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शब्द

पत्रकारिता दिवस पर डॉ. कमला माहेश्वरी ‘कमल’ के कुछ दोहे

Dr. Kamla Maheshwari 'Kamal'

Some couplets of Dr. Kamla Maheshwari ‘Kamal’ on Journalism Day 💐आज पत्रकारिता दिवस पर सभी पत्रकार बन्धुओं को मेरी बहुत -बहुत शुभकामनाएं व शताधिक नमन __💐. कुछ दोहे उन्हें समर्पित करती हूँ __   पत्रकारिता क्षेत्र वह, दिखलाता है साँच. कठिन घड़ी कितनी रहे लेता है सब बाँच..   सत्य खोज हित छानता पर्त-पर्त वो बात. तब ही तो है …

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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना : कुआनो नदी के किनारे की गीली मिट्टी लेकर गीत रचने वाले कवि

Sarveshwar Dayal Saxena (सर्वेश्वर दयाल सक्सेना)

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना : व्यक्तित्व और कृतित्व आज का गीत ‘चुपाइ रहो दुलहिन, मारा जाई कौआ’ हो या ‘नीम की निबौली पक्की, सावन की रितु आयो री’ बस्ती में कुआनो नदी के किनारे की गीली मिट्टी लेकर गीत रचनेवाले कवि थे सर्वेश्वर दयाल सक्सेना,(1927 -1983 )जिनकी प्रतिभा का लोहा मानते हुए अज्ञेय जी ने न केवल उन्हें अपने तीसरे सप्तक …

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पहाड़ इतना मज़बूत नहीं होता, जितना मज़बूत होता है, आदमी का इरादा

Dashrath Manjhi (दशरथ माँझी)

जो ठाना है, वो पाना है। जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे भी नहीं। ये शब्द आज भी, हमारे कानों में गूंजते हैं, उस एक अदना से, गाँव के आदमी, दशरथ माँझी के, जो देखने में साधारण था, लेकिन अंदर से था, असाधारण । उस एक आदमी ने, जिसने जब  ठान लिया, मीलों तनकर खड़े, पहाड़ को तोड़कर, सपाट …

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लेकर चली मां हजारों मील मासूमों को/ शर्म नहीं आती हुक्मरानों को और कानूनों को

Migrants

व्यवस्था पर चोट करती सारा मलिक की तीन लघु कविताएं Sara Malik’s three short poems hurting the system भूख और गरीबी से मजबूर हो गए जख्म पांव के नासूर हो गए कदमों से नाप दी जो दूरी अपने घर की, हजारों ख्वाब चकनाचूर हो गए छालों ने काटे हैं जो रास्ते बेबसी का दस्तूर हो गए. कभी पैदल कभी प्यासे, …

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तल्खियां और दर्द -ए- कश्मीर

Mohd. Rafi Ata मौहम्मद रफीअता डैलीगेट दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी व टीवी पैनलिस्ट

तल्खियां और दर्द -ए- कश्मीर, ————————-😠 मैं कश्मीर हूं दोस्तों मैं जन्नत निशान हूंं, हिस्सा हूं हिंद का मैं,मैं इसकी शान हूं, वादी में मेरी क्यारीयां फूलों की खिल रहीं, गद्दार मैं नही दोस्तों, मैं हिंदोस्तान हूं,,,,,,,,   पर आज जिस तरह से सताया गया मुझे, पहचान मेरी छीन के मिटाया गया मुझे, मेरी ही सर जमीन है, दबाया गया …

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ईद आई अजब एक उदासी लिये !

Eid Aayee Ajab .........

मोहम्मद ख़ुर्शीद अकरम सोज़   —————- ईद आई अजब एक उदासी लिये कोई कैसे किसी को मुबारक कहे ———— ऐ ख़ुदा शुक्र है तेरी तौफ़ीक़ से रोज़े रमज़ान के सारे पूरे हुए ईद का चाँद भी आ गया है नज़र इस पे कोविड का लेकिन पड़ा है असर अब के आई है ईद ऐसे माहौल में ख़ौफ़ छाया कोरोना का …

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‘अनसुनी आवाज’: एक जरूरी किताब

Ansuni Awaz

एक अच्छा लेखक वही होता है (Who is a good writer) जो अपने वर्तमान समय से आगे की समस्यायों, घटनाओं को न केवल भांप लेता है बल्कि उसे अभिव्यक्त करते हुए पाठक को सजग करता है। मास्टर प्रताप सिंह (Master Pratap Singh) ऐसे ही लेखक व पत्रकार रहे हैं। वे ‘मास्टर साहब’ के नाम से लोकप्रिय रहे हैं। उधम सिंह …

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हसरत मोहानी : गंगा जमुनी तहज़ीब का इंक़लाबी शायर

Maulana Hasrat Mohani in Hindi

रसखान की परंपरा का आखिरी शायर और स्वतंत्रता सेनानी बहुत सारे हिंदुस्तानी शायर ऐसे हुए हैं, जिनकी क़लम ने अपनी ताकत पर भारतीयों को अंग्रेज़ों के खिलाफ लड़ने के लिये उत्साहित किया है मगर आज हम जिस आजादी के दीवाने की बात कर रहे हैं, वो शायर होने के साथ-साथ एक पत्रकार, राजनीतिज्ञ और स्वतंत्रता सेनानी और साझी विरासत के …

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कोरोना काल में चर्चा – हज़ार चौरासी की माँ (महाश्वेता देवी ) की दर्द भरी दास्तान, जो नहीं पहुँची बेटे के मरने पर

महाश्वेता देवी, महाश्वेता देवी जीवनी,

एक माँ जो नहीं पहुँची बेटे के मरने पर 1977 में मैग्सेसे, 1986 में पद्मश्री, 1996 में ज्ञानपीठ, 2006 में पद्मभूषण सहित दर्जनों देशी-विदेशी पुरस्कार प्राप्त करने वाली कालजयी लेखिका, जिनके लेखन पर 1968 में संघर्ष, 1993 में रूदाली, 1998 में हजार चौरासी की माँ (Hazaar Chaurasi Ki Maa) और 2000में माटी माई जैसी शानदार फिल्में बन चुकी हैं, महान …

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बड़ी बासी सी लगती है जब नज़्म मेरी ज़िंदा सवाल ढोती है… घर वापसी मजदूर की है ना कि राजा राम की

Migrants

मैं किसी को कोसना नहीं चाहती.. देश- विदेश की मौजूदा अवस्था.. क्या क्यूँ किस तरह चल रही है व्यवस्था.. सत्ता वत्ता..आस्था वास्था.. सब पर बहस बेकार है.. हमने वोट दे दिया बस अब सब कामों पर सरकार है… हमें उनके किये को ही बढ़-बढ़ कर हांकना है.. अगले आदेश तलक चुप रहकर फ़क़त मुँह ही ताकना है.. और मैं वफ़ादारों …

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