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आपकी नज़र

Guest writers views devoted to commentary, feature articles, etc.. अतिथि लेखक की टिप्पणी, फीचर लेख आदि

उप्र में भाजपा की हंफनी छूट रही है, पर ओवैसी भाईजान हैं न

two way communal play in uttar pradesh

उप्र : दुतरफा सांप्रदायिक खेला उत्तर प्रदेश में भाजपा की हंफनी छूट रही लगती है। चुनाव अभी कम से दो महीने दूर है। फिर भी भाजपा ने न सिर्फ अपनी सांप्रदायिक दुहाई का ज्यादा से ज्यादा सहारा लेना शुरू कर दिया है बल्कि सांप्रदायिक दुहाई के अपने भड़काऊ से भड़काऊ नारों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। ऐसी ही …

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News of the week : गुमराह करती गुमराह सरकार | सप्ताह की बड़ी खबर

news of the week

News of the week : गुमराह करती सरकार ! कृषि कानून | किसान आंदोलन | सप्ताह की बड़ी खबर कृषि कानूनों पर सरकार का जबर्दस्त यू टर्न (Government’s tremendous U turn on agricultural laws) ये मान लिया था कि किसान आंदोलन समाप्त हो जाएगा. सरकार ने एमएसपी पर कोई गारंटी नहीं दी. अजय मिश्र टेनी अभी भी मोदी सरकार का …

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“जय भीम” : जनसंघर्षों से ध्यान भटकाने का एक प्रयास

political prisoner

“जय भीम” फ़िल्म देख कर कम्युनिस्ट लोट-पोट क्यों हो रहे हैं? “जय भीम” फ़िल्म आजकल चर्चाओं में है। जो भी इस फ़िल्म को देख रहा है। वे सब अपने-अपने अंदाज में फ़िल्म की समीक्षा लिख रहे हैं। संशोधनवादी कम्युनिस्ट पार्टियां, जिनको किसी फिल्म में बस लाल झंडा दिख जाए या किसी दीवार पर पोस्टर या दराती-हथौड़ा का निशान दिख जाए, …

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पत्रकार सुरक्षित रहेंगे, तभी गणतंत्र सुरक्षित रहेगा

press freedom

Journalists will be safe only then the republic will be safe “पृथ्वी पर मीडिया का सबसे शक्तिशाली अस्तित्व है। उनके पास निर्दोष को अपराधी बनाने और दोषी को निर्दोष बनाने की शक्ति है, क्योंकि वे जनता के दिमाग को नियंत्रित करते हैं “- मैल्कम एक्स पत्रकारों की सुरक्षा क्यों जरूरी है? पत्रकारों की सुरक्षा कैसे? आज, पूरे विश्व में मीडिया …

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65 साल बाद भी जीवंत और प्रासंगिक बाबा साहब

dr. bhimrao ambedkar

Babasaheb still alive and relevant even after 65 years क्या सिर्फ दलितों के नेता थे डॉ. अंबेडकर? 1956 में आज ही के दिन – 6 दिसंबर को – नहीं रहे थे बाबा साहब डॉ भीमराव अम्बेडकर; मगर कमाल ही है उनका व्यक्तित्व और कृतित्व, जिसके चलते वे आज साढ़े छः दशक बाद भी न सिर्फ जीवंत और प्रासंगिक है बल्कि …

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उत्तराखंड की राजधानी का प्रश्न : जन भावनाओं से खेलता राजनैतिक तंत्र

gairsain

Question of the capital of Uttarakhand: Political system playing with public sentiments उत्तराखंड आंदोलन की विशेषता उत्तराखंड आन्दोलन में तमाम खामियों के बावजूद एक बात जिसने मुझे बहुत प्रभावित किया वह था राजधानी का सवाल और ये इसलिए क्योंकि अन्य राज्यों में जहां राजधानियों के सवाल को लेकर लोग उस क्षेत्र के बड़े शहरों को लेकर आश्वस्त थे वहीं उत्तराखंड …

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वर्तमान में डॉ. आंबेडकर की राजनीति की प्रासंगिकता

dr. bhimrao ambedkar

Special article on 6th December Babasaheb Ambedkar’s Parinirvana Day Current relevance of Dr. Ambedkar’s politics पूना पैक्ट की पृष्ठभूमि (Background of Poona Pact) डॉ. अंबेडकर ने कहा था, “राजनीतिक सत्ता सब समस्यायों की चाबी है और दलित संगठित होकर सत्ता पर कब्ज़ा करके अपनी मुक्ति प्राप्त कर सकते हैं।  राजनीतिक सत्ता का इस्तेमाल समाज के विकास के लिए करना चाहिए।“ …

