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चौथा खंभा

Critical News of Journalism – The Fourth Pillar of Democracy, Opinion, and Media Education लोकतंत्र का चौथा खंभा पत्रकारिता जगत की आलोचनात्मक खबरें, ओपिनियन, और मीडिया शिक्षा

पत्रकारिता दिवस पर डॉ. कमला माहेश्वरी ‘कमल’ के कुछ दोहे

Dr. Kamla Maheshwari 'Kamal'

Some couplets of Dr. Kamla Maheshwari ‘Kamal’ on Journalism Day ?आज पत्रकारिता दिवस पर सभी पत्रकार बन्धुओं को मेरी बहुत -बहुत शुभकामनाएं व शताधिक नमन __?. कुछ दोहे उन्हें समर्पित करती हूँ __   पत्रकारिता क्षेत्र वह, दिखलाता है साँच. कठिन घड़ी कितनी रहे लेता है सब बाँच..   सत्य खोज हित छानता पर्त-पर्त वो बात. तब ही तो है …

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‘सिधपुर की भगतणें’ : प्रमादग्रस्त स्त्रियों की शील कथा

Sidhpur ki Bhagtanen

लगभग तीन साल पहले अपनी एक ट्रेन यात्रा में हमने इस उपन्यास को पढ़ने की कोशिश की थी। उसे इसलिये महज एक कोशिश ही कहेंगे, क्योंकि उपन्यास की तरह की एक रचनात्मक विधा में किये गये किसी भी गंभीर काम को तब तक सही ढंग से नहीं पढ़ा जा सकता है, जब तक आप इतने इत्मीनान में न हों जिसमें …

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कोरोना महामारी के नाम पर मीडिया हाउस का शिकार बन रहे हैं पत्रकार, कांग्रेस शासित राज्यों में भी हो रहे पत्रकारों पर जुल्म

Press Freedom

Journalists are becoming victims of media houses in the name of Corona epidemic, atrocities on journalists also happening in Congress ruled states पिछले सप्ताह तंगदस्ती से तंग आकर हिंदी ख़बर न्यूज चैनल के कैमरामैन पत्रकार सत्येंद्र की आत्महत्या बड़े मीडिया हाउस के लिये सुर्खियां नहीं बन पायीं, क्योंकि इस से मीडिया की साख पर बट्टा लग रहा था और मीडियाकर्मियों …

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‘अनसुनी आवाज’: एक जरूरी किताब

Ansuni Awaz

एक अच्छा लेखक वही होता है (Who is a good writer) जो अपने वर्तमान समय से आगे की समस्यायों, घटनाओं को न केवल भांप लेता है बल्कि उसे अभिव्यक्त करते हुए पाठक को सजग करता है। मास्टर प्रताप सिंह (Master Pratap Singh) ऐसे ही लेखक व पत्रकार रहे हैं। वे ‘मास्टर साहब’ के नाम से लोकप्रिय रहे हैं। उधम सिंह …

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कोरोना योद्धा के नाम पर ऑनलाइन सम्मान पत्र का धंधा

Novel Cororna virus

Online honor letter business in the name of Corona warrior कोरोना से जंग लड़ रहे योद्धाओं डॉक्टर, नर्स, पैरामेडिकल स्टाफ, पुलिसकर्मी, सफाईकर्मियों के साथ पत्रकारों को भी सम्मानित किया जा रहा है। देश भर में कोरोना योद्धाओं को सम्मानित करने की होड़ मची है। सम्मान पत्र के नाम पर कुछ सामाजिक संस्था कोरोना योद्धाओं के नाम पर सम्मान पत्र जारी कर …

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तुम इतराते रहे हो अपने शहरी होने पर जनाब! काश! हम भी गाँव वापस लौट पाते

Rupesh Kumar Singh Dineshpur

कोरोना काल से- गुफ्तगू/पैदल रिपोर्टिंग “शहर रहने लायक बचे नहीं हैं। छोटे कस्बे और गाँव ही मुफ़ीद हैं। काश! हम भी गाँव वापस लौट पाते।” जाने-माने कवि मदन कश्यप जी कल पलाश विश्वास जी से मोबाइल पर बतिया रहे थे। बोले, “दिनेशपुर तराई का सबसे अच्छा इलाका है, वहीं किराये पर कमरा दिला दो।” मैं गुफ्तगू सुनकर मुस्कुरा भर दिया। …

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इन मज़दूरों का जुर्म था क्या ?

