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शब्द

साहित्य का कोना। कहानी, व्यंग्य, कविता व आलोचना. Literature Corner. Story, satire, poetry and criticism. साहित्य, कला, संगीत, कविता, कहानी, नाटक, व्यंग्य… और अन्य विधाएं, Literature, art, music, poetry, story, drama, satire … and other genres.

सच में दिल तोड़ गये ….फूल खान

Editor Point Editor Phool Khan एडिटर पॉइंट के संपादक फूल खान

एडिटर पॉइंट के संपादक फूल खान (Editor Point Editor Phool Khan) को हस्तक्षेप की एसोसिएट एडिटर डॉ. कविता अरोरा की श्रद्धांजलि तुम कह रहे थे करिश्मे होते हैं, मैं जानती थी नहीं होते, अब खुदा बड़ा नहीं रहा, बीमारियाँ बड़ी हैं खुदा से, चिल्ले-विल्ले, अगरबत्तियाँ, मज़ारों पर सजदे दुआओं का पढ़-पढ़ कर फूंकना, आयतों से दम किया हुआ पानी, सब …

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कला तब तक अधूरी है जब तक वह मनुष्य की ज़िंदगी को न बदले

Theatre of relevance

थिएटर ऑफ़ रेलेवंस….. नेता ऐसे बनते हैं ! 2 अक्तूबर गांधी जयंती पर : रंगकर्म, राजनीति और गांधी पर राजनैतिक विश्लेषक धनंजय कुमार का लेख 2 October on Gandhi Jayanti: Political analyst Dhananjay Kumar’s article on Rangkarma, politics and Gandhi नेता आसमान से नहीं गिरते, न ही किसी फैक्ट्री में पैदा होते हैं. नेता ज़मीन में उगते हैं. संस्कारों, संवेदनाओं, …

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भविष्य से आँख भी मिला पाएँ, इसलिए उठिए और बोलिए

opinion

कुछ बोलिए  संतुलन न बिगड़ जाए कुछ बोलिए अंधेरा न बढ़ता रहे कुछ बोलिए भविष्य न हो मलिन कुछ बोलिए देश की आहुति न हो कुछ बोलिए कीट के काटने पर तो चुप थे सर्पदंश पर तो कुछ बोलिए जहर, मार दे देह को लकवा उससे पहले ही कुछ बोलिए वर्तमान, डरावना भूत न बने इसलिए कुछ तो बोलिए भविष्य …

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ना कोई सीमा में घुसा था ना कोई सीमा में घुसा है, ना कोई मस्जिद बनी थी ना कोई मस्जिद गिरी है

Babri masjid

बहुत दिन पुरानी बात है थोड़ी-थोड़ी भूल गई थोड़ी-थोड़ी याद है जंगल था, नदियां थीं, झरने थे, हिरण थे, काफी पुरानी बात है जंगल था, जंगल में आदमी थे गोली चली, नदियां गंदी हो गईं, झरने सूख गए पता चला हिरन अपने आप मरा था ! लोगों को यह बात लोगों की अदालत से पता चला थोड़ी-थोड़ी भूल गई थोड़ी-थोड़ी …

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एक पत्रिका के पृष्ठों पर बोलते साहित्य जगत पर दृष्टिपात

Arun Maheshwari on review of Aalochana पांच दिन पहले ‘आलोचना’ पत्रिका का 62वां (अक्तूबर-दिसंबर 2019) अंक मिला। कोई विशेषांक नहीं, एक सामान्य अंक। आज के काल में जब पत्रिकाओं के विशेषांकों का अर्थ होता है कोरा पिष्टपेषण, एक अधकचरी संपादित किताब, तब किसी भी साहित्यिक पत्रिका का साधारण कविता, कहानी, आलोचनात्मक निबंधों, समीक्षाओं से तैयार किया गया ‘सामान्य’ कहलाने वाला …

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव के साप्ताहिक एपिसोड में इस रविवार जगदीश पंकज का काव्य पाठ

हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव Jagdish Pankaj

नई दिल्ली, 24 सितंबर 2020.  हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्यिक कलरव अनुभाग (Sahityik Kalrav section of hastakshep.com‘s YouTube channel) में इस रविवार 27 सितंबर 2020 को सुप्रसिद्ध गीतकार जगदीश पंकज (Jagdish Pankaj) का काव्य पाठ होगा। यह जानकारी देते हुए हस्तक्षेप डॉट कॉम के संपादक अमलेन्दु उपाध्याय ने बताया कि फिलहाल इस रविवार हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव का …

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तेरी धूप के तक़ाज़े…

Father and Daughter

एय तारीख़ तुझे कौन सी भट्टी में झोंक दूँ ? कौन सी कब्र में दफ़्न करूँ ? महल की कौन सी दीवार में चिनवाऊँ ? किस अंधे कुएँ में धकेलूँ किस ईंट से मुँह कुचलूँ किस कच्ची कंध के साये में धोखे से बिठा दूँ, कि दरके दीवार और तू धँस जाये वुज़ूद मिट जाए तिरा सामने पड़े ना ये …

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस रविवार अशोक अंजुम का काव्य पाठ

