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Law and Justice

सीबीआई भी आपका फोन टेप नहीं कर सकती, जानिए कैसे

The Union Home Ministry had given permission to the Central Bureau of Investigation (CBI) to tape the phone. The Bombay High Court quashed three orders.

क्या आप जानते हैं कि केंद्रीय जांच एजेंसी सीबीआई भी कानूनन आपका फोन टेप नहीं कर सकती है। जी हां, फोन टैपिंग (Phone tapping) सिर्फ सार्वजनिक आपातकाल (Public emergency) या सार्वजनिक सुरक्षा (Public safety) के लिए ही की जा सकती है.

पिछले वर्ष अक्तूबर माह में बॉम्‍बे हाई कोर्ट ने उच्चतम न्यायलय की नजीर देते हुए एक कारोबारी को फोन टैपिंग से राहत दी थी।

क्या था फोन टैपिंग मामला

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (Central Bureau of Investigation-CBI) को फोन टेप करने की अनुमति दी थी। बॉम्‍बे हाई कोर्ट ने मंत्रालय के तीन आदेश रद्द कर दिए। अदालत ने कहा कि फोन टैपिंग से निजता के अधिकार का हनन (Violation of right to privacy) होता है।

उच्च न्यायलय ने अवैध रूप से इंटरसेप्‍ट की गईं कॉल्‍स को नष्‍ट करने के आदेश दिए।

जस्टिस रंजीत मोरे और एनजे जमादार की बेंच ने कहा कि अवैध इंटरसेप्‍शन (Invalid interception) से “मनमानी बढ़ेगी और नागरिकों के मूल अधिकारों तथा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा बनाए गए कानूनों का उल्‍लंघन होगा।”

10 साल पहले दिए गए थे फोन टेप करने के आदेश – Orders to tap phones were given 10 years ago

मुंबई के कारोबारी विनीत कुमार की याचिका पर उच्च न्यायालय ने यह आदेश दिया। गृह मंत्रालय ने अक्‍टूबर 2009, दिसंबर और फरवरी 2010 में कुमार का फोन टेप करने के तीन आदेश जारी किए थे। सीबीआई ने उनके खिलाफ एक बैंक अधिकारी को 10 लाख रुपये घूस देने का केस दर्ज किया था।

Intercepted recordings cannot be presented in trial court.

सीबीआई के आरोपों पर कोई टिप्‍पणी ना करते हुए उच्च न्यायालय ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट में इंटरसेप्‍टेड रिकॉर्डिंग्‍स नहीं पेश की जा सकतीं

याचिकाकर्ता की तरफ से पीपुल्‍स युनियन फॉर सिविल लिबर्टीज (PUCL) बनाम भारत सरकार मुकदमे में सुप्रीम कोर्ट द्वारा 1997 में सुनाए गए फैसले  का हवाला दिया गया.

The Supreme Court’s 1997 judgment in the People’s Union for Civil Liberties (PUCL) vs. Government of India case

पीयूसीएल केस में सुप्रीम कोर्ट ने व्‍यवस्‍था दी थी कि “किसी व्‍यक्ति के घर और कार्यालय का टेलीफोन निजता का अधिकार के तहत आएगा। ऐसे में बिना कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना टेलीफोन टैपिंग भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 21 का उल्‍लंघन होगी।”

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