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आपकी नज़र

Guest writers views devoted to commentary, feature articles, etc.. अतिथि लेखक की टिप्पणी, फीचर लेख आदि

बाबरी मस्जिद, रामजन्मभूमि और बौद्ध पुरावशेष

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

ARTICLE BY DR RAM PUNIYANI IN HINDI – BUDDHIST REMAINS IN AYODHYA Babri Masjid, Ram Janmabhoomi and Buddhist Antiquities इस समय देश में तालाबंदी है. कारखाने बंद हैं, निर्माण कार्य बंद हैं और व्यापार-व्यवसाय बंद हैं. परन्तु अयोध्या में राममंदिर का निर्माण (Construction of Ram temple in Ayodhya) चल रहा है. इसकी राह उच्चतम न्यायालय ने प्रशस्त की थी. अदालत …

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सर्वप्रथम सरकार की कथनी और करनी में अंतर को पहचानने वाला वर्ग मज़दूर वर्ग

Lockdown, migration and environment

The working class, which first recognized the difference between the words and actions of the government दुनिया के 100 से अधिक देश कोविड-19 नाम के वायरस से जूझ रहे हैं, भारत में अभी तक 1 लाख से अधिक कोरोना के कन्फ़र्म केस आए हैं। महाराष्ट्र, दिल्ली, गुजरात, मुख्य रूप से प्रभावित राज्य हैं। Public Health System in India भारत में …

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योगी सरकार की घोषणा में प्रोपेगैंडा के सिवाय नया क्या है ?

Yogi Adityanath

योगी सरकार की घोषणा और जमीनी हकीकत में है फर्क Yogi government’s announcement and ground reality differ आज उत्तर प्रदेश की योगी सरकार द्वारा इंडियन इंडस्ट्री एसोसिएशन, राष्ट्रीय रीयल एस्टेट विकास परिषद (Indian Industries Association, National Real Estate Development Council) आदि कंपनियों से हुए करार के तहत memorandum of understanding (MOU) पर हस्ताक्षर करने को प्रदेश में ही प्रवासी मजदूरों …

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सर्वेश्वर दयाल सक्सेना : कुआनो नदी के किनारे की गीली मिट्टी लेकर गीत रचने वाले कवि

Sarveshwar Dayal Saxena (सर्वेश्वर दयाल सक्सेना)

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना : व्यक्तित्व और कृतित्व आज का गीत ‘चुपाइ रहो दुलहिन, मारा जाई कौआ’ हो या ‘नीम की निबौली पक्की, सावन की रितु आयो री’ बस्ती में कुआनो नदी के किनारे की गीली मिट्टी लेकर गीत रचनेवाले कवि थे सर्वेश्वर दयाल सक्सेना,(1927 -1983 )जिनकी प्रतिभा का लोहा मानते हुए अज्ञेय जी ने न केवल उन्हें अपने तीसरे सप्तक …

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कोरोना महामारी के नाम पर मीडिया हाउस का शिकार बन रहे हैं पत्रकार, कांग्रेस शासित राज्यों में भी हो रहे पत्रकारों पर जुल्म

Press Freedom

Journalists are becoming victims of media houses in the name of Corona epidemic, atrocities on journalists also happening in Congress ruled states पिछले सप्ताह तंगदस्ती से तंग आकर हिंदी ख़बर न्यूज चैनल के कैमरामैन पत्रकार सत्येंद्र की आत्महत्या बड़े मीडिया हाउस के लिये सुर्खियां नहीं बन पायीं, क्योंकि इस से मीडिया की साख पर बट्टा लग रहा था और मीडियाकर्मियों …

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सविता अम्बेडकर को वह सम्मान नहीं मिला जिसकी वे वास्तव में हकदार थीं

Dr. Savita Ambedkar, wife of Babasaheb Dr. Bhimrao Ambedkar

Savita Ambedkar did not get the honor she truly deserved आज बाबासाहेब की दूसरी पत्नी डॉ. सविता अम्बेडकर जी को स्मृति दिवस पर विनम्र श्रद्धांजलि। 1987 में मैं बनारस में पुलिस अधीक्षक (आर्थिक अपराध शाखा, सीआईडी) के पद पर तैनात था। एक दिन मुझे पता चला कि बाबासाहेब की पत्नी डॉ. सविता अम्बेडकर (Dr. Savita Ambedkar, wife of Babasaheb Dr. …

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पहाड़ इतना मज़बूत नहीं होता, जितना मज़बूत होता है, आदमी का इरादा

Dashrath Manjhi (दशरथ माँझी)

