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हस्तक्षेप

मीडिया की छह साल की कीमियागिरी का नतीजा है युवाओं में नफरत और तीस जनवरी का गोलीकांड…

Shaheen Bagh

पहले तो चार साल तक एक सी ग्रेड एक्टिविस्ट को महात्मा गांधी बना कर पेश किया जाता रहा.. जिसके चलते सारे भ्रष्ट अधिकारी और नेता सड़कों पर जाजम बिछा कर आम जनता, सरकारी कर्मचारियों और दुकानदारों को ईमानदार बनने की कसमें दिलाते हुए मीडिया में जगह पाते रहे.. फिर राष्ट्रवाद ने अंगड़ाई ली और अन्ना हजारे को उनके गांव का …

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अंजना ओम कश्यप की शाहीन बाग की रिपोर्ट : अच्छी बात, पर आगे क्या करेंगीं ?

Anjana Om Kashyap

अंजना ओम कश्यप की शाहीन बाग की रिपोर्ट पर  Anjana Om kashyap’s Shaheen Bagh report रचना में व्यक्त यथार्थ कैसे लेखक के विचारों का अतिक्रमण करके अपने स्वतंत्र  सत्य को प्रेषित करने लगता है, अंजना ओम कश्यप की शाहीन बाग की रिपोर्टिंग (Anjana Om Kashyap’s reporting of Shaheen Bagh) से फिर एक बार यह सच सामने आया। वैसे रचना और …

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शाहीन बाग कर रहा है प्रजातंत्र को मज़बूत, भारत को एक : डॉ. राम पुनियानी का लेख

Shaheen Bagh

Hindi Article-Shaheen Bagh-Uniting the country इसमें कोई संदेह नहीं कि हमारी दुनिया में प्रजातंत्र के कदम आगे, और आगे बढ़ते चले जा रहे हैं. विभिन्न देशों में जहाँ ऐसे कारक और शक्तियां सक्रिय हैं जो प्रजातंत्र को मजबूती दे रहे हैं वहीं कुछ ताकतें उसे कमज़ोर करने की साजिशें भी रच रहीं हैं. परन्तु कुल मिलाकर दुनिया सैद्धांतिक प्रजातंत्र से …

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गांधीजी हिन्दू-राष्ट्रवाद विरोधी थे इस लिए हिन्दुत्ववादियों ने की उनकी हत्या !

Prof. Shamsul Islam on Gandhiji's 72nd Martyrdom Day

गांधीजी का 72वां शहादत दिवस : Gandhiji’s 72nd Martyrdom Day मोहनदास कर्मचंद गाँधी (Mohandas Karmchand Gandhi) जिन्हें राष्ट्रपिता (यह उपाधि नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा दी गयी थी) भी माना जाता है की जनवरी 30, 1948 को हिन्दुत्ववादी आतंकियों द्वारा हत्या जिसे हिन्दुत्ववादी ‘वध’ की संज्ञा देते हैं के कारणों के बारे में आरएसएस-भाजपा लगातार भ्रम फैलाने की कोशिश करते …

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हिंगनघाट का शाहीन बाग : नकाब में इंक़लाब का जुनून

Shaheen Bagh of Hinganghat

Shaheen Bagh of Hinganghat मोदीजी तुमने वोटों के लिए मुस्लिम टोपी तो लगाई, लेकिन बिरयानी खाई पाकिस्तान जाकर। आओ, एक दिन हमारे घर की बिरयानी खाकर देखो, हमें पकिस्तान भेजना भूल जाओगे! योगी-मोदी यहां आकर देख लो, ये मेरा बच्चा बैठा है अपने हाथ में तख्ती लेकर। मेरे शौहर और ससुर वो खड़े हैं। तुम कहते हो कि मुसलमानों ने …

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चर्चा इनकी भी हो

chandrababu naidu

मुझे कुछ समय के लिए आंध्र प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के कामकाज का तरीका देखने का मौका मिला था। वे नियमित रूप से उच्चाधिकारियों की बैठक लेते थे और प्रदेश भर में चल रहे कामकाज की समीक्षा होती थी। कहां सड़क बन रही है, कहां संडास बनाए जा रहे हैं, कहां विकास के अन्य काम हो रहे हैं, …

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एच.एल. दुसाध : खूबियों से लैस एक दलित पत्रकार !

एच.एल. दुसाध (लेखक बहुजन डाइवर्सिटी मिशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं.)  

Hl Dusadh: A Dalit journalist equipped with merits! मूकनायक के प्रकाशन के सौ वर्ष पूरे होने पर विशेष लेख -डॉ. कौलेश्वर प्रियदर्शी मूकनायक की शतवार्षिकी पर आयोजित हो रहे हैं बड़े-बड़े समारोह   31  जनवरी दलित पत्रकारिता के इतिहास (History of Dalit Journalism,) का सबसे स्मरणीय दिवस है. इसी दिन “बहिष्कृत लोगों पर हो रहे और भविष्य में होनेवाले अन्याय के …

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सीएए/एनआरसी/एनपीआर विरोधी आंदोलन : आशा और संभावनाएं, मुसलमान न होते तो मोदी शायद ही भारत के प्रधानमंत्री होते और शाह गृहमंत्री.

Amit Shah Narendtra Modi

Anti-constitutional posture of Government is causing irreparable loss of Indian nation-state and national life. 1. कश्मीर-समस्या, मंदिर-मस्जिद विवाद, असम-समस्या (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) और नागरिकता संशोधन कानून पर सरकार के फैसलों की चार बातें स्पष्ट हैं : (1) फैसले साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण की नीयत से प्रेरित हैं. (2) फैसलों में लोकतांत्रिक संस्थाओं और प्रक्रियाओं का इस्तेमाल भर किया गया है. (3) फैसलों …

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क्या आरएसएस-भाजपा खुले आतंकवाद के गर्त में गिरेंगे !

BJP Logo

Will RSS-BJP fall into the pit of open terrorism! शायद वह दिन बहुत दूर नहीं है जब अन्तर्राष्ट्रीय मंचों से आरएसएस को एक आतंकवादी संगठन घोषित करने की पुरज़ोर माँगे उठने लगेगी। केंद्र का एक मंत्री अनुराग ठाकुर हाथ उछाल-उछाल कर सरे-आम एक चुनावी सभा में सीएए-विरोधी करोड़ों आंदोलनकारियों को गालियाँ देते उन्हें गोलियाँ मारने का आह्वान कर रहा हैं। …

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आज सत्य की गतिविधियों पर पहरे हैं, क्योंकि स्वार्थ के कान, जन्म से बहरे हैं

Mukut Bihari 'Saroj'

इमरजेंसी का पूर्वाभास और मुक्तिबोध बकौल अशोक वाजपेयी Ashok Vajpayee, the foreboding of Emergency and Muktibodh The poem ‘Andhere men’ was written by Muktibodh in 1962–63 देश में चल रहे हालात को देख कर, एक पुरानी घटना याद आ गयी। कई वर्ष पहले राजनन्दगाँव [छत्तीसगढ] में आयोजित ‘त्रिधारा’ संगोष्ठी में व्याख्यान देते हुए प्रसिद्ध कवि आलोचक अशोक वाजपेयी ने कहा …

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