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दुनिया का पहला जीवित रोबोट : विश्व मानवता को आसन्न खतरे

Science news

आधुनिकतम जेनोबोट्स और उनसे विश्व मानवता को आसन्न खतरे (Modern Xenobots and the Imminent Threat to World Humanity) जेनोबोट्स या Xenobot robot in Hindi | What are xenobots? दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में शुमार अमेरिका के तीन विश्वविद्यालयों क्रमशः वर्मोंट विश्वविद्यालय, टफ्ट्स विश्वविद्यालय और हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वायस इंस्टीट्यूट फॉर बायोलॉजिकल इंस्पायर्ड इंजीनियरिंग के शोध वैज्ञानिकों ने मिल-जुलकर एक …

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हंसी सबसे अच्छी दवा है : मुनव्वर फारूकी

Dr. Ram Puniyani - राम पुनियानी

स्टेंडअप कॉमेडियन मुनव्वर फारूकी (Standup Comedian Munawwar Farooqui) बेंगलुरू में एक परोपकारी संस्था के लिए अपना शो करने वाले थे. पूरे टिकट बिक चुके थे. फिर आयोजकों को यह सूचना दी गई कि उन्हें कार्यक्रम रद्द करना होगा. और कार्यक्रम रद्द हुआ. पुलिस ने इसका कारण यह बताया कि फारूकी एक विवादास्पद व्यक्ति हैं और उनके शो से कानून-व्यवस्था की …

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प्रारंभिक शिक्षा की चुनौतियां

opinion debate

Challenges of early education in Hindi सभी असंतुष्ट हैं स्कूली शिक्षा से (all are dissatisfied with school education). अंग्रेजी मीडियम में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों का कष्ट क्या है? सरकारी स्कूलों में शिक्षक पाठ्यक्रम के साथ न्याय कैसे कर पायेगा? प्रारंभिक शिक्षा की प्रमुख आवश्यकता क्या है? प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा की चुनौतियां क्या है? इन विषयों पर चर्चा करते …

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मुनव्वर से बरास्ते वीर दास, कुणाल तक : गहरे होते अँधेरे, मुक़ाबिल होते उजाले

stand up comedians munawwar farooqui vir das and kunal kamra

पिछली सात साल में दो मामलों में मार्के का विकास हुआ है। एक; मोदी राज की उमर बढ़ी है, बढ़कर दूसरे कार्यकाल का भी आधा पूरा कर चुकी है। दो; रचनात्मकता को कुचल देने और सर्जनात्मकता को मार डालने की योजनाबद्ध हरकतें बढ़ते बढ़ते एक ख़ास नीचाई तक पहुँच गयी हैं। स्टैंड अप कॉमेडियन्स मुनव्वर फारूकी, वीर दास और कुणाल …

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हिन्दी भाषा एवं साहित्य अध्ययन की समस्याएं

literature and culture

शिथिल हुए हैं हिंदी भाषा में शुद्ध-अशुद्ध के मानदंड बीसवीं सदी की दहलीज लांघ कर आज हम इक्कीसवीं सदी में प्रवेश कर चुके हैं। यह मात्र कैलेंडर के पन्ने पलटने की क्रिया नहीं, अपितु हमारी समूची मानसिकता, हमारे भाव विश्व, बुद्धि-जगत एवं हमारे नजरिये में चल रही मंथन प्रक्रिया का आधुनिक युग के परिप्रेक्ष्य में बहुआयामी अवलोकन करने का समय …

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नेहरू के बाद सबसे ज़्यादा मनमोहन सिंह से क्यों चिढ़ता है संघ? उसे राहुल से क्यों लगता है डर?

Narendra Modi Dr. Manmohan Singh

जनता को ताक़तवर बनाने वाला शासक हमेशा विनम्र होगा और उन्हें कमज़ोर बनाने वाला हमेशा अकडू मौजूदा राजनीति का मुख्य द्वंद्व क्या है? | What is the main conflict of current politics? लोगों को मजबूत और कमज़ोर करने के बीच का द्वंद ही मौजूदा राजनीति का मुख्य द्वंद्व है संघ परिवार हिंदू समाज के बीच शुरू से ही प्राचीन सामाजिक …

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वे तो शहीद हुए हैं, मरा तो कुछ और है !! निर्लज्ज धूर्तता को मौजूदा हुक्मरान अपनी चतुराई मानते हैं…

badal saroj

किसान आंदोलन में शहादत देने वाले (Martyrs in the Peasant Movement) तो इतने सबल थे कि निरंकुश हठ का अहंकार तोड़ गए। बाकी सब भी ध्वस्त करेंगे। कृषि मंत्री के चुनिंदा स्मृति-लोप की क्रोनोलॉजी Chronology of selected amnesia of Agriculture Minister तीन कृषि कानूनों की वापसी (withdrawal of three agricultural laws) के लिए लड़ते-लड़ते किसान आंदोलन में शहीद (Martyr in …

