शब्द

सड़क के सारे कुत्ते सलामत हैं इन दिनों, कारों से कुचले नहीं जा रहे, इक वायरस ने दुनिया को उसकी औक़ात बता दी

Kavita on Korona Virus in Hindi

सड़क के सारे कुत्ते सलामत हैं इन दिनों, कारों-वारों से कुचले नहीं जा रहे… सड़कें भी आराम फरमा रही हैं चाहे उचली हो या कुचली अड्डे-गड्ढे सब सुकून की साँस ले रहे हैं बड़े-बड़े टायरों तले पिसते-पिसते इक उम्र हो गयी कमबख़्त स्पीड कभी कम नहीं हुयी … चाँद को सूरज की तरह जला डाला … इन बेचैन लोगों ने …

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दुनिया में लोग जेबों से तोले जाते हैं…

डॉ. कविता अरोरा (Dr. Kavita Arora) कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं।

…जेब … पैन्ट की साइडों में शर्ट के ऊपर दिल के दाँये बाँये ज़रा सी जो नज़र आती है दरअसल औक़ात बताती है… रूप, रंग, गुन, संस्कार इस जेब के आगे सब बेकार… अदब लिहाज़ के सारे ताले इसी से खोले जाते हैं… दुनिया में लोग जेबों से तोले जाते हैं… भरी जेब वाले देवों में देव.. रिश्तों की सूखी …

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सुस्त पड़ गयी ज़िन्दगी की रफ्तार को विकास के सहारे भगाना चाहती हैं हमारी सरकारें

Forests

पटना टू सिंगरौली, इंडिया से भारत का सफर, Patna to Singrauli..India’s journey to Bharat सिंगरौली (Singrauli) लौट आया हूँ। कभी पहाड़ों के ऊपर तो कभी उनके बीच से बलखाती निकलती पटना-सिंगरौली लिंक ट्रेन (Patna-Singrauli Link Train)। बीच-बीच में डैम का रूप ले चुकी नदियों और उनके ऊपर बने पुल तो कभी पहाड़ों के पेड़ से भी ऊँची रेल पटरी से …

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परिभाषाओं के बदलते अर्थों में अब महिलाओं को चरित्रहीन ही होना चाहिये !

डॉ. कविता अरोरा (Dr. Kavita Arora) कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं।

कल कल्लन के लिये गेट पर मजमा लगा.. पुलिस आई ज़ाहिल औरतों की इक टोली चिल्लाई इसने कल्लन का हाथ पकड़ा… थी तो बेहयाई पर मुझे ज़ोर से हँसी आई.. शक्ल से कबूतर उम्र पचपन से ऊपर.. कल्लन क्या खो चुका है दिमाग़ी आपा… अधेड़ उम्र पर जे सुतियापा… हट्टे कट्टे मुस्टंडे कल्लन ने हाथ क्यूँ नहीं छुड़ाया.. मजमई भेड़ों …

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हाँ मैं बेशर्म हूँ….रवायतें ताक पर रख कर खुद अपनी राह चलती हूँ

डॉ. कविता अरोरा (Dr. Kavita Arora) कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं।

हाँ मैं बेशर्म हूँ…. झुंड के साथ गोठ में शामिल नहीं होती रवायतें ताक पर रख कर खुद अपनी राह चलती हूँ तो लिहाजो की गढ़ी परिभाषाओं के अल्फ़ाज़ गड़बड़ाने लगते हैं.. और खुद के मिट जाने की फ़िकरों में डूबी रिवाजी औरतों की इक बासी उबाऊ नस्ल सामने से वार करती है… झुंड में यह मुँह चलाती भेड़ें भरकस …

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अल्बेयर कामू के तर्क बिखरे हुए ज़रूर थे लेकिन व्यावहारिक थे

Albert Camus

अल्बेयर कामू जैसे निर्मम राजनैतिक चिन्तक को सार्त्र ने अपना पिछलग्गू अस्तित्ववादी लेखक बना दिया……. कलावादी यहाँ तक कि मनोवैज्ञानिक-कुंठाओं का फ्रायडीय लेखक बना दिया….  “हर नयी क्रांति सत्ता के नाम पर दमन का नये से नया मुखौटा लगाकर खड़ी हो जाती है जो आम आदमी के ख़िलाफ़ जाता है.”——–कामू अल्बेयर कामू की यह घोषणा (Albert Camus Quotes) थी लगभग.तब …

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आज सत्य की गतिविधियों पर पहरे हैं, क्योंकि स्वार्थ के कान, जन्म से बहरे हैं

Mukut Bihari 'Saroj'

इमरजेंसी का पूर्वाभास और मुक्तिबोध बकौल अशोक वाजपेयी Ashok Vajpayee, the foreboding of Emergency and Muktibodh The poem ‘Andhere men’ was written by Muktibodh in 1962–63 देश में चल रहे हालात को देख कर, एक पुरानी घटना याद आ गयी। कई वर्ष पहले राजनन्दगाँव [छत्तीसगढ] में आयोजित ‘त्रिधारा’ संगोष्ठी में व्याख्यान देते हुए प्रसिद्ध कवि आलोचक अशोक वाजपेयी ने कहा …

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एक अप्रतिम महानायक : नामदेव ढसाल

Namdev dhasal

15 January: Today is the death anniversary of Namdev Dhasal 15 जनवरी : आज है नामदेव ढसाल की पुण्यतिथि आज 15 जनवरी है। पहले से ही मायस्थेनिया जैसी गंभीर बीमारी शिकार विश्वकवि नामदेव ढसाल तीन महीनों से आंत के कैंसर (Bowel cancer) से जूझते हुए 2014 में आज ही के दिन मुंबई के बॉम्बे हास्पिटल में आखिरी साँस लिए थे। …

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छपाक का विरोध : औरतों से डरे हुए लोग कितना शोर कर रहे हैं

Deepika Paducone Chhapak

…….जो राजनीति के तहत …छपाक …फ़िल्म के विरोध में शामिल हैं, अब वो लोग… महिलाओं के प्रति होने वाले किसी भी अपराध में मोमबत्तियाँ ना थामें ……🙏🙏 ज़ुल्म हुआ है बस इतना ही तो कहा ख़िलाफ़त में फ़ैसले तो नहीं दिये .. मगर उफ़्फ़ यह औरतों से डरे हुए लोग कितना शोर कर रहे हैं… छपाक …से घबराए.. झुंड के …

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संस्मरण : श्रीकृष्ण सरल ने हास्य कविताएं भी लिखीं

Shri Krishn Saral

Memoir: Shri Krishna Saral also wrote humour poems यह श्रीकृष्ण सरल का जन्म शताब्दी वर्ष है। ठेठ बचपन में जिन लोगों की कविताओं ने रस पैदा किया था उनमें श्री चतुर्भुज चतुरेश, श्री वासुदेव गोस्वामी और श्रीकृष्ण सरल का नाम याद आता है। आज जिन सरल जी को लोग राष्ट्रवादी कविताओं के लिए जानते हैं, उनमें से कम ही लोगों …

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