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आपकी नज़र

Guest writers views devoted to commentary, feature articles, etc.. अतिथि लेखक की टिप्पणी, फीचर लेख आदि

राम-राम सा करते-करते अंततः जयश्री राम नहीं बोलेंगे सचिन पायलट ?

Sachin Pilot Ashok Gehlot

एक कहावत है – “उसी के साहिल, उसी के कगारे, तलातुम में फंस कर जो दो हाथ मारे” कांग्रेस की नैया भीषण मंझधार में हिचकोलें खा रही है और इस बुरे दौर में जिन युवाओं की तरफ आस भरी निगाहों के पार्टी देख रही है वे युवा इस तूफान में दो हाथ मारने के बजाय कश्ती से छलांग मारकर भाग …

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भारत में गूगल का निवेश : भारत की सार्वभौमिकता में अमेरिकी सेंध की अनुमति, झूठ और दुरभिसंधि

Google's investment in India

Google’s investment in India: allowing US dent in India’s universality गूगल एंड अल्फाबेट के सीईओ सुंदर पिचाई (Sundar Pichai, CEO of Google & Alphabet) ने भारत में 75 हज़ार करोड़ के निवेश की जो घोषणा की है, वह महज़ इसीलिये संदेहास्पद हो जाती है क्योंकि इसे प्रधानमंत्री मोदी से बात करने के बाद किया गया है। इस बात को ईश्वर …

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कांग्रेस की सियासत और उसूल जब गांधीवाद पर आधारित है तो ये कांग्रेसी कैसे गांधी विरोधी संगठनों के हमराही बन जाते हैं?

congress

कांग्रेस की सियासत और उसूल जब गांधीवाद पर आधारित है तो ये कांग्रेसी कैसे गांधी विरोधी संगठनों के हमराही बन जाते हैं? आज ये प्रश्न लोगों के जेहन में कौंध रहा है। इस पर कांग्रेस आला कमान / संगठन के साथ-साथ कांग्रेसी शुभचिंतकों को भी विचार करना होगा। गैर कांग्रेसी/खासकर साम्प्रदायिक और फासिस्ट ताकतें नेहरू ही नहीं बल्कि गांधी और …

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आज मास्साब का जन्मदिन है

Ansuni Awaz

नमस्कार साथियों! आज मास्साब का जन्मदिन है। मास्साब के बगैर हम उनका तीसरा जन्मदिन मना रहे हैं। उनके मिशन पर काम करते हुए शायद ही कोई दिन गया होगा, जब हमने उन्हें याद न किया हो। समाज परिवर्तन की लड़ाई में प्रेरणा-अंशु परिवार आपके बताये रास्ते पर चल रहा है। हम हर स्थिति में आपके विचार को हवा-पानी देते रहेंगे …

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कोविड-19 से बचाव के लिए वैक्सीन : क्या विज्ञान पर राजनैतिक हस्तक्षेप भारी पड़ रहा है?

Novel Coronavirus SARS-CoV-2 Credit NIAID NIH

Vaccine to Avoid COVID-19: Is Political Intervention Overcoming Science? भारत सरकार के भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसन्धान परिषद (Indian Council of Medical Research) (आईसीएमआर) ने 2 जुलाई 2020 को कहा था कि 15 अगस्त 2020 (स्वतंत्रता दिवस) तक कोरोना वायरस रोग (कोविड-19) से बचाव के लिए वैक्सीन के शोध को आरंभ और समाप्त कर, उसका “जन स्वास्थ्य उपयोग” आरंभ किया जाए. क्योंकि …

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लेकिन तुम उस महामानव के विचारों से अब भी क्यों डरते हो?

रजनीश कुमार अम्बेडकर (Rajnish Kumar Ambedkar) पीएचडी, रिसर्च स्कॉलर, स्त्री अध्ययन विभाग महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा (महाराष्ट्र)

महामानव के विचार जब हम चढ़ाते हैं ऐसे महामानव पर दो फूल तो डगमगा जाता है…! उनका सिंहासन वे डर जाते हैं कहीं ठप्प न हो जाए उनकी दुकान…!! हम चुपचाप फिर भी उस महामानव के बताए रास्ते पर चलना चाहते हैं…! वे मिटाना चाहते हैं उनकी पहचान और उनके विचारों को भी पर वे बंधे हुए हैं ऐसे विचारों …

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केरल, मोपला क्रांति और साम्प्रदायिकीकरण

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

Kerala, Mopala revolution and communalization | ARTICLE BY DR RAM PUNIYANI – MOPLAH REVOLT पिछले कुछ महीनों से केरल ख़बरों में है. मीडिया में राज्य की जम कर तारीफ हो रही है. केरल ने कोरोना वायरस का अत्यंत मानवीय, कार्यकुशल और प्रभावी ढंग से मुकाबला किया. इसके बहुत अच्छे नतीजे सामने आये और लोगों को कम से कम परेशानियाँ भोगनी पडीं. …

