क्या आपका भी चश्मे का नंबर जल्दी-जल्दी बदल रहा है? तो सावधान हो सकती है ये बीमारी

क्या आपका भी चश्मे का नंबर जल्दी-जल्दी बदल रहा है? तो सावधान हो सकती है ये बीमारी

जल्दी-जल्दी चश्मे का नंबर बदलना ग्लूकोमा का लक्षण

ग्लूकोमा या काला मोतिया में क्या होता है?

नई दिल्ली, 24 अगस्त 2022. ग्लूकोमा को काला मोतिया भी कहा जाता है। इस रोग में आंखों की ऑप्टिक नर्व प्रभावित होती है और धीरे-धीरे दिखना बंद हो जाता है। ऐसा आंखों के अंदर बढ़ते दबाव के कारण होता है।

करीब 12 लाख लोग भारत में ग्लूकोमा से पीड़ित…

सेंटर फॉर साइट के निदेशक डॉ महिपाल एस सचदेव का एक विज्ञप्ति में कहना है कि आंख में तरल पदार्थ भरा रहता है, जो आंखों के अंदर बनता रहता है और समय-समय पर बाहर निकलता रहता है। इस तरह पदार्थ के बाहर न निकल पाने पर आंखों में दबाव बढ़ जाता है और ग्लूकोमा की स्थिति बनती है।

ऑप्टिक नर्व पर दबाव का असर

वह बताते हैं इस दबाव का असर आंखों की ऑप्टिक नर्व पर पड़ता है। आंखें जो भी देखती हैं इन्हीं ऑप्टिक नर्व की मदद से दिमाग को संदेश भेजती हैं और व्यक्ति देख पाता है। आंखों में दबाव बढ़ने पर ये ऑप्टिक नर्व प्रभावित होने लगती हैं। ऐसे में ये डैमेज होने लगती हैं और धीरे-धीरे दिखना बंद हो जाता है। इसे शुरुआती अवस्था में समझ लिया जाए तो इलाज आसानी से और कम समय में हो जाता है।

ग्लूकोमा कितने प्रकार का होता है?

डॉ सचदेव बताते हैं कि ग्लूकोमा दो प्रकार का होता है,ओपेन एंगल ग्लूकोमा, क्लोज एंगल ग्लूकोमा।

इसके लक्षण निम्न होते है कि जैसे कि नजर कमजोर होने के कारण चश्मे का नंबर बार-बार बदलना। दिन भर काम करने के बाद शाम को आंख या सिर में दर्द होना। बल्ब के चारों तरफ इंद्रधनुषी रंग दिखाई देना। अक्सर अंधेरे कमरे में आने पर चीजों पर फोकस करने में परेशानी होना। साइड विजन को नुकसान होना आदि।

आनुवांशिक बीमारी है ग्लूकोमा

ऐसा फैमिली हिस्ट्री के कारण भी हो सकता है जैसे अगर परिवार में किसी को ग्लूकोमा रहा है तो बच्चे को ग्लूकोमा होने की ज्यादा आशंका होती है। यह एक आनुवांशिक बीमारी है। 40 साल की उम्र के बाद ग्लूकोमा होने की आशंका ज्यादा होती है। इस उम्र में आंखों का नियमित चेकअप कराते रहें।

ग्लूकोमा होने की आशंका किसे अधिक होती है?

अस्थमा या आर्थराइटिस के रोगी जो लंबे समय से स्टीरॉयड ले रहे हैं, उनमें भी ग्लूकोमा होने की आशंका बढ़ जाती है। कभी आंख में जख्म हुआ हो या कोई सर्जरी हुई हो तो भी ग्लूकोमा होने की आशंका बढ़ती है। जिन्हें मायोपिया, डायबिटीज है या रक्तचाप घटता-बढ़ता रहता है, उनमें दूसरे लोगों के मुकाबले ग्लूकोमा से होने वाला नुकसान ज्यादा हो सकता है। ग्लूकोमा बच्चों में भी हो सकता है।

ग्लूकोमा का इलाज

डॉ महिपाल एस सचदेव के अनुसार ग्लूकोमा की स्थिति में सर्जरी की जाती है। इसमें आंखों में चीरा लगाकर ट्यूब की मदद से आंखों का पानी निकाला जाता है। इसके अलावा भी नई तकनीक हैं, जिनसे इलाज किया जाता है। जिनका इस्तेमाल ग्लूकोमा की स्थिति या स्टेज के मुताबिक किया जाता है।

ग्लूकोमा से बचने के लिए क्या करें?

ग्लूकोमा से बचने के लिए खानपान में बदलाव की सलाह दी जाती है। अगर इस रोग से बचना चाहते हैं या इसके रोगी हैं व ग्लूकोमा का प्रभाव कम करना चाहते हैं, तो अपने भोजन की खुराक में कुछ बदलाव करने चाहिए। जैसे खुराक में विटामिन-बी कॉम्प्लेक्स, सी और ई लेना चाहिए। कॉफी लेने से बचें क्योंकि यह ब्लड प्रेशर को बढ़ाती है। गाजर और हरी पत्तेदार सब्जियां ग्लूकोमा के प्रभाव को कम करती हैं, ऐसे में इन्हें जरूर खानपान का हिस्सा बनाएं। ग्रीन टी लें इसमें मौजूद पोषक तत्त्व आंखों को फायदा पहुंचाते हैं। एक्सरसाइज करें, इससे स्ट्रेस में कमी आती है, जिससे आंखों पर दबाव कम पड़ता है। मेडिटेशन भी एक्सरसाइज का बेहतर विकल्प है खासकर आंखों के लिए।

Changing the number of glasses too often is a symptom of glaucoma

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