Ashok Anjum

Poetry recitation of Ashok Anjum this Sunday in Hastakshep Sahityik Kalrav नई दिल्ली, 17 सितंबर 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्यिक कलरव अनुभाग (Sahityik Kalrav section of hastakshep.com ‘s YouTube channel) में इस रविवार 20 सितंबर 2020 को सुप्रसिद्ध गीतकार अशोक अंजुम (Ashok Anjum) का काव्य पाठ होगा। यह जानकारी देते हुए हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव के संयोजक …

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अनसुनी आवाज़ : एक संदर्भ ग्रंथ, जिसमें पिछले तीस सालों का भारत है

Ansuni Awaz

पाठकीय दुनिया में दो तरह की पत्रिकाएं दिखायी पड़ती हैं। एक, जो व्यावसायिक हैं, दूसरी, जो ध्येयपरक हैं। व्यावसायिक पत्रिकाओं का योगदान (Contribution of professional journals) यह है कि वे व्यवसाय-वृत्ति के अंतर्गत पाठकों को साहित्य, संस्कृति, राजनीति आदि से संबंधित सूचनाएं और सृजन उपलब्ध कराती हैं जिसमें लेखक-समूह का एलिट क्लास लगा होता है और इनके​ सम्पादक अप्रतिबद्ध किंतु …

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रांगेय राघव : एक अहिंदीभाषी जिसने हिंदी को समृद्ध किया

रांगेय राघव की कृतियां,Biography of Rangeya Raghava,रांगेय राघव का जीवन परिचय,रांगेय राघव का साहित्यिक परिचय,रांगेय राघव / परिचय

हिंदी साहित्य के ‘शेक्सपियर‘ नाम से भी जाने जाते हैं रांगेय राघव Rangeya Raghav is also known as ‘Shakespeare’ of Hindi literature रांगेय राघव Rangeya Raghav (17 जनवरी, 1923 – 12 सितंबर, 1962) हिंदी के उन चंद विशिष्ट और बहुमुखी प्रतिभावान रचनाकारों में से एक हैं, जो बहुत ही कम उम्र लेकर इस संसार में आए, लेकिन जिन्होंने अल्पायु में …

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस रविवार ऑस्ट्रेलिया से डॉ. भावना कुँअर का काव्यपाठ

डॉ. भावना कुँअर (Dr.Bhawna Kunwar)

नई दिल्ली, 10 सितंबर 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्यिक कलरव अनुभाग (Sahityik Kalrav section of hastakshep.com ‘s YouTube channel) में इस रविवार 13 सितंबर 2020 को सुप्रसिद्ध कवयित्री डॉ. भावना कुँअर (Dr.Bhawna Kunwar) का काव्य पाठ होगा। यह जानकारी देते हुए हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव के संयोजक डॉ. अशोक विष्णु शुक्ला व डॉ. कविता अरोरा ने बताया …

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भारतेंदु हरिश्चंद्र के संपूर्ण लेखन का मूल स्वर साम्राज्यवाद-सामंतवाद विरोधी है

Bharatendu Harishchandra 1

The basic tone of Bharatendu Harishchandra’s entire writing is anti-imperialism मनोज कुमार झा/वीणा भाटिया का यह विशेष आलेख “गुलामी की पीड़ा : भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रासंगिकता” हस्तक्षेप पर मूलतः 13 सितंबर 2017 को प्रकाशित हुआ था। Bharatendu Harishchandra Birth Anniversary (भारतेंदु हरिश्चंद्र के जन्म दिवस) 09 सितंबर को हस्तक्षेप के पाठकों के पाठकों के लिए उक्त लेख के संपादित रूप …

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बोलते नहीं सिहरन पैदा करते हैं जगदीश्वर चतुर्वेदी, उनकी बातें चेतना की गहराई में धँस जाती हैं

Jagadishwar Chaturvedi जगदीश्वर चतुर्वेदी। लेखक कोलकाता विश्वविद्यालय के अवकाशप्राप्त प्रोफेसर व जवाहर लाल नेहरूविश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। वे हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

जगदीश्वर चतुर्वेदी : व्यक्तित्व एवं विचारधारा | Jagdishwar Chaturvedi: Personality and Ideology Professor Jagadishwar Chaturvedi is an example for the education world आज हम ऐसे दौर में हैं जहां ज्ञानवान, ईमानदार, बेबाक, समय के पाबंद, विद्यार्थियों के साथ उदार एवं मित्रवत व्यवहार रखने वाले, समस्या के समय विद्यार्थियों को सही परामर्श देने वाले मर्मज्ञ शिक्षकों का घोर अभाव है। ऐसे …

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सुबह के इस मौन इश्क़ को पढ़ा है तुमने ?

