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आपकी नज़र

Guest writers views devoted to commentary, feature articles, etc.. अतिथि लेखक की टिप्पणी, फीचर लेख आदि

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा एनपीआर में उपलब्ध कराए गए दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएं

Justice

Documents made available by President Ramnath Kovind to NPR should be made public एनपीआर सबसे पहले देश के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का होगा। हम मांग करते हैं कि देश के प्रथम नागरिक द्वारा एनपीआर में उपलब्ध कराए गए दस्तावेज़ सार्वजनिक किए जाएं। उसके साथ यह विवरण भी शामिल हो कि दस्तावेज़ कब और कहां से जारी किए गए …

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दुनिया में लोग जेबों से तोले जाते हैं…

डॉ. कविता अरोरा (Dr. Kavita Arora) कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं।

…जेब … पैन्ट की साइडों में शर्ट के ऊपर दिल के दाँये बाँये ज़रा सी जो नज़र आती है दरअसल औक़ात बताती है… रूप, रंग, गुन, संस्कार इस जेब के आगे सब बेकार… अदब लिहाज़ के सारे ताले इसी से खोले जाते हैं… दुनिया में लोग जेबों से तोले जाते हैं… भरी जेब वाले देवों में देव.. रिश्तों की सूखी …

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सुस्त पड़ गयी ज़िन्दगी की रफ्तार को विकास के सहारे भगाना चाहती हैं हमारी सरकारें

Forests

पटना टू सिंगरौली, इंडिया से भारत का सफर, Patna to Singrauli..India’s journey to Bharat सिंगरौली (Singrauli) लौट आया हूँ। कभी पहाड़ों के ऊपर तो कभी उनके बीच से बलखाती निकलती पटना-सिंगरौली लिंक ट्रेन (Patna-Singrauli Link Train)। बीच-बीच में डैम का रूप ले चुकी नदियों और उनके ऊपर बने पुल तो कभी पहाड़ों के पेड़ से भी ऊँची रेल पटरी से …

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सीएए-एनपीआर-एनआरसी की सबसे बुरी मार आदिवासी, दलित, ओबीसी पर पडने वाली है : राज वाल्मीकि की टिप्पणी

Guwahati News, Citizenship Act protests LIVE Updates, Anti-CAA protests, News and views on CAB,

सीएए-एनपीआर-एनआरसी पर दलित दृष्टिकोण – Dalit Approach on CAA-NPR-NRC चलो दिल्ली भरो दिल्ली 04 मार्च 2020 आज अगर खामोश रहे तो….. “…इसकी सबसे बुरी मार नोमेडिक ट्राइब यानी घुमंतू जनजातियों पर पड़ने वाली है जिनके पास न कोई जमीन है न कोई कागजात. आदिवासी, दलित, ओबीसी भी कागजात के अभाव में नागरिकता खो देंगे. और वे तमाम गरीब जिनके पास न …

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2019 में मॉब लिंचिंग : वर्चस्ववाद की अभिव्यक्ति

Things you should know

झारखंड के 24 वर्षीय तबरेज अंसारी को एक भीड़ ने घेर लिया और उस पर आरोप लगाया कि उसने एक मोटरसाईकिल चोरी की है। भीड़ की मांग पर उसने ‘जय श्रीराम‘ के नारे भी लगाए। परंतु फिर भी उसे बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया गया। 25 साल का मोहम्मद बरकत आलम जब नमाज़ पढ़कर अपने घर लौट रहा …

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हाँ ! मैं एक ‘लव जिहादी’ हूँ – जीसस भी लव जिहादी थे

Sasi Kp, K P Sasi

I Am A ‘Love Jihadi’ – An Open Letter to Cardinal George Alencherry of Syro Malabar Church of Kerala by K P Sasi फिल्मकार के पी शशि का केरल के सिरो मालाबार चर्च के कार्डिनल जॉर्ज अलेंचेरी को खुला पत्र सर ! मैं भारत के सर्वाधिक प्राचीन दर्शनिक सम्प्रदाय चार्वाक सम्प्रदाय (ancient school of philosophical thought in India called Charvakas) …

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स्वतंत्रता-संग्राम के ग़द्दारों की संतानों के नए पैंतरे : आरएसएस के ‘वीर’ सावरकर ने किस तरह नेताजी की पीठ में छुरा घोंपा

Prof. Shamsul Islam on Gandhiji's 72nd Martyrdom Day

आरएसएस-भाजपा टोली गांधीजी को अपमानित और नीचा दिखाने का कोई मौक़ा नहीं गंवाती है। इस ख़ौफ़नाक यथार्थ को झुठलाना मुश्किल है कि देश में हिंदुत्व राजनीति के उभार (The rise of Hindutva politics in the country) के साथ गांधीजी की हत्या पर ख़ुशी मनाना (Celebrating Gandhi’s assassination) और हत्यारों का महिमामंडन, उन्हें भगवन का दर्जा देने का भी एक संयोजित …

