शब्द

लालकिला और मोदी की भाषण शैली : हमेशा अहंकार और प्रतिस्पर्धा के लोकतंत्र विरोधी भाव में ही क्यों बोलते हैं मोदी!

Narendra Modi Addressing the nation from the Red Fort

Red Fort and Modi’s style of speech: Why does Modi always speak in the anti-democratic sense of ego and competition! Narendra Modi Addressing the nation from the Red Fort लालक़िले की प्राचीर से आज मोदीजी का भाषण (Modi ji’s speech from the ramparts of the Red Fort,) सुनकर यही लगा चलो देश निश्चिंत हुआ देश में मोदी शासन में बहुत …

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सांस्कृतिक सृजनकार काल की पुकार! – मंजुल भारद्वाज

Manjul Bhardwaj

12 अगस्त थिएटर ऑफ़ रेलेवंस सूत्रपात दिवस ! देश और दुनिया आज सांस्कृतिक रसातल में है. तकनीक के बल पर संचार माध्यम में सारा विश्व लाइव है त्रासद यह है की तकनीक लाइव है आदमी मरा हुआ है. मरी हुए दुनिया को तकनीकी संचार लाइव कर रहा है. कमाल का विकास है व्यक्ति,परिवार,समाज, देश और दुनिया मरे हुए और तकनीक …

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राहत इन्दौरी की गज़लें फिसलती नहीं थीं अपितु कील की तरह ठुकती थीं

Rahat Indori

राहत इन्दौरी और उनकी शायरी की लोकप्रियता | Popularity of Rahat Indori and his poetry राहत इन्दौरी के निधन (Death of Rahat Indori) के बाद उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के साथ उनकी शायरी को याद करने वालों की बाढ सी आ गयी। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उनके शे’रों ने हर एक को गुदगुदाया था और वे शे’र उनकी स्मृतियों में …

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क्या श्रीलंका का राष्ट्रगान रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा लिखा गया था?

rabindranath tagore

Was Sri Lanka’s national anthem written by Rabindranath Tagore? भारत और बांग्लादेश के राष्ट्रगान की रचना निर्विवाद रूप से रवीन्द्र नाथ ने की है। लेकिन श्रीलंका के राष्ट्रगान की रचना में भी उनकी भूमिका थी। यह गान भी रवीन्द्र संगीत से प्रभावित है। बंकिम की बंगमाता को वन्देमातरम् गीत में भारत माता बनाने वाले भी रवींद्रनाथ ही थे। देश को …

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जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता | Mamta Kiran | ममता किरण

Mamta Kiran Sahityik Kalrav

जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता | Mamta Kiran | ममता किरण जड़ें मजबूत होतीं तो शजर आंधी भी सह जाता/ बनाते हम अगर मजबूत पुल तो कैसे ढह जाता / ज़रा सी धूप मिल जाती तो ये सीलन नहीं होती / जो रिश्ता दर्द देता है मिसालों में वो रह जाता HASTAKSHEP KAVI SAMMELAN, HINDI POETRY RECITATION,KAVI SAMMELAN, …

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प्रेमचन्द का पाठ वस्तुतः गरीब, दरिद्र और वंचितों का पाठ है

Munshi Premchand

प्रेमचंद और आलोचना की चुनौतियाँ -1 | Premchand and the challenges of criticism-1 इस समय आलोचना जिस संकट में है उसमें नए –पुराने दोनों ही किस्म के समालोचकों के पास जाने की जरूरत है। आलोचना के संकटग्रस्त होने की अवस्था में पुराने आलोचक और सिद्धांत ज्यादा मदद करते हैं। हिन्दी में नया संकट दो स्तर पर है। पहला संकट यथार्थबोध के …

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बंगला गद्य के जनक काली प्रसन्न सिंह

Kaliprasanna Singha

Kaliprasanna Singha, the father of Bengali prose काली प्रसन्न सिंह बंगला गद्य के जनक माने जाते हैं अंग्रेजी में एडिसन और स्टील की तरह। बंगला में अनुवाद की पहल भी उन्होंने की। तकालीन अंग्रेजीपरस्त कुलीन भद्र समाज पर उन्होंने हुतुम पेंचार नक्शा (Hutom Pyanchar Naksha) में तीखे रेखाचित्र विधा का सृजन करते हुए घटनाओं का सजीव व्यंग्यात्मक ब्योरा पेश करते …

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कविता से जुड़े मित्रों को शैलेन्द्र शैली का यह आखरी लेख बार बार पढ़ना चाहिए

Literature, art, music, poetry, story, drama, satire ... and other genres

कल [24/7/2020] शैलेन्द्र शैली का जन्म दिन (Shailendra Shaily birthday) था। अपनी मृत्यु [6 सितम्बर 2001] से पहले उन्होंने जो अंतिम साहित्यिक लेख लिखा था वह यही है। उनकी पहचान एक श्रेष्ठ राजनीतिक कार्यकर्ता के रूप में इतनी बड़ी है कि उनके साहित्यकार की पहचान दब गयी। यह बात प्रस्तुत लेख के कथ्य और उसकी भाषा से स्पष्ट हो रही …

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प्रदूषण मुक्त सांसें: पर्यावरण की महत्ता बताती जरूरी किताब

Cover Page of Pradushan Mukt Saansein

Book review :An important book that explains the importance of the environment हाल के सालों में यह पहला ऐसा मौका है, जब पिछले कुछ महीनों में दुनिया के बिगड़ते पर्यावरण और प्रदूषण की किसी गहराती समस्या ने हमारा ध्यान नहीं खींचा। शायद इसकी वजह यह है कि दुनिया पिछले कुछ महीनों से कोरोना संक्रमण के चक्रव्यूह में फंसी हुई है, …

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बाढ़ में फिर डूब गया है असम… हम अपने कमरों में बैठकर दार्जिलिंग चाय पी रहे हैं …

नित्यानन्द गायेन Nityanand Gayen

बाढ़ में फिर डूब गया है असम… मेरे दोस्त अब भी कहते हैं – यहां से बहुत दूर है भारत ! नॉर्थ -ईस्ट ———   हम कितना जानते हैं और कितने जुड़े हुए हैं पूर्वोत्तर के लोगों से , उनके दर्द, तकलीफ़ जीवन-संघर्ष से और कितना जानते हैं उनकी ज़रूरतों के बारे ?   यह सवाल आज अचानक नहीं उठा …

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