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शब्द

घरेलू नौकरानी से आलो आँधारी की मशहूर लेखिका बनने वाली बेबी हालदार का आज है जन्मदिन

baby haldar

Know How baby haldar became a writer in India आज प्रेरणा अंशु परिवार की मशहूर लेखिका बेबी हालदार का जन्म दिन है। हम सभी की ओर से उनका अभिनन्दन। बेबी हालदार स्त्री अस्मिता का जीवंत प्रतीक है। घरेलू नौकरानी से दुनिया भर की सभी भाषाओं में अनुदित आलो आंधारि का सारांश की लेखिका बनने का उनका संघर्ष पितृसत्तात्मक भारतीय समाज …

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सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के प्रसंग में : अवसाद, अहम् और आदर्श के सवाल

Sushant Singh Rajput

जॉक लकान के मनोविश्लेषणात्मक सिद्धांत पर आधारित एक विमर्श In the context of Sushant Singh Rajput’s suicide: questions of depression, ego and ideal (A discussion based on Jacques Lacan’s psychoanalytic theory) किसी भी अवसादग्रस्त आदमी के साथ एक चरण में जा कर ऐसा होता है कि उसे अपने चारों ओर की अन्य सारी आवाजें सुनाई देना बंद हो जाती है। …

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आह गुलज़ार देहलवी ! जहाँ इंसानियत वहशत के हाथों ज़िबह होती है

Anand Mohan Zutshi Gulzar Dehlvi

मशहूर शायर गुलज़ार देहलवी को ख़िराज-ए-अक़ीदत मोहम्मद खुर्शीद अकरम सोज़ टूटा  है  आस्माँ से कोई  हसीन  तारा ऐ सोज़ अंजुमन में अब सोग की फ़िजा है उर्दू का इक मुजाहिद, हाँ वो अज़ीम शायर गुलज़ार देहलवी भी दुनिया से चल बसा है (सोज़ ) उर्दू के अज़ीम इंक़लाबी शायर, गंगा-जमुनी तहज़ीब के अमीन और पासदार, जंग-ए-आज़ादी के मुजाहिद जनाब पंडित …

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मूलतः त्रिलोचन जी लोकधर्मी गीतकार थे

Trilochan Shastri त्रिलोचन शास्त्री

Trilochan a poet of Folk जीवन के अंतिम पड़ाव पर त्रिलोचन जी हरिद्वार की एक सँकरी गलीवाली कालोनी में अपनी वकील बहू के साथ रहने लगे थे। जब तबियत बहुत ख़राब हो गयी, तो राज्य सरकार ने उन्हें देहरादून के एक प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया। मुझे जब मालूम हुआ, तो सपत्नीक उनसे मिलने गया। देखकर चहक उठे। थोड़ी देर …

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अच्छे दिन ! सब झूठे हैं, पैर के छाले सच्चे हैं

Migrants

सब झूठे हैं, पैर के छाले सच्चे हैं, जो दिन, तूने लाया भैया , वो दिन ,कितने अच्छे है । सब झूठे हैं……… तेरी तरक्की ने है , कितने जख्म दिये, रोज़ी रोटी नींद सकूं , सब दफ़न किये। झूठ फरेबी मुस्कानों के क़दम क़दम पर गच्चे हैं। सब झूठे…….. हम भी भारत जन हैं , लेकिन , सड़कों पर …

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कैसी संवेदनहीन दुनिया बना दी है इस तकनीक ने? जो वीडियो नहीं बना पा रहे, खुद को लाइव नहीं दिखा पा रहे, क्या हम जानते हैं कि वे ज़िंदा हैं या मर रहे हैं?

अभिषेक श्रीवास्तव

कोरोना काल में महान विभूतियों की लाइव भूमिका पर अभिषेक श्रीवास्तव के लिखे पर प्रतिक्रिया नोट किया जाए। अभिषेक, तुम ने तो सोने की लंका में आग लगा दी है। यह वक्त सच का सामना करने और बिना लाग लपेट के सच कहने का है। मुझे खुशी है कि तुम वही कर रहे हो। मेरे लिए प्रतिष्ठा और कैरियर कभी …

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शांति स्वरूप बौद्ध : ढह गया आंबेडकरी आंदोलन का एक और स्तम्भ !

Shanti Swaroop Bauddh 1

इतिहास पुरुष शांति स्वरूप बौद्ध का आकस्मिक निधन     विगत ढाई महीनों से कोरोना के दहशत भरे माहौल में लिखते-पढ़ते भारी राहत के साथ दिन इसलिए कट रहे थे क्योंकि अपना कोई आत्मीय – स्वजन, इसकी चपेट में नहीं आया था। किन्तु 6 जून की शाम 4 बजे जिस खबर से रूबरू हुआ, वह हमारे लिए कोरोना काल की सबसे …

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जो राजनीति और रंगमंच के अन्तर्सम्बन्ध को नहीं जानता वो ‘रंगकर्मी’ नहीं !

Manjul Bhardwaj

रंगमंच और राजनीति : Theater and Politics मूलतः रंगमंच एक राजनैतिक कर्म है जो राजनीति और रंगमंच के अन्तर्सम्बन्ध को नहीं जानता वो ‘रंगकर्मी’ नहीं है! आज का समय ऐसा है, आज का दौर ऐसा है आज विपदा का दौर है, संकट का दौर है, महामारी का दौर है, या भारत के संदर्भ में कहूं तो एक ऐसा दौर है …

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डॉ. ने गलती से बदंर की नाड़ी भाभी को लगा दिया

Mother of Palash Biswas

पलाश विश्वास मां की पुण्यतिथि है। भाई पद्दोलोचन ने एक कविता लिखी है मेरी माँ की आज पुण्यतिथि है। उन्हें प्रणाम। भाई पद्दोलोचन ने उनकी स्मृति कुछ इस तरह प्रस्तुत की है : आज माँ की 14 वीं पुण्य तिथि है उनकी अगनिगत कथाओं के साथ हम सभी भाई बहन पले बढ़े. उन्हें याद करते हुए साथियो मैं आपको बताते …

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फ़िज़ाई आलूदगी

climate change

फ़िज़ाई आलूदगी [Environmental Pollution ] -: मोहम्मद ख़ुर्शीद अकरम सोज़ :- —————————————– दिल में कैसा दर्द है , सीने में है कैसी जलन साँस बोझिल हो रही है और तारी है घुटन हम ने सनअत में तरक़्क़ी ख़ूब तो  कर ली मगर बद से बदतर हो गया माहौल पे इसका असर जंगलों को इस क़दर हम ने किया बर्बाद है …

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