जो ठाना है, वो पाना है। जब तक तोड़ेंगे नहीं, तब तक छोड़ेंगे भी नहीं। ये शब्द आज भी, हमारे कानों में गूंजते हैं, उस एक अदना से, गाँव के आदमी, दशरथ माँझी के, जो देखने में साधारण था, लेकिन अंदर से था, असाधारण । उस एक आदमी ने, जिसने जब  ठान लिया, मीलों तनकर खड़े, पहाड़ को तोड़कर, सपाट …

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कोरोना संकट से निपटने में योगी मॉडल फेल

Yogi Adityanath

Yogi model fails to tackle Corona crisis कोरोना संकट से निपटने के लिए योगी मॉडल को प्रोजेक्ट किया जा रहा है। संकट को अवसर में बदलने के संकल्प की बात मुख्यमंत्री कर रहे हैं। प्रवासी मजदूरों को प्रदेश में ही रोजगार के भरपूर अवसर मुहैया कराने की वकालत की जा रही है। स्किल मैपिंग चार्ट तैयार करने के आदेश दिए …

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पांचवे लॉकडाउन की आहट के बीच कोरोना महामारी पर नए सिरे से सोचने की जरूरत

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Need to rethink corona epidemic amidst the fifth lockdown एक नए शोध (New research on corona virus) के मुताबिक शांत समय में कोरोना वायरस छींक, खांसी, यहाँ तक कि बातचीत के दौरान 20 फिट तक जा सकता है। छींकने, खाँसने, या सामान्य बातचीत में 40.000 नन्हीं बूंदें निकल सकती हैं जो एक सेकंड में कुछ मीटर से लेकर कुछ सौ …

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घर पहुंचकर भी प्रवासी मजदूरों को चैन नहीं

QUarantine centre Basantipur

भाई पद्दोलोचन इन दिनों खूब कविताएँ लिख रहा है। उसकी ताज़ा कविता इस कठिन और मुश्किल तारीख में वे तमाम-तमाम मेहनतकश मौत से पंजा लड़ते-लड़ते लौट रहे गांव. उन्हें देख कर डरो नहीं थोड़ा सम्मान थोड़ा प्यार थोड़ी समझदारी दो कोरोना हारेगा इस तरह इन दिनों गांव-गांव जाकर लोगों से सम्वाद कर रहा हूँ मित्र विकास स्वर्णकार के साथ। कड़ी …

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घर लौटते हुए मजदूरों के व्यवस्था से कुछ सवाल… क्या मजदूर पूंजीवीद को सीधी चुनौती दे रहा है

Migrants On The Road

Some questions related to the system of laborers returning home आज से बीस वर्ष पहले 31 दिसंबर 2000 व 1 जनवरी 2001 को देश के किसान एवं मजदूर नेताओं, सोशलिस्ट नेताओं तथा स्वतंत्रा संग्राम सेनानियों का दो दिवसीय जमावड़ा देवरिया जिले के ग्रामीण इलाके बरियारपुर चौराहे पर हुआ था जो इलाका लोहिया और राज नारायण की कर्मभूमि भी मानी जाती …

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आत्मनिर्भर भारत में 01 जून को काला दिवस मनाएंगे देश के 15 लाख बिजली कर्मचारी क्योंकि बिजली होने वाली है 10 रुपए यूनिट

National News

बिजली का निजीकरण – किसानों के लिए अभिशाप – पहुँच से बाहर होगी बिजली  बिजली के निजीकरण बिल के विरोध में – 01 जून को काला दिवस किसान अर्थात  देश की जीवन रेखा 1971 के बाद ग्रामीण विद्युतीकरण ने भारत के किसानों की तकदीर बदल दी। पहले भारत को खाद्यान्न के मामले में अमेरिका के आगे हाँथ पसारने को मजबूर होना पड़ता था। ग्रामीण विद्युतीकरण …

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क्या भारतीय राज्य हिन्दुओं के सैन्यीकरण की ख़तरनाक हिन्दुत्ववादी योजना का मार्ग प्रशस्त कर रहा है?

Recruitement in Force

वर्तमान समय में, भारतीय सुरक्षा बलों को संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के बाद दुनिया की चौथी सबसे शक्‍तिशाली सेना के रूप में स्थान हासिल है, जिसमें जापान पाँचवें स्थान पर है। इसमें लगभग 3,544,000 फ़ौजी हैं, जिनमें रिज़र्व कर्मियों के रूप में काम करनेवाले 2,100,000 के साथ 1,444,000 सक्रिय ड्यूटी पर हैं।[1] इसे बांग्लादेश युद्ध 1971, कारगिल युद्ध …

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लेकर चली मां हजारों मील मासूमों को/ शर्म नहीं आती हुक्मरानों को और कानूनों को

Migrants

व्यवस्था पर चोट करती सारा मलिक की तीन लघु कविताएं Sara Malik’s three short poems hurting the system भूख और गरीबी से मजबूर हो गए जख्म पांव के नासूर हो गए कदमों से नाप दी जो दूरी अपने घर की, हजारों ख्वाब चकनाचूर हो गए छालों ने काटे हैं जो रास्ते बेबसी का दस्तूर हो गए. कभी पैदल कभी प्यासे, …

