शब्द

तल्खियां और दर्द -ए- कश्मीर

Mohd. Rafi Ata मौहम्मद रफीअता डैलीगेट दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी व टीवी पैनलिस्ट

तल्खियां और दर्द -ए- कश्मीर, ————————-😠 मैं कश्मीर हूं दोस्तों मैं जन्नत निशान हूंं, हिस्सा हूं हिंद का मैं,मैं इसकी शान हूं, वादी में मेरी क्यारीयां फूलों की खिल रहीं, गद्दार मैं नही दोस्तों, मैं हिंदोस्तान हूं,,,,,,,,   पर आज जिस तरह से सताया गया मुझे, पहचान मेरी छीन के मिटाया गया मुझे, मेरी ही सर जमीन है, दबाया गया …

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ईद आई अजब एक उदासी लिये !

Eid Aayee Ajab .........

मोहम्मद ख़ुर्शीद अकरम सोज़   —————- ईद आई अजब एक उदासी लिये कोई कैसे किसी को मुबारक कहे ———— ऐ ख़ुदा शुक्र है तेरी तौफ़ीक़ से रोज़े रमज़ान के सारे पूरे हुए ईद का चाँद भी आ गया है नज़र इस पे कोविड का लेकिन पड़ा है असर अब के आई है ईद ऐसे माहौल में ख़ौफ़ छाया कोरोना का …

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‘अनसुनी आवाज’: एक जरूरी किताब

Ansuni Awaz

एक अच्छा लेखक वही होता है (Who is a good writer) जो अपने वर्तमान समय से आगे की समस्यायों, घटनाओं को न केवल भांप लेता है बल्कि उसे अभिव्यक्त करते हुए पाठक को सजग करता है। मास्टर प्रताप सिंह (Master Pratap Singh) ऐसे ही लेखक व पत्रकार रहे हैं। वे ‘मास्टर साहब’ के नाम से लोकप्रिय रहे हैं। उधम सिंह …

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हसरत मोहानी : गंगा जमुनी तहज़ीब का इंक़लाबी शायर

Maulana Hasrat Mohani in Hindi

रसखान की परंपरा का आखिरी शायर और स्वतंत्रता सेनानी बहुत सारे हिंदुस्तानी शायर ऐसे हुए हैं, जिनकी क़लम ने अपनी ताकत पर भारतीयों को अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये उत्साहित किया है मगर आज हम जिस आजादी के दीवाने की बात कर रहे हैं, वो शायर होने के साथ-साथ एक पत्रकार, राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी और साझी विरासत के …

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कोरोना काल में चर्चा – हज़ार चौरासी की माँ (महाश्वेता देवी ) की दर्द भरी दास्तान, जो नहीं पहुँची बेटे के मरने पर

महाश्वेता देवी, महाश्वेता देवी जीवनी,

एक माँ जो नहीं पहुँची बेटे के मरने पर 1977 में मैग्सेसे, 1986 में पद्मश्री, 1996 में ज्ञानपीठ, 2006 में पद्मभूषण सहित दर्जनों देशी-विदेशी पुरस्कार प्राप्त करने वाली कालजयी लेखिका, जिनके लेखन पर 1968 में संघर्ष, 1993 में रूदाली, 1998 में हजार चौरासी की माँ (Hazaar Chaurasi Ki Maa) और 2000में माटी माई जैसी शानदार फिल्में बन चुकी हैं, महान …

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बड़ी बासी सी लगती है जब नज़्म मेरी ज़िंदा सवाल ढोती है… घर वापसी मजदूर की है ना कि राजा राम की

Migrants

मैं किसी को कोसना नहीं चाहती.. देश- विदेश की मौजूदा अवस्था.. क्या क्यूँ किस तरह चल रही है व्यवस्था.. सत्ता वत्ता..आस्था वास्था.. सब पर बहस बेकार है.. हमने वोट दे दिया बस अब सब कामों पर सरकार है… हमें उनके किये को ही बढ़-बढ़ कर हांकना है.. अगले आदेश तलक चुप रहकर फ़क़त मुँह ही ताकना है.. और मैं वफ़ादारों …

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आया बनकर फरिश्ता खुदा बनकर

- धनोज कुमार (कवि, शायर, राजनीतिक विश्लेषक व टीवी डिबेटर

आया बनकर फरिश्ता खुदा बनकर हम सब को उससे सीखना चाहिए  ।। छोड़ शिकायत सबकी मदद करना चाहिए । जाने जिंदगी में क्या होगा । जो है अपने पास सब जनहित में लगा देना चाहिए ।। डाक्टर नर्स सब कमाल कर रहे हैं । बचा रहे हैं उनको, जो कोरोना से मर रहे हैं ।। मेहनत उनकी रंग लाएगा । …

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कोरोना काल से- जमीन से कटा साहित्यकार घमंडी, झूठा, धूर्त और अवसरवादी होता है

Rupesh Kumar Singh Dineshpur

“मुँह पर उंगली उठाकर कड़ी आलोचना करने से आज के स्वयंभू मूर्धन्य साहित्यकारों की गीली-पीली हो जाती है। आज के दौर में जो जितना बड़ा साहित्यकार, लेखक है, वो उतना ही जमीन से कटा हुआ, घमंडी, झूठा, धूर्त और अवसरवादी है। किताबों की सेटिंग से ऐय्याशी करने वाले लेखक यह कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते कि कोई उनसे मुँह पर …

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देर है बस नजरें मिलने की कर दूंगी जादू-टोना

Meenu Sharma Kota Rajasthan मीनू शर्मा केसवराय पाटन कोटा बूंदी

तन भी पारस मन भी पारस, छू लूँ तो कर दूँ सोना। हमसे कितना प्यार है जानम, एक बार तो कह दो ना।।   मोबाइल पे हमने कितना ट्राई किया है तुमको, एक बार इजहार, इशारा कर तो देते हमको, ढूँढ-ढूँढ हारा तुमको ये नयनों का काजल, पर जाने क्या मूढ़ तुम्हारा ज्यों सावन का बादल, मेरे मन में तेरी …

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मेरे मन की हार में ही है तुम्हारी जीत लिख दूं।।

Hema Pandey

कह रहा है मन चलो आज कोई गीत लिख दूं। मेरे मन की हार में ही है तुम्हारी जीत लिख दूं।।   यह मुझे स्वीकार है तुम बस गये मेरी नजर में, बनके हमराही मिले हो जिन्दगी के इक सफर में, कृष्ण तुम हो मैं निभाऊं राधिका सी प्रीत लिख दूं मेरे मन की हार में ही है तुम्हारी जीत …

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