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शब्द

आया बनकर फरिश्ता खुदा बनकर

- धनोज कुमार (कवि, शायर, राजनीतिक विश्लेषक व टीवी डिबेटर

आया बनकर फरिश्ता खुदा बनकर हम सब को उससे सीखना चाहिए  ।। छोड़ शिकायत सबकी मदद करना चाहिए । जाने जिंदगी में क्या होगा । जो है अपने पास सब जनहित में लगा देना चाहिए ।। डाक्टर नर्स सब कमाल कर रहे हैं । बचा रहे हैं उनको, जो कोरोना से मर रहे हैं ।। मेहनत उनकी रंग लाएगा । …

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कोरोना काल से- जमीन से कटा साहित्यकार घमंडी, झूठा, धूर्त और अवसरवादी होता है

Rupesh Kumar Singh Dineshpur

“मुँह पर उंगली उठाकर कड़ी आलोचना करने से आज के स्वयंभू मूर्धन्य साहित्यकारों की गीली-पीली हो जाती है। आज के दौर में जो जितना बड़ा साहित्यकार, लेखक है, वो उतना ही जमीन से कटा हुआ, घमंडी, झूठा, धूर्त और अवसरवादी है। किताबों की सेटिंग से ऐय्याशी करने वाले लेखक यह कतई बर्दाश्त नहीं कर सकते कि कोई उनसे मुँह पर …

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देर है बस नजरें मिलने की कर दूंगी जादू-टोना

Meenu Sharma Kota Rajasthan मीनू शर्मा केसवराय पाटन कोटा बूंदी

तन भी पारस मन भी पारस, छू लूँ तो कर दूँ सोना। हमसे कितना प्यार है जानम, एक बार तो कह दो ना।।   मोबाइल पे हमने कितना ट्राई किया है तुमको, एक बार इजहार, इशारा कर तो देते हमको, ढूँढ-ढूँढ हारा तुमको ये नयनों का काजल, पर जाने क्या मूढ़ तुम्हारा ज्यों सावन का बादल, मेरे मन में तेरी …

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मेरे मन की हार में ही है तुम्हारी जीत लिख दूं।।

Hema Pandey

कह रहा है मन चलो आज कोई गीत लिख दूं। मेरे मन की हार में ही है तुम्हारी जीत लिख दूं।।   यह मुझे स्वीकार है तुम बस गये मेरी नजर में, बनके हमराही मिले हो जिन्दगी के इक सफर में, कृष्ण तुम हो मैं निभाऊं राधिका सी प्रीत लिख दूं मेरे मन की हार में ही है तुम्हारी जीत …

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ज़्यादा बोलोगे, कुछ लिख दूँगा, राष्ट्रद्रोही लिख दूंगा, देशद्रोही लिख दूँगा

Rihai Manch appeals to Kerala's Chief Minister to send 86 laborers from Nizamabad, Azamgarh trapped in remote Mallapuram

मज़दूरों की त्रासदी को समर्पित एक रचना। A work dedicated to the tragedy of the workers. तुम दरिद्र हो, भूखे हो, क्यूं रोते हो ? भाग्य की विडंबना है, तर्क आगे माना है । कारण शोध, राष्ट्रद्रोह है, घोर विद्रोह है, तुम्हारी ये हिम्मत कैसे?, तुम्हारी ये ज़ुर्रत कैसे? ज़्यादा बोलोगे, कुछ लिख दूँगा, राष्ट्रद्रोही लिख दूंगा, देशद्रोही लिख दूँगा …

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और कितने टोबा टेकसिंह

Saadat Hasan Manto was a Pakistani writer, playwright and author born in Ludhiana, British India. Writing mainly in the Urdu language, he produced 22 collections of short stories, a novel, five series of radio plays, three collections of essays and two collections of personal sketches.

जसबीर चावला जी की यह कविता हस्तक्षेप पर मूलतः 18 जनवरी 2015 को प्रकाशित हुई थी। सआदत हसन मंटो के जन्म दिवस 11 मई पर पुनर्प्रकाशन   ज़मीन बँट चुकी मुल्क का बँटवारा पूरा हुआ मंटो तुमने लिखा ‘उधर खरदार तारों के पीछे हिंदुस्तान था इधर वैसे ही तारों के पीछे पाकिस्तान दरमियान में ज़मीन के उस टुकड़े पर जिसका …

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“अमिट संबंध” : आत्मा-परमात्मा

Samiksha Thakur समीक्षा ठाकुर

“अमिट संबंध” : आत्मा-परमात्मा | “Indelible relation”: soul-divine   वसु बहती नद्य-नीलिमा मैं, तुम अम्ब धवल विस्तार प्रिय | शीशोद्गम श्यामल उर्मि मैं, तुम नीलकंठ कामारि प्रिय || तुम अम्ब धवल विस्तार प्रिय ||   मैं बहुल वर्ण खग-मृग विचरित, तुम अमिट सकल संसार प्रिय | मैं श्वेत-छवि द्वि-ध्रुव-ध्वनि हूँ , तुम महाखण्ड आकार प्रिय || तुम अम्ब धवल विस्तार प्रिय …

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इस तरह चुपचाप निकल गया शशिभूषण द्विवेदी

Shashi Bhooshan Dwivedi

शशिभूषण द्विवेदी के असामयिक निधन (Untimely demise of Shashibhushan Dwivedi) से स्तब्ध हूँ। गम्भीर सिंह पालनो, ज्ञानेंद्र पांडेय और अवधेश प्रीत हमारी पीढ़ी के लेखक रहे हैं, जो एक साथ पले, पढ़े बढ़े और साथ ही बिखर गए। शशि हमसे जूनियर था। जब मेरे पिता पुलिनबाबू कैंसर से मरणासन्न थे तब वह उन्हें देखने रुद्रपुर से किसी के साथ आया …

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सारा मलिक की कहानी – राशन कार्ड

Sara Malik, सारा मलिक, लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

Story of Sarah Malik – Ration Card राशन कार्ड उर्मिला, अपना सामान बांध रही थी, उसे गांव जाना है, होली के 7 दिन बाद उसने कुछ दिन की छुट्टी ले रखी है. उर्मिला आसपास के घरों में काम करती है, और उसी कमाई से वह अपना घर चलाती है, और अपने तीन बच्चों के लिए एक अच्छे कल के सपने …

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अथ लॉक डाउन कथा : दुखों का लॉकअप (हृदयविदारक कथा)

Migrants On The Road

Lock Down Story: Lockup of Sorrows (Heartbreak Story) (अपने गांव से 1200 किलोमीटर दूर गुजरात के एक गांव में फंसे रायबरेली के एक मजदूर के जीवन की सत्य घटना पर आधारित कहानी- ) Story based on the true incident of the life of a laborer of Rae Bareli stranded in a village in Gujarat, 1200 km from his village भोर …

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