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आज के संदर्भ में पं. नेहरू की प्रासंगिकता

Jawaharlal Nehru

Relevance of Pt. Nehru in today’s context 27 मई पं. जवाहरलाल नेहरू की पुण्यतिथि पर विशेष | special on Pt. Jawaharlal Nehru’s death anniversary 27th May जिस “आइडिया ऑफ इंडिया” की कल्पना जवाहरलाल नेहरू ने की थी उसमें भारत को न केवल आर्थिक एवं राजनैतिक दृष्टि से स्वावलम्बी होना था बल्कि ग़ैर साम्प्रदायिक भी होना था। ये नेहरू ही थे …

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अजीब आत्ममुग्दता का दौर है… फाँसी भी चढ़ेंगे और अपनी शवयात्रा भी देखेंगे•••

Rupesh Kumar Singh Dineshpur

कोरोना काल में चर्चा ••• Discussion in the Corona era “क्रान्तिकारी की तरह फाँसी भी चढ़ना चाहते हैं और अपनी भव्य शवयात्रा भी देखना चाहते हैं, ऐसा कैसे संभव है???” सेलिब्रिटी बनने के लिए लालायित (Longing to be a celebrity) रहने वाले तथाकथित साहित्यकारों और फ़ेसबुकिया एक्टिविस्टों पर  प्रोफेसर भूपेश सिंह के जोरदार त़ंज ने आज की बातचीत को विस्तार दिया। …

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फासीवाद के विरुद्ध संघर्ष में लेनिन से सीखने की जरूरत है खारिज करने की नहीं… अपूर्वानंद को दारापुरी का जवाब

special on Lenins death anniversary

In the struggle against fascism, there is a need to learn from Lenin not to dismiss … Darapuri’s reply to Apurvanand इंडियन एक्सप्रेस में इधर किसी लेख के जवाब में लेखक, अध्यापक और सामाजिक कार्यकर्ता अपूर्वानंद की टिप्पणी पर नजर पड़ी, पहले तो मुझे लगा की शायद लेखक कह रहे हैं कि लेनिन के क्रांति के मॉडल (Lenin’s model of …

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अमेरिका बन रहे देश के लिए जरूरी सूचना – एक बार फिर महाशक्ति अमेरिका वियतनाम से हार गया

Namaste Trump

अमेरिका बन रहे देश के लिए जरूरी सूचना एक बार फिर महाशक्ति अमेरिका वियतनाम से हार गया विडम्बना देखें, इतिहास का खेल। अमेरिका में कोरोना से एक लाख लोग मारे गए (One Lakh people died in America from Corona)। लेकिन वियतनाम में एक भी मृत्यु कोरोना से नहीं हुई। एक बार फिर महाशक्ति अमेरिका वियतनाम से हार गया। डॉ पार्थ …

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मेहनतकशों के नरसंहार का महिमामंडन कर रहा है सम्पन्न नवधनाढ्य तबका

How many countries will settle in one country

The rich middle class is glorifying the massacre of working people अमेरिका में एक लाख से ज्यादा लोगों की कोरोना से मृत्यु हो गई है। चार करोड़ लोग बेरोज़गार हो गए हैं, लेकिन सम्पन्न ट्रम्प समर्थकों के लिए यह मृत्यु पर्व महोत्सव बन गया है। डॉ पार्थ बनर्जी, जो रोजनामचा लिख रहे हैं, उसमें मज़दूरों, अश्वेतों और गरीबों के इस …

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भारत माता संकट में है और मौज में हैं उसकी जय के नारे लगाने वाले! क्या सांस थमने का इन्तजार कर रही है सरकार?

narendra modi flute

क्या वास्तव में इससे बुरा कुछ हो सकता है? प्रेरणा अंशु के सम्पादक वीरेश कुमार सिंह का पठनीय आवश्यक लेख In the Corona era, the alliance of the leader-officer-capitalist is in front of everyone in its worst form. ‘हमारे मोडो को इत्तो मारो है इत्तो मारो है, जे खटिया पे पड़ो है। खून बह रहो है। बा हिल-डुल न पा …

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नफरत की आंधी नहीं बुझा सकेगी इंसानियत की शमा

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

The storm of hate will not be able to extinguish humanity इस समय हमारा देश कोरोना महामारी की विभीषिका (The devastation of the corona epidemic) और उससे निपटने में सरकार की गलतियों के परिणाम भोग रहा है. इस कठिन समय में भी कुछ लोग इस त्रासदी का उपयोग एक समुदाय विशेष का दानवीकरण करने के लिए कर रहे हैं. नफ़रत …

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