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चौथा खंभा

सुनंदा के. दत्ता-रे की यह कैसी अनोखी विमूढ़ता ! ज़मीनी राजनीति से पूरी तरह कटा हुआ एक वरिष्ठ पत्रकार

SUNANDA K. DATTA-RAY ARTICLE INDIAN INEFFICIENCY MAY BE THE SAVING OF INDIA A note of assurance

Comment on SUNANDA K. DATTA-RAY ARTICLE in The telegraph “INDIAN INEFFICIENCY MAY BE THE SAVING OF INDIA : A note of assurance” जब भी किसी विषय को उसके संदर्भ से काट कर पेश किया जाता है, वह विषय अंधों के लिये हाथी के अलग-अलग अंग की तरह हो जाता है ; अर्थात् विषय के ऐसे प्रस्तुतीकरण को द्रष्टा को अंधा …

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क्रांति वीर शाहजहानपुर का पठान वो, सिंह और शायर सपूत अशफाक था

Ashfaqulla Khan

उन्नत सपाट, गौर वर्ण, शाही ठाठ-बाट। भारतीय पौरूष की बेमिसाल धाक था।। अंग्रेजी शासन उखाड़ फेंकने के लिए, जिसका इरादा फौलादी नेक पाक था। फांसी चढ़ने के बाद कफन पे रखवाना, चाहता जो बस मादरे वतन की खाक था। क्रांति वीर शाहजहानपुर का पठान वो, सिंह और शायर सपूत अशफाक था।। -0-0-0-0-0   कोई बीज ऐसा हो देना वतन की …

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रवीश कुमार के भाषणों के प्रभाव में एक सोच — यह भारतीय मीडिया की एक अलग परिघटना है

Ravish Kumar

रवीश कुमार के भाषणों के प्रभाव में एक सोच — यह भारतीय मीडिया की एक अलग परिघटना है रवीश कुमार के भाषणों (Speeches of ravish kumar) को सुनना अच्छा लगता है। इसलिये नहीं कि वे विद्वतापूर्ण होते हैं ; सामाजिक-राजनीतिक यथार्थ के चमत्कृत करने वाले नये सुत्रीकरणों की झलक देते हैं। विद्वानों के शोधपूर्ण भाषण तो श्रोता को भाषा के …

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