Ghar Se Door Bharat Ka Majdoor

What was the crime of these workers? (मोहम्मद खुर्शीद अकरम सोज़) ——————————–   रेल की पटरी पर मज़दूरों की बिखरी लाशें इधर-उधर इन लाशों के, बिखरी है कुछ सूखी रोटी सुनो ग़ौर से कुछ कहती है ! …………………………….. इन मज़दूरों का जुर्म था क्या ? जो केवल रोज़ी-रोटी की ख़ातिर अपने गाँव को छोड़ कर बड़े शहरों में आये थे …

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इस तरह चुपचाप निकल गया शशिभूषण द्विवेदी

Shashi Bhooshan Dwivedi

शशिभूषण द्विवेदी के असामयिक निधन (Untimely demise of Shashibhushan Dwivedi) से स्तब्ध हूँ। गम्भीर सिंह पालनो, ज्ञानेंद्र पांडेय और अवधेश प्रीत हमारी पीढ़ी के लेखक रहे हैं, जो एक साथ पले, पढ़े बढ़े और साथ ही बिखर गए। शशि हमसे जूनियर था। जब मेरे पिता पुलिनबाबू कैंसर से मरणासन्न थे तब वह उन्हें देखने रुद्रपुर से किसी के साथ आया …

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पत्रकारिता की मौत : प्रधानमंत्री की शान को बचाने के लिए एक प्रोफ़ेसर की मौत की खबर को दबाने की साजिश

Dr. K. Kanak Raju

Conspiracy to suppress news of death of a professor to save the Prime Minister’s pride एक प्रोफेसर की मौत की खबर से राष्ट्र बेखबर क्यों केन्द्रीय विश्वविद्यालय तमिलनाडु में असिस्टेंट प्रोफेसर के रूप में सेवारत डॉ. के. कनक राजू (Dr. K. Kanak Raju) विश्वविद्यालय स्थित प्रोफ़ेसर क्वार्टर में मृत पाए गए हैं. चेन्नई से 320 किलोमीटर तिरूवरूर स्थित केन्द्रीय विश्वविद्यालय, …

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अर्णब गोस्वामी के साथ कौन है : दोगले लोग पत्रकारिता के लिए नहीं गोदी पत्रकारों के लिए चिंतित हैं

arnab goswami,

Who is with Arnab Goswami: The misbegotten people are worried about Godi journalists  not for journalism बहुत सारे लोग खुद को निष्पक्ष स्वतंत्र और बहुत बड़ा पत्रकार बताने के चक्कर में अर्णब गोस्वामी के साथ मुंबई पुलिस द्वारा की गई पूछताछ की निंदा कर रहे हैं। ऐसे लोग इसे प्रेस पर हमला भी बता रहे हैं। यह वही लोग हैं …

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क्या पत्रकारिता करने के लिये हमें इस स्तर तक गिरना होगा !

Desh ka dushman media

मीडिया की गिरती साख दोषी कौन, कैसे बनी रहे मीडिया की विश्वसनीयता आज सुबह आंख खुलते ही दो पत्रकार साथियों के द्वारा भेजे गये मैसेज को पढ़ता हूँ। पहला संदेश देवघर जिला के मधुपुर के पत्रकारों (Journalists of Madhupur in Deoghar district) का होता है जिसमें दो पत्रकारों के ऊपर मधुपुर थाना में FIR दर्ज होने की जानकारी दी जाती …

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क्या अर्नब गोस्वामी ने पहली बार साम्प्रदयिक वैमनस्यता फैलाई है ? भाजपा ने चैनल खुलवाया है तो उसके एजेंडे पर ही तो काम करेगा !

arnab goswami,

Is Arnab Goswami spreading communal disharmony for the first time? If the BJP has opened the channel, then it will work only on its agenda!   देश का दुर्भाग्य (Misfortune of the country) यह है कि  देश उन राजनीतिक दलों के भरोसे है जो समाज में गुलाम पैदा कर रहे हैं। जिनका मकसद किसी भी तरह से सत्ता हथियाकर जनता …

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#FakeJournalismOfMedia : क्या हिन्दपीढ़ी (रांची) के लोगों ने सफाईकर्मियों व इंफोर्समेंट टीम पर थूका ?

The people of Hindpeedhi Ranchi spit on the scavengers and the Enforcement Team

10 अप्रैल को झारखंड के कई प्रमुख समाचारपत्रों में प्रमुखता से यह खबर छपी कि रांची के हिन्दपीढ़ी में सैनिटाइज करने गये सफाईकर्मियों और इंफोर्समेंट टीम पर लोगों ने अपने छतों पर से थूका (People spit on their roofs on the sanitation workers and the enforcement team who went to sanitize Ranchi’s Hindpiri) और 10-10 रूपये के नोट पर भी …

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अशिक्षित और अक्ल के अंधे न्यूज़ चैनलों को तो जमातियों के थूकने और मूतने के फर्जी वीडियो दिखाने से ही फुरसत नहीं..

Desh ka dushman media

आत्मा को सब्जीमंडी में तलाशता समाज | Society seeks soul in vegetable market आत्मा-परमात्मा, आस्था-अनास्था, देह, देह से परे, शरीर एक पिंजरा है, सर्व शक्तिमान, क्या लेकर आया है क्या ले कर जाएगा वाले इस समाज को अक्सर विपरीत परिस्थितियों में मसक्कली की तरह फड़फड़ाते और डोलते देखा है.. तब आध्यात्म से लिपा पुता यह समाज इस कदर इहलौकिक हो जाता …

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कोरोना वायरस, फेक न्यूज़ और ग्रसित भारतीय न्यूज़ मीडिया

Coronavirus CDC

Corona virus, fake news and affected Indian news media : एक अलग तर्क जिस चीज की आशंका थी, वह हो गई; चीन से फैलने वाली महामारी आखिरकार लगभग पूरी दुनिया में फैल गई है। भारत इस वैश्विक संकट के बीच खड़ा है, इस समय पूरा विश्व खतरनाक कोरोना-वायरस के प्रकोप से पूरी ताकत और सीमित संसाधनों से लड़ रहा है। …

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सावधान, देश के दुश्मन की भूमिका में खुलकर उतर आया है बिका हुआ गोदी मीडिया!

