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हस्तक्षेप

Guest writers views devoted to commentary, feature articles, etc.. अतिथि लेखक की टिप्पणी, फीचर लेख आदि. Critical News of Journalism – The Fourth Pillar of Democracy, Opinion, and Media Education. लोकतंत्र का चौथा खंभा पत्रकारिता जगत की आलोचनात्मक खबरें, ओपिनियन, और मीडिया शिक्षा. article, piece, item, story, report, account, write-up, feature, review, notice, editorial, etc. of our columnist. साहित्य का कोना। कहानी, व्यंग्य, कविता व आलोचना Literature Corner. Story, satire, poetry and criticism. today current affairs in Hindi, Current affairs in Hindi, views on news, op ed in hindi, op ed articles, अपनी बात,

मानसून के बादल भी क्या बांझ होने लगे हैं? नवजात शिशुओं के लिए कितनी सुरक्षित है पृथ्वी?

 जलवायु परिवर्तन का जलवा (climate change storm), अमेरिका और कनाडा में भी 49 डिग्री सेल्सियस तापमान और लू से मर रहे लोग। पूर्वी अमेरिका के रेगिस्तान और कनाडा के पठारी पहाड़ी इलाकों में भी इतनी गर्मी अभूतपूर्व है। सात–सात पृथ्वी के संसाधन हड़पने के बाद पूरे अंतरिक्ष को उपनिवेश बनाने वाले महाशक्तिमान के कार्बन उत्सर्जन की यह परमाणु ऊर्जा है। …

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प्रजातांत्रिक प्रक्रियाएं और कश्मीर की गुत्थी

Dr. Ram Puniyani - राम पुनियानी

Hindi Article by Dr Ram Puniyani – Future of Democracy in Kashmir… सन 2019 के पांच अगस्त को राष्ट्रपति ने एक अध्यादेश जारी कर कश्मीर को स्वायत्तता प्रदान करनी वाले संविधान के अनुच्छेद 370 को रद्द कर दिया. यह अनुच्छेद कश्मीर के भारत में विलय का आधार था और कश्मीर को रक्षा, संचार, मुद्रा और विदेशी मामलों के अतिरिक्त अन्य …

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चौर्योन्माद के डीएनए वालों के घोटाले का नया पासवर्ड ; मंदिर

Badal saroj Narendra Modi

राम मंदिर घोटाले की भागवत कथा घोटाले के अयोध्या काण्ड की खबर पुरानी हो गयी है मगर बटुकों की भागवत कथा अभी शुरू ही हुयी है इसलिए दोहराने की आवश्यकता बनी हुयी है। जिसे बिना किसी शक के आजाद भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक, न्यायिक घोटाला और इतिहास का पिंडदान कहा जा सकता है वह; अयोध्या में कथित रूप से …

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महान नायक परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद

 परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की जयंती 1 जुलाई पर विशेष इतिहास में आज का दिन | अब्दुल हमीद जीवनी | Biography of Veer Abdul Hamid Param Vir Chakra Awardee Abdul Hamid: Astonishing Story वीर अब्दुल हमीद का नाम लेते ही आज भी भारतवासियोँ का सीना गर्व से ऊंचा हो जाता है। उनकी वीरता की कहानियां लोगों की ज़ुबान पर …

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हस्तक्षेप के पाठकों के लिए

30 जून, 2021 अगस्त महीने के ग्यारह साल पहले यानी 12 अगस्त 2010 को, हमने भारत के सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक व पर्यावरणीय मुद्दों पर उच्च गुणवत्ता, गहन रिपोर्टिंग और विश्लेषण प्रदान करने के लक्ष्य के साथ हस्तक्षेप डॉट कॉम को लॉन्च किया था। तब से, हम लगातार आपके लिए आधिकारिक, कड़ाई से तथ्य-जांच किए गए कवरेज लाए हैं …

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जानिए कैसे चलता है अमरीकी राष्ट्रपति का काफिला?

VVVIP Cavalcade:  U. S. Style एक दिन तत्कालीन अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन का काफिला न्यूयार्क की एक सड़क से गुजर रहा था। एकाएक काफिला रूक गया। राष्ट्रपति ने अपने सुरक्षाकर्मियों से पूछा ”क्या बात है”? रीगन को बताया गया कि एक दृष्टिहीन व्यक्ति सड़क पार कर रहा है और वह रूकने को तैयार नहीं है। इस पर रीगन ने जानना …

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मान लो रेखाओं को सीता ने पार ही ना किया होता तो !

