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आपकी नज़र

Guest writers views devoted to commentary, feature articles, etc.. अतिथि लेखक की टिप्पणी, फीचर लेख आदि

कैसे आते हैं बदलाव ? अशिक्षित होना और मूर्ख होना दो अलग बातें

motivational article

How does change come? Being uneducated and being foolish are two different things आज हमें परिवर्तन की मानसिक यात्रा से गुज़रने की आवश्यकता है स्कूल-कॉलेज विधिवत औपचारिक शिक्षा के मंच (Formal education platforms) हैं और व्यक्ति यहां से बहुत कुछ सीखता है। शिक्षित व्यक्ति के समाज में आगे बढ़ने के अवसर अशिक्षित लोगों के मुकाबले कहीं अधिक हैं। एक कहावत …

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परिभाषाओं के बदलते अर्थों में अब महिलाओं को चरित्रहीन ही होना चाहिये !

डॉ. कविता अरोरा (Dr. Kavita Arora) कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं।

कल कल्लन के लिये गेट पर मजमा लगा.. पुलिस आई ज़ाहिल औरतों की इक टोली चिल्लाई इसने कल्लन का हाथ पकड़ा… थी तो बेहयाई पर मुझे ज़ोर से हँसी आई.. शक्ल से कबूतर उम्र पचपन से ऊपर.. कल्लन क्या खो चुका है दिमाग़ी आपा… अधेड़ उम्र पर जे सुतियापा… हट्टे कट्टे मुस्टंडे कल्लन ने हाथ क्यूँ नहीं छुड़ाया.. मजमई भेड़ों …

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मोदी जैसों का सच सात पर्दों के पीछे से भी बोलने लगता है — सुनिये तवलीन सिंह के मोहभंग की कहानी

Narendra Modi new look

तवलीन सिंह का यह साक्षात्कार (Interview of Tavleen Singh) सचमुच उल्लेखनीय है। पिछले छ: सालों में ‘इंडियन एक्सप्रेस’ के उनके स्तंभ (Tavleen Singh’s column in ‘Indian Express’) में कई बार मोदी की तारीफ़ में उनकी बातें इतनी छिछली और भक्तों के प्रकार की हुआ करती थी कि उन पर तीखी टिप्पणी करने से हम खुद को रोक नहीं पाते थे। …

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इस्लाम के आंतरिक ‘संकट’ की विवेचना : क्या वाकई मुसलमान, स्वयं इस्लाम के सबसे बड़े शत्रु हैं ?

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

Explaining Islam’s internal ‘crisis’: Are Muslims themselves the biggest enemies of Islam? समकालीन वैश्विक संकट के पीछे धर्म है या राजनीति? Is religion or politics behind the contemporary global crisis? वैश्विक स्तर पर ‘इस्लामिक आतंकवाद’ (‘Islamic terrorism’ globally) शब्द बहुप्रचलित हो गया है और इस्लाम के आंतरिक ‘संकट’ की कई तरह से विवेचना की जा रही है। Islam is going through a big crisis ? …

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आजादी से पहले देश अनपढ़ जरूर था, लेकिन धर्मांध हरगिज़ नहीं

News and views on CAB

India is still a country of villages. Those who led the freedom struggle were understood by this very rule. बदलाव का सपना देखने वाले लोग न जाने क्यों भूल जाते हैं कि भारत अब भी गांवों का देश है। आजादी की लड़ाई का नेतृत्व करने वालों ने इस बहुत कायदे से समझा था। ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ ग्रामीण भारत में …

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देश पिछड़ गया तो क्या, मोदी तो संघ का एजेंडा पूरा करने में उम्मीद से आगे निकल गए हैं  

Narendra Modi in anger

अच्छे दिन लाने और प्रत्येक के खाते में सौ दिन के अन्दर 15 लाख जमा कराने तथा हर साल युवाओं को दो करोड़ नौकरियां देने के वादे (Promises to provide 20 million jobs to youth every year) के साथ सत्ता में आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल के चार वर्ष पूरे हो गए हैं। अवश्य ही मोदी इस दरम्यान जहाँ …

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अंबेडकर की नजर में वास्तविक स्वतंत्रता का अर्थ है सभी किस्म के विशेषाधिकारों का खात्मा

Dr B.R. Ambedkar

We should see Baba Saheb Bhimrao Ambedkar as a modern mythologist. बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर को हमें आधुनिक मिथभंजक के रूप में देखना चाहिए। भारत और लोकतंत्र के बारे में परंपरावादियों, सनातनियों, डेमोक्रेट, ब्रिटिश बुद्धिजीवियों और शासकों आदि ने अनेक मिथों का प्रचार किया है। ये मिथ आज भी आम जनता में अपनी जड़ें जमाए हुए हैं। बाबासाहेब ने भारतीय …