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शबनमीं क़तरों से सजी अल सुबह रात की चादर उतार कर , जब क्षितिज पर अलसायें क़दमों से बढ़ती हैं , उन्हीं रास्तों पर पड़े इक तारे पर पाँव रख चाँद फ़लक से उतर कर सुबह को चूम लेता है, नूर से दमकती शफ़क़ तब बोलती कुछ नहीं , चिड़ियों की चहचहाटों में सिंदूर की डिबिया वाले हाथ को चुप …

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आज धर्मवीर भारती की पुण्यतिथि है

Dharamvir Bharati

Today is the death anniversary of Dharamvir Bharti | इतिहास में आज का दिन | News in Hindi आज 04 सितंबर को प्रख्यात साहित्यकार व पत्रकार स्वर्गीय धर्मवीर भारती (Dharamvir Bharati) की पुण्यतिथि है। स्व. धर्मवीर भारती एक प्रसिद्ध हिंदी कवि, लेखक, नाटककार और भारत के एक सामाजिक विचारक थे। वह 1960 से 1987 तक लोकप्रिय हिंदी साप्ताहिक पत्रिका धर्मयुग के …

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हस्तक्षेप साहित्यिक कलरव में इस रविवार प्रख्यात आलोचक “मधुरेश” की वार्ता

Madhuresh Sahityik Kalrav

Talk will be telecast by renowned Hindi critic Madhuresh on Sunday, September 6, 2020 at 4 pm in the literary section of Youtube channel of hastakshep.com नई दिल्ली, 03 सितंबर 2020. हस्तक्षेप डॉट कॉम के यूट्यूब चैनल के साहित्यिक कलरव अनुभाग में इस रविवार 6 सितंबर 2020 को सायं 4 बजे हिंदी के प्रख्यात आलोचक मधुरेश की वार्ता का प्रसारण …

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मैं जानती हूँ कि मैं ‘अमृता प्रीतम‘ नहीं/ ना ही तुम ‘साहिर’

Amrita Pritam

नहीं रखे मैंने तुम्हारी, सिगरेटों के अधबुझे टोटे, छुपा कर किसी अल्मारी-शल्मारी में, कि जब हुड़क लगे तेरी, दबा कर उंगलियों में दो कश खींचूँ, और धुएँ के उड़ते लच्छों में तेरे अक्स तलाशूँ। ना चाय के झूठे प्याले में, बचे घूँट को पिया कभी मैंने, ना चूमीं प्याली पर छपी होंठों की, मिटी-सिटी लकीरों को, मैं जानती हूँ कि …

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शिमला डायरी : पीछे छूट गई धूल को समेट लाया कौन खानाबदोश

Shimla diary Book by Pramod Ranjan

‘शिमला डायरी’ (Shimla diary) अपने समय और समाज की एक ऐसी साहित्यिक-सांस्कृतिक डायरी और दस्तावेज है, जिसका एक अहम हिस्सा हिंदी पत्रकारिता (Hindi journalism) की दुनिया है। इसका विहंगम अवलोकन किया है चर्चित कवि और पत्रकार प्रमोद कौंसवाल (journalist Pramod Kaunswal) ने, जिन्होंने काफी समय तक चंडीगढ़ में रहते हुए खुद शिमला, चंडीगढ़ और पंजाब की पत्रकारिता की दुनिया को बहुत …

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मुक्तबाजार में धर्मोन्माद का यह नंगा कत्लेआम कार्निवाल है, जिसे राष्ट्रवाद कहा जा रहा है

rabindranath tagore

पलाश विश्वास का यह लेख हस्तक्षेप पर उनकी शृंखला रवींद्र का दलित विमर्श के तहत 12 सितंबर 2017 को प्रकाशित हुआ था। हस्तक्षेप के पाठकों के लिए इस लेख का पुनर्प्रकाशन मैंने जिंदगी से लिखने पढ़ने की आजादी के सिवाय कुछ नहीं मांगा और गांव के घर से अलग कहीं और घर बसाने की नहीं सोची। इसलिए आगे लिखना हो …

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कादम्बिनी को श्रद्धांजलि : जब नए संपादक ने पुराने संपादक के लिए विष वमन किया था

Kadambini and Nandan cease publication

मासिक पत्रिका कादम्बिनी को श्रद्धांजलि | Tribute to the monthly magazine Kadambini           हिन्दुस्तान टाइम्स प्रकाशन समूह अर्थात् बिड़ला ग्रुप की दो और पत्रिकाएं बन्द होने का समाचार आया है। उनमें मासिक कादम्बिनी भी एक है। उनके लिए सब कुछ व्यवसाय है, वे केवल फायदा देखते हैं। इस पत्रिका के बन्द होने की खबर ने मेरी स्मृतियों …

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रामचरित मानस कालजयी रचना है आप इसकी जितनी आलोचना करें, इससे उसका दर्जा घटने वाला नहीं

Sant Goswami Tulsidas

सनातनी मथुरा और तुलसीदास | Sanatani Mathura and Tulsidas यह जनश्रुति है तुलसीदास कभी मथुरा आए थे (Tulsidas ever came to Mathura) और मथुरा के किसी प्रसिद्ध मंदिर में दर्शन करने गए, वहां श्रीकृष्ण का बड़ा सुंदर श्रृंगार किया गया था, तुलसीदास उस मूर्ति को देखकर विमुग्ध हो गए। वे श्रीकृष्ण के आनंद में डूब गए, लेकिन भगवान के सामने …

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