  जंगलों में कुलांच भरता मृग सोने का है या मरीचिका ? जानना उसे भी था मगर कथा सीता की रोकती है खींच देता है लखन,लकीर हर बार धनुष बाण से संस्कृति कहती दायरे में हो, हो तभी तक सम्मान से हाँ यह सच है रेखाओं के पार का रावण छलेगा फिर खुद को रचने में सच का आखर आखर …

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चमगादड़ों को इलाज की जरूरत नहीं होती, क्या हमें अस्पताल की जरूरत है?

दिनेशपुर में पुलिन कुमार विश्वास अस्पताल की दुर्दशा दिनेशपुर में पुलिन कुमार विश्वास अस्पताल के अहाते के पेड़ों में दुनिया भर के चमगादड़ों का डेरा है। कल प्रेरणा अंशु के दफ्तर गए थे, तो थोड़ा दिनेशपुर हाट की तरफ निकले मैं और उत्कर्ष। अचानक देखा कि एक पेड़ के नीचे बच्चों का जमावड़ा है कैनाल कालोनी परिसर में। जाकर देखा …

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विश्वास, विचार और सच

motivational article

Vishwas, Vichar Aur Sach john kenneth galbraith quotes in Hindi प्रसिद्ध अर्थशास्त्री जेके गालब्रेथ (Renowned economist JK Galbraith) ने एक बार कहा था कि अगर हमारे सामने कुछ ऐसे तथ्य हों जो हमारी स्थापित विचारधारा से अलग हों तो तथ्यों के बावजूद हमारी पहली कोशिश यह होती है कि हम अपने स्थापित विश्वासों को सही सिद्ध करने का प्रमाण ढूंढ़ने …

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जानिए जस्टिस काटजू ने क्यों कहा ‘गोदी’ मीडिया और ‘मुक्त’ मीडिया में बहुत अंतर नहीं है

 जस्टिस मार्कंडेय काटजू का मीडिया पर हिंदी में लेख The pitiable condition of the Indian media: Justice Katju points out there is little difference between the ‘godi’ media and the ‘free’ media’ भारतीय मीडिया अब दो खेमों में बंट गया है  (1) बहुसंख्यक, जो बेशर्म, बिक चुकी और चापलूस ‘गोदी‘ मीडिया है। इस शिविर के लोग भारत की परिस्थितियों की …

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देश और जनता के लिए खतरनाक है झूठा छवि निर्माण

पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था वाली मोदी सरकार के पास नहीं हैं 4 लाख रुपए ! न मुफ्त, न सार्वभौम, न सबसे बड़ा, न सबसे तेज और न मोदीजी का टीका The Modi government with a five trillion dollar economy does not have 4 lakh rupees for the dependents of COVID deceased! इस विडंबना को अनदेखा करना मुश्किल है, हालांकि …

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हमसे ज्यादा ज़िंदा हैं नबारून दा

नबारून दा आज भी अपनी रचनाओं में हमसे ज्यादा ज़िंदा है। समय और समाज के लिए गैर प्रासंगिक ज़िन्दगी कोई ज़िन्दगी नहीं होती। मुक्त बाजार में शहरी क्रयशक्ति हीन अंडर क्लास वर्ग समाज में सबसे निचले तबके की ज़िन्दगी उन्हीं की भाषा, उन्हीं के तेवर में हर्बर्ट, फैंटाडू और कंगाल मलसात जैसे उपन्यासों में जीने वाले रचनाकार की मौत नहीं …

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लोकतंत्र की पुनर्स्थापना : जनता के सामने विकल्प क्या है

Dr. Ram Puniyani’s article in Hindi – Restoration of Democracy: What is the option before the public हिन्दी में डॉ. राम पुनियानी का लेख आज के भारत की तुलना एक दशक पहले के भारत से करने पर हैरानी होती है. लोकसभा (2014) में भाजपा के बहुमत हासिल करने से राजनैतिक, सामाजिक एवं आर्थिक परिदृश्य में प्रतिकूल परिवर्तन हुए हैं. बढ़ती …

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आपातकाल में जेल गए पत्रकार की नजर में आपातकाल के सबक

 आपातकाल के सबक | lessons of emergency जयशंकर गुप्त, वरिष्ठ पत्रकार हैं, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया के सदस्य रहे हैं, देशबन्धु अखबार के कार्यकारी संपादक हैं। वह और उनके पिता आपातकाल के दौरान जेल भी गए। उनका यह लेख मूलतः पिछले वर्ष लिखा गया था। आपातकाल की बरसी पर जयशंकर गुप्त का उक्त लेख का संपादित अंश हस्तक्षेप के पाठकों …

