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हस्तक्षेप

भारत में आपातकाल घोषणा की 45वीं वर्षगांठ : आपातकाल में आरएसएस द्वारा इंदिरा गाँधी की बंदगी, पढ़ें देवरस के माफीनामे

Indira Gandhi

(आपातकाल के दौरान आरएसएस के मुखिया द्वारा इंदिरा गाँधी को लिखे गए माफ़ीनामों की मूल प्रतियों के साथ – (With original copies of apologies written to Indira Gandhi by the head of the RSS during the Emergency)) विश्व में झूठ बोलने और इतिहास को तोड़ने – मोड़ने का प्रशिक्षण देने वाले सब से बड़े गुरुकुल, आरएसएस से स्नातक हुए, राम …

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अभी केन्द्र सरकार पहले ही डूबती अर्थव्यवस्था के नाम पर चंदा बटोर रही है, फिर राज्य सरकारें नई नौकरियों के नाम पर नंगा दौड़ाएंगी

Migrants On The Road

अभी केन्द्र सरकार पहले ही डूबती अर्थव्यवस्था (Sinking economy) के नाम पर चंदा बटोर रही है, वो दिन दूर नहीं जब राज्य सरकारें नई नौकरियों के नाम पर नंगा दौड़ाएंगी जैसे कि हम सब जानते हैं लॉकडाउन का चरण (Lockdown phase) लगभग खत्म हो चला है और लोगों को ज़रूरी कामों के रियायत दी जा चुकी है, लेकिन प्रवासी मज़दूरों …

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सुसभ्य यूरोप और अमेरिका से बेहतर नागरिक हैं अफ्रीका के देश इथोपिया में

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

कुएं के मेंढक के लिए उसका कुआं ही समूचा ब्रह्मांड है। सृष्टि का आदि अंत है। इसीलिए देव-देवी, पुजारी, अमचे-चमचे मालामाल हैं। भक्त बेहाल हैरान परेशान है। अपनी हालत के लिए किस्मत को कोसते हुए फेंकी हुई रोटी के टुकड़े के लड़ते हुए आपस में लहूलुहान हैं। अपने ही जख्म चाटते हुए दुश्मनों के छक्के छुड़ाने का गुमान है। अंधों …

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70 साल में पहली बार, डीजल का दाम पेट्रोल के पार ! मोदी है तो मुमकिन है

Check latest petrol Diesel price

For the first time in 70 years, diesel prices surpass petrol अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में गिरावट के बावजूद भारत में विगत 7 जून से लगातार 19 दिनों तक प्रतिदिन बढ़ोत्तरी कर पेट्रोल और डीजल के दामों में 8.66 व 10.62 रुपए की बढ़ोतरी कर इन दोनों पेट्रोलियम उत्पादों के मूल्य 80 रुपए के रिकॉर्ड स्तर तक …

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लद्दाख में क्या हो रहा है? जस्टिस काटजू का लेख – हमारे नेता समझें चीन घुसपैठ करता रहेगा 

Justice Markandey Katju

What is happening in Ladakh? Justice Katju’s article लद्दाख में होने वाली घटनाओं के बारे में सभी तरह की बातें कही जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने शुरू में कहा कि भारतीय क्षेत्र में कोई घुसपैठ नहीं हुई है, लेकिन बाद में घाटी के सम्बन्ध में निर्विवाद तथ्यों के सामने आने पर उन्होंने अपने बयान को बदल दिया I निसंदेह चीनी …

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क्या भारत सरकार का मतलब प्रा. लि. कम्पनी है ? 20 का तेल 80 में ! 70 साल में पहली बार पेट्रोल से महंगा डीजल

Check latest petrol Diesel price

Does Government of India mean Private Limited Company? Diesel costlier than petrol for the first time in 70 years क्या भारत सरकार का मतलब (Government of India means) प्राईवेट लिमिटेड कम्पनी है ? जिसका मुख्य लक्ष्य केवल अधिक से अधिक मुनाफा कमाना भर है ? प्रश्न महत्वपूर्ण हैं। क्योंकि वैश्विक कोरोना त्रासदी (Global corona tragedy) के बीच भी जिस तरह …

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बड़ा खतरा वायरस नहीं, ….नेतृत्व का अभाव है !

Novel Coronavirus SARS-CoV-2 Colorized scanning electron micrograph of a cell showing morphological signs of apoptosis, infected with SARS-COV-2 virus particles (green), isolated from a patient sample. Image captured at the NIAID Integrated Research Facility (IRF) in Fort Detrick, Maryland.

बड़ा खतरा वायरस नहीं, ….नेतृत्व का अभाव है ! –Tedros, डब्ल्यूएचओ WHO प्रमुख विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ WHO) प्रमुख ने चेतावनी दिया है कि दुनिया में कोरोना की चपेट में 90 लाख लोगों के आने और 4 लाख 70 हजार मौत के बाद भी महामारी की रफ्तार और तेज ही हो रही है। उन्होंने अफसोस जाहिर किया है कि बड़ा खतरा …

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खजूरे का हिंदी साहित्य  

Literature, art, music, poetry, story, drama, satire ... and other genres

लंबे समय से हिंदी साहित्य के अध्यापन (Teaching of Hindi literature) से जुड़े अनिरुद्ध कुमार का यह व्यंग्य (Anirudh Kumar’s satire) बातों ही बातों में साहित्येतिहास और भाषा-विमर्श की धर्म और जाति पर आधारित राजनीति की पोल खोलता है और उस पर कई गंभीर सवाल खड़े करता है – व्यंग्य  -अनिरुद्ध कुमार रे खजूरे … जी हुज़ूर।   एक बात बताओगे? …

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जब विज्ञान धर्म बनने लगे तो हमें दुनिया को सुंदर बनाने के उसके दावों पर संदेह करना ही होगा

Novel Coronavirus SARS-CoV-2 Credit NIAID NIH

धर्म में विज्ञान की तलाश करना उतना बुरा नहीं है, जितना कि विज्ञान को धर्म बनाने की कोशिश करना। विज्ञान की अमूर्त दुनिया और विवेक | Intangible world of science and wisdom कोविड-19 (COVID-19) से संबंधित तथ्यों को लेकर, जिस प्रकार के असमंजस की स्थिति है, उससे हममें से कई किंकर्तव्यविमूढ़ हैं। अनेक लोगों को मीडिया और अपनी सरकारों और …

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किसानों के लिए “आपदा का पहाड़” साबित होगा कोरोना और मोदी सरकार का 20 लाख करोड़ करोड़ का पैकेज

More than 50 bighas of wheat crop burnt to ashes of 36 farmers of village Parsa Hussain of Dumariyaganj area

भारत में किसान और मजदूर के व्यावहारिक संबंध | Practical relations of farmer and laborer in India किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के अध्यक्ष शिवाजी राय का लेख भारत में औद्योगीकरण (Industrialization in India) अभी तक भारतीय समाज में वर्गीकृत (क्लासिफाइड) मजदूर (Classified labor) की रूप रेखा तैयार नहीं कर पाया है। हमेशा से यह देश व्यापक रूप में कृषि प्रधान माना …

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