रामविलास शर्मा जिन्होंने इस मिथ का खंडन किया कि प्राचीनकाल में ब्राह्मणों की प्रधानता थी

Ram Vilas Sharma

हिंदी के महान आलोचक रामविलास शर्मा का आज जन्मदिन है | इतिहास में आज का दिन | आज का इतिहास

प्रेमचन्द का संसार एक गरीब का घर-संसार था, उन्हें ‘घृणा का प्रचारक’ ‘कलम घसीटू मुन्शी’ और क्या-क्या नहीं कहा गया

Munshi premchand

प्रेमचन्द का संसार एक गरीब का घर-संसार था। कलम को उन्होंने अपना फावड़ा समझा था और उसी की आमदनी पर वे मुनहसिर थे। किसी राजघराने की टुक्कड़खोरी पर कदापि नहीं।

सुनो देखो इतिहास की सीली रिसी ईंटें क्या कहती हैं ?

daughter

सुनो देखो
इतिहास की
सीली रिसी ईंटें क्या कहती हैं ?
दीवार के पीछे
आँखों की इक नदी
अब भी बहती हैं।

पूछता है भारत – ऐसी फजां में दम नहीं घुटता ?? मगर वो है कि कुर्सी से नहीं उठता

Poochhata hai Bharat

…………बुझा दो ……… इन रेप की मोमबत्तियों से कुर्सियाँ नहीं जलतीं, मोम के आंसुओं से सरकारें नहीं पिघलतीं, ख़बर फिर से वहीं उठाईगीरों ने सर उठाकर चलने वाली को दुनिया से उठा दिया लोग कोसने लगे सत्ता को किसे कुर्सी पर बिठा दिया दुख किसको कितना हुआ है, सब दिखाने में लग गये। तमाम सोये

सच में दिल तोड़ गये ….फूल खान

Editor Point Editor Phool Khan एडिटर पॉइंट के संपादक फूल खान

एडिटर पॉइंट के संपादक फूल खान (Editor Point Editor Phool Khan) को हस्तक्षेप की एसोसिएट एडिटर डॉ. कविता अरोरा की श्रद्धांजलि तुम कह रहे थे करिश्मे होते हैं, मैं जानती थी नहीं होते, अब खुदा बड़ा नहीं रहा, बीमारियाँ बड़ी हैं खुदा से, चिल्ले-विल्ले, अगरबत्तियाँ, मज़ारों पर सजदे दुआओं का पढ़-पढ़ कर फूंकना, आयतों से

कला तब तक अधूरी है जब तक वह मनुष्य की ज़िंदगी को न बदले

Theatre of relevance

गांधी नेता क्यों थे ? | Why was Gandhi a leader? गांधी नेता इसलिए थे कि वह अपने गुण अवगुण जानते थे और न सिर्फ जानते थे, अवगुणों पर विजय पाने के लिए सतत प्रयोग रत रहते थे. वह जानते थे मनुष्य में अनेक खामियां हैं, और उन खामियों को जीतकर वह दुनिया के सामने उदाहरण रखना चाहते थे

भविष्य से आँख भी मिला पाएँ, इसलिए उठिए और बोलिए

opinion

जहर, मार दे देह को लकवा
उससे पहले ही कुछ बोलिए
वर्तमान, डरावना भूत न बने
इसलिए कुछ तो बोलिए
भविष्य से आँख भी मिला पाएँ
इसलिए उठिए और बोलिए।

ना कोई सीमा में घुसा था ना कोई सीमा में घुसा है, ना कोई मस्जिद बनी थी ना कोई मस्जिद गिरी है

Babri masjid

अभी-अभी ताजी-ताजी बात है
जिस देश में हिरण खुद मरते हैं
मस्जिदें खुद गिरती हों
लोग सड़कों पर रेल की पटरियों पर सोकर कट कर मरते हैं
वहां आश्चर्य, रामराज्य ही हो सकता है

एक पत्रिका के पृष्ठों पर बोलते साहित्य जगत पर दृष्टिपात

आलोचना के आलोचकों का काम पोलेमिक्स की दिशा पर नजर रखने का होता है। डॉ. शर्मा की पोलेमिक्स में किसी सर्वकालिक सत्य की तरह काम कर रहे मार्क्सवाद ने उन्हें अपने प्रकार से हमेशा भारत की जनता की क्रांति की समस्याओं से जोड़े रखा और यही एक बात उन्हें अन्य सभी से अलगाती है।