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योगी का संविधान विरोधी वक्तव्य है “देश को रामराज्य चाहिए समाजवाद नहीं”

Yogi Adityanath

There is socialism in the Preamble of the Constitution, not Ram Rajya Yogi’s anti-constitution statement is “the country needs Ramrajya, not socialism” संविधान विरोधी वक्तव्य है योगी जी का कि देश को रामराज्य चाहिए समाजवाद नहीं। संविधान की प्रस्तावना में समाजवाद है रामराज्य नहीं। स्पष्ट करें योगी जी ! उन्होंने भारत के संविधान की प्रस्तावना में वर्णित समाजवाद की जगह …

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राजनीति का बढ़ता अपराधीकरण : घर को लग गई आग घर के चराग से

The Supreme Court of India. (File Photo: IANS)

Candidates with criminal background in elections सर्वोच्च न्यायालय ने राजनीतिक दलों को निर्देश दिया है (Supreme Court has directed political parties) कि वे चुनाव में आपराधिक पृष्ठभूमि के उम्मीदवारों को खड़ा करें तो जनता को बतायें कि आखिर ऐसी कौन-सी मजबूरियां थीं, जिनके फलस्वरूप उन्होंने बेदाग के बजाय आपराधिक पृष्ठभूमि वाले प्रत्याशी (Candidates with criminal background) का विकल्प चुना। न्यायालय …

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हमें आपकी मदद की आवश्यकता है, आपके समर्थन के बिना हम अस्तित्व में नहीं रहेंगे

आप हस्तक्षेप के पुराने पाठक हैं। हम जानते हैं आप जैसे लोगों की वजह से दूसरी दुनिया संभव है। बहुत सी लड़ाइयाँ जीती जानी हैं, लेकिन हम उन्हें एक साथ लड़ेंगे — हम सब। Hastakshep.com आपका सामान्य समाचार आउटलेट नहीं है। हम क्लिक पर जीवित नहीं रहते हैं। हम विज्ञापन में डॉलर नहीं चाहते हैं। हम चाहते हैं कि दुनिया …

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कैसे आते हैं बदलाव ? अशिक्षित होना और मूर्ख होना दो अलग बातें

motivational article

How does change come? Being uneducated and being foolish are two different things आज हमें परिवर्तन की मानसिक यात्रा से गुज़रने की आवश्यकता है स्कूल-कॉलेज विधिवत औपचारिक शिक्षा के मंच (Formal education platforms) हैं और व्यक्ति यहां से बहुत कुछ सीखता है। शिक्षित व्यक्ति के समाज में आगे बढ़ने के अवसर अशिक्षित लोगों के मुकाबले कहीं अधिक हैं। एक कहावत …

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परिभाषाओं के बदलते अर्थों में अब महिलाओं को चरित्रहीन ही होना चाहिये !

डॉ. कविता अरोरा (Dr. Kavita Arora) कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं।

कल कल्लन के लिये गेट पर मजमा लगा.. पुलिस आई ज़ाहिल औरतों की इक टोली चिल्लाई इसने कल्लन का हाथ पकड़ा… थी तो बेहयाई पर मुझे ज़ोर से हँसी आई.. शक्ल से कबूतर उम्र पचपन से ऊपर.. कल्लन क्या खो चुका है दिमाग़ी आपा… अधेड़ उम्र पर जे सुतियापा… हट्टे कट्टे मुस्टंडे कल्लन ने हाथ क्यूँ नहीं छुड़ाया.. मजमई भेड़ों …

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मोदी जैसों का सच सात पर्दों के पीछे से भी बोलने लगता है — सुनिये तवलीन सिंह के मोहभंग की कहानी

Narendra Modi new look

तवलीन सिंह का यह साक्षात्कार (Interview of Tavleen Singh) सचमुच उल्लेखनीय है। पिछले छ: सालों में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के उनके स्तंभ (Tavleen Singh’s column in ‘Indian Express’) में कई बार मोदी की तारीफ़ में उनकी बातें इतनी छिछली और भक्तों के प्रकार की हुआ करती थी कि उन पर तीखी टिप्पणी करने से हम खुद को रोक नहीं पाते थे। …

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इस्लाम के आंतरिक ‘संकट’ की विवेचना : क्या वाकई मुसलमान, स्वयं इस्लाम के सबसे बड़े शत्रु हैं ?