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अच्छे दिन : पाँच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था से पाँच किलो अनाज तक

narendra modi flute

पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था (Five trillion dollar economy) का सपना देखने वाला देश अब पांच किलो अनाज पर आ कर टिक गया है। भारत के दिमाग़, उसके बाजार, तेज दौड़ती अर्थव्यवस्था और कॉर्पोरेट की दुनिया में चर्चा होती रही है। ऐसा क्या हुआ है कि देश दो जून की रोटी की ओर बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। प्रधानमंत्री …

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पाँच दशक से वैकल्पिक मीडिया का नेतृत्व कर रहे हैं आनन्दस्वरूप वर्मा

Anand swaroop Verma

Anandaswaroop Verma has been leading alternative media for five decades हमें छात्र जीवन से आनन्द स्वरूप वर्मा और  पंकज बिष्ट का सानिध्य मिला। समकालीन तीसरी दुनिया और समयांतर दोनों पत्रिकाएं रघुवीर सहाय के दिनमान के बाद हिंदी पत्रकारिता के मानक बनी हुई हैं। नैनीताल समाचार के डीएसबी के दिनों से लेकर प्रेरणा अंशु तक हम इनका ही अनुसरण करते हैं। …

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वैश्विक रूल ऑफ़ लॉ इंडेक्स में फिसड्डी भारत

India in global rule of law index वाशिंगटन डीसी स्थित वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट (World Justice Project, an organization devoted to promoting the rule of law throughout the world.) हरेक वर्ष देशों की क़ानून व्यवस्था से आधारित रूल ऑफ़ लॉ इंडेक्स (Rule of law index) प्रकाशित करता है. इस वर्ष के इंडेक्स में कुल 128 देशों की सूचि में विश्व के …

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भारत-चीन टकराव : मौजूदा सत्ता प्रतिष्ठान की इसके हल में कोई दिलचस्पी नहीं है

Akhilendra Pratap Singh

India-China Conflict: The current power establishment is not interested in its solution 7 जुलाई 2020 के हिंदुस्तान अखबार ने अपने संपादकीय में लिखा है कि भारत व चीन के तनाव में सुधार के संकेत हैं। लेकिन वह आगे लिखता है कि यदि चीन गलवान से पीछे हटा है तो भी हमें अपनी उदारता दिखाने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। भूटान …

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लोकतंत्र के जननायक ज्योति बसु सही अर्थ में गांधी के दरिद्र नारायण के प्रतीक पुरुष थे

Jyoti Basu

आज ज्योति बाबू का जन्मदिन है– Today is Jyoti Babu’s birthday आम आदमी की जिंदगी जीना सबसे मुश्किल काम है। अभिजन परिवार में पैदा होने और सुखों से भरी जिंदगी छोड़ने की किसी की इच्छा नहीं होती। खासकर इन दिनों सभी रंगत के राजनीतिक दलों में सुख और वैभव के साथ राजनीति करने की होड़ मची है। ऐसी अवस्था में …

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कोई क्यों बनती है आयुषी ? महिला सशक्तिकरण के योगी मॉडल का सच – पूरी योजना का बजट मात्र एक हजार रुपए !

DLC instructs not to remove employees of 181 Asha Jyoti Women's Helpline

Why does someone become an Aayushi? The truth of the Yogi model of women empowerment – the budget of the entire scheme is only one thousand rupees उत्तर प्रदेश में 181 रानी लक्ष्मी बाई आशा ज्योति वूमेन हेल्पलाइन (181 Rani Laxmi Bai Asha Jyoti Women’s Helpline in Uttar Pradesh) के उन्नाव जिले में काम करने वाली 32 वर्षीय आयुषी सिंह …

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महिलाओं के लिए कोई नया नहीं है लॉकडाउन

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महिला और लॉकडाउन | Women and Lockdown महिलाओं के लिए लॉकडाउन कोई नया लॉकडाउन नहीं है इससे पहले भी बचपन से न जाने कितने लॉकडाउनों को देखा और महसूस किया…! जैसे ही किसी बच्ची का जन्म होता है उसके साथ ही लॉकडाउन का जन्म होता है कुछ लोगों के द्वारा ऐसी सामाजिक बंदिशे बनाई गई…. जैसे-जैसे उनकी उम्र बढ़ती है …

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जेल से लिखे डॉ. कफ़ील का ख़त पढ़कर, दिल रखने वाला कोई भी इंसान रो पड़ेगा…

Dr Kafeel Khan Suspended Asst. professor BRD MEDICAL COLLEGE GORAKHPUR, A Pediatrician

पिछले कई महीनों से डॉक्टर कफ़ील मथुरा जेल में हैं। इसी जेल से उन्होंने ने चार पन्नों वाला एक ख़त (Dr. Kafil’s letter written from jail) खुद अपने हाथों से लिखा है। ख़त पढ़कर कोई भी सीने में दिल रखने वाला इन्सान रोये बगैर नहीं रह सकता है। आखिर एक काबिल और जनता के डॉक्टर को जेल में बंद कर, सरकार …

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इस कोरोना काल में बंद नहीं हुआ जातीय अत्याचार…..