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डाटालेस नादान सरकार

pm narendra modi

कानून वापसी हो गई पर नहीं हुई किसानों की घर वापसी देशबन्धु में संपादकीय आज | Editorial in Deshbandhu today तीन कृषि कानूनों की वापसी का विधेयक (Bill to withdraw three agricultural laws) संसद में पारित करवा कर केंद्र सरकार ने यह मान लिया था कि अब एक साल से आंदोलनरत किसान अपने घरों को लौट जाएंगे। लेकिन कानून वापसी …

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ममता बनर्जी की सक्रियता : आखिर भाजपा की खुशी का राज क्या है ?

mamata banerjee

Mamata Banerjee’s Activism: What is the secret of BJP’s happiness? बमुश्किल छह माह पहले बंगाल के विधानसभा के चुनाव में भाजपा को बुरी तरह शिकस्त देने वाली तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress, which badly defeated BJP in Bengal assembly elections), जिसने समूचे विपक्ष को भी नई ऊर्जा से भर दिया था और भाजपा के खिलाफ शेष मुल्क में ‘बंगाल अनुभव’ दोहराने …

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कृषि कानूनों का निरस्तीकरण : संसद को आवारा होने से रोक दिया किसान आंदोलन ने

pm narendra modi

Farmers’ movement stopped Parliament from being a vagabond The Farm Laws Repeal Bill, 2021 के लोकसभा में पास होने के साथ ही आज देश के संसद में इतिहास बन गया, जब देश की सरकार को अपने बनाये गए तीन कृषि कानून वापिस लेने के लिए मज़बूर होना पड़ा। जी हां, यह बिल लोकसभा में बिना किसी चर्चा के पास हो …

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कृषि कानूनों का निरस्तीकरण : गाँव बसने से पहले ही आ पहुँचे उठाईगीरे

badal saroj

क़ानून वापसी के साथ-साथ कानूनों की पुनर्वापसी की जाहिर उजागर मंशा किसानों ने हठ, अहंकार और घमण्ड को चूर किया (Peasants crushed stubbornness, arrogance and pride) 19 नवम्बर की भाषणजीवी प्रधानमंत्री के तीनों कानूनों को वापस लेने की मौखिक घोषणा (Oral announcement to withdraw all three laws) पर कैबिनेट ने 5 दिन बाद 24 नवम्बर को मोहर लगाई और संसद …

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कोरोना ने बड़े पर्दे को किया किक आउट, ओटीटी की बल्ले-बल्ले

entertainment

Corona kicked out the big screen, OTT benefited सिनेमाघर बनाम ओटीटी प्लेटफॉर्म : क्या बड़े पर्दे की तरफ़ लौट पाएंगे दर्शक? सरदार उधम और जय भीम जैसी फिल्मों में ओटीटी पर रिलीज़ होने के बाद भी जिस तरह से सफलता पाई है, उसे देख अब फिल्मकारों का विश्वास ओटीटी पर ही बन गया है.          कोरोना की वज़ह से बड़े पर्दे …

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क्या ममता बनर्जी राष्ट्रीय स्तर पर असदुद्दीन ओवैसी होने जा रही हैं?

कांग्रेस को कमजोर कर भाजपा से कैसे लड़ेंगी ममता बनर्जी? How will Mamata Banerjee fight the BJP by weakening the Congress? कांग्रेस को कमजोर कर क्या देश में वैकल्पिक सियासत खड़ी हो सकती है?- यह सवाल अचानक महत्वपूर्ण हो गया है। अगर इसका जवाब ‘हां’ है तो ममता बनर्जी सही दिशा में कदम उठा रही हैं। और, अगर इसका जवाब …

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फिदेल कास्त्रो की माँ, धर्म और गरीबी

fidel castro

Fidel Castro’s Mother, Religion and Poverty फिदेल कास्त्रो से जुड़ी दिलचस्प बातें (Interesting facts about Fidel Castro in Hindi) धर्मसंबंधी निजी सवालों के उत्तर (Answers to Personal Questions About Religion) देते समय फिदेल कास्त्रो के अंदर कोई विभ्रम नजर नहीं आते फिदेल कास्त्रो को स्पष्टवादिता का संस्कार क्रांति से मिला। क्रांतिकारी होने के नाते वे हर बात को स्पष्ट ढंग …

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