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

Explaining Islam’s internal ‘crisis’: Are Muslims themselves the biggest enemies of Islam? समकालीन वैश्विक संकट के पीछे धर्म है या राजनीति? Is religion or politics behind the contemporary global crisis? वैश्विक स्तर पर ‘इस्लामिक आतंकवाद’ (‘Islamic terrorism’ globally) शब्द बहुप्रचलित हो गया है और इस्लाम के आंतरिक ‘संकट’ की कई तरह से विवेचना की जा रही है। Islam is going through a big crisis ? …

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आजादी से पहले देश अनपढ़ जरूर था, लेकिन धर्मांध हरगिज़ नहीं

News and views on CAB

India is still a country of villages. Those who led the freedom struggle were understood by this very rule. बदलाव का सपना देखने वाले लोग न जाने क्यों भूल जाते हैं कि भारत अब भी गांवों का देश है। आजादी की लड़ाई का नेतृत्व करने वालों ने इस बहुत कायदे से समझा था। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ ग्रामीण भारत में …

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देश पिछड़ गया तो क्या, मोदी तो संघ का एजेंडा पूरा करने में उम्मीद से आगे निकल गए हैं  

Narendra Modi in anger

अच्छे दिन लाने और प्रत्येक के खाते में सौ दिन के अन्दर 15 लाख जमा कराने तथा हर साल युवाओं को दो करोड़ नौकरियां देने के वादे (Promises to provide 20 million jobs to youth every year) के साथ सत्ता में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के चार वर्ष पूरे हो गए हैं। अवश्य ही मोदी इस दरम्यान जहाँ …

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अंबेडकर की नजर में वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ है सभी किस्म के विशेषाधिकारों का खात्मा

Dr B.R. Ambedkar

We should see Baba Saheb Bhimrao Ambedkar as a modern mythologist. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को हमें आधुनिक मिथभंजक के रूप में देखना चाहिए। भारत और लोकतंत्र के बारे में परंपरावादियों, सनातनियों, डेमोक्रेट, ब्रिटिश बुद्धिजीवियों और शासकों आदि ने अनेक मिथों का प्रचार किया है। ये मिथ आज भी आम जनता में अपनी जड़ें जमाए हुए हैं। बाबासाहेब ने भारतीय …

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फिर भी…दिल्ली अभी दूर है

Arvind Kejriwal

वैसे तो हरेक चुनाव के नतीजे को ही जनता का जनादेश माना जाता है, फिर भी दिल्ली की जनता का फैसला अपने जोर में और निर्णायकता में खास है। इस फैसले के खास होने के तीन खास कारण हैं, जिनका महत्व उनके क्रम से उलटा है। पहला तो यही कि लगातार दूसरी बार, दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी …

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रेडिकल अंबेकरवाद के जवाब में आंबेडकर में देवत्व स्थापना का संघ प्रायोजित ’खेल’

Dr B.R. Ambedkar

RSS-sponsored ‘game’ of establishing divinity in Ambedkar in response to radical Ambekarism Ambedkar-Buddha (Bhima Katha) Katha organized in Mangta village of Kanpur Nagar district of Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जिले के मंगटा गांव में हाल ही में आंबेडकर-बुद्ध(भीम कथा) कथा का आयोजन किया गया। इस कथा में आंबेडकर की बाईस शिक्षाओं (Twenty two teachings of ambedkar), उनके …

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सर्वाधिक अवसरवादी केजरीवाल : जो सवाल मोदी से राहुल ने पूछा वो भाजपा को पूछना चाहिए था

Arvind Kejriwal

राजनेताओं के बयानों और आचरण में गम्भीरता का अभाव Lack of seriousness in statements and conduct of politicians  भारत एक बड़ा व महान देश है जिसे इन दिनों ओछे और निचले स्तर के नेता चला रहे हैं। पिछले दिनों जब पुलवामा कांड को एक साल पूरी हुआ तब राहुल गाँधी ने एक सवाल पूछा कि उक्त घटना की जाँच रिपोर्ट …

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राजनीति का नया अखाड़ा : बजरंगबली बनाम जय श्रीराम

Arvind Kejriwal

The craving for power has weakened human morality. राजनीति एक बड़ा अजीब खेल है। राजनीति में कब क्या होगा, इसका किसे कोई पता नहीं होता। कब करीबी दोस्त विरोधी बन जाएगा और कब कट्टर विरोधी दोस्त बनेगा इसपर कुछ भरोसा नहीं किया जा सकता। देश में ऐसे कई उदाहरण हैं। राजनीति में कब करीबी रिश्तेदार दुश्मन बनकर चुनावी मैदान में …

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