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शब्द

बंद करो बकवास..,,, बातों से भूख शांत होती नहीं है।

How many countries will settle in one country

मज़दूर दिवस  पर सभी मज़दूरों को समर्पित एक रचना। A poem dedicated to all workers on Labor Day बंद करो बकवास, श्रम से चूता पसीना, मोती नहीं है। बहुत दिल बहलाये, क्या पाए ? पेट की भूख और सूद की संज्ञा, हमें ख़ूबसूरत नाम नहीं, खुरदुरी हक़ीक़त चहिये, सदियों से घटतौले, पसीने की क़ीमत चाहिए ख्वाबों से भूख शांत होती …

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सारा मलिक की कहानी “पहला रोजा”

Sara Malik, सारा मलिक, लेखिका स्वतंत्र टिप्पणीकार हैं।

Sara Malik’s story “Pehla Roja” इबादत करना फर्ज है, और हक भी। रमजान का महीना (Month of ramadan) रोजा और इबादत का महीना, बरकतों वाला महीना है। अल्लाह खैर करे इस साल हालात मुख्तलिफ हैं। दुनिया में वबा फैली है। मुल्क भी उसी की चपेट में है। ऐसे में हुकूमत ने एहतियात के तौर पर तालाबंदी कर दी है।  पिछले …

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एक वायरस ने महा शक्तियों को, औक़ात इनकी बता दी !

Novel Cororna virus

मौहम्मद ख़ुर्शीद अकरम सोज़ की कोरोना पर कविताएं   हम  कोरोना  से  जंग  जीतेंगे “”””””””””””””””””””””” हाँ यह वायरस बड़ा ही ज़ालिम है नाम  जिसका  ग़ज़ब “कोरोना” है सारी   दुनिया  परेशान  है  इस से सारी   दुनिया   में   ख़ौफ़ छाया है   इस    कोरोना    को  मात  देने को लॉकडाउन   में  घर   में  रहना  है जब   ज़रूरी  किसी  से मिलना हो फ़ासला   दरमियाँ   …

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वक़्त बदला इक मोबाइल बच्चों के खिलौने तोड़ गया… और बिना शोर के गिल्ली डंडा गली मुहल्ला छोड़ गया …

puppet show video

निरे बचपने की बात है यारों … है याद ज़रा धुँधली-धुँधली .. गिल्ली डंडा कंचों का दौर.. और सिनेमा सी कठपुतली … पुतलकार के हाथ की थिरकन .. थिरकते थे किरदार .. इक उँगली पे राजा थिरके .. इक उँगली सरदार .. राजा महाराजा के क़िस्से ऊँट घोड़े और रानी .. नाज़ुक धागों में सिमटी थी जाने कितनी कहानी … …

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बल्लीमारान की चूड़ी वाली तंग गली में.. इन दिनों खनक नहीं है..

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बल्लीमारान की चूड़ी वाली तंग गली में.. इन दिनों खनक नहीं है .. बाज़ार में लड़कियों की धनक नहीं है… ज़रा ज़रा से बहाने मेंहदी लगवाने .. भइया पक्का रचेगी ना .. करती हुई बातें … शगुनों वाली औरतों की जमातें .. काशीदा दुपट्टे कानों के झूलते बाले .. वो रौनक़ों के उजाले.. सब ग़ायब हैं … पाँच रूपये के …

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पलायन – एक नयी पोथेर पाँचाली

How many countries will settle in one country

नदी में कटान बाढ़ में उफान डूब गया धान भारी है लगान आए रहे छोर के गाम सुना सहर में मिलबे करेगा काम दिहाड़ी-मज़ूरी का कुछ होगा इन्तेजाम कोई बोला खोले लो पान-बीड़ी का दुकान कोई बोला उहाँ चलो बन रहा बड़का मकान माल ढोने-ऊने का काम सौ रुपया दिन का दू पैकेट बिस्कुट और चा सुबो साम सरदार कहे …

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यह मनुष्यता की यात्रा है/ दो पैरों पर ही चलेगी/ ये हवाई जहाज से नहीं चलती/ ये सड़कों पर रेला बन कर बहेगी

Migrants On The Road

समय एक बहुत लम्बी सड़क है और वे चले जा रहे हैं जो बहुत हिम्मती हैं उन्होंने अपने बोरे सरों पर लाद लिए हैं जो बहुत मासूम बच्चे हैं वे पिताओं की उंगली थाम निकल पड़े हैं सैकड़ों किलोमीटर के सफर पर जो बहादुर स्त्रियाँ हैं वे बिना रुके चलती जा रही हैं हम समय के बुजदिल अपने सुरक्षित घरों …

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सड़क के सारे कुत्ते सलामत हैं इन दिनों, कारों से कुचले नहीं जा रहे, इक वायरस ने दुनिया को उसकी औक़ात बता दी

Kavita on Korona Virus in Hindi

सड़क के सारे कुत्ते सलामत हैं इन दिनों, कारों-वारों से कुचले नहीं जा रहे… सड़कें भी आराम फरमा रही हैं चाहे उचली हो या कुचली अड्डे-गड्ढे सब सुकून की साँस ले रहे हैं बड़े-बड़े टायरों तले पिसते-पिसते इक उम्र हो गयी कमबख़्त स्पीड कभी कम नहीं हुयी … चाँद को सूरज की तरह जला डाला … इन बेचैन लोगों ने …

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दुनिया में लोग जेबों से तोले जाते हैं…

डॉ. कविता अरोरा (Dr. Kavita Arora) कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं।

…जेब … पैन्ट की साइडों में शर्ट के ऊपर दिल के दाँये बाँये ज़रा सी जो नज़र आती है दरअसल औक़ात बताती है… रूप, रंग, गुन, संस्कार इस जेब के आगे सब बेकार… अदब लिहाज़ के सारे ताले इसी से खोले जाते हैं… दुनिया में लोग जेबों से तोले जाते हैं… भरी जेब वाले देवों में देव.. रिश्तों की सूखी …

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सुस्त पड़ गयी ज़िन्दगी की रफ्तार को विकास के सहारे भगाना चाहती हैं हमारी सरकारें

Forests

पटना टू सिंगरौली, इंडिया से भारत का सफर, Patna to Singrauli..India’s journey to Bharat सिंगरौली (Singrauli) लौट आया हूँ। कभी पहाड़ों के ऊपर तो कभी उनके बीच से बलखाती निकलती पटना-सिंगरौली लिंक ट्रेन (Patna-Singrauli Link Train)। बीच-बीच में डैम का रूप ले चुकी नदियों और उनके ऊपर बने पुल तो कभी पहाड़ों के पेड़ से भी ऊँची रेल पटरी से …

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