Coronavirus CDC

Beware, the dock media has come out openly in the role of the enemy of the country! गोदी मीडिया अपने आकाओं के इशारे पर निज़ामुद्दीन दिल्ली में तबलीगी जमात के मरकज– Markaz of Tabligi Jamaat in Nizamuddin of Delhi, (धर्मशाला) में मिले 1000 देसी-विदेशी मुसलमानों को कोरोना के संदिग्ध संक्रमित बता कर एक बार फिर देश को साम्प्रदायिक दंगों की …

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सीएए : नागरिकता का पता नहीं पर बढ़े पत्रकारों पर हमले, अकेले दिल्ली में 2.5 माह में 3 दर्जन पत्रकारों पर हमला, पुलिस भी हमलावरों में शामिल

Assault on Journalists

CAA: Attacks on journalists increased, 3 dozen journalists attacked in 2.5 months in Delhi alone, police also included in attackers नई दिल्ली, 09 मार्च इन दिनों देश में प्रेस की आजादी गंभीर खतरे में आ गई है। पूरे देश में पिछले कुछ दिनों में पत्रकारों पर हमले बढ़े हैं (Attacks on journalists have increased)। अकेले राजधानी दिल्ली में पिछले ढाई …

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योगी का राम राज्य : 15 लेबर कोर्ट में जज ही नहीं !

Yogi Adityanath

फिर से सुप्रीम कोर्ट की ओर रुख करें मजीठिया वेज बोर्ड के क्रांतिकारी साथी Majithia wage board supreme court latest news मजीठिया वेज बोर्ड की लड़ाई लड़ रहे क्रांतिकारी साथियों क्या हो गया ? कैसे शांत हो गये ? लड़ाई निर्लज्ज, बेगैरत और प्रभावशाली लोगों से है तो बाधाएं भी बड़ी ही आएंगी। निश्चित रूप से लेबर कोर्ट में यह …

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जब-जब यह सोच सरकार बनाती है विचारों का खुलापन सीलेपन की बदबू से घिर जाता है,

Rajeev mittal राजीव मित्तल वरिष्ठ पत्रकार हैं।

इतिहास, शिक्षा, साहित्य और मीडिया।  (History, education, literature and media । ) ये चार ऐसे शक्तिशाली हथियार हैं, जो किसी भी समाज को लंबे समय तक कूपमंडूक और बौरा देने की क्षमता रखते हैं। युद्ध में हुई क्षति के घाव तो देर-सबेर भर जाते हैं, लेकिन ज़रा बताइये कि उन घावों जख्मों का क्या किया जाए, जो मनुस्मृतियों, वेद पुराण …

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देशबन्धु को अपनी स्वतंत्र नीति, सिद्धांतपरकता, निर्भीकता और राजाश्रय या सेठाश्रय के बिना कितनी मुश्किलों से गुजरना पड़ा है

Lalit Surjan ललित सुरजन देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं. वे 1961 से एक पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे एक जाने माने कवि व लेखक हैं. ललित सुरजन स्वयं को एक सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं तथा साहित्य, शिक्षा, पर्यावरण, सांप्रदायिक सद्भाव व विश्व शांति से सम्बंधित विविध कार्यों में उनकी गहरी संलग्नता है. यह आलेख देशबन्धु से साभार लिया गया

देशबन्धु के साठ साल Sixty years of Deshbandhu दृश्य-1 मि.मजूमदार! आई हैव डन माई इनिंग्ज़ मोर ऑर लैस. बट गॉड विलिंग, यू हैव अ लॉंग वे टू गो. आफ्टर ऑल, यू एंड ललित आर ऑफ सेम एज. (श्री मजूमदार! मैं अपनी पारियां लगभग खेल चुका हूं। लेकिन प्रभु कृपा से आपको लंबा सफर तय करना है। आखिरकार, आप और ललित हमउम्र …

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इसका, उसका, किसका मीडिया

newspapers by babasaheb ambedkar

31 जनवरी :  बाबा साहब भीम राव अंबेडकर की प्रकाशित `मूकनायक` पत्र की 100वीं साल गिरह पर विशेष 31 January: Special on 100th year of Baba Saheb Bhim Rao Ambedkar published ‘Mooknayak’ newspaper बाबा साहब भीम राव अंबेडकर ने 31 जनवरी 1920 को मराठी पाक्षिक ‘मूकनायक’ का प्रकाशन प्रारंभ किया था. सौ साल पहले पत्रकारिता पर अंग्रेजी हुकूमत का दबाव …

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