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हस्तक्षेप

भारत विभाजन हम ने नहीं कराया : झूठों के शहंशाह अमित शाह

Amit Shah at Kolkata

झूठ बोलने में माहिर आरएसएस इस समय दुनिया का कोई भी फासीवादी संगठन दोग़ली बातें करने, उत्तेजना फैलाने और षड्यंत्र रचने में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ– Rashtriya Swayamsevak Sangh, (आरएसएस) को मात नहीं दे सकता। भारत के एक मशहूर अंगरेजी दैनिक ने आरएसएस के बारे में प्रख्यात लेखक जॉर्ज ऑरवेल द्वारा दिए गए शब्द ‘दो मुंहा’ को इस विघटनकारी संगठन के …

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संघ से नहीं, इतिहास से कुछ सीखिए मोटा भाई, धर्म के आधार पर बना पाकिस्तान साल 1971 आते-आते टूट गया था

Amit Shah Narendtra Modi

इतिहास से सीखिए कुछ ! धर्म के आधार पर बना पाकिस्तान साल 1971 आते आते टूट गया था। पूर्वी पाकिस्तान बंगलादेश बन गया था। हिन्दू धर्म के मानने वालों से अपेक्षाकृत अधिक एकरूपता ‘एक अल्लाह’ ‘एक कुरान’ और ‘एक आखिरी पैगम्बर’ तथा ‘एक भाषा में एक जैसी प्रार्थना-पद्यति’ के कारण पूर्वी-पश्चिमी पाकिस्तान के बहुसंख्यकों में थी। लेकिन धार्मिकता राष्ट्र की …

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बलात्कार के बढ़ते मामलों में क्या सरकार व सिस्टम से सवाल नहीं करें ?

Say no to Sexual Assault and Abuse Against Women 1

Should we not question the government and the system in the increasing cases of rape? बलात्कार की बढ़ रही वारदातों को देख अब सरकार व सिस्टम से सवाल करने की मजबूरी हुई जरूरी बलात्कार की आए दिन हो रही नई वारदातें व बढ़ते हुए क्रूर, बर्बर, घृणित दुष्कर्म के मामले देखकर तो यह निश्चित हो गया है कि लोगों में …

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आरएसएस और उद्योग जगत के बीच प्रेम और ईर्ष्या के संबंध की क़ीमत अदा कर रही है भारतीय अर्थ-व्यवस्था

Indian economy is paying the price for love and jealousy between RSS and industry आज के टेलिग्राफ़ में उद्योगपतियों की मनोदशा (Mood of industrialists) के बारे में सुर्ख़ी की खबर है। “Why business is talking ‘wine’, not Dhanda”। (क्यों उद्योगपति ‘शराब’ की बात करते हैं, धंधे की नहीं ) पूरी रिपोर्ट उद्योगपतियों की आपसी बातचीत और उनके बयानों के बारे …

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एनआरसी भारत विभाजन से अधिक त्रासद परिणामों वाला फैसला होगा।

NRC par ghiri BJP BJP in crisis over NRC

NRC will be a decision with more tragic consequences than partition of India. एनआरसी भारत विभाजन से अधिक त्रासद परिणामों वाला फैसला होगा। एनआरसी (NRC) की कवायद मुसलमानों से द्वेष (Malice to Muslims) के नाम पर शुरू होकर सभी धर्मों के करोड़ों भारतीयों को उसी तरह घायल कर गुजरेगी जैसे कालेधन के नाम पर नोटबन्दी ने किया ! और ये …

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मोटा भाई, जब धर्म के आधार पर भारत विभाजन हो रहा था, तब हिन्दू महासभा और संघ कहां थे ?

Amit Shah at Kolkata

संसद में अमित शाह ने कांग्रेस को धर्म के आधार पर भारत के विभाजन का दोषी (guilty of partition of India on the basis of religion) बताया। संघ की स्थापना 1925 में (RSS established in 1925) और हिन्दू महासभा की 1905 में हुई (Hindu Mahasabha was established in 1905) । भारत का विभाजन 1947 में हुआ (India was partitioned in …

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गनीमत है हमारे सदा वाचाल पंत प्रधान ने नारी अस्मिता पर अभी तक सीतारमण जैसा उत्तर नहीं दिया ‘मैं प्याज नहीं खाती’

Narendra Modi in anger

गनीमत है हमारे सदा वाचाल पंत प्रधान ने नारी अस्मिता पर अभी तक सीतारमण जैसा उत्तर नहीं दिया ‘मैं प्याज नहीं खाती’ ऐसे मौन के सदके लड़कियों की अस्मिता (Girls identity) को लेकर पूरे देश में हंगामा बरपा है, सड़कों पर जन-सैलाब है, आसमान गूँज रहा है। संसद में हंगामा है लेकिन हमारे सदा वाचाल पंत प्रधान मुंह में गुड़ …

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बर्बरता किसी न्यायपूर्ण समाज का निर्माण नहीं कर सकती

Say no to Sexual Assault and Abuse Against Women 1

बर्बरता किसी न्यायपूर्ण समाज का निर्माण नहीं कर सकती हैदराबाद में बलात्कारियों के एनकाउंटर की पूरे देश में भारी प्रतिक्रिया (Reaction to the encounter of rapists in Hyderabad) हुई है। अभी हमारा समाज जिस प्रकार की राजनीति के जकड़बंदी में फंसा हुआ है, उसमें लगता है जैसे आदमी आदिमता के हर स्वरूप को पूजने लगा है। यह जन-उन्माद चंद लेखकों-बुद्धिजीवियों …

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जितने वजनदार उतने ही विनम्र थे स्वयं प्रकाश

Swayam Prakash

जितने वजनदार उतने ही विनम्र थे स्वयं प्रकाश श्रद्धांजलि/ संस्मरण- स्वयं प्रकाश Tribute / Memoir to Swayam Prakash  मैं लम्बे समय तक कहानियों का नियमित पाठक रहा हूं जिसका शौक कमलेश्वर के सम्पादन के दौर में निकलने वाली सारिका से लगा था। सारिका के समानांतर कथा आन्दोलन के दौर में जो कहानियां लिखी गयीं, उनके बारे में कहा जा सकता है …

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वो बकवास करते हैं काम नहीं करते… वो रोज कहते हैं देश बदल रहा है ..

डॉ. कविता अरोरा (Dr. Kavita Arora) कवयित्री हैं, महिला अधिकारों के लिए लड़ने वाली समाजसेविका हैं और लोकगायिका हैं। समाजशास्त्र से परास्नातक और पीएचडी डॉ. कविता अरोरा शिक्षा प्राप्ति के समय से ही छात्र राजनीति से जुड़ी रही हैं।

वो बकवास करते हैं काम नहीं करते… वो रोज कहते हैं देश बदल रहा है .. वो बकवास करते हैं काम नहीं करते… और करने भी नहीं देते… भाषण देते हैं चिल्ला-चिल्ला कर चीख़ते हैं… व्यवस्था… व्यवस्था… अब देश में है ही क्या मनोरंजन इससे सस्ता… कहीं भी मजमा जोड़ लो .. करो इतिहास पुराण की दो बातें जनभावनाएं मोड़ लो… …

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