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आपातकाल की आहट : इतिहास खुद को दोहराता नहीं, सिर्फ उसकी प्रतिध्वनि सुनाई देती है

इतिहास खुद को दोहराता नहीं, सिर्फ उसकी प्रतिध्वनि सुनाई देती है। और 44 साल पहले लगाए गए आपातकाल की मौजूदा प्रतिध्वनि वाकई भयावह है। भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलनों से पैदा उथल-पुथल और अपनी सरकार की विश्वसनीयता धूल में मिल जाने से बौखलाई इंदिरा गांधी ने इलाहाबाद उच्च न्यायालय के उन्हें अपदस्थ करने के फैसले के बाद 25 जून, 1975 को देश …

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70 साल का सबसे बड़ा झूठ : 1975 में आरएसएस ने इमरजेंसी के खिलाफ लड़ी थी बड़ी लड़ाई

RSS Half Pants

इमरजेंसी 1975 में आरएसएस ने लड़ी थी बड़ी लड़ाई, इससे बड़ा सफेद झूठ नहीं हो सकता कोई (आरएसएस के मुखिया, देवरस द्वारा इंदिरा गाँधी को आपातकाल के समर्थन में लिखे गए पत्रों के मूल पाठ के साथ) विश्व में झूठ बोलने और इतिहास को तोड़–मोड़ने का प्रशिक्षण देने वाले सब से बड़े गुरुकुल, आरएसएस ने भारत में 1975 में आपातकाल राज …

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रेडक्लिफ कमीशन, शरणार्थी सैलाब और नागरिकता का मसला

रेडक्लिफ कमीशन, शरणार्थी सैलाब और नागरिकता का मसला Radcliffe Line (रैडक्लिफ़ अवार्ड) मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में विभाजन के बाद तीन दिनों तक पाकिस्तान का झंडा फहराया जाता रहा तो खुलना में भारत का। खुलना का हिन्दू बहुल जिला मुर्शिदाबाद और मालदा के बदले पाकिस्तान को दे दिया गया। इसी तरह सिलहट का हिन्दू बहुल जिला पाकिस्तान को। चटगांव आदिवासी …

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तपेदिक ने बढ़ाया आदिवासियों में कोरोना का खतरा

Tuberculosis increased the risk of corona among tribals Tribal health in India भारत में लगभग 12 करोड़ लोग विभिन्न आदिवासी समूहों से हैं। इनमें से अधिकांश को कोई न कोई स्वास्थ्य संबंधी परेशानियां हैं। भारत में मलेरिया के कुल प्रकरणों में लगभग एक तिहाई आदिवासी बहुल इलाकों में से आते हैं। Report of the Expert Committee on Tribal Health वर्ष …

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पंडित नेहरू और शेख अब्दुल्ला के कारण ही कश्मीर बन सका भारत का हिस्सा

Pt. Jawahar Lal Nehru

Kashmir became a part of India only because of Pandit Nehru and Sheikh Abdullah भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ समेत कई व्यक्ति व संगठन जवाहरलाल नेहरू को कश्मीर समस्या के लिए जिम्मेदार मानते हैं। परंतु इसके विपरीत पूरे विश्वास से यह दावा किया जा सकता है कि यदि जवाहरलाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला नहीं होते तो जम्मू-कश्मीर भारत …

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भारतीय इतिहास में मील का पत्थर साबित होगा बीडीएम का हस्ताक्षर अभियान !

एच.एल. दुसाध (लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.)  

Signature campaign of BDM will prove to be a milestone in Indian history! डॉ. जन्मेजय बहुजन डाइवर्सिटी मिशन (Bahujan Diversity Mission –बीडीएम) द्वारा शुरू होने वाला हस्ताक्षर अभियान भारतीय इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगा। क्योंकि इससे पूर्व भारत ही नहीं, संभवतः पूरे विश्व में इतने वृहद मकसद को लेकर शायद ही कोई हस्ताक्षर अभियान चला होगा. टेक्नॉलोजी …

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मोदी सरकार की हाथ की सफाई और महामारी को छूमंतर करने का खेल

narendra modi violin

पुरानी कहावत है कि जो इतिहास से यानी अनुभव से नहीं सीखते हैं, इतिहास को दोहराने के लिए अभिषप्त होते हैं।  नरेंद्र मोदी का सत्ता पर ज्यादा से ज्यादा प्रत्यक्ष नियंत्रण हासिल करने का मोह क्या कोविड-19 की महामारी के मामले में भी, दूसरी लहर के विनाशकारी इतिहास का आगे भी दोहराया जाना ही भारतवासियों की नसीब में नहीं लिख …

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