Novel Coronavirus SARS-CoV-2 Colorized scanning electron micrograph of a cell showing morphological signs of apoptosis, infected with SARS-COV-2 virus particles (green), isolated from a patient sample. Image captured at the NIAID Integrated Research Facility (IRF) in Fort Detrick, Maryland.

कोरोना और लॉकडाउन ऐ कोरोना तूने क्या किया एक ही पल में अचानक बदली दी तूने दुनिया तेरे ही कारण देश-व्यापी लॉकडाउन हुआ तेरे ही कारण अर्थ-व्यवस्था घुटनों पर आई तेरे ही कारण लाखों मजदूरों ने किया पलायन तेरे ही कारण महिलाओं पर अत्याचार बढ़ा तेरे ही कारण गरीब किसानों ने खुदखुशी की…..! तेरे ही कारण खुली विकास की पोल …

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उत्तराखण्ड बनने के बाद जनता को क्या मिला और सेवा के नाम मेवा कौन खा रहे हैं ?

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

After the formation of Uttarakhand, what did the public get and who are eating nuts in the name of service? गांव बुकसौरा के हैं लाखन सिंह। समाजोत्थान विद्यालय में पढ़ता था। पढ़ाई पूरी नहीं कर पाया और इन दिनों मजदूरी कर रहा है। केले लेकर वह मिलने आया। फिर घर लौटते हुए मुझे बसंतीपुर छोड़ गया। The Buxa is a …

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भारत-चीन सहयोग और समर्थन विश्व राजनीति के नक़्शे को पूरी तरह से बदल सकता है

Arun Maheshwari - अरुण माहेश्वरी, लेखक सुप्रसिद्ध मार्क्सवादी आलोचक, सामाजिक-आर्थिक विषयों के टिप्पणीकार एवं पत्रकार हैं। छात्र जीवन से ही मार्क्सवादी राजनीति और साहित्य-आन्दोलन से जुड़ाव और सी.पी.आई.(एम.) के मुखपत्र ‘स्वाधीनता’ से सम्बद्ध। साहित्यिक पत्रिका ‘कलम’ का सम्पादन। जनवादी लेखक संघ के केन्द्रीय सचिव एवं पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव। वह हस्तक्षेप के सम्मानित स्तंभकार हैं।

India-China cooperation and support can completely change the map of world politics खबरें आ रही है कि गलवान घाटी और दूसरे कई स्थानों पर भी चीन और भारत, दोनों ने अपनी सेनाओं को पीछे हटाना शुरू कर दिया है। अगर यह सच है तो यह खुद में एक बहुत स्वस्तिदायक समाचार है। भारत चीन के बीच सीमा पर तनाव के …

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निगाहें कहीं भी हों निशाना बिहार चुनाव पर

PM Modi Speech On Coronavirus

प्रधानमंत्री मोदी के 30 जून के संबोधन (Prime Minister Modi‘s 30 June address,) को, जो कोरोना संकट के दौर में राष्ट्र के लिए प्रधानमंत्री का छठा संबोधन था, अनेक टिप्पणीकारों ने खोदा पहाड़ निकली चुहिया करार दिया है। बेशक, प्रधानमंत्री के संबोधन ने ज्यादातर लोगों को निराश ही किया है। प्रधानमंत्री के ‘मन की बात’ कार्यक्रम (Prime Minister’s ‘Mann Ki …

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थाने में हत्या से थानेदार की हत्या तक की यात्रा 21वीं सदी में हमारे लोकतंत्र के अधःपतन का रूपक है!

Police

थाने में हत्या से थानेदार की हत्या तक की यात्रा 21वीं सदी में हमारे लोकतंत्र के अधःपतन का रूपक है! देश के सबसे बड़े राज्य में 2001 में पिछली भाजपा सरकार के राज में थाने में दर्ज़ाप्राप्त राज्यमंत्री की हत्या से शुरू हुई यात्रा भाजपा के मौजूदा शासन में थानेदार, CO, पुलिसकर्मियों की हत्या तक पहुंची ! 21वीं सदी के …

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राष्ट्र को बचाने के लिए नई आर्थिक व औद्योगिक नीति को बदलना वक्त की जरूरत

narendra modi flute

The need of the hour is to change the new economic and industrial policy to save the nation उदार अर्थनीति (Liberal economy) के समर्थकों द्वारा पब्लिक सेक्टर और कल्याणकारी नीतियों को देश के विकास में बाधक व अर्थव्यवस्था पर बोझ होने का प्रोपेगैंडा कर निजीकरण, विनिवेशीकरण और बाजारोन्मुखी आर्थिक सुधारों को तर्कसंगत और देशहित में जरूरी बताया जाता है। 1990 …

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