रक्त के मिश्रण से ही अपनेपन की भावना पैदा होगी- डॉ. अंबेडकर

Dr B.R. Ambedkar

डॉ. अम्बेडकर की जयंती के अवसर पर। On the occasion of Dr. Ambedkar’s birth anniversary डॉ. अंबेडकर का जीवन परिचय। Dr. Ambedkar’s life in Hindi डॉ. अंबेडकर का जन्म (14 अप्रैल 1891) से अस्पृश्य थे। अंबेडकर अभावों और अस्पृश्यता के साथ जुड़े कलंक से जूझते हुए ही पले बढ़े। उच्च शिक्षा प्राप्त कर ऊंचे पदों

जाति के विनाश के बाद ही मिलेगी सामाजिक और आर्थिक आज़ादी

newspapers by babasaheb ambedkar

The destruction of the institution of caste is the basic foundation of Dr. Ambedkar’s thinking and philosophy. अप्रैल का महीना (Month of april) डॉ. बी. आर. आंबेडकर के जन्म का महीना है। 14 अप्रैल 1891 के दिन उनका जन्म हुआ था। इस अवसर पर उनकी राजनीति की बुनियादी समझ (Basic understanding of Dr। B। R।

बाबा साहब की अनदेखी का प्रतिफल : घुटन भरा वर्तमान और आशंका भरा कल

ambedkar and communism

Ignoring Baba Saheb: A stuffy present and a feared tomorrow मौजूदा समय विडम्बना का समय है। बिना किसी अतिशयोक्ति के कहा जाए तो; देश और समाज एक ऐसे वर्तमान से गुजर रहा है जिसमे प्राचीन और ताजे इतिहास में, अंग्रेजो की गुलामी से आजादी के लिए लड़ते-लड़ते जो भी सकारात्मक उपलब्धि हासिल की गयी थी

कोरोना संकट : भारत, केरल और छत्तीसगढ़ — दो तस्वीरें

Coronavirus CDC

कल लॉक डाऊन के पहले चरण का आखिरी दिन (Last day of the first phase of lockdown) है और इसके बाद दूसरा चरण शुरू हो जाएगा। 21 दिनों की तालाबंदी (21 days lockDOWN) में संघी गिरोह ने खूब थाली-घंटे बजवाये, खूब मोमबत्ती-टॉर्च जलवाए, लेकिन कोरोना का हमला थमने का बजाए बढ़ता ही गया है। कल

आज़मगढ़ के चर्चित सामाजिक कार्यकर्ता तैयब आज़मी की मृत्यु पर प्रियंका गांधी ने जताया शोक

Priyanka Gandhi Vadra

Priyanka Gandhi mourns the death of prominent social activist Tayab Azmi of Azamgarh पत्नी निकहत आरा को लिखा शोक पत्र पत्र में कहा वो मुझे हमेशा याद रहेंगे लखनऊ, 13 अप्रैल 2020। आज़मगढ़ के चर्चित सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता तैयब आज़मी की मृत्यु पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने शोक व्यक्त किया है। रेलवे संघर्ष समिति के

विकराल होती प्रवासी मज़दूरों की समस्या, सरकार आंकड़ा तक नहीं जुटा सकी है- रिहाई मंच

Rihai Manch

बाराबंकी में क्वारेन्टाइन में बुजुर्ग की मौत के लिए सरकारी अमला जिम्मेदार बागपत में कोरोना मरीज के नाम पर मुस्लिम व्यक्तियों के पोस्टर लगाने पर रिहाई मंच ने उठाया सवाल Government staff responsible for death of elderly in Quarantine in Barabanki लखनऊ/आज़मगढ़ 13 अप्रैल 2020। रिहाई मंच नेता शकील कुरैशी ने बाराबंकी में क्वारेन्टाइन में

अगर भारत बचा तो यह किसी लॉक डाउन या किसी 36-72 इंच के सीने की वजह से नहीं, बल्कि गांव और किसान की वजह से बचेगा

पलाश विश्वास जन्म 18 मई 1958 एम ए अंग्रेजी साहित्य, डीएसबी कालेज नैनीताल, कुमाऊं विश्वविद्यालय दैनिक आवाज, प्रभात खबर, अमर उजाला, जागरण के बाद जनसत्ता में 1991 से 2016 तक सम्पादकीय में सेवारत रहने के उपरांत रिटायर होकर उत्तराखण्ड के उधमसिंह नगर में अपने गांव में बस गए और फिलहाल मासिक साहित्यिक पत्रिका प्रेरणा अंशु के कार्यकारी संपादक। उपन्यास अमेरिका से सावधान कहानी संग्रह- अंडे सेंते लोग, ईश्वर की गलती। सम्पादन- अनसुनी आवाज - मास्टर प्रताप सिंह चाहे तो परिचय में यह भी जोड़ सकते हैं- फीचर फिल्मों वसीयत और इमेजिनरी लाइन के लिए संवाद लेखन मणिपुर डायरी और लालगढ़ डायरी हिन्दी के अलावा अंग्रेजी औऱ बंगला में भी नियमित लेखन अंग्रेजी में विश्वभर के अखबारों में लेख प्रकाशित। 2003 से तीनों भाषाओं में ब्लॉग

The lock down will last longer. This is the only way to avoid an epidemic अब तक जितनी शानदार रही है जिंदगी, कोरोना के बाद की दुनिया में शायद उतनी खूबसूरत न भी हो ज़िंदगी। दुनिया सिरे से बदल रही है। इस नई दुनिया में हममें से कितने ज़िंदा बचेंगे, सही सलामत होंगे, कहना मुश्किल

यह जो चित्त का जगत है, विचारों और भावों के मूर्तन का जगत, एक बेहद जटिल जगत है

Jacques Lacan जॉक लकान, Jacques Marie Émile Lacan was a French psychoanalyst and psychiatrist who has been called "the most controversial psycho-analyst since Freud".

अथातो चित्त जिज्ञासा – 8 (जॉक लकान के मनोविश्लेषण के सिद्धांतों पर केंद्रित एक विमर्श की प्रस्तावना Preface to a discussion centered on Jacques Lacan ‘s theories of psychoanalysis.) दर्शनशास्त्र और लकान भारतीय दर्शन में तंत्र की भूमिका हमेशा दार्शनिक विमर्श (Philosophical discussion) के क्षितिज को उस बिंदु की सीमा से आगे ले जाने की रही

डा. आनंद तेलतुम्बडे की गिरफ्तारी दुखद व शर्मनाक, महाराष्ट्र सरकार उन्हें निजी मुचलका पर रिहा करे – दारापुरी

Anand Teltumbde

Dr. Anand Teltumbde’s arrest sad and shameful, Maharashtra government should release him on private bond – Darapuri लखनऊ 13 अप्रैल 2020: डा. अम्बेडकर के परिवार से जुड़े प्रख्यात बुद्धिजीवी डा. आनंद तेलतुम्बडे की कल बाबा साहब के जन्मदिवस के अवसर पर गिरफ्तारी दुखद व शर्मनाक है। इस गिरफ्तारी के खिलाफ लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने