या भूमिका… Read More

पत्रकारिता की गिरती साख और गरिमा को अगर कोई बचा सकता है तो वे हैं आंचलिक पत्रकार

आंचलिक पत्रकार और पत्रकारिता की गिरती साख Declining credibility of journalism AND regional journalist आंचलिक… Read More

चरित्र हनन, समाज में वैमनस्य व कटुता उत्पन्न करना ट्रोल आर्मी का प्रारंभिक “युगधर्म” है

देशबन्धु : चौथा खंभा बनने से इनकार अखबार अथवा प्रेस और सत्तातंत्र के जटिल संबंधों… Read More

पत्रकारिता दिवस पर डॉ. कमला माहेश्वरी ‘कमल’ के कुछ दोहे

Some couplets of Dr. Kamla Maheshwari 'Kamal' on Journalism Day ?आज पत्रकारिता दिवस पर सभी… Read More

‘सिधपुर की भगतणें’ : प्रमादग्रस्त स्त्रियों की शील कथा

लगभग तीन साल पहले अपनी एक ट्रेन यात्रा में हमने इस उपन्यास को पढ़ने की… Read More

‘अनसुनी आवाज’: एक जरूरी किताब

एक अच्छा लेखक वही होता है (Who is a good writer) जो अपने वर्तमान समय… Read More

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