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फिर भी…दिल्ली अभी दूर है

Arvind Kejriwal

वैसे तो हरेक चुनाव के नतीजे को ही जनता का जनादेश माना जाता है, फिर भी दिल्ली की जनता का फैसला अपने जोर में और निर्णायकता में खास है। इस फैसले के खास होने के तीन खास कारण हैं, जिनका महत्व उनके क्रम से उलटा है। पहला तो यही कि लगातार दूसरी बार, दिल्ली की जनता ने आम आदमी पार्टी …

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रेडिकल अंबेकरवाद के जवाब में आंबेडकर में देवत्व स्थापना का संघ प्रायोजित ’खेल’

Dr B.R. Ambedkar

RSS-sponsored ‘game’ of establishing divinity in Ambedkar in response to radical Ambekarism Ambedkar-Buddha (Bhima Katha) Katha organized in Mangta village of Kanpur Nagar district of Uttar Pradesh उत्तर प्रदेश के कानपुर नगर जिले के मंगटा गांव में हाल ही में आंबेडकर-बुद्ध(भीम कथा) कथा का आयोजन किया गया। इस कथा में आंबेडकर की बाईस शिक्षाओं (Twenty two teachings of ambedkar), उनके …

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सर्वाधिक अवसरवादी केजरीवाल : जो सवाल मोदी से राहुल ने पूछा वो भाजपा को पूछना चाहिए था

Arvind Kejriwal

राजनेताओं के बयानों और आचरण में गम्भीरता का अभाव Lack of seriousness in statements and conduct of politicians  भारत एक बड़ा व महान देश है जिसे इन दिनों ओछे और निचले स्तर के नेता चला रहे हैं। पिछले दिनों जब पुलवामा कांड को एक साल पूरी हुआ तब राहुल गाँधी ने एक सवाल पूछा कि उक्त घटना की जाँच रिपोर्ट …

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राजनीति का नया अखाड़ा : बजरंगबली बनाम जय श्रीराम

Arvind Kejriwal

The craving for power has weakened human morality. राजनीति एक बड़ा अजीब खेल है। राजनीति में कब क्या होगा, इसका किसे कोई पता नहीं होता। कब करीबी दोस्त विरोधी बन जाएगा और कब कट्टर विरोधी दोस्त बनेगा इसपर कुछ भरोसा नहीं किया जा सकता। देश में ऐसे कई उदाहरण हैं। राजनीति में कब करीबी रिश्तेदार दुश्मन बनकर चुनावी मैदान में …

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हाँ मैं बेशर्म हूँ….रवायतें ताक पर रख कर खुद अपनी राह चलती हूँ

डॉ. कविता अरोरा (Dr. Kavita Arora) कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं।

हाँ मैं बेशर्म हूँ…. झुंड के साथ गोठ में शामिल नहीं होती रवायतें ताक पर रख कर खुद अपनी राह चलती हूँ तो लिहाजो की गढ़ी परिभाषाओं के अल्फ़ाज़ गड़बड़ाने लगते हैं.. और खुद के मिट जाने की फ़िकरों में डूबी रिवाजी औरतों की इक बासी उबाऊ नस्ल सामने से वार करती है… झुंड में यह मुँह चलाती भेड़ें भरकस …

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प्रायोजित आतंकवाद, प्रायोजित राष्ट्रवाद और फेक न्यूज मोदी का माहौल बना रहे हैं

PM Narendra Modi at 100 years of ASSOCHAM meet

अपने ही “सत्य “में कैद नरेन्द्र मोदी प्रायोजित आतंकवाद (Sponsored terrorism), प्रायोजित राष्ट्रवाद (Sponsored nationalism) और फेक न्यूज (Fake news) ये तीन तत्व मिलकर घर घर मोदी का माहौल बना रहे हैं। मोदी की नई रणनीति– सैनिकों की मौत को वोट बैंक में तब्दील करो। जो इसका विरोध करे उसे राष्ट्र शत्रु करार दो। Vulgar politics tv show वल्गर राजनीति …

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अल्बेयर कामू के तर्क बिखरे हुए ज़रूर थे लेकिन व्यावहारिक थे

Albert Camus

अल्बेयर कामू जैसे निर्मम राजनैतिक चिन्तक को सार्त्र ने अपना पिछलग्गू अस्तित्ववादी लेखक बना दिया……. कलावादी यहाँ तक कि मनोवैज्ञानिक-कुंठाओं का फ्रायडीय लेखक बना दिया….  “हर नयी क्रांति सत्ता के नाम पर दमन का नये से नया मुखौटा लगाकर खड़ी हो जाती है जो आम आदमी के ख़िलाफ़ जाता है.”——–कामू अल्बेयर कामू की यह घोषणा (Albert Camus Quotes) थी लगभग.तब …

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शाहीन बाग, मुसलमान और तकनीकी रैनेसां : यह एकदम नए मुसलमान के जन्म की घोषणा है

Shaheen Bagh

शाहीन बाग, मुसलमान और तकनीकी रैनेसां Muslims’ association with computer technology and cyber culture शाहीन बाग जनांदोलन (Shaheen bagh movement) के आरंभ होने के बाद बड़ी संख्या में इस आंदोलन का मीडिया कवरेज (Media coverage of Shaheen Bagh movement) सामने आया है। इस कवरेज में स्व-प्रचार की भावना से निर्मित सामग्री और विभिन्न वेबसाइट पर व्यापक सामग्री सामने आई है। यह …

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क्या आदिवासी हिंदू हैं? आगामी जनगणना और आरएसएस का अभियान

डॉ. राम पुनियानी (Dr. Ram Puniyani) लेखक आईआईटी, मुंबई में पढ़ाते थे और सन्  2007 के नेशनल कम्यूनल हार्मोनी एवार्ड से सम्मानित हैं

Are Adivasis Hindus? Forthcoming Census and RSS campaign Upcoming census and RSS campaign article in Hindi by Dr. Ram Puniyani इन दिनों पूरे देश में एनपीआर-एनआरसी-सीएए को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. इसी के समांतर, सन 2021 की दशकीय जनगणना (Census of India 2021) की तैयारियां भी चल रहीं हैं. आरएसएस द्वारा एनपीआर, एनआरसी और सीएए का समर्थन तो किया ही …

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शरणार्थियों की चिंता मगर देश के दलितों की नहीं : ये कैसा नागरिकता कानून!

News and views on CAB

Refugees are concerned but not the Dalits of the country मुगलों ने बहुसंख्यक हिंदुओं की संस्कृति पर प्रहार (Attack on Hindu culture) किया जैसा कि भारत के इतिहास के विभिन्न लेखकों की पुस्तकों से प्रतीत होता है. जिसमें रोमिला थापर की पुस्तक “भारत का इतिहास” इस संदर्भ में विस्तृत प्रकाश डालती है. मुगल कालीन शासक अकबर से पहले तक के …

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बजट 2020 : जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण को लेकर चिंताएं बढ़ी ही हैं

Budget 2020

Budget 2020: Concerns about climate change and pollution have increased हर साल की तरह केंद्र सरकार ने वर्ष 2020-21 का आम बजट (General Budget for the year 2020-21) संसद में पेश कर दिया है। लेकिन जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण (Climate change and pollution) जैसी दो बड़ी समस्याओं पर यह बजट खामोश है, बल्कि सही कहा जाए तो बजट से जलवायु …

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जब-जब यह सोच सरकार बनाती है विचारों का खुलापन सीलेपन की बदबू से घिर जाता है,

Rajeev mittal राजीव मित्तल वरिष्ठ पत्रकार हैं।

इतिहास, शिक्षा, साहित्य और मीडिया।  (History, education, literature and media । ) ये चार ऐसे शक्तिशाली हथियार हैं, जो किसी भी समाज को लंबे समय तक कूपमंडूक और बौरा देने की क्षमता रखते हैं। युद्ध में हुई क्षति के घाव तो देर-सबेर भर जाते हैं, लेकिन ज़रा बताइये कि उन घावों जख्मों का क्या किया जाए, जो मनुस्मृतियों, वेद पुराण …

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दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम, जीत के गुलदस्ते में कांटे 

Arvind Kejriwal

दिल्ली विधानसभा के चुनाव परिणामों (Delhi Assembly Election Results) ने देश भर में एक उत्साह का संचार किया है। ये चुनाव असाधारण परिस्थितियों में हुये थे जब तानाशाही प्रवृत्ति के साम्प्रदायिक दकियानूसी संगठन संचालित दल से देश के लोकतांत्रिक धर्मनिरपेक्ष प्रगतिशील लोग असंगठित रूप से मुकाबला कर रहे थे। केन्द्र में सत्तारूढ होने के कारण सुरक्षा बलों का नियंत्रण भी …

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देशबन्धु को अपनी स्वतंत्र नीति, सिद्धांतपरकता, निर्भीकता और राजाश्रय या सेठाश्रय के बिना कितनी मुश्किलों से गुजरना पड़ा है

Lalit Surjan ललित सुरजन देशबंधु पत्र समूह के प्रधान संपादक हैं. वे 1961 से एक पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. वे एक जाने माने कवि व लेखक हैं. ललित सुरजन स्वयं को एक सामाजिक कार्यकर्ता मानते हैं तथा साहित्य, शिक्षा, पर्यावरण, सांप्रदायिक सद्भाव व विश्व शांति से सम्बंधित विविध कार्यों में उनकी गहरी संलग्नता है. यह आलेख देशबन्धु से साभार लिया गया

देशबन्धु के साठ साल Sixty years of Deshbandhu दृश्य-1 मि.मजूमदार! आई हैव डन माई इनिंग्ज़ मोर ऑर लैस. बट गॉड विलिंग, यू हैव अ लॉंग वे टू गो. आफ्टर ऑल, यू एंड ललित आर ऑफ सेम एज. (श्री मजूमदार! मैं अपनी पारियां लगभग खेल चुका हूं। लेकिन प्रभु कृपा से आपको लंबा सफर तय करना है। आखिरकार, आप और